Doctor Ayurveda- BAMS

Doctor Ayurveda- BAMS Ayurved ,Yog से ही स्वस्थ जीवन संभव है। 🇮🇳
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01/01/2026
01/01/2026

“जब परिवार टूटते हैं, तब मार्केट को फायदा होता है” — कैसे?● संयुक्त परिवार → एक खपत|एक रसोई ,एक फ्रिज, एक टीवी, एक वाई-फ...
31/12/2025

“जब परिवार टूटते हैं, तब मार्केट को फायदा होता है” — कैसे?
● संयुक्त परिवार → एक खपत|
एक रसोई ,एक फ्रिज, एक टीवी, एक वाई-फाई|
कपड़े, वाहन, नौकर, बिजली – साझा|
मार्केट की बिक्री सीमित रहती है|

●परिवार टूटता है → खपत कई गुना|
अब वही लोग अलग-अलग रहते हैं:
1 घर → 2–3 घर
1 किचन → 2–3 किचन
1 फ्रिज → 3 फ्रिज
1 गैस कनेक्शन → 3 कनेक्शन
OTT, इंटरनेट, मोबाइल – सब अलग|
मार्केट की बिक्री 2–3 गुना|

● भावनात्मक दूरी = उपभोग से भरपाई|
परिवार टूटने पर: अकेलापन ,तनाव ,असुरक्षा|

इसे ढकने के लिए:
ऑनलाइन शॉपिंग, बाहर खाना, महंगे गैजेट, मनोरंजन,
“Comfort Buying” बढ़ती है|

● बच्चों की परवरिश भी मार्केट आधारित|
संयुक्त परिवार में: दादी-नानी ,घर का संस्कार|

अलग परिवार में:
डे-केयर,
ट्यूशन,
कोचिंग,
स्क्रीन और ऐप्स,
संस्कार की जगह सब्सक्रिप्शन|

● बीमारी भी एक इंडस्ट्री बनती है|
अकेलेपन और तनाव से: मानसिक रोग ,lifestyle diseases|
फिर:
दवाइयाँ,थेरेपी,हॉस्पिटल,इंश्योरेंस
बीमारी = बिज़नेस मॉडल|

● इसलिए सिस्टम क्या बढ़ावा देता है?
Individualism,
“My life, my rules”,
जल्दी शादी-तलाक,
करियर > रिश्ते,

क्योंकि टूटा हुआ व्यक्ति अच्छा ग्राहक होता है
पर जुड़ा हुआ परिवार आत्मनिर्भर होता है|

मजबूत परिवार = कमजोर बाजार|
कमजोर परिवार = मजबूत बाजार|

इसलिए संस्कृति, परिवार और रिश्ते
सिर्फ भावनात्मक नहीं, आर्थिक सुरक्षा भी हैं।

  , आयुष विभाग MS_Shalya,   MS_shalakya
31/12/2025

, आयुष विभाग
MS_Shalya, MS_shalakya

 #उत्तरप्रदेश CMO को आयुर्वेद क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन करने का अधिकार नहीं है। आयुर्वेद/AYUSH क्लीनिक AYUSH विभाग के अधीन ...
30/12/2025

#उत्तरप्रदेश
CMO को आयुर्वेद क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन करने का अधिकार नहीं है।

आयुर्वेद/AYUSH क्लीनिक AYUSH विभाग के अधीन आते हैं, न कि एलोपैथी CMO के।

Clinical Establishment Act के नाम पर CMO द्वारा रजिस्ट्रेशन मांगना, बिना स्पष्ट राज्य आदेश के, अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

जब नियुक्ति, नियंत्रण और नियमन AYUSH विभाग करता है, तो क्लीनिक रजिस्ट्रेशन भी उसी का विषय है।

इसलिए CMO द्वारा आयुर्वेद क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन कानूनी रूप से प्रश्नास्पद है।

इस फैसले से आयुष डॉक्टरों का सरकारी अस्पतालों में क्लिनिकल एक्सपोज़र खत्म हो जाएगा।इमरजेंसी, ICU, ट्रॉमा और हाई केस-लोड ...
29/12/2025

इस फैसले से आयुष डॉक्टरों का सरकारी अस्पतालों में क्लिनिकल एक्सपोज़र खत्म हो जाएगा।

इमरजेंसी, ICU, ट्रॉमा और हाई केस-लोड का अनुभव नहीं मिलेगा।

क्रॉस-पैथी समझ और प्रैक्टिकल स्किल कमजोर होंगी।

रोज़गार और प्रोफेशनल कॉन्फिडेंस पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष डॉक्टर की निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है।

कुल मिलाकर यह निर्णय आयुष डॉक्टरों की क्लिनिकल ग्रोथ और व्यावहारिक दक्षता को सीमित करता है।

यह सूची बताती है कि दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज़ में एडमिशन मिलना बहुत कठिन है|Acceptance Rate बहुत कम है, मतलब बहुत कम छ...
29/12/2025

यह सूची बताती है कि दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज़ में एडमिशन मिलना बहुत कठिन है|

Acceptance Rate बहुत कम है,
मतलब बहुत कम छात्रों का चयन होता है|

IIT, Harvard, MIT, Stanford जैसी जगहों पर
100 में से केवल 2–5 छात्र ही चुने जाते हैं|

इसलिए इन संस्थानों में पढ़ने के लिए
कड़ी मेहनत
उच्च योग्यता
ज़बरदस्त प्रतिस्पर्धा जरूरी होती है


 #उत्तराखंड  🔴 CMO के खिलाफ संभावित कानूनी कार्यवाही1️⃣ अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से बाहर आदेश|CMO का प्रशासनिक नियं...
29/12/2025

#उत्तराखंड
🔴 CMO के खिलाफ संभावित कानूनी कार्यवाही

1️⃣ अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से बाहर आदेश|
CMO का प्रशासनिक नियंत्रण MBBS/एलोपैथिक सेवाओं तक सीमित होता है
AYUSH डॉक्टरों पर “झोलाछाप” कहना
कार्य बहिष्कार/ड्यूटी रोकने की चेतावनी देना
➡️ यह Ultra Vires Act (अधिकार से बाहर) माना जाएगा
📌 कानूनी आधार
AYUSH Ministry Notification
राज्य AYUSH सेवा नियम

2️⃣ मानहानि (Defamation – IPC 499/500)
“झोलाछाप डॉक्टर” कहना
➡️ व्यक्तिगत व सामूहिक मानहानि
✔️ AYUSH डॉक्टर वैधानिक रूप से पंजीकृत चिकित्सक हैं
✔️ सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के कई निर्णय AYUSH की वैधता मानते हैं
➡️ CMO के खिलाफ मानहानि का केस दायर हो सकता है

3️⃣ संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन
Article 14 – समानता का अधिकार
समान सरकारी सेवा में भेदभाव
Article 19(1)(g) – पेशा करने का अधिकार
वैध चिकित्सा अभ्यास में बाधा
➡️ हाईकोर्ट में रिट याचिका (Writ Petition)

4️⃣ सेवा नियमों का उल्लंघन
AYUSH डॉक्टरों की ड्यूटी, वेतन या कार्य रोकना
➡️ Conduct Rules का उल्लंघन
✔️ विभागीय जांच
✔️ स्पष्टीकरण (Show Cause)
✔️ निंदा/दंडात्मक कार्यवाही

5️⃣ राष्ट्रीय/राज्य मानवाधिकार आयोग
सम्मान व पेशे की गरिमा का हनन
मानसिक प्रताड़ना
➡️ NHRC / SHRC में शिकायत

🟢 AYUSH पक्ष द्वारा क्या कदम उठाए जा सकते हैं

✅ 1. लिखित आपत्ति (Representation)
स्वास्थ्य सचिव
प्रधान सचिव (AYUSH)
राज्य आयुष मंत्री

✅ 2. लीगल नोटिस
मानहानि व अधिकार अतिक्रमण पर

✅ 3. हाईकोर्ट में याचिका
आदेश रद्द (Quash Order)
भविष्य में हस्तक्षेप पर रोक

✅ 4. मीडिया व RTI
किस नियम के तहत “झोलाछाप” कहा?
CMO को AYUSH पर आदेश देने का अधिकार?

PFAS क्या है? PFAS = Per- and Polyfluoroalkyl Substancesये मानव-निर्मित (man-made) रसायन हैं, जिन्हें उनकी तेल, पानी, गर...
28/12/2025

PFAS क्या है?

PFAS = Per- and Polyfluoroalkyl Substances
ये मानव-निर्मित (man-made) रसायन हैं, जिन्हें उनकी तेल, पानी, गर्मी और दाग-धब्बों से बचाने की क्षमता के कारण इस्तेमाल किया जाता है।
इन्हें “Forever Chemicals” भी कहा जाता है क्योंकि ये शरीर और पर्यावरण में बहुत धीरे टूटते हैं।

PFAS कहाँ-कहाँ मिलते हैं?

नॉन-स्टिक बर्तन (Teflon)
फास्ट-फूड रैपर,
पिज़्ज़ा बॉक्स
वाटरप्रूफ कपड़े, रेनकोट
फोम (Fire-fighting foam)
कॉस्मेटिक्स, शैम्पू
पैकेज्ड पानी/खाना (कुछ जगह)

PFAS के फायदे (क्यों बनाए गए)

चीज़ें चिपकती नहीं (नॉन-स्टिक)
पानी और तेल से सुरक्षा
कपड़े और काग़ज़ जल्दी खराब नहीं होते
आग बुझाने में प्रभावी फोम
इसलिए इंडस्ट्री और रोज़मर्रा के सामान में इनका इस्तेमाल हुआ।

PFAS के नुकसान (यहीं असली समस्या है )

1. शरीर पर असर
हार्मोनल गड़बड़ी
थायरॉइड समस्या
लीवर डैमेज
इम्युनिटी कम होना
बांझपन / स्पर्म क्वालिटी कम
बच्चों में ग्रोथ व ब्रेन डेवलपमेंट पर असर

2. कैंसर का खतरा
किडनी कैंसर
टेस्टिकुलर कैंसर

3. आयुर्वेदिक दृष्टि से
आम (Toxins) का संचय,
अग्नि मंदता,
यकृत (लिवर) पर विषाक्त प्रभाव,
ओज क्षय → रोग प्रतिरोधक क्षमता कम,

PFAS शरीर में कैसे जाते हैं?

दूषित पानी पीने से
पैकेज्ड/फास्ट-फूड खाने से
नॉन-स्टिक बर्तन में बार-बार पकाने से
स्किन प्रोडक्ट्स से अवशोषण

PFAS से बचाव कैसे करें? (Practical Tips)

● नॉन-स्टिक की जगह लोहे / स्टील / कास्ट आयरन का उपयोग।
● फास्ट-फूड, पैकेज्ड फूड कम।
● RO + Activated Carbon Filter।
● कॉस्मेटिक्स में “PFAS-free” देखें।
● प्लास्टिक में गरम खाना न रखें।

आयुर्वेदिक सपोर्ट (डिटॉक्स हेतु)
(डॉक्टर की सलाह से)
त्रिफला ,गुडूची ,भृंगराज
यकृत शोधन रस
पंचकर्म (विशेषकर विरेचन)

PFAS सुविधा देता है, लेकिन स्वास्थ्य चुरा लेता है।
आज की जीवनशैली में ये मौन ज़हर की तरह शरीर में जमा हो रहा है।

IMA प्रेस रिलीज़ का बिन्दुवार खण्डन1️⃣ “आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी का प्रशिक्षण नहीं है” – भ्रामक दावा❌ यह कथन तथ्यही...
27/12/2025

IMA प्रेस रिलीज़ का बिन्दुवार खण्डन
1️⃣ “आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी का प्रशिक्षण नहीं है” – भ्रामक दावा
❌ यह कथन तथ्यहीन है।

✅ आयुर्वेद में MS शल्यतंत्र एवं MS शालाक्यतंत्र स्वतंत्र और मान्यता प्राप्त स्नातकोत्तर विषय हैं।
✅ सुश्रुत संहिता विश्व का प्राचीनतम सर्जरी ग्रंथ है।

2️⃣ “MBBS जैसी ट्रेनिंग नहीं है” – तुलना अनुचित|
❌ यह कथन दो अलग चिकित्सा प्रणालियों को एक मानक पर तौलता है।

✅ आयुर्वेद की सर्जरी अपने सिद्धांतों, उपकरणों और प्रक्रियाओं पर आधारित है।
✅ क्षारसूत्र, अग्निकर्म, रक्तमोक्षण जैसी सर्जरी आधुनिक चिकित्सा से अलग लेकिन वैज्ञानिक हैं।

3️⃣ “मरीजों की सुरक्षा को खतरा” – बिना आंकड़ों का आरोप
❌ IMA ने कोई डेटा, स्टडी या कोर्ट जजमेंट प्रस्तुत नहीं किया।

✅ दशकों से भारत में लाखों क्षारसूत्र सर्जरी सुरक्षित रूप से की जा रही हैं।
✅ AYUSH अस्पतालों में सर्जरी राज्य सरकार की निगरानी में होती है।

4️⃣ कानूनी स्थिति को नजरअंदाज किया गया
❌ IMA का बयान कानून से ऊपर नहीं है।

✅ भारत सरकार की Gazette Notification (2020) में
MS (Shalya / Shalakya) आयुर्वेद को निर्दिष्ट सर्जरी की वैधानिक अनुमति है।
✅ सुप्रीम कोर्ट ने भी आयुर्वेदिक प्रैक्टिस को वैध माना है, बशर्ते सीमा में हो।

5️⃣ “सीमाएं स्पष्ट रहें” – पहले से स्पष्ट हैं
❌ IMA यह दर्शा रहा है कि सीमाएँ तय नहीं हैं।

✅ NCISM / CCIM द्वारा Scope of Practice पहले से परिभाषित है।
आयुर्वेदिक डॉक्टर Allopathic surgery का दावा नहीं करते।

6️⃣ डॉक्टरों की कमी पर कोई समाधान नहीं|
❌ IMA ग्रामीण और सरकारी अस्पतालों में सर्जन की कमी पर मौन है।
✅ आयुर्वेदिक सर्जन ग्रामीण भारत में सुलभ, किफायती और प्रभावी विकल्प हैं।

7️⃣ आयुर्वेद का सम्मान शब्दों में, विरोध कर्मों में|
❌ IMA कहता है “हम आयुर्वेद का सम्मान करते हैं”
❌ लेकिन सर्जरी से वंचित करने की मांग करता है
➡️ यह दोहरे मापदंड को दर्शाता है।

यह प्रेस रिलीज़ कानूनी नहीं, संगठनात्मक राय है|
आयुर्वेदिक सर्जरी वैज्ञानिक, वैधानिक और सुरक्षित है|
आयुर्वेदिक डॉक्टरों के अधिकार कानून और संविधान से संरक्षित हैं|

IMA को भ्रम फैलाने के बजाय सहयोगात्मक नीति अपनानी चाहिए

Dr. Otto Warburg ने यह सिद्ध किया कि कैंसर कोशिकाओं की ऊर्जा-प्रणाली सामान्य कोशिकाओं से भिन्न होती है।Alkaline diet शरी...
26/12/2025

Dr. Otto Warburg ने यह सिद्ध किया कि कैंसर कोशिकाओं की ऊर्जा-प्रणाली सामान्य कोशिकाओं से भिन्न होती है।
Alkaline diet शरीर का pH नहीं बदलती, लेकिन सूजन कम कर, पोषण बढ़ाकर और चयापचय सुधारकर कैंसर सहित कई रोगों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती है।

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