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आश्रम और संचालन : भाग – 6(BTS – पर्दे के पीछे)जब ओशो के साधकों और शिविरों के प्रति भ्रम टूटने लगे।अनेक शिविरों में जाने ...
03/01/2026

आश्रम और संचालन : भाग – 6

(BTS – पर्दे के पीछे)

जब ओशो के साधकों और शिविरों के प्रति भ्रम टूटने लगे।

अनेक शिविरों में जाने और कई ओशो आश्रमों में रहने के बाद, भीतर कुछ बातें बहुत चुपचाप साफ़ होने लगीं। ओशो की दुनिया जैसी बाहर से दिखाई जाती है, वैसी है नहीं। बहुत अच्छे, प्रेमपूर्ण और पहुँचे हुए साधक व सिद्ध भी हैं—इसमें कोई संदेह नहीं। लेकिन वे बहुत विरले हैं। मैं उन्हें प्रणाम करता हूँ।

परन्तु जो ज़्यादातर दिखाई देता है, वह ध्यान के नाम पर छूट पाए हुए लुच्चे, लफंगे, शराबी, नशेड़ी, गंजेड़ी लोगो की भीड़ है। यह कहना कठोर लग सकता है, पर मेरा अनुभव यही रहा।

ओशो की देशना बिल्कुल स्पष्ट थी—“कुछ भी करो, लेकिन होश रखो।” लेकिन ये लोग कुछ भी करते हैं, पर होश नहीं रखते। ओशो का सारा जोर तो होश पर था। जितना मैंने ओशो को समझा, उनका आशय यह कभी नहीं था कि आदमी बेहूदगी को स्वतंत्रता समझ ले। शोर-शराबा ध्यान नहीं है। “ओशो-ओशो” चिल्लाना ओशो को पुकारना नहीं है है। नाम बदल गया है—बेहोशी वही पुराने आदमी की है।

नृत्य के नाम पर बेहूदगी देखी। ओशो ने इस नृत्य की बात नहीं की थी। उन्होंने कहा था—“हसीबा, खेलिबा, धरीबा ध्यानं।” लेकिन
यहाँ हँसी और खेल है—ध्यान ग़ायब है।

उन्होंने कहा था—“उत्सव आमार जाति, आनंद आमार गोत्र।”
उत्सव और आनंद मनाया जा रहा है, लेकिन यह किस जाति और किस गोत्र का है—इसकी किसी को खबर नहीं। यह तो हमारा निज स्वभाव था, पर निज स्वभाव की ओर नज़र ही नहीं जाती।

कभी समाज में नैतिकता एक सीमा-रेखा का काम करती थी—गलत को गलत कहने का साहस देती थी। लेकिन तथाकथित ओशो सन्यासियों में नैतिकता और आचरण का मूल्य बहुत कम दिखाई दिया। सब कुछ जायज़ है—बस नाम ध्यान का होना चाहिए।

ओशो ने स्त्री को माँ कहा था। यह बहुत पवित्रता से भारी भावना थी। लेकिन यहाँ माँ माँ कहकर माँ को पटाने चल पड़ते हैं। शब्द पवित्र हैं, नज़र पवित्र नहीं।

धीरे-धीरे यह भी समझ में आया कि एक घंटे का ध्यान, ध्यान नहीं होता। ध्यान तो एक जीवन-शैली है। अगर जीवन भर का आचरण बेहोश है, तो एक घंटे की विधि केवल अपने आप को दिलासा देना है। कई लोग 40–50 वर्षों से ध्यान कर रहे हैं और आज भी वहीं खड़े हैं, गोल-गोल घूम रहे हैं। मुझे तो ओशो-कृपा से यह अनुभव हुआ कि ओशो द्वारा दी गई ध्यान पूर्ण जीवन शैली इतनी सशक्त हैं कि 24 घंटे के भीतर साधक को बदल सकती हैं। तो फिर कहीं न कहीं कोई गहरी चूक हो रही है।

मैने यह भी देखा—बहुत-से लोग ओशो शिविरों में मन लगाने आते हैं। उन्हें पता ही नहीं कि ध्यान तो मन की मृत्यु है। और वे यहाँ भी मन को और मज़बूत करने आ रहे हैं। करनी थी चेतना की वृद्धि—हो रही है मन की वृद्धि।

इसके साथ-साथ सुविधाओं की माँग भी दिखी—बहुत बढ़िया भोजन चाहिए, बहुत अच्छी व्यवस्था चाहिए, पूरा आराम चाहिए। और भीतर-ही-भीतर यह अपेक्षा भी कि ध्यान की देवी आसमान से उतरकर गोद में बैठ जाए। न कुछ करना पड़े, न थोड़ा-सा भी कष्ट उठाना पड़े। मेरे अनुभव में ध्यान ऐसे नहीं घटता। ध्यान में तो तपना पड़ता है—जला देना पड़ता है अपनी अब तक बनाई हुई मूरत को।

शिविरों में संख्याओं का भी बड़ा महत्व है—कितने लोग आए, कितनी भीड़ थी। लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है? सत्य के प्यासे हमेशा विरले होते हैं। भीड़ से सत्य पैदा नहीं होता।

एक और बात बहुत स्पष्ट दिखी—यदि आपके पास धन नहीं है, तो अधिकतर ओशो आश्रमों में आपके लिए जगह नहीं है, चाहे आप कितने ही सच्चे साधक क्यों न हों। तब मेरे भीतर प्रश्न उठा—क्या कोई ऐसा आश्रम नहीं हो सकता जहाँ सच्चे साधकों को भोजन, आवास और साधना सम्मान के साथ उपलब्ध हो? मुझे नहीं लगता कि धन ध्यान में बाधा होना चाहिए।

फिर यह भी अनुभव में आया कि सच्चे साधकों के अनुभव सबसे अलग होते हैं। वे भीड़ के नहीं होते। क्या कोई ऐसी व्यवस्था नहीं हो सकती जहाँ उनकी साधना की स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत मार्गदर्शन दिया जा सके?

एक और अजीब बात दिखी—ओशो के शिष्य ओशो को इसलिए पसंद करते हैं कि वे विद्रोही थे। लेकिन यदि कोई ओशो शिष्य विद्रोही हो जाए, तो वही लोग उसका विरोध करने लगते हैं। तब मन में प्रश्न उठा—क्या कोई ऐसा स्थान नहीं हो सकता जहाँ मिसफिट लोगों का स्वागत हो? जहाँ भीड़ में फिट न बैठने वाले साधकों को जगह मिल सके?

यह सब मैं बाहर खड़े होकर नहीं कह रहा। मैं कोई आलोचक नहीं हूँ। मैं भी ओशो का शिष्य हूँ—और 1992 से ओशो जगत के संपर्क में हूँ। यह बातें सुनी-सुनाई नहीं, जिए हुए अनुभव हैं।

इन्हीं अनुभवों के बीच धीरे-धीरे यह भाव भीतर बैठता चला गया कि एक दिन ऐसा आश्रम बनेगा—जहाँ केवल साधना होगी, केवल प्रेम होगा। और यह सारी बेहोशी अपने आप बाहर रह जाएगी।

यहीं से आनंद ग्राम कोई विरोध नहीं, बल्कि एक रचनात्मक उत्तर बनने लगा।

स्वामी विमल कीर्ति
क्रमशः

आश्रम और संचालन : भाग – 5 (BTS – पर्दे के पीछे)जब आदर्श आश्रम का बीज चुपचाप भीतर पड़ाहीलिंग सेंटर जिस बिल्डिंग में चल रह...
02/01/2026

आश्रम और संचालन : भाग – 5 (BTS – पर्दे के पीछे)

जब आदर्श आश्रम का बीज चुपचाप भीतर पड़ा

हीलिंग सेंटर जिस बिल्डिंग में चल रहा था, वह किराए की थी और उसका एक साल का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने को था। उसी समय एक मित्र ने सुझाव दिया कि किसी दूसरी जगह ओशो की लाइब्रेरी शुरू करते हैं और वहीं हीलिंग का काम भी चलता रहेगा। बात बहुत व्यावहारिक थी, कोई बड़ा विचार नहीं था। मैंने सहजता से हाँ कर दी। कई बार जीवन में बड़े मोड़ किसी ऊँचे संकल्प से नहीं, छोटे-से हाँ से शुरू होते हैं।

ओशो की लाइब्रेरी शुरू हुई। गीत-संगीत तैयार किया जाने लगा। किताबें, प्रवचन, कैसेट, फिर डिजिटल सामग्री — सब धीरे-धीरे बहने लगा। देखते-देखते ओशो साहित्य देश की लगभग हर प्रमुख लाइब्रेरी तक पहुँचने लगा। बाहर से देखने पर यह विस्तार था, सफलता थी, गतिविधि थी। लेकिन भीतर एक अलग प्रक्रिया चल रही थी — देखने और समझने की।

इसी बीच अलग-अलग स्थानों पर ओशो ध्यान शिविर आयोजित होने लगे। मनाली का शिविर इनमें खास रहा। हर साल 21 सितंबर से 26 सितंबर तक। एक क्लब हाउस में, पहाड़ों के बीच। देश भर के प्रमुख ध्यान संचालक वहाँ इकट्ठे होते थे। कोई डायनेमिक करा रहा है, कोई कुंडलिनी, कोई नादब्रह्म। बाहर से सब बहुत जीवंत दिखता था।

लेकिन भीतर एक सवाल धीरे-धीरे सिर उठाने लगा —
अगर इतने सालों से ध्यान चल रहा है,
तो आदमी बदला क्यों नहीं?

ओशो की बात बार-बार याद आती थी —
“ध्यान विधि नहीं है, ध्यान जागरूकता है।”
विधियाँ तो सीढ़ी हैं,
लेकिन कई लोग सीढ़ी को ही घर समझकर बैठ गए हैं।

इसी क्रम में मसूरी के पास हथियारी ओशो आश्रम को संभालने की ज़िम्मेदारी भी आई। वहाँ रहकर आश्रम को भीतर से देखने का मौका मिला — उसकी व्यवस्था, उसकी राजनीति, उसकी साधना और उसकी कमजोरियाँ। अनेक ध्यान शिविर हुए। बहुत कुछ सीखा, और उससे भी ज़्यादा अलिखित समझ मिली।

वहीं कहीं, बिना शोर किए, मन में एक बीज पड़ा। कोई संकल्प नहीं था, कोई घोषणा नहीं थी। बस एक भाव उठा — अगर कभी अपना आश्रम बना, तो वह आदर्श नहीं होगा, वह सच्चा होगा। न बहुत नियम, न बहुत छूट। न गुरु बनने की हड़बड़ी, न शिष्य बनाने की लालसा। एक ऐसी जगह जहाँ ध्यान प्रदर्शन न बने, और साधना आदत न बने।

अब पीछे मुड़कर देखता हूँ तो साफ़ दिखता है —
यह सब तैयारी थी।
बिना नक़्शे के, बिना योजना के।
जैसे जीवन खुद कह रहा हो —
तू बस देखता रह, समझता रह…
बनाना जब होगा, बन जाएगा।

यहीं से आनंद ग्राम की संभावना ने भीतर आकार लेना शुरू किया।
तब नाम नहीं था,
रूप नहीं था,
लेकिन दिशा बन चुकी थी।

स्वामी विमल कीर्ति
क्रमशः

आश्रम और संचालन BTS (पर्दे के पीछे)भाग 4 2002 के आसपास की बात है, जब हीलिंग सीखने का जुनून मेरे भीतर पैदा हुआ। पहले करना...
30/12/2025

आश्रम और संचालन BTS (पर्दे के पीछे)
भाग 4

2002 के आसपास की बात है, जब हीलिंग सीखने का जुनून मेरे भीतर पैदा हुआ। पहले करनाल में सीखी, फिर दिल्ली में एक प्रसिद्ध मास्टर से सीखा, कई लेवल किए, हीलिंग सेंटर भी खोला। बाहर से देखने पर सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था—लोग आ रहे थे, उपचार हो रहा था, प्रशिक्षण दिया जा रहा था। लेकिन भीतर धीरे-धीरे एक बात साफ़ होने लगी कि जो भी घट रहा है, वह पूरी तरह मेरे किए से नहीं घट रहा। उस समय यह बात मुझे सौ प्रतिशत स्पष्ट नहीं थी कि सब कुछ परमात्मा के ही किए से हो रहा है, लेकिन मन के भीतर कहीं यह छवि बैठनी शुरू हो गई थी कि कम से कम मेरे किए से तो कुछ खास नहीं हो रहा।

जितना मैं बीच में ज़्यादा आता, उतना ही सब भारी और उलझा हुआ लगता, और जितना पीछे हटता, उतना ही चीज़ें अपने आप सहज रूप से घटने लगतीं। यह समझ पूरी तरह साफ़ नहीं थी, लेकिन भीतर कहीं-न-कहीं यह भाव बैठने लगा था कि मैं केवल एक माध्यम जैसा हूँ, कर्ता नहीं। यहीं से हीलिंग की दुनिया को देखने का ढंग बदलने लगा।

इसी दौरान यह भी साफ़ दिखने लगा कि हीलिंग की दुनिया में बहुत कुछ व्यापार बन चुका है—लेवल, मास्टरशिप, ग्रैंड मास्टरशिप। नाम बदले जा रहे हैं, ढाँचे बदले जा रहे हैं, लेकिन मूल एक ही है। तब यह समझ और गहरी होती चली गई कि असली हीलिंग किसी तकनीक से, किसी विधि से या किसी नाम से नहीं होती। असली हीलिंग बिन किए होती है—झुक जाने से, रिसेप्टिव हो जाने से और बीच से हट जाने से।

धीरे-धीरे यही बात जीवन पर भी लागू होती चली गई। यह समझ बनने लगी कि जीवन की अधिकांश घटनाएँ भी ऐसे ही घटती हैं—बिन किए। आदमी सोचता है कि उसने किया, उसकी मेहनत से हुआ, उसकी योजना से हुआ, लेकिन बाद में पीछे मुड़कर देखने पर दिखता है कि जो होना था वही हुआ और जो नहीं होना था वह लाख कोशिश के बाद भी नहीं हुआ। उस समय यह बात पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी, लेकिन भीतर यह भरोसा बनने लगा था कि कर्ता होने का अहंकार ढीला पड़ रहा है।

यही अधूरी-सी, लेकिन सच्ची समझ आगे चलकर आनंद ग्राम की नींव बनी। आनंद ग्राम किसी पूरी तरह स्पष्ट दर्शन से नहीं बना, बल्कि इसी क्रमिक बोध से बना कि यहाँ “कुछ किया” नहीं जाएगा। यहाँ बस ऐसी जगह बनेगी जहाँ चीज़ें अपने आप घट सकें। जहाँ आदमी थोड़ा पीछे हट सके, थोड़ा झुक सके और परमात्मा के खेल को चलने दे।

इसीलिए आनंद ग्राम में ध्यान या साधना की शुरुआत हमेशा परमात्मा और गुरुजनों की स्मृति और प्रार्थना से होती है, और साधना के बाद कृतज्ञता से। यह याद दिलाने के लिए कि जो भी घटा, वह हमारे किए का परिणाम नहीं था, बल्कि प्रसाद था। यही भाव धीरे-धीरे स्पष्ट होता चला गया और यही आनंद ग्राम की आत्मा बन गया।

स्वामी विमल कीर्ति
क्रमशः 🙏

आश्रम और संचालन BTS (पर्दे के पीछे)भाग  42002 के आसपास की बात है, जब हीलिंग सीखने का जुनून मेरे भीतर पैदा हुआ। पहले करना...
30/12/2025

आश्रम और संचालन BTS (पर्दे के पीछे)
भाग 4

2002 के आसपास की बात है, जब हीलिंग सीखने का जुनून मेरे भीतर पैदा हुआ। पहले करनाल में सीखी, फिर दिल्ली में एक प्रसिद्ध मास्टर से सीखा, कई लेवल किए, हीलिंग सेंटर भी खोला। बाहर से देखने पर सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था—लोग आ रहे थे, उपचार हो रहा था, प्रशिक्षण दिया जा रहा था। लेकिन भीतर धीरे-धीरे एक बात साफ़ होने लगी कि जो भी घट रहा है, वह पूरी तरह मेरे किए से नहीं घट रहा। उस समय यह बात मुझे सौ प्रतिशत स्पष्ट नहीं थी कि सब कुछ परमात्मा के ही किए से हो रहा है, लेकिन मन के भीतर कहीं यह छवि बैठनी शुरू हो गई थी कि कम से कम मेरे किए से तो कुछ खास नहीं हो रहा।

जितना मैं बीच में ज़्यादा आता, उतना ही सब भारी और उलझा हुआ लगता, और जितना पीछे हटता, उतना ही चीज़ें अपने आप सहज रूप से घटने लगतीं। यह समझ पूरी तरह साफ़ नहीं थी, लेकिन भीतर कहीं-न-कहीं यह भाव बैठने लगा था कि मैं केवल एक माध्यम जैसा हूँ, कर्ता नहीं। यहीं से हीलिंग की दुनिया को देखने का ढंग बदलने लगा।

इसी दौरान यह भी साफ़ दिखने लगा कि हीलिंग की दुनिया में बहुत कुछ व्यापार बन चुका है—लेवल, मास्टरशिप, ग्रैंड मास्टरशिप। नाम बदले जा रहे हैं, ढाँचे बदले जा रहे हैं, लेकिन मूल एक ही है। तब यह समझ और गहरी होती चली गई कि असली हीलिंग किसी तकनीक से, किसी विधि से या किसी नाम से नहीं होती। असली हीलिंग बिन किए होती है—झुक जाने से, रिसेप्टिव हो जाने से और बीच से हट जाने से।

धीरे-धीरे यही बात जीवन पर भी लागू होती चली गई। यह समझ बनने लगी कि जीवन की अधिकांश घटनाएँ भी ऐसे ही घटती हैं—बिन किए। आदमी सोचता है कि उसने किया, उसकी मेहनत से हुआ, उसकी योजना से हुआ, लेकिन बाद में पीछे मुड़कर देखने पर दिखता है कि जो होना था वही हुआ और जो नहीं होना था वह लाख कोशिश के बाद भी नहीं हुआ। उस समय यह बात पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी, लेकिन भीतर यह भरोसा बनने लगा था कि कर्ता होने का अहंकार ढीला पड़ रहा है।

यही अधूरी-सी, लेकिन सच्ची समझ आगे चलकर आनंद ग्राम की नींव बनी। आनंद ग्राम किसी पूरी तरह स्पष्ट दर्शन से नहीं बना, बल्कि इसी क्रमिक बोध से बना कि यहाँ “कुछ किया” नहीं जाएगा। यहाँ बस ऐसी जगह बनेगी जहाँ चीज़ें अपने आप घट सकें। जहाँ आदमी थोड़ा पीछे हट सके, थोड़ा झुक सके और परमात्मा के खेल को चलने दे।

इसीलिए आनंद ग्राम में ध्यान या साधना की शुरुआत हमेशा परमात्मा और गुरुजनों की स्मृति और प्रार्थना से होती है, और साधना के बाद कृतज्ञता से। यह याद दिलाने के लिए कि जो भी घटा, वह हमारे किए का परिणाम नहीं था, बल्कि प्रसाद था। यही भाव धीरे-धीरे स्पष्ट होता चला गया और यही आनंद ग्राम की आत्मा बन गया।

स्वामी विमल कीर्ति

क्रमशः

25/12/2025

🌿 Anand Gram is a peaceful meditation and healing space surrounded by nature, fresh air, and positive energy.

Spending time here helps calm the mind, reduce stress, and reconnect with your inner self through meditation, simplicity, and mindful living ✨

If you are looking for peace, silence, and a deeper connection with nature, Anand Gram is a place you should experience at least once.

Save Aravali
23/12/2025

Save Aravali

🌸DETOX YOUR MIND🌸प्रिय साथियों 💞,जीवन हमें उपहार में मिला है सुख, शांति और आनंद के लिए।लेकिन आज का जीवन अक्सर दुख, तनाव,...
18/12/2025

🌸DETOX YOUR MIND🌸

प्रिय साथियों 💞,
जीवन हमें उपहार में मिला है सुख, शांति और आनंद के लिए।
लेकिन आज का जीवन अक्सर दुख, तनाव, डिप्रेशन,डर, बेचैनी और ट्रॉमा से भरा नज़र आता है।
~~~~~~~
अदभुत बात यह है कि ये समस्याएं अक्सर बहुत ही बुद्धिमान व संवेदनशील लोगों को होती हैं जो इस संसार के पागलपन के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते।
~~~~~~~
यदि आप भी ऐसे ही दौर से गुजर रहे हैं और आपके दिल में भी ये आहट उठती है कि मेरा जीवन तो प्रेम और आनंद से भरा होना चाहिए था तो निश्चिंत रहिए… 💫 ये बिल्कुल संभव है और बहुत सहज भी।

आइए आनंद ग्राम मे🙏🏻
🌿 एक नये जीवन का स्वाद चखें — हल्का, गहन और आनंदित! 🌿

🪔 जीवन को आनंदपूर्ण बनाने की कला सीखें।
🪔 ध्यान और विशेष पद्धतियों से दबी हुई भावनाओं, कुंठाओं और दिल के दर्द को जड़ से मुक्त करें।
🪔 परिवार के साथ प्रेम और अपनत्व में जीने की योग्यता अर्जित करें।
🪔 अपने बच्चों को भी साथ ला सकते हैं ताकि वो खेल-खेल में मेडिटेशन सीखें और सहज ही आनंदपूर्ण जीवन का स्वाद पाएँ।
🪔 दिल को छू लेने वाले भजन और कीर्तन आपकी चेतना को ऊपर उठाकर, आपको अपने असली स्वरूप का अनुभव कराएँगे।
🪔 प्रेम से बने देसी ग्रामीण भोजन और जीवंत वातावरण आपको अनूठा प्राकृतिक स्वाद और अपनापन प्रदान करेंगे।
🙏🏻अपने भीतर छिपी शांति और आनंद की गहराई को महसूस करें,
और परिवार सहित इस प्रेमपूर्ण यात्रा का हिस्सा बनें। ✨
~~~~~~~~
🏕 स्थान: आनंद ग्राम, सोदापुर, गांव- सांभली, करनाल
📱 Mobile and WhatsApp +919813219000
📍 Location https://goo.gl/maps/AoMGgjFsow72
🌐 Web:- www.anandgram.com
~~~~~~~~
आप नीचे दिये गये लिंक 🔗को क्लिक करके आनंद ग्राम ग्रुप से जुड़ सकते हैं।

https://chat.whatsapp.com/CgbjnFulcXiFnWC5Qtx6pp?mode=hqrt2

Note: Advance booking is compulsory.

धन्यवाद 🙏🏻🌹🙏🏻

16/12/2025
🌸DETOX YOUR MIND🌸प्रिय साथियों 💞,जीवन हमें उपहार में मिला है सुख, शांति और आनंद के लिए।लेकिन आज का जीवन अक्सर दुख, तनाव,...
08/12/2025

🌸DETOX YOUR MIND🌸

प्रिय साथियों 💞,
जीवन हमें उपहार में मिला है सुख, शांति और आनंद के लिए।
लेकिन आज का जीवन अक्सर दुख, तनाव, डिप्रेशन, बेचैनी और ट्रॉमा से भरा नज़र आता है।
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अदभुत बात यह है कि ये समस्याएं अक्सर बहुत ही बुद्धिमान व संवेदनशील लोगों को होती हैं जो इस संसार के पागलपन के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते।
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यदि आप भी ऐसे ही दौर से गुजर रहे हैं और आपके दिल में भी ये आहट उठती है कि मेरा जीवन तो प्रेम और आनंद से भरा होना चाहिए था तो निश्चिंत रहिए… 💫 ये बिल्कुल संभव है और बहुत सहज भी।

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🪔 ध्यान और विशेष पद्धतियों से दबी हुई भावनाओं, कुंठाओं और दिल के दर्द को जड़ से मुक्त करें।
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🪔 अपने बच्चों को भी साथ ला सकते हैं ताकि वो खेल-खेल में मेडिटेशन सीखें और सहज ही आनंदपूर्ण जीवन का स्वाद पाएँ।
🪔 दिल को छू लेने वाले भजन और कीर्तन आपकी चेतना को ऊपर उठाकर, आपको अपने असली स्वरूप का अनुभव कराएँगे।
🪔 प्रेम से बने देसी ग्रामीण भोजन और जीवंत वातावरण आपको अनूठा प्राकृतिक स्वाद और अपनापन प्रदान करेंगे।
🙏🏻अपने भीतर छिपी शांति और आनंद की गहराई को महसूस करें,
और परिवार सहित इस प्रेमपूर्ण यात्रा का हिस्सा बनें। ✨
~~~~~~~
🪔 संचालक: ओशो ऊर्जा
🏕 स्थान: आनंद ग्राम, सोदापुर, गांव- सांभली, करनाल
💰 सहयोग राशि:- 5000/- (Including Food & Dorm accomodation)
📱 Mobile and WhatsApp 9813219000, https://wa.me/919813219000
📍 Location https://goo.gl/maps/AoMGgjFsow72
🌐 Web:- www.anandgram.com
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आप नीचे दिये गये लिंक 🔗को क्लिक करके आनंद ग्राम ग्रुप से जुड़ सकते हैं।
https://chat.whatsapp.com/BJVr9BeO3Zs5bwzETkKwms?mode=wwt

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धन्यवाद 🙏🏻🌹🙏🏻

13/09/2025

🌸 *ओशो आनंद ग्राम रविवार शिविर*🌸

प्रिय साथियों 💞,
जीवन हमें उपहार में मिला है सुख, शांति और आनंद के लिए।
लेकिन आज का जीवन अक्सर दुख, तनाव, डिप्रेशन, बेचैनी और ट्रॉमा से भरा नज़र आता है।
अगर आपके दिल में भी ये आहट उठती है कि *मेरा जीवन तो प्रेम और आनंद से भरा होना चाहिए था* तो निश्चिंत रहिए… 💫 ये बिल्कुल संभव है और बहुत सहज भी।

*आइए, हर रविवार आनंद ग्राम मे*
🌿 एक नये जीवन का स्वाद चखें — हल्का, गहन और आनंदित! 🌿

🪔 जीवन को आनंदपूर्ण बनाने की कला सीखें।
🪔 ध्यान और विशेष पद्धतियों से दबी हुई भावनाओं, कुंठाओं और दिल के दर्द को जड़ से मुक्त करें।
🪔 परिवार के साथ प्रेम और अपनत्व में जीने की योग्यता अर्जित करें।
🪔 अपने बच्चों को भी साथ लाएँ — ताकि वो खेल-खेल में मेडिटेशन सीखें और सहज ही आनंदपूर्ण जीवन का स्वाद पाएँ।
🪔 दिल को छू लेने वाले भजन और कीर्तन आपकी चेतना को ऊपर उठाकर, आपको अपने असली स्वरूप का अनुभव कराएँगे।
🪔 प्रेम से बने देसी ग्रामीण भोजन और जीवंत वातावरण आपको अनूठा प्राकृतिक स्वाद और अपनापन प्रदान करेंगे।
🪔 आप चाहें तो दिव्य ऊर्जाओं द्वारा अपने जीवन के लिए टैरो कार्ड्स द्वारा मार्गदर्शन भी प्राप्त कर सकते हैं।
🙏🏻अपने भीतर छिपी शांति और आनंद की गहराई को महसूस करें,
और परिवार सहित इस प्रेमपूर्ण यात्रा का हिस्सा बनें। ✨
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
⏰ *समय:* 10 AM to 6 PM (रविवार)
🏕 *स्थान:* आनंद ग्राम, सोदापुर, गांव- सांभली, करनाल
💰 *सहयोग राशि:*
*For Meditation* ₹500
*For Desi Food* इच्छानुसार (Gift From The Unknown Basis)
*For Tarot Reading* 1100 for 30 Min. (Max. 4 slots)
📱 *Mobile and WhatsApp* 9813219000, https://wa.me/919813219000
📍 *Location* https://goo.gl/maps/AoMGgjFsow72
🌐 *Web:*- www.anandgram.com
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आप नीचे दिये गये लिंक 🔗को क्लिक करके आनंद ग्राम ग्रुप से जुड़ सकते हैं।
*https://chat.whatsapp.com/CgbjnFulcXiFnWC5Qtx6pp*

*Note*:*Advance booking is compulsory.*

धन्यवाद 🙏🏻🌹🙏🏻

🌸 *आनंद ग्राम रविवार शिविर*🌸प्रिय साथियों 💞,जीवन हमें उपहार में मिला है सुख, शांति और आनंद के लिए।लेकिन आज का जीवन अक्सर...
12/09/2025

🌸 *आनंद ग्राम रविवार शिविर*🌸

प्रिय साथियों 💞,
जीवन हमें उपहार में मिला है सुख, शांति और आनंद के लिए।
लेकिन आज का जीवन अक्सर दुख, तनाव, डिप्रेशन, बेचैनी और ट्रॉमा से भरा नज़र आता है।
अगर आपके दिल में भी ये आहट उठती है कि *मेरा जीवन तो प्रेम और आनंद से भरा होना चाहिए था* तो निश्चिंत रहिए… 💫 ये बिल्कुल संभव है और बहुत सहज भी।

*आइए, हर रविवार आनंद ग्राम मे*
🌿 एक नये जीवन का स्वाद चखें — हल्का, गहन और आनंदित! 🌿

🪔 जीवन को आनंदपूर्ण बनाने की कला सीखें।
🪔 ध्यान और विशेष पद्धतियों से दबी हुई भावनाओं, कुंठाओं और दिल के दर्द को जड़ से मुक्त करें।
🪔 परिवार के साथ प्रेम और अपनत्व में जीने की योग्यता अर्जित करें।
🪔 अपने बच्चों को भी साथ लाएँ — ताकि वो खेल-खेल में मेडिटेशन सीखें और सहज ही आनंदपूर्ण जीवन का स्वाद पाएँ।
🪔 दिल को छू लेने वाले भजन और कीर्तन आपकी चेतना को ऊपर उठाकर, आपको अपने असली स्वरूप का अनुभव कराएँगे।
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⏰ *समय:* 10 AM to 6 PM (रविवार)
🏕 *स्थान:* आनंद ग्राम, सोदापुर, गांव- सांभली, करनाल
💰 *सहयोग राशि:*
*For Meditation* ₹500
*For Desi Food* इच्छानुसार (Gift From The Unknown Basis)
*For Tarot Reading* 1100 for 30 Min. (Max. 4 slots)
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Anand Gram, Meditation & Healing Centre
Karnal
132024

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