10/01/2026
कमर दर्द, स्लिप डिस्क और सायटिका में
कटि बस्ति एक प्रभावी प्राकृतिक इलाज माना जाता है।
आज हम आपको
कटि बस्ति लगाने का सही और सुरक्षित तरीका बता रहे हैं।
सबसे पहले
उड़द के आटे से एक गोल घेरा बनाया जाता है
और उसे कमर की रीढ़ की हड्डी के ऊपर
अच्छी तरह से फिट किया जाता है।
इसके बाद
उस घेरे को चारों तरफ से
ठीक से सील किया जाता है,
ताकि तेल बाहर लीक न हो।
फिर
औषधीय तेल लिया जाता है।
अब उस तेल को
हल्का गुनगुना करके
उसी घेरे के अंदर डाला जाता है।
यह तेल
करीब 25 से 30 मिनट तक
कमर पर रखा जाता है।
इस दौरान
तेल को 3 से 4 बार
निकालकर फिर से गुनगुना किया जाता है
और वही तेल
दोबारा उसी जगह डाला जाता है।
एक बार लिया गया तेल
7 दिन तक उपयोग में लिया जा सकता है
और रोज वही तेल
कटि बस्ति में इस्तेमाल किया जाता है।
कटि बस्ति प्रक्रिया
कम से कम 7 दिन करना जरूरी है,
तभी आराम महसूस होना
शुरू होता है।
आवश्यकता होने पर
इसे 7 से 14 दिन तक भी
किया जा सकता है।
ध्यान रखें —
तेल ज्यादा गर्म न हो,
ताकि त्वचा को
किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
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✅ Indications (कब उपयोगी है):
✔ पुराना कमर दर्द
✔ स्लिप डिस्क (L4–L5, L5–S1)
✔ सायटिका / नसों का दर्द
✔ कमर की जकड़न व अकड़न
✔ वात दोष से होने वाले कमर के रोग
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❌ Contraindications (कब नहीं करनी चाहिए):
✖ बुखार या संक्रमण की स्थिति में
✖ कमर पर खुला घाव या स्किन इंफेक्शन
✖ बहुत ज्यादा सूजन या तीव्र दर्द
✖ हाल की सर्जरी के बाद
✖ गर्भावस्था में (डॉक्टर की सलाह बिना नहीं)
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⚠️ Medical Disclaimer:
यह जानकारी केवल शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है।
यह किसी भी प्रकार का चिकित्सीय परामर्श नहीं है।
कटि बस्ति हमेशा प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में ही करानी चाहिए।
बिना सलाह घर पर करने का प्रयास न करें।
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📍 Shri Krishna Osteopathy & Panchkarm Center
📌 Opposite Bricks Bakery,
30 Meter Inside Bhawani Glass,
Mahamandir, Jodhpur
📞 Appointment: 9468741531