26/02/2023
नाम - ABC
वय - 52/F
स्थल - भुज (गुजरात)
व्याधि - नासार्श (multiple nasal polyp)
एक महिला रुग्ण नासानाह की शिकायत लेकर चिकित्सालय में आयी। (रुग्ण एलोपेथी निदान करवा कर आई थी(multiple nasal polyp) और polyp के लिए रुग्णको फिर से ऑपरेशन करवाने की सलाह दी गई थी।)
प्रधान लक्षण-
1. नाक हंमेशा बंध रहना ।
2. नाक से पानी लगातार शुरू था।
3. साँस लेने में दिक्कत ।
4. भोजन के समय नासानाह की शिकायत ज्यादा थी।
दर्शन परीक्षा करने पर ध्यानमें आया नासामें अर्शने अवरोध कर रखा था। (refer picture 1)
प्रधान हेतु(निदान) सेवन-
1. सुबह 8 बजे उठना । (अग्निमांद्यकर)
2. 8.30 बजे नास्ते में 1 कटोरी दही + खाखरा (अभिष्यंदि, विदाही ,गुरु)
3. दिनभरमें हर एक घंटेमें 1 ग्लास पानी पीना (द्रव ,शीत, स्निग्ध, गुरु)
[पूर्व व्याधिवृत्त - 3 साल पहले nasal polyp का ऑपरेशन करवा चुके थे। परिणामत: लाभ शून्य है।]
उपरोक्त व्याधिवृत्त जानने पर शरीरमें द्रव ,गुरु, शीत, स्निग्ध, अभिष्यंद गुण बढ़कर व्याधि प्रादुर्भाव हुआ है ये निश्चित किया और इसके विपरीत गुणो से उनकी चिकित्सा करनी थी।【सामान्यं वृद्धिकारणम् , ह्रास हेतु: विशेष: । च. सू. 1/44】 रुग्ण को हेतु परिवर्जन करवा कर औषधमें सिर्फ आमलकी + अमृता(गिलोय) दिया ।(आमलकी दीपन, रुक्ष, लघु है तथा अमृता तिक्त रस युक्त द्रव्य है जो पाचक है तथा उपशोषण (द्रवशोषण) करता है। उष्ण और लघु भी है। ये गुण हेतु के गुणो के विपरीत है। )
19 दिनके बाद रुग्ण अत्यंत प्रसन्न होकर आकर कहते है की लगता है जीवन में काफी समय बाद मेरा नाक खुला है और में ठीक से साँस ले पा रही हूँ।
(चिकित्सा के बाद का पिक्चर साथ में है ।)
अत्यंत सामान्य औषध से भी असामान्य परिणाम सैद्धान्तिक आयुर्वेद चिकित्सा से लिए जा सकते है ये विशेष दृढ हुआ है। आयुर्वेद सिद्धांत अनादि शाश्वत है ये नि:संशय सत्य है। सिद्धांत समझकर चिकित्सा करना यही अनुष्ठान है और यही शास्त्रके प्रति परमादर है।
"आयुर्वेदोपदेशेषु विधेय: परमादर:।"
वैद्य डोली बुद्धभट्टी "आत्रेयी"
समर्थ आयुर्वेद चिकित्सालय
माधापर (भुज-कच्छ) - गुजरात