31/12/2021
हे राघव ,
कड़वे, दुःखद स्वप्न सा वर्ष ये , नव भोर में घुल जाए।
हे केशव , उल्लसित जीवन फिर भू पर लहराए ।
नव किसलय सा वर्ष खिले ये ,
अब पुनः कालिमा न छाए ।
करबद्ध निवेदन प्रभु आपसे मानवता खिल-खिल जाए ।
नव वत्सर धन-धान्य भरे हर घर ,
आरोग्य मेघ बरसाए ।
हार्दिक शुभकामनाएं 🌾
सन्तोष मिश्र