पंचतत्व आरोग्यम

पंचतत्व आरोग्यम Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from पंचतत्व आरोग्यम, Medical and health, पुरानी सब्जी मंडी रोड़, Kailaras.

यह चिकित्सा एक प्राकृतिक पद्धति है जो शरीर के पाँच मौलिक तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—के संतुलन को पुनर्स्थापित कर रोगों का उपचार करती है।
शरीर की विकृत ऊर्जा को संतुलित किया जाता है।
बिना सर्जरी या दवा के,शरीर को उसकी प्राकृतिक स्थिति में लाना।

10/04/2026

🥗🥗🥗कैसा भोजन कितना पानी...
🥗इस दुनिया में मनुष्य के अलावा कोई भी बीमार नहीं है, क्योंकि मनुष्य के अलावा कोई भी 'शिक्षित' नहीं है। क्या आपने कभी किसी जंगल में किसी हिरण या गाय को देखा है कि वह किसी झरने के पास खड़ी होकर यह सोच रही हो कि आज डॉक्टर ने कितना लीटर पानी पीने को कहा था? क्या भैंस कभी अपना थर्मामीटर या मापक यंत्र लेकर पानी पीने जाती है? वह बस झुकती है, अपनी प्यास को महसूस करती है और पानी पी लेती है। जब प्यास बुझ जाती है, तो वह पीछे हट जाती है—चाहे वह आधा लीटर हो या दस लीटर। वह अपनी 'प्रज्ञा' से जी रही है और आप 'सूचनाओं' से जी रहे हैं। यही सारा विवाद है।
🥗 असल में समस्या यह है कि आप अपनी प्यास को महसूस करना ही भूल गए हैं। जब आप घड़ी देखकर पानी पीते हैं, तो आप शरीर के साथ जबरदस्ती कर रहे होते हैं। डॉक्टर की सलाह एक 'मैकेनिकल' सलाह है, जैसे किसी कार के रेडिएटर में पानी डालना हो। लेकिन आपका शरीर कोई मृत मशीन नहीं है। आयुर्वेद कहता है कि प्यास लगे तभी पानी पियो क्योंकि आपके भीतर एक जठराग्नि है। यदि आप बिना प्यास के पानी डालते रहेंगे, तो आप उस अग्नि को बुझा देंगे, जिससे आपकी पाचन शक्ति और किडनी पर बोझ पड़ेगा। इसलिए, अपनी देह की पुकार को सुनना सीखें, किसी किताब के पन्नों को नहीं।
🥗भोजन के मामले में भी यही सत्य लागू होता है। क्या आपने कभी किसी शेर को देखा है कि वह अपना शिकार करने के बाद उसे आग पर भूनता हो? या किसी बंदर को देखा है जो अपने फल को उबालकर खाता हो? पूरी प्रकृति 'कच्चा' और 'जीवित' भोजन करती है। सूरज की ऊर्जा ने जिस फल को पकाया है, उसमें 'प्राण' है। जब आप उसे आग पर चढ़ाते हैं, तो आप उसका प्राण हर लेते हैं; आप उसे 'मृत' कर देते हैं। पका हुआ भोजन केवल स्वाद की तृप्ति है, जबकि कच्चा भोजन जीवन की ऊर्जा है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि आप आज से ही सब कुछ कच्चा खाने लगें। यदि आपका शरीर बरसों से मृत भोजन का अभ्यस्त है, तो धीरे-धीरे बदलाव लाएं।
🥗जे. कृष्णमूर्ति कहते थे कि 'अनुकरण ही विनाश है।' जब आप किसी डॉक्टर या किसी गुरु का अनुकरण करते हैं, तो आप अपनी बुद्धि को सुला देते हैं। उलझन इसलिए है क्योंकि एक तरफ विज्ञान है और दूसरी तरफ परंपरा। लेकिन इन दोनों के बीच में खड़ा है आपका 'अनुभव'। यदि आप खूब पानी पीकर भारीपन महसूस करते हैं, तो वह आपके लिए जहर है, चाहे उसे दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टर ही क्यों न कह रहा हो। यदि आप कच्चा भोजन खाकर हल्का और ऊर्जावान महसूस करते हैं, तो वही आपका धर्म है। सत्य किसी तर्क में नहीं, आपके शरीर की प्रतिक्रिया में छिपा है।
🥗तो अब क्या करें? प्रयोग शुरू करें! एक वैज्ञानिक की तरह अपने शरीर का अवलोकन करें। प्यास लगने पर ही पानी पिएं और देखें कि किडनी और पेट कैसा महसूस करते हैं। भोजन में 50% कच्चा शामिल करें और देखें कि आलस्य कम हुआ या बढ़ा। जिस दिन आप दूसरों के निर्देशों को छोड़कर अपनी देह की सूक्ष्म आवाजों को सुनना शुरू कर देंगे, उसी दिन सारे विरोधाभास गिर जाएंगे। जब तक आप दूसरों की आंखों से देखेंगे, तब तक धुंध ही छाई रहेगी; अपनी आंखों से देखना शुरू करें, जीवन एकदम साफ और सुलझा हुआ नजर आने लगेगा।

🌿 स्वस्थ जीवन का आधार – प्रकृति के करीब बना घरआज की दुनिया चमक-दमक और भौतिक सुखों से भरी हुई दिखाई देती है।ऊँची इमारतें,...
05/04/2026

🌿 स्वस्थ जीवन का आधार – प्रकृति के करीब बना घर

आज की दुनिया चमक-दमक और भौतिक सुखों से भरी हुई दिखाई देती है।
ऊँची इमारतें, एसी वाले कमरे, चमकदार फर्नीचर और आधुनिक जीवनशैली… सब कुछ देखने में बहुत आकर्षक लगता है।
लेकिन एक सच्चाई हम अक्सर भूल जाते हैं।
हमारा स्वास्थ्य इन सब से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

आज जितनी तेज़ी से आधुनिक घर बन रहे हैं, उतनी ही तेज़ी से लोगों में बीमारियाँ भी बढ़ रही हैं।

एलर्जी, सांस की समस्या, तनाव, अनिद्रा और मानसिक थकान — यह सब आधुनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है।

क्या कभी हमने सोचा है कि इसका कारण क्या है?

एक बड़ा कारण है प्रकृति से दूरी।
आज अधिकांश घर कंक्रीट, केमिकल पेंट, सिंथेटिक मटेरियल और बंद वातावरण से बने होते हैं।

इन घरों में रहने से हमें सुविधा तो मिलती है, लेकिन प्राकृतिक संतुलन खो जाता है।
मनुष्य का शरीर प्रकृति से जुड़ा हुआ है।
हम मिट्टी, जल, वायु, अग्नि और आकाश — इन पंचतत्वों से बने हैं।

इसलिए जब हमारा जीवन प्रकृति से दूर हो जाता है, तो हमारा स्वास्थ्य भी प्रभावित होने लगता है।
इसीलिए आज पहले से अधिक आवश्यकता है प्राकृतिक मटेरियल से बने घरों की।
मिट्टी, चूना, पत्थर, लकड़ी, बांस, गोबर और प्राकृतिक टाइल्स से बने घर केवल रहने की जगह नहीं होते, बल्कि ये हमारे शरीर और मन के लिए स्वस्थ वातावरण बनाते हैं।

ऐसे घरों की दीवारें सांस लेती हैं।
इनमें हवा का प्राकृतिक प्रवाह होता है।
गर्मियों में ये ठंडे और सर्दियों में आरामदायक रहते हैं।

सबसे बड़ी बात — इनमें रासायनिक प्रदूषण नहीं होता।
लेकिन केवल घर ही नहीं, उसके आसपास का वातावरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
शुद्ध वायु हमें पेड़-पौधों से ही मिलती है।
पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और हमें ऑक्सीजन देते हैं।
वे वातावरण को ठंडा रखते हैं और प्रदूषण को कम करते हैं।

इसीलिए यदि हम वास्तव में स्वस्थ जीवन जीना चाहते हैं, तो हमें ऐसे स्थान पर घर बनाना चाहिए जहां:-

🌳 पेड़-पौधे हों
🌿 शुद्ध हवा हो
🌾 शांत वातावरण हो
शहरों में अक्सर भीड़, शोर और प्रदूषण अधिक होता है।
इसलिए यदि हम शहर से थोड़ा दूर प्राकृतिक वातावरण में घर बनाते हैं, तो हमें कई लाभ मिलते हैं।

और एक महत्वपूर्ण बात —
शहरों से दूर जमीन अक्सर सस्ती भी होती है।
कुछ लोग कहते हैं कि प्राकृतिक घर थोड़े महंगे होते हैं।

यह बात आंशिक रूप से सही हो सकती है।
लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि यह खर्च नहीं बल्कि अपने स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में निवेश है।

क्योंकि सबसे बड़ा धन पैसा नहीं है।
सबसे बड़ा धन है — स्वस्थ शरीर और शांत मन।

इसलिए केवल आधुनिकता की चकाचौंध में खोकर अपने जीवन को जोखिम में मत डालिए।

प्रकृति के करीब जाइए।
पेड़-पौधों के बीच घर बनाइए।
प्राकृतिक मटेरियल से घर बनाइए।
यही वह रास्ता है जो हमें स्वस्थ, संतुलित और शांत जीवन की ओर ले जाता है।

🌿 प्रकृति के साथ रहिए
🌿 स्वस्थ रहिए
🌿 खुश रहिए

हम एक ऐसे 'आत्मनिर्भर' दौर में हैं जहाँ मोबाइल हमारा है, लेकिन उसकी 'आत्मा' (Chip) ताइवान की है, 'दिमाग' (Software) अमेर...
03/04/2026

हम एक ऐसे 'आत्मनिर्भर' दौर में हैं जहाँ मोबाइल हमारा है, लेकिन उसकी 'आत्मा' (Chip) ताइवान की है, 'दिमाग' (Software) अमेरिका का है और उसे चलाने वाला 'तेल' खाड़ी देशों का है।
​इस पूरी व्यवस्था पर कुछ कड़वे और 'तार्किक' सवाल, जिन पर विचार करना शायद देशभक्ति के किसी भी शोर से ज्यादा जरूरी है:
​1. डेटा: 21वीं सदी का नया कच्चा माल 💎
यह सच है कि 'डेटा ही AI की जान है'। पर क्या आपने गौर किया? अंग्रेजों के दौर में हम कपास और कच्चा माल देते थे, आज हम 'Raw Data' दे रहे हैं। पश्चिमी कंपनियाँ हमारे डेटा से अपना AI ट्रेन कर रही हैं और फिर वही तकनीक हमें भारी कीमतों पर बेच रही हैं। क्या हम सिर्फ 'डेटा पैदा करने वाली लेबर' बनकर रह गए हैं?
​2. गाँवों की 'डिजिटल घेराबंदी' 🏠
इतिहास गवाह है कि अंग्रेज कभी भारत के गाँवों को पूरी तरह नहीं जीत पाए, क्योंकि गाँव स्वावलंबी थे। लेकिन आज? आज बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने 'सस्ते डेटा' के जरिए हर गाँव के आखिरी घर में सेंध लगा दी है। जिस गाँव को अंग्रेजों की फौज नहीं ढूंढ पाई, उसे आज 'Google Maps' और 'Algorithms' ने ढूँढ लिया है। अब गाँव 'उत्पादक' (Producer) नहीं, सिर्फ 'उपभोक्ता' (Consumer) बनकर रह गए हैं।
​3. CEO हमारा, मुनाफा उनका? 👔
हमें गर्व है कि Google, Microsoft और Adobe के शीर्ष पर भारतीय बैठे हैं। पर क्या यह गर्व करने की बात है या 'ब्रेन ड्रेन' पर रोने की? हमारा सबसे बेहतरीन दिमाग यूरोप और अमेरिका के सिस्टम को मजबूत कर रहा है, जबकि हमारा अपना सिस्टम 'जुगाड़' और 'कॉर्पोरेट सरेंडर' के भरोसे चल रहा है।
​4. पूंजीपतियों की 'कागजी' देशभक्ति 💸
पूंजी का कोई देश नहीं होता, उसका सिर्फ 'मुनाफा' होता है। जब देश के संसाधन—बंदरगाह से लेकर डेटा तक—मुट्ठी भर 'मुनाफाखोरों' को सौंप दिए जाते हैं, तो वह राष्ट्रवाद नहीं, बल्कि 'क्रोनी कैपिटलिज्म' है। सवाल यह है कि अगर 10 दिन युद्ध खिंच जाए और सप्लाई चेन कट जाए, तो क्या हमारी 'आत्मनिर्भरता' का गुब्बारा फूट नहीं जाएगा?
​तार्किक सवाल:
क्या हम वाकई आजाद हो रहे हैं, या हम एक ऐसे 'अदृश्य गुलामी' की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ बेड़ियाँ लोहे की नहीं, बल्कि 'Terms & Conditions' की हैं? नेतृत्व कोई भी हो, क्या वह जनता के डेटा और संसाधनों को विदेशी बाज़ारों में नीलाम होने से बचा पा रहा है?
​शायद असली देशभक्त अब केवल वही बचे हैं जो इस 'डिजिटल मायाजाल' से परे अपने हक की बात कर रहे हैं। वरना, उपभोक्ता तो हम बन ही चुके हैं, कहीं पूरी तरह 'गुलाम' न बन जाएँ।
​आपकी क्या राय है? क्या 'साल-दो साल की असुविधा' सहकर हमें अपना स्वदेशी 'डिजिटल किला' नहीं बनाना चाहिए? 👇

08/03/2026
27/02/2026

#डॉक्टर से मिलने से पहले कृपया इसे एक बार पढ़ लें...

आपको दो या तीन दिन बुखार रहा। अगर आपने कोई दवा भी नहीं ली होती, तो कुछ दिनों में आपका शरीर अपने आप ठीक हो जाता।
लेकिन आप डॉक्टर के पास चले गए।
शुरुआत में ही डॉक्टर ने कई टेस्ट लिख दिए। टेस्ट के नतीजों में बुखार की कोई खास वजह नहीं मिली। हालांकि, कोलेस्ट्रॉल और शुगर का स्तर थोड़ा सा बढ़ा हुआ दिखा... जो कि आमतौर पर सामान्य है। बुखार तो उतर गया, लेकिन अब आप सिर्फ बुखार के मरीज नहीं रहे...
डॉक्टर साहब ने आपको बताया: "आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है। शुगर भी थोड़ी बढ़ी हुई है। इसका मतलब है कि आप प्री-डायबिटिक हैं। आपको कोलेस्ट्रॉल और शुगर नियंत्रित करने की दवाएं लेनी होंगी।"
इसके साथ ही खाने-पीने की कई पाबंदियां लग गईं...
हो सकता है आपने खाने की पाबंदियों को सख्ती से न माना हो — लेकिन दवाएं खाना आपने नहीं भूला... तीन महीने बीत गए। फिर टेस्ट हुए।
आपका कोलेस्ट्रॉल थोड़ा कम हुआ, लेकिन अब आपका ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ गया।
एक और दवा लिख दी गई।
अब आप तीन दवाएं खा रहे थे। यह सब सुनकर आपकी चिंता बढ़ गई। "अब क्या होगा?"
इस चिंता की वजह से आपकी नींद उड़ गई।
डॉक्टर ने नींद की गोली लिख दी — और अब आपकी दवाएं चार हो गईं।
इन सभी दवाओं को खाने के बाद आपको एसिडिटी और सीने में जलन होने लगी।
डॉक्टर ने सलाह दी: "खाने से पहले खाली पेट गैस की गोली खा लिया करें।"
अब आप पांच दवाएं खा रहे थे।
छह महीने बीत गए। एक दिन आपको सीने में दर्द हुआ और आप इमरजेंसी में पहुंच गए।
पूरा चेकअप करने के बाद डॉक्टर ने कहा: "अच्छा हुआ आप समय पर आ गए। वरना गंभीर हो सकता था।"
और टेस्ट सुझाए गए।
कई महंगे टेस्ट करवाने के बाद डॉक्टर ने बताया: "अपनी मौजूदा दवाएं जारी रखें। लेकिन अब दिल के लिए दो और दवाएं शामिल कर लें। साथ ही, आपको एक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट को भी दिखाना चाहिए।"
अब आप सात दवाएं खा रहे थे।
कार्डियोलॉजिस्ट के सुझाव पर आप एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के पास गए।
उन्होंने एक और शुगर की दवा और थायरॉइड की गोली शामिल कर दी, क्योंकि थायरॉइड का स्तर थोड़ा बढ़ा हुआ था। अब आपकी कुल दवाएं नौ हो गईं। धीरे-धीरे आप यह मानने लगे कि आप वाकई बीमार हैं: दिल का मरीज
डायबिटीज
अनिद्रा
गैस की समस्या
थायरॉइड की समस्या
किडनी की समस्या.. और यह सूची बढ़ती रही।

किसी ने आपको नहीं बताया कि आप इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और जीवनशैली में बदलाव लाकर अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं। बल्कि आपको बार-बार बताया गया कि आप एक गंभीर मरीज हैं, कमजोर हैं, अक्षम हैं और टूटे हुए इंसान हैं। छह महीने बाद, इन सभी दवाओं के साइड इफेक्ट्स की वजह से आपको पेशाब की समस्या होने लगी। और टेस्ट से किडनी की समस्या का पता चला। डॉक्टर ने और टेस्ट किए। रिपोर्ट देखकर कहा: "क्रिएटिनिन का स्तर थोड़ा बढ़ गया है। लेकिन चिंता न करें। जब तक आप नियमित रूप से दवाएं लेते रहेंगे।" उन्होंने दो और दवाएं शामिल कर दीं।

अब आप ग्यारह दवाएं खा रहे थे। अब आप खाने से ज्यादा दवाएं खा रहे थे, और इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स की वजह से आप धीरे-धीरे मौत की ओर बढ़ रहे थे। अगर शुरुआत में, जब आप पहली बार बुखार की वजह से डॉक्टर के पास गए थे, डॉक्टर ने सिर्फ इतना कह दिया होता: "चिंता करने की जरूरत नहीं। यह सिर्फ हल्का बुखार है। दवा की जरूरत नहीं। आराम करें, खूब पानी पिएं, ताजे फल और सब्जियां खाएं, सुबह की सैर करें — बस। किसी दवा की जरूरत नहीं।"
लेकिन फिर... डॉक्टर और दवा कंपनियां अपनी रोजी कैसे कमातीं? # # # सबसे बड़ा सवाल: डॉक्टर किस आधार पर मरीजों को हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दिल की बीमारी या किडनी की बीमारी का मरीज घोषित करते हैं? यह मानक कौन तय करता है? आइए इस पर थोड़ा गहराई से जाएं: 1979 में, शुगर का स्तर 250 mg/dl को डायबिटीज माना जाता था। उस समय दुनिया की सिर्फ 3.5% आबादी टाइप 2 डायबिटीज में गिनी जाती थी।

1997 में, इंसुलिन बनाने वाली कंपनियों के दबाव में, डायबिटीज की सीमा को 200 mg/dl तक कम कर दिया गया, जिससे अचानक डायबिटीज के मरीजों की संख्या 3.5% से 8% हो गई — यानी 4.5% ज्यादा लोगों को बिना किसी वास्तविक लक्षण के डायबिटीज का लेबल लगा दिया गया।
1999 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस गाइडलाइन को स्वीकार कर लिया।

इंसुलिन कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया और और फैक्ट्रियां खोल लीं। 2003 में, अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (ADA) ने फास्टिंग शुगर के स्तर को 100 mg/dl तक कम करके प्री-डायबिटिक का मानक बना दिया। नतीजतन, 27% लोग बेवजह डायबिटीज की श्रेणी में आ गए। वर्तमान में, ADA के अनुसार, खाने के बाद शुगर 140 mg/dl को डायबिटीज माना जाता है। इसकी वजह से, दुनिया की लगभग 50% आबादी को अब डायबिटीज का लेबल लग चुका है... जिनमें से कई वास्तव में बीमार नहीं हैं।

भारतीय दवा कंपनियां इसे और कम करके HbA1c 5.5% करने की कोशिश कर रही हैं, ताकि और लोगों को मरीज बनाकर दवाओं की बिक्री बढ़ाई जा सके। कई विशेषज्ञों का मानना है कि HbA1c को 11% तक डायबिटीज नहीं मानना चाहिए। # # # एक और उदाहरण: 2012 में, एक बड़ी दवा कंपनी पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 3 बिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया। उन पर आरोप था कि 2007-2012 के बीच उनकी डायबिटीज की दवा ने दिल के दौरे का खतरा 43% तक बढ़ा दिया था।

कंपनी को यह पहले से पता था लेकिन मुनाफे के लिए जानबूझकर छिपाया गया। इस दौरान उन्होंने 300 बिलियन डॉलर का मुनाफा कमाया। यही है आज का "आधुनिक चिकित्सा तंत्र"! सोचें... विचार करना शुरू करें...

*अपनी जीवन शैली में सुधार करें और स्वस्थ जीवन पाएं*

प्राणयोगी
पं. नीरज मुदगल
मो. 9691291261

 #तांवे के बर्तन और   #कैंसर  ( #रक्त_पित्त के रोग)एक गहन शोध के परिणाम #तांवे का इस्तेमाल स्वयं के लिए न करें, क्योंकि ...
21/01/2026

#तांवे के बर्तन और #कैंसर ( #रक्त_पित्त के रोग)
एक गहन शोध के परिणाम
#तांवे का इस्तेमाल स्वयं के लिए न करें, क्योंकि यदि आपका #पित्त बड़ेगा और अनियंत्रित हुआ तो #रक्तपित्त के कारण #कैंसर जैसे गंभीर रोग / अचानक से गंभीर रोग से ग्रसित हो जाएंगे।
मेरे अनुभव में पिछले 3 माह में ----> 50+ कैंसर रोगी जो किसी प्रकार के तम्बाकू, शराब आदि नहीं पीते थे, लेकिन उन सब में कॉमन था, #तांवे के पात्र (coolpot,जग, लोटा, गिलास आदि) में लम्बे समय से पानी पी रहे थे, उसका परिणाम था #रक्तपित्त........

अतः समय रहते पानी का पात्र - #तांवे ( ), #एल्यूमिनिम, #प्लास्टिक आदि खतरनाक चीजों से दूर करें , #मिट्टी #कांसा #चांदी #गिलट आदि का प्रयोग करें।

जय श्री कृष्ण

🌹शरद पूर्णिमा🌹 में आज बीज परीक्षण का प्राचीन ज्ञान आजमाएं इस वर्ष अधिक उत्पादन किस बीज में होगा यह परीक्षण आज रात्रि में...
06/10/2025

🌹शरद पूर्णिमा🌹
में आज बीज परीक्षण का प्राचीन ज्ञान आजमाएं
इस वर्ष अधिक उत्पादन किस बीज में होगा यह परीक्षण आज रात्रि में कर सकते है
पढ़े पूरा लेख....

चंद्रमा वनस्पतियों का देवता है,

वनस्पति अर्थात पेड़ पौधे लताएं,अनाज औषधी आदि यह सब कब उगेंगे,कैसे उगेंगे, इनमें कब पतझड़ आएगा, कब फूल आएगा, कब फल आएगा,यह सब चंद्रमा ही तय करता है।

सरसों के बीज को जमीन में डालकर कितना भी सिंचाई करो उगता तो वह हस्त नक्षत्र में ही है।
ऐसे ही सब प्रकार की फसलों के बीजों को उगाने का नक्षत्र चंद्रमा की किरणों के साथ ही तय होता है।

शरद पूर्णिमा में चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र के तारामंडल के सामने होता है, अश्विनी नक्षत्र को सबसे अधिक कांतिमान अर्थात सौंदर्य प्रदान करने वाला नक्षत्र माना गया है, भारत का प्राचीन ज्ञान यह भी कहता है कि शरद पूर्णिमा में चंद्रमा की किरणें 16 कलाओं से युक्त रहते है,किरणों में स्वर्ण की ऊर्जा रहती है,

चंद्रमा की किरणों में वे शक्तियां हैं जिनसे जीवन उत्पन्न होता है।
खेती करते समय हमने यह पाया है की पूर्णिमा में मिट्टी में पॉजिटिव जीव की अर्थात फसल को बढ़ाने वाले जीवो की ज्यादा उत्पत्ति होती है और अमावस्या के समय में फसल को नष्ट करने वाले जीवों की अर्थात फंगस वायरस और कीटों की उत्पत्ति या प्रजनन ज्यादा होता है।

पूर्णिमा के समय जब चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण धरती के ऊपर बढ़ जाता है तो समुद्र का पानी ऊपर उठने लगता है, पेड़ पौधों का जीवन रस पत्तों के तरफ आ जाता है, इसीलिए औषधि के लिए पत्तों को बीजों को फलों को तोड़ने का कार्य शरद पूर्णिमा के बाद से ही प्रारंभ किया जाता है।

इस समय फसलों में पके हुए धान्य में जीवन रस आने से धान्य का स्वाद बढ़ जाता है। इसलिए इस समय धान्य फसलों की कटाई की जाती है।

चंद्रमा खुद प्रकाशित नहीं होता यह सूर्य की किरणों को रिफ्लेक्ट करके धरती की ओर भेजता है,
दर्पण से सूर्य की रिफ्लेक्ट करने वाली रोशनी आंखों को चुभती है,ऐसा आपने अपने जीवन में कभी न कभी अनुभव में लिया होगा या नहीं लिया हो तो करके देख लेना, दर्पण से रिफ्लेक्ट हुए रोशनियों से आंखें चुंधिया जाती हैं
इसमें दोष सूर्य का नहीं है दोष दर्पण का है जिसने हमारी ओर सूर्य की तीक्ष्ण किरणों को भेजा,
पर चंद्रमा ऐसा नहीं करता चंद्रमा सूर्य की तीक्ष्ण किरणों को सोख लेता है और सौम्या सफेद किरणों को धरती की ओर भेजता है इसलिए चंद्रमा हमें सफेद दिखाई देता है।
अब चंद्रमा केवल सूर्य की ही सफेद किरणों को ही हमारी ओर नहीं भेजता अपितु चंद्रमा के पीछे जो अलग-अलग नक्षत्र है अर्थात तारामंडल का समूह है उनकी किरणों को भी हमारी ओर भेजता है,
शरद पूर्णिमा में चंद्रमा एक विशेष तारामंडल अश्विनी नक्षत्र के सामने होता है।
यह तारामंडल सौंदर्य प्रदान करने वाला स्वर्ण की आभा प्रदान करने वाला नक्षत्र होता है।

इसीलिए इस दिन का अर्थात शरद पूर्णिमा का बड़ा महत्व रहता है,शुद्ध भारतीय देशी गाय के दूध में,देशी दुबराज चावल में शुद्ध देशी मिश्री डालकर इसे चंद्रमा के सामने रखकर फिर खाने का विधान है। इससे पेट के गट्स बैक्टीरिया अर्थात अच्छे वाले जीवाणु बढ़ते है।

शरद पूर्णिमा के किरणों में इस औषधीय महत्व के कारण ही इस पूर्णिमा के बाद ही धान्य वाली फसलों की कटाई गहाई की जाती है।
इसके पश्चात जमीन की जुताई भी की जाती है, कृषि परासर ग्रंथ के अनुसार इस समय में की गई जुताई के बाद की गई बुआई से फसलों से स्वर्ण निकलता है अर्थात इस समय की गई जुताई से अगली फसल स्वर्ण आभा वाली होगी अधिक उपज वाली होगी।

शरद पूर्णिमा में चंद्रमा की इन्हीं जीवनी शक्ति की ऊर्जाओ का उपयोग करने के लिए हमारे पूर्वज आज शरद पूर्णिमा की रात्रि में अपने बीजों को तौलकर चांद की रोशनी में रखते थे दूसरे दिन इन बीजों का पुनः वजन करते थे जिन बीजों का वजन बढ़ जाता था इसकी बुवाई करते थे और जिन बीजों का वजन घट जाता था अगले एक वर्ष उनकी बुवाई नहीं करते थे।

आज की रात आप 100 - 100 ग्राम बीज चांद की रोशनी में छत पर रखे या घर के आंगन में सुरक्षित रखें और दूसरे दिन सुबह 9:00 तक सूर्य की रोशनी दिखाकर फिर इन बीजों को पुनः तौल लें, जिन प्रकार के बीजों का वजन घट जाए उस बीज को अगले 1 वर्ष तक हमें खेती में बुवाई नहीं करना है ऐसे बीजों से इस वर्ष अच्छी फसल नहीं देंगे और जिन बीजों का वजन बढ़ गया है उन बीजों की बुवाई करना इन बीजों से इस वर्ष ज्यादा उत्पादन होगा।

अमावस्या के समय धरती का गुरुत्वाकर्षण बढ़ जाता है, गुरुत्वाकर्षण शक्ति अंदर अंतरिक्ष की ऊर्जा धरती के अंदर समाने लगती है,पौधों की जीवनी रस जड़ों में चली जाती है,इसीलिए इस समय हमारे पूर्वज जमीन की जुताई निंदाई गुड़ाई को प्रतिबंधित कर दिए थे,
अमावस्या के आसपास के समय बहुत से कीटों का जन्म होता है,फंगस और वायरस इनका प्रभाव अमावस्या के आसपास पड़ता है इसलिए इस समय पर अपने खेतों के ऊपर अग्निहोत्र बहुत आवश्यक है हो सके तो महामृत्युंजय मंत्रों के साथ घी मिश्रित औषधियों का हवन भी करें ताकि घी और गाय के गोबर के कंडे के जलने से निकली हुई ऊर्जा हमारे खेतों के ऊपर छा जाए ताकि धरती का गुरुत्वाकर्षण से जो अंतरिक्ष की ऊर्जा धरती के अंदर समा रही है वह पॉजिटिव हो जाए उससे कीटों का प्रजनन रुक जाएगा,और कीटों की तितलियां हमारे खेतों में अंडे बच्चे न दे पाएं और अच्छे जीव ही हमारे खेत में रह रहें,तो अगली अमावस्या अर्थात दीपावली की रात्रि अपने घरों में घी का दीपक जलाएं घी की आहुति देकर महामृत्युंजय मंत्र बोलते हुए इस कार्य को संपन्न करें।
बाकी अन्य अमावस्या में जब खेत में फसल खड़ी हो तब अपने खेतों में भी यही प्रक्रिया करें।
शुभम् भवतु

जय श्री कृष्ण
पंचतत्व आरोग्यम
🙏

पंचतत्व चिकित्सा परिणाम घर बैठे पाएं ऑनलाइन
26/08/2025

पंचतत्व चिकित्सा परिणाम
घर बैठे पाएं ऑनलाइन

05/08/2025

प्रणाम मित्रो 🙏
कृपया ध्यान दे...

पंचतत्व आरोग्यम

सभी मित्रो को नमस्कार।
बिना दवाई व बिना हॉस्पिटल जाये, घर बैठे ही अपने रोगों से मुक्ति पायें ।

हमारे यहाँ पंचतत्व एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति द्वारा सभी प्रकार की बीमारियों का ईलाज किया जाता है।
जिसमे बिना दवाई के ऑनलाइन चिकित्सा की जाती है। आप मे से कुछ लोग या आपके रिश्तेदार किसी प्रकार की शारीरिक समस्या , चाहे समस्या किसी प्रकार की असाध्य और पुरानी हो सेवा ले सकते हैं। तो एक बार सेवा का अवसर दीजिये। क्या पता आपके कारण किसी के कष्ट को कम करने में हम उनका सहयोग कर पाए।

जैसे - सिर दर्द (माइग्रेन) , आंखो की समस्या , एलर्जी , सर्दी (साइनस) , खांसी , बुखार , कान की समस्या (कान दर्द , कम सुनाई देना ) नींद न आना (अनिद्रा ) , मिर्गी, दांत दर्द , गले की समस्या , थाइराइड , कंधा दर्द(फ्रोजन शोल्डर, सर्वाइकल), लिवर की समस्या (फैटी लिवर), ह्रदय रोग , कॉलेस्ट्रॉल, हार्ट अटैक, दमा (टीबी, अस्थमा), केंसर , उदर रोग (पेट के सभी रोग, अल्सर, कब्ज , गैस, एसिडिटी , हर्निया) , एसिडिटी, पथरी (किडनी की पथरी, गॉलब्लेडर की पथरी), ब्लडप्रेशर, मधुमेह (शुगर , डाइबिटीज), शारिरिक दर्द (गठिया, गांठ , सिस्ट , जॉइन्ट पेन) , थकान, तनाव, मानसिक समस्या (डिप्रेशन), त्वचा रोग (सफेद दाग, चर्मरोग, सोराइसिस, एग्जिमा, खुजली), कमर दर्द( स्लिप डिस्क, L4-L5 की समस्या, साइटिका), मोटापा, शरीर में सूजन, घुटना दर्द (अर्थराइटिस), मलेरिया, निमोनिया, लकवा (पैरालिसिस), प्रजनन अंगों के रोग (श्वेतप्रदर , अनियमित माहवारी ) प्रोस्टेट , बबासीर (पाइल्स, भगन्दर, मस्सा), बालों की समस्या (बाल झड़ना, रूसी होना ), निःसन्तान(बांझपन), हार्मोन्स इन्बेलेंस, महिलाओं एवं पुरुषों के गुप्त रोग आदि समस्याओं का समाधान।

चिकित्सा प्राप्त करने हेतु नीचे दिए गए नंबर पर संपर्क करें।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें ।
पहले मेसेज भेजें समय मिलने पर आपसे संपर्क किया जायेगा।
पंचतत्व आरोग्यम
चिकित्सक - पं. नीरज मुदगल
मो. 9691291261

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जय श्री कृष्ण
🙏🙏🙏🙏🙏

यह चिकित्सा एक प्राकृतिक पद्धति है जो शरीर के पाँच मौलिक तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—के संतुलन को पुनर्स्थापित कर रोगों का उपचार करती है।
शरीर की विकृत ऊर्जा को संतुलित किया जाता है।
बिना सर्जरी या दवा के,शरीर को उसकी प्राकृतिक स्थिति में लाना।

24/06/2025

प्रणाम मित्रो 🙏
कृपया ध्यान दे...

पंचतत्व चिकित्सा

सभी मित्रो को नमस्कार।
बिना दवाई व बिना हॉस्पिटल जाये, घर बैठे ही अपने रोगों से मुक्ति पायें ।

हमारे यहाँ पंचतत्व एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति द्वारा सभी प्रकार की बीमारियों का ईलाज किया जाता है।
जिसमे बिना दवाई के ऑनलाइन चिकित्सा की जाती है। आप मे से कुछ लोग या आपके रिश्तेदार किसी प्रकार की शारीरिक समस्या , चाहे समस्या किसी प्रकार की असाध्य और पुरानी हो सेवा ले सकते हैं। तो एक बार सेवा का अवसर दीजिये। क्या पता आपके कारण किसी के कष्ट को कम करने में हम उनका सहयोग कर पाए।

जैसे - सिर दर्द (माइग्रेन) , आंखो की समस्या , एलर्जी , सर्दी (साइनस) , खांसी , बुखार , कान की समस्या (कान दर्द , कम सुनाई देना ) नींद न आना (अनिद्रा ) , मिर्गी, दांत दर्द , गले की समस्या , थाइराइड , कंधा दर्द(फ्रोजन शोल्डर, सर्वाइकल), लिवर की समस्या (फैटी लिवर), ह्रदय रोग , कॉलेस्ट्रॉल, दमा (टीबी, अस्थमा), उदर रोग (पेट के सभी रोग, अल्सर, कब्ज , गैस, एसिडिटी , हर्निया) , एसिडिटी, पथरी (किडनी की पथरी, गॉलब्लेडर की पथरी), ब्लडप्रेशर, मधुमेह (शुगर , डाइबिटीज), शारिरिक दर्द (गठिया, गांठ , सिस्ट , जॉइन्ट पेन) , थकान, तनाव, मानसिक समस्या (डिप्रेशन), त्वचा रोग (सफेद दाग, चर्मरोग, सोराइसिस, एग्जिमा, खुजली), कमर दर्द( स्लिप डिस्क, L4-L5 की समस्या, साइटिका), मोटापा, शरीर में सूजन, घुटना दर्द (अर्थराइटिस), मलेरिया, निमोनिया, लकवा (पैरालिसिस), प्रजनन अंगों के रोग (श्वेतप्रदर , अनियमित माहवारी ) प्रोस्टेट , बबासीर (पाइल्स, भगन्दर, मस्सा), बालों की समस्या (बाल झड़ना, रूसी होना ), निःसन्तान(बांझपन), हार्मोन्स इन्बेलेंस, महिलाओं एवं पुरुषों के गुप्त रोग आदि समस्याओं का समाधान।

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30/05/2025

#कोविड-19
सिंगापुर कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति के शव का पोस्टमार्टम करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। गहन जांच के बाद पता चला कि कोविड-19 वायरस के रूप में नहीं, बल्कि एक बैक्टीरिया के रूप में मौजूद है, जो विकिरण के संपर्क में आता है और खून में थक्का जमने से इंसान की मौत का कारण बनता है। पाया गया कि कोविड-19 बीमारी के कारण इंसान में खून के थक्के जम जाते हैं, जिससे नसों में खून जम जाता है, जिससे व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होती है; क्योंकि दिमाग, दिल और फेफड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे लोग जल्दी मर जाते हैं। सांस लेने की शक्ति कम होने का कारण जानने के लिए सिंगापुर के डॉक्टरों ने डब्ल्यूएचओ प्रोटोकॉल को नहीं माना और कोविड-19 का पोस्टमार्टम कर दिया। डॉक्टरों ने हाथ, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों को खोलकर ध्यान से जांच की, तो उन्होंने देखा कि रक्त वाहिकाएं फैली हुई थीं और खून के थक्कों से भरी हुई थीं, जिससे रक्त प्रवाह बाधित हो रहा था और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह भी कम हो रहा था, जिससे मरीज की मौत हो रही थी। इस शोध के बारे में जानने के बाद सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने तुरंत कोविड-19 उपचार प्रोटोकॉल में बदलाव किया और अपने पॉजिटिव मरीजों को एस्पिरिन 100mg और इमरोमैक देना शुरू कर दिया। नतीजतन, मरीज ठीक होने लगे और उनकी सेहत में सुधार होने लगा। सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक दिन में 14,000 से ज़्यादा मरीजों को निकालकर घर भेज दिया। वैज्ञानिक खोज के दौर के बाद, सिंगापुर के डॉक्टरों ने उपचार की विधि को यह कहकर समझाया कि यह बीमारी एक वैश्विक धोखा है, "यह कुछ और नहीं बल्कि इंट्रावैस्कुलर कोएगुलेशन (रक्त के थक्के) और उपचार की एक विधि है। एंटीबायोटिक गोलियाँ सूजनरोधी और एंटीकोआगुलंट्स (एस्पिरिन) लें। यह दर्शाता है कि बीमारी ठीक हो सकती है। सिंगापुर के अन्य वैज्ञानिकों के अनुसार, वेंटिलेटर और गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) की कभी आवश्यकता नहीं थी। इस उद्देश्य के लिए प्रोटोकॉल सिंगापुर में पहले ही प्रकाशित हो चुके हैं। चीन को यह पहले से ही पता है, लेकिन उसने कभी अपनी रिपोर्ट जारी नहीं की। इस जानकारी को अपने परिवार, पड़ोसियों, परिचितों, दोस्तों और सहकर्मियों के साथ साझा करें ताकि वे कोविड-19 के डर को दूर कर सकें और महसूस कर सकें कि यह कोई वायरस नहीं है, बल्कि एक बैक्टीरिया है जो केवल विकिरण के संपर्क में आया है। केवल बहुत कम प्रतिरक्षा वाले लोगों को ही सावधान रहना चाहिए। यह विकिरण सूजन और हाइपोक्सिया का कारण भी बनता है। पीड़ितों को एस्प्रिन-100mg और एप्रोनिक या पैरासिटामोल 650mg लेना चाहिए। स्रोत: सिंगापुर स्वास्थ्य मंत्रालय *फ़ॉरवर्ड किया गया प्राप्त
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