01/03/2026
किसी का क्रोध देखकर हम अक्सर तुरंत निर्णय कर लेते हैं —
“यह व्यक्ति ऐसा ही है।”
लेकिन सच थोड़ा गहरा है। क्रोध कई बार स्वभाव नहीं, भीतर जमा हुआ दर्द होता है। अनसुनी भावनाएँ, अधूरी अपेक्षाएँ, पुराने घाव... जब उन्हें शब्द नहीं मिलते, तो वे क्रोध बनकर बाहर आते हैं।
जो व्यक्ति चिल्ला रहा है, संभव है वह भीतर से बहुत असुरक्षित हो। जो कठोर दिख रहा है, संभव है वह लंबे समय से टूटने से खुद को बचा रहा हो।
यह समझ हमें बदल देती है। हम प्रतिक्रिया देने के बजाय ठहरते हैं। आहत होने के बजाय समझते हैं। और सबसे ज़रूरी.... हम उनकी ऊर्जा को अपने भीतर जगह नहीं देते।