31/03/2026
कबीर साहेब जी का एक महत्वपूर्ण दोहा है जो अधूरे और पाखंडी गुरुओं की निंदा करता है। इसका अर्थ है कि झूठे गुरु ज्ञानहीन होने के कारण मृत्यु के बाद 84 लाख योनियों में 'अजगर' की तरह आलसी जीवन जीते हैं, और उनके अंधभक्त शिष्य 'चींटी' बनकर उनके शरीर को नोच-नोच कर अपना प्रतिफल (दुःख) भोगते हैं।
दोहे की व्याख्या और संदेश:
झूठे गुरु (अजगर): जो गुरु सही आध्यात्मिक ज्ञान नहीं रखते, स्वार्थी हैं, और गलत मार्ग दिखाते हैं, वे मृत्यु के बाद अजगर (पाइथन) योनि में जन्म लेते हैं।
अंधभक्त शिष्य (चींटियाँ): जो शिष्य आँख बंद करके ऐसे गुरुओं का अनुसरण करते हैं, वे 'चींटियों' की तरह उन गुरुओं का शरीर नोचते हैं, जिसका अर्थ है कि वे गुरु-शिष्य दोनों ही नर्क और कष्ट भोगते हैं।
भावार्थ: यह दोहा सचेत करता है कि गुरु सोच-समझकर, शास्त्रों के अनुसार चुनना चाहिए। गलत गुरु न केवल अपना, बल्कि शिष्यों का जीवन भी बर्बाद कर देता है।
Jay Gurudev