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प्रकृति और आयुर्वेद 🌱🍀प्रत्येक ऋतु में जंगल अपना रंग बदलता है। बदलती हुए हर ऋतु कुछ नयी औषधि को उजागर करती है। शुद्ध सैद...
02/01/2025

प्रकृति और आयुर्वेद 🌱🍀

प्रत्येक ऋतु में जंगल अपना रंग बदलता है। बदलती हुए हर ऋतु कुछ नयी औषधि को उजागर करती है। शुद्ध सैद्धान्तिक आयुर्वेद चिकित्सा उत्तम औषधि की अपेक्षा रखती है इसी लिए वैद्य द्वारा स्वयं चुनी हुई औषधियां वैद्यत्व की शोभा और बढाती है।

यस्तु रोगविशेषज्ञः सर्वभैषज्यकोविदः ।
देशकालप्रमाणज्ञस्तस्य सिद्धिरसंशयम् ।। (च. सू.20/22)

(रोग ज्ञान, चिकित्सा सूत्र तथा देश-काल-प्रमाण के साथ साथ औषधि ज्ञान भी आवश्यक है तभी रोगीमें नि:शंशय परिणाम प्राप्ति होती है।)

In the heart of the jungle, we connect with the roots of Ayurveda .Exploring nature’s pharmacy to bring you the best of holistic healing. 🌳🍃

📍Into the wild to bring ayurveda wisdom to life✨








नाम - ABC वय - 52/Fस्थल - भुज (गुजरात)व्याधि - नासार्श (multiple nasal polyp)    एक महिला रुग्ण नासानाह की शिकायत लेकर च...
26/02/2023

नाम - ABC
वय - 52/F
स्थल - भुज (गुजरात)
व्याधि - नासार्श (multiple nasal polyp)

एक महिला रुग्ण नासानाह की शिकायत लेकर चिकित्सालय में आयी। (रुग्ण एलोपेथी निदान करवा कर आई थी(multiple nasal polyp) और polyp के लिए रुग्णको फिर से ऑपरेशन करवाने की सलाह दी गई थी।)

प्रधान लक्षण-
1. नाक हंमेशा बंध रहना ।
2. नाक से पानी लगातार शुरू था।
3. साँस लेने में दिक्कत ।
4. भोजन के समय नासानाह की शिकायत ज्यादा थी।

दर्शन परीक्षा करने पर ध्यानमें आया नासामें अर्शने अवरोध कर रखा था। (refer picture 1)

प्रधान हेतु(निदान) सेवन-
1. सुबह 8 बजे उठना । (अग्निमांद्यकर)
2. 8.30 बजे नास्ते में 1 कटोरी दही + खाखरा (अभिष्यंदि, विदाही ,गुरु)
3. दिनभरमें हर एक घंटेमें 1 ग्लास पानी पीना (द्रव ,शीत, स्निग्ध, गुरु)

[पूर्व व्याधिवृत्त - 3 साल पहले nasal polyp का ऑपरेशन करवा चुके थे। परिणामत: लाभ शून्य है।]

उपरोक्त व्याधिवृत्त जानने पर शरीरमें द्रव ,गुरु, शीत, स्निग्ध, अभिष्यंद गुण बढ़कर व्याधि प्रादुर्भाव हुआ है ये निश्चित किया और इसके विपरीत गुणो से उनकी चिकित्सा करनी थी।【सामान्यं वृद्धिकारणम् , ह्रास हेतु: विशेष: । च. सू. 1/44】 रुग्ण को हेतु परिवर्जन करवा कर औषधमें सिर्फ आमलकी + अमृता(गिलोय) दिया ।(आमलकी दीपन, रुक्ष, लघु है तथा अमृता तिक्त रस युक्त द्रव्य है जो पाचक है तथा उपशोषण (द्रवशोषण) करता है। उष्ण और लघु भी है। ये गुण हेतु के गुणो के विपरीत है। )

19 दिनके बाद रुग्ण अत्यंत प्रसन्न होकर आकर कहते है की लगता है जीवन में काफी समय बाद मेरा नाक खुला है और में ठीक से साँस ले पा रही हूँ।
(चिकित्सा के बाद का पिक्चर साथ में है ।)

अत्यंत सामान्य औषध से भी असामान्य परिणाम सैद्धान्तिक आयुर्वेद चिकित्सा से लिए जा सकते है ये विशेष दृढ हुआ है। आयुर्वेद सिद्धांत अनादि शाश्वत है ये नि:संशय सत्य है। सिद्धांत समझकर चिकित्सा करना यही अनुष्ठान है और यही शास्त्रके प्रति परमादर है।
"आयुर्वेदोपदेशेषु विधेय: परमादर:।"

वैद्य डोली बुद्धभट्टी "आत्रेयी"
समर्थ आयुर्वेद चिकित्सालय
माधापर (भुज-कच्छ) - गुजरात

Address

Krishna Arcade , Gandhi Circle , Madhapar(bhuj)
Kutchchh
370020

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