03/09/2018
आजकल डेंगू अपने चरम पर हैं, जनता में डेंगू को ले कई भ्रांतिया है जिनका निराकरण आवश्यक है:-
पहले एक बैड़ न्यूज, फिर एक गुड न्यूज है...
पहले बैड न्यूज:-
डेंगू virus का कोई प्रमाणिक इलाज नही है... (No proven virus directed treatment).
Only supportive and symptomatic treatment.
गुड न्यूज:
99% डेंगू As it comes, as it goes... मतलब जैसे आया वैसे गया... बहुत बार तो बुखार भी नही होता या बहुत हलका बुखार होता है...और कई बार बहुत तेज।
इसमे शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है और अगर बुखार आता है या शरीर दर्द होता है तो PCM tablet लें।
1% के आसपास मरीजों को गंभीर तकलीफ होती है... जब डेंगू अपनी वाली पे आता है तो सिर चढ के ऐसा बोलता है की बाकी सबकी बोलती बंद....
क्यूँ हो जाता है डेंगू जानलेवा?
डेंगू शरीर की बिलकुल बारीक वाली रक्त नलियो (Capillaries) की अपने अंदर plasma रोकने की छमता को खराब कर देता है... यू मान लिजिए जैसे नलियो में टूट फूट हो जाती है और वो रिसने लगती हैं.... नलियो से Plasma (plasma = Blood - RBC, मोटे तौर पर) रीस रीस कर चमडी के नीचे, पेट के अंदर (Peritoneal cavity), छाती में आदि आदि जगहो पे इक्ठ्ठा होना शुरू हो जाता है... नलियो में द्रव की कमी हो जाती है और Flow धीमा पड जाता है जिसके कारण Blood pressure low हो जाता है और मरीज के शरीर में रक्त संचार गडबडा जाता है और शरीर के Vital organs को रक्त ना मिलने से गंभीर परिणाम सामने आते हैं, यदि रक्तचाप को तुरंत ना ठीक किया जाए तो Multi Organ Dysfunction Syndrome (बहुत गंभीर बिमारी) का खतरा उत्पन्न होता है|
प्लेटलेट्स की कमी होने से मरीज के अंदरूनी हिस्सों में खून बहने लगता है....
ये दोनो समस्याए बहुत गंभीर है और इनका तुरंत इलाज करना जरूरी है....
क्या करें या ना करें?-
1. फालतू के प्रयोग करना छोड दें
2. यदि डेंगू के मौसम में किसी को तेज बुखार आता है तो तुरंत उसका प्लेटलेट्स काउंट,डेंगू टेस्ट तथा मलेरिया टैस्ट करवा ले.
3. बुखार कम करने के लिए डाक्टर की सलाह से Paracetamol दवाई का प्रयोग किया जा सकता है। अन्य कोई भी Anti pyretic जैसे Combiflam, aspirin, हरे पत्ते की गोलियाँ जानलेवी हो सकती हैं...
4. मरीज को Closely monitor करते रहें... सबसे खास बात की ध्यान रखे... मरीज का पेशाब आता रहे.. यदि 3 घंटे में एक बार पेशाब नही आया या मोटे तौर पर हर 3 घंटे में आदमी 150-200 ml पिशाब नही कर रहा... खतरा सिर पर है... तुरंत डाक्टर की सलाह लें....
5. यदी मरीज के शरीर पर छोटे छोटे लाल निशान बन रहे है तुरंत डाक्टर की सलाह ले.
6. यदि शरीर से कोई भी खून आ रहा है या पिशाब धूंधला (Smoky) हो गया है या Stools का रंग लाल या काला हो गया है... तुरंत डाक्टर को दिखा ले..
7. मरीज का सिर चकरा रहा हो या वो अनाप सनाप बोल रहा हो या ऐसा कुछ भी तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करे.
8. पेट में दर्द, उल्टियाँ आना या साँस फूलना डेंगू के बिगडने का संकेत हो सकता है ।
9. शरीर को well हाइड्रेट रखें।
बचाव का उपाय:
1.जहाँ भी रूका हुआ ताजा मीठा पानी है उसे निकाल दे, जैसे कुलर, छत पर पडे बर्तन, पंकचर देखने वाले पीपे या टायरो के टूकडे... या उसमें Larvicidal डाल दे. "तालाबो में Gambosia मछली, Guppies (Poecilia reticulata) या Copepods (Doridicola agilis) नामकी मछलियाँ छोडी जा सकती है जो इसके लारवा खा जाती है!"
इसके इलावा Wolbachia genus के किटाणु Adies मच्छर के बिमारी उत्पन्न कर उसे मार डालते हैं!
2. यह मच्छर ज्यादातर दिन के समय काटता है... इसलिए घर में मच्छर भगाने वाले अगरबत्ती या mosquito repellent का प्रयोग करें, और घर के बाहर जाए तो अंग प्रदर्शन के ख्याल को कुछ दिनो के लिए दबा ले, Mosquito repellent Ointment का प्रयोग कर सकते है...
एक खास बात और मलेरिया को टैस्ट भी जरूर करवा ले... क्योंकि Severe malaria भी ऐसे ही लक्षण उतपन्न कर सकता है...
क्या प्लेटलेट्स चढाने की जरूरत पड सकती है??
साधारण तौर पर डैंगू में प्लेटलेट्स की कमी निम्नलिखित कारणो से होती है
1. अस्थिमज्जा जो की रक्त के अव्यवो ( RBC, WBC, प्लेटलेट्स) की फैक्ट्री होती है Dengue virus उसकी कार्यक्षमता को दबा देता है (BoneMarrow Suppression)
2. शरीर डेंगू से लडने के लिए जो आर्मी (Antibodies) तैयार करता है, वो भी प्लेटलेट्स को नष्ट करना शुरू कर देती हैं!
3. शरीर में Normal प्लेटलेट्स की आयु 8 से 9 दिन होती है, तथा बाहर से चढाई गई प्लेटलेट्स की आयु ज्यादा से ज्यादा 3-4 दिन, बहुत मामलो में ये 6 घंटे ही होती है!
अत: प्लेटलेट्स चढाना एक रिजर्व थैरैपी है जिसका इस्तेमाल केवल कुछ मामलो में किया जाता है जैसे प्लैट्लेटस जब 20000 से कम हो जाएँ या डेंगू वाले मरीज को चोट लग जाए और खून बहने लगे, या रक्त चाप गिरने लगे| किंतु आमतौर पर प्लैट्लेटस चढाने की जरूरत नही पडती! कितने काउंटस पर प्लैट्लेटस चढाना है इस बात का निर्णय कुशल चिकित्सक पर छोड दे तो बेहतर है because this clinical decision can be made best by treating doctor.
देसी घरेलू इलाज का क्या?
जैसे पहले बताया गया है 99% डेंगू कोई ज्यादा समस्या नही करता इसलिए पपीते के पत्तो का रस या बकरी का दूध या गिलोय का काढा या कोई होम्योपैथिक दवा लिए बिना या लेने से भी प्लैट्लेटस की संख्या बढ जाएगी! (Means normal response in this disease is that platelets start recovering after 7 days itself, nothing to do with local desi nuske). किंतु एक प्रतिशत जिनको दिक्कत ज्यादा होती है उनके लिए इस तरह के ईलाज पे भरोसा करना अक्सर जानलेवा होता है! वैसे लेटेस्ट studies में यह prove हो गया है कि बकरी के दूध या पपीते से इस बीमारी में कोई फायदा नहीं होता।
डेंगू में सही समय पर हस्पताल पहुचने पर जान बचाना कठिन नही है किंतु अक्सर इस तरह के ईलाज के चक्कर में मरीज को बहुत बुरी हालत में डाक्टर के पास लाया जाता है, अत: सावधान रहे!
Caution: यदि आपने यह सब पढ़ने के बाद भी बकरी का दूध पीना ही है, तो आप लोगो से निवेदन है कि उसे उबाल कर पिएं। अन्यथा आप जाने अंनजाने एक और बीमारी जिसका नाम Brucellosis है उसका शिकार बन सकते है (risk present) और उसका इलाज ६ सप्ताह तक चलता है।