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08/02/2026

कैंसर..!!!
चिकित्सा विज्ञान...नई खोज..नई उम्मीद..

एक नया शोध हो रहा है और एक ऐसी MRI तकनीक से बिना किसी ऑपरेशन के कैंसर को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। सिडनी में डॉक्टर एक बहुत ही आधुनिक कैंसर इलाज का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे MRI-guided cryoablation कहते हैं।

यह कैसे काम करता है?

MRI की लाइव तस्वीरों की मदद से एक बहुत पतली सुई सीधे ट्यूमर तक पहुँचाई जाती है। फिर उस ट्यूमर को अंदर से बहुत ज़्यादा ठंडा करके जमा दिया जाता है। इस प्रकिया में ना तो कोई बडा चीरा लगता और ना ही कोई टांका लगाया जाता है। अस्तपाल में भी नहीं रखा जाता है। मरीज उसी दिन इलाज करवाकर घर चला जाता है। न दर्द, न निशान।

यह तकनीक इतनी सटीक है कि सिर्फ ट्यूमर को नष्ट करती है और आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान नहीं पहुँचाती। जो लोग सर्जरी के लिए बहुत कमजोर हैं, ज्यादा उम्र के हैं, या जिनका ट्यूमर खतरनाक जगह पर है — उनके लिए यह इलाज नई ज़िंदगी का मौका हो सकता है।

रोचक बात ये भी है कि यह सुई टिश्यू को –40°C या उससे भी ज्यादा ठंडा कर सकती है, जिससे कैंसर कोशिकाएँ फट जाती हैं, लेकिन बाकी शरीर सुरक्षित रहता है।

सच्चाई ये है कि बड़ी खोजें बड़े ऑपरेशन से नहीं होतीं —बल्कि समझदारी और ठंडी तकनीक से होती हैं।

Sources: NSW Health | Sydney Adventist Hospital | Radiological Society of North America (RSNA)

08/01/2026

मोतियाबिंद (Cataract) का पता चला है? सिर्फ 'सर्जरी' न कराएं, सही निर्णय लें।

मरीज सर्जरी को सिर्फ एक "प्रक्रिया" मानते हैं। लेकिन एक सफल विज़न रेस्टोरेशन (Vision Restoration) के लिए ऑपरेशन थिएटर में जाने से पहले लिए गए फैसले सबसे ज्यादा मायने रखते हैं।

अगर आप या आपके घर के बड़े-बुजुर्ग मोतियाबिंद की सर्जरी के बारे में सोच रहे हैं, तो यह '5-पॉइंट चेकलिस्ट' आपको सही निर्णय लेने में मदद करेगी। अपने डॉक्टर से कंसल्टेशन के दौरान इन तथ्यों पर जरूर चर्चा करें।

1️⃣ सही सर्जन और अस्पताल का चुनाव (The Safety Net)

सिर्फ "नज़दीक" देखकर अस्पताल न चुनें। काबिलियत देखें।

✅ प्लानिंग: एक आधुनिक सर्जन सिर्फ यह नहीं पूछता कि "लेंस कौन सा चाहिए?", बल्कि वह आपके 'टारगेट विज़न' पर चर्चा करता है। उनसे पूछें: "अगर सर्जरी के बाद भी चश्मे का नंबर रह गया (Refractive surprise), तो उसे ठीक करने के लिए आपके पास क्या बैकअप प्लान है?"

✅ सुरक्षा (Safety): सुनिश्चित करें कि अस्पताल के पास NABH जैसी मान्यता (Accreditation) हो। यह इन्फेक्शन से बचाव के लिए बेहद ज़रूरी है।

✅ इमरजेंसी सपोर्ट: उनसे पूछें, "अगर सर्जरी के बाद रात में मुझे दर्द हो, तो मैं किससे संपर्क करूँ?" ऐसे अस्पताल को चुनें जहाँ 24/7 इमरजेंसी सुविधा उपलब्ध हो।

2️⃣ आँखों की सटीक माप (The Math Matters)

सर्जरी के बाद चश्मे के मोटे नंबर आने का मुख्य कारण गलत माप (measurement) है।

✅ तथ्य: पुराने 'मैन्युअल अल्ट्रासाउंड' (A-scan) में गलती की गुंजाइश ज्यादा होती है।

सही निर्णय: हमेशा 'Optical Biometry' की मांग करें। यह लेज़र तकनीक से आँख की माप लेती है जो माइक्रोन स्तर तक सटीक होती है और लेंस का पावर एकदम सही बताती है।

3️⃣ एस्टिग्मेटिज्म (Astigmatism) को नज़रअंदाज़ न करें

✅ तथ्य: अगर आपकी आँख में बेलनाकार नंबर (Cylindrical power > 0.75 D) है, तो साधारण लेंस लगाने के बाद भी आपको धुंधला दिखेगा।

सही निर्णय: 'Toric IOL' के बारे में पूछें। यह लेंस आपके एस्टिग्मेटिज्म को ठीक करता है। याद रखें, यहाँ डॉक्टर की सर्जिकल सटीकता (precision) ही सब कुछ है।

4️⃣ लेंस (IOL) का चुनाव - अपनी लाइफस्टाइल के अनुसार
कोई भी लेंस "परफेक्ट" नहीं होता, आपको अपनी ज़रुरत देखनी होगी:

✅ Monofocal: दूर की नज़र बेहतरीन, कॉन्ट्रास्ट अच्छा रहता है। शर्त: आपको पढ़ने के लिए चश्मा लगाना पड़ेगा।

✅ Multifocal (Bifocal & Trifocal): चश्मे से लगभग आज़ादी। शर्त: रात में लाइट के चारों ओर घेरे (Halos/Glare) दिख सकते हैं।

✅ EDOF: यह बीच का रास्ता है - कंप्यूटर और डैशबोर्ड विज़न के लिए बेहतरीन है और रात में भी दिक्कत कम होती है।

5️⃣ आपके शरीर की सेहत (Systemic Health)

आपकी आँखें तभी ठीक होंगी जब आपका शरीर स्वस्थ होगा।

✅ HbA1c: सर्जरी के लिए यह 7% से कम होना आदर्श है। शुगर बढ़ने पर इन्फेक्शन और रेटिना में सूजन (CME) का खतरा रहता है।

✅ Blood Pressure: सर्जरी के दिन BP नियंत्रित होना चाहिए (Systolic 180 से ऊपर होने पर सर्जरी कैंसल हो सकती है)।

✅ दवाइयां: अगर आप प्रोस्टेट की दवा (जैसे Tamsulosin) ले रहे हैं, तो अपने सर्जन को पहले ही बता दें। इससे सर्जरी की तकनीक बदलनी पड़ती है।

मोतियाबिंद की सर्जरी जीवन में एक बार होती है। इसे सिर्फ एक "काम" न समझें, बल्कि अपनी रोशनी को अपग्रेड करने का मौका समझें। जागरुक बनें, सही सवाल पूछें।

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27/12/2025

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Anti Cancer Drug found in Japan: वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज की दिशा में एक नई और अनोखी खोज की है। यह खोज जापानी वृक्ष मेंढक की आंत में ....

27/11/2025

■ MBBS में सबसे पहले क्लास लगी और विषय पढ़ाया गया ग्रॉस एनाटॉमी...फिर अप्पर लिम्ब थोरेक्स...फिर लोअर लिम्ब एब्डॉमिन एन्ड पेल्विस...हेड एन्ड नेक...अंत में ब्रेन न्यूरो एनाटॉमी 🙄

अब अगला आग का दरिया था जिसका नाम था फिजियोलॉजी...के आपने अब तक जो जो देखा सीखा समझा वो सब अंग कैसे करतें हैं 😞 एक रोज ब्रेन न्यूरो एनाटॉमी की कक्षा चल रही थी और टीचर जी पूछ बैठे की मोर देखा है आपने ? हम सब जोर से बोले कि हाँ 😂

टीचर ने बोर्ड पर लिखा MORs 🙄 ये कौनसा मोर था हम सब हैरान थे... इतने में दूजा सवाल पूछे के हिंदी में आत्मसम्मान शब्द सुना है ? हम बोले हाँ ! उन्होंने बोर्ड पर लिखा ACC हम सब हैरान थे कि आत्मसम्मान को ACC कब लिखा जाता है 😞 हमें क्या पता था अभी सवाल और पूछे जाएंगे और जवाब हमको क्या देना है समझ न आ रहा था...अब टीचर महोदय ने सवाल पूछे हम सबसे :-

👉 कभी बच्चों को देखा है ? भागते भागते गिर जाते है...हँसी एक ही पल में आंसुओ में बदल जाती है ?
👉 उनके हाथ से कोई चॉकलेट छीन ले तो ?
👉 तुम किसी से बाइक/पैसा लेने जाओ और मना कर दे ?
👉 जब कोई आपका प्रपोजल ठुकरा दे ?
👉 ऑफिस में अचानक आपको नोकरी से निकाल दे ?
👉 कोई इंटरव्यू में आप रिजेक्ट हो गये ?
👉 या हम किसी भी क्षेत्र में रिजेक्ट हो जाते है ?
👉 आपके साथ अचानक कोई दुर्व्यवहार कर ले ?
👉 आपके साथ रहकर आपको कोई धोखा दे दे ?

हम सब चुप थे...मास्टर जी बोले कि रिजेक्ट होने का दिल पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है। सामाजिक हो, या व्यक्तिगत क्षेत्र, हम में से कोई भी ठुकराया जाना नहीं चाहता। लेकिन हमें नहीं पता होता की ठुकराए जाने का दर्द शारीरिक पीड़ा जैसी ही होती है, और यह केवल मानसिक दर्द न होकर शरीर पर भी असर दिखाता है। क्योंकि हमारा मस्तिष्क ( ब्रेन ) रिजेक्शन को शारीरिक दर्द, पीड़ा और तकलीफ के बराबर मानता है, इसलिए रिजेक्ट होने पर मस्तिष्क की प्रतिक्रिया भी वैसी ही होती है।

रिजेक्शन से, मस्तिष्क के उन्ही भागों में ज्यादा असर होता है, जो शारीरिक चोट से प्रभावित होते है। एम आर आई स्टडी से हमें पता चलता है, कि मस्तिष्क रिजेक्ट होने पर वैसी ही प्रतिक्रिया देता है, जैसा शारीरिक चोट लगने पर देता है।

ठोकर ज्यादा तकलीफ देती है क्योंकि हमारी यादाश्त उसे समर्थन करती है - शरीर के ज़ख्म दवाई से भर जाते हैं, और उसकी पीड़ा दूर हो जाती है, लेकिन मस्तिष्क पर लगी ठोकर की चोट इंसान को बार-बार याद आती रहती है, वह क्षण, वह हादसा उसे भविष्य में भी सताता रहता है। मस्तिष्क उस दर्द को भूलना नहीं चाहता, इसलिए दर्द ज्यादा होता है।

ठुकराए जाने पर हमारे आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचती है - आत्मविश्वास टूटने पर तकलीफ ज्यादा होता है। ठुकराए जाने पर हमारा खुद पर से गुरूर मिट जाता है, और अंदर का इंसान मर जाता है।

👉 मोर MORs देखे हो कभी ? रोते हुए भी नाचता रहता है ? बोले हाँ ! तो क्या हुआ उसके आत्मसम्मान ACC का ?
कैसे निकले आँसू उसके ?

बोले MORs को mu-opioid receptors (MORs) कहना चालू कर देना ! और आत्मसम्मान को anterior cingulate cortex (ACC) समझना चालू कर देना और आँसुओं को एमिगडाला समझना !!

क्योंकि ठोकर कैसी भी हो...ठुकराए जाने पर आपके मस्तिष्क में एमिगडला और एन्टीरीयर सिंगुलेट कोर्टेक्स के वेंट्रल पार्ट में mu-opioids रसायन का अत्याधिक बनने से भूचाल आता है। लेकिन शरीर शारीरिक/मानसिक ठोकर की चिकित्सा खुद ब खुद करता है। कमाल की बात है यही रसायन बनने से पीड़ा का अनुभव होता है और यही रसायन धीरे धीरे उस जख्म को ही भर देते है जिससे आपके जज्बात कुछ दिन बाद शांत हो जाते है।

डॉ मोनिका जौहरी

26/11/2025

👉 # urineinfection

खासकर महिलाओं के लिए जिनमें यह एक बहुत ही कॉमन इंफेक्शन है जो महिलाएं ऑफिस में काम करती है या टीचर है या हॉस्टल में रहती है या वो जो घर से बाहर ज्यादा रहती है और जिनकी आम ज़िन्दगी में पब्लिक टॉयलेट का ज्यादा इस्तेमाल होता है समझ लो :-

कभी-कभार जरूरी मीटिंग लम्बी चल जाती है तो कभी रास्ते में उपयुक्त स्थान ना होने के कारण या फिर कभी किसी अन्य मजबूरी के कारण अगर आप भी अपना यूरीन ज्यादा समय के लिए रोक लेते हैं तो आपको समझना चाहिए कि ये आपके लिए एक बड़ी परेशानी पैदा कर सकता है।

पेशाब में दिक्कत आना या यूरीन इन्फेक्शन होना एक आम समस्या होती जा रही है ज़्यादातर पुरुष, महिलाओं या जवान लड़कियों में 100 में से 80 प्रतिशत लोग कभी न कभी मूत्र रोगों से परेशान रहे होते हैं । यूरिन इंफेक्शन होने पर महिलाओं को बहुत परेशानी होती है और कई तो शर्म और झिझक के मारे इसका तब तक इलाज नहीं करवाती जब तक कि दर्द असहनीय नहीं हो जाये।

कॉमन टॉयलेट शेयर करना या फिर पेशाब आने पर भी बाथरूम न जाना, यूटीआई यानी की मूत्र मार्ग संक्रमण की बीमारी को न्‍यौता दे सकता है। जिस तरह ठहरे हुए पानी में बैक्‍टीरिया पैदा होने लगता है, उसी तरह से जब पेशाब लगने पर उसे रोक लिया जाए, तो मूत्राशय में भी बैक्‍टीरिया पनपने और संख्‍या में बढ़ने लगते हें, जिससे यह स्‍थति पैदा हो जाती है। लड़को की बजाए लड़कियों में यूटीआई का खतरा ज्‍यादा देखने को मिलता है।

यूरिन इन्फेक्शन जिसे युटीआई कहते है पेशाब से सम्बंधित अंगों में होने वाला इन्फेक्शन है। जब कुछ कीटाणु पेशाब से सम्बंधित अंगों में चले जाते है तो वहाँ संक्रमण हो जाता है और इस वजह से पेशाब में दर्द, जलन, कमर दर्द, बुखार आदि समस्याएं पैदा होने लगती है इसे यूरिन ट्रेक्ट इन्फेक्शन या युटीआई कहते है।

UTI के कारण मूत्र से सम्बंधित कोई भी अंग प्रभावित हो सकता है जैसे गुर्दे, मूत्राशय, मूत्र नली आदि। यह इन्फेक्शन जब मूत्राशय में होता है तो पेशाब में परेशानी होने लगती है जैसे पेशाब करते समय दर्द , बार बार पेशाब आना, पेशाब करते समय जलन आदि होने लगते है। मूत्राशय खाली होने पर भी ऐसा लगता है की पेशाब आएगी। इस प्रकार के लक्षण महसूस होने के अलावा बुखार भी आता हो और पीठ के निचले हिस्से में दर्द भी होता हो तो यह किडनी में इंफेक्शन के कारण हो सकता है। ज्यादातर मूत्राशय (Bladder) इससे प्रभावित होता है। इसका तुरंत उपचार ले लेना चाहिए अन्यथा इन्फेक्शन किडनी तक फैल जाने से समस्या गंभीर हो सकती है।

एक बार ठीक होने के बाद भी इसके वापस दुबारा होने की संभावना होती है। अतः बीच में दवा छोड़नी नहीं चाहिए। यह इंफेक्शन दो प्रकार का होता है एक तो ब्लैडर यानी पेशाब की थैली का और दूसरा युरैथ्रा यानी पेशाब करने के लिए बनी ओपनिंग का ।

■ यूरिन इन्फेक्शन होने के कारण :- यूरिन इन्फेक्शन होने का मुख्य कारण E.Coli बेक्टिरिया होते है जो आँतों में पाए जाते है। ये बेक्टिरिया गुदा द्वार से निकल कर मूत्र मार्ग, मूत्राशय, मूत्र वाहिनी या किडनी में इन्फेक्शन फैला सकते है।

👉 महिलाओं में यूरिन इन्फेक्शन अधिक होने का मुख्य कारण मूत्र मार्ग तथा गुदा का पास में होना होता है। महिलाओं में मूत्र की नली छोटी होने के कारण मूत्राशय तक जल्दी संक्रमण हो जाता है। गुदा में मौजूद बेक्टिरिया पास के मूत्र मार्ग को संक्रमित कर देते है। वहाँ से संक्रमण मूत्राशय तक पहुँच जाता है। यदि इस स्थिति में उपचार नहीं होता है तो किडनी भी प्रभावित हो सकती है।

👉 यौन सम्बन्ध के माध्यम से भी बेक्टिरिया मूत्र नली में संक्रमण पैदा कर सकते है। यौन सम्बन्ध के समय साफ सफाई का ध्यान नहीं रखना

👉 यूरिन इन्फेक्शन होने का एक बड़ा कारण है। यूरिन में इन्फेक्शन 16 से 35 वर्ष की महिलाओं को अधिक होता है। इस उम्र में यौन संबंधों में सक्रियता इसका कारण होता है। शादी के बाद यह इन्फेक्शन हो जाना आम बात होती है। इसी वजह से इसे "हनीमून सिस्टाइटिस" के नाम से भी जाना जाता है।

👉 महिलाओं द्वारा फेमिली प्लानिंग के उद्देश्य से योनि में लगाए जाने वाले डायाफ्राम के कारण यूरिन इन्फेक्शन हो सकता है।

👉 डायबिटीज, मोटापा या अनुवांशिकता भी यूरिन में इन्फेक्शन होने का कारण हो सकते है।

👉 गर्भावस्था में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन के बढ़ने के कारण मूत्राशय और मूत्र नली की संकुचन की क्षमता कम हो जाती है। इस वजह से मूत्राशय के सही प्रकार से काम न कर पाने के कारण यूरिन इन्फेक्शन हो जाता है।

👉 मेनोपॉज के समय एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने के कारण योनि में इन्फेक्शन बचाने वाले लाभदायक बेक्टिरिया की कमी हो जाती है। इस वजह से यूरिन इन्फेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है।

👉 पुरुषों में डायबिटीज या प्रोस्टेट के बढ़ने के कारण यूरिन में इन्फेक्शन हो सकता है।

👉 बच्चों में कब्ज का बना रहना तथा मूत्राशय व मूत्रनली का सही प्रकार से काम नहीं कर पाना यूरिन इन्फेक्शन का कारण हो सकता है।

👉 पेशाब निकलने के लिए लंबे समय तक कैथिटर लगाए जाने से भी यूरिन इन्फेक्शन हो सकता है।

■ यूरिन इन्फेक्शन के लक्षण :-

👉 पेशाब करते समय जलन या दर्द होना
👉 बार बार तेज पेशाब आने जैसा महसूस होता है लेकिन मुश्किल से थोड़ी सी पेशाब आती है
👉 नाभि से नीचे पेट में, पीछे पीठ में या पेट के साइड में दर्द होना
👉 गंदला सा, गहरे रंग का, गुलाबी से रंग का या अजीब से गंध वाला पेशाब होना
👉 थकान और कमजोरी महसूस होना
👉 उलटी होना, जी घबराना
👉 बुखार या कंपकंपी ( जब इन्फेक्शन किडनी तक पहुँच जाता है ) होना।

अगर यूरिन इन्फेक्शन की संभावना लगे तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करना चाहिए। पेशाब की जाँच करने पर यूरिन इन्फेक्शन है या नहीं यह निश्चित हो जाता है और उसी के अनुसार दवा ली जा सकती है।
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■ अब बचने के उपाय समझ लो क्योंकि इतना ही आपके वश में है, आगे का काम हम डॉक्टरों का है !

👉 पानी पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए।

👉 जब भी पेशाब आने जैसा लगे तुरंत जाएँ चाहे किसी भी काम में व्यस्त हों। तसल्ली से पूरा मूत्राशय खाली करें। पेशाब को देर तक रोके रखने से यूरिन इन्फेक्शन हो सकता है।

👉 मलत्याग के बाद या मूत्र त्याग के बाद आगे से पीछे की तरफ पोंछें या धोएं। न की पीछे से आगे की तरफ। ताकि इस प्रक्रिया में गुदा के बेक्टिरिया योनि या मूत्र द्वार तक न पहुंचें।

👉 बाथ टब के बजाय शॉवर या मग्गे बाल्टी से नहाएं।

👉 यौन सम्बन्ध से पहले तथा बाद में साफ सफाई का ध्यान रखें।

👉 यौन सम्बन्ध के बाद यूरिनल का उपयोग जरूर करें ताकि यदि मूत्र नली बेक्टिरिया आदि से मुक्त होकर साफ हो जाये।

👉 कॉटन अंडरवियर काम में लें। नायलोन अंडरवियर या टाइट जीन्स का उपयोग करने से नमी बनी रहती है जिसके कारण बेक्टिरिया पनप सकते है।

👉 कुछ समय के लिए तेज खुशबुदार स्प्रे या डूश आदि का उपयोग न करें। इनसे स्थिति बिगड़ती ही है।

👉 कभी भी तेज आई पेशाब को रोके नहीं, जब भी पेशाब लगे तुरंत जाएं वरना यूटीआई होने का खतरा बढ़ जाएगा।

👉 संभोग के बाद हमेशा पेशाब करें और योनि को साफ करें। इससे ट्रैक में अगर कोई बैक्‍‍टीरिया होगा भी, तो वह साफ जो जाएगा।

👉 जितना हो सके पब्‍लिक कमोड का प्रयोग न करें तो बेहतर होगा। या फिर अच्‍छा होगा कि सबसे पहले फ्लश चला लें और फिर उसके दो मिनट बाद ही बैठें। वरना संक्रमण होने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। अपना टॉयलेट हमेशा साफ रखें।

डॉक्टर के बताये अनुसार पूरी दवा लो। ठीक हो गए ऐसा समझ कर दवा बीच में मत छोड़ो।

22/11/2025

*तुम बीमार नहीं हो, बस उम्र बढ़ रही है।*

कई “बीमारियाँ” असल में बीमारियाँ नहीं होतीं —
वे शरीर में उम्र के साथ आने वाले स्वाभाविक परिवर्तन होते हैं।
बीजिंग के एक अस्पताल के निदेशक ने बुज़ुर्गों के लिए जो पाँच सलाहें दी हैं,
ज़रा ध्यान से पढ़िए —

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1️⃣ याददाश्त कमज़ोर होना

यह अल्ज़ाइमर नहीं है।
यह मस्तिष्क की खुद को बचाने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।
डरिए मत — दिमाग बूढ़ा हो रहा है, बीमार नहीं।
अगर आप चाबी कहाँ रखी भूल जाते हैं,
लेकिन खुद ढूंढ लेते हैं —
तो यह भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) नहीं है।

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2️⃣ चलने की रफ़्तार धीमी पड़ना या पैर डगमगाना

यह लकवा नहीं है — यह मांसपेशियों की कमजोरी है।
इलाज दवा नहीं — ज़्यादा चलना-फिरना ही असली उपाय है।

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3️⃣ नींद न आना

यह बीमारी नहीं, बस मस्तिष्क की लय बदल रही है।
नींद की बनावट उम्र के साथ बदलती है।
नींद की गोलियों पर निर्भर मत रहिए —
वे गिरने, भूलने और कमजोरी का कारण बनती हैं।
सबसे अच्छा “नींद का इलाज”:
दिन में धूप में थोड़ा समय बिताइए
और नियमित दिनचर्या बनाए रखिए।

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4️⃣ शरीर में दर्द

यह गठिया नहीं,
बल्कि उम्र के साथ तंत्रिकाओं की प्राकृतिक कमजोरी का परिणाम है।

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5️⃣ हाथ-पैरों में हर वक्त दर्द रहना

अधिकांश लोग पूछते हैं —
“क्या यह गठिया है? क्या हड्डियाँ बढ़ गई हैं?”
लेकिन ९९% दर्द किसी बीमारी से नहीं होता।
उम्र के साथ नसों की संवेदना कम होती है,
इसलिए दर्द ज़्यादा महसूस होता है।
इसे सेंट्रल सेंसिटाइजेशन कहा जाता है।
दवा नहीं — हल्का व्यायाम, फिज़ियोथेरपी,
गर्म पानी से सेंक और हल्की मालिश ज़्यादा असरदार हैं।

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6️⃣ मेडिकल रिपोर्ट में “असामान्य” वैल्यूज़

वे भी हमेशा बीमारी नहीं दर्शातीं —
क्योंकि मानक पुराने मापदंडों पर बने हैं।

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7️⃣ WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार

बुज़ुर्गों के लिए जाँच के मानक थोड़े ढीले होने चाहिए।
थोड़ा ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल हानिकारक नहीं —
बल्कि ऐसे लोग अधिक जीते हैं!
क्योंकि कोलेस्ट्रॉल हार्मोन और कोशिका झिल्ली के लिए ज़रूरी है।
बहुत कम कोलेस्ट्रॉल से प्रतिरोधक शक्ति घटती है।
चीन के अनुसार,
बुज़ुर्गों के लिए आदर्श रक्तचाप है 150/90 mmHg,
जबकि युवाओं के लिए 140/90 mmHg।

उम्र बढ़ना बीमारी नहीं है;
उसे रोग मत मानिए।

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8️⃣ वृद्ध होना कोई रोग नहीं —

यह जीवन का स्वाभाविक चरण है।

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बुज़ुर्गों और उनके बच्चों के लिए सुझाव:

1️⃣ हर असहजता बीमारी नहीं होती।
2️⃣ डर बुज़ुर्गों का सबसे बड़ा दुश्मन है।
रिपोर्टों और विज्ञापनों के गुलाम मत बनिए।
3️⃣ बच्चों का कर्तव्य केवल माता-पिता को अस्पताल ले जाना नहीं,
बल्कि उनके साथ घूमना, धूप में बैठना, बात करना,
साथ खाना और भावनात्मक संबंध बनाए रखना है।

उम्र बढ़ना दुश्मन नहीं —
स्थिर बैठ जाना असली दुश्मन है!

🌿 स्वस्थ रहिए, सक्रिय रहिए!

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एक ब्राज़ीलियन कैंसर विशेषज्ञ के विचार:

1️⃣ वृद्धावस्था आधिकारिक रूप से 60 से शुरू होकर 80 तक रहती है।
2️⃣ “चौथा चरण” — 80 से 90 वर्ष।
3️⃣ “दीर्घायु काल” — 90 के बाद।
4️⃣ वृद्धावस्था की सबसे बड़ी समस्या है अकेलापन।
साथी के जाने के बाद वैधव्य परिवार के लिए बोझ लग सकता है।
इसलिए दोस्तों से संबंध बनाए रखें, मिलते रहें।
बच्चों और पोतों पर बोझ मत बनिए (भले वे कहें नहीं)।

मेरा सुझाव:
अपना जीवन अपने हाथ में रखें —
कब बाहर जाना है, किसके साथ रहना है,
क्या खाना, पहनना, पढ़ना, देखना,
किसे फोन करना — यह सब खुद तय कीजिए।
वरना आप दूसरों पर बोझ बन जाएंगे।

---

विलियम शेक्सपियर ने कहा था:

> “मैं हमेशा खुश रहता हूँ क्योंकि मैं किसी से कोई उम्मीद नहीं रखता।”

उम्मीद ही सबसे बड़ा दुख है।
हर समस्या का समाधान है —
सिवाय मौत के।

---

बोलने से पहले... सुनिए।
लिखने से पहले... सोचिए।
आलोचना से पहले... अपने भीतर झाँकिए।
प्रतिक्रिया देने से पहले... गहरी साँस लीजिए।
मरने से पहले... पूरा जी लीजिए!

---

सबसे अच्छा रिश्ता वो नहीं होता जहाँ लोग परफेक्ट हों,
बल्कि वो जहाँ लोग ज़िंदगी को सुंदर बनाना जानते हैं।
दूसरों की कमी देखिए, पर उनके गुणों की सराहना भी कीजिए।

अगर खुश रहना है — दूसरों को खुश कीजिए।
कुछ पाना है — पहले कुछ दीजिए।
अपने आस-पास प्यार भरे, मुस्कुराते, सकारात्मक लोग रखिए,
और खुद भी वैसे बनिए।

---

ज़िंदगी कठिन लगे, आँसू आएँ,
तो भी मुस्कुराइए और कहिए —
“सब ठीक हो जाएगा,
क्योंकि मैं अब भी सफ़र में आगे बढ़ रहा हूँ!”

---

छोटी सी परीक्षा:
अगर आपने यह संदेश किसी को नहीं भेजा,
तो इसका मतलब — आप थोड़े अकेले और उदास हैं।
यह संदेश अपने प्रियजनों को भेजिए —
वे आपको कभी नहीं भूलेंगे!

https://www.facebook.com/share/1A3CUH2yL8/
29/10/2025

https://www.facebook.com/share/1A3CUH2yL8/

In a groundbreaking medical triumph, Japanese researchers have achieved what once seemed beyond human reach, enabling a paralyzed man to stand and move again using stem cell therapy. This pioneering procedure employs induced pluripotent stem cells, which are adult cells reprogrammed to act like embryonic ones, capable of regenerating damaged spinal tissue. Instead of mechanical assistance, the healing comes from within the body, using science to reignite its natural ability to repair itself.

The early trial results have stunned the scientific community. Nerve pathways that were once severed began to reform, restoring movement and sensation where none existed before. For millions living with paralysis, this marks more than progress, it’s the beginning of a new era in regenerative medicine, where restoration replaces limitation.

Researchers believe this technique could soon extend to treating stroke damage and neurodegenerative diseases like ALS and Parkinson’s. While the study remains under close supervision, its impact is already profound. Japan’s scientific community has not just repaired a spine, it has redefined hope itself.

Source/Credits: Kyoto University iPS Cell Research and Application Center (CiRA), Japan.

22/10/2025

“यूरोप में हुए एक अध्ययन में यह पाया गया कि भारतीय मधुमक्खी के ज़हर में ऐसे तत्व पाए गए हैं,
जो प्रयोगशाला परीक्षणों में कैंसर कोशिकाओं पर असर दिखाते हैं।
वैज्ञानिक इस पर आगे और शोध कर रहे हैं। 🐝🔬

22/09/2025

Address

Ghantaghar, Near Kamnath Hospital, Hospital Road
Lakhimpur
262701

Opening Hours

Tuesday 10am - 8pm
Wednesday 10am - 8pm
Thursday 10am - 8pm
Friday 10am - 8pm
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Telephone

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