26/12/2025
पंचतत्व में विलीन हुए शेखावाटी की रत्नप्रसुता धरती के लाल चौधरी दिलसुखराय।
पुत्र अरुण ने दी मुखाग्नि।
फतेहपुर के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ नेता श्री दिलसुख राय जी चौधरी जी का उनके पैतृक गांव घस्सू में अंतिम संस्कार किया गया।
लक्ष्मणगढ़ विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व सांसद सुमेधानंद सरस्वती, फतेहपुर विधायक हाकम अली, पूर्व किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष हरिराम रणवा, पूर्व विधायक के.डी.बाबर, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष दिनेश जोशी, भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज बाटड, लक्ष्मणगढ़ भाजपा मंडल अध्यक्ष ललित पंवार, पूर्व अध्यक्ष जयप्रकाश सरावगी, आलोक पाराशर, फतेहपुर के पूर्व विधायक नंदकिशोर महरिया,भाजपा नेता मधु भिंडा, भागीरथ गोदारा, पूर्व पंचायत समिति सदस्य शिवबख्श बगड़िया, नरोदडा प्रशाशक महेंद्र सिंह ख्यालिया, राजू पाटोदा, आलोक पाराशर, प्यारेलाल कटारिया, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी मोहर सिंह मीणा, तहसीलदार फारूक अली इत्यादि ने राजकीय नियमानुसार पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इनके निधन से सर्वसमाज को एक अपूर्णीय क्षति हुई है। इनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। इनके विराट वयक्तित्व की छाया में अनेकों लोग संपोषित हुए। इनका राजनैतिक सफर जसरासर पंचायत के सरपंच से आरंभ हुआ। 1990 में ये नवीं विधानसभा के सदस्य रहे। संसदीय परामर्शदात्री एवं गृह समिति राजस्थान विधानसभा के सदस्य, राजस्थान किसान यूनियन के अध्यक्ष, लोकदल के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं नरोदडा ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष रहे।
किसी के काम जो आए उसे इंसान कहते हैं।
पराया दर्द अपनाए उसे इंसान कहते हैं।
इनके पास आने वाला कोई भी वयक्ति हताश या निराश नहीं हुआ। चौधरी जैसे विराट वयक्तित्व को कलमबद्ध करने में लेखनी अत्यंत बौनी जान पड़ती है। मेरे जीवन के संपूर्ण कालखंड में मेरे अंतःकरण पर आदरणीय चौधरी जी ने अपने स्नेहसिक्त व्यवहार से एक अमिट छाप छोड़ी है। हर किसी से जुड़ जाना और उनको अपने साथ जोड़ लेना उन्हें बखूबी आता था। अपने नेतृत्व गुण के कारण वे शाशन प्रशासन से सदा जुड़े रहे और इन संपर्कों का उपयोग जनकल्याण के कार्यों हेतु करते थे। लक्ष्मणगढ़ जनपद ही नहीं, बल्कि संपूर्ण शेखावाटी में ये किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। पता नहीं चौधरी जी किस मिट्टी के बने थे कि वे कभी कर्तव्य पथ से विचलित नहीं हुए। हर बाधा उन्हें नए उत्साह से सरोबार करती थी। इन्होंने ताउम्र संघर्ष किया। उनके बारे में निम्न पंक्तियां चरितार्थ करती हैं कि
गिरते हैं शह सवार ही मैदान में।
वो तिफ्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चले।
आप हमेशा आमजन के दुख सुख में शामिल रहे। इनमें करुणा, सेवा और मानवता के उत्थान के लिए गहरी प्रतिबद्धता थी। इनके जैसा उदारमना वयक्तित्व सदियों में एक बार पैदा होता है। सर्वसमाज के लिए कल्याण के लिए गहराई से प्रतिबद्ध थे। इन्होंने सदैव बिना रुके, बिना झुके अपने दिल की आवाज़ पर चिंतन कर समर्पण भाव से काम करते थे। इन्होंने खानाबदोश साटिया समाज एवं आसपास के दुकानदारों को निशुल्क जल उपलब्ध करवाते आए हैं। इनके पेट्रोल पंप पर रोज सैकड़ों लोग भोजन कर विश्राम करते थे। राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोई दुर्घटना होने पर ये अपनी जीप लेकर तुरंत पहुँच जाते थे। आप ईमानदारी और सादगी से सार्वजनिक जीवन में रहे।हमेशा जनता के बीच रहने वाले, खारी और खरी कहने वाले व्यक्ति रहे हैं। चालाकी और दंद फंद से कोसों दूर थे।
मेरे पिताजी स्व चिरंजीलाल जी दाधीच से उनका हमेशा प्रगाढ़ स्नेह रहा। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले हर छोटे बड़े नेता इनके पेट्रोल पंप पर रुकते थे । मुझ पर हमेशा उनका स्नेह और आशीर्वाद रहा। आपको कोटि-कोटि नमन।
प्रिय अरुण ने निरंतर बेहद सम्मान से उनकी देखभाल की--ढेरों आशीर्वाद।
खुद के लिए जूझने वाले इस जहाँ में
एक ढूंढो तो हजार मिल जाएंगे।
दूसरों की खुशी के लिए जूझने वाली
चौधरी जी जैसी हस्तियाँ नहीं मिलती।*
आप भौतिक रूप से इस संसार में न होते हुए भी हमें सद्कार्यों के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे।
मृदुभाषी, सरल, उदारमना एवं सहज स्वभाव को नमन।