National Medicare Hospital and Research Centre Jalkoura

National Medicare Hospital and Research Centre Jalkoura Multidisciplinary Hospital with primary and secondary level of Treatment

27/01/2026
एक सामान्य ईसीजी (ECG) और "स्वस्थ" (फिट) दिखना हृदय संबंधी जोखिम से इनकार नहीं करता है। ईसीजी केवल एक संक्षिप्त विद्युत ...
01/01/2026

एक सामान्य ईसीजी (ECG) और "स्वस्थ" (फिट) दिखना हृदय संबंधी जोखिम से इनकार नहीं करता है। ईसीजी केवल एक संक्षिप्त विद्युत स्नैपशॉट है और 30-50% कोरोनरी रुकावटों के बावजूद सामान्य रह सकता है। अचानक दिल का दौरा अक्सर प्लाक फटने और तीव्र थक्का बनने के कारण होता है, जो सामान्य ईसीजी के कई दिनों बाद भी हो सकता है। खतरनाक एरिदमिया (अतालता) भी रुक-रुक कर विकसित हो सकते हैं और नियमित ईसीजी पर पता नहीं चल पाते। पुराना तनाव, नींद की कमी, छिपी हुई लिपिड असामान्यताएं, सूजन, आनुवंशिक कारक और स्लीप एपनिया जोखिम को और बढ़ाते हैं। यह मामला इस बात पर प्रकाश डालता है कि ईसीजी एक स्क्रीनिंग उपकरण है, न कि गारंटी, और व्यापक कार्डियक जोखिम मूल्यांकन आवश्यक है—विशेष रूप से उच्च तनाव वाले व्यवसायों में।
A normal ECG and a “fit” appearance do not rule out cardiac risk. ECG is only a brief electrical snapshot and can remain normal despite 30–50% coronary blockages. Sudden heart attacks often occur due to plaque rupture and acute clot formation, which may happen even days after a normal ECG. Dangerous arrhythmias can also develop intermittently and go undetected on routine ECGs. Chronic stress, sleep deprivation, hidden lipid abnormalities, inflammation, genetic factors, and sleep apnea further increase risk. This case highlights that ECG is a screening tool, not a guarantee, and comprehensive cardiac risk assessment is essential—especially in high-stress professions.

24/12/2025
22/12/2025
13/11/2025

पहली सुई 💉 हमेशा हॉस्पिटल में डॉक्टर के निगरानी मे लगाना चाहिए.

अब लोग दूध से दूरी बनाने लगे हैं। कारण मुख्य रूप से दो हैं —1. लैक्टोज इन्टॉलरेंस (Lactose Intolerance)2. दूध के प्रति ए...
01/11/2025

अब लोग दूध से दूरी बनाने लगे हैं। कारण मुख्य रूप से दो हैं —
1. लैक्टोज इन्टॉलरेंस (Lactose Intolerance)
2. दूध के प्रति एलर्जी (Milk Allergy)

लगभग 60% भारतीयों में किसी न किसी रूप में दूध से असहिष्णुता (लैक्टोज इन्टॉलरेंस) पाई जाती है।

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में लैक्टेज़ एंज़ाइम कम हो जाता है, जिससे दूध पचाने में दिक्कत होने लगती है।

लक्षण: पेट फूलना, गैस, दस्त, ऐंठन, उल्टी, पेट में दर्द, मितली।

महिलाएँ (खासतौर पर प्रेग्नेंसी और 45+ उम्र की महिलाएं) अधिक प्रभावित होती हैं।

कुछ लोग दूध की प्रोटीन (Casein) से एलर्जिक होते हैं। यह अधिक गंभीर स्थिति है।

दूध कंपनियों के एडवर्टाइजमेंट और सोशल मीडिया पर बहस के बाद लोग ज्यादा जागरूक हो रहे हैं।

क्यों नहीं पचता दूध?

शरीर में लैक्टेज़ एंज़ाइम कम हो जाना।
उम्र बढ़ने पर यह क्षमता और घट जाती है।
कई लोगों में जन्म से ही कम मात्रा में होता है।

दही-छाछ क्यों पच जाते हैं?

दही-छाछ में लैक्टोज़ टूटकर लैक्टिक एसिड बन जाता है, जो शरीर आसानी से पचा लेता है।
फर्मेंटेड दूध प्रोडक्ट्स जैसे दही, पनीर, छाछ आमतौर पर कम दिक्कत देते हैं।

क्या सिर्फ गाय-भैंस का दूध समस्या देता है?

समस्या दूध नहीं, लैक्टोज़ से है।
प्लांट-बेस्ड दूध (सोया, बादाम, ओट आदि) विकल्प हो सकते हैं।

समाधान (कैसे बचें?)

दूध कम मात्रा में और गुनगुना पीएं।
दूध में अदरक, इलायची, हल्दी आदि डालने से पाचन बेहतर होता है (आयुर्वेदिक दृष्टि से)।
यदि बहुत तकलीफ हो तो:
दही, छाछ, पनीर जैसे फर्मेंटेड प्रोडक्ट लें।
प्लांट-बेस्ड दूध विकल्प आजमाएँ।
डॉक्टर से टेस्ट कराएँ यदि लक्षण बने रहें।

दूध सबके लिए समस्या नहीं।
जिन्हें दिक्कत न हो, वे संतुलित मात्रा में पी सकते हैं।
समस्या हो तो विकल्प अपनाएँ।


भारतीय  आबादी में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या काफी बढ़ गई है। बच्चों का ब्लड शुगर भी कंट्रोल से बाहर रहने लगा ...
31/10/2025

भारतीय आबादी में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या काफी बढ़ गई है। बच्चों का ब्लड शुगर भी कंट्रोल से बाहर रहने लगा है। लेकिन क्या आप जानते हैं इन समस्याओं को सही आटा खाकर कंट्रोल किया जा सकता है। यह उपाय डायबिटिक पेशेंट्स के लिए काफी कारगर साबित हो सकता है।
best flour for diabetes

न्यूट्रिशनिस्ट और वेट लॉस स्पेशियलिस्ट लीमा महाजन ने 5 स्वास्थ्य समस्याओं में फायदेमंद आटे के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि अधिकतर बार हम रोटी, पराठा, डोसा के लिए एक ही आटे का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन सही आटे का उपयोग करने से शुगर, थायराइड, हॉर्मोन, ब्लड प्रेशर, डायजेशन और हीमोग्लोबिन लेवल नियंत्रित रह सकता है।

अपने आटे में जौ, काकुम (कौनी या कोदन के नाम से भी जाना जाता है।)या बार्नयार्ड मिलेट मिलाकर मिक्सचर बनाएं। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और हाई फाइबर ग्लूकोज के लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है।

24/10/2025

अजीनोमोटो क्या है??👇👇👇
अजीनोमोटो को हम इसके रासायनिक नाम मोनो सोडियम ग्लूटामेट (MSG)के नाम से भी जानते है।

इसका इस्तेमाल ज्यादातर चीन की खाद्य पदार्थो में
खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है. ..
पहले हम अधिकांशतः घर पर बने खाने को खाते थे,
लेकिन अब लोग चिप्स, पिज्ज़ा, मोमोज,अंडा रोल, मैगी और भी अनेकों फास्ट फूड खाने को ज्यादा पसंद करने लगे है,जो कि इनमें अजीनोमोटो का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है,

इनमें भी अजीनोमोटो का इस्तेमाल होता है.
इसका इस्तेमाल कई डिब्बाबंद फ़ास्ट फ़ूड सोया सॉस, टोमेटो सॉस, संरक्षित मछली जैसे सभी संरक्षित खाद्य उत्पादों में किया जाता है।

अजीनोमोटो को पहली बार 1909 में जापानी जैव रसायनज्ञ किकुनाए इकेडा के द्वारा खोजा गया था.
उन्होने इसके स्वाद को मामी के रूप में पहचाना जिसका अर्थ होता है,सुखद स्वाद

कई जापानी सूप में इसका इस्तेमाल होता है.
इसका स्वाद थोडा नमक के जैसा होता है. देखने में यह चमकीले छोटे क्रिस्टल के जैसा होता है.
इसमें प्राकृतिक रूप से एमिनो एसिड पाया जाता है,किन्तु
आज दुनिया के हर कुक खाने में स्वाद को बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल करते है, अजीनोमोटो का इस्तेमाल असुरक्षित माना गया है, इसका इस्तेमाल पहले चीन की रसोई में होता था,
लेकिन अब ये धीरे धीरे हमारे भी घरों की रसोई में अपना पैठ बना चुका है,अपने समय को बचाने के लिए जो हम 2 मिनट में नुडल्स को तैयार कर ग्रहण करते है इस तरह के अधिकांशतः खाद्य पदार्थो में यह पाया जाता है जो धीरे धीरे हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते है।

यह एक प्रकार से नशे की लत जैसा होता है अगर आप एक बार अजीनोमोटो युक्त भोजन को ग्रहण कर लेते है,
आप उस भोजन को नियमित खाने की इच्छा रखने लगेंगे. ..इसके सेवन से शरीर में इन्सुलिन की मात्रा बढ़ जाती है जब आप अजीनोमोटो मिले पदार्थो का सेवन करते है, तो रक्त में ग्लूटामेट का स्तर बढ़ जाता है. जिस की वजह से इसका शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

अजीनोमोटो को एक धीमा हत्यारा🔥 भी कहा जा सकता है,यह आँखों की रेटिना को नुकसान पहुंचाता है साथ ही यह थायराईड और कैंसर जैसे रोगों के लक्षण पैदा कर सकता है।

अजीनोमोटो से युक्त खाद्य पदार्थो का अगर नियमित सेवन किया जाये तो यह माइग्रेन पैदा कर सकता है जिसको हम अधकपाली भी कहते है,
इस बीमारी में आधे सिर में हल्का हल्का दर्द होते रहता अजीनोमोटो के अधिक सेवन से मोटापे के बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है हमारे शरीर में मौजूद लेप्टिन हॉर्मोन,
हमे भोजन के अधिक सेवन को रोकने के लिए हमारे मस्तिष्क को संकेत देते है।

अजीनोमोटो के सेवन से हम ज्यादा भोजन कर जल्द ही मोटापे से ग्रस्त हो सकते है, और कई गम्भीर बिमारी से भी ग्रस्त हो सकतें हैं।

ध्यान दीजिए 👉फास्ट फूड के तो सभी दीवाने हैं ही लेकिन बाजार से नहीं बल्कि अपने घर पर देशी तरीके से बनाकर खायें।

अक्टूबर महीने में आम के पेड़ों को बीमारियों से बचाने के लिए चूने से पुतवा देनी चाहिए।  सफेदी लगाने की ये तकनीक नई नहीं ह...
24/10/2025

अक्टूबर महीने में आम के पेड़ों को बीमारियों से बचाने के लिए चूने से पुतवा देनी चाहिए। सफेदी लगाने की ये तकनीक नई नहीं है बहुत पुरानी है। लेकिन जितनी पुरानी है उतनी ही कारगर ।चूने से तने को पुतवा देने पर न केवल पेड़ों का कीट और बीमारियों से बचाव होता है, बल्कि इसके तने और छाल भी स्वस्थ होती है और खूब बौर और फल लगते हैं।

तने पर सफेदी (चूना) लगाने के फायदे :---

कीटों से सुरक्षा :
सफेदी का लेप दीमक, छाल खाने वाले कीट और अन्य हानिकारक कीटों से बचाव करता है।

फंगल संक्रमण से बचाव :
चूना क्षारीय (alkaline) प्रकृति का होता है, जो फफूंद और अन्य रोगों के पनपने से रोकता है।

पौष्टिक तत्वों की आपूर्ति :
सफेदी मिट्टी में कुछ जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है, जिससे पेड़ मजबूत बनता है और स्वस्थ विकास करता है।

तापमान नियंत्रण :
सफेद रंग सूर्य की तेज किरणों को परावर्तित करता है, जिससे तने का तापमान नियंत्रित रहता है और गर्मी से नुकसान नहीं होता।

छाल की दरारों की सुरक्षा :
पुराने पेड़ों की छाल में दरारें आ जाती हैं, जिनमें रोग और कीट घर बना सकते हैं। सफेदी का लेप इन दरारों की सुरक्षा करता है।

पेड़ को स्वस्थ रखना :
चूना पेड़ को पर्यावरणीय तनाव और कीटों से बचाता है, जिससे यह अधिक फूल और फल देता है।

नमी बनाए रखने में मदद :
यह गर्म और शुष्क मौसम में तने में नमी बनाए रखने में सहायक होता है।

तने पर सफेदी कैसे लगाएँ :---

सामग्री :

● 1 किलो बुझा हुआ सफेदी (चूना)

● 200 ग्राम तूतिया (कॉपर सल्फेट)

● 10 लीटर पानी

विधि :

1. सफेदी, तूतिया और पानी को मिलाकर घोल तैयार करें।

2. ब्रश की मदद से तने पर अच्छी तरह लगाएँ।

3. विशेष रूप से नीचे से ऊपर 4–5 फीट तक ध्यान दें।

कब लगाएँ :---

सफेदी लगाने का सबसे उपयुक्त समय होता है फरवरी, मार्च और अक्टूबर-नवंबर, जब पेड़ की वृद्धि धीमी होती है और यह कीट और रोगों के प्रति कम संवेदनशील होता है।

टिप्स :---

● घोल तैयार करने के बाद तुरंत इस्तेमाल करें।

● पेड़ पर नियमित रूप से निरीक्षण करें और जरूरत पड़ने पर सफेदी फिर लगाएँ।

● पुराने या कमजोर पेड़ों में यह तकनीक उन्हें मजबूत बनाने में मदद करती है।

सही समय और तरीके से सफेदी लगाने से आपका आम का पेड़ स्वस्थ रहेगा, अधिक फल देगा और कीटों व रोगों से सुरक्षित रहेगा।

“चीनी आपके लिए हानिकारक है।”क्यूँ?चीनी आपके माइटोकॉन्ड्रिया को नष्ट कर देती है, जो आपकी कोशिकाओं के अंदर मौजूद छोटे-छोटे...
12/10/2025

“चीनी आपके लिए हानिकारक है।”

क्यूँ?

चीनी आपके माइटोकॉन्ड्रिया को नष्ट कर देती है, जो आपकी कोशिकाओं के अंदर मौजूद छोटे-छोटे एनर्जी प्लांट्स हैं जो आपको ज़िन्दा रखते हैं।

लगभग हर आधुनिक बीमारी का मूल माइटोकॉन्ड्रियल डिसफंक्शन से जुड़ा है।

माइटोकॉन्ड्रिया आपकी कोशिकाओं के पावर प्लांट हैं, जो ईंधन को उपयोगी ऊर्जा में बदलते हैं।

जब इनको नुक़सान पहुंचता हैं, तो एनर्जी पैदावार में रूकावट आती है और लंबी बिमारियां पैदा हो जाती हैं।

जब माइटोकॉन्ड्रिया काम करना बंद कर देते हैं, तो आपको सिर्फ़ थकान ही महसूस नहीं होती।

• कैंसर • अल्ज़ाइमर • दिल की बीमारी • गुर्दे और जिगर की बीमारी
• टाइप 2 मधुमेह..

आप इन बीमारियों के लिए माहौल तैयार करते हैं और इस माइटोकॉन्ड्रियल नुक़सान की वजह चीनी और बेहतर कार्बोहाइड्रेट हैं।

बहुत ज़्यादा चीनी • B1 (थायमिन), जिससे न्यूरोपैथी, चिंता और स्मृति संबंधी समस्याएं होती हैं, • ज़िंक, जिससे माइटोकॉन्ड्रियल कार्य और प्रतिरक्षा प्रभावित होती है, इन्हें कम करती है

अच्छी खबर यह है कि आप काफी हद तक नुकसान की भरपाई कर सकते हैं और अपने माइटोकॉन्ड्रिया की रक्षा कर सकते हैं।

• कम कार्बोहाइड्रेट वाला या कीटोजेनिक आहार
• रुक-रुक कर फास्टिंग
• वर्ज़िश
• अच्छी नींद
• माइटोकॉन्ड्रिया को उत्तेजित करने के लिए ठंडी जगह और धूप

खजूर और फलों में फाइबर, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। क़ुदरती चीनी का सेवन संतुलित मात्रा में करना अच्छा होता है।

कम खाना सेहत के लिए अच्छा है, संतुलित आधार बहुत ज़्यादा अच्छा है।

ज़िंदा रहने केलिए खाना, खाने के लिए ही ज़िंदा रहने से बहुत ही ज़्यादा अच्छा है।

साल में कम से कम 30 से 40 दिनों तक फास्टिंग बहुत, बहुत ही ज़्यादा अच्छा है।

नीम के पेड़ रोज़ इतनी शुद्ध ऑक्सीजन छोड़ता है कि 5-6 लोगों की सांसों के लिए काफी हो। यह हवा के विषैले तत्वों को साफ करता...
10/10/2025

नीम के पेड़ रोज़ इतनी शुद्ध ऑक्सीजन छोड़ता है कि 5-6 लोगों की सांसों के लिए काफी हो। यह हवा के विषैले तत्वों को साफ करता है, इसलिए पहले के लोग इसे आंगन में जरूर लगाते थे

Dog bite or Scratch ,  Don't wait vaccinate कुत्ता काटे या खरोंच लगे, टीका ज़रूर लगवाए
23/09/2025

Dog bite or Scratch , Don't wait vaccinate कुत्ता काटे या खरोंच लगे, टीका ज़रूर लगवाए

अगर आप डॉगी पालते हैं या पशुप्रेमी हैं तो यह खबर आपको जरूर पढ़नी चाहिए. अहमदाबाद में एक छोटी सी बात को नजरअंदाज करना पुलिस इंस्पेक्टर वनराज मंझरिया की जान पर भारी पड़ गया. उनके निधन की खबर चिंतित करने वाली है. यह हम सबके लिए चेतावनी की तरह है. दरअसल, पांच दिन पहले वनराज को उनके पालतू जर्मन शेफर्ड कुत्ते का नाखून लग गया था. वैसे, उनके कुत्ते का नियमित तौर पर रेबीज वैक्सीनेशन होता था लेकिन अनहोनी घट गई. इंस्पेक्टर मंझरिया ने सोचा कि कुत्ते ने काटा तो है नहीं, सिर्फ नाखून लगा है. ऐसे में कोई टेंशन की बात नहीं होनी चाहिए. यहीं पर पुलिस इंस्पेक्टर वनराज से लापरवाही हो गई. वह रेबीज की चपेट में आ गए. वह अहमदाबाद के मशहूर केडी हॉस्पिटल में 5 दिन तक एडमिट रहे लेकिन बचाया नहीं जा सका. वनराज अहमदाबाद सिटी पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात थे. रेबीज से बचना जरूरी है क्योंकि चपेट में आने पर जान चली जाती है. यह और भी दुखद है कि आखिरी समय में इंस्पेक्टर वनराज को बेड से बांधकर रखा गया था क्योंकि रेबीज का वायरस इंसान के दिमाग पर काबू कर लेता है और उसे पागल बना देता है. तमाम एक्सपर्ट एक बार फिर आगाह कर रहे हैं कि अगर किसी को कुत्ते का नाखून लग जाए तब भी आपको रेबीज का वैक्सीन जरूर लगवा लेना चाहिए. अगर किसी का पालतू कुत्ता काटे या नाखून लगे और उस कुत्ते का मालिक कहे कि इसे रेबीज का वैक्सीन लगा है फिर भी आप अपने लिए इंजेक्शन जरूर लगवा लीजिए. अगर आपको खरोंच भी आ गई है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.



https://zeenews.india.com/hindi/india/ahmedabad-inspector-dies-due-to-rabies-german-shepherd-dog-nail-scratch/2933638

Address

Abul Hasan Bagh, Abul Kalam Azad Raod Jalkaura Main
Khagaria
851204

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when National Medicare Hospital and Research Centre Jalkoura posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to National Medicare Hospital and Research Centre Jalkoura:

Share