23/04/2026
हनुमान जी की कृपा एक समय की बात है। एक छोटे से गाँव में रामदास नाम का एक वृद्ध भक्त रहता था। उसका जीवन अत्यंत सरल था, लेकिन उसकी सबसे बड़ी पूँजी थी “राम नाम” का निरंतर जाप। वह हर क्षण “राम-राम” में ही लीन रहता, मानो संसार से उसका कोई संबंध ही न हो।
गाँव के लोग अक्सर कहते, “रामदास तो इस संसार में रहते हुए भी कहीं और ही रहता है।” लेकिन रामदास के चेहरे की शांति और संतोष देखकर हर कोई मन ही मन उसे प्रणाम करता। एक दिन शनि देव का प्रभाव उस क्षेत्र पर पड़ने वाला था। ज्योतिषियों ने चेतावनी दी कि यह समय कष्टदायक होगा रोग, दुःख और संकट बढ़ेंगे। पूरे गाँव में भय का वातावरण छा गया।
लोग उपाय करने लगे, पूजा पाठ करने लगे लेकिन रामदास अपने पुराने भाव में ही मग्न रहा बस “राम नाम” का जाप। जब शनिदेव उस गाँव में पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि हर कोई भयभीत है, लेकिन एक व्यक्ति बिल्कुल निडर बैठा है आँखें बंद, चेहरे पर मुस्कान, और होंठों पर “राम” का नाम।
शनिदेव ने सोचा, “देखते हैं, इस पर मेरा प्रभाव क्यों नहीं पड़ रहा।” वे रामदास के पास पहुँचे, लेकिन जैसे ही उन्होंने उसे स्पर्श करना चाहा, एक अदृश्य शक्ति ने उन्हें रोक दिया। तभी वहाँ प्रकट हुए बजरंग बली हनुमान जी। हनुमान जी ने मुस्कुराते हुए कहा, जो मेरे प्रभु श्रीराम के नाम में लीन हो जाता है, उस पर काल, ग्रह, बाधा कुछ भी प्रभाव नहीं डाल सकते।
शनिदेव ने विनम्र होकर कहा, “प्रभु, मैं तो नियम से अपना कार्य कर रहा था, लेकिन इस भक्त के पास आते ही मेरी शक्ति समाप्त हो गई। हनुमान जी ने अपनी पूँछ को धीरे से फैलाया और शनिदेव को उसमें लपेट लिया। शनिदेव उस दिव्य बंधन में बंधकर शांत हो गए। फिर हनुमान जी बोले जब तक यह भक्त राम नाम में लीन है, तब तक तुम इसे स्पर्श भी नहीं कर सकते।”
कुछ समय बाद हनुमान जी ने शनिदेव को मुक्त किया। शनिदेव ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया और वचन दिया जो भी सच्चे मन से राम नाम का जाप करेगा और हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे मैं कभी कष्ट नहीं दूँगा। उस दिन के बाद गाँव के लोगों ने समझ लिया कि सबसे बड़ा उपाय कोई बाहरी साधन नहीं, बल्कि राम नाम में सच्ची श्रद्धा है।
*राम नाम में लीन जो, उसे न व्यापे काल।*
*पूँछ लपेटी शनि को, हनुमत किया निहाल॥*
*जो सच्चे भाव से भगवान का नाम लेता है, उसके जीवन में भय, ग्रहदोष और संकट अपना प्रभाव खो देते हैं। भक्ति ही सबसे बड़ी रक्षा है।*