Jhunjhunu Club

Jhunjhunu Club Jhunjhunu Club is the organization to explore the people of Jhunjhunu District. Jhunjhunu district needs much to be done for its development.

There should be a Defense Research & Development Organisation (DRDO) lab, Agriculture and Livestock Research Institute, Medical and Engineering College, Entrepreneurship and Skill Development Institute, Military School, Defense University, Small and Middle scale Industries, Agro-food processing Industries, Mines and Mineral based Industries, Inclusion of Jhunjhunu in NCR, Network of Roads to each Village, Promotion of science and technology in agriculture, Drinking water for All (free from fluoride, germs etc.), promotion of floriculture, horticulture and forestry, Improved healthcare system and e-healthcare, Enhanced e-governance and people grievance system, welfare and rehabilitation of retired and ex-service persons, more facilities to military persons and for their families, and much is needed to improve in education, administration, child-women empowerment, and for youth employment.

हमने फिदेल कास्त्रो को नहीं देखा लेकिन ह्यूगो शावेज़ को देखा है। आधुनिक वेनेजुएला के संस्थापक शावेज़ 2005 में भारत आये थ...
06/01/2026

हमने फिदेल कास्त्रो को नहीं देखा लेकिन ह्यूगो शावेज़ को देखा है। आधुनिक वेनेजुएला के संस्थापक शावेज़ 2005 में भारत आये थे।

जेएनयू में शानदार भाषण हुआ था उनका। तब जेएनयू के वीसी डॉ कर्ण सिंह थे। एक साल पहले हुए 2004 के चुनाव में लेफ्ट ने इतिहास का सबसे शानदार प्रदर्शन किया था। भारतीय संसद में तब लेफ्ट के 61 सांसद थे।

मुदरो की जगह मैं ह्यूगो शावेज़ की बात क्यों कर रहा हूं? क्योंकि वेनेजुएला के बरक्स अमरीकी साम्राज्यवाद के बारे में बात करना है तो शावेज़ को ही प्रस्थान बिंदु बनाना होगा। मुदरो उसके योग्य नहीं।

शावेज़ ने अमरीकी मसूंबो पर जितना तगड़ा प्रहार किया वह कोई और नहीं कर सका। वो संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में नोम चोमस्की की किताब लेकर जाते थे।

यूएन के मंच से अमरीका के खिलाफ अब तक का सबसे विस्फोटक भाषण शावेज़ ने ही दिया। उन्होंने कहा था - कल यहां एक शैतान [बुश] आया था। अभी भी बारूद की गंध आ रही है. यह 2006 की बात है।

तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बुश का भाषण 19 सितंबर को था। शावेज का एक दिन बाद 20 सितंबर को।

अगर दुनिया में शोषक का चरित्र और शोषण के हथियार एक जैसे हैं तो मुक्ति की आकांक्षा भी एक जैसी होनी चाहिये। लेकिन नहीं है। मेरी आकांक्षा चीन से मेल नहीं खाती है- यह मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं।

यही वजह है कि मैंने हमेशा शावेज और मुदरो के बीच क्या फर्क है – इस बात को समझा है। हमारा लेफ्ट भी अगर समझता तो कम से कम 61 सांसद आज भी भारत की संसद में होते।

नोट- माओवाद एक अलग श्रेणी है। यद्यपि वो भी विस्तृत लेफ्ट का एक हिस्सा हैं लेकिन यहां पर उन्हें अलग समझिए।

06/01/2026

अमेरिका में लोकतंत्र का हाल

अमेरिका में 935 खरबपतियों की संपत्ति 8.1 ट्रिलियन डॉलर है। अमेरिका की आबादी के निचले 50% की संपत्ति 4.2 ट्रिलियन डॉलर है।

ये गोरा कितना हद दर्जे का है...
06/01/2026

ये गोरा कितना हद दर्जे का है...

06/01/2026

सुरेश कलमाड़ी को राजनीतिक के तौर पर याद किया जाए या एक खेल प्रेमी के तौर पर अथवा भारतीय वायु सेना के कुशल पायलट के तौर पर! यह भ्रम सदैव बना रहेगा। वे 3 बार राज्यसभा में रहे और दो बार लोकसभा में। पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रेल राज्य मंत्री रहे और राज्य मंत्री होते हुए रेल बजट भी पेश किया था। वह भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष रहे और इसी नाते उन पर कई तरह के आरोप भी लगे। हाकी स्टार परगट सिंह ने तो उन्हें खेल माफिया करार दिया था।

06/01/2026
05/01/2026

ट्रम्प की वेनेजुयेला गुंडई के खिलाफ
शिकागो में सड़कों पर उतरी अमरीकी जनता।

ट्रम्प ने फिर ग्रीनलैंड लेने की बात कही है और डेनमार्क को दो महीने का समय दिया है।
05/01/2026

ट्रम्प ने फिर ग्रीनलैंड लेने की बात कही है और डेनमार्क को दो महीने का समय दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने फिर ज़ोर देकर कहा है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड लेना ही होगा।

उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में भी कहा था कि वे ग्रीनलैंड ख़रीदने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिका 1867 से ही डेनमार्क से ग्रीनलैंड ख़रीदने के बारे में सोचता रहा है और बीच-बीच में प्रस्ताव भी दिए गए हैं। साल 1951 के समझौते के तहत वहाँ बहुत हद तक अमेरिकी नियंत्रण है। अमेरिकी अख़बार भी लिखते रहे हैं कि स्वतंत्रता के लिए प्रयास कर रहे ग्रीनलैंड को अमेरिका को ख़रीदना चाहिए ताकि वैश्विक ख़तरों का सामना करने में मदद मिले।

इस कार्यकाल में जब ट्रम्प ने ग्रीनलैंड लेने की बात की थी, तब डेनमार्क राजशाही के प्रधानमंत्री ने कहा था कि वे ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़ाने को स्वीकृति दे सकते हैं। ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त द्वीप है, जो स्वतंत्र होने का प्रयास कर रहा है।

इस साल मार्च में हुए चुनाव में ग्रीनलैंड में ट्रम्प-विरोधी सेंटर-लेफ़्ट सत्ता से बाहर हो गया और सेंटर-राइट की बड़ी जीत हुई है। विजयी डेमोक्रेटिक पार्टी का वोट शेयर पाँच गुना बढ़ा है। हालांकि वह भी ग्रीनलैंड को अमेरिका को देने की पक्षधर नहीं है।

ग्रीनलैंड जहाँ है, वह अमेरिका और यूरोप के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

आर्कटिक में मानवता के भविष्य का ख़ज़ाना है। उस इलाक़े पर रूस हावी है, कनाडा है और कुछ अमेरिका एवं यूरोप का है। ग्रीनलैंड एक तरह से अमेरिका के पास ही है। अगर अमेरिका को लंबे समय तक महाशक्ति बने रहना है, तो उसे नये इलाक़े और नये संसाधन चाहिए। यही पूँजीवाद है। उसे नित्य नये शिकार चाहिए पेट भरने के लिए। इस खेल में अमेरिका के साथ कई यूरोपीय और एशियाई देश तथा उनके लोग भी शामिल होंगे।

05/01/2026

अब लल्लनटॉप पर यह आवाज़ सुनने को नहीं मिलेगी-

सौरभ द्विवेदी नाम है हमारा और आप देखना शुरू कर चुके हैं लल्लनटॉप का विशेष पॉलिटिकल शो नेतानगरी।

भारत सरकार ने नागरिकों को ईरान जाने के बारे सलाह जारी की है।क्या इसका मतलब है कि ईरान में कुछ होने वाला है!
05/01/2026

भारत सरकार ने नागरिकों को ईरान जाने के बारे सलाह जारी की है।

क्या इसका मतलब है कि ईरान में कुछ होने वाला है!

05/01/2026

बलात्कार और हत्या करने के जुर्म में अजीवन कारावास की सजा पाए राम रहीम को चौदहवीं बार बीजेपी की बेटी बचाओ सरकार ने चालिस दिन का परलो देकर आज़ाद किया।

गुजरात हाईकोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास के सजायाफ्ता आसाराम की जमानत छः महीने के लिए और बढ़ाई।

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल तक शुरू न हो पाने के बावजूद जेएनयू के शोध क्षात्र उमर खालिद के पांच साल से ज्यादा निरुद्ध रहने के बावजूद जमानत याचिका ख़ारिज कर दी।

नाम: सोनम वांगचुक। यह कोई विदेशी नहीं, भारतीय ही हैं। शिक्षाविद हैं, वैज्ञानिक हैं, समाजसेवी , संगठनकर्ता हैं। चेतना से ...
05/01/2026

नाम: सोनम वांगचुक। यह कोई विदेशी नहीं, भारतीय ही हैं। शिक्षाविद हैं, वैज्ञानिक हैं, समाजसेवी , संगठनकर्ता हैं। चेतना से पूर्ण व्यक्ति हैं। कोई आपराधिक पृष्ठभूमि भी नहीं है। लद्दाखी हैं।

मामला: राष्टीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत 100 दिनों से जेल में बंद।

अपराध: लद्दाख को 6ठी अनुसूची में शामिल करने के बीजेपी के दस्तावेजी वादे को पूरा करने की मांग।

वर्तमान स्थिति: 100 दिन हो गए हैं। अभी तक कोई सुनवाई नहीं। सोनम वांगचुक ने सरकार बहादुर को नाराज कर दिया है। कोर्ट भी बगैर सुनवाई के तारीखें आगे बढ़ा रहा है। जनता के हिस्से में धैर्य है, इंतज़ार है।

कारण: पहाड़ों के गर्भ में धन छुपा है। पहाड़ी क्षेत्रों में काफी माल है। पहाड़ी भूमि में कीमती धातु अयस्क का खजाना है। पहाड़ों का खनन-दोहन करना है। उदाहरण के लिए अभी अरावली पर्वतमाला का मामला ताज़ा है। जंगल और जमीन काबू में है, पहाड़ भी आ जाएं तो पौ-बारह।

निष्कर्ष: सोनम वांगचुक का लद्दाख के लिए छठी अनुसूची की मांग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। चुनाव जीतने के लिए लिखित-प्रकाशित वादा करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं , लेकिन कोई जिम्मेदार नागरिक उस वादे को पूरा करने की मांग कर दे तो वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। सरकार यह भी कहती है कि देश में संविधान का राज है। संवैधानिक लोकतंत्र के चिथड़े बिखरे पड़े हैं। इन्हें चुन लीजिए।

संदेश: संदेश स्पष्ट है। आप कुछ भी नहीं। हम जो करे वही सही। निरंकुशता का नया नाम संवैधानिक लोकतंत्र है। सरकार ही राष्ट्र है और उसकी नापसंद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। बिना किसी घोषित कारण के अघोषित काल तक जेल में सड़ा दिए जाएंगे।

जबाब : एक ही उपाय है। पुनः मूषकों भवः। जनतंत्र में जनता की ताकत सर्वोपरि है। जनता अपनी अविभाजित ताकत एकमत से दिखाए। सत्ता की सारी सेटिंग, भ्रस्टाचार, उन्माद, राजशाही , सुपीरियर काम्प्लेक्स एक झटके में उड़ जाएंगे।

जय हिंद, जय हिंद की जनता।

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