National Medicare Hospital and Research Centre Jalkoura

National Medicare Hospital and Research Centre Jalkoura Multidisciplinary Hospital with primary and secondary level of Treatment

13/11/2025

पहली सुई 💉 हमेशा हॉस्पिटल में डॉक्टर के निगरानी मे लगाना चाहिए.

अब लोग दूध से दूरी बनाने लगे हैं। कारण मुख्य रूप से दो हैं —1. लैक्टोज इन्टॉलरेंस (Lactose Intolerance)2. दूध के प्रति ए...
01/11/2025

अब लोग दूध से दूरी बनाने लगे हैं। कारण मुख्य रूप से दो हैं —
1. लैक्टोज इन्टॉलरेंस (Lactose Intolerance)
2. दूध के प्रति एलर्जी (Milk Allergy)

लगभग 60% भारतीयों में किसी न किसी रूप में दूध से असहिष्णुता (लैक्टोज इन्टॉलरेंस) पाई जाती है।

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में लैक्टेज़ एंज़ाइम कम हो जाता है, जिससे दूध पचाने में दिक्कत होने लगती है।

लक्षण: पेट फूलना, गैस, दस्त, ऐंठन, उल्टी, पेट में दर्द, मितली।

महिलाएँ (खासतौर पर प्रेग्नेंसी और 45+ उम्र की महिलाएं) अधिक प्रभावित होती हैं।

कुछ लोग दूध की प्रोटीन (Casein) से एलर्जिक होते हैं। यह अधिक गंभीर स्थिति है।

दूध कंपनियों के एडवर्टाइजमेंट और सोशल मीडिया पर बहस के बाद लोग ज्यादा जागरूक हो रहे हैं।

क्यों नहीं पचता दूध?

शरीर में लैक्टेज़ एंज़ाइम कम हो जाना।
उम्र बढ़ने पर यह क्षमता और घट जाती है।
कई लोगों में जन्म से ही कम मात्रा में होता है।

दही-छाछ क्यों पच जाते हैं?

दही-छाछ में लैक्टोज़ टूटकर लैक्टिक एसिड बन जाता है, जो शरीर आसानी से पचा लेता है।
फर्मेंटेड दूध प्रोडक्ट्स जैसे दही, पनीर, छाछ आमतौर पर कम दिक्कत देते हैं।

क्या सिर्फ गाय-भैंस का दूध समस्या देता है?

समस्या दूध नहीं, लैक्टोज़ से है।
प्लांट-बेस्ड दूध (सोया, बादाम, ओट आदि) विकल्प हो सकते हैं।

समाधान (कैसे बचें?)

दूध कम मात्रा में और गुनगुना पीएं।
दूध में अदरक, इलायची, हल्दी आदि डालने से पाचन बेहतर होता है (आयुर्वेदिक दृष्टि से)।
यदि बहुत तकलीफ हो तो:
दही, छाछ, पनीर जैसे फर्मेंटेड प्रोडक्ट लें।
प्लांट-बेस्ड दूध विकल्प आजमाएँ।
डॉक्टर से टेस्ट कराएँ यदि लक्षण बने रहें।

दूध सबके लिए समस्या नहीं।
जिन्हें दिक्कत न हो, वे संतुलित मात्रा में पी सकते हैं।
समस्या हो तो विकल्प अपनाएँ।


भारतीय  आबादी में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या काफी बढ़ गई है। बच्चों का ब्लड शुगर भी कंट्रोल से बाहर रहने लगा ...
31/10/2025

भारतीय आबादी में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या काफी बढ़ गई है। बच्चों का ब्लड शुगर भी कंट्रोल से बाहर रहने लगा है। लेकिन क्या आप जानते हैं इन समस्याओं को सही आटा खाकर कंट्रोल किया जा सकता है। यह उपाय डायबिटिक पेशेंट्स के लिए काफी कारगर साबित हो सकता है।
best flour for diabetes

न्यूट्रिशनिस्ट और वेट लॉस स्पेशियलिस्ट लीमा महाजन ने 5 स्वास्थ्य समस्याओं में फायदेमंद आटे के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि अधिकतर बार हम रोटी, पराठा, डोसा के लिए एक ही आटे का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन सही आटे का उपयोग करने से शुगर, थायराइड, हॉर्मोन, ब्लड प्रेशर, डायजेशन और हीमोग्लोबिन लेवल नियंत्रित रह सकता है।

अपने आटे में जौ, काकुम (कौनी या कोदन के नाम से भी जाना जाता है।)या बार्नयार्ड मिलेट मिलाकर मिक्सचर बनाएं। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और हाई फाइबर ग्लूकोज के लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है।

24/10/2025

अजीनोमोटो क्या है??👇👇👇
अजीनोमोटो को हम इसके रासायनिक नाम मोनो सोडियम ग्लूटामेट (MSG)के नाम से भी जानते है।

इसका इस्तेमाल ज्यादातर चीन की खाद्य पदार्थो में
खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है. ..
पहले हम अधिकांशतः घर पर बने खाने को खाते थे,
लेकिन अब लोग चिप्स, पिज्ज़ा, मोमोज,अंडा रोल, मैगी और भी अनेकों फास्ट फूड खाने को ज्यादा पसंद करने लगे है,जो कि इनमें अजीनोमोटो का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है,

इनमें भी अजीनोमोटो का इस्तेमाल होता है.
इसका इस्तेमाल कई डिब्बाबंद फ़ास्ट फ़ूड सोया सॉस, टोमेटो सॉस, संरक्षित मछली जैसे सभी संरक्षित खाद्य उत्पादों में किया जाता है।

अजीनोमोटो को पहली बार 1909 में जापानी जैव रसायनज्ञ किकुनाए इकेडा के द्वारा खोजा गया था.
उन्होने इसके स्वाद को मामी के रूप में पहचाना जिसका अर्थ होता है,सुखद स्वाद

कई जापानी सूप में इसका इस्तेमाल होता है.
इसका स्वाद थोडा नमक के जैसा होता है. देखने में यह चमकीले छोटे क्रिस्टल के जैसा होता है.
इसमें प्राकृतिक रूप से एमिनो एसिड पाया जाता है,किन्तु
आज दुनिया के हर कुक खाने में स्वाद को बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल करते है, अजीनोमोटो का इस्तेमाल असुरक्षित माना गया है, इसका इस्तेमाल पहले चीन की रसोई में होता था,
लेकिन अब ये धीरे धीरे हमारे भी घरों की रसोई में अपना पैठ बना चुका है,अपने समय को बचाने के लिए जो हम 2 मिनट में नुडल्स को तैयार कर ग्रहण करते है इस तरह के अधिकांशतः खाद्य पदार्थो में यह पाया जाता है जो धीरे धीरे हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते है।

यह एक प्रकार से नशे की लत जैसा होता है अगर आप एक बार अजीनोमोटो युक्त भोजन को ग्रहण कर लेते है,
आप उस भोजन को नियमित खाने की इच्छा रखने लगेंगे. ..इसके सेवन से शरीर में इन्सुलिन की मात्रा बढ़ जाती है जब आप अजीनोमोटो मिले पदार्थो का सेवन करते है, तो रक्त में ग्लूटामेट का स्तर बढ़ जाता है. जिस की वजह से इसका शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

अजीनोमोटो को एक धीमा हत्यारा🔥 भी कहा जा सकता है,यह आँखों की रेटिना को नुकसान पहुंचाता है साथ ही यह थायराईड और कैंसर जैसे रोगों के लक्षण पैदा कर सकता है।

अजीनोमोटो से युक्त खाद्य पदार्थो का अगर नियमित सेवन किया जाये तो यह माइग्रेन पैदा कर सकता है जिसको हम अधकपाली भी कहते है,
इस बीमारी में आधे सिर में हल्का हल्का दर्द होते रहता अजीनोमोटो के अधिक सेवन से मोटापे के बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है हमारे शरीर में मौजूद लेप्टिन हॉर्मोन,
हमे भोजन के अधिक सेवन को रोकने के लिए हमारे मस्तिष्क को संकेत देते है।

अजीनोमोटो के सेवन से हम ज्यादा भोजन कर जल्द ही मोटापे से ग्रस्त हो सकते है, और कई गम्भीर बिमारी से भी ग्रस्त हो सकतें हैं।

ध्यान दीजिए 👉फास्ट फूड के तो सभी दीवाने हैं ही लेकिन बाजार से नहीं बल्कि अपने घर पर देशी तरीके से बनाकर खायें।

अक्टूबर महीने में आम के पेड़ों को बीमारियों से बचाने के लिए चूने से पुतवा देनी चाहिए।  सफेदी लगाने की ये तकनीक नई नहीं ह...
24/10/2025

अक्टूबर महीने में आम के पेड़ों को बीमारियों से बचाने के लिए चूने से पुतवा देनी चाहिए। सफेदी लगाने की ये तकनीक नई नहीं है बहुत पुरानी है। लेकिन जितनी पुरानी है उतनी ही कारगर ।चूने से तने को पुतवा देने पर न केवल पेड़ों का कीट और बीमारियों से बचाव होता है, बल्कि इसके तने और छाल भी स्वस्थ होती है और खूब बौर और फल लगते हैं।

तने पर सफेदी (चूना) लगाने के फायदे :---

कीटों से सुरक्षा :
सफेदी का लेप दीमक, छाल खाने वाले कीट और अन्य हानिकारक कीटों से बचाव करता है।

फंगल संक्रमण से बचाव :
चूना क्षारीय (alkaline) प्रकृति का होता है, जो फफूंद और अन्य रोगों के पनपने से रोकता है।

पौष्टिक तत्वों की आपूर्ति :
सफेदी मिट्टी में कुछ जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है, जिससे पेड़ मजबूत बनता है और स्वस्थ विकास करता है।

तापमान नियंत्रण :
सफेद रंग सूर्य की तेज किरणों को परावर्तित करता है, जिससे तने का तापमान नियंत्रित रहता है और गर्मी से नुकसान नहीं होता।

छाल की दरारों की सुरक्षा :
पुराने पेड़ों की छाल में दरारें आ जाती हैं, जिनमें रोग और कीट घर बना सकते हैं। सफेदी का लेप इन दरारों की सुरक्षा करता है।

पेड़ को स्वस्थ रखना :
चूना पेड़ को पर्यावरणीय तनाव और कीटों से बचाता है, जिससे यह अधिक फूल और फल देता है।

नमी बनाए रखने में मदद :
यह गर्म और शुष्क मौसम में तने में नमी बनाए रखने में सहायक होता है।

तने पर सफेदी कैसे लगाएँ :---

सामग्री :

● 1 किलो बुझा हुआ सफेदी (चूना)

● 200 ग्राम तूतिया (कॉपर सल्फेट)

● 10 लीटर पानी

विधि :

1. सफेदी, तूतिया और पानी को मिलाकर घोल तैयार करें।

2. ब्रश की मदद से तने पर अच्छी तरह लगाएँ।

3. विशेष रूप से नीचे से ऊपर 4–5 फीट तक ध्यान दें।

कब लगाएँ :---

सफेदी लगाने का सबसे उपयुक्त समय होता है फरवरी, मार्च और अक्टूबर-नवंबर, जब पेड़ की वृद्धि धीमी होती है और यह कीट और रोगों के प्रति कम संवेदनशील होता है।

टिप्स :---

● घोल तैयार करने के बाद तुरंत इस्तेमाल करें।

● पेड़ पर नियमित रूप से निरीक्षण करें और जरूरत पड़ने पर सफेदी फिर लगाएँ।

● पुराने या कमजोर पेड़ों में यह तकनीक उन्हें मजबूत बनाने में मदद करती है।

सही समय और तरीके से सफेदी लगाने से आपका आम का पेड़ स्वस्थ रहेगा, अधिक फल देगा और कीटों व रोगों से सुरक्षित रहेगा।

19/09/2025
बच्चों में एक बीमारी अभी फैली हुई है... हाथ, पैर और मुँह की बीमारी (Hand, Foot and Mouth Disease – HFMD)यह क्या है?बच्चो...
18/09/2025

बच्चों में एक बीमारी अभी फैली हुई है... हाथ, पैर और मुँह की बीमारी (Hand, Foot and Mouth Disease – HFMD)

यह क्या है?
बच्चों में होने वाला एक सामान्य वायरल संक्रमण।
ज़्यादातर 5 वर्ष तक के बच्चों को प्रभावित करता है।
यह एंटरोवायरस से होता है।

लक्षण
✅ हल्का/मध्यम बुखार
✅ गले में खराश
✅ छाले – मुँह, जीभ और होंठ पर
✅ लाल दाने/फफोले – हथेलियों, तलवों, नितंबों पर
✅ खाने-पीने में दिक़्क़त
✅ कमजोरी व चिड़चिड़ापन

बीमारी कैसे फैलती है?
संक्रमित बच्चे की लार, छींक, खाँसी से।
छालों के तरल से।
गंदे हाथों, खिलौनों व बर्तनों से।
भीड़भाड़ और स्कूल में तेजी से फैल सकती है।

इलाज
कोई विशेष दवा/टीका नहीं।
सामान्यतः 7–10 दिन में ठीक हो जाती है।
लक्षणों से राहत के लिए:
बुखार/दर्द हेतु पैरासिटामोल।
पानी, जूस, सूप अधिक मात्रा में।
मुलायम और ठंडी चीजें जैसे दही, खिचड़ी, आइसक्रीम।

घर पर ध्यान दें
👉 बच्चे को आराम दें।
👉 बार-बार हाथ धोएं।
👉 बच्चे को 5–7 दिन स्कूल/डे-केयर से दूर रखें।
👉 संक्रमित बच्चे के बर्तन, कपड़े, खिलौने अलग रखें।
👉 बच्चे को बार-बार तरल आहार दें।

कब डॉक्टर से मिलें?
⚠️ लगातार तेज़ बुखार (38.5°C से ऊपर)
⚠️ बच्चा पानी न पी पाए और डिहाइड्रेशन हो
⚠️ बच्चा बहुत सुस्त हो या दौरे आएं
⚠️ छालों में पस भर जाए

✅ यह बीमारी हल्की और स्वतः ठीक होने वाली होती है, परंतु साफ-सफाई और लक्षणों की देखभाल बहुत ज़रूरी है।

सतुआ!मां कहती हैं कि सतुआ तब तक सतुआ नहीं कहलाता जब तक वो सात अनाज से मिलकर न बना हो।सत्तू में मक्की, जौ, ज्वार, मटर, चन...
17/09/2025

सतुआ!
मां कहती हैं कि सतुआ तब तक सतुआ नहीं कहलाता जब तक वो सात अनाज से मिलकर न बना हो।
सत्तू में मक्की, जौ, ज्वार, मटर, चना, बाजरा और गेहूं मां डालती थी।
इन सभी अनाज को भिगो कर सुखाती थी और फिर भाड़ में भूनने के लिए भिजवा देती थीं।
भुजैइन काकी की पारिश्रमिक अलग से चावल बांध कर देती थीं। अगर उन्हें अलग से मेहनताना नहीं दिया जाता था तो काकी भूनने के लिए आए अनाज का कुछ हिस्सा भुजाई के मूल्य के रूप में रख लेती थीं।
भाड़ में पहले से ही भीड़ लगी रहती है। कोई पसर भर मटर ले आया है तो कोई चना लाया है, किसी के पास एक सिकौहुली मकई के दाने हैं तो कोई भुजिया चाउर लाया है।
काकी जिसका भूजा भूजती थी उससे ही भाड़ झोकवाती थीं। बगिया के पेड़ो से गिरी पत्तियां बहार कर खांची में दबा दबा कर भर लाती थीं और यही उनके भाड़ का ईंधन होता था।
भाड़ जलते ही भाड़ से हवा के सर पर सवार हो कर उड़ती आती सोंधी सुगंध जब नाक में चढ़ती थी तो फिर मन गर्म गर्म भूजा चबाने के लिए बेताब हो उठता था।
मां फिर कुछ न कुछ देकर भुजाने भेज देती थीं।
जो आनंद गर्म गर्म भूजे भूजा का होता है उतना स्वाद रखे हुए में नहीं आता है।
खैर सतुआ से चले थे भूजा पर आ अटके तो सतुआ की तरफ वापिस चलते हैं।
सतुआ जब भुजा कर आ जाता था तब जांता धोया जाता था आस पास चिकनी मिट्टी से लीप कर साफ किया जाता था और फिर मां, काकी मिलकर सतुआ पीसती थीं।
दोपहर जब तीन बजे वाली भूख लगती थी तब भोजन के बजाय हमारे गांव का दो मिनट वाला चटपटा, स्वास्थ्य वर्धक, पौष्टिक आहार तैयार होता था।
फटाफट नमक डाल कर घोल लिया चटनी, प्याज, सिरका, हरी मिर्च संग खा कर आनंद लिया।
हमारे सनातन धर्म में बेटी के घर का पानी पीना निषेध किया गया है सो हमारे बुजुर्ग जब कभी बिटिया के घर जाते थे तो संग में सतुआ बांध ले जाते थे। गांव में किसी के घर से पानी मंगवा कर घोलकर सतुआ खा लेते थे।
खाने से मेरा तात्पर्य खाना ही है अब आप लोग सोचेंगे कि सत्तू तो पिया जाता है और मैं खाना लिख रही हूं तो सत्तू अब पिया जाने लगा है पहले गाढ़ा सा घोलकर उंगली से चाट चाट कर खाया ही जाता था।
जिसको मीठा पसंद होता था वो सत्तू में राब डालकर मुट्ठी बना कर खाता था।
घर का कोई सदस्य सुबह जल्दी कहीं जाने लगता था तो सत्तू सबसे उत्तम भोजन होता था। दूर जाना है तो सत्तू बांध कर साथ ले जाता था।
हमारे यहां सतुआन नाम से बाकायदा एक लोकपर्व है उसमें उस दिन घर के सभी सदस्य एक समय सतुआ ही खाते हैं और उस दिन सतुआ खाना अनिवार्य माना जाता है।
C & P

09/09/2025

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Khagaria
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