31/12/2025
“जब परिवार टूटते हैं, तब मार्केट को फायदा होता है” — कैसे?
● संयुक्त परिवार → एक खपत|
एक रसोई ,एक फ्रिज, एक टीवी, एक वाई-फाई|
कपड़े, वाहन, नौकर, बिजली – साझा|
मार्केट की बिक्री सीमित रहती है|
●परिवार टूटता है → खपत कई गुना|
अब वही लोग अलग-अलग रहते हैं:
1 घर → 2–3 घर
1 किचन → 2–3 किचन
1 फ्रिज → 3 फ्रिज
1 गैस कनेक्शन → 3 कनेक्शन
OTT, इंटरनेट, मोबाइल – सब अलग|
मार्केट की बिक्री 2–3 गुना|
● भावनात्मक दूरी = उपभोग से भरपाई|
परिवार टूटने पर: अकेलापन ,तनाव ,असुरक्षा|
इसे ढकने के लिए:
ऑनलाइन शॉपिंग, बाहर खाना, महंगे गैजेट, मनोरंजन,
“Comfort Buying” बढ़ती है|
● बच्चों की परवरिश भी मार्केट आधारित|
संयुक्त परिवार में: दादी-नानी ,घर का संस्कार|
अलग परिवार में:
डे-केयर,
ट्यूशन,
कोचिंग,
स्क्रीन और ऐप्स,
संस्कार की जगह सब्सक्रिप्शन|
● बीमारी भी एक इंडस्ट्री बनती है|
अकेलेपन और तनाव से: मानसिक रोग ,lifestyle diseases|
फिर:
दवाइयाँ,थेरेपी,हॉस्पिटल,इंश्योरेंस
बीमारी = बिज़नेस मॉडल|
● इसलिए सिस्टम क्या बढ़ावा देता है?
Individualism,
“My life, my rules”,
जल्दी शादी-तलाक,
करियर > रिश्ते,
क्योंकि टूटा हुआ व्यक्ति अच्छा ग्राहक होता है
पर जुड़ा हुआ परिवार आत्मनिर्भर होता है|
मजबूत परिवार = कमजोर बाजार|
कमजोर परिवार = मजबूत बाजार|
इसलिए संस्कृति, परिवार और रिश्ते
सिर्फ भावनात्मक नहीं, आर्थिक सुरक्षा भी हैं।