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22/08/2020

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सफेद मूसली एक बहुत ही उपयोगी पौधा है, जो कुदरती तौर पर बरसात के मौसम में जंगल में उगता है| इस की उपयोगिता को देखते हुए इ...
31/07/2020

सफेद मूसली एक बहुत ही उपयोगी पौधा है, जो कुदरती तौर पर बरसात के मौसम में जंगल में उगता है| इस की उपयोगिता को देखते हुए इस की कारोबारी खेती भी की जाती है| सफेद मूसली की कारोबारी खेती करने वाले राज्य हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल व वेस्ट बंगाल वगैरह हैं| सफेद मूसली की जड़ों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं बनाने में किया जाता है| सफेद मूसली की सूखी जड़ों का इस्तेमाल यौवनवर्धक, शक्तिवर्धक और वीर्यवर्धक दवाएं बनाने में करते हैं|
सफेद मूसली के फायदे
शारीरिक कमजोरी की शिकायत होने पर इसमें सफेद मूसली चूर्ण का सेवन करने से लाभ मिलता है। मूसली का उपयोग सामान्य कमजोरी तथा लिंग से संबंधित कमजोरी दूर करने में होती है।
कई पुरुषों में शुकाणु दोष की समस्या होती है, और इसके कारण वे काफी परेशान रहते हैं। शुक्राणु की कमी, पेशाब में जलन , ब्रैस्ट मिल्क ,स्वप्नदोष आदि रोगों में सफेद मूसली का प्रयोग लाभ पहुंचाता है।
2-4 ग्राम मूसली के चूर्ण में, समान मात्रा में मिश्री मिला कर दूध के साथ सेवन करना चाहिए

सुबह खाली पेट हल्दी वाला पानी पीने से होते हैं कई चौकाने वाले फायदें दोस्तों आज तक आप लोग हल्दी का प्रयोग सिर्फ खाने का ...
28/07/2020

सुबह खाली पेट हल्दी वाला पानी पीने से होते हैं कई चौकाने वाले फायदें

दोस्तों आज तक आप लोग हल्दी का प्रयोग सिर्फ खाने का रंग और स्वाद बढ़ाने के लिए करते आए होंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं यह साधारण सी दिखने वाली हल्दी आपको कई सारे रोगों से बचाने में सक्षम होती हैं. इसके लिए आपको रोज सुबह हल्दी वाला पानी पीना होगा. आज तक आप ने खाली पेट सुबह नींबू पानी या शहद पानी पीने की बात सुनी होगी लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हल्दी वाला पानी पीने से शरीर को कितना फायदा होता हैं.

हल्दी वाला पानी बनाने की विधि

सामग्री: एक गिलास गरम पानी, आधा नींबू, एक चौथाई चम्मच हल्दी और आधा चम्मच शहद.

बनाने की विधि: हल्दी वाला पानी बनाने के लिए सबसे पहले एक गिलास पानी को गर्म कर ले. अब इसके अन्दर आधा नींबू निचोड़ ले. इसके बाद इसमें एक चौथाई चम्मच हल्दी मिलकर घोल को अच्छे से मिला ले. जब पानी ठंडा हो जाए तो इसमें आधा चम्मच शहद भी मिला दे. अब यह हैल्दी ड्रिंक पिने के लिए तैयार हैं. ध्यान रहे आपको इसे रोजाना सुबह खाली पेट लेना हैं.

हल्दी वाला पानी पीने के फायदें

हल्दी वाला पानी पीने से दिमाग तेज़ होता हैं. यदि आपको बार बार भूलने की आदत हैं तो इस पानी को पीने से यह बिमारी भी ठीक हो जाती हैं.
हल्दी वाला पानी पीने से शरीर में आई सुजन कम हो जाती हैं. यदि आपका हाथ, पाँव या शरीर का कोई अंग किसी कारणवश सूज जाता हैं तो हल्दी में मौजूद पौषक तत्त्व इस सुजन को कम कर देते हैं.
यदि आपको घुटनों के जोड़ो में दर्द की समस्यां रहती हैं तो रोजाना खाली पेट हल्दी वाले पानी को पीने से आराम मिलता हैं.
हल्दी वाला पानी पीने से लीवर मजबूत बनता हैं. यह पानी हमारे शरीर से टोक्सिन (विषैले तत्व) को बाहर निकाल देता हैं जिस से लीवर को हमेशा स्वस्थ रहने में मदद मिलती हैं.
हल्दी वाला पानी हमारी बढ़ती उम्र के लक्षण जैसे झुर्रियों का निकलना, बालों का सफ़ेद होना इत्यादि को कम करता हैं.
हल्दी वाला पानी पीने से गाल ब्लेडर सही तरह से कार्य करता हैं और इस से सम्बंधित कोई बिमारी नहीं पनप पाती हैं.
हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते हैं जो केंसर को पैदा करने वाली कोशिकाओं को नष्ट करता हैं. मतलब जो लोग रोजाना खाली पेट हल्दी वाला पानी पिते हैं उन्हें कैंसर होने के चांस बहुत कम हो जाते हैं.

कोरोना वायरसकोरोना के सामने हमारी ढाल बनकर खड़ा है आयुर्वेद, जान‍िए काढ़ा किस तरह से है फायदेमंद ! आधुनिक चिकित्‍सा विज्...
28/06/2020

कोरोना वायरस
कोरोना के सामने हमारी ढाल बनकर खड़ा है आयुर्वेद, जान‍िए काढ़ा किस तरह से है फायदेमंद ! आधुनिक चिकित्‍सा विज्ञान की चमत्‍कारी एंटी बायोटिक, एंटी वायरल और स्‍टेरॉयड दवाओं की चकाचौंध में हम अपनी वैदिककाल से प्रमाणित सनातन चिकित्‍सा पैथी आयुर्वेद को भूलते जा रहे थे, पर लाइलाज एवं प्राणघातक चीनी वायरस कोरोना से सामना होने पर हमें आयुर्वेद ने ही संभाला। आयुर्वेदिक औषधि और घरेलू मसालों के रूप में युगों से इस्‍तेमाल हो रहे गिलोय, अश्‍वगंधा, तुलसी, सोंठ, अदरक, लौंग, काली मिर्च और दालचीनी का काढ़ा कोरोना के खिलाफ जंग में 'कारगर अस्‍त्र' साबित हो रहा है।

आधुनिक पैथी के चिकित्‍सा विज्ञानी भी मानते हैं कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की खासियत के बल पर यह काढ़ा न सिर्फ अधिकतर लोगों को संक्रमण से बचा रहा है बल्कि संक्रमित रोगियों की प्राणरक्षा और शीघ्र संक्रमणमुक्‍त होने में भी रामबाण साबित हो रहा है। इन सहज-सुलभ औषधियों एवं मसालों से तैयार काढ़ा दिन में एक या दो बार पीकर करोड़ों लोग कोरोना को मात दे रहे हैं। काढ़े का प्रभाव देखकर आयुष मंत्रालय और कई अन्‍य प्रतिष्ठित चिकित्‍सा संस्‍थान इन आयुर्वेदिक औषधियों-मसालों के औषधीय गुणों पर नए संदर्भ में शोध एवं परीक्षण कर रहे हैं।

गिलोय- इसे गुड़ूची या अमृता भी कहते हैं। इसके रासायनिक अवयव रक्त में मौजूद श्वेत कणिकाओं की कार्यक्षमता बढ़ाकर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करते हैं। इसके तने से तैयार काढ़ा दमा, खांसी, डेंगू, स्वाइनफ्लू और शुगर का स्‍तर नियंत्रित करने में कारगर है। पाचन दुरुस्त करने के साथ सूजन भी कम करता है। यही वजह है कि गिलोय अर्थराइटिस के भी इलाज में लाभकारी है।

अश्वगंधा- एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटीइन्फ्लेमेटरी गुणों से भरपूर अश्वगंधा शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए रामबाण मानी जाती है। यह हाई ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने के साथ कोलेस्ट्रॉल को भी कम करती है। कहते हैं कि अश्वगंधा कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है। वहीं नए सेल्स नहीं बनने देता। इतने सारे गुणों के कारण ही इसे भारतीय जिनसिंग भी कहा जाता है।

दालचीनी- गर्म तासीर वाला यह मसाला बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट है। दालचीनी तनाव कम कर मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने में लाभकारी है। पार्किंसन और अल्जाइमर जैसे तंत्रिका संबंधी विकारों में भी चिकित्सक इसे लेने की सलाह देते हैं। आयुर्वेद में इसे प्राकृतिक ब्लडथिनर कहा जाता है जिससे ब्लड सरकुलेशन अच्छा होता है। इसमें एंटीइन्फ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) गुण भी हैं। पाचन संबंधी विकार में भी यह कारगर है।

काली मिर्च- सर्दी-जुकाम हो तो काली मिर्च लेने की सलाह बड़े बुजुर्ग यूं ही नहीं देते। यह प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। यही वजह है कि काढ़े में इसका प्रयोग अनिवार्य है। काली मिर्च में पिपराइन भी पाया जाता है जो एंटीडिप्रेसेंट है। यानी टेंशन कम करने के साथ डिप्रेशन दूर करती है।

अदरक- अदरक वाली चाय के शौकीनों को शायद ही पता हो कि यह एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है। यह सर्दी-जुकाम जैसे संक्रमण से बचाने के साथ प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है। यही नहीं, अदरक पाचन शक्ति भी दुरुस्त करती है। इसमें विटामिन ए और डी के साथ-साथ आयरन और कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो शरीर को ऊर्जा देता है।

लौंग- खुशबूदार मसाले के रूप में तो लौंग को जाना ही जाता है लेकिन इसमें एंटीऑक्सीडेंट,एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण भी भरपूर हैं। इसके तेल में मिनरल्स जैसे पोटेशियम, सोडियम, फास्फोरस,आयरन, विटामिन ए और सी अत्यधिक मात्रा में होते हैं। गर्म तासीर वाली लौंग दांत के दर्द में भी लाभकारी है।

तुलसी- तुलसी का पौधा एक वरदान है। घर के आंगन में लगे तुलसी के पौधों में जबरदस्त एंटीबैक्टीरियल तत्व होते हैं। यही वजह है कि पौराणिक महत्व से अलग यह औषधीय पौधे के रूप में भी जाना जाता है। सर्दी-खांसी से लेकर कैंसर तक के इलाज में तुलसी को कारगर पाया गया है। यही वजह है कि तुलसी का काढ़े में प्रयोग अनिवार्य है।

ऐसे बनाएं काढ़ा

काढ़ा तैयार करने के लिए 4-4 भाग गिलोय और तुलसी, 2-2 भाग दालचीनी व सोंठ, एक भाग लौंग के जौ के बराबर टुकड़े कर लें। इस चूर्ण को दो कप पानी में तब तक उबालें। जब तक वह घटकर आधा कप न रह जाए। इसके पश्चात स्वाद के अनुसार इसमें गुड़ या मुनक्का मिलाकर दिन में दो बार सेवन करें। अश्वगंधा चूर्ण तीन ग्राम पानी या दूध के साथ सुबह-शाम दो बार ले सकते हैं। यदि अश्वगंधा सत ले रहे हैं तो 500 मिलीग्राम से एक ग्राम तक दो बार ले

काढ़े में इस्तेमाल होने सामग्री चरक संहिता में इम्यूनिटी को बढ़ाने में प्रमाणिक रूप से कारगर बताई गई है। काढ़े के रूप में औषधियां जब ब्लड में पहुंचती है तो उन प्रोटीन की कार्यक्षमता बढ़ाने का कार्य करती हैं जो इम्यूनिटी बूस्टर हैं। यही वजह है कि खासकर वायरल इंफेक्शन से निपटने में काढ़ा काफी कारगर पाया गया है।

इम्यूनिटी बूस्टर आयुर्वेदिक काढ़े भी सेहत को पहुंचा सकते हैं नुकसान, शरीर में दिखें ये 5 लक्षण तो बंद कर दें इसका सेवनका...
25/06/2020

इम्यूनिटी बूस्टर आयुर्वेदिक काढ़े भी सेहत को पहुंचा सकते हैं नुकसान
, शरीर में दिखें ये 5 लक्षण तो बंद कर दें इसका सेवन

काढ़ा 1
कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ इम्यूनिटी मजबूत करने की सलाह दे रहे हैं। ऐसे में देश में इन दिनों इम्यूनिटी बूस्टर काढ़े खूब चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने भाषणों में काढ़ा के सेवन जिक्र किया। इस घातक वायरस से बचाव के लिए आयुष मंत्रालय ने काढ़ा बनाने की विधि भी बताई है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इम्यूनिटी बूस्ट करने वाला काढ़ा सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। आपको बता दें कि कोई भी आयुर्वेदिक औषधि हमेशा मौसम, प्रकृति, उम्र और स्थिति देखकर दी जाती है। अगर इन चीजों का ध्यान नहीं रखा जाएगा, तो फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है। आइए जानते हैं इससे होने वाले नुकसान के बारे में...

अगर काढ़ा के नियमित सेवन करने के बाद आपके शरीर में ये 5 लक्षण दिख रहे हैं, तो आप इसका सेवन करना तुरंत बंद कर दें।
नाक से खून आना
मुंह में छाले पड़ना
पेट में जलन होना
पेशाब करते समय जलन
अपच और पेचिश जैसी समस्या

आयुर्वेदिक काढ़ा क्यों पहुंचाता है नुकसान?
दरअसल, इम्यूनिटी बूस्टर काढ़े में आमतौर पर काली मिर्च, सोंठ, पीपली, दालचीनी, हल्दी, गिलोय, अश्वगंधा जैसी औषधियों का प्रयोग किया जाता है। इन सभी चीजों की तासीर बहुत गर्म होती है। अगर कोई व्यक्ति इन चीजों का सेवन बेहिसाब करेगा, तो उसके शरीर में गर्मी बढ़ सकती है। खासकर गर्मी के मौसम में ये गर्म तासीर वाले उत्पाद ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।

काढ़ा बनाते समय रखें खास ध्यान
अगर आप इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा बताए गए या फिर किसी आयुर्वेदाचार्य के द्वारा बताए गए काढ़े का सेवन कर रहे हैं, तो आपको कई बातों का ध्यान रखना चाहिए। काढ़े को बनाते समय औषधियों की मात्रा पर खास ध्यान रखें। काढ़े के सेवन से आपको किसी तरह का कोई नुकसान दिखे तो सोंठ, काली मिर्च, अश्वगंधा और दालचीनी की मात्रा कम कर दें। समस्या कम नहीं होने पर किसी आयुर्वेदाचार्य से जरूर सलाह लें।

वात और पित्त दोष वाले रखें खास ध्यान
काढ़े के सेवन से कफ ठीक हो जाता है। इसलिए कफ दोष से प्रभावित लोगों के लिए ये काढ़ा बहुत फायदेमंद है। लेकिन वात या पित्त से प्रभावित लोगों को आयुर्वेदिक काढ़ों को पीते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ध्यान रखें कि गर्म तासीर वाली चीजें काढ़े में बहुत कम मात्रा में डालें। इसके बजाय ठंडी तासीर वाली चीजें डालें।

कुछ पुरानी यादें
11/06/2020

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