Jay Gurudev

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Jay Gurudev जो व्यक्ति हर परिस्थिति में सकारात्मक रहना सीख जाता है,वही ज़िंदगी में अलग पहचान बनाता है।
27/05/2026

Jay Gurudev
जो व्यक्ति हर परिस्थिति में सकारात्मक रहना सीख जाता है,
वही ज़िंदगी में अलग पहचान बनाता है।

05/05/2026

Jay Gurudev
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बुद्ध पूर्णिमा:मूर्तियों में बुद्ध नहीं मिलेंगे वर्तमान समय में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की प्रासंगिकता अत्यधिक है। २५०० ...
01/05/2026

बुद्ध पूर्णिमा:मूर्तियों में बुद्ध नहीं मिलेंगे
वर्तमान समय में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की प्रासंगिकता अत्यधिक है। २५०० वर्ष पुरानी ये शिक्षाएँ आज की तेज़-रफ़्तार, तनावपूर्ण, भौतिकवादी और विभाजित दुनिया में मानसिक शांति, नैतिकता और सामाजिक सद्भाव का एक व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। बुद्ध ने कभी किसी अंधविश्वास या कर्मकांड पर जोर नहीं दिया, बल्कि स्वयं की जांच (अप्पो दीपो भव) और तर्कसंगत समझ पर बल दिया, जो आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पूरी तरह मेल खाता है।

१. दुख का निदान और समाधान (चार आर्य सत्य)
बुद्ध का मूल संदेश दुख (dukkha) की समझ पर आधारित है। आज हम मानसिक स्वास्थ्य संकट (stress, anxiety, depression), असंतोष और खालीपन से घिरे हैं। सोशल मीडिया, उपभोक्तावाद और लगातार तुलना हमें अस्थायी सुखों के पीछे भागने को मजबूर करती है।

बुद्ध कहते हैं:
- दुख है (सभी अनुभव असंतोषजनक हैं)।
- इसका कारण तृष्णा (craving/attachment) है।
- इसका निवारण संभव है।
- मार्ग अष्टांगिक मार्ग है।

यह आज के मनोविज्ञान से सीधे जुड़ता है। **Mindfulness-Based Stress Reduction (MBSR) और Mindfulness-Based Cognitive Therapy (MBCT)** जैसी आधुनिक थेरेपी बौद्ध विपस्सना और सतर्कता (mindfulness) से प्रेरित हैं, जो तनाव, अवसाद और चिंता कम करने में प्रभावी सिद्ध हुई हैं।

२. अनित्यता (Impermanence - अनिच्चा), अनात्मा और आसक्ति का त्याग
आज की दुनिया में सब कुछ बदल रहा है — टेक्नोलॉजी, नौकरियाँ, रिश्ते, जलवायु। फिर भी हम स्थायित्व की भ्रांति में जीते हैं। बुद्ध की अनिच्चा की शिक्षा हमें सिखाती है कि सब कुछ क्षणिक है। इससे हम नुकसान, असफलता या परिवर्तन से कम प्रभावित होते हैं।

अनात्मा (no permanent self) का विचार आधुनिक मनोविज्ञान में ego और identity crisis को समझने में मदद करता है। सोशल मीडिया पर हम लगातार "self-image" बनाए रखने की कोशिश में दुख पाते हैं। बुद्ध कहते हैं — "मैं" की यह धारणा भ्रम है। इससे मुक्ति हमें स्वतंत्र बनाती है।

अनासक्ति (non-attachment) उपभोक्तावाद और लालच के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। आज पर्यावरणीय संकट, असमानता और युद्धों के पीछे भी असीमित इच्छाएं हैं। बुद्ध की शिक्षाएँ हमें पर्याप्तता (contentment) और सादगी की ओर ले जाती हैं।

३. करुणा, मैत्री और अहिंसा
वर्तमान में बढ़ती polarization, hate speech, communal tensions और global conflicts के बीच मैत्री भावना (Metta) और करुणा की बौद्ध शिक्षाएँ अत्यंत जरूरी हैं। बुद्ध ने कहा — "सब प्राणी सुखी हों"। यह compassion-based approach आज के divisive politics और social media toxicity का जवाब है।

दलाई लामा जैसे बौद्ध विचारक इसे आधुनिक संदर्भ में दोहराते हैं कि २१वीं सदी शांति और संवाद की सदी होनी चाहिए। अहिंसा केवल युद्ध रोकने तक नहीं, बल्कि रोजमर्रा की हिंसा (शब्दों, विचारों, पर्यावरण के प्रति) रोकने तक जाती है।

४. मध्य मार्ग और व्यावहारिकता
बुद्ध का मध्य मार्ग (Middle Way) extremes (extreme indulgence या extreme asceticism) से बचाता है। आज की दुनिया extremes से भरी है — extreme capitalism, extreme nationalism, extreme digital addiction। बुद्ध हमें संतुलित जीवन सिखाते हैं।

अष्टांगिक मार्ग (सही दृष्टि, संकल्प, वाणी, कर्म, आजीविका, प्रयास, स्मृति, समाधि) एक समग्र जीवन दर्शन है जो व्यक्तिगत विकास से लेकर नैतिक अर्थव्यवस्था और शासन तक लागू होता है।

५. वैज्ञानिक और शैक्षणिक प्रासंगिकता
बौद्ध ध्यान (meditation) के फायदे अब न्यूरोसाइंस द्वारा सिद्ध हैं — मस्तिष्क में सकारात्मक बदलाव, भावनात्मक नियंत्रण, बेहतर focus। स्कूलों, कॉर्पोरेट्स और सेना में भी mindfulness programs चल रहे हैं।

भारत में भी बुद्ध पूर्णिमा २०२६ के आसपास चर्चा हो रही है कि बुद्ध की शिक्षाएँ २०२६ में पहले से ज्यादा प्रासंगिक हैं — विशेषकर loving-kindness और compassion के लिए।

निष्कर्ष
बुद्ध की शिक्षाएँ न तो पुरानी हैं और न ही केवल धार्मिक। ये मानव मन की विज्ञान हैं। आज जब हम AI, climate change, mental health crisis और अर्थ-सामाजिक असमानताओं से जूझ रहे हैं, बुद्ध हमें याद दिलाते हैं — समस्या बाहर नहीं, बल्कि हमारे मन की आसक्ति और अज्ञान में है।

समाधान भी बाहर नहीं, बल्कि अपने अंदर है — जागरूकता, करुणा और समझ से।

जैसा कि कई विचारक कहते हैं: बुद्ध की शिक्षाएँ समय की सीमा नहीं जानतीं। वे हर युग में प्रासंगिक हैं क्योंकि मानवीय दुख का स्वरूप मूलतः एक ही है।

इन्हें अपनाने के लिए आपको भिक्षु बनने की जरूरत नहीं — रोज़ थोड़ी सतर्कता (mindfulness), करुणा का अभ्यास और अनित्यता की समझ काफी है। इससे व्यक्तिगत शांति के साथ ही एक बेहतर समाज का निर्माण संभव है।

"अप्प दीपो भव" — स्वयं अपना दीपक बनो। यही आज की सबसे बड़ी प्रासंगिकता है।











परम संत बाबा जय गुरुदेव जी महाराज के मुख्य वचन हैं:- *शाकाहारी रहना है*: बाबा जी ने हमेशा शाकाहार को महत्व दिया और अपने ...
28/04/2026

परम संत बाबा जय गुरुदेव जी महाराज के मुख्य वचन हैं:

- *शाकाहारी रहना है*: बाबा जी ने हमेशा शाकाहार को महत्व दिया और अपने अनुयायियों को शाकाहारी जीवन जीने की सलाह दी।
- *कलियुग जा रहा है, सतयुग आ रहा है*: बाबा जी ने भविष्यवाणी की थी कि कलियुग का अंत हो रहा है और सतयुग का आगमन हो रहा है।
- *नाम स्मरण की शक्ति*: बाबा जी ने नाम स्मरण को बहुत महत्व दिया और कहा कि नाम ही जीवात्मा को मोक्ष दिलाता है।
- *संसार सपना है*: बाबा जी ने संसार को एक सपना बताया और कहा कि जो आज बड़ा लगता है, वह कल नहीं रहता।
- *गुरु की दया*: बाबा जी ने गुरु की दया को बहुत महत्व दिया और कहा कि गुरु ही जीवात्मा को मोक्ष दिलाता है ¹ ² ³।

बाबा जय गुरुदेव जी महाराज के आश्रम मथुरा में स्थित हैं और उनके अनुयायी देश-विदेश में फैले हुए हैं। उनके आश्रम में नाम योग साधना मंदिर है, जहां लोग आकर नाम स्मरण करते हैं और शांति प्राप्त करते हैं ³ ⁴।
Jay Gurudev



जय गुरुदेव 🙏

चाय और कॉफी में अंतर आसान भाषा में दिया है:☕ चाय vs कॉफी1. स्रोत (Source)चाय: चाय के पौधे (Camellia sinensis) की पत्तियो...
26/04/2026

चाय और कॉफी में अंतर
आसान भाषा में दिया है:
☕ चाय vs कॉफी
1. स्रोत (Source)
चाय: चाय के पौधे (Camellia sinensis) की पत्तियों से बनती है
कॉफी: कॉफी के पौधे (Coffea) के बीज (beans) से बनती है
2. कैफीन (Caffeine)
चाय: कम कैफीन (लगभग 20–70 mg प्रति कप)
कॉफी: ज्यादा कैफीन (लगभग 80–120 mg प्रति कप)
3. स्वाद (Taste)
चाय: हल्का, मुलायम और कई फ्लेवर में
कॉफी: कड़वा, गहरा और तेज स्वाद
4. बनाने की विधि
चाय: पत्तियों को उबालकर या पानी में डालकर बनाई जाती है
कॉफी: बीन्स को भूनकर, पीसकर पानी में मिलाई जाती है
5. प्रकार (Types)
चाय: ग्रीन टी, ब्लैक टी, हर्बल टी, ऊलोंग टी आदि
कॉफी: अरेबिका, रोबस्टा
6. शरीर पर प्रभाव
चाय: शरीर को शांत करती है, तनाव कम करती है
कॉफी: ऊर्जा बढ़ाती है, नींद भगाती है
7. पोषक तत्व
चाय: एंटीऑक्सीडेंट अधिक होते हैं
कॉफी: एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, लेकिन चाय से कम
8. पीने का सही समय
चाय: दिन में कभी भी
कॉफी: सुबह या दोपहर में बेहतर
9. ज्यादा सेवन के नुकसान
चाय: एसिडिटी, नींद में कमी
कॉफी: घबराहट, तेज धड़कन, अनिद्रा
Jay Gurudev 👍

आजकल बहुत लोग शिकायत करते हैं कि खाना खाते ही पेट में जलन शुरू हो जाती है, शरीर के अंदर गर्मी बढ़ जाती है, और यहां तक कि...
26/04/2026

आजकल बहुत लोग शिकायत करते हैं कि खाना खाते ही पेट में जलन शुरू हो जाती है, शरीर के अंदर गर्मी बढ़ जाती है, और यहां तक कि गैस पास करते समय भी गर्माहट महसूस होती है।

यह स्थिति साफ संकेत है कि आपके शरीर में पित्त (heat element) बढ़ा हुआ है। अगर इसे समय रहते संतुलित नहीं किया गया, तो आगे चलकर एसिडिटी, अल्सर, स्किन प्रॉब्लम्स जैसी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।

यहां हम समझेंगे कि इस समस्या को रोजमर्रा की आदतों से कैसे कंट्रोल किया जा सकता है।

सुबह की शुरुआत: पेट को ठंडक देने वाला नियम
अगर आपको पेट में गर्मी रहती है, तो सुबह का समय बहुत अहम है।

नाश्ते के बाद ताजे फलों का जूस जरूर लें
आप मौसमी, अनार या कोई भी सीजनल फ्रूट जूस ले सकते हैं
कोशिश करें घर पर बना हुआ जूस पिएं, जिससे पोषक तत्व पूरे मिलें

अगर किसी कारण जूस उपलब्ध नहीं है, तो:

दही में थोड़ा देशी खांड/मिश्री मिलाकर खा सकते हैं
हल्का पतला छाछ (buttermilk) भी ले सकते हैं
इससे पेट की अंदरूनी गर्मी सुबह से ही कंट्रोल में आ जाती है।

दोपहर का सबसे जरूरी नियम: छाछ (Buttermilk)
दोपहर का खाना पचाने के लिए छाछ सबसे बड़ा उपाय है।

खाने के बाद छाछ जरूर लें
इसमें आप काला नमक डाल सकते हैं (नमकीन)
या हल्की मीठी छाछ भी ले सकते हैं

छाछ:

पाचन को मजबूत करती है
पेट की गर्मी कम करती है
तीनों दोष (वात, पित्त, कफ) को बैलेंस करती है

रात का नियम: दूध क्यों जरूरी है
रात को सोने से पहले दूध पीना बहुत फायदेमंद है:

यह शरीर को अंदर से शांत करता है
नींद गहरी और अच्छी आती है
पेट की जलन कम होती है

लेकिन ध्यान रखें:

दूध हल्का गर्म हो
ज्यादा भारी न हो

खाने के बाद क्या करें: छोटी-छोटी आदतें, बड़ा फायदा
1. सौंफ जरूर चबाएं
खाने के बाद मोटी सौंफ चबाने से
पाचन सुधरता है
पेट की गर्मी कम होती है
गैस और जलन कम होती है

2. हफ्ते में 1-2 बार सफाई
पेट साफ रखना बहुत जरूरी है
इसके लिए आप हफ्ते में 1–2 बार त्रिफला ले सकते हैं

इससे:

आंतों की सफाई होती है
पुरानी गर्मी और टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं

खाने के साथ सही कॉम्बिनेशन क्यों जरूरी है
अगर आप सही चीजों को साथ में खाते हैं तो:

अनाज (grains) से बनने वाली गर्मी कम हो जाती है
पाचन आसान हो जाता है
शरीर बैलेंस में रहता है

गलत कॉम्बिनेशन ही अक्सर पेट की गर्मी का असली कारण होता है।

जीवनशैली का एक जरूरी पहलू
एक बहुत गहरी बात समझिए—
अगर इंसान हर चीज अकेले करेगा, तो आलस आएगा, रूटीन बिगड़ेगा।

लेकिन अगर घर में सब एक-दूसरे का ध्यान रखें:

कोई जूस बना दे
कोई छाछ तैयार कर दे
कोई दूध गरम कर दे

तो ये आदतें टिकती हैं और सेहत अपने आप सुधरती है।

अंतिम समझ: धैर्य और निरंतरता
जैसे एक मोती सीप के अंदर सालों तक धैर्य रखकर बनता है, वैसे ही शरीर भी धीरे-धीरे ठीक होता है।

तुरंत रिजल्ट की उम्मीद न करें
छोटे-छोटे नियम रोज फॉलो करें
शरीर खुद ही बैलेंस में आ जाएगा

क्या आपको भी खाने के बाद पेट में जलन या गर्मी महसूस होती है?
Jay Gurudev
Upendra Yadav
Jitendar Kumar









अच्छे स्वास्थ्य के लिए महंगी चीजों को ही खाया जाये, जरूरी नहीं।सुबह सिर्फ एक दो मुट्ठी चने खाकर हेल्थ जबरदस्त हो सकती है...
25/04/2026

अच्छे स्वास्थ्य के लिए महंगी चीजों को ही खाया जाये, जरूरी नहीं।
सुबह सिर्फ एक दो मुट्ठी चने खाकर हेल्थ जबरदस्त हो सकती है.!

✅ एक सस्ता और आसान सा दिखने वाला चना हमारे सेहत के लिए कितना फायदेमंद है जानिये...

✅ काले चने भुने हुए हों, अंकुरित हों या इसकी सब्जी बनाई हो, यह हर तरीके से सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं।

✅ इसमें भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन्स, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स पाए जाते हैं।

✅ शरीर को सबसे ज्यादा फायदा अंकुरित काले चने खाने से होता है, क्योंकि अंकुरित चने क्लोरोफिल, विटामिन ए, बी, सी, डी और के, फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मिनरल्स का अच्छा स्रोत होते हैं।
साथ ही इसे खाने के लिए किसी प्रकार की कोई खास तैयारी नहीं करती पड़ती।
रातभर भिगोकर सुबह एक-दो मुट्ठी खाकर हेल्थ अच्छी हो सकती है।

✅चने ज्यादा महंगे भी नहीं होते और इसमें बीमारियों से लड़ने के गुण भी छिपे हुए हैं।
कब्ज से राहत मिलती है, चने में मौजूद फाइबर की मात्रा पाचन के लिए बहुत जरूरी होती है।

✅रातभर भिगोए हुए चने से पानी अलग कर उसमें नमक, अदरक और जीरा मिक्स कर खाने से कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है।
साथ ही जिस पानी में चने को भिगोया गया था, उस पानी को पीने से भी राहत मिलती है।
लेकिन कब्ज दूर करने के लिए चने को छिलके सहित ही खाएं।

✅यह एनर्जी बढ़ाता है।
अगर इंस्टेंट एनर्जी चाहिए, तो रात भर भिगोए हुए या अंकुरित चने में हल्का सा नमक, नींबू, अदरक के टुकड़े और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं, बहुत फायदेमंद होता है।
चने का सत्तू भी खा सकते हैं।(इस पर विस्तार से बता चुकी हूं)
यह बहुत ही फायदेमंद होता है।
गर्मियों में चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलाकर पीने से शरीर को एनर्जी तो मिलती ही है, साथ ही भूख भी शांत होती है।

✅पथरी की प्रॉब्लम दूर करता है।
दूषित पानी और खाने से आजकल किडनी और गॉल ब्लैडर में पथरी की समस्या आम हो गई है।
हर दूसरे-तीसरे आदमी के साथ स्टोन की समस्या हो रही है।
इसके लिए रातभर भिगोए हुए काले चने में थोड़ी सी शहद की मात्रा मिलाकर खाएं।
रोजाना इसके सेवन से स्टोन के होने की संभावना काफी कम हो जाती है और अगर स्टोन है तो आसानी से निकल जाता है।
इसके अलावा चने के सत्तू और आटे से मिलकर बनी रोटी भी इस समस्या से राहत दिलाती है।

✅काला चना शरीर की गंदगी को पूरी तरह से बाहर भी निकालता है।

अन्य फायदे...
☑️ एनर्जी बढ़ाता है,
☑️डायबिटीज से छुटकारा मिलता है,
☑️ एनीमिया की समस्या दूर होती है,
☑️बुखार में पसीना आने की समस्या दूर होती है,
☑️ पुरुषों के लिए फायदेमंद,
☑️हिचकी में राहत दिलाता है,
☑️ जुकाम में आराम मिलता है,
☑️मूत्र संबंधित रोग दूर होते हैं,
☑️ त्वचा की रंगत निखारता है।

✅डायबिटीज से छुटकारा दिलाता है।
चना ताकतवर होने के साथ ही शरीर में एक्स्ट्रा ग्लूकोज की मात्रा को कम करता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए कारगर होता है। लेकिन इसका सेवन सुबह सुबह खाली पेट करना चाहिए।
चने का सत्तू डायबिटीज़ से बचाता है।
एक से दो मुट्ठी ब्लड चने का सेवन ब्लड शुगर की मात्रा को भी नियंत्रित करने के साथ ही जल्द आराम पहुंचाता है।

✅एनीमिया की समस्या दूर होती है।
शरीर में आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया की समस्या को रोजाना चने खाकर दूर किया जा सकता है।
चने में शहद मिलाकर खाना जल्द असरकारक होता है।
आयरन से भरपूर चना एनीमिया की समस्या को काफी हद तक कम कर देता है।
चने में 27% फॉस्फोरस और 28% आयरन होता है जो न केवल नए बल्ड सेल्स को बनाता है, बल्कि हीमोग्लोबिन को भी बढ़ाता है।

✅हिचकी में राहत दिलाए
हिचकी की समस्या से ज्यादा परेशान हैं, तो चने के पौधे के सूखे पत्तों का धूम्रपान करने से हिचकी आनी बंद हो जाती है।
साथ ही चना आंतों/इंटेस्टाइन की बीमारियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

✅बुखार में पसीना आने पर
बुखार में ज्यादा पसीना आने पर भुने हुए चने को पीसकर, उसमें अजवायन मिलाएं।
फिर इससे मालिश करें।
ऐसा करने से पसीने की समस्या खत्म हो जाती है।

✅मूत्र संबंधित रोग में आराम
भुने हुए चने का सेवन करने से बार-बार पेशाब जाने की बीमारी दूर होती है।
साथ ही गुड़ व चना खाने से यूरीन से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या में राहत मिलती है।
रोजाना भुने हुए चनों के सेवन से बवासीर ठीक हो जाती है।

✅पुरुषत्व के लिए फायदेमंद
मिट्टी के बर्तन में रात भर भिगोए हुए चने को चबा चबाकर खाना पुरुषों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
पुरुषों की कई प्रकार की कमजोरी की समस्या खत्म होती है।
जल्द असर के लिए भीगे हुए चने के साथ दूध भी पिएं।
भीगे हुए चने के पानी में शहद मिलाकर पीने से पुरुषत्व बढ़ता है।

✅त्वचा की रंगत निखारता है।
चना केवल हेल्थ के लिए ही नहीं, स्किन के लिए भी बहुत फायदेमंद है।
चना खाकर चेहरे की रंगत को बढ़ाया जा सकता है। वैसे चने की फॉर्म बेसन को हल्दी के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।
नहाने से पहले बेसन में दूध या दही मिक्स करें और इसे चेहरे पर 15-20 लगा रहने दें।
सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें।
रंगत के साथ ही कील मुहांसों, दाद-खुजली और त्वचा से जुड़ी कई प्रकार की समस्याएं दूर होती हैं।

✅युवा महिलाओं को हफ्ते में कम से कम एक बार चना और गुड़ खाना चाहिए।
गुड़ आयरन का समृद्ध स्रोत है और चने में बड़ी मात्रा में प्रोटीन होता है।
ये दोनों मिलकर महिलाओं की माहवारी के दौरान होने वाले रक्त के नुकसान को पूरा करते हैं।
तथा सभी महिलाओं को आने वाले माघ महीने में हर रोज कम से कम 40-60 मिनट धूप में बैठकर तिल के लड्डू या गजक खाने चाहिए, जिसमें कैल्शियम की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इससे उनके शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी पूरी हो जाएगी।

✅जुकाम में राहत
गर्म चने को किसी साफ कपड़े में बांधकर सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है।

तो देखने में छोटा लगने वाला चना वास्तव में 👉 गुणों की खान है।
Jay Gurudev
Jitendar Kumar
Upendra Yadav










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प्रसिद्ध पंक्तियाँ संत कबीरदास जी की हैं, जो अधूरे ज्ञान और दिखावे के भेष (पाखंड) पर कड़ा प्रहार करती हैं। इसका अर्थ है ...
21/04/2026

प्रसिद्ध पंक्तियाँ संत कबीरदास जी की हैं, जो अधूरे ज्ञान और दिखावे के भेष (पाखंड) पर कड़ा प्रहार करती हैं। इसका अर्थ है कि यदि पूर्ण गुरु न मिले और शिक्षा अधूरी रह जाए, तो व्यक्ति केवल भगवा वस्त्र (साधु का वेश) पहनकर घर-घर भीख मांगता है, न कि उसे सच्चा ज्ञान या मोक्ष मिलता है। यह कर्मकांड के विरुद्ध एक आध्यात्मिक सीख है।

मुख्य अर्थ:
पूरा गुरु न मिला, सुनी अधूरी सीख: जब व्यक्ति किसी योग्य या सच्चे सद्गुरु की शरण में नहीं जाता और इधर-उधर से अधूरा ज्ञान प्राप्त करता है।
भगवा वस्त्र पहनकर, घर-घर मांगे भीख: बाहरी दिखावे के लिए साधु या सन्यासी का वेश धारण कर लेना, लेकिन वास्तविक ज्ञान न होने के कारण सम्मान या आजीविका के लिए दर-दर भटकना।

भावार्थ:
कबीरदास जी कहते हैं कि बिना सच्चा गुरु मिले, केवल वेशभूषा बदलने से कोई साधु या ज्ञानी नहीं बन जाता। सच्चा ज्ञान (सत्य ज्ञान) केवल पूर्ण गुरु की कृपा से ही संभव है, बाहरी दिखावे से नहीं। यह दोहा आडंबरों को छोड़कर सही गुरु की तलाश करने का संदेश देता है।


17/04/2026

एक महीने तक चाय न पीने से शरीर में कई अच्छे बदलाव दिख सकते हैं। खासकर अगर आप दिन में 2-3 कप से ज्यादा पीते हो या दूध-चीनी वाली चाय पीते हो।

*मुख्य फायदे:*

*1. नींद बेहतर होगी*
चाय में कैफीन होता है। 1 कप में लगभग 40-60mg कैफीन। इसे छोड़ने के 5-7 दिन बाद नींद गहरी आने लगती है। सुबह उठकर थकान कम लगती है। 7fed

*2. एसिडिटी और गैस कम*
खाली पेट चाय से पेट में एसिड बनता है। 1 महीना छोड़ने पर सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट फूलना जैसी दिक्कत काफी कम हो जाती है।

*3. दांतों का पीलापन रुकेगा*
चाय में टैनिन होता है जो दांतों पर दाग छोड़ता है। 1 महीने में दांतों का रंग थोड़ा साफ दिखने लगता है।

*4. शुगर कंट्रोल और वजन*
अगर आप 1 कप चाय में 2 चम्मच चीनी लेते हो और दिन में 3 कप पीते हो = 6 चम्मच चीनी रोज। 1 महीने में ∼180 चम्मच चीनी कम = लगभग 900g शुगर बॉडी में नहीं जाएगी। इससे वजन 0.5 से 1.5 किलो तक कम हो सकता है।

*5. एनर्जी लेवल स्टेबल*
पहले 3-4 दिन सिर दर्द, चिड़चिड़ापन लगेगा - इसे कैफीन विदड्रॉल कहते हैं। लेकिन 10 दिन बाद नकली एनर्जी की जगह नैचुरल एनर्जी आती है। दोपहर में सुस्ती कम लगती है।

*6. आयरन का बेहतर अब्जॉर्प्शन*
चाय खाना खाने के तुरंत बाद पीने से आयरन सोखने में रुकावट आती है। चाय बंद करने से खून की कमी वाले लोगों को फायदा मिलता है।

*7. पैसों की बचत*
दिन के ₹20 की चाय भी हो तो महीने के ₹600 बच गए।

*शुरू के 1 हफ्ते में क्या होगा:*
- दिन 1-3: सिर दर्द, नींद आना, चिड़चिड़ापन - नॉर्मल है
- दिन 4-7: क्रेविंग कम होगी, नींद सुधरेगी
- दिन 15-30: ऊपर वाले फायदे दिखने लगेंगे

*नोट*: अगर आप ग्रीन टी या बिना दूध-चीनी की ब्लैक टी पीते हो तो उसके फायदे अलग हैं। पर दूध-चीनी वाली अदरक-इलायची चाय छोड़ने से ये फायदे पक्के मिलते हैं।

आप दिन में कितने कप चाय पीते हो अभी?

वात, पित्त कफ को संतुलित करने का रामबाण घरेलू उपाय,,,,,वात और पित्त लिए त्रिफला चूर्ण, गिलोय, मुलेठी, और अश्वगंधा बेहतरी...
16/04/2026

वात, पित्त कफ को संतुलित करने का रामबाण घरेलू उपाय,,,,,

वात और पित्त लिए त्रिफला चूर्ण, गिलोय, मुलेठी, और अश्वगंधा बेहतरीन आयुर्वेदिक उपाय हैं, जो शरीर में जलन, एसिडिटी, दर्द और गैस से राहत दिलाते हैं।

प्रमुख औषधियों में योगराज गुग्गुल, अमृतारिष्ट, द्राक्षासव, और गंधक रसायन शामिल हैं। सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस या रात में त्रिफला चूर्ण का सेवन करना वात-पित्त नाशक माना जाता है।

त्रिफला चूर्ण: रात में गर्म पानी के साथ लेने से पाचन ठीक होता है और पित्त संतुलित होता है।

योगराज गुग्गुल: वात दोष के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक।

अमृतारिष्ट/गिलोय: पित्त को शांत करने और शरीर की गर्मी कम करने में बहुत प्रभावी है।

मुलेठी: एसिड रिफ्लक्स और पेट की जलन को शांत करती है।

गंधक रसायन: त्वचा रोगों और पुरानी वात-पित्त की समस्याओं में उपयोगी।

वात-पित्त कम करने के लिए आहार,,,,
नारियल पानी, घी, खीरा, और सौंफ का पानी पित्त को शांत करते हैं।

लहसुन:
कच्चा लहसुन चटनी या सब्जी के साथ खाने से गैस और वात में आराम मिलता है।

मालिश:
महानारायण तेल या महाविषगर्भ तेल से मालिश वात को नियंत्रित करती है।

सावधानी:
गंधक की तासीर गर्म होती है, इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन करने से पहले विशेषज्ञ या वैद्य की सलाह जरूर लें।

आइए त्रिदोषों के लक्षण एवं उपाय पर विस्तृत से चर्चा करते है।।
वात(GAS) -लगभग 80 रोग....
पित्त(ACIDITY)- लगभग 40 रोग.....
कफ(COUGH) -लगभग 28 रोग.....

जिस इंसान की बड़ी आंत में कचड़ा होता है बीमार भी केवल वही होता है

एनीमा एक ऐसी पद्धति है जो बड़ी आंत को साफ करती है और किसी भी रोग को ठीक करती है

आपको बता दूं संसार के सभी रोगों का कारण इन तीन दोष के बिगड़ने से होता है।

वात(GAS) अर्थात वायु....
शरीर मे वायु जहां भी रुककर टकराती है, दर्द पैदा करती है, दर्द हो तो समझ लो वायु रुकी है,,,,,

पेट दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, घुटनो का दर्द ,सीने का दर्द आदि,,,,,

डकार आना भी वायू दोष है,,,,,
-चक्कर आना,घबराहट और हिचकी आना भी इसका लक्षण है,,,,,,।

इसके प्रमुख कारण है
गैस उत्तपन्न करने वाला भोजन जैसे कोई भी दाल आदि गैस और यूरिक एसिड बनाती ही है

यूरिक एसिड जहां भी रुकता है उन हड्डियों का तरल कम होता जाता है हड्डियां घिसना शुरू हो जाती है ,उनमे आवाज आने लगती है, उसे डॉक्टर कहते है कि ग्रीस ख़त्म हो गई, या फिर स्लिप डिस्क या फिर स्पोंडलाइटिस, या फिर सर्वाइकल आदि

प्रोटीन की आवश्यकता सिर्फ सेल्स की मरम्मत के लिए है जो अंकुरित अनाज और सूखे मेवे कर देते है

मैदा औऱ बिना चोकर का आटा खांना
बेसन की वस्तुओं का सेवन करना

दूध और इससे बनी वस्तुओं का सेवन करना

आंतो की कमजोरी इसका कारण व्यायाम न करना,,,तन बिगड़ने वाला भोजन,मन बिगड़ने वाले विचार से एवं मनोदीशा बिगड़ने वाले लोगों से कैसे दूर रहे।

निवारण एवं उपाय विधि,,,,
अदरक का सेवन करें,यह वायु खत्म करता है, रक्त पतला करता है कफ भी बाहर निकालता है, सोंठ को लेकर रात में गुनगने पानी से आधा चम्मच खायेँ

लहसुन किसी भी गैस को बाहर निकालता है,।

यदि सीने में दर्द होने लगे तो तुरन्त 8-10 कली लहसुन खा ले, ब्लॉकेज में तुरंत आराम मिलता है,,,

लहसुन कफ के रोग और टीबी के रोग भी मारता है,,,,

सर्दी में 2-2 कली सुबह शाम, और गर्मी में 1-1 कली सुबह शाम ले, और अकेला न खायेँ सब्जी या फिर जूस , चटनी आदि में कच्चा काटकर डालकर ही खायेँ

मेथीदाना भी अदरक लहसुन की तरह ही कार्य करता है,,,,

आइए जानता है इसके प्राकृतिक उपचार,,,,
गर्म ठंडे कपड़े से सिकाई करे, अब उस अंग को पहले छुएं यदि वो गर्म है तो ठंडे सिकाई करे और वह अंग अगर ठंडा है तो गर्म सिकाई करे औऱ अगर न गर्म है और न ठंडा तो गर्म ठंडी सिकाई करे एक मिनट गर्म एक मिनट ठंडा ।

कफ,,,,,,
मुंह नाक से आने वाला बलगम इसका मुख्य लक्षण है
सर्दी जुखाम खाँसी टीबी प्लूरिसी निमोनिया आदि इसके मुख्य लक्षण है

सांस लेने में तकलीफ अस्थमा आदि या सीढी चढ़ने में हांफना,,,,

कारण,,,,??
तेल एव चिकनाई वाली वस्तुओं का अधिक सेवन
दूध और इससे बना कोई भी पदार्थ
ठंडा पानी औऱ फ्रिज की वस्तुये खांना
धूल ,धुंए आदि में अधिक समय रहना
धूप का सेवन न करना

निवारण,,,,??
विटामिन C का सेवन करे यह कफ का दुश्मन है यह संडास के रास्ते कफ निकालता है, जैसे आवंला
लहसुन, यह पसीने के रूप में कफ को गलाकर निकालता है,,,,,,Bp सामान्य हॉगा,,,,,ब्लड सर्कुलेशन ठीक हॉगा,,,,,नींद अच्छी आएगी,,,,अदरक भी सर्वश्रेष्ठ कफ नाशक है

आइए जानते है इसके प्राकृतिक उपचार,,,??
एक गिलास गुनगने पानी मे एक चम्मच नमक डालकर उससे गरारे करे

गुनगने पानी मे पैर डालकर बैठे, 2 गिलास सादा।पानी पिये और सिरर पर ठंडा कपड़ा रखे, रोज 10 मिनट करे

रोज 30-60 मिनट धूप ले ।

पित्त-पेट के रोग,( एसिडिटी)
-वात दोष और कफ दोष में जितने भी रोग है उनको हटाकर शेष सभी रोग पित्त के रोग है, BP, शुगर, मोटापा, अर्थराइटिस, आदि......

शरीर मे कही भी जलन हो जैसे पेट मे जलन, मूत्र त्याग करने के बाद जलन ,मल त्याग करने में जलन, शरीर की त्वचा में कही भी जलन,
खट्टी डकारें आना,,,,,
शरीर मे भारीपन रहना,,,,,,

कारण,,,,,,
गर्म मसाले, लाल मिर्च, नमक, चीनी, अचार
चाय ,काफी,सिगरेट, तम्बाकू, शराब,
मांस ,मछली ,अंडा,,,,दिनभर में सदैव पका भोजन करना,,,,क्रोध, चिंता, गुस्सा, तनाव,,,,,दवाइयों का सेवन,,,,मल त्याग रोकना एवं सभी 13 वेग को रोकना जैसे छींक, पाद, आदि,,,,,,

निवारण,,,,,??
पुराने रोग और नए रोग का एक ही समाधान बता रहा हु,,,,
फटे हुए दूध का पानी पिये, गर्म दूध में नीम्बू डालकर दूध को फाड़े, वह पानी छानकर पिए, पेट का सभी रोग में रामबाण है, सभी प्रकार का बुखार भी दूर करता है

फलो व सब्जियों का रस, जैसे अनार का रस, लौकी का रस, पत्ता गोभी का रस आदि,,,,,,निम्बू पानी का सेवन,,,

प्राकृतिक उपचार,,,,,??उपाय।।
पेट को गीले कपड़े से ठंडक दे
रीढ़ की हड्डी को ठंडक देना, लकवा इसी रीढ़ की हड्डी की गर्मी से होता है, गीले कपड़े से रीढ़ की हड्डी पर पट्टी रखें,,,व्यायाम ,योग करे,,,गहरी नींद ले,,,इलाज से बेहतर बचाव है।।
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Jay Gurudev








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