Acharya Mani Kashyap

Acharya Mani Kashyap Guwahati, Assam. WhatsApp: +91 98640 46918

Acharya Mani Kashyap
Vedic Astrologer & Vastu Consultant,
Spiritual Guide
Chairman - GITA MISSION
Founder - GITA DHARMA
Author & Speaker
Consultations, Workshops & Talks.

॥ श्री हनुमते नमः ॥पावन हनुमान जयंती के शुभ अवसर परसंकटमोचन, अष्टसिद्धि-नवनिधि के दाता,प्रभु श्रीराम के परम भक्तश्री हनु...
02/04/2026

॥ श्री हनुमते नमः ॥

पावन हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर
संकटमोचन, अष्टसिद्धि-नवनिधि के दाता,
प्रभु श्रीराम के परम भक्त
श्री हनुमान जी को कोटि-कोटि प्रणाम।

हे पवनपुत्र,
हम सबके जीवन से भय, रोग, बाधा, शोक और नकारात्मकता को दूर करें।
हमें बल दें, बुद्धि दें, भक्ति दें,
सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें,
और श्रीराम चरणों में अटूट श्रद्धा प्रदान करें।

जहाँ मन दुर्बल हो, वहाँ आपका स्मरण शक्ति बने।
जहाँ जीवन में संकट हो, वहाँ आपकी कृपा रक्षा बने।
जहाँ भक्ति हो, वहाँ आपके आशीर्वाद से विजय निश्चित हो।

॥ जय हनुमान ज्ञान गुण सागर ॥
॥ जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥

आप सभी को हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ।
बजरंगबली की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे।

— आचार्य मणि कश्यप

#हनुमानजयंती #जयहनुमान #जयबजरंगबली #जयश्रीराम #संकटमोचन #आस्था #भक्ति

✨ आचार्य मणि कश्यप — इंदौर में ✨वैदिक ज्योतिष, भाग्य-मार्गदर्शन एवं जीवन-दिशा के लिए प्रसिद्ध - आचार्य मणि कश्यप (गुवाहा...
28/12/2025

✨ आचार्य मणि कश्यप — इंदौर में ✨

वैदिक ज्योतिष, भाग्य-मार्गदर्शन एवं जीवन-दिशा के लिए प्रसिद्ध - आचार्य मणि कश्यप (गुवाहाटी, असम)
इंदौर में केवल दो दिनों के लिए उपलब्ध होंगे।

- 11 एवं 12 जनवरी 2026

⏳ सीमित स्लॉट उपलब्ध
📲 केवल WhatsApp (कॉल नहीं)

ॐ जय मां कामाख्या 🙏माँ कामाख्या धाम की सृष्टि  -माँ कामाख्या, तंत्र साधना और शक्ति उपासना की परम पीठ हैं। असम के नीलांचल...
09/06/2025

ॐ जय मां कामाख्या 🙏
माँ कामाख्या धाम की सृष्टि -

माँ कामाख्या, तंत्र साधना और शक्ति उपासना की परम पीठ हैं। असम के नीलांचल पर्वत पर स्थित यह मंदिर केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि शक्ति की मूल चेतना का प्रतीक है। इस शक्तिपीठ की उत्पत्ति की कथा हमें विशेष रूप से कालिका पुराण में मिलती है – एक प्राचीन उपपुराण जो कामरूप की तांत्रिक परंपराओं का प्रमाणिक ग्रंथ है।

शक्ति का रहस्य और माँ कामाख्या की उत्पत्ति -

कालिका पुराण के अनुसार, सृष्टि के प्रारंभ में आदिशक्ति ने त्रिदेवों को प्रकट किया – ब्रह्मा, विष्णु और शिव। ब्रह्मा जब अहंकारवश सृष्टि का स्वामी बनने लगे, तब शक्ति ने उनका गर्व चूर्ण करने के लिए महाकाली रूप धारण किया। यह संकेत करता है कि शक्ति ही परम तत्व है, जिसके बिना कोई देवता कार्यशील नहीं हो सकता।

सती की कथा और शक्ति पीठ की स्थापना

शिव की पत्नी सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह किया। यह देख भगवान शिव ने सती के शव को कंधे पर उठाया और विक्षिप्त होकर तांडव करने लगे। विष्णु ने सृष्टि की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंड-खंड कर पृथ्वी पर गिरा दिया।

कालिका पुराण बताता है कि जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वहाँ शक्ति पीठों की स्थापना हुई। कामरूप (असम) के नीलांचल पर्वत पर सती का योनिभाग गिरा, और वही स्थान बना कामाख्या पीठ।

यह स्थल ‘काम’ यानी सृजनशक्ति और ‘अख्या’ यानी जानी जाने वाली शक्ति का प्रतीक है। अतः "कामाख्या" शब्द स्वयं में आदि सृजन की शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।

माँ कामाख्या: काम की देवी, तंत्र की अधिष्ठात्री

कालिका पुराण में वर्णित है कि भगवान शिव ने स्वयं इस पीठ की स्थापना की और इसे तंत्र साधना के लिए सर्वोच्च स्थान माना। यह पीठ काम, मुक्ति और सिद्धि तीनों का केंद्र है।
यह भी वर्णित है कि यहाँ शक्ति स्वयं योनि रूप में विराजमान हैं – निराकार, बिना मूर्ति के। यह भारतीय परंपरा में स्त्री शक्ति की मूल चेतना और सृजनत्मकता का अद्वितीय उदाहरण .

कामाख्या की पूजा और तांत्रिक महत्व -

कालिका पुराण के अनुसार, जो साधक यहाँ शक्ति की आराधना करता है, वह सभी लौकिक और पारलौकिक सिद्धियाँ प्राप्त कर सकता है। यह स्थान मुख्य रूप से गुप्त नवरात्रि, अंबुबाची पर्व, और अन्य तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है।

यहाँ की पूजा में काम, कुंडलिनी, और शक्तिपात के रहस्य निहित हैं – जिन्हें केवल गुरुकृपा और साधना से ही जाना जा सकता है।

कालिका पुराण न केवल माँ कामाख्या की उत्पत्ति का विवरण देता है, बल्कि यह भी बताता है कि क्यों कामरूप को तंत्र का हृदय कहा गया है।
माँ कामाख्या की उपासना केवल भक्ति नहीं, बल्कि आत्मज्ञान, काम-उर्जाओं का नियंत्रण और मुक्ति की दिशा में एक प्राचीन पथ है।

आज भी, माँ कामाख्या की पूजा में जो शक्ति है, वह उसी आदि शक्ति की पुकार है – जो सृष्टि का आरंभ भी है और अंत में आत्मा की परम शांति भी।
🙏🙏🙏

ॐ नमः शिवाय।मंगलमय दिन की शुभकामनाएं
09/06/2025

ॐ नमः शिवाय।
मंगलमय दिन की शुभकामनाएं

देवउठनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं
12/11/2024

देवउठनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं

ॐ हर हर महादेव
15/10/2024

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15/10/2024

লক্ষ্মী পূজাৰ বিশেষ মন্ত্ৰ

राहु केतु : *खगोलीय पृष्ठभूमि*वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु गणितीय बिंदु हैं, जो सूर्य के चारों ओर चंद्रमा की कक्षा के ...
21/09/2024

राहु केतु :

*खगोलीय पृष्ठभूमि*

वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु गणितीय बिंदु हैं, जो सूर्य के चारों ओर चंद्रमा की कक्षा के साथ पृथ्वी की कक्षा के प्रतिच्छेदन को दर्शाते हैं।

*वैज्ञानिक व्याख्या*

1. *चंद्रमा के नोड्स*: राहु (उत्तरी नोड) और केतु (दक्षिणी नोड) वे बिंदु हैं जहाँ चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी के कक्षीय तल को पार करती है।

2. *ग्रहण*: राहु और केतु सूर्य और चंद्र ग्रहण के लिए जिम्मेदार हैं, जो तब होता है जब चंद्रमा इन नोड्स से होकर गुजरता है।

3. *गुरुत्वाकर्षण प्रभाव*: राहु और केतु की स्थिति पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को प्रभावित करती है, जो संभावित रूप से मानवीय मामलों को प्रभावित करती है।

*खगोलीय पत्राचार*

1. *डार्क मैटर*: कुछ शोधकर्ताओं का सुझाव है कि राहु और केतु सौर मंडल में डार्क मैटर या अदृश्य द्रव्यमान का प्रतिनिधित्व करते हैं।

2. *कॉस्मिक किरणें*: नोड्स की स्थिति कॉस्मिक किरणों की तीव्रता को प्रभावित कर सकती है, जिससे पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र और जलवायु प्रभावित हो सकती है।

*वैदिक ज्योतिष सिद्धांत*
Maharshi Mani Kashyap

1. *छाया ग्रह*: राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है, जो मानव भाग्य को प्रभावित करते हैं।

2. *कर्म महत्व*: वे पिछले जीवन के कर्म, भविष्य के भाग्य और आध्यात्मिक विकास का प्रतिनिधित्व करते हैं।

वैदिक ज्योतिष की व्याख्याएँ प्राचीन ज्ञान पर आधारित हैं । राहु और केतु का वैज्ञानिक आधार खगोलीय अवलोकनों में निहित है, जबकि उनका ज्योतिषीय महत्व निरंतर शोध का विषय बना हुआ है.

20/09/2024
Honoured to be invited as a panelist at the Ayurjyotish Sammelan held in the holy city of Kashi at the Central Universit...
20/09/2024

Honoured to be invited as a panelist at the Ayurjyotish Sammelan held in the holy city of Kashi at the Central University of Tibetan Studies on 14th–15th September 2024.

I had the privilege of delivering a detailed presentation on the profound relationship between Astrology and Ayurveda—two timeless streams of Indic wisdom that continue to guide human life in meaningful ways.

I am deeply grateful to receive the Kashi Jyotish Ratna Samman from respected astrology scholars and dignitaries. This recognition is not merely an honour for me personally, but also a reminder of my continued commitment to preserving, sharing, and advancing the wisdom of Jyotish and Sanatan knowledge traditions.

My sincere thanks to Kashi Jyotish Sansthan for organising such a meaningful gathering, which brought together eminent astrology scholars, distinguished personalities from Varanasi, and representatives from different parts of India and Nepal.

With gratitude and renewed dedication, I continue my journey in service of Vedic Astrology, Vastu, and spiritual guidance.

Address

Guwahati, Bharat
Kamakhya
781029

Telephone

+919864046918

Website

https://www.instagram.com/acharyamanikashyap, http://www.acharyamanikashyap

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