20/12/2025
मोफरवा- लेहम्
भैषज्य रत्नावली रसायन प्रकरणम्
जातीपत्र कणा नागकेशरं शारिवाद्वयं।
मज्जाफलं च कक्कोलं कट्फलं मुस्तकं वचा ।। 152।।
कर्चूरं मस्तकी मांसी शाल्मल्यगुरुगोक्षुरम्।
शतमूली च कटुकी कोकिलाक्षश्च मेथिका ।।153।।
पृश्निपर्णी च धुस्तूरो बीजं च कपिकच्छुजम् ।
घातकी पंकजं कुष्ठं मधुकं पद्मकेशरम् ।।154।।
जातीफलं चन्दनंच कदली मुषली तथा ।
विदारीकन्दचूर्णं च प्रियङ्ग्वम्बुलवंगकम् ।
आकारकरभं चोपचीनी वारिधिशोषणम् ।।155।।
जीवद्वन्द्वसविश्वमूषणवरा एलात्वचो धान्यकंचेन्दुः कुड्कुमनाभिजं सगगनं चूर्णं समं कारयेत् ।
स्वर्ण तारभुजङ्गवङ्गमयसा वज्रं तथा ताम्रकम् मुक्ताशाम्भवतालकानि विदिना शुद्धं मृतं योजयेत्।।156।।
तुर्याशं विजयादलस्य विमलं चूर्णं ततो दापयेत् ।।
तेषामर्धाशयुक्ता विमलतरसिता क्षौद्रमेवं सितांशं
स्वल्पं स्वल्पं प्रदेयं मृदुतरदहनैर्लेहसिद्धिर्विधेया।
शीते क्षिप्त्वा तु चूर्ण घृतपरिलुलितं घट्टयेत्तन्तु दर्व्या-
म्लेच्छेनोक्तः सुलेहो मुफर इति मतः सेव्यतां सर्वकाले
काम्यं वामाप्रमोदं सकलगदहरं राजयोग्यं प्रदिष्टम् ।।157।।
जावित्री पीपरि, नागकेशर, श्वेत शारिवा, कृष्ण शारिवा, माजूफल, शीतलचीनी, कायफल, नागरमोथा,वचा,
कचूर, रूमीमस्तगी, जटामांसी, सेमल की मूसली, अगर, गोखरू, शतावर, कुटकी, तालमखाना, मेथी के
बीज
पश्निपर्णी, धत्तूर तथा कौँच के शुद्ध बीज, धाय के फूल, कमल, कुष्ठ, मुलेठी, पद्मकेशर, जायफल, श्वेत चन्दन,
केला, श्वेत मूसली, विदारी कन्द, प्रियङ्गु, सुगन्धबाला, लौंग, अकरकरा, चोपचीनी, समुद्रशोष, जीवक, ऋषभक, सोंठ,
काली मरिच, हरड़, बहेड़ा, आंवला, छोटी इलायची, दालचीनी, धनियां, भीमसेनी कपूर, केसर, कस्तरी अभ्रक भस्म,स्वर्ण भस्म, रजत भस्म, सीसक भस्म, वंग भस्म, लौह भस्म, हीरक भस्म, ताम्र भस्म, मृक्ता
भस्म
रससिन्दूर, शुद्ध हरताल भस्म इन में से प्रत्येक पिसी हई औषधि तथा भस्में सब समान भाग एवं इन
सब के मिश्रित तौल से चौथाई शद्ध विजया पत्र चूर्ण से संवर्धित यह यवनोक्त मोफरवा लेहम् सर्वदा सेवन करने योग्य है। इस लेह को सेवन करने से मनुष्य स्रियों के साथ सम्भोग करने में कामशक्ति सम्पन्न हो जाता है। यह अवलेह अनुपान भेद से सर्व रोग नाशक तथा अनुपम शक्ति वर्धक,जरा रोग नाशक,बढ़ती उम्र में शक्ति संरक्षक और राजाओं के द्वारा सेवन किया गया शरीर में शक्ति का संचार करता है।
मोफरवा लेहम् 600 ग्राम 2200/-