06/01/2026
**होम्योपैथिक औषधि: कोल्चिकम (Colchicum) —जानकारीपूर्ण कविता**
शरद की ऋतु में खिला,
मेड़ो सैफ्रन कहलाया,
प्रकृति की गोद से जन्मा
**कोल्चिकम** औषधि बन आया।
जोड़ों में जब आग-सी जलन,
गाउट का दर्द सताए,
सूजन, जकड़न, असह्य पीड़ा
कोल्चिकम राहत दिलाए।
भोजन की गंध से मतली,
देखते ही मन घबराए,
खाने का नाम सुनते ही
उल्टी का भाव जगाए।
ठंड बढ़े तो दर्द बढ़े,
रातें करवटें बदलवाएँ,
आराम से कुछ चैन मिले,
पर चलना कठिन बन जाए।
पेट में मरोड़, दस्त, कमजोरी,
ठंडे मौसम में बढ़ती जाए,
ऐसे लक्षणों की तस्वीर में
कोल्चिकम सही उतर आए।
प्रकृति का यह कोमल उपहार,
संतुलन का देता संदेश,
लक्षणों से मेल बैठाकर
दिखलाता अपना विशेष उद्देश्य।
# # # **खुराक (Dosage)**
30Ch**: 2बूंद , दिन में 2–3बार
200Ch**.चिकित्सक की सलाह अनुसार
*खुराक रोग की तीव्रता, आयु और संवेदनशीलता पर निर्भर करती है।*
**सावधानी**
स्व-उपचार से बचें। गर्भावस्था, दीर्घकालिक रोग, या अन्य दवाओं के साथ सेवन से पहले ** होम्योपैथिक चिकित्सक** से परामर्श अवश्य लें।
*यह कविता व जानकारी शैक्षणिक उद्देश्य हेतु है; व्यक्तिगत उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है।*