Buddha Vihar Sadhna Kendra Sansthan Trust, kanpur

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नमो बुद्धाय + जय सम्राट अशोक + जय भीम राष्ट्र माता सावित्री बाई फुले की जन्म जयंती की हार्दिक मंगल कामनाऐ ।   जो काल्पनि...
03/01/2026

नमो बुद्धाय + जय सम्राट अशोक + जय भीम

राष्ट्र माता सावित्री बाई फुले की जन्म जयंती की हार्दिक मंगल कामनाऐ ।

जो काल्पनिक सरस्वती को तो जानते है लेकिन वास्तविक माता सावित्री बाई फूले को नही जानते कृपया ये पोस्ट पूरा पढ़े...

*नाम–* सावित्रीबाई फूले
*जन्म–* 3 जनवरी सन् 1831
*मृत्यु–* 10 मार्च सन् 1897
*
*उपलब्धि*
कर्मठ समाजसेवी जिन्होंने समाज के पिछड़े वर्ग खासतौर पर महिलाओं के लिए अनेक कल्याणकारी काम किये, उन्हें उनकी मराठी कविताओं के लिए भी जाना जाता है।

*जन्म व विवाह*
सावित्रीबाई फूले का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगाँव नामक स्थान पर 3 जनवरी सन् 1831 को हुआ। उनके पिता का नाम खण्डोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। सन् 1840 में मात्र नौ वर्ष की आयु में ही उनका विवाह बारह वर्ष के ज्योतिबा फूले से हुआ।

महात्मा ज्योतिबा फूले स्वयं एक महान विचारक, कार्यकर्ता, समाज सुधारक, लेखक, दार्शनिक, संपादक और क्रांतिकारी थे।

सावित्रीबाई पढ़ी-लिखी नहीं थीं। शादी के बाद ज्योतिबा ने ही उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया। बाद में सावित्रीबाई ने ही पिछड़े समाज की ही नहीं, बल्कि देश की प्रथम शिक्षिका होने का गौरव प्राप्त किया। उस समय लड़कियों की दशा अत्यंत दयनीय थी और उन्हें पढ़ने लिखने की अनुमति तक नहीं थी। इस रीति को तोड़ने के लिए ज्योतिबा और सावित्रीबाई ने सन् 1848 में लड़कियों के लिए एक विद्यालय की स्थापना की। यह भारत में लड़कियों के लिए खुलने वाला पहला स्त्री विद्यालय था।
*सावित्रीबाई फुले कहा करती थीं*
अब बिलकुल भी खाली मत बैठो, जाओ शिक्षा प्राप्त करो!

💡 सचमुच जहाँ आज भी हम लैंगिक समानता (gender equality) के लिए संघर्ष कर रहे हैं वहीं अंग्रेजों के जमाने में सावित्रीबाई फुले ने ओबीसी महिला होते हुए हिन्दू समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ जो संघर्ष किया वह अभूतपूर्व और बेहद प्रेरणादायक है. ऐसी महान आत्मा को शत-शत नमन!
*समाज का विरोध*
सावित्रीबाई फूले स्वयं इस विद्यालय में लड़कियों को पढ़ाने के लिए जाती थीं। लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था। उन्हें लोगों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने न केवल लोगों की गालियाँ सहीं अपितु लोगों द्वारा फेंके जाने वाले पत्थरों की मार तक झेली। स्कूल जाते समय धर्म के ठेकेदार व स्त्री शिक्षा के विरोधी सावित्रीबाई फूले पर कूड़ा-करकट, कीचड़ व गोबर ही नहीं मानव-मल भी फेंक देते थे। इससे सावित्रीबाई के कपड़े बहुत गंदे हो जाते थे अतः वो अपने साथ एक दूसरी साड़ी भी साथ ले जाती थीं जिसे स्कूल में जाकर बदल लेती थीं। इस सब के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी व स्त्री शिक्षा, समाजोद्धार व समाजोत्थान का कार्य जारी रखा।

*विधवा पुनर्विवाह के लिए संघर्ष*
स्त्री शिक्षा के साथ ही विधवाओं की शोचनीय दशा को देखते हुए उन्होंने विधवा पुनर्विवाह की भी शुरुआत की और 1854 में विधवाओं के लिए आश्रम भी बनाया। साथ ही उन्होंने नवजात शिशुओं के लिए भी आश्रम खोला ताकि कन्या शिशु हत्या को रोका जा सके। आज देश में बढ़ती कन्या भ्रूण हत्या की प्रवृत्ति को देखते हुए उस समय कन्या शिशु हत्या की समस्या पर ध्यान केंद्रित करना और उसे रोकने के प्रयास करना कितना महत्त्वपूर्ण था इस बात का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं। विधवाओं की स्थिति को सुधारने और सती-प्रथा को रोकने व विधवाओं के पुनर्विवाह के लिए भी उन्होंने बहुत प्रयास किए। सावित्रीबाई फूले ने अपने पति के साथ मिलकर काशीबाई नामक एक गर्भवती विधवा महिला को न केवल आत्महत्या करने से रोका अपितु उसे अपने घर पर रखकर उसकी देखभाल की और समय पर डिलीवरी करवाई। बाद में उन्होंने उसके पुत्र यशवंत को दत्तक पुत्र के रूप में गोद ले लिया और ख़ूब पढ़ाया-लिखाया जो बाद में एक प्रसिद्ध डॉक्टर बना।

*कवयित्री के रूप में सावित्रीबाई फूले*
उन्होंने दो काव्य पुस्तकें लिखीं-
‘काव्य फूले’
‘बावनकशी सुबोधरत्नाकर’
बच्चों को विद्यालय आने के लिए प्रेरित करने के लिए वे कहा करती थीं-
“सुनहरे दिन का उदय हुआ आओ प्यारे बच्चों आज
हर्ष उल्लास से तुम्हारा स्वागत करती हूं आज”
*पिछड़ा शोषित उत्थान में अतुलनीय योगदान*
सावित्रीबाई फूले ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने जीवनकाल में पुणे में ही उन्होंने 18 महिला विद्यालय खोले। 1854 ज्योतिबा फूले और सावित्रीबाई फूले ने एक अनाथ-आश्रम खोला, यह भारत में किसी व्यक्ति द्वारा खोला गया पहला अनाथ-आश्रम था। साथ ही अनचाही गर्भावस्था की वजह से होने वाली शिशु हत्या को रोकने के लिए उन्होंने बालहत्या प्रतिबंधक गृह भी स्थापित किया।

समाजोत्थान के अपने मिशन पर कार्य करते हुए ज्योतिबा ने 24 सितंबर 1873 को अपने अनुयायियों के साथ *‘सत्यशोधक समाज’* नामक संस्था का निर्माण किया। वे स्वयं इसके अध्यक्ष थे और सावित्रीबाई फूले महिला विभाग की प्रमुख। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य शूद्रों(obc) और अति शूद्रों को उच्च जातियों के शोषण से मुक्त कराना था। ज्योतिबा के कार्य में सावित्रीबाई ने बराबर का योगदान दिया। ज्योतिबा फूले ने जीवन भर निम्न जाति, महिलाओं और पिछड़े शोषितों के उद्धार के लिए कार्य किया। इस कार्य में उनकी धर्मपत्नी सावित्रीबाई फूले ने जो योगदान दिया वह अद्वितीय है। यहाँ तक की कई बार ज्योतिबा फूले स्वयं पत्नी सावित्रीबाई फूले से मार्गदर्शन प्राप्त करते थे।
28 नवम्बर 1890 को महात्मा ज्योतिबा फुले की मृत्यु के बाद उनके अनुयायियों के साथ ही सावित्रीबाई फूले ने भी सत्य शोधक समाज को दूर-दूर तक पहुँचाने, अपने पति महात्मा ज्योतिबा फूले के अधूरे कार्यों को पूरा करने व समाज सेवा का कार्य जारी रखा।
*मृत्यु- इतनी बड़ी करुणा की देवी कि, मौत को भी गले लगा लिया*
सन् 1897 में पुणे में भयंकर प्लेग फैला। प्लेग के रोगियों की सेवा करते हुए, प्लेग से तड़पते हुए अछूत जाति के बच्चे को पीठपर लाद कर लाने के कारण सावित्रीबाई फूले स्वयं भी प्लेग की चपेट में आ गईं और 10 मार्च सन् 1897 को उनका भी देहावसान हो गया।

*सन्देश-*
उस ज़माने में ये सब कार्य करने इतने सरल नहीं थे जितने आज लग सकते हैं। अनेक कठिनाइयों और समाज के प्रबल विरोध के बावजूद महिलाओं का जीवनस्तर सुधारने व उन्हें शिक्षित तथा रूढ़िमुक्त करने में सावित्रीबाई फूले का जो महत्त्वपूर्ण दया, त्याग और योगदान रहा है उसके लिए देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा।
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*हमे क्या करना चाहिए ?*
*3 जनवरी,* 'सावित्रीबाई फुले जयंती' एक राष्ट्रीय उत्सव की तरह मनाना चाहिए
1 हर गांव गली चौक मोहल्ले में सावित्रीबाई फुले की तश्वीर लगाकर उनके सम्मान में इकठ्ठा होकर उनकी तश्वीर को माल्यार्पण करना चाहिए ।

2. उनके जीवन दर्शन पर चर्चा करनी चाहिए और महात्मा फूले की किताब *गुलामगिरी* गिफ्ट करनी चाहिए ।🌹🌹🌹

*बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का परिनिर्वाण दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया*बुद्ध विहार साधना केंद्र संस्थान (ट्रस्ट), जूह...
06/12/2025

*बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का परिनिर्वाण दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया*

बुद्ध विहार साधना केंद्र संस्थान (ट्रस्ट), जूही, कानपुर नगर के तत्वावधान में विश्व रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी का परिनिर्वाण दिवस बड़ी श्रद्धा, विनम्रता और गरिमा के साथ मनाया गया।

भारत में जब-जब संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की बात होती है, तब बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर का नाम आदरपूर्वक स्मरण किया जाता है। 06 दिसंबर 1956 का दिन भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है, क्योंकि इसी दिन राष्ट्र ने अपने संविधान निर्माता, समाज सुधारक और करोड़ों वंचित–शोषित लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले इस महानायक को खो दिया। इसलिए यह दिवस पूरे देश में परिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है और बाबा साहेब को श्रद्धांजलि दी जाती है।

देशभर में आयोजित कार्यक्रमों की तरह इस वर्ष भी विभिन्न स्थानों पर लोगों ने बाबा साहेब के महान योगदान, उनके विचारों और मानवतावादी दृष्टिकोण को याद किया। यह दिन हमें उनके सिद्धांतों—समानता, बंधुत्व, वैज्ञानिक सोच और न्याय—को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है। डॉ. आंबेडकर केवल किसी एक समुदाय के नेता नहीं थे, बल्कि पूरे भारत राष्ट्र के पथप्रदर्शक, ज्ञानदीप, समाज परिवर्तन के अग्रदूत और विश्व मानवता के प्रेरक थे।

इसी अवसर पर बुद्ध विहार साधना केंद्र संस्थान, जूही, कानपुर में आयोजित कार्यक्रम में पूज्य भदन्त दीपांकर महास्थवीर जी द्वारा प्रेरणादायी धम्म प्रवचन दिया गया। गुरु जी ने अपने उपदेश में समाज में शांति, करुणा, समानता और परस्पर सम्मान की भावना को बढ़ाने का संदेश दिया तथा समस्त देशवासियों के सुख-समृद्धि हेतु मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।

भवतु सब्ब मंगलं।

✍️ भिक्खु दीप रतन
📞 9453651670, 6392349943

 #अनिच्चा_वत_सङ्खारा .....सभी संस्कार (व्यक्ति, वस्तुएं घटनाएं इत्यादि) अनित्य हैं।अत्यंत दुःखद मन से सूचित करना है कि  ...
31/10/2025

#अनिच्चा_वत_सङ्खारा .....
सभी संस्कार (व्यक्ति, वस्तुएं घटनाएं इत्यादि) अनित्य हैं।

अत्यंत दुःखद मन से सूचित करना है कि परम पुजनीय गुरु जी (भदन्त ज्ञानेश्वर महास्थवीर) अध्यक्ष- कुशीनगर भिक्खुसंघ हम लोगो के बीच नही रहे।

उन्होने लखनऊ के मेदांता हास्पिटल में अतिंम सास लिया , उनका पार्थिव शरीर आज शाम तक कुशीनगर लाया जायेगा।

Aniccha Vata Sankhara...
All impressions (persons, objects, events, etc.) are impermanent.

It is with profound sadness that we inform you that our most revered Guru Ji
(Bhadant Dnyaneshwar Mahasthavir), President of the Kushinagar Bhikkhu Sangha, is passed away.

He breathed his last at Medanta Hospital in Lucknow. His body will be brought to Kushinagar this evening.

16/10/2025
कानपुर महानगर के सभी सम्मानित उपासक और उपासिकाओ के द्वारा बुद्ध विहार साधना केंद्र संस्थान में वर्षावास का कार्यक्रम होन...
12/10/2025

कानपुर महानगर के सभी सम्मानित उपासक और उपासिकाओ के द्वारा बुद्ध विहार साधना केंद्र संस्थान में वर्षावास का कार्यक्रम होने जा रहा है और आप सभी के, तन-मन-धन से सहयोग करते रहते हैं और बुद्ध विहार साझ चुका है, आपके स्वागत के लिए, आपका वेट कर रहा है।

12/10/2025

कल, 12 /10/2025, को बुद्ध विहार साधना केंद्र संस्थान में वर्षावास का कार्यक्रम होने जा रहा है। बुद्ध विहार साधना केंद्र संस्थान आप सभी का स्वागत करता है । परमपूज्य भदंत दीपांकर महास्थविर जी:- बुद्ध विहार साधना केंद्र संस्थान (ट्रस्ट), कानपुर, उत्तर प्रदेश इंडिया, अखिल भारतीय भिक्खु महासंघ शाखा, उत्तर प्रदेश ,इंडिया के द्वारा अपील की गई।

*धम्मदीक्षा एवं वर्षावास समापन समारोह**दिनाँक:- 12 अक्टूबर 2025, दिन , रविवार**स्थान :  बुद्ध विहार साधना  केंद्र, संस्थ...
07/10/2025

*धम्मदीक्षा एवं वर्षावास समापन समारोह*

*दिनाँक:- 12 अक्टूबर 2025, दिन , रविवार*

*स्थान : बुद्ध विहार साधना केंद्र, संस्थान, जूही बम्बूरहिया कानपुर नगर (उ प्र) भारत*

☸️*।।कार्यक्रम विवरण।।*☸️
*🌻नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स🌻*
• पूज्य भिक्खु संघ द्वारा ,बुद्ध वन्दना ,त्रिशरण, पंचशील, परित्रणपाठ, प्रातः 9 बजे से 10:30 बजे तक
• भिक्खु संघ का भोजनदान 11 बजे से 12 बजे तक,
• बौद्ध भिक्खुओ द्वारा, धम्म प्रवचन/संगीत, दोपहर, 4 बजे से सायं काल तक

“भिक्षुओ, बहुजनसुख के लिये, बहुजन हित के लिये , लोगों को सुख पंहुचाने के लिये निरन्तर भ्रमण करते रहो। आदि-मध्य-और अन्त स...
07/10/2025

“भिक्षुओ, बहुजनसुख के लिये, बहुजन हित के लिये , लोगों को सुख पंहुचाने के लिये निरन्तर भ्रमण करते रहो। आदि-मध्य-और अन्त सभी अवस्थाओं के लिये कल्याणमय धर्म का भाव और आचरण- सहित प्रकाश करते रहो ।"

*दिनाँक 7 अक्टूबर 2025 को कानपुर महानगर में सभी श्रद्धावन महाउपासकों और महाउपासिकाओं से बौद्ध, धम्म, संघ के विकास के लिए जनसंपर्क किया गया* और भगवान बुद्ध की अमृतवाणी पाली भाषा में लोगों की बोलचाल में लाना और संदेश देना, दयालु और सरल जीवनशैली, जातिभेद को खत्म करना और सभी का संघ में स्वागत करना, शाही संरक्षण प्राप्त करना, और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देना इन सभी पर चर्चा हुए और
*दिनाँक 12 अक्टूबर 2025 को धम्मदीक्षा एवं वर्षावास समापन समारोह, बुद्ध विहार साधना केन्द्र संस्थान ,जूही, कानपुर में होने जा रहा है।*

*पवारणा दिवस की आप सभी देशवासियों को हार्दिक अन्नान शुभकामनाएं एवं मंगलकामनाएं।**आज दिनाँक 7 अक्टूबर 2025 को बुद्ध विहार...
07/10/2025

*पवारणा दिवस की आप सभी देशवासियों को हार्दिक अन्नान शुभकामनाएं एवं मंगलकामनाएं।*

*आज दिनाँक 7 अक्टूबर 2025 को बुद्ध विहार साधना केंद्र संस्थान, जूही, कानपुर में पुजनीय भदन्त दीपांकर महास्थविर जी की अध्यक्षता में बौद्ध भिक्खुओं का वर्षावास समाप्त (पवारणा) किया गया*

इसी कड़ी में *दिनाँक 12 अक्टूबर 2025 को धम्मदीक्षा एवं वर्षावास समापन समारोह, बुद्ध विहार साधना केन्द्र संस्थान ,जूही, कानपुर में होने जा रहा है।*

भिक्खुओं के एकांत एक स्थान पर धर्माभ्यास के समाप्ति का दिन, यानि वर्षावास के समाप्ति का दिन होता है. इस दिन धम्म देशना… पूजा… ध्यानाभ्यास के साथ बौद्ध जनता द्वारा भिक्खु संघ यानि बौद्ध भिक्खुओं को चीवर दान, भोजन दान और उपहार दिए जाते हैं. बुद्ध विहारों को सजाया जाता है. यथा सामर्थ्यनुसार बौद्ध जनता धम्मोत्सव का आयोजन करती है. वर्षावास काल मे चार माह- आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन मास- की पूर्णमासी पड़ती है. इन चारों माह की पूर्णमासी का बौद्ध परंपरा में उपरोक्त घटनाओं के कारण बुद्ध शासन में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है.

• बौद्ध परंपरा में इसे “वस्सावास” (Vassa) कहा जाता है।
• यह भी तीन महीने (आषाढ़ से आश्विन तक) का वर्षा ऋतु का निवासकाल होता है।
• समापन के दिन भिक्षु संघ “कठिन-चिवरदान” (नए वस्त्र अर्पण) का आयोजन करता है।
• इसे “पवारणा दिवस” (Pavāraṇā Day) भी कहते हैं, जब भिक्षु एक-दूसरे को अपने दोष बताने और सुधारने की अनुमति देते हैं।

यहाँ एक “वर्षावास समापन गाथा” (जैन परंपरा के अनुसार) दी गई है, जो सामान्यतः वर्षावास की समाप्ति के अवसर पर वर्षावास पूर्ण होने पर, समाज के भावों को व्यक्त करता हूं — श्रद्धा, कृतज्ञता और मंगलकामना के रूप में।

वर्षावास की वेला आई, साधु रुकें प्रभु ध्यान लगाई।
चार महीनों तक किया निवास, अब आया विहार का काल।
क्षमा, मैत्री का भाव बढ़े, हर जीव के मन से द्वेष झड़े।
वर्षावास समापन का दिन, मंगलमय हो जीवन–दिन।

गुरुवर बढ़ें नव विहार को, शुभाशीष दें संसार को।
हम सब मनाएँ हर्ष अपार, जय हो धर्म, जय हो अहिंसाकार।
🙏🙏🙏✍️✍️✍️🙏🙏🙏

“भिक्षुओ, बहुजनसुख के लिये, बहुजन हित के लिये , लोगों को सुख पंहुचाने के लिये निरन्तर भ्रमण करते रहो। आदि-मध्य-और अन्त स...
05/10/2025

“भिक्षुओ, बहुजनसुख के लिये, बहुजन हित के लिये , लोगों को सुख पंहुचाने के लिये निरन्तर भ्रमण करते रहो। आदि-मध्य-और अन्त सभी अवस्थाओं के लिये कल्याणमय धर्म का भाव और आचरण- सहित प्रकाश करते रहो ।"

*दिनाँक 4-5 अक्टूबर 2025 को कानपुर महानगर में सभी श्रद्धावन महाउपासकों और महाउपासिकाओं से बौद्ध, धम्म, संघ के विकास के लिए जनसंपर्क किया गया* और भगवान बुद्ध की अमृतवाणी पाली भाषा में लोगों की बोलचाल में लाना और संदेश देना, दयालु और सरल जीवनशैली, जातिभेद को खत्म करना और सभी का संघ में स्वागत करना, शाही संरक्षण प्राप्त करना, और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देना इन सभी पर चर्चा हुए और
*दिनाँक 12 अक्टूबर 2025 को धम्मदीक्षा एवं वर्षावास समापन समारोह, बुद्ध विहार साधना केन्द्र संस्थान ,जूही, कानपुर में होने जा रहा है।*

“भिक्षुओ, बहुजनसुख के लिये, बहुजन हित के लिये , लोगों को सुख पंहुचाने के लिये निरन्तर भ्रमण करते रहो। आदि-मध्य-और अन्त स...
02/10/2025

“भिक्षुओ, बहुजनसुख के लिये, बहुजन हित के लिये , लोगों को सुख पंहुचाने के लिये निरन्तर भ्रमण करते रहो। आदि-मध्य-और अन्त सभी अवस्थाओं के लिये कल्याणमय धर्म का भाव और आचरण- सहित प्रकाश करते रहो ।"

*दिनाँक 2 अक्टूबर 2025 को कानपुर महानगर में सभी श्रद्धावन महाउपासकों और महाउपासिकाओं से बौद्ध, धम्म, संघ के विकास के लिए जनसंपर्क किया गया* और भगवान बुद्ध की अमृतवाणी पाली भाषा में लोगों की बोलचाल में लाना और संदेश देना, दयालु और सरल जीवनशैली, जातिभेद को खत्म करना और सभी का संघ में स्वागत करना, शाही संरक्षण प्राप्त करना, और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देना इन सभी पर चर्चा हुए और
*दिनाँक 12 अक्टूबर 2025 को धम्मदीक्षा एवं वर्षावास समापन समारोह, बुद्ध विहार साधना केन्द्र संस्थान ,जूही, कानपुर में होने जा रहा है।*

“भिक्षुओ, बहुजनसुख के लिये, बहुजन हित के लिये , लोगों को सुख पंहुचाने के लिये निरन्तर भ्रमण करते रहो। आदि-मध्य-और अन्त स...
29/09/2025

“भिक्षुओ, बहुजनसुख के लिये, बहुजन हित के लिये , लोगों को सुख पंहुचाने के लिये निरन्तर भ्रमण करते रहो। आदि-मध्य-और अन्त सभी अवस्थाओं के लिये कल्याणमय धर्म का भाव और आचरण- सहित प्रकाश करते रहो ।"

*दिनाँक 28 सितंबर 2025 को कानपुर महानगर में सभी श्रद्धावन महाउपासकों और महाउपासिकाओं से बौद्ध, धम्म, संघ के विकास के लिए जनसंपर्क किया गया* और भगवान बुद्ध की अमृतवाणी पाली भाषा में लोगों की बोलचाल में लाना और संदेश देना, दयालु और सरल जीवनशैली, जातिभेद को खत्म करना और सभी का संघ में स्वागत करना, शाही संरक्षण प्राप्त करना, और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देना इन सभी पर चर्चा हुए और
*दिनाँक 12 अक्टूबर 2025 को धम्मदीक्षा एवं वर्षावास समापन समारोह, बुद्ध विहार साधना केन्द्र संस्थान ,जूही, कानपुर में होने जा रहा है।*

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