18/04/2018
आप का पैथोलोजिस्ट कौन है ?
प्रायः देखा गया है कि जब हम या हमारे परिजन अस्वस्थ होते हैं तब हम सावधानी से अपने लिए सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर का चुनाव करते हैं. हम सभी अपने अनुभव से शहर के उपयुक्त सर्जन , फिजिशियन, बाल चिकित्सक इत्यादि बता सकते हैं. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आपका पैथोलोजिस्ट कौन है ?
पैथोलोजिस्ट वह डॉक्टर है जो लैब साइंस और विकृति विज्ञानं का ज्ञाता होता है. MBBS और पोस्ट ग्रेजुएशन(MD/DNB/DCP) के बाद पैथोलॉजी की डिग्री हासिल होती है. लगभग 9 – 10 वर्षो के परिश्रम के उपरांत MCI और भारत सरकार के नियमानुसार रिपोर्ट्स जारी करने का अधिकार मिलता है. पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनिंग के दौरान clinical pathology ( खून , मल , मूत्र इत्यादि सम्बंधित), hematology, cytology, histopathology, ब्लड बैंक इत्यादि का गहन प्रशिक्षण मिलता है.
भारत में पैथोलॉजी भले ही शिशुअवस्था में हो लेकिन विदेशो में इसकी विभिन्न सुपरस्पेशलिटी प्रचलित हैं – जैसे नयूरोपेथोलोजी, ओंकोपेथोलोजी, हिमाटोपेथोलोजी (hematopathology) , forensic pathology इत्यादि.
जब आप किसी डॉक्टर से अस्वस्थ होने पर सलाह लेते हैं तो वह कहते हैं – यह जाँच कराले फिर दिखायें. क्यों कहा जाता है ऐसे ? क्यों सीधे बीमारी के लक्षण देख कर दवा नहीं देते ? आज से कुछ दशक पहले लक्षण देख कर ही इलाज होता था और तब मृत्यु दर ज्यादा थी. लेकिन आज ऐसा नहीं है. यह एविडेंस बेस्ड मेडिसिन(EBM) का युग है जहाँ तथ्यों के आधार पर ही इलाज मिलता है. यही कारण है कि 1960 में life expectancy at birth मात्र 41 साल थी और आज 69 साल है. डायग्नोस्टिक्स सुविधाओ में आधुनिकीकरण के साथ सुपेर्स्पेसिअलिटी से उपचार का रूप बदल गया है.
जैसे उपचार देने वाले डॉक्टर को अपनी कला में निपुण होना अनिवार्य है वैसे ही टेस्ट करने वाले को विषय की बारीकिया जानना ज़रूरी है.
उपचार की प्रक्रिया में फिजिशियन के साथ पैथोलोजिस्ट की भी अहम् भूमिका है. दोनों का ही उधेश्य है – मरीज का सही उपचार. अतः फिजिशियन का चयन करते समय पैथोलोजिस्ट का भी चयन आवश्यक है.
दिलीप के स्वास्थ्य में उपचार के बावजूद भी सुधार नहीं हो पा रहा था. कुछ टेस्ट करवाए गए. टेस्टों से पीलिया बढने के संकेत मिले. पैथोलोजिस्ट ने फिजिशियन से बात कर G- 6 – PD एंजाइम टेस्ट की सलाह दी. यह एंजाइम शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (rbc) के जीवन और असाम्युक नाश की रोकथाम में महत्वपूर्ण है. दिलीप में एंजाइम की कमी पायी गयी. ऐसी कमी में सामान्यतः दी जाने वाली दवा भी पीलिया कर सकती हैं. उसके उपचार में ऐसी ही एक दवा पीलिया बड़ा रही थी. दवा बंद करते ही उसका स्वास्थ्य में शीघ्र ही सुधार आया.
क्लिनिशियन और पैथोलोजिस्ट एक दूसरे के पूरक हैं. मेडिसिन के महान ज्ञाता सर विलियम ओस्लेर ने कहा है – “ As is your pathology so is your practice “ . ओस्लेर के अनुसार मेडिसिन को सम्पूर्ण रूप से समझने के लिए पैथोलॉजी का ज्ञान आवश्यक है.
भारत में मेडिकल पर्यटन उत्थान पर है. अफ्रीका से इलाज के लिए आयी ईसाबिस के शरीर में विभिन्न जगहों पर गाठें थी. डॉक्टर को लिंफोमा का अंदेशा था. बायोप्सी(biopsy) करने पर पैथोलोजिस्ट को गाठ में Leishmania का इन्फेक्शन मिला . जहाँ lymphoma के लिए कीमोथेरेपी दी जाती ,वही सटीक डायग्नोसिस से ईसाबिस को लेइश्मनिअ के लिए दिए जाने वाली विशिष्ट दवा दी गयी और वो कुछ दिन में अपने देश वापस लौट गयी.
एक कहावत है – “ What your mind doesn’t know, your eyes can not see.”
आज के तकनीकी युग में पैथोलॉजी के जांचों को निस्संदेह मशीन से किया जाता है परन्तु उस मशीन के पीछे एक विशेषज्ञ का ज्ञान होता है. वह परिणामो का सम्बन्ध , समन्वय और तुलना करता है एवं रोग के अन्य संभावित कारणों को देखते हुए स्वेछा से ही या फिजिशियन की सहमति से कुछ अतिरिक्त परीक्षण भी करता है.
एक प्राइवेट रिसर्च के मुताबिक भारत में 50 % जाँच केंद्र (Diagnostic Centre) एकल लैब हैं, 25-30 % कॉर्पोरेट लैब हैं और बाकी हॉस्पिटल की साइड लैब हैं. USA के सीएटल शहर स्थित PATH नामक कंपनी के सर्वे अनुसार भारत देश में 1 लाख के करीब डायग्नोस्टिक्स सेंटर हैं. जाहिर सी बात है कि इन सब में तो पैथोलोजिस्ट नहीं होंगें. इनमें से कई केंद्र अप्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा अनधिकृत रूप से चलाये जा रहे हैं.
क्या आप किसी नर्स से सर्जरी करा सकते हैं ? सर्जन के साथ वर्षो से काम करने वाला असिस्टेंट से भी सर्जरी करा सकते हैं क्या ? उसी तरह बगैर पैथोलोजिस्ट के लैब से जाँच अनुचित है. ऐसे हो रही जांचे मरीज़ के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है.
यह व्यवस्था आम जन के लिए हानिकारक है. गत दिसम्बर में आये माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार रिपोर्ट पर पैथोलोजिस्ट के हस्ताक्षर होने अनिवार्य हैं. कोर्ट और सरकार नियम पालन में अपना समय लेंगे परन्तु मरीज़ और उनके परिजनों को जागरूक होने कि आवश्यकता है.
आज जब मोबाइल तक का चुनाव हम सावधानी से करते हैं तो अपना जाँच केंद्र भी समझदारी से चुने और यह जाने कि – मेरा पैथोलोजिस्ट कौन है ?
- डॉ ऋचा शर्मा
(पैथोलोजिस्ट)