Mystery Tantra - रहस्य तंत्र

Mystery Tantra - रहस्य तंत्र Mystery Tantra Mantra Yantra Sadhna Siddhi mahashakti mantra sadhna and tantra for power of mantra

Mystery Tantra Mantra Rahshya Sadhna Siddhi--- Durga, Dus Mahavidhya, Bhairav, Apsara, Kinnari, Yogini, Pret, Pisachani

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03/12/2025

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मारुती कवच  सिद्धि प्रयोग ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते प्रलयकालानल प्रभाप्रज्वलनाय | प्रतापवज्रदेहाय | अञ्जनीगर्भसम्भूता...
25/11/2025

मारुती कवच सिद्धि प्रयोग

ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते
प्रलयकालानल प्रभाप्रज्वलनाय |
प्रतापवज्रदेहाय | अञ्जनीगर्भसम्भूताय |
प्रकटविक्रमवीरदैत्यदानवयक्षरक्षोगणग्रहबन्धनाय |
भूतग्रहबन्धनाय | प्रेतग्रहबन्धनाय | पिशाचग्रहबन्धनाय |
शाकिनीडाकिनीग्रहबन्धनाय | काकिनीकामिनीग्रहबन्धनाय |
ब्रह्मग्रहबन्धनाय | ब्रह्मराक्षसग्रहबन्धनाय | चोरग्रहबन्धनाय |
मारीग्रहबन्धनाय | एहि एहि | आगच्छ आगच्छ | आवेशय आवेशय |
मम हृदये प्रवेशय प्रवेशय | स्फुर स्फुर | प्रस्फुर प्रस्फुर |
सत्यं कथय | व्याघ्रमुखबन्धन | सर्पमुखबन्धन | राजमुखबन्धन |
राजमुखबन्धन | नारिमुखबंधन | सभामुखबन्धन | शत्रुमुखबन्धन |
सर्वमुखबन्धन | लङ्काप्रासादभञ्जन |
अमुक में वशमानय | क्लीं क्लीं क्लीं ह्रीं श्रीं श्रीं राजानं वशमानय |
श्रीं ह्रीं क्लीं स्त्रिय आकर्षय आकर्षय शत्रून्मर्दय मर्दय मारय मारय |
चूर्णय चूर्णय |
खे खे श्रीरामचन्द्राज्ञया मम अमुक कार्यसिद्धिं कुरु कुरु |
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् स्वाहा |
विचित्रवीर हनुमन् मम सर्वशत्रून् भस्मीकुरु कुरु |
हन हन हुं फट् स्वाहा |

आदेश आकाश कामिनी अघोर बंध एक मणि जिस पर करोड़ ब्रह्मांड करोड़ ब्रह्मण्डों की स्वामिनी मेरी आकाश कामिनी माई जो करे इसकी स्व...
24/11/2025

आदेश आकाश कामिनी

अघोर बंध एक मणि जिस पर करोड़ ब्रह्मांड करोड़ ब्रह्मण्डों की स्वामिनी मेरी आकाश कामिनी माई जो करे इसकी स्वाई उसके आगे करे कामिनी कामाक्षा काली भैरव अगवाई नमो आदेश कामिनी देवी अखिलेश्वरी शब्द साँचा पिंड काचा आदेश आदेश पंचतत्व ।
देवी को खीर भोग जो लगाई मंगल शनि अमावश कोई।
उसपर आकश कामिनी की कृपा जगत चराचर वश होई।।

*******।।सर्व यन्त्र मन्त्र तंत्रोत्कीलन।**************।।सर्व यन्त्र मन्त्र तंत्रोत्कीलन।*******पर्वतीउवाच:देवेश परमानंद...
23/11/2025

*******।।सर्व यन्त्र मन्त्र तंत्रोत्कीलन।*******
*******।।सर्व यन्त्र मन्त्र तंत्रोत्कीलन।*******
पर्वतीउवाच:
देवेश परमानंद भक्तानांभयप्रद,आगमा निगमसचैव बीजं बीजोदयस्था।।१।।
समुदायेंन बीजानां मंत्रो मंत्रस्य संहिता।
ऋशिछ्दादिकम भेदो वैदिकं यामलादिकम।।२।।
धर्मोअधर्मस्था ज्ञानं विज्ञानं च विकल्पनम।
निर्विकल्प विभागेनं तथा छठकर्म सिद्धये।३।।
भुक्ति मुक्ति प्रकारश्च सर्व प्राप्तं प्रसादत:।
कीलणं सार्वमंत्रनां शंसयद ह्रदये वच :।।४।।
इति श्रुत्वा शिवानाथ: पर्वत्या वचनम शुभम।
उवाच परया प्रीत्या मंत्रोतकील्कन शिवाम।।५।।
शिवोवाच।
वरानने ही सर्वस्य व्यक्ताव्यक्ततस्य वस्तुनः।
साक्षीभूय त्वमेवासि जगतस्तु मनोस्थता।।६।।
त्वया पृष्ठटँ वरारोहे तद्व्यामुत्कीलनम।
उद्दीपनम ही मन्त्रस्य सर्वस्योत्कीलन भवेत।७।।
पूरा तव मया भद्रे स्मकर्षण वश्यजा।
मंत्रणा कीलिता सिद्धि: शर्वे ते सप्तकोटिय:।।८।।
तवानुग्रह प्रीतत्वातसिद्धिस्तेषां फलप्रदा।
येनोपायेन भवति तं स्तोत्रं कथ्यामहम।।९।।
श्रुणु भद्रेअत्र सतत मवाभ्याखिलं जगत।
तस्य सिद्धिभवेतिष्ठ मया येषां प्रभावकम।।१०।।
अन्नं पान्नं हि सौभाग्यं दत्तं तुभ्यं मया शिवे।
संजीवन्नं च मन्त्रनां तथा दत्यूं परनर्ध्रुवं।।११।।
यस्य स्मरण मात्रेण पाठेन जपतोअपि वा।
अकीला अखिला मंत्रा सत्यं सत्यं ना संशय।।१२।।
ॐ अस्य श्री सर्व यन्त्र तन्त्र मन्त्रणामउत्कीलन मंत्र स्तोत्रस्य मूल प्रकृति ऋषियेजगतीछन्द: निरंजनो देवता कलीं बीज,ह्रीं शक्ति , ह्रः लौ कीलकम , सप्तकोटि यंत्र मंत्र तंत्र कीलकानाम संजीवन सिद्धिार्थे जपे विनियोग:।
ॐ मूल प्रकृति ऋषिये नमः सिरषि।
ॐ जगतीचछन्दसे नमः मुखे।
ॐ निरंजन देवतायै नमः हृदि।
ॐ क्लीं बीजाय नमःगुह्ये।
ॐ ह्रीं शक्तिये नमः पादयो:।
ॐ ह्रः लौं कीलकाय नमः सर्वांगये।
करन्यास।*****
ॐ ह्रां अंगुष्ठाभ्यां नमः।
ॐ ह्रीं अनामिकाभ्यां नमः।
ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः।
ॐ ह्रैं तर्जनीभ्यां नमः।
ॐ ह्रो कनास्तिकाभ्यां नमः।
ॐ ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।
ॐ ह्रां हृदयाय नमः।
ॐ ह्रीं शिरषे स्वाहा।
ॐ ह्रूं शिखायै वौषट।
ॐ ह्रैं कवचाय हूं।
ॐ ह्रो नेत्रत्रयाय फ़ट।
ॐ ब्रह्मा स्वरूपम च निरंजन तं ज्योति: प्रकाशमनिशं महतो महानन्तम करुणायरूपमतिबोधकरं प्रसन्नाननं दिव्यं स्मरामि सततं मनुजावनाय।।१।। एवं ध्यात्वा स्मरेनित्यं तस्य सिद्धि अस्तु सर्वदा,वांछित फलमाप्नोति मन्त्रसंजीवनं ध्रुवम।।२।।
मन्त्र:-ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं सर्व मन्त्र-यन्त्र-तंत्रादिनाम उत्कीलणं कुरु कुरु स्वाहा।।
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रां षट पंचक्षरणंउत्कीलय उत्कीलय स्वाहा।।
ॐ जूं सर्व मन्त्र तंत्र यंत्राणां संजीवन्नं कुरु कुरु स्वाहा।।
ॐ ह्रीं जूं अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ऋ लृ लृ एं ऐं ओं औं अं आ: कं खं गं घं ङ चं छं जं झं ञ टँ ठं डं ढं नं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं हं क्षं मात्राक्षरणां सर्वम उत्कीलणं कुरु स्वाहा।

ॐ सोहं हं सो हं (११ बार)

जू सों हं हंसः ॐ ॐ(११ बार),

ॐ हं जूं हं सं गं (११ बार),

सोहं हं सो यं (११ बार),

लं(११ बार),

ॐ (११ बार),

यं (११ बार),

ॐ ह्रीं जूं सर्व मन्त्र तन्त्र यंत्रास्तोत्र कवचादिनां सनजीवय संजीवन्नं कुरु कुरु स्वाहा।। ॐ सो हं हं स: जूं संजीवणं स्वाहा।।
ॐ ह्रीं मंत्राक्षराणं उत्कीलय उत्कीलणं कुरू कुरु स्वाहा।
ॐ ॐ प्रणवरूपाय अं आं परमरूपिने।
इं ईं शक्तिस्वरूपाय उं ऊं तेजोमयाय च।१।
ऋ ऋ रंजित दीपताये लृ लृ स्थूल स्वरूपिणे।
एं ऐं वांचा विलासाय ओं औं अं आ: शिवाय च।२।।
कं खं कामलनेत्राये गं घँ गरुड़गामिने ।
ङ चं श्री चंद्र भालाय छं जं जयकराये ते।३।।
झं टँ ठं जय कर्त्रे डं ढं णं तं पराय च।
थं दं धं नं नामस्तसमे पं फं यंत्रमयाय च।।४।।
बं भं मं बलवीर्याये यं रं लं यशसे नमः।
वं शं षं बहुवादाये सं हं लं क्षं स्वरूपिनेे।।५।।
दिशामादित्य रूपाये तेजसे रूप धारिने।
अनन्ताय अनन्ताय नमस्तसमे नमो नमः।।६।।
मातृकाया: प्रकाशाय तुभ्यं तस्मे नमो नमः।
प्राणेशाय क्षीणदाये सं संजीव नमो नमः।।७।।
निरंजनस्य देवस्य नामकर्म विधानत:।
त्वया ध्यातँ च शक्तया च तेन संजायते जगत।।८।।
स्तुतःमचिरं ध्यात्वा मयाया ध्वंस हेतवे।
संतुष्ट आ भार्गवाया हैं यशस्वी जायते ही स:।।९।।
ब्राह्मणं चेत्यन्ति विविध सुर नरांस्त्रपयंती प्रमोदाद।
ध्यानेनोद्देपयन्ती निगम जप मनुं षटपदं प्रेरयंती।
सर्वां न देवान जयंती दितिसुतदमनी सापह्नकार मूर्ति-
स्तुभ्यं तस्मै च जाप्यं स्मररचितमनुं मोशय शाप जालात।।१०।।
इदं श्री त्रिपुरास्तोत्रं पठेद भक्त्या तू यो नर:।
सर्वान कामनाप्नोति सर्वशापाद विमुच्येत।।
।।इति श्री सर्व यन्त्र मन्त्र तंत्रोत्कीलनँ सम्पूर्णम।।

जैसा कि हम सभी को ज्ञात हैं कि हिंदू मंत्र यंत्र और तंत्र सभी भगवान शंकर द्वारा कीलित कर दिए गए थे एवं उनका प्रयोग जो है कलयुग में बुरे कामों के लिए ना हो यही इसका मूल कारण था कि भगवान शंकर को सभी यंत्र मंत्र और तंत्र ओं को क्लिक करना पड़ा धीरे धीरे हिंदू साधकों का सभी शास्त्री सिद्धियां और जितने भी कर्म है उन से विश्वास उठता जा रहा है उसको देखते हुए हम आपके लिए लेकर आए हैं यंत्र मंत्र तंत्र उत्कीलन का यह प्रयोग किसी भी साधना को करने से पहले आप इन इस स्तोत्र का एक बार अनुष्ठान अवश्य करें और फिर देखें आप के अनुष्ठान में कितनी शक्ति आ जाएगी फिर देखें इस का चमत्कार आपका मन नहीं भटके गा एवं साधना में जो आपकी इच्छा है वैसे ही आपको सफलता मिलेगी जिज्ञासु ओं के लिए इस प्रयोग को मैं दे रहा हूं सभी न्यास और विनियोग करना आवश्यक है तभी यह स्तोत्र काम करता है।

नाहरसिंह वीर इतनी जबरदस्त है कि किसी भी साधक के पास किसी तरह का कोई याचिका गया उसके मनोभावों को पढ़ लेना और उसके बिना पू...
23/11/2025

नाहरसिंह वीर इतनी जबरदस्त है कि किसी भी साधक के पास किसी तरह का कोई याचिका गया उसके मनोभावों को पढ़ लेना और उसके बिना पूछे उसके सवाल का जवाब दे देना कितने भी कट्टर भूत प्रेत पिशाच इत्यादि लगे हो उनको हटा देना ठीक है और देश-विदेश की यात्रा में कोई अड़चन पढ़ रही हो तो उसको हटा देना किसी को कोई नौकरी नहीं लग रही कारोबार में रुकावट है उसके लिए यह देवता जो है इसकी साधना की जाती है और इसके तत्क्षण परिणाम भी आपको प्राप्त होते हैं ऐसा नहीं है कि आप कर रहे हो और परिणाम प्राप्त नहीं हुए इसकी साधना अपने आप में खतरनाक है क्योंकि इसमें रक्षा मंत्र की पूर्णता आवश्यकता पड़ती है और गुरु का सिर पर हाथ होना चाहिए देवता जो सामने आता है तो साधक जो है वह वाक पट्टू होना चाहिए ऐसा ना हो कि देवता के क्रोध में कुछ पूछे आपसे और आप बोली ना पाऊं अक्सर यही देखा जाता है कि आप देवता को बुला लेते हो सिद्ध करते हो तो क्या होता है कि जब देवता सामने आता है तो आदमी का जो है वह जवाब दे जाता है।
यह साधना पूरे 40 दिन की है।
पूरी तरह ब्रह्मचर्य को धारण करते हुए इस साधना को करना चाहिए।
साधना काल में जब आप जाप करोगे तो लाल वस्त्र और लाल ही आसन धारण करना होगा।
आपका मुंह या रुख पूर्व दिशा की और रहेगा ।
प्रतिदिन 11 माला हकीक की माला से जाप करना है।
साधना काल में पूरे 40 दिन तक आपने जमीन पर सोना है किसी से फालतू बातचीत नहीं करनी।
भोजन सिर्फ शरीर चलाने के लिए करना है।
और ध्यान जो है पीर के चरणों में रखना है।
इस साधना में एक देसी घी का दीपक और एक सरसों के तेल का दिया जलता रहना चाहिए।
सबसे पहले आपने एक एकांत कमरे में पूर्व दिशा की ओर मुंह करके आम की पटरी रखनी है उसके ऊपर लाल कपड़ा बिछा देना है।
फिर उस पर एक देसी घी का दीपक और सरसों के तेल का दिया आप को जलाना है।
साथ ही फल फूल दूध से बने हुए पेड़े, एक देसी शराब का पव्वा,11 गुलाब के फूल, लोंग इलाइची के 7-7 पीस गूगल की धूप ,11 बताशे, एक जोड़ा मौली का यह भोग प्रतिदिन आपको रखना और प्रतिदिन बदल देना है।
इसके निमित्त नित्य प्रति आपको देसी घी का होम करना होगा 40 दिन लगातार।
और उस शराब की नित्य प्रति धार देनी है।
इस साधना काल में आपको विचित्र विचित्र अनुभूतियां आऊंगी तीसरे ही दिन से आपके आसपास किसी के होने का एहसास हो जाएगा 15 दिन के बाद परिस्थिति और भयंकर हो जाएगी और ऐसा भी हो सकता है कि अचानक कोई आकर किसी के मरने की खबर आपको दे दिया किसी के एक्सीडेंट की खबर दे दे तो ऐसा होता है कि साधना से उठाने के लिए शक्तियां अपना काम करते हैं लेकिन आपको बिल्कुल निर्भीक होकर इस पाठ को पूरा करना है।
कई बार ऐसा भी हो जाता है कि साधना में जब हम किसी साधना को छेड़ते हैं या शुरू करते हैं तो हमारी जो शारीरिक कंडीशन है वह ठीक नहीं रहती हमें कोई बीमारी हो जाती है या बुखार चढ़ जाता है या कोई चोट लग गई तो हमने किसी भी हालात में वह साधना छोड़नी नहीं है।
जब भी बीर आपके सामने आए तो आपको बीर जी से जब भी बुलाएंगे तब आने के और जो काज कहे उसे करने के वचन ले लेने हैं।
साधना संपन्न होने के बाद आपको बागड़ जाना पड़ेगा और नाहरसिंह वीर के निमित्त वहां पर आपको एक काला बकरा चढ़ाना होगा।
यह साधना दो तरीकों से की जाती है आप वैष्णो तरीके से भी इस साधना को कर सकते हो लेकिन शक्ति कम प्राप्त होगी अगर आप इसे वैष्णो तरीके से करना चाहते हैं तो आपको कच्चा दूध शराब की जगह कच्चा दूध और कच्चे दूध की धार देनी पड़ेगी बस इतना ही अंतर होता है इसमें तामसिक तरीके में शराब की धार देनी पड़ेगी आपको तामसिक तरीके से भी आप कर सकते हो उसे शक्ति आपको ज्यादा प्राप्त होगी क्योंकि जब जिस देवता की हम पूजा करते हैं उसका भोग पूरा दिया जाएगा तो साधना से पूरी शक्ति प्राप्त होगी।
इस साधना के सफल होने के बाद किसी की खोई हुई क्या घर से भागे हुए किसी भी व्यक्ति के बारे में आप विस्तृत तरीके से बाबा से पूछ सकते हो भूत प्रेत आप के इशारे पर हो जाएंगे विशेषकर जिनके ऊपर डोली आती है उनको आप कंट्रोल कर पाओगे किसी को भी अपने इशारे पर किसी की भी सवारी रोक सकते हो चला सकते हो इस साधना को करने से पहले क्योंकि साथ में नहीं होता है आपको हमसे रक्षा मंत्र प्राप्त करना होगा उसके अलावा
जो भी अगर साधना करेगा वह अपनी खैरियत का खुद जिम्मेदार होगा।
बिना गुरु के इस साधना को ना करें।
।।नाहर सिंह बीर का मंत्र।।
ॐ नमो आदेश गुरु को,जाग रे जाग नाहर सिंह जवान,जाहर पीर दा दीवान,लांदा पर्चे विच जहान,हत्थ विच सोहे सोने द कड़ा,जिथे सिमरा हाजर खड़ा,माता नाहरी दा जाया जदों बुलवां झटपट आया, कारज मेरा सिद्ध कराया,ना करे तो माता नाहरी दा दूध हराम, गुग्गे पीर दी आन गुरुगोरखनाथ दी आन नौ नाथा दी आन दुहाई शिवजी गौरां दी चले मन्त्र फुरो वांचा देखा बाबा नाहर सिंह तेरी कलाम दा तमाशा।

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