Panini Ayurveda

Panini Ayurveda We are the fastest growing Ayurvedic/Herbal third party Pharma manufacturing company in India, as we have satisfied many of our regular and new clients

We are the fastest growing Ayurvedic/Herbal third party Pharma manufacturing company in India, as we have satisfied many of our regular and new clients through our quality-products. The products we provide as third party manufacturing are provided in India. By having an in depth experience as a third party Pharma manufacturer of Herbal Products , we are the most recommended company in Pharma industry which is known for its quality and quickest delivery. We basically supply Ayurvedic medicines. All of our products are WHO-GMP certified, as we are a law abiding company which follows all the rules of Indian as well as International Pharma association. Our motto is to provide quality medicine so that we could be able to serve our nation as well as the humanity. Therefore, if you are fed up of all the tensions of manufacturing, supplying, billing and dealing in bulk manufacturing of Herbal products, then give us a chance to reduce your tension by supplying you the quality Herbal products as third party manufacturer so that your could satisfy your clients in the promised time duration.

19/06/2025
त्रिकुटा के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज https://www.paniniayurveda.comपरिचय (Introduction)पीपल, मिर्च और सोंठ ...
21/06/2021

त्रिकुटा के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज
https://www.paniniayurveda.com

परिचय (Introduction)

पीपल, मिर्च और सोंठ के चूर्ण को त्रिकुटा कहते है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

आभिन्यास बुखार : त्रिकुटु, त्रिफला तथा मुस्तक जड़, कटुकी प्रकन्द, निम्ब छाल, पटोल पत्र, वासा पुष्प व किरात तिक्त के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) और गुडूची को लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की बराबर मात्रा लेकर काढ़ा बना लें। इसे दिन में 3 बार लेने से आभिन्यास बुखार ठीक हो जाता है।
2. सन्निपात बुखार : त्रिकुटा (सोंठ, मिर्च और पीपल), त्रिफला (हरड़, बहेड़ा और आंवला), पटोल के पत्तें, नीम की छाल, कुटकी, चिरायता, इन्द्रजौ, पाढ़ल और गिलोय आदि को मिलाकर काढ़ा बना लें। इसका सेवन सुबह तथा शाम में करने से सन्निपात बुखार ठीक हो जाता है।

3. खांसी : त्रिकुटा के बारीक चूर्ण में शहद मिलाकर चाटने से खांसी ठीक हो जाती है।

4. कब्ज : त्रिकुटा (सोंठ, काली मिर्च और छोटी पीपल) 30 ग्राम, त्रिफला (हरड़, बहेड़ा और आंवला) 30 ग्राम, पांचों प्रकार के नमक 50 ग्राम, अनारदाना 10 ग्राम तथा बड़ी हरड़ 10 ग्राम को पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 6 ग्राम रात को ठंडे पानी के साथ लेने से कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।

5. जिगर (यकृत) का रोग : त्रिकुट, त्रिफला, सुहागे की खील, शुद्ध गन्धक, मुलहठी, करंज के बीज, हल्दी और शुद्ध जमालगोटा को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पिसकर चूर्ण बना लें। इसके बाद भांगरे के रस में मिलाकर 3 दिनों तक रख दें। इसे बीच-बीच में घोटते रहे। फिर इसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें और इसे छाया में सुखा लें। इसमें से 1-1 गोली खाना-खाने के बाद सेवन करने से यकृत के रोग में लाभ मिलता है।

6. जलोदर (पेट में पानी भर जाना) : त्रिकुटा, जवाखार और सेंधानमक को छाछ (मट्ठा) में मिलाकर पीने से जलोदर रोग ठीक हो जाता है।

7. पेट का दर्द : त्रिकुटा, चीता, अजवायन, हाऊबेर, सेंधानमक और कालीमिर्च को पीसकर चूर्ण मिला लें। इसे छाछ (मट्ठे) के साथ सेवन करने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है।

8. पीलिया : त्रिकुटा, चिरायता, बांसा, नीम की छाल, गिलोय और कुटकी को 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। फिर इसे छानकर इसमें थोड़ा-सा शहद मिलाकर सेवन करें। इससे पीलिया कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

9. बच्चों के रोग : त्रिकुटा, बड़ी करंज, सेंधानमक, पाढ़ और पहाड़ी करंज को पीसकर इसमें शहद और घी मिलाकर बच्चों को सेवन कराने से `सूखा रोग´ (रिकेट्स) ठीक हो जाता है।

21/06/2021

त्रिफला के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज
(पाणिनी आयुर्वेद)
परिचय (Introduction)

हरड़, बहेड़ा तथा आंवला के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर त्रिफला बनाया जाता है।

गुण (Property)

त्रिफला प्रमेह (वीर्य विकार), कफ, पित्त तथा कुष्ठ को ठीक करता है। यह दस्त लाकर पेट को साफ करने वाला होता है। आंखों के रोग को ठीक करने में यह लाभकारी होता है। यह भूख, रुचि को बढ़ाने वाला और विषम बुखार को नष्ट करने वाला होता है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

आंखों के रोग :
त्रिफला को शाम को पानी में डालकर भिगो दें। सुबह उठकर इसे छान लें तथा इससे आंखों धोएं इससे हर प्रकार की आंखों की बीमारियां ठीक हो जाती है। त्रिफला के चूर्ण को कुछ घंटे तक पानी में भिगोकर, छानकर उसका पानी पीने से भी गैस की शिकायत नहीं रहती हैं।
त्रिफला के पानी से आंखों को धोने से आंखों के अंदर की सूजन दूर हो जाती है।
लगभग 5 से 10 ग्राम महात्रिफला तथा मिश्री को घी में मिलाकर सेवन करने से आंखों का दर्द, आंखों का लाल होना या आंखों की सूजन आदि दूर होते है।
4 चम्मच त्रिफला का चूर्ण 1 गिलास पानी में मिलाकर अच्छी तरह से छान लें। इस पानी से आंखों पर छीटे मारकर दिन में 4 बार धोएं। इससे लाभ मिलता है और आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं।
त्रिफला के काढ़े की कुछ बूंदे आंखों में डालने से हर प्रकार के आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं।
त्रिफला के पानी से रोजाना 2 से 3 बार आंखों को धोने से कनीनिका की जलन दूर होती है। आंखों के रोगों को ठीक करने के लिए 30 ग्राम त्रिफला चूर्ण को रात के समय में 100 मिलीलीटर पानी में मिलाकर रखें। सुबह इसे कपड़े से छानकर आंखों को धोएं।
10 ग्राम त्रिफला, 5-5 ग्राम सेंधानमक और फिटकरी और 100 ग्राम नीम के पत्ते इन सबको लेकर 300 मिलीलीटर पानी में उबालें तथा इसे कपड़े से छानकर आंखों को धोने से आंखों की सूजन ठीक हो जाती है।

मोतियाबिंद :
ठंडे पानी या त्रिफला के काढ़े से आंखों को धोने से मोतियाबिंद दूर होता है। त्रिफला चूर्ण एवं यष्टीमूल चूर्ण को 3 से 6 ग्राम शहद या घी के साथ दिन में 2 बार लेने से मोतियाबिंद ठीक हो जाता है।
मोतियाबिंद को ठीक करने के लिए 6 से 12 ग्राम त्रिफला चूर्ण को 12 से 24 ग्राम घी के साथ दिन में 3 बार लेना चाहिए।

दिनौंधी (दिन में दिखाई न देना) :
त्रिफला के काढे़ में 12 से 24 ग्राम शुद्ध घी मिलाकर इसे 150 मिलीलीटर गुनगुने पानी के साथ दिन में 3 बार लेने से लाभ मिलता है।
त्रिफले के पानी से आंखों को रोजाना धोने और त्रिफले का चूर्ण घी या शहद के साथ सुबह और शाम 3 से 6 ग्राम खाने से दिनौंधी रोग में लाभ मिलता है।
दिनौंधी को ठीक करने के लिए रोजाना सुबह और शाम 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण को ताजे पानी के साथ सेवन करें और त्रिफला के पानी से आंखों और सिर को धोयें।

रतौंधी (रात में न दिखाई देना) :
त्रिफला के पानी से रोजाना सुबह और शाम आंखों और सिर को अच्छी तरह से धोना चाहिए। इससे रतौंधी रोग ठीक होने लगता है।

उच्च रक्तचाप (हाईब्लड़ प्रेशर) :
1 चम्मच त्रिफला के चूर्ण को गर्म पानी के साथ रात के समय में सोने से पहले लेने से लाभ उच्च रक्तचाप समान्य हो जाता है।
10 ग्राम त्रिफला का चूर्ण पानी में मिलाकर रात को किसी बर्तन में रख दें। सुबह इस मिश्रण को छानकर इसमें थोड़ी-सी मिश्री मिला दें और इसे पी लें। इससे उच्च रक्तचाप (हाईब्लड प्रेशर) कम होता है।

बालों का झड़ना :
त्रिफला का चूर्ण लगभग 2 से 6 ग्राम तथा लौह की भस्म (राख) 125 मिलीग्राम को मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है।

कामला (पीलिया) :
त्रिफला, वासा, गिलोय, कुटकी, नीम की छाल और चिरायता को मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण की 20 ग्राम मात्रा को लगभग 160 मिलीलीटर पानी में पका लें। जब पानी चौथाई बच जायें तो इस काढ़े में शहद मिलाकर सुबह और शाम के समय सेवन करने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
त्रिफला, पलाश तथा कुटज को मिलाकर सेवन करने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है।
पीलिया का उपचार करने करने के लिए 40 मिलीलीटर त्रिफला के काढ़े में 5 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।
त्रिफला का रस एक तिहाई कप इतना ही गन्ने का रस मिलाकर दिन में 3 बार पीने से पीलिया की बीमारी दूर होती है।
हल्दी, त्रिफला, बायबिडंग, त्रिकुटा और मण्डूर को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रख लें। फिर उस चूर्ण को घी और शहद के साथ मिलाकर खाने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
आधा चम्मच त्रिफला का चूर्ण, आधा चम्मच गिलोय का रस, आधा चम्मच नीम का रस। इन सबकों मिलाकर शहद के साथ चाटें। लगभग 12 से 15 दिन तक इसका सेवन करने से रोग ठीक हो जाता है।

टायफाइड :
त्रिफला का काढ़ा लगभग 10-20 मिलीलीटर बुखार आने से 1 घण्टे पहले पीने टायफाइड रोग में लाभ मिलता है।
लगभग 20 मिलीलीटर त्रिफला के काढ़े या गिलोय के रस को पीने से टायफाइड ठीक होने लगता है।

वजन बढ़ाने के लिए :
1 चम्मच त्रिफला चूर्ण को रात में लगभग 200 ग्राम पानी में मिलाकर रख दें। सुबह के समय इस पानी को उबालें। जब पानी आधा बच जाए तो इसको छानकर रख लें। इसके बाद 2 चम्मच शहद मिलाकर गुनगुना पीने से कुछ ही दिनों में ही कई किलो वजन में बढ़ोत्तरी होती हैं।

मलेरिया का ज्वर :
मलेरिया ज्वर को ठीक करने के लिए त्रिफला और पीपल को बराबर भाग में लेकर चूर्ण बना लें, इसमें शहद मिलाकर चाटने से लाभ मिलता है।
त्रिफला 3 ग्राम, नागरमोथा 3 ग्राम, निशोथ 3 ग्राम, त्रिकुटा 3 ग्राम, इन्द्रजौ 3 ग्राम, कुटकी 3 ग्राम, पटोल के पत्ते 3 ग्राम, चित्रक 3 ग्राम और अमलतास को 3 ग्राम की मात्रा में कूटकर चूर्ण बना लें। जब काढ़ा ठंडा हो जाये तब शहद मिलाकर रोगी को पिलाए इससे मलेरिया बुखार ठीक हो जाता है।

फेफड़ों में पानी भर जाना :
1 ग्राम त्रिफला का चूर्ण और 1 ग्राम शिलाजीत को 7 से 14 मिलीमीटर गाय के मूत्र (पेशाब) में मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से यह रोग ठीक हो जाता है।

कब्ज :
कब्ज को दूर करने के लिए त्रिफला का चूर्ण 5 ग्राम रात में हल्के गर्म दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है।
1 चम्मच त्रिफला के चूर्ण को गर्म पानी के साथ सोने से पहले सेवन करने से कब्ज की समस्या दूर होती है।
त्रिफला का चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में लेकर हल्का गर्म पानी के साथ रात को सोते समय लेने से कब्ज दूर हो जाती है।
त्रिफला का चूर्ण 6 ग्राम शहद में मिलाकर रात में खा लें, फिर ऊपर से गर्म दूध पीएं। ऐसा कुछ दिनों तक करने से कब्ज की समस्या खत्म हो जाती है।
त्रिफला 25 ग्राम, सनाय 25 ग्राम, काली हरड़ 25 ग्राम, गुलाब के फूल 25 ग्राम, बादाम की गिरी 25 ग्राम, बीज रहित मुनक्का 25 ग्राम, कालादाना 25 ग्राम और वनफ्शा 25 ग्राम इस सब को पीसकर चूर्ण बना लें। इस मिश्रण को गर्म दूध के साथ लेने से कब्ज समाप्त हो जाती है।
50 ग्राम त्रिफला, 50 ग्राम सोंफ, 50 ग्राम बादाम की गिरी, 10 ग्राम सोंठ और 30 ग्राम मिश्री को अलग-अलग जगह कूट लें। इन सबकों मिलाकर इसमें से 6 ग्राम रात को सोने से पहले सेवन करें।
त्रिफला गुग्गुल की दो-दो गोलियां दिन में 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) गर्म पानी के साथ लेने से पुरानी कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।

पेट की गैस बनना :
त्रिफला और राई को पीसकर चूर्ण बना लें। इसे थोड़ी-सी मात्रा में गर्म पानी के साथ लेने से लाभ मिलता है।

पेट में दर्द :
त्रिफला का चूर्ण 3 ग्राम तथा 3 ग्राम मिश्री को मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है।
त्रिफला को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। फिर इस चूर्ण को गर्म पानी के साथ सेवन करें। इससे पेट का दर्द ठीक हो जाएगा।

पेट के सभी प्रकार के रोग :
200 ग्राम त्रिफला चूर्ण में लगभग 120 ग्राम खांड (कच्ची चीनी) मिला लें। इसमें से 5 ग्राम की मात्रा दिन में सुबह और शाम पानी के साथ लेने से पेट के सभी रोग ठीक हो जाते हैं।

पेट फूलना :
त्रिफला 10 ग्राम, 20 ग्राम सनाय और 50 ग्राम चूक को कूट छानकर नींबू के रस में मिलाकर छोटी-छोटी एक समान भाग में गोलियां बनाकर छांया में सुखा लें। रात को सोते समय 1 से 2 गोली लेने से पेट हल्का हो जाता है।

मोटापा :
त्रिफला का चूर्ण लगभग 12 से 14 ग्राम की मात्रा में सोने से पहले रात को हल्के गर्म पानी में डालकर रख दें। सुबह इस पानी को छानकर इसमें शहद को मिलाकर सेवन करें। ऐसा कुछ दिनों तक लगातार लेने से मोटापा कम होने लगता है।
त्रिफला, चित्रक, त्रिकुटा, नागरमोथा तथा वायविंडग को मिलाकर काढ़ा बना लें और इसमें गुगुल मिलाकर सेवन करें। इसे कुछ दिनों तक लेने से मोटापा कम होने लगता है।
मोटापा कम करने के लिए त्रिफला का चूर्ण शहद के साथ 10 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार लेने से लाभ मिलता है।
2 चम्मच त्रिफला को 1 गिलास पानी में उबालकर इच्छानुसार मिश्री मिला लें और इसका सेवन करें। इसे रोज लेने से मोटापा दूर होता है।
त्रिफला का चूर्ण और गिलोय का चूर्ण 1-1 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ चाटने से मोटापा कम होता है।
त्रिफला और गिलोय को मिलाकर काढ़ा बनाकर शहद के साथ सेवन करने से मोटापा कम होने लगता है।

जुकाम :
जुकाम को ठीक करने के लिए 3 ग्राम त्रिफला के चूर्ण को शहद मिलाकर चाटने से खांसी और जुकाम भी ठीक हो जाता है।

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30/05/2021

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21/02/2021

न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो,
यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः।
यानेव हत्वा न जिजीविषामस्,
तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः।।
(गीता 2/6)
यह भी निश्चित नहीं है कि वह भोग मिलेगा ही। यह भी हम नही जानते कि हमारे लिये क्या करना श्रेयस्कर है; क्योंकि जो कुछ हमने कहा, वह अज्ञान प्रमाणित हो गया। यह भी ज्ञात नहीं है कि हम जीतेंगे अथवा वे ही जीतेंगे। जिन्हें मार कर हम जीना भी नही चाहते, वे ही धृतराष्ट्र के पुत्र हमारे सामने खङे है। जब अज्ञान रूपी धृतराष्ट्र से उत्पन्न मोह इत्यादि स्वजन समुदाय मिट ही जायेगे, तब हम जीकर ही क्या करेगे? अर्जुन पुनः सोचता है कि जो कुछ हमने कहा, कदाचित् यह भी अज्ञान हो; अतः गीता 2/7 मे प्रार्थना करता है-

कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः ,
पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः।
यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे,
शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्।।
(गीता 2/7)
कायरता के दोष से नष्ट स्वभाव वाला, धर्म के विषय मे सर्वथा मोहित चित्त हुआ मै आप से पूछता हू। जो कुछ निश्चित परम कल्याण कारी हो, वह साधन मेरे लिये कहिये। मै आपका शिष्य हू, आप की शरण मे हू, मुझे साधिये। केवल शिक्षा न दिजिय, बल्कि जहा लङ खङाऊ वहा सम्भालिये। "लाद दे लदाय दे और लादने वाला साथ चले- कदाचित् गट्ठर गिर पङा, तब कौन लदवायेगा?" ऐसा ही समर्पण अर्जुन का है।
यहाँ अर्जुन ने पूर्ण समर्पण कर दिया। अभी तक वह श्रीकृष्ण को अपने स्तर का ही समझता था, अनेक विद्याओं मे अपने को कुछ आगे ही मानता था। यहां उसने अपनी बागडोर श्रीकृष्ण को वस्तुतः सौंप दी। सद्गुरु पूर्तिपर्यन्त हृदय में रहकर साधक के साथ चलते हैं। यदि वह साथ न रहे, तो साधक पार न हो। युवा कन्या के परिवार वाले जिस प्रकार शादी- विवाह तक उसको संयम की शिक्षा देते हुए सम्भाल ले जातें हैं, ठीक इसी प्रकार सद्गुरु अपने शिष्य की अन्तरात्मा से रथी हो कर उसे प्रकृति की घाटियों से निकाल कर पार कर देते हैं। अर्जुन गीता 2/8 मे निवेदन करता है कि- भगवन् ! एक बात और है-

सम्पूर्ण जानकारी के लिये देखे, परम् पूज्य योगेश्वर, स्वामी श्री देवधर शास्त्री जी महाराज की व्याख्या सनातन दर्शन पर ।
ॐ श्री सदगुरु देव भगवान की जय।
++++++++++++++++++++++
#सनातनदर्शन

~ 🕉️~ Happy Aadra Nakshatra frnZ देखिए, जानकारी होना कोई बडी बात नहीं है, हम कितना जानतें है  या हम कीतना उँचा सोचते है ...
30/12/2020

~ 🕉️~ Happy Aadra Nakshatra frnZ

देखिए, जानकारी होना कोई बडी बात नहीं है, हम कितना जानतें है या हम कीतना उँचा सोचते है या हम कीतने पैसैवाले है ,उससे नही मगर. . . . . . .

हम कीतना सचेतन और कीतना होशपुर्वक जीते है that will decide the quality & future journey of our life bosS 🙏~

🍁 for example एक सिकंदर था ~ 1 एडीसन थे- एक अद्भूत साहस और दुसरा असिमित जानकारी और बुद्धि शक्ति का प्रतिक लेकिन, जितेजी और मरते वक़त कितने होंश मै थे ❓ और दुसरी और. . . . .

एकथी Meera~ Kabir- Almansoor- Socratis JesuS ~ जिनके पास जानकारीया कहो या बुद्धि प्रतिभा या यु कहो की, entrepreneurship जैसा कुछ था क्या ❓ लेकीन......

ज़हर पीते वक्त मीरा या सुलिपर चढते समय JesuS या गला कटते वक्त Almansoor etc - क्या उनके होंश और उनके सचेतनता - सभानता (consciousness) की क़ीमत लगानेकी कीतनी हैसियत है हमारी ❓❓
सोचना तो पड़ेगा मालिक

  #ईंफर्मेशनऔरबदलाव2             मान लिजीए की आप को कहा जाए आप सपने मे भाग रहे है और आपके पिछे शेर पडा हुआ है। एक लपाक औ...
30/12/2020


#ईंफर्मेशनऔरबदलाव2

मान लिजीए की आप को कहा जाए आप सपने मे भाग रहे है और आपके पिछे शेर पडा हुआ है। एक लपाक और आपकी मृत्यु (वेसै सपने मे कोई भी अपने आप को मरता हुआ नहीं देख सकता) निकट फटाक से आपकी निंद खुल जाती है। ओर आप महसूस करते हे पेर थके हुए सर पर पसीना ब्लड प्रेशर हाई।

भौतिक रूप से देखे तो आप केहसाथ एसा कुछ हूआ नहीं तो शरीर मे आए बदलाव कीसने कीए? वो आपकी इन्फर्मेशन है।

ज्ञान सकारात्मक हो सकता है नकारात्मक भी। पर बदलाव होते है ज्ञान से। उस बदलाव से आपका व्यवहार निश्चित होता है। व्यवहार से संबंध रहेगा। और संबंधों से परिस्थिति प्रभावित होती है। और उनसे माहोल बनता है।

आने वाला भविष्य आप क्या सोचते है उनपे निर्भर है।
आगे......

 #जापान_का_हिन्दू_धर्म यह  #सहस्त्रबाहु_प्रतिमा 3000 वर्ष प्राचीन है, जो जापान के एक म्यूजियम में रखी है । इस मूर्ति को ...
26/12/2020

#जापान_का_हिन्दू_धर्म

यह #सहस्त्रबाहु_प्रतिमा 3000 वर्ष प्राचीन है, जो जापान के एक म्यूजियम में रखी है । इस मूर्ति को देखकर आपका यह संदेह तो दूर हो गया की जापान का भी प्राचीन धर्म हिन्दू धर्म ही था।

जापान के लोग स्वयं को #निप्पोन कहते है । यह निपुण का अपभ्रंस है। और यह इत्तफाक नहीं हो सकता, की आज तक जापानी लोगो की कार्य निपुणता विश्वविख्यात है ।

जापानी लोग जिस पंरपरा का पालन करते है, वह परंपरा कहलाती है । यह / का अपभ्रंस है।

जापानी लोग अपने दादाजी को ओजी कहते है, मराठा लोग " #आजा " । रामचन्द्रजी के दादाजी अज थे, हो सकता है उसी कारण यह परंपरा पड़ी हो कि दादा को अज, औज, ओजा कहा जाता हो ?
आज भी भारत के विभिन्न क्षेत्रों में मां के पिता अर्थात नाना को "अजा" कहकर संबोधित किया जाता है संभवत यह आजा शब्द भारत से जापान तक पहुंचा है।

जापान का बौद्धधर्मी होना ही उनके पूर्ववर्ती हिन्दुधर्मी होने का पुख्ताप्रमाण है।

अंतिम संसार की जापानी प्रक्रिया भी हिंदुओ वाली ही है, वह भी ॐ के उच्चार के साथ ।

जापान के जुडो ओर कराटे भी वैदिक ही है - " करहस्त प्रहार " उर्फ कराटे // खाली हाथ व्यक्ति पर कोई एकाएक हमला करें, तो उससे कैसे बचा जाएं, उसे करहस्त प्रहार युद्ध कहते है। इसी तरह जुडो युद्ध का अपभ्रंस है ।।

और एक बात -- इस मूर्ति के हाथ हटा दीजिये। यही बोद्ध/ जैन मूर्ति बन जाएगी ।

दिनांक :- २६.१२.२०२०

 #इल्लूमिनाती_क्या_है :प्रकृति का नियम है यहां ताकतवर ही राज करते हैं और ये नियम इस जगत के हर प्राणी पर लागू होता है, यह...
26/12/2020

#इल्लूमिनाती_क्या_है :

प्रकृति का नियम है यहां ताकतवर ही राज करते हैं और ये नियम इस जगत के हर प्राणी पर लागू होता है, यहां वर्चस्व की जंग सृष्टि की शुरुआत से ही चलती रही है, बस समय समय पर तरीके बदलते रहे हैं, इसी तरह आज भी वर्चस्व जमाने के नए नए तरीके अस्तित्व में आ गए है।
एक समय होता था जब धरती पर किसी दूसरे देश-राज्य पर वर्चस्व की लड़ाई के लिए युद्ध करना पड़ता था और राजाओं को परास्त करना पड़ता था, लेकिन उस सीधे युद्ध में बहुत नुकसान हो जाता था, कई बार तो खुद राजा, सेनापति व मुख्य योद्धा ही बलि चढ़ जाते थे और इस तरह अगर जीत भी प्राप्त कर ली तो आधार कमजोर होने के कारण कुछ वर्षों में पतन निश्चित था।
इन्हीं सब परिस्थितियों को देखते हुये जरूरत महसूस हुयी गुप्त संगठनों ( ) की, जिसमें राज करने वाले मुख्य लोग छुपे हुए या अज्ञात रहते हैं और खुद मैदान में आने के बजाय अपने प्यादे सेट कर लड़ाइयाँ व कार्यवाहियां करते हैं, इस तरह उनका राज सदियों तक बिना किसी समस्या के कायम रहता है क्योंकि उनके विरोधी चाहकर भी कभी उन तक नही पहुंच पाते।
वैसे तो आज दुनिया भर में कई देशों में इस तरह के गुप्त संगठन (Secret Societies) बने हुए हैं लेकिन उनमे जो सबसे समर्थ, खतरनाक और ताकतवर है वो है #इल्लूमिनाती नाम का एक गुप्त संगठन, जिसने कई माध्यमो से आज दुनिया पर अपना वर्चस्व स्थापित किया हुआ है, प्रस्तुत है उसी के बारे में एक

इल्लूमिनाती के बारे में एक संक्षिप्त रिपोर्ट :

#इल्लूमिनाती_क्या_है :

इल्लूमिनाती दुनिया के सबसे ताकतवर और समर्थ लोगों का एक गुप्त समूह (Secret Society) है जिसके सदस्य दुनिया के बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ, बुद्धिजीवी, व्यापारी, बैंकर, डॉक्टर, वैज्ञानिक, इंजीनियर, लेखक, चिन्तक-विचारक, तंत्र मंत्र विशेषज्ञ, हथियार निर्माता, दवा निर्माता, टेक्नोलॉजी कम्पनियां हैं !

#इल्लूमिनाती_का_लक्ष्य_क्या_है :

इल्लूमिनाती का लक्ष्य दुनिया पर राज करना व दुनिया को अपने इशारों पर चलाना है ! दूसरी भाषा में कहें तो दानवों की तरह पूरी दुनिया को जीतना व उन पर अपना साम्राज्य स्थापित करना जैसा की पहले भी सिकंदर तथा कुछ रोमन व इस्लामिक आक्रमणकारी करने की कोशिश कर चुके हैं ! जिन्हें कुछ हद तक सफलता भी मिली थी, लेकिन कुछ गलतियों की वजह से वो दुनिया पर राज करने के अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो पाए थे और इल्लू उन सब की गलतियों से सबक लेकर काम कर रहा है, जो उसकी सफलता का सबसे बड़ा कारण है !

आखिर इल्लूमिनाती जैसा गुप्त संगठन (Secret Society) बनाने के पीछे कारण क्या हो सकता है :

विश्व-विजय (Master Race) ! दुनिया में कुछ ऐसे लोग होते हैं, जिनका दिमागी स्तर सामान्य मनुष्य से कहीं ज्यादा होता है, इस कारण उनकी सोच उनके कार्य उनका तरीका भी दुनिया से कुछ हटकर होता है ! इल्लूमिनाती के संस्थापक लोग भी इसी श्रेणी के हैं, जिनकी ‘सोच वहां से शुरू होती है जहां से सामान्य मनुष्य सोचना बंद कर देते हैं’! उनकी इसी सोच और दुनिया पर राज करने की लालसा ने उन्हें इस ओर प्रेरित किया कि वो पूरे इतिहास से सबक लेते हुए एक ऐसा संगठन तैयार करें जो पूर्ववर्तियों जैसी गलतियाँ ना करे तथा बड़े ही सुनियोजित व गुप्त तरीके से उन्हें उनके लक्ष्य की ओर ले जा सके ! इल्लूमिनाती के सदस्यों ने जिन्होंने इसे खड़ा किया था जब उन्होंने देखा कि धरती के सभी प्राणी अपनी-अपनी धुन में मस्त हैं, किसी का दुनिया से कोई लेना देना नहीं है, सभी कुछ बड़ा सोचने या करने के बजाय अपने रोजमर्रा के काम में लगे-लगे ही जिन्दगी गुजार दे रहे हैं तो उन्होंने योजनायें भी ऐसी बनायी जो मनुष्यों के पारम्परिक जीवन को प्रभावित किये बिना (अगर करे भी तो उन्हें एहसास ना होने पाए) उन्हें उनके लक्ष्य की ओर ले जाय !

#इल्लूमिनाती_का_दुनिया_पर_प्रभाव_क्या_है :

इल्लूमिनाती का प्रभाव जानना हमारे लिए कोई ज्यादा कठिन नहीं है, क्योंकि आज इसका प्रभाव मनुष्य के पैदा होने से लेकर मरने तक तथा खाने से लेकर पीने तक है, आप लोगों ने इतिहास की किताबें पढ़ी होंगी जिसमें कई सभ्यताओं का जिक्र मिलता है जैसे #सुमेरियन सभ्यता, #माया सभ्यता, #सिन्धु_घाटी की सभ्यता ( #भारतीय सभ्यता), #ईरानी सभ्यता, #मेसोपोटामियन सभ्यता, पूर्व की #बौद्ध सभ्यता आदि इसी तरह की अन्य कई सभ्यताएं थीं जिनका आज अगर हम अस्तित्व ढूंढें तो शायद ही वो कहीं नजर आयें,
जानते हैं मित्रों वो सब कहाँ गयीं क्योंकि हमने भी किताबों में ही पढ़ा है ‘सतही तौर पर सभ्यतायें जरुर मिट जाया करती हैं, लेकिन उनका अस्तित्व कभी नहीं मिटता, वो किसी ना किसी रूप में मौजूद ही रहतीं है, लेकिन इसके उलट इल्लूमिनाती ने सफलतापूर्वक दुनिया की एक एक सभ्यता को जड़ से मिटा दिया, आज दुनिया के लगभग कई देश जिनमें हमारा भारत भी शामिल है अगर वो अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो ये इल्लूमिनाती का ही प्रभाव है !

#इल्लूमिनाती_की_ताकत_क्या_है :

किसी जमाने में धरती पर राज करने के लिए सबसे जरुरी ताकत तेज दिमाग के साथ सिर्फ ‘हिंसा’ हुआ करती थी, जिसके अंतर्गत राजा व सम्राट दूसरे देशों पर आक्रमण करके बलपूर्वक उन्हें अपना गुलाम बनाकर अपना राज स्थापित कर लेते थे, लेकिन इस जमाने में अगर दुनिया पर राज करना है तो तेज दिमाग के साथ दो जरुरी ताकतों का होना बहुत जरुरी है ‘हिंसा और पैसा’ जिसे इल्लूमिनाती बखूबी समझता है ! इसलिए उसने अपने मुख्य हथियारों में मात्र हिंसा ही नहीं पैसा भी रखा हुआ है, जिसके पीछे पूरी दुनिया दौड़े इल्लू ने ऐसी मुद्रा प्रणाली को जन्म दिया है !

#इल्लूमिनाती_इतना_खतरनाक_क्यों_है ???

दरअसल इल्लूमिनाती कोई भी प्लान छोटी अवधि का या अचानक नहीं बनाता बल्कि इतिहास की हर घटना से सबक लेकर व भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए ही अपनी योजना तैयार करता है जो उसकी सफलता का सबसे बड़ा राज है और उसके इसी गुण के कारण आजतक लोगों को किसी ऐसी ताकत की मौजूदगी का आभास नहीं हो पाया, दुनिया पर राज करने के लिए लोगों को खत्म करना ये सब पुराने फार्मूले हैं, इल्लू अच्छी तरह जानता है अगर लोगों को खत्म करना है तो उनकी संस्कृति, सभ्यता व परम्परा को खत्म कर दो लोग खुद बा खुद खत्म हो जायेंगे, साम्राज्यवाद के समय में दुनिया के कई देशों का बंटवारा इल्लूमिनाती की योजना का ही परिणाम थे, इल्लूमिनाती लोगों को अगर प्रत्यक्ष रूप से मारता भी है तब भी दुनिया को आभास नहीं हो पाता, धरती पर जिन रोगों (बीमारियों) का किसी भी प्राचीन चिकित्सा शास्त्र में दूर-दूर तक कहीं कोई जिक्र नहीं मिलता पर अब वो अस्तित्व में आ चुके हैं, ये जितने भी नये रोग आये हैं वे सभी इल्लूमिनाती के डॉक्टरों व वैज्ञानिकों के ही द्वारा निर्मित किये गये हैं ! जैसे – कुछ नये प्रकार के कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू, इबोला आदि जैसे कई जानलेवा रोग हैं जो इल्लू की लैब में ही तैयार करके मनुष्यों तक पहुंचाए गये है ! जिससे दो उद्देश्य एक साथ पूरे होते हैं एक तो टारगेट पर लिए गये लोगों का खात्मा होता है, और इल्लू ग्रुप की दवाइयों का बाजार खड़ा होता है, नई-नई प्राकृतिक आपदाएं जिनका किसी भी इतिहास में कोई जिक्र नहीं मिलता वो सब इल्लू के वैज्ञानिकों ने हार्प (HAARP) टेक्नोलॉजी द्वारा निर्मित किये हैं, जिनका उपयोग वे अपना लक्ष्य साधने में करते है, वर्तमान में जितने भी देशों में युद्ध होते हैं उन सब में कहीं ना कहीं इल्लू के विशेषज्ञों का हाथ होता है जिसे अंजाम देने का मुख्य कारण इल्लूमिनाती ग्रुप में शामिल हथियार निर्माताओं को फायदा पहुँचाना तथा देशों में फूट डलवाना होता है

#इल्लूमिनाती_का_यहूD_से_क्या_कनेक्शन_है :

इल्लूमिनाती के सदस्य लगभग हर धर्म-सम्प्रदाय में हैं लेकिन इस संगठन पर हमेशा से ही यहूd का आधिपत्य रहा है जिसका मुख्य कारण किन्हीं अन्य सम्प्रदाय वालों की अपेक्षा दुनिया के हर क्षेत्र में यहूd का ज्यादा समर्थ होना है, इल्लू गैंग में भी सदस्यों की कई Layers (पर्तें) होती हैं जिनमे पहली श्रंखला में यहूd आते हैं फिर उसके बाद अन्य सम्प्रदायों से ताल्लुक रखने वालों को उनके कामों के अनुसार श्रंखला बनाई गयी है, चाहे वो तकनीकि दुनिया हो, मीडिया जगत हो, बैंकर हों, वैज्ञानिक हों, सबसे ज्यादा नोबल विजेता हो, सबसे बड़े व्यापारी हों या सबसे बड़े हथियार निर्माता हों, कुल मिलाकर यहूd ने अपने दम पर दुनिया के लगभग हर क्षेत्र में कब्जा कर रखा है, इसलिए दूसरे शब्दों में कहें तो 18वीं शताब्दी से ही इल्लूमिनाती यहूd का संगठन है, यहूd धर्म से निकले हुए मु&$ और ई&% # को हमारे भारत वालों ने बखूबी झेला है इसलिए उम्मीद करता हूँ वो ये भी जरुर जानते होंगे ये असुरी अब्राह्मिक नस्लें समर्थ होने के बाद दुनिया पर क्या कहर ढाती हैं….

दिनांक :- २६.१२.२०२०

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