उमांग शिवशक्ति तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष वास्तु शोध संस्थान कोटा राजस्थान

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उमांग शिवशक्ति तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष वास्तु शोध संस्थान कोटा राजस्थान कुण्डली हस्त रेखा फेस रीडिंग ईष्ट कृपा से प्रत्येक समस्या का समाधान
(1)

🌺🔱उमांग शिव शक्ति ज्योतिष वास्तु विशेषज्ञ, रत्नाकर रामपुरा कोटा राजस्थान 324006 🔱🌺
7976068053 🌺🔱 तन को लगे सो तंत्र, मन को लगे सो मंत्र, जिस पर किसी का आह्वान कर सके, वो यंत्र 🔱🌺 किसी भी गलत कार्य, उद्देश्य हेतु संपर्क न करें, सशुल्क परामर्श 🙏

10/01/2026

🌺जय महामाया जय महाकाल जय गुरु दातार🌺
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🌺माँ भवानी आप सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें।🌺
आप सभी के सुखी जीवन हेतु मैं लगातार प्रयासरत हूँ।
जो भी मुझसे बनता है। सामर्थ्य अनुसार करता रहता हूं।
चूंकि भाग्य या नसीब का लेख मैं बदल नहीं सकता पर आपको यथेष्ट सफलता और उन्नति मिले इसका प्रयास खुद भी करता हूँ और आपसे भी करवाता हूँ।
मानता हूँ, की हर किसी का जीवन सरल नहीं होता।
पर आपकी मेहनत उसे सरल बना सकती है।
इसी के लिए मैं आपको उस रास्ते पर ले आया हूँ।
जहाँ आपको वह सब कुछ प्राप्त होगा। जिसकी आपको जरूरत है।
आप में से कुछ कहते हैं।
मैं पूजा कर कर के थक गई पर कोई फायदा नहीं। पर जो आपको मिला उनका नसीब देखिये। देखिए 🌺🌺🌺🌺

🚩 *अक्सर हम अपनी इच्छाओं की पूर्ति, समस्या निवारण, अपेक्षित परिणाम के लिए प्रयासरत रहते हैं और मेहनत करते रहते हैं किंतु उसके बावजूद भी हमारी कोई इच्छा ऐसी होती है जो पूरी नहीं हो पाती। आख़िर ऐसा क्यों होता है ? व्यक्ति यही सोचता रहता है*। 🚩

🚩 *जन्मकुंडली में बैठे ग्रह अपनी स्तिथि के अनुसार फल देते हैं हमारा समस्त जीवन उन ग्रहों के आस पास ही घूमता है। जीवन से सम्बंधित लगभग सभी घटनाओं का आंकलन जन्मकुंडली के माध्यम से किया जा सकता है। इसलिए सभी को अपनी जन्म कुंडली के बारे में जानकारी होना आवश्यक होता है जिससे कि यदि कोई दोष जन्मकुंडली में है तो समय रहते उसका निराकरण किया जा सके। ज्योतिष एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिये अधिकतम समस्याओं का समाधान किया जा सकता है*

ये जरा पीछे मुड़कर आप खुद को सबसे बेहतर पाएंगी।
समस्या हर किसी के परिवार में है।
आध्यात्म हमें उस समस्या से लड़ने में मदद करता है। न कि खुद लड़ता है।
साधना क्षेत्र वह सब देता है, जिसकी आपको जरूरत होगी। आपको कहना नहीं पड़ेगा। कि आपको यह चाहिए।
बस आवश्यकता है, निःस्वार्थ लगन की।
अरे जिसकी सेवा में लगे हो क्या उसे दिखाई नहीं देता होगा उसका भक्त किस समस्या से जूझकर उनकी सेवा को निर्विघ्न सम्पन्न कर रहा है।
जब आपकी सेवा पुकार उस तक पहुंच जाएगी।
आपको फिर शिकायत ही नहीं रहेगी।
अब आप चाहते हैँ।
कि आप ने आज तो शुरू किया , महीने पंद्रह दिन सेवा की लगन से फिर कुछ समझ नहीं आया तो लग गए मुझसे शिकायत करने।
कोई फर्क नहीं।
अरे आप एकाध साल तो कीजिये लगन से बिना स्वार्थ के। बिना अपनी इच्छा कहें। केवल उनका आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु। उनकी नजर हेतु।
अब आपने शुरू कर दिया। जब समस्या आयी या काम बिगड़ते देखे, या मनचाहा प्राप्त करने के लिए शुरू हो गये, खोज करने गुरु या तांत्रिक को।
शॉर्टकट खोजने की मैं जो चाहे वह कर लूं।
फिर किसी ने बताया कि यह पूजा कर लो साधना कर लो।
आपने शुरू भी की।
पर फर्क मिला नई।
अब लग गए कोसने उस गुरु या तांत्रिक को।
अरे मानव आप जन्म से अब तक का समय तो मौज में निकाल दिए। अब जरूरत आन पड़ी तो पीछे पड़ गए।
जिसे देना है वह भी तो जन्म से अब तक का समय का वसूल करेगा न ।
फिर शिकायत क्यूँ।
अब यहां किसी किसी को सफलता जल्द मिलती है, किसी को देर से।
पर मिलती जरूर है।
बस जिसके बन्धन जितने ज्यादा उतनी ही देर।
जिसने प्रयोग के तौर पर शुरू किया वह गया गर्त में।
यहां जरूरी है ,पूर्ण विश्वास, लगन और आपका स्वार्थ कितना है।
यदि आपने शुरू ही स्वार्थ पूर्ति के लिए किया है, तो आपको बहुत समय लगने वाला है। हो सकता है, हो ही न।
तो इष्ट आपसे पहले उतनी भक्ति चाहता है, जितनी आपको जन्म से अब तक करनी चाहिए थी।
अब कहते है, कि किसी ने बताया ही नही यह सब।
तो अब देर क्या हुई लग जाइए। भक्ति में।
भक्ति के बिना जीवन जल बिना मछली, पत्ते बिना पेड़, कपड़े रहित शरीर ,,, ऐसा ही जीवन है।
,,
भाई आपको किसी ने नहीं बताया पर अपने बच्चों में यह बीज डाल दो। ताकि वह आपकी तरह किसी को न ढूंढें।
,,
अब यहां बात आती है कि कुछ लोगों को काम तांत्रिक या गुरु अपनी ऊर्जा के द्वारा करा देते है।
भाई उस समय हो तो जाता है।
पर कुछ समय बाद भरपाई करने और कराने वाले दोनों को करना ही है।
और दुगने प्रभाव से।
सीधी सी बात है। नियति की चाल और भाग्य का लेख और हमारे कर्मों का फल को मिलने वाला है, वह तो जिसके हैं उसी को भोगना है।
अब गुरु या तांत्रिक ने उस समय अपनी ऊर्जा से उसे आगे बढ़ा दिया। खत्म या हटा तो कोई नहीं कर सकता बिना इष्ट के।
अब कर्म का फल आपका हटाया गुरु या तांत्रिक ने तो भोगेंगे भी वही दोनों।
बस समय बदल जाएगा।
जिसका परिणाम दोगुना प्रभाव से आगे के समय में भोगना होगा आधा आधा।
गुरु या तांत्रिक इस बात अच्छी तरह जानते हैं। इसीलिए सेवा लेकर अपना उपाय तो कर लेंगे।
पर आप सोचो अपना।
इसीलिए आप भक्ति में लग जाओ।
खुद शशक्त बनो।
ताकि वह परिणाम आपको भी न सताए।
आप भी अपना उपाय भक्ति के जरिए कर लें।
इसीलिए मैं मेरे पास आने वाले हर मुमुक्षु को पहले भक्ति से जोड़ता हूं।
ताकि उनके संभी बन्धन खत्म हो।
आप भक्ति की ऊर्जा में तप कर कुंदन बन जाएं।
फिर जो चाहे करें।
धर्म अनुरूप करेंगे तो सफलता कदम चूमेगी।
नहीं तो परिणाम भी बुरे मिलेंगे।
मैं हमेशा कोशिश यही करता हूं, कि आप खुद हर काम को करना सीख लें।
आप खुद ही मुख्य धारा से जुड़ें।
मैं अपने कार्य में सफल हो।
मैं किसी को शॉर्टकट नहीं देता।
मै आपकी सहायता कर दूंगा, पर मेहनत आपने ही करनी है।
मेहनत का किया आपकी बच्चों काम आएगा।
इसीलिए यदि आपको कष्ट है, काम बन नहीं रहे तो योग्य गुरु के सन्निध्य में जाएं।
भक्ति मार्ग अपनाएं।
लगन और पूर्ण श्रद्धा से भक्ति में लग जाएं।
जब आपके सारे बन्धन जल कर भस्म हो जाएंगे। आपको खुद ही फर्क नजर आने लगेगा।
आप केवल भक्ति करो, जो करना है, आपका गुरु आपका इष्ट खुद ही करेगा। जब आपके कष्ट के कारण उनके भक्ति में अवरोध होंगे, तो इष्ट या गुरु खुद ही आपके कष्ट दूर कर देंगे।
इसी विश्वास से भक्ति शुरू कीजिए।
लग जाइए, अपने गुरु के दिखाए मार्ग पर।
खोजिए गुरु को न कि गारंटी से काम करने वाले को।
दीजिए प्रेम से दक्षिणा न कि मुंह मांगी कार्य की कीमत।
कराइए आगे का मार्ग प्रशस्त न कि सिद्धि या तोटका।
भक्ति मार्ग ही सब कुछ दे देता है।
जब भक्ति चरम पर होगी, मुझे नहीं लगता फिर किसी और चीज कि आवशयकता रह जाएगी।
,,
भक्ति मार्ग आपको मोक्ष देगा और आपके बच्चों को उन्नति।
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बाकी दूसरे मार्ग पर आप खुद तो भटकेंगे ही साथ ही अपनी पीढ़ियों को भी भटका देंगें।
,,
आशा है मेरी बात आप समझ समझ गए होंगे।
नहीं समझ आया है, तो पुनः पढ़िए।
मनन कीजिए।
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मेरी आपको जरूरत लगे, तो फोन कर ले, व्हाट्सअप करे।
जब भी समय मिलेगा आपको जवाब जरूर दूंगा।
यथा संभव सहायता भी करूंगा।
आपका कष्ट दूर हो , इसके लिए आप ख़ुद भी प्रयास करें 🌺

🌺🌺🌺 आपको मेरी यह पोस्ट अच्छी लगे तो इसे शेयर कर
आगे बढ़ाए,ताकि आम जन इसे पड़े ओर आत्मसात कर सकें🔱🌺🥀 अमिताभ उपाध्याय,उमांग शिव शक्ति तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष वास्तु शोध और विकास संस्थान रामपुरा कोटा राजस्थान 7976068053 🥀🌺🔱🌺

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🌺🔱🌺माघ स्नान:..🌺🔱🌺🔥वेदों में मानवजाति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए विविध पर्वों का विधान है. पर्व अर्थ...
08/01/2026

🌺🔱🌺माघ स्नान:..🌺🔱🌺

🔥वेदों में मानवजाति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए विविध पर्वों का विधान है. पर्व अर्थात धार्मिक कृत्य, त्यौहार, व्रत एवं उत्सव. हिन्दुओं के तीर्थक्षेत्रों के निकट नदी, तालाब, इत्यादि जैसा प्राकृतिक पवित्र जलस्रोत होता है. उसमें स्नान करने का विशेष महत्त्व होता है.

🔥माघ स्नान अर्थात माघ मास में पवित्र तीर्थक्षेत्रों में किया जानेवाला स्नान. ब्रह्मा, विष्णु, महेश, आदित्य और अन्य सभी देवी-देवता माघ मास में विविध तीर्थक्षेत्रों में स्नान करते हैं.

🔥पुष्करादीनि तीर्थानि गंगाद्या: सरितस्तथा ।
आगच्छन्तु पवित्राणि स्नानकाले सदा मम ।।
हरिद्वारे कुशावर्ते बिल्वके नीलपर्वते ।
स्नात्वा कनखले तीर्थे पुनर्जन्म न विद्यते ।।
अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवंतिका ।
पुरी द्वारावती ज्ञेयाः सप्तैता मोक्षदायिकाः ।।
गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति ।
नर्बदे सिन्धु कावेरि जलेअस्मिन संनिधिं कुरु ।।

१.🌺🔥🌺 माघ स्नान की कालावधि:🌺🔥🌺

🌺पद्मपुराण एवं ब्रह्मपुराण के अनुसार माघ स्नान का आरंभ भारतीय कालगणना के विक्रम संवत अनुसार पौष शुक्ल पक्ष एकादशी को होता है. माघ शुक्ल पक्ष द्वादशी को उसकी समाप्ति होती है. आजकल प्रथा अनुसार माघ स्नान का आरंभ पौष पूर्णिमा से होता है. जो माघ पूर्णिमा को समाप्त होता है. अंग्रेजी कालगणना के अनुसार माघ स्नान सामान्यतः जनवरी-फरवरी के बीच होता है.

२.🌺🔥🌺 माघ स्नान का महत्त्व:🌺🔥🌺

*🌺 माघ स्नान से आध्यात्मिक शक्ति मिलती है और शरीर निरोगी बनता है. माघ मास में, जो पवित्र जलस्रोतों में स्नान करता है, उसे एक विशेष आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है. ऐसी मान्यता है कि, माघ स्नान मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है और रोगाणुओं को नष्ट करता है. जिससे उसका शरीर निरोगी हो जाता है.

*🌺 माघ स्नान से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है.
भौगोलिक दृष्टि से प्रयाग में गंगा एवं यमुना इन पवित्र नदियों का संगम है. महाभारत के अनुशासन पर्व में कहा गया है कि, माघ मास में जो प्रयाग संगमतीर्थ पर अथवा गोदावरी, कावेरी जैसी अन्य पवित्र नदियों में भक्तिभाव से स्नान करते हैं, वे सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं.

*🌺माघ स्नान से इच्छाओं के अनुसार फल और मोक्ष की प्राप्ति होती है. पद्मपुराण में बताए अनुसार भगवान श्रीहरि को व्रत, दान और तप से भी उतनी प्रसन्नता नहीं होती, जितनी कि माघ मास में किए स्नानमात्र से होती है.

🌺माघ स्नान करनेवाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते हैं. वे उन्हें सुख, सौभाग्य, धन, संतान और मोक्ष प्रदान करते हैं. शास्त्रों में कहा गया है कि सकामभाव से अर्थात सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति करने हेतु माघ स्नान किया जाए, तो उससे इच्छाओं के अनुसार फल की सिद्धि होती है और निष्काम भाव से अर्थात केवल भगवतप्राप्ती हेतु स्नान आदि करने पर वह मोक्षदायक होता है.

३.🌺🔥🌺माघ स्नान हेतु पवित्र जलस्त्रोत:🌺🔥🌺

🌺माघ मास में प्रयाग, वाराणसी, नैमिषारण्य, हरिद्वार, नासिक, आदि पवित्र तीर्थक्षेत्रों में विद्यमान जलस्रोतों में स्नान किया जाता है. कन्याकुमारी और रामेश्‍वरम् इन तीर्थक्षेत्रों में किया स्नान भी धर्मशास्त्रानुसार उच्चकोटि का माना जाता है. साथ ही राजस्थान के पुष्कर सरोवर में किया स्नान भी पवित्र है.

इनके अतिरिक्त भारत के विविध राज्यों में अनेक पवित्र तीर्थक्षेत्र हैं. वहां भी लोग दूर दूर से माघ मास में स्नान करने आते है.

४.🌺🔥🌺माघ स्नान के लिए उपयुक्त दिन:🌺🔥🌺

🌺संपूर्ण माघ मास में पवित्र जलस्त्रोत में स्नान करने का विधान है. परंतु ऐसा करना संभव न हो, तो माघ मास के कोई तीन दिन स्नान करें. प्रयाग तीर्थक्षेत्र में तीन बार स्नान करने का फल दस हजार अश्‍वमेध यज्ञ करने के फल से भी अधिक होता है. यह भी संभव न हो, तो माघ मास के किसी एक दिन तो अवश्य माघ स्नान करना चाहिए. कुछ विशिष्ट तिथियों पर किया जानेवाला माघ स्नान विशेष फलदायी होता है. वे तिथियां हैं,

१.🔱 पौष पूर्णिमा
२.🔱 मकरसंक्रांति
३. 🔱माघ मास में आनेवाली अमावस्या अर्थात मौनी
अमावस्या,
४.🔱 माघ शुक्ल पक्ष पंचमी अर्थात बसंत पंचमी,
५. 🔱माघी पूर्णिमा और
६.🔱 महाशिवरात्री

🌺🔱🌺यहां ध्यान रखनेयोग्य सूत्र यह कि, मकरसंक्रांति त्यौहार प्रतिवर्ष माघ मास में नहीं आता. तथा महाशिवरात्री के दिन किया स्नान माघ मास में नहीं आता; किन्तु वे दोनों दिन माघ स्नान में अंतर्भूत किए जाते हैं.🌺🔱🌺

५. 🌺🔥🌺माघ स्नान का उचित समय:🌺🔥🌺

🌺स्नान का उत्तम समय सूर्योदय से पूर्व माना जाता है । नारदपुराण के अनुसार, माघ मास में ब्रह्ममुहूर्त में अर्थात प्रातः ३.३० से ४ बजेतक स्नान करने से सभी महापातक दूर हो जाते हैं और प्राजापत्य-यज्ञ का फल प्राप्त होता है. सूर्योदय के पश्‍चात किए स्नान को आध्यात्मिक दृष्टि से अल्प लाभकारी अथवा कनिष्ठ माना जाता है.

६. 🌺माघ स्नान के उपरांत सूर्य को अर्घ्य देने का महत्त्व
शास्त्रों में माघ स्नान के उपरांत सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बताया गया है. अर्घ्य देना अर्थात अपनी अंजुली में जल लेकर सूर्यदेव के लिए छोडना. पद्मपुराण के अनुसार माघ मास में प्रातः स्नान कर जगत को प्रकाश देनेवाले भगवान सूर्य को अर्घ्य देने का अनन्य महत्त्व है.

🌺इसलिए सभी पापों से मुक्ति और भगवान जगदीश्‍वर की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रत्येक मनुष्य को माघ स्नान कर सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य को अर्घ्य अवश्य प्रदान करना चाहिए. यह मंत्र है…

🌺💥🌺भास्कराय विद्महे । महद्द्युतिकराय धीमहि ।
तन्नो आदित्य प्रचोदयात ॥
अर्थ : तेज के भंडार सूर्य को हम जानते हैं. अत्यंत तेजस्वी और सभी को प्रकाशमान करनेवाले सूर्य का हम ध्यान करते हैं. वह आदित्य हमारी बुद्धि को सत्प्रेरणा दे.

७🌺🔥🌺. माघ मास में दान का महत्त्व और दान देने योग्य वस्तुएं🌺🔥🌺

🌺महाभारत के अनुशासन पर्व में कहां है कि जो माघ मास में ब्राह्मणों को तिल दान करता है, वह समस्त जंतुओं से भरे हुए नरक का दर्शन नहीं करता.

🌺माघ मास में यथाशक्ति गुड, ऊनी वस्त्र, रजाई, जूता और उनके समान जो भी शीत निवारक वस्तुएं हैं, उनका दान कर ‘माधवः प्रीयताम्’ यह वाक्य कहना चाहिए. ‘माधवः प्रीयताम्’ अर्थात भगवान विष्णु के प्रीति और कृपा हेतु दान करता हूं.

८. 🌺🔥🌺यदि तीर्थक्षेत्रों में माघ स्नान करना संभव न हो, तो क्या करें ?🌺🔥🌺

🌺माघ मास की ऐसी विशेषता है कि इस काल में प्रत्येक प्राकृतिक जलस्रोत गंगा समान पवित्र हो जाता है. माघ स्नान हेतु प्रयाग, वाराणसी आदि स्थान पवित्र माने गए हैं; परंतु वहां स्नान करना संभव न हो, तो अपने समीप की नदी, तालाब, कुआं आदि किसी भी जलस्रोत में अवश्य स्नान करना चाहिए.

९.🌺🔥🌺 घर में माघ स्नान कैसे करें ?🌺🔥🌺

🌺पवित्र जलस्त्रोत में माघ स्नान करना संभव न हो, तो माघ स्नान हेतु रात्रि घर के छत पर गागर में भरकर रखे जल से अथवा दिनभर सूर्य की किरणों से तपे जल से स्नान करें.

🌺घर में माघ स्नान करने हेतु सुबह जल्दी उठकर गंगा, यमुना, सरस्वती… आदि पवित्र नदियों का स्मरण कर प्रार्थनापूर्वक उनका आवाहन स्नान के जल में करें. (लेख के शुरुआती मंत्र का उच्चारण करते हुए) तदुपरांत उस जल से स्नान करें. उपरांत पहले बताए अनुसार सूर्यमंत्र का उच्चारण कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें. उसके उपरांत भगवान श्री विष्णु का स्मरण कर उनका पंचोपचार पूजन करें. उसके उपरांत ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ यह नामजप अधिकाधिक करें. यदि संभव हो, तो इस दिन उपवास करें. साथ ही अपनी क्षमता के अनुसार पहले बताई वस्तुओं का यथाशक्ति दान करें.

१०🌺🔥🌺. माघ मास में कल्पवास का महत्त्व:🌺🔥🌺

🌺कल्प’ अर्थात वेदाध्ययन, मंत्रपाठ एवं यज्ञ आदि कर्म. पुराणों में माघ मास में संगम के तट पर निवास कर, ये धार्मिक कर्म करना, ‘कल्पवास’ कहलाता है. शास्त्रों में कहा गया है कि भक्तिभाव सहित कल्पवास करनेवाले को सद्गति प्राप्त होती है. एक मास चलनेवाला पवित्र माघ स्नान मेला उत्तर प्रदेश राज्य के प्रयाग में प्रतिवर्ष आयोजित होता है. इस मेले को ‘कल्पवास’ भी कहा जाता है.

🌺कल्पवास में प्रतिदिन प्रात: स्नान, अर्घ्य, यज्ञ आदि करने के उपरांत ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं. विविध धार्मिक कथा-प्रवचनों को सुनकर पूरा दिन सत्संग में बिताते हैं. इस काल में स्वयं को सभी भौतिक सुखों से दूर रखा जाता है. झोपडी में रहकर भूमि पर गेहूं का धान अर्थात छिलके फैलाकर उसपर एक चटई रखकर शयन किया जाता है
माघेस्नानं_हि_कर्तव्यं_सर्वपापप्रणाशनम्।
माघमास को “स्नान मास” भी कहा जाता है।

🌺इस मास में प्रातःकाल पवित्र नदियों में स्नान करने से अनेक जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।विशेषतः गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, नर्मदा, शिप्रा आदि नदियों में स्नान का विशेष फल बताया गया है। प्रयागराज का माघ मेला इसी कारण विश्वप्रसिद्ध है।

🌺इस मास में किया गया जप, ध्यान, हवन, व्रत और स्वाध्याय सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना फलदायक होता है।

🌺शास्त्रों में कहा गया है—
माघे_मासि_कृते_दाने
जपे_होमे_च_यत्फलम्।
तत्सर्वं_कोटिगुणितं
भवतीति_न_संशयः॥
अर्थात माघ मास में किया गया दान, जप और हवन करोड़ों गुना फल देता है।

🌺माघ मास में अनेक व्रत किए जाते हैं, जैसे—
माघ स्नान व्रत
एकभुक्त व्रत
नक्त व्रत
मौन व्रत
तिल व्रत
विशेष रूप से सोमवार व्रत और माघ अमावस्या व्रत अत्यन्त पुण्यकारी माने गए हैं।

🌺भगवान शिव, विष्णु तथा सूर्यदेव की आराधना इस मास में विशेष फल देती है।

🌺माघ मास में दान का अत्यधिक महत्त्व है। विशेष रूप से—
तिल दान
घी दान
वस्त्र दान
अन्न दान
कम्बल दान
स्वर्ण दान

दानात्_श्रेयःपरं_नास्ति_माघमासे_विशेषतः।
माघ मास में सूर्य देव मकर राशि में स्थित रहते हैं। इसे उत्तरायण काल कहा जाता है, जो देवताओं का दिन माना गया है।

🌺इस समय किए गए शुभ कर्म शीघ्र फल प्रदान करते हैं।
माघ_मास_में_करने_योग्य_कार्य
ब्रह्ममुहूर्त में स्नान
भगवान विष्णु एवं शिव का पूजन
विष्णु सहस्रनाम, महामृत्युंजय मंत्र जप
गरीबों, ब्राह्मणों एवं असहायों की सेवा
सात्त्विक भोजन ग्रहण
संयम, ब्रह्मचर्य एवं सदाचार का पालन

🌺माघ_मास_में_वर्जित_कार्य
मांस, मदिरा, तामसिक भोजन
झूठ, क्रोध, हिंसा
आलस्य एवं असंयम
अपवित्र आचरण

🌺माघपूर्णिमा_का_महत्त्व
माघ मास का समापन माघ पूर्णिमा से होता है। इस दिन स्नान, दान और पूजन का विशेष महत्त्व है। कहा जाता है कि इस दिन देवता पृथ्वी पर स्नान करने आते हैं।

🌺माघमास आत्मशुद्धि, तपस्या और पुण्य संचय का सर्वोत्तम अवसर है। इस मास में नियम, संयम और भक्ति से किया गया प्रत्येक शुभ कर्म जीवन में सुख, शान्ति और मोक्ष की ओर ले जाने वाला होता है।

🌺💥🌺 जय श्री हरि विष्णु 🌺💥🌺

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🌺🔱🌺शादी विवाह हेतु कुंडली मिलान 🌺🔱🌺🌺शादी के लिए कुंडली मिलान करने के लिए वर-वधू की सही जन्म तिथि, समय और स्थान ज़रूरी हो...
27/12/2025

🌺🔱🌺शादी विवाह हेतु कुंडली मिलान 🌺🔱🌺

🌺शादी के लिए कुंडली मिलान करने के लिए वर-वधू की सही जन्म तिथि, समय और स्थान ज़रूरी होता है, जिसके आधार पर ज्योतिषी या ऑनलाइन टूल 'अष्टकूट मिलान' (36 गुण) करते हैं, जिसमें नाड़ी, गण, भकूट, योनि, ग्रह-मैत्री जैसे 8 मापदंडों पर 18 या उससे ज़्यादा अंक मिलने पर विवाह शुभ माना जाता है, लेकिन पूर्ण विश्लेषण के लिए ग्रह-मैत्री और नाड़ी दोष पर विशेष ध्यान दिया जाता है,कुंडली मिलान क्यों जरुरी है -

🌺विवाह मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है, हिंदू वैदिक संस्कृति में विवाह से पूर्व जन्म कुंडली मिलान की शास्त्रीय परंपरा है | विवाह पूर्व भावी दंपत्ती की कुंडली मिलान करना आवश्यक है, ताकि विवाहोपरांत वर कन्या अपना गृहस्थ जीवन निर्विघ्न गुजार सकें |
विवाह तय करने के संबंध में आमतौर पर कई लोग सिर्फ गुण मिलान करके ही निश्चिंत हो जाते हैं, जबकि कुंडली मिलान उससे कहीं अधिक आवश्यक है, इसके अभाव में दांपत्य जीवन को आगे चल कर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है |

🌺वैवाहिक संबंधों की अनुकूलता के परीक्षण के लिए ऋषि-मुनियों ने अनेक ग्रंथ की रचना की, जिनमें वशिष्ठ, नारद, गर्ग आदि की संहिताएं, मुहुर्तमार्तण्ड, मुहुर्तचिंतामणि इत्यादि, जिसमे अष्ट-कूट सर्वाधिक प्रचलित है:-
१)🌺 वर्ण से कार्य क्षमता, मानसिक अभिरुचिया, व्यक्तित्व, प्रकृति,
२)🌺 वश्य से संबंध, भावनात्मक सामंजस्य, आकर्षण, अधीनता, प्रधानता,
३)🌺 तारा से समझने की प्रवृत्ति, भाग्योदय, दोनों की आय व वैवाहिक जीवन में मधुरता या वियोग, भाग्य,
४) 🌺योनि से बौद्धिक क्षमता, मानसिकता, स्वभाव गुणदोष, प्रणय संबंध, यौन संबंध में साम्यता व शारीरिक संतोष,
५) 🌺राशि से स्वास्थ्य, आपसी विश्वास व सहयोग, परस्पर मित्रता समता या शत्रुता, सामंजस्य,
६) 🌺गण से अभिरुचि, कुटुंब के साथ संबंध, प्रकृति की एकरूपता, गुण प्रधानता,
७)🌺 भकूट से दिनदैनिक जीवन, दाम्पत्य जीवन में मधुरता, आपसी लेन-देन, प्रेम, एवं
८) 🌺नाडी़ से दांपत्य जीवन में स्थिरता, त्रिदोष की साम्यता व संतान सुख में अनुकूलता या बाधा, स्वास्थ्य, आदि
इन अष्टकूट से गुण-दोष अर्थात् आठ प्रकार के दोषों का परिहार देखा जाता है |

🌺🔱🌺इसके आलावा दोनों की कुंडली में निचे दिए गए कुछ योग एवं विषय देखना अति आवश्यक है क्योकि देखा गया है सिर्फ गुण मिलान करके विवाह करने पर, अधिक गुण मिलने पर भी मतभेद अथवा अलग होते देखा गया है |

*पितृ दोष |
*भाग्य बल |
*दारिद्र योग |
*दशान्तार्दशा |
*तलाक योग |
*आयुष्य योग |
*कालसर्प दोष |
*द्विभार्या योग |
*संतान सुख योग |
*बाल-बालिका दोष |
*लग्न-भाव मिलान |
*वैधव्य या विधुर योग |
*सम-संधि – दशा संधि |
*कुंडली में राज-योग, धन-योग |
*पागलपन के योग, नपुंसक योग |
*राशी नक्षत्र एवं चरण का मिलान |
*अरिष्ट अथवा दुर्घटना या रोग के योग |
*वर और कन्या के बीच में आयु का अंतर |
*वर-वधु की जन्म राशी के नवांश स्वामी का मिलान |
*वधु के नक्षत्र से वर का नक्षत्र दूसरा ना हो
इसके कुछ अपवाद भी है |
*स्त्री-पुरुष दोनों की राशी षडाष्टक ना हो, व अशुभ द्विर्द्वादाश व अशुभ नवपंचम ना हो |
*चरित्र दोष योग, व्यसन योग, व्यभिचार योग, जिससे गृहक्लेश या अलगाव की स्थिति बनती है |
*महानक्षत्र – ७ नक्षत्र महानक्षत्र की श्रेणी में आते है, अगर दोनों के जन्म नक्षत्र इस श्रेणी के है तो मिलान और अधिक शुभ हो जाता है |
*सास-ससुर से सम्बन्ध- कुंडली में रवि, शुक्र एवं डी-१ व डी-९ चार्ट में महत्वपूर्ण भाव से सम्बन्ध का अवलोकन, डी-३० चार्ट, डी-४ चार्ट |
*लग्न व चन्द्र से मंगल दोष, एक की कुंडली में दोष हो व दुसरे की कुंडली में ना हो तो आयु को खतरा होता है अथवा पति-पत्नी के बीच वाद-विवाद और कलह का कारण भी बनता है, मंगल दोष के अनेक अपवाद भी है जिससे दोष निरस्त हो जाता है |
*विवाह का शुभ मुहूर्त में होना |
*विवाह काल में त्रिज्येष्ठा व त्रिबल विचार |
*विवाह मुहूर्त में वधु को गुरुबल व वर को रविबल का होना |
इत्यादि विषयों का अवलोकन करना अति आवश्यक है |

🌺🔱🌺इसके अलावा दक्षिण भारतीय विद्वान् कुछ विशेष सूत्रों का भी अवलोकन करते है:-🌺🔱🌺
*द्वितीय भाव का मंगल |
*रज्जू मिलान – यह वैवाहिक जीवन के काल का निर्णय करता है |
*महेंद्र कूट – यह संतान द्वारा भाग्य वृद्धि, और युगल की उन्नति व आयुर्दाय दर्शाता है, परस्पर प्रेम सम्बन्ध, घर-परिवार में सुख-शांति |
*स्त्री दीर्घ कूट – यह सभी प्रकार की समृद्धि और धन-संपत्ति दर्शाता है, सामान्य शुभत्व एवं कुशलता |
*वेध कूट – इसमें कुछ नक्षत्रो के जोड़ो का मिलान निषेध है, पुत्र प्राप्ति |
*तत्व – मैत्री अथवा अमैत्री भाव |
*वर्ग कूट – शत्रु-सम-मित्र वर्ग सम्बंधित |
*दिनम-भाग्य, लिंग, गोत्र, इत्यादि |

🌺🔱🌺कुंडली मिलान में गुण मिलान के अंक कंप्यूटर द्वारा जाना जा सकता है परन्तु उपरोक्त अति महत्वपूर्ण विषयो की विवेचना कर अंतिम निर्णय किसी विद्वान् ज्योतिष द्वारा ही करना महत्वपूर्ण है।

🌺🔱🌺🥀 अमिताभ उपाध्याय,उमांग शिव शक्ति तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष वास्तु शोध और विकास संस्थान रामपुरा कोटा राजस्थान 7976068053 🥀🌺🔱🌺

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🌺🔱🌺वास्तु दोष निवारण यंत्र वास्तु दोष के सरल एवं सार्वभौमिक उपाय।🌺🔱🌺 🌺यह एक शक्तिशाली और पारंपरिक उपाय है, जिसका उद्देश्...
27/12/2025

🌺🔱🌺वास्तु दोष निवारण यंत्र वास्तु दोष के सरल एवं सार्वभौमिक उपाय।🌺🔱🌺

🌺यह एक शक्तिशाली और पारंपरिक उपाय है, जिसका उद्देश्य भवन या भूमि की नकारात्मक ऊर्जा को संतुलित करके सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाना होता है। यह यंत्र किसी भी तोड़-फोड़ के बिना वास्तु दोष को शांति देने में सहायक होता है।

🌺🔱🌺वास्तु दोष निवारण यंत्र कैसे कार्य करता है?🌺

🌺 1. ऊर्जा संतुलन (Energy Balancing)

हर दिशा की अपनी एक ऊर्जा होती है (जैसे उत्तर-पूर्व = जल तत्व, दक्षिण-पूर्व = अग्नि)।

यदि किसी दिशा में दोष होता है (जैसे अग्नि कोण में शौचालय), तो वहाँ की ऊर्जा गड़बड़ा जाती है।

यंत्र उस ऊर्जा को संतुलित करता है ताकि दिशा की प्रकृति बनी रहे।

> उदाहरण: दक्षिण-पूर्व में दोष हो तो वास्तु अग्नि यंत्र वहां की ऊर्जा को पुनः सक्रिय करता है।

🌺 2. ग्रहों की शक्तियों का आह्वान

यंत्रों में बीज मंत्र, ग्रह-चित्र और ऊर्जा रेखाएं (yantric geometry) होती हैं, जो ब्रह्मांडीय शक्ति को आकर्षित करती हैं।

यह उस दिशा से जुड़े ग्रहों (जैसे पूर्व दिशा = सूर्य, उत्तर = चंद्र) को सकारात्मक रूप से सक्रिय करती है।

🌺 3. माइंड और स्पेस की सिंक्रोनाइज़ेशन

यंत्र से उत्पन्न होने वाली आकर्षण शक्ति और बीज मंत्र वातावरण में कम्पन (vibrations) उत्पन्न करती हैं।

ये कम्पन व्यक्ति के मन, शरीर और वातावरण को सामंजस्यपूर्ण ऊर्जा से जोड़ती हैं।

🌺🔱 🌺 वास्तु दोष निवारण यंत्र और उनके प्रमुख उपयोग🌺

🌺यंत्र दिशा उपयोग

🌺 वास्तु दोष निवारण यंत्र कोई भी सामान्य वास्तु दोषों को दूर करता है

🔥 अग्नि यंत्र दक्षिण-पूर्व रसोई, बिजली समस्याओं के लिए
💧 ईशान यंत्र उत्तर-पूर्व मानसिक शांति, जल दोष
🧭 दक्षिण-पश्चिम यंत्र SW स्थिरता, वरिष्ठता के लिए
💰 कुबेर यंत्र उत्तर दिशा धन आगमन बढ़ाने हेतु
🌀 राहु-केतु शांति यंत्र किसी भी दोषी दिशा वास्तु दोष से उत्पन्न ग्रह दोषों को शांत करता है

🌺🔱🌺 यंत्र का प्रयोग कैसे करें (स्थापना विधि)

1. साफ स्थान चुनें – दीवार या फर्श जहाँ वास्तु दोष हो

2. स्थापना के पूर्व यंत्र को गंगाजल/कच्चे दूध से शुद्ध करें

3. शुभ दिन (जैसे शुक्रवार, पूर्णिमा, रविवार) को स्थापना करें

4. यंत्र के सामने दीपक जलाकर "ॐ वास्तु पुरुषाय नमः" मंत्र का 11 बार जप करें

5. यदि संभव हो तो कपूर या लोबान से स्थान शुद्ध करें

🌺🔱🌺 यंत्र लगाते समय ध्यान देने योग्य बातें:

🌺 यन्त्र सिद्ध/अभिमंत्रित किया हुआ होना चाहिए

🌺 यंत्र को सीधे हाथ (दाएँ हाथ) से स्थापित करें

🌺यंत्र को दीवार या फर्श पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके लगाएँ (जब तक विशेष दिशा निर्देश न हो)
यंत्र के पास गंदगी, शौचालय, या झूठन नहीं होनी चाहिए

🌺🔱🌺वास्तु दोष के सरल एवं सार्वभौमिक उपाय।🌺

🌺🔱🌺बहुत जगह ऐसा होता है की वास्तु दोष इतने ज्यादा होते हैं की तोड़ फोड़ संभव नहीं है या ऐसा होता है की आप फ्लेट में रह रहे हो जहाँ बहुत से परिवर्तन संभव नहीं है।
60-70% पीड़ितों की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं होती जिसमें बहुत खर्चे वाले उपाय हो सकें।
उन सभी व्यक्तियों के लिए सरल उपाय भी होते हैं, श्रद्धा व नियम से यदि ये उपाय किए जाएं और साथ ही साथ ईष्ट की साधन भजन दृढ़ता से हो और कर्म में निष्ठा हो तो आपके जीवन में सफलता के द्वार अवश्य खुलते हैं।
उपाय कुछ इस प्रकार से हैं।

१. 🌺सुबह आपके घर में किसी मशीन, टीवी या फोन आदि में महामृत्युंजय मंत्र बजता रहे और शाम को दोनो समय मिलने पर शिवतांडव स्तोत्र बजे।
प्रदोष काल में शिवतांडव स्तोत्र की विशेष महिमा है। यह पाठ या श्रवण आपके जीवन के कुयोगों को नष्ट कर उन्नति के सभी मार्ग खोल देता है।

२🌺. सायंकाल में घर के सदस्य अपने कुलदेवता की आरती ऊंचे स्वर में नित्य करें।

३.🌺 नित्य प्रातः एक देशी गाय के गोबर के कंडे पर गुग्गल घी गुड़ की धूप करके "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करते हुए पूरे घर में उसका धुँवा करें।

४.🌺 सोमवार को शिवजी को कच्च दूध जल गंगा जल मिश्रित जल से अभिषेक कर उसके जल पात्र में एकत्रित कर शंख से घर में छिड़काव करे,बुधवार हल्दी को पानी में घोल कर भगवान गणेश जी का ध्यान करते हुए, पान के पत्ते से पूरे घर में उस जल का छिड़काव करें, सुख शान्ति व लक्ष्मी का आगमन होता ही है।

५.🌺 यदि दक्षिण मुखी मुख्य द्वार का दोष हो तो श्वेतार्क गणपति वहाँ स्थापित करें। श्वेतार्क गणपति सिद्ध अभिमंत्रित किए गए उपलब्ध हैं

६. 🌺सुबह शाम तीन तीन बार शंख ध्वनि करें और देसी गाय के शुद्ध घी का दीपक अपने ईष्ट के निमित्त प्रज्ज्वलित करें।

७. 🌺एक भूखे व्यक्ति को नित्य भोजन, एक श्वान को भोजन, कौवों को भोजन, गौ माता को भोजन, चीटीयों को भोजन और आसपास के किसी भी देव स्थान में नित्य कुछ भी प्रसाद, ये नियम सभी वास्तु दोष और ग्रह दोषों को हर लेता है।

८. 🌺अपनी रसोई में पूर्व दिशा में लड्डू गोपाल,देवी अन्नपूर्णा की एक तस्वीर रखिए जहाँ नित्य धूप दीप भी करें। उन्हें भोग लगाए

९. 🌺घर की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें, प्रत्येक शनिवार रद्दी या बिना काम की चीजें फेंक दिया करें। घर में मकड़ी के जालें ना बने। और झाड़ु ऐसी जगह रखें जहाँ पैर न लगे, और किसी वजनदार चीज के पास न रखें।

१०. 🌺प्रयास करें की आटा , शनिवार के दिन ही पिसवाया जाए और उसमें दस प्रतिशत काले चने अवश्य मिलवाएं। या शनिवार के दिन काले चने खाने की आदत डालें।

११.🌺 भगवान सूर्य, तुलसी, व भगवान शिव पर जल अर्पण नित्य हो और घर में जहाँ जहाँ वास्तु दोष हो वहाँ भगवान गणेश जी का स्मरण प्रार्थना कर सिन्दूर व घी से छोटे छोटे स्वास्तिक बना दिए जाएं तो उस घर से वास्तु दोष न्यून हो जाते हैं।

१२.🌺 जिस घर में नित्य हवन होता हो.. वहाँ वास्तु दोष न्यूनतम हो जाते हैं।

१३🌺. भगवान शिव अथवा भगवती के किसी स्वरूप की विशेष पूज‌न जहाँ हो वहाँ वास्तु पुरुष प्रसन्न व शान्त रहा करते हैं।

🌺🔱🌺इन नियमों को जीवन में अपना कर आप बिना किसी भारी तोड़ फोड़ और बड़े खर्चे के बिना भी अपने जीवन से वास्तु दोषों और कतिपय ग्रह दोषों से बचे रहेंगे। और साथ ही साथ आपके आर्थिक उन्नति के द्वार भी खुलने लगेंगे। समय के साथ आर्थिक सुदृढ़ता हो जाने पर यदि आप वास्तु अनुसार अपने मकान में बदलाव भी कर लेंगे और साथ ही ये नियम भी अनवरत चलते रहे तो आपकी सतत् उन्नति में कभी कोई बाधा आ ही नहीं सकती।
स्वास्थ्य, समृद्धि, प्रेम और आनन्द आपके जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन जाता है।
जय महामाया🌺जय महाकाल 🌺जय सदगुरु दातार
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