पंचतत्व आरोग्यम

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यह चिकित्सा एक प्राकृतिक पद्धति है जो शरीर के पाँच मौलिक तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—के संतुलन को पुनर्स्थापित कर रोगों का उपचार करती है।
शरीर की विकृत ऊर्जा को संतुलित किया जाता है।
बिना सर्जरी या दवा के,शरीर को उसकी प्राकृतिक स्थिति में लाना।

🌹शरद पूर्णिमा🌹 में आज बीज परीक्षण का प्राचीन ज्ञान आजमाएं इस वर्ष अधिक उत्पादन किस बीज में होगा यह परीक्षण आज रात्रि में...
06/10/2025

🌹शरद पूर्णिमा🌹
में आज बीज परीक्षण का प्राचीन ज्ञान आजमाएं
इस वर्ष अधिक उत्पादन किस बीज में होगा यह परीक्षण आज रात्रि में कर सकते है
पढ़े पूरा लेख....

चंद्रमा वनस्पतियों का देवता है,

वनस्पति अर्थात पेड़ पौधे लताएं,अनाज औषधी आदि यह सब कब उगेंगे,कैसे उगेंगे, इनमें कब पतझड़ आएगा, कब फूल आएगा, कब फल आएगा,यह सब चंद्रमा ही तय करता है।

सरसों के बीज को जमीन में डालकर कितना भी सिंचाई करो उगता तो वह हस्त नक्षत्र में ही है।
ऐसे ही सब प्रकार की फसलों के बीजों को उगाने का नक्षत्र चंद्रमा की किरणों के साथ ही तय होता है।

शरद पूर्णिमा में चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र के तारामंडल के सामने होता है, अश्विनी नक्षत्र को सबसे अधिक कांतिमान अर्थात सौंदर्य प्रदान करने वाला नक्षत्र माना गया है, भारत का प्राचीन ज्ञान यह भी कहता है कि शरद पूर्णिमा में चंद्रमा की किरणें 16 कलाओं से युक्त रहते है,किरणों में स्वर्ण की ऊर्जा रहती है,

चंद्रमा की किरणों में वे शक्तियां हैं जिनसे जीवन उत्पन्न होता है।
खेती करते समय हमने यह पाया है की पूर्णिमा में मिट्टी में पॉजिटिव जीव की अर्थात फसल को बढ़ाने वाले जीवो की ज्यादा उत्पत्ति होती है और अमावस्या के समय में फसल को नष्ट करने वाले जीवों की अर्थात फंगस वायरस और कीटों की उत्पत्ति या प्रजनन ज्यादा होता है।

पूर्णिमा के समय जब चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण धरती के ऊपर बढ़ जाता है तो समुद्र का पानी ऊपर उठने लगता है, पेड़ पौधों का जीवन रस पत्तों के तरफ आ जाता है, इसीलिए औषधि के लिए पत्तों को बीजों को फलों को तोड़ने का कार्य शरद पूर्णिमा के बाद से ही प्रारंभ किया जाता है।

इस समय फसलों में पके हुए धान्य में जीवन रस आने से धान्य का स्वाद बढ़ जाता है। इसलिए इस समय धान्य फसलों की कटाई की जाती है।

चंद्रमा खुद प्रकाशित नहीं होता यह सूर्य की किरणों को रिफ्लेक्ट करके धरती की ओर भेजता है,
दर्पण से सूर्य की रिफ्लेक्ट करने वाली रोशनी आंखों को चुभती है,ऐसा आपने अपने जीवन में कभी न कभी अनुभव में लिया होगा या नहीं लिया हो तो करके देख लेना, दर्पण से रिफ्लेक्ट हुए रोशनियों से आंखें चुंधिया जाती हैं
इसमें दोष सूर्य का नहीं है दोष दर्पण का है जिसने हमारी ओर सूर्य की तीक्ष्ण किरणों को भेजा,
पर चंद्रमा ऐसा नहीं करता चंद्रमा सूर्य की तीक्ष्ण किरणों को सोख लेता है और सौम्या सफेद किरणों को धरती की ओर भेजता है इसलिए चंद्रमा हमें सफेद दिखाई देता है।
अब चंद्रमा केवल सूर्य की ही सफेद किरणों को ही हमारी ओर नहीं भेजता अपितु चंद्रमा के पीछे जो अलग-अलग नक्षत्र है अर्थात तारामंडल का समूह है उनकी किरणों को भी हमारी ओर भेजता है,
शरद पूर्णिमा में चंद्रमा एक विशेष तारामंडल अश्विनी नक्षत्र के सामने होता है।
यह तारामंडल सौंदर्य प्रदान करने वाला स्वर्ण की आभा प्रदान करने वाला नक्षत्र होता है।

इसीलिए इस दिन का अर्थात शरद पूर्णिमा का बड़ा महत्व रहता है,शुद्ध भारतीय देशी गाय के दूध में,देशी दुबराज चावल में शुद्ध देशी मिश्री डालकर इसे चंद्रमा के सामने रखकर फिर खाने का विधान है। इससे पेट के गट्स बैक्टीरिया अर्थात अच्छे वाले जीवाणु बढ़ते है।

शरद पूर्णिमा के किरणों में इस औषधीय महत्व के कारण ही इस पूर्णिमा के बाद ही धान्य वाली फसलों की कटाई गहाई की जाती है।
इसके पश्चात जमीन की जुताई भी की जाती है, कृषि परासर ग्रंथ के अनुसार इस समय में की गई जुताई के बाद की गई बुआई से फसलों से स्वर्ण निकलता है अर्थात इस समय की गई जुताई से अगली फसल स्वर्ण आभा वाली होगी अधिक उपज वाली होगी।

शरद पूर्णिमा में चंद्रमा की इन्हीं जीवनी शक्ति की ऊर्जाओ का उपयोग करने के लिए हमारे पूर्वज आज शरद पूर्णिमा की रात्रि में अपने बीजों को तौलकर चांद की रोशनी में रखते थे दूसरे दिन इन बीजों का पुनः वजन करते थे जिन बीजों का वजन बढ़ जाता था इसकी बुवाई करते थे और जिन बीजों का वजन घट जाता था अगले एक वर्ष उनकी बुवाई नहीं करते थे।

आज की रात आप 100 - 100 ग्राम बीज चांद की रोशनी में छत पर रखे या घर के आंगन में सुरक्षित रखें और दूसरे दिन सुबह 9:00 तक सूर्य की रोशनी दिखाकर फिर इन बीजों को पुनः तौल लें, जिन प्रकार के बीजों का वजन घट जाए उस बीज को अगले 1 वर्ष तक हमें खेती में बुवाई नहीं करना है ऐसे बीजों से इस वर्ष अच्छी फसल नहीं देंगे और जिन बीजों का वजन बढ़ गया है उन बीजों की बुवाई करना इन बीजों से इस वर्ष ज्यादा उत्पादन होगा।

अमावस्या के समय धरती का गुरुत्वाकर्षण बढ़ जाता है, गुरुत्वाकर्षण शक्ति अंदर अंतरिक्ष की ऊर्जा धरती के अंदर समाने लगती है,पौधों की जीवनी रस जड़ों में चली जाती है,इसीलिए इस समय हमारे पूर्वज जमीन की जुताई निंदाई गुड़ाई को प्रतिबंधित कर दिए थे,
अमावस्या के आसपास के समय बहुत से कीटों का जन्म होता है,फंगस और वायरस इनका प्रभाव अमावस्या के आसपास पड़ता है इसलिए इस समय पर अपने खेतों के ऊपर अग्निहोत्र बहुत आवश्यक है हो सके तो महामृत्युंजय मंत्रों के साथ घी मिश्रित औषधियों का हवन भी करें ताकि घी और गाय के गोबर के कंडे के जलने से निकली हुई ऊर्जा हमारे खेतों के ऊपर छा जाए ताकि धरती का गुरुत्वाकर्षण से जो अंतरिक्ष की ऊर्जा धरती के अंदर समा रही है वह पॉजिटिव हो जाए उससे कीटों का प्रजनन रुक जाएगा,और कीटों की तितलियां हमारे खेतों में अंडे बच्चे न दे पाएं और अच्छे जीव ही हमारे खेत में रह रहें,तो अगली अमावस्या अर्थात दीपावली की रात्रि अपने घरों में घी का दीपक जलाएं घी की आहुति देकर महामृत्युंजय मंत्र बोलते हुए इस कार्य को संपन्न करें।
बाकी अन्य अमावस्या में जब खेत में फसल खड़ी हो तब अपने खेतों में भी यही प्रक्रिया करें।
शुभम् भवतु

जय श्री कृष्ण
पंचतत्व आरोग्यम
🙏

पंचतत्व चिकित्सा परिणाम घर बैठे पाएं ऑनलाइन
26/08/2025

पंचतत्व चिकित्सा परिणाम
घर बैठे पाएं ऑनलाइन

05/08/2025

प्रणाम मित्रो 🙏
कृपया ध्यान दे...

पंचतत्व आरोग्यम

सभी मित्रो को नमस्कार।
बिना दवाई व बिना हॉस्पिटल जाये, घर बैठे ही अपने रोगों से मुक्ति पायें ।

हमारे यहाँ पंचतत्व एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति द्वारा सभी प्रकार की बीमारियों का ईलाज किया जाता है।
जिसमे बिना दवाई के ऑनलाइन चिकित्सा की जाती है। आप मे से कुछ लोग या आपके रिश्तेदार किसी प्रकार की शारीरिक समस्या , चाहे समस्या किसी प्रकार की असाध्य और पुरानी हो सेवा ले सकते हैं। तो एक बार सेवा का अवसर दीजिये। क्या पता आपके कारण किसी के कष्ट को कम करने में हम उनका सहयोग कर पाए।

जैसे - सिर दर्द (माइग्रेन) , आंखो की समस्या , एलर्जी , सर्दी (साइनस) , खांसी , बुखार , कान की समस्या (कान दर्द , कम सुनाई देना ) नींद न आना (अनिद्रा ) , मिर्गी, दांत दर्द , गले की समस्या , थाइराइड , कंधा दर्द(फ्रोजन शोल्डर, सर्वाइकल), लिवर की समस्या (फैटी लिवर), ह्रदय रोग , कॉलेस्ट्रॉल, हार्ट अटैक, दमा (टीबी, अस्थमा), केंसर , उदर रोग (पेट के सभी रोग, अल्सर, कब्ज , गैस, एसिडिटी , हर्निया) , एसिडिटी, पथरी (किडनी की पथरी, गॉलब्लेडर की पथरी), ब्लडप्रेशर, मधुमेह (शुगर , डाइबिटीज), शारिरिक दर्द (गठिया, गांठ , सिस्ट , जॉइन्ट पेन) , थकान, तनाव, मानसिक समस्या (डिप्रेशन), त्वचा रोग (सफेद दाग, चर्मरोग, सोराइसिस, एग्जिमा, खुजली), कमर दर्द( स्लिप डिस्क, L4-L5 की समस्या, साइटिका), मोटापा, शरीर में सूजन, घुटना दर्द (अर्थराइटिस), मलेरिया, निमोनिया, लकवा (पैरालिसिस), प्रजनन अंगों के रोग (श्वेतप्रदर , अनियमित माहवारी ) प्रोस्टेट , बबासीर (पाइल्स, भगन्दर, मस्सा), बालों की समस्या (बाल झड़ना, रूसी होना ), निःसन्तान(बांझपन), हार्मोन्स इन्बेलेंस, महिलाओं एवं पुरुषों के गुप्त रोग आदि समस्याओं का समाधान।

चिकित्सा प्राप्त करने हेतु नीचे दिए गए नंबर पर संपर्क करें।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें ।
पहले मेसेज भेजें समय मिलने पर आपसे संपर्क किया जायेगा।
पंचतत्व आरोग्यम
चिकित्सक - पं. नीरज मुदगल
मो. 9691291261

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जय श्री कृष्ण
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बिना सर्जरी या दवा के,शरीर को उसकी प्राकृतिक स्थिति में लाना।

24/06/2025

प्रणाम मित्रो 🙏
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पंचतत्व चिकित्सा

सभी मित्रो को नमस्कार।
बिना दवाई व बिना हॉस्पिटल जाये, घर बैठे ही अपने रोगों से मुक्ति पायें ।

हमारे यहाँ पंचतत्व एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति द्वारा सभी प्रकार की बीमारियों का ईलाज किया जाता है।
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जैसे - सिर दर्द (माइग्रेन) , आंखो की समस्या , एलर्जी , सर्दी (साइनस) , खांसी , बुखार , कान की समस्या (कान दर्द , कम सुनाई देना ) नींद न आना (अनिद्रा ) , मिर्गी, दांत दर्द , गले की समस्या , थाइराइड , कंधा दर्द(फ्रोजन शोल्डर, सर्वाइकल), लिवर की समस्या (फैटी लिवर), ह्रदय रोग , कॉलेस्ट्रॉल, दमा (टीबी, अस्थमा), उदर रोग (पेट के सभी रोग, अल्सर, कब्ज , गैस, एसिडिटी , हर्निया) , एसिडिटी, पथरी (किडनी की पथरी, गॉलब्लेडर की पथरी), ब्लडप्रेशर, मधुमेह (शुगर , डाइबिटीज), शारिरिक दर्द (गठिया, गांठ , सिस्ट , जॉइन्ट पेन) , थकान, तनाव, मानसिक समस्या (डिप्रेशन), त्वचा रोग (सफेद दाग, चर्मरोग, सोराइसिस, एग्जिमा, खुजली), कमर दर्द( स्लिप डिस्क, L4-L5 की समस्या, साइटिका), मोटापा, शरीर में सूजन, घुटना दर्द (अर्थराइटिस), मलेरिया, निमोनिया, लकवा (पैरालिसिस), प्रजनन अंगों के रोग (श्वेतप्रदर , अनियमित माहवारी ) प्रोस्टेट , बबासीर (पाइल्स, भगन्दर, मस्सा), बालों की समस्या (बाल झड़ना, रूसी होना ), निःसन्तान(बांझपन), हार्मोन्स इन्बेलेंस, महिलाओं एवं पुरुषों के गुप्त रोग आदि समस्याओं का समाधान।

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जय श्री कृष्ण

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30/05/2025

#कोविड-19
सिंगापुर कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति के शव का पोस्टमार्टम करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। गहन जांच के बाद पता चला कि कोविड-19 वायरस के रूप में नहीं, बल्कि एक बैक्टीरिया के रूप में मौजूद है, जो विकिरण के संपर्क में आता है और खून में थक्का जमने से इंसान की मौत का कारण बनता है। पाया गया कि कोविड-19 बीमारी के कारण इंसान में खून के थक्के जम जाते हैं, जिससे नसों में खून जम जाता है, जिससे व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होती है; क्योंकि दिमाग, दिल और फेफड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे लोग जल्दी मर जाते हैं। सांस लेने की शक्ति कम होने का कारण जानने के लिए सिंगापुर के डॉक्टरों ने डब्ल्यूएचओ प्रोटोकॉल को नहीं माना और कोविड-19 का पोस्टमार्टम कर दिया। डॉक्टरों ने हाथ, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों को खोलकर ध्यान से जांच की, तो उन्होंने देखा कि रक्त वाहिकाएं फैली हुई थीं और खून के थक्कों से भरी हुई थीं, जिससे रक्त प्रवाह बाधित हो रहा था और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह भी कम हो रहा था, जिससे मरीज की मौत हो रही थी। इस शोध के बारे में जानने के बाद सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने तुरंत कोविड-19 उपचार प्रोटोकॉल में बदलाव किया और अपने पॉजिटिव मरीजों को एस्पिरिन 100mg और इमरोमैक देना शुरू कर दिया। नतीजतन, मरीज ठीक होने लगे और उनकी सेहत में सुधार होने लगा। सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक दिन में 14,000 से ज़्यादा मरीजों को निकालकर घर भेज दिया। वैज्ञानिक खोज के दौर के बाद, सिंगापुर के डॉक्टरों ने उपचार की विधि को यह कहकर समझाया कि यह बीमारी एक वैश्विक धोखा है, "यह कुछ और नहीं बल्कि इंट्रावैस्कुलर कोएगुलेशन (रक्त के थक्के) और उपचार की एक विधि है। एंटीबायोटिक गोलियाँ सूजनरोधी और एंटीकोआगुलंट्स (एस्पिरिन) लें। यह दर्शाता है कि बीमारी ठीक हो सकती है। सिंगापुर के अन्य वैज्ञानिकों के अनुसार, वेंटिलेटर और गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) की कभी आवश्यकता नहीं थी। इस उद्देश्य के लिए प्रोटोकॉल सिंगापुर में पहले ही प्रकाशित हो चुके हैं। चीन को यह पहले से ही पता है, लेकिन उसने कभी अपनी रिपोर्ट जारी नहीं की। इस जानकारी को अपने परिवार, पड़ोसियों, परिचितों, दोस्तों और सहकर्मियों के साथ साझा करें ताकि वे कोविड-19 के डर को दूर कर सकें और महसूस कर सकें कि यह कोई वायरस नहीं है, बल्कि एक बैक्टीरिया है जो केवल विकिरण के संपर्क में आया है। केवल बहुत कम प्रतिरक्षा वाले लोगों को ही सावधान रहना चाहिए। यह विकिरण सूजन और हाइपोक्सिया का कारण भी बनता है। पीड़ितों को एस्प्रिन-100mg और एप्रोनिक या पैरासिटामोल 650mg लेना चाहिए। स्रोत: सिंगापुर स्वास्थ्य मंत्रालय *फ़ॉरवर्ड किया गया प्राप्त
✌️💐⚡️

Google translation from English

क्या आप भी अपनी   की बीमारी को दवाओं से पाल रहे हैं, मतलब साफ है, आप भी   ( #बीमार_को_जीवनपर्यन्त_रखो_बीमार)  ( #आरोग्य_...
26/05/2025

क्या आप भी अपनी की बीमारी को दवाओं से पाल रहे हैं, मतलब साफ है, आप भी
( #बीमार_को_जीवनपर्यन्त_रखो_बीमार)

( #आरोग्य_की_अक्षुणता ) में नहीं......
मर्जी आपकी क्योंकि स्वास्थ भी है आपका
आज ही संपर्क करें

13/04/2025

*चर्म रोग के लिए*
*14/4/2025 सूर्य निकलने से पहले नीम के पेड़ को प्रणाम (नमस्कार) करके एक लोटा जल देकर, यह मंत्र जाप करते हुऐ "ॐ सुप्रभाय नमः ॐ सुभद्राय नमः" तीन परिक्रमा कीजिए उसके बाद सात नीम के फूल पानी के साथ निगल जाइए, आपको एक वर्ष तक चर्म रोग नहीं होगा।*।
🙏जय श्री कृष्ण🙏

31/12/2024

*🚩हम अपना नववर्ष मनाएंगे!*
┈┉❀꧁ω❍ω꧂❀┉┈

*हवा लगी पश्चिम की*
*सारे कुप्पा बनकर फूल गए।*

*ईस्वी सन तो याद रहा,*
*पर अपना संवत्सर भूल गए।।*

*चारों तरफ नए साल का,*
*ऐसा मचा है हो-हल्ला।*

*बेगानी शादी में नाचे,*
*जैसे कोई दीवाना अब्दुल्ला।।*

*धरती ठिठुर रही सर्दी से,*
*घना कुहासा छाया है।*

*कैसा ये नववर्ष है,*
*जिससे सूरज भी शरमाया है।।*

*सूनी है पेड़ों की डालें,*
*फूल नहीं हैं उपवन में।*

*पर्वत ढके बर्फ से सारे,*
*रंग कहां है जीवन में।।*

*बाट जोह रही सारी प्रकृति,*
*आतुरता से फागुन का।*

*जैसे रस्ता देख रही हो,*
*सजनी अपने साजन का।।*

*अभी ना उल्लासित हो इतने,*
*आई अभी बहार नहीं।*

*हम अपना नववर्ष मनाएंगे,*
*न्यू ईयर हमें स्वीकार नहीं।।*

*लिए बहारें आँचल में,*
*जब चैत्र प्रतिपदा आएगी।*

*फूलों का श्रृंगार करके,*
*धरती दुल्हन बन जाएगी।।*

*मौसम बड़ा सुहाना होगा,*
*दिल सबके खिल जाएँगे।*

*झूमेंगी फसलें खेतों में,*
*हम गीत खुशी के गाएँगे।।*

*उठो खुद को पहचानो,*
*यूँ कबतक सोते रहोगे तुम।*

*चिन्ह गुलामी के कंधों पर,*
*कबतक ढोते रहोगे तुम।।*

*अपनी समृद्ध परंपराओं का,*
*आओ मिलकर मान बढ़ाएंगे।*

*आर्यावर्त के वासी हैं हम,*
*अब अपना नववर्ष मनाएंगे।।*
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
*हम बदलेंगे युग बदलेगा,*
*हम सुधरेंगे युग सुधरेगा।*

*प्राणयोग एवं पंचतत्व चिकित्सा*
*पं. नीरज मुदगल*
*संपर्क सूत्र - 9691291261*

*जय श्री कृष्ण*

लो जी बन गया बड़ा बाजार ll ये क्या हो रहा है मित्रो जो बच्चे इस तरह से पैदा होगे वे क्या मान मर्यादा सम्मान जानेंगे वे ह...
20/11/2024

लो जी बन गया बड़ा बाजार ll
ये क्या हो रहा है मित्रो जो बच्चे इस तरह से पैदा होगे वे क्या मान मर्यादा सम्मान जानेंगे वे है ही नही मानव के बच्चे क्रतिम है तो व्यवहार भी क्रतिम ही तो करेगे।
🙏जय श्री कृष्ण🙏

15/10/2024

*शरद पूर्णिमा विशेष*
अर्जुन की छाल को पीस लें, शरद पूर्णिमा के दिन उपवास रखें, रात्रि में दूध से खीर बनाकर थाली में चंद्रमा के प्रकाश में रखें, फिर सुबह 4 बजे 12 ग्राम पाउडर इस पर डालें, प्रात: रोगी को खिलाए, रोगी पूर्णिमा की रात और खीर सेवन के बाद भी 12 घंटे सोने न दें, दमा,अस्थमा समाप्त....

जय माता दी
03/10/2024

जय माता दी

04/07/2024

*!! हे परमेश्वर !!*

*ईश्वर की अद्भुत मशीन*

कोई भी आवेदन नहीं किया था,
किसी की भी सिफारिश नहीं थी, ऐसा कोई असामान्य कार्य भी नहीं है,
फिर भी
सिर के *बालों से* लेकर पैर के *अंगूठे तक* 24 घंटे भगवान, तू *रक्त* प्रवाहित करता है...
*जीभ पर* नियमित अभिषेक कर रहा है...
निरंतर तू मेरा ये *हृदय* चलाता है...

चलने वाला कौन सा *यंत्र* तू फिट कर दिया है *हे भगवान...*
*पैर के नाखून से लेकर सिर के बालों तक बिना रुकावट संदेशवाहन करने वाली प्रणाली...*
किस *अदृश्य शक्ति* से चल रही है
कुछ समझ नहीं आता।

*हड्डियों और मांस में* बनने वाला *रक्त* कौन सा अद्वितीय *आर्किटेक्चर* है...
इसका मुझे कोई अंदाजा नहीं है।

*हजार-हजार मेगापिक्सल वाले दो-दो कैमरे* दिन-रात सारी दृश्यें कैद कर रहे हैं।

*दस-दस हजार* टेस्ट करने वाली *जीभ* नाम की टेस्टर,

अनगिनत *संवेदनाओं* का अनुभव कराने वाली *त्वचा* नाम की *सेंसर प्रणाली*...
और...
अलग-अलग *फ्रीक्वेंसी की* आवाज पैदा करने वाली *स्वर प्रणाली*
और
उन फ्रीक्वेंसी का *कोडिंग-डीकोडिंग* करने वाले *कान* नाम का यंत्र...

*पचहत्तर प्रतिशत पानी से भरा शरीर रूपी टैंकर हजारों छेद होने के बावजूद कहीं भी लीक नहीं होता...*

*स्टैंड के बिना* मैं खड़ा रह सकता हूँ...गाड़ी के *टायर* घिसते हैं, पर पैर के *तलवे* कभी नहीं घिसते।
*अद्भुत* ऐसी रचना है।

*देखभाल, स्मृति, शक्ति, शांति ये सब भगवान तू देता है।* तू ही अंदर बैठ कर *शरीर* चला रहा है।
*अद्भुत* है यह सब, *अविश्वसनीय,*
*असमझनीय।*

ऐसे *शरीर रूपी* मशीन में हमेशा तू ही है,
इसका अनुभव कराने वाला *आत्मा* भगवान तू ऐसा कुछ *फिट* कर दिया है कि और क्या तुझसे मांगूं...

तेरे इस *जीव सेवा* के खेल का निश्छल, *निस्वार्थ आनंद* का हिस्सा रहूँ!...
ऐसी *सद्बुद्धि* मुझे दे!!

तू ही यह सब संभालता है इसका *अनुभव* मुझे हमेशा रहे!!! रोज पल-पल कृतज्ञता से तेरा ऋणी होने का स्मरण, चिंतन हो, यही परमेश्वर के चरणों में प्रार्थना है!*.

🙏जय श्री कृष्ण🙏

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पुरानी सब्जी मंडी रोड़
Kailaras
466224

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Tuesday 11am - 4pm
Wednesday 11am - 4pm
Thursday 11am - 4pm
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