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*मुंह का अत्यधिक सूखना (Dry Mouth / लार कम बनना)*एक छोटा लक्षण, बड़ी चेतावनीअक्सर लोग मुंह सूखने को साधारण प्यास या मौसम...
03/01/2026

*मुंह का अत्यधिक सूखना (Dry Mouth / लार कम बनना)*

एक छोटा लक्षण, बड़ी चेतावनी

अक्सर लोग मुंह सूखने को साधारण प्यास या मौसम का असर मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेद इसे शरीर के भीतर चल रहे असंतुलन का स्पष्ट संकेत मानता है। लगातार मुंह सूखना, लार का कम बनना (Xerostomia) केवल असहजता नहीं, बल्कि पाचन, दांत, गला और पूरे स्वास्थ्य पर असर डालने वाली स्थिति हो सकती है।

*♦️मुंह सूखना क्या है?♦️*

जब मुंह में लार (Saliva) सामान्य मात्रा में नहीं बनती या जल्दी सूख जाती है, तो इस स्थिति को मुख शोष कहा जाता है। लार केवल मुंह को गीला रखने के लिए नहीं, बल्कि भोजन पचाने, दांतों की रक्षा और संक्रमण से बचाव के लिए अत्यंत आवश्यक होती है।

♦️♦️♦️♦️♦️♦️

*मुंह सूखने के मुख्य कारण (Why It Happens) आधुनिक कारण*

शरीर में पानी की कमी (Dehydration)

ज्यादा चाय, कॉफी, तंबाकू या शराब

तनाव, चिंता और नींद की कमी

कुछ दवाइयों का लंबे समय तक सेवन

सर्दियों में कम पानी पीने की आदत

*♦️आयुर्वेदिक कारण♦️*

वात दोष की वृद्धि – शुष्कता, रूखापन और कमजोरी

पित्त दोष का प्रकोप – अत्यधिक गर्मी, जलन

अग्नि का असंतुलन – पाचन कमजोर होना

ओज क्षय – रोग प्रतिरोधक शक्ति में कमी

आयुर्वेद में इसे मुख शोष या रस धातु की कमी से जोड़ा गया है।

*♦️आयुर्वेद में वर्णन♦️*

चरक संहिता के अनुसार, जब शरीर में रस धातु क्षीण हो जाती है, तब लार, त्वचा की नमी और ताजगी कम होने लगती है। यह आगे चलकर थकान, कब्ज, मुंह की दुर्गंध और बार-बार संक्रमण का कारण बन सकती है।

*♦️मुंह सूखने के लक्षण♦️*

बार-बार पानी पीने की इच्छा

बोलते समय गला सूखना

स्वाद में कमी

होंठ और जीभ का रूखापन

*मुंह से दुर्गंध*

आयुर्वेद की 7 सिद्ध और प्रमाणित उपचार विधियां

1️⃣ घृत पान (Desi Ghee Therapy)

सुबह खाली पेट ½ चम्मच देशी घी गुनगुने पानी के साथ लें।

➡️ लाभ: रस धातु को पोषण, मुंह की शुष्कता दूर।

2️⃣ मुलेठी चूर्ण

½ चम्मच मुलेठी पाउडर शहद के साथ चूसें।

*➡️ लाभ: लार स्राव बढ़ाता है, गले को ठंडक देता है।*

3️⃣ तिल तेल से ऑयल पुलिंग

सुबह 1 चम्मच तिल तेल मुंह में 5–7 मिनट घुमाएं।

➡️ लाभ: लार ग्रंथियां सक्रिय होती हैं।

4️⃣ आंवला रस

20–30 ml ताजा आंवला रस रोज़ लें।

➡️ लाभ: पित्त शमन, मुंह में नमी बढ़ाता है।

5️⃣ सौंफ–धनिया पानी

1 चम्मच सौंफ + 1 चम्मच धनिया रातभर भिगोकर सुबह पानी पिएं।

➡️ लाभ: शरीर की आंतरिक शुष्कता कम।

6️⃣ नस्य कर्म (हल्का)

गाय के घी की 2 बूंदें नाक में डालें (सुबह)।

➡️ लाभ: सिर और मुख क्षेत्र में नमी संतुलन।

7️⃣ शीतल आहार

दूध, नारियल पानी, मुनक्का, खीरा, लौकी शामिल करें।
➡️ लाभ: वात-पित्त संतुलन।

*♦️क्या न करें♦️*

अत्यधिक मसालेदार व तला भोजन

ज्यादा कैफीन

धूम्रपान

देर रात जागना

*♦️निष्कर्ष♦️*

मुंह सूखना केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पूरे शरीर के संतुलन से जुड़ा संकेत है। आयुर्वेद इसकी जड़ पर काम करता है—दोष शमन, धातु पोषण और अग्नि संतुलन। समय रहते सही आहार, दिनचर्या और औषधियों से इस समस्या को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

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01/01/2026

Wishing you and your family a Happy New Year 2026 filled with prosperity, good health, and continued success in all your endeavors.

🟢🟣🟢*नारियल  पानी के क्या फायदे हैं?*                                        नारियल पानी के अलग अलग तरह के काफी फायदे हैं...
13/12/2025

🟢🟣🟢
*नारियल पानी के क्या फायदे हैं?*

नारियल पानी के अलग अलग तरह के काफी फायदे हैं। यह न केवल आपके एनर्जी रेजुवेनशन (energy rejuvenation)के लिए बल्कि ग्लोइंग स्किन के लिए भी बहुत अच्छा है। नारियल पानी आपके इंटरनल फिजियोलॉजिकल फंक्शन्स के लिए समान रूप से आशाजनक लाभ देता है।

आइए उनके बारे में विस्तार से जानें

ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है
अक्सर जिम और व्यायाम के प्रति उत्साही लोग, कसरत से पहले या बाद के पेय के रूप में नारियल पानी शामिल करते हैं। होमोजिनस मिनरल्स

इलेक्ट्रोलाइट्स, और पोटेशियम लेवल्स स्वेटी वर्कआउट सेशन के लगभग तुरंत बाद एनर्जी लेवल्स को फिर से रिजुवेनेट और बूस्ट कर देते हैं।

स्टोर से खरीदे गए एनर्जी या स्पोर्ट्स ड्रिंक की तुलना में, नेचुरल नारियल पानी में शुगर कम होती है और यह शरीर को अच्छी तरह से हाइड्रेट करता है। इसके अलावा, नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स और पोटेशियम का लेवल मसल्स की रिकवरी में सहायता करता है, जिससे ओवरआल एनर्जी लेवल्स में वृद्धि होती है।

*वजन घटाने को बढ़ावा देता है(Promotes Weight Loss)*

वजन घटाना एक सब्जेक्टिव और नॉन -लीनियर सफर है। कुछ दिनों में, आप अपने अतिरिक्त वज़न को जल्दी से कम सकते हैं, जबकि अन्य तरीकों में काफी मेहनत लग सकती है। हालांकि, अन्य सुगरी ड्रिंक्स की तुलना में नारियल पानी वजन घटाने वाला एक हेल्थी ड्रिंक है।

बाजार से खरीदे जाने वाले हाइली प्रोसेस्ड ड्रिंक्स की तुलना में नारियल पानी में कम चीनी होती है। एक गिलास नारियल पानी में लगभग 44 कैलोरी होती है, जो कार्बोनेटेड एनर्जी ड्रिंक्स से काफी कम है।

लेकिन, क्या हम वजन घटाने के लिए खाली पेट नारियल पानी पी सकते हैं? यह काफी व्यक्तिपरक विकल्प है। हालांकि, हम आपके दिन की शुरुआत इसके साथ करने के बजाय मिड-डे हाइड्रेशन के लिए एक गिलास या एक कप नारियल पानी रखने की सलाह देंगे।

एंटीऑक्सीडेंट लाभ हो सकता है

आश्चर्यजनक रूप से, पर्याप्त नारियल पानी में शरीर में फ्री रेडिकल से होने वाले नुकसान को कम करने के फायदे हैं। प्री-क्लीनिकल ट्रायल्स ( preclinical trials) में पाया गया कि नारियल पानी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट आपके शरीर में फ्री रेडिकल के प्रभाव को कम करके आपके स्वास्थ में सुधार करते हैं।

इसके अलावा, नारियल पानी में लीवर-प्रोटेक्टिव प्रॉपर्टीज होती हैं। बिना किसी फॉर्मर ट्रीटमेंट के विशेष रूप से डैमेज्ड लीवर वाले रोगियों में नारियल पानी न केवल एंटीऑक्सिडेंट, बल्कि ब्लडस्ट्रीम में उच्च कोलेस्ट्रॉल मार्करों को कम करने में समान रूप से आशाजनक लाभ देता है।

4.डायबेटिक्स में ब्लड ग्लूकोस लेवल्स को मैनेज करना (Manage Blood Glucose Levels in Diabetics)

टाइप-2 डायबिटीज ग्लोबल कंसर्न बनता जा रहा है। जबकि लोग स्टोर से खरीदे गए शुगरी ड्रिंक्स या “शुगर -फ्री ” ऑप्शन्स के लिए पहुंचते हैं, उनमें से कोई भी उनकी स्थिति के लिए अच्छा नहीं होता है।

कुछ मात्रा में शुगर होने के बावजूद, प्राकृतिक नारियल पानी डायबेटिक्स में उच्च ब्लड ग्लूकोस लेवल्स को नियंत्रित करने में काफी लाभ देता है।

प्री-क्लीनिकल ट्रायल्स ब्लड ग्लूकोस लेवल्स को कम करने में नारियल पानी के आशाजनक प्रभावों का सुझाव देते हैं। हालांकि, परिणाम अभी साबित नहीं हुए हैं। लो शुगर लेवल्स के अलावा, नारियल पानी में मैग्नीशियम होता है, जो डायबेटिक्स में इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करता है।

हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है(Improves Heart Health)

यह कहना सही है कि नारियल पानी हार्ट सहित एक नहीं बल्कि कई इंटरनल ऑर्गन्स की रक्षा करता है। नारियल पानी के सेवन का सीधा संबंध ब्लडस्ट्रीम में कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट से है।

इसके अलावा, यह ब‌डे हुए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकता है और ब्लडस्ट्रीम में अतिरिक्त ट्राइग्लिसराइड के लेवल को कम कर सकता है। इन दोनों का हृदय स्वास्थ्य पर खराब प्रभाव पड़ता है।

रोजाना या कभी-कभी नारियल पानी पीने से ब्लडस्ट्रीम में उच्च घनत्व(high-density) वाले लिपोप्रोटीन के प्रोडक्शन पर सीधा प्रभाव पड़ता है, जिससे आगे चलकर, हार्ट की रक्षा होती है।

6.किडनी की पथरी को रोकें(Prevent Kidney Stones)

किडनी की पथरी कैल्शियम, ऑक्सालेट (calcium, oxalate) और अन्य तत्वों के अधिक जमा होने के कारण विकसित होती है जो किडनी में क्रिस्टल बनाने के लिए एक साथ जुड़ जाते हैं। दुनिया की 12% जनसंख्या को प्रभावित करने वाली यह एक बेहद दर्दनाक स्थिति है।

अध्ययनों से संकेत मिलता है कि न केवल पानी बल्कि नारियल पानी को नियमित पीने का सीधा संबंध रोगियों में किडनी की पथरी को मैनेज करने से है । सिर्फ इलाज के रूप में ही नहीं, नारियल पानी किडनी की पथरी को रोकने में भी अत्यधिक गुणकारी है।

नारियल पानी शरीर से पोटैशियम साइट्रेट (potassium citrate) और क्लोराइड (chloride) के अतिरिक्त तत्वों को बाहर निकाल देता है, जिससे किडनी स्टोन की घटना कम हो जाती है।

*पाचन को बढ़ावा देता है(Promotes Digestion)*

नारियल पानी में मैंगनीज (manganese) का लेवल पाचन क्रिया को बढ़ावा देता है और शरीर में बोवल मूवमेंट्स (bowel movements)को नियंत्रित करता है।

इसके अलावा, नारियल पानी में ऑप्टीमल हाइड्रेशन के साथ ट्रेस डाइटरी फाइबर होते हैं जो बिना पचे हुए खाने को पचाने में मदद करते हैं । यह एसिड रिफ्लक्स वाले रोगियों के लिए अच्छा है और सूजन और पेट की परेशानी के रिस्क को कम करता है।

*हाइड्रेशन का प्रबल स्रोत( Potent Source of Hydration)*

पानी के अलावा, नारियल पानी हाइड्रेशन का एक बहुत ही आशाजनक स्रोत है। यदि आप सादे पानी के बिग फैन नहीं हैं, तो नारियल पानी का थोड़ा मीठा और नट्टी(nutty) फ्लेवर एक रिफ्रेशिंग चेंज हो सकता है।

नारियल पानी में हाई लेवल के नुट्रिएंट्स भी होते हैं, जो आर्टिफीसियल फ्लेवरिंग एजेंट्स (जो आपको स्टोर से खरीदे गए जूस में मिलते हैं) की तुलना में बहुत अधिक हेल्थी होता है। पैकेज्ड या बोतलबंद नारियल पानी के बजाय नेचुरल नारियल पानी को शैल से बाहर निकालने का प्रयास करें।

*शरीर को डिटॉक्स कर सकता है(Might Detox the Body)*

नारियल पानी में ऑप्टीमल एंटीऑक्सीडेंट लेवल्स शरीर में किडनी और लिवर फंक्शन्स को नियंत्रित करता है, जिससे शरीर में टॉक्सिन्स को समाप्त किया जाता है।

विटामिन सी, अन्य एंटीऑक्सिडेंट और नारियल पानी के हाइड्रेटिंग फॉर्मूला का कॉम्बिनेशन नेचुरल बॉडी फंक्शन्स में सुधार करता है और स्किन की अपीयरेंस (appearance) में सुधार करता है।

नारियल पानी शरीर में कोलेजन सिंथेसिस में भी सुधार करता है, जिससे स्किन पर महीन रेखाओं और झुर्रियों(wrinkles) का दिखना कम होता है।

यूरिनरी ट्रैक्ट के इन्फेक्शन के रिस्क को कम करता है(Reduces risks of Urinary Tract Infection)
यूरिनरी ट्रैक्ट में संचित(Accumulated) यूरिन या टॉक्सिन्स बैक्टीरिया के विकास की ओर ले जाते हैं, जिससे संक्रमण का रिस्क बड जाता है। नारियल पानी एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक (diuretic) है, जो यूरिन उत्पादन को काफी हद तक बढ़ाता है।ऐसा करने से यूरिन और किडनी के ओवरआल फंक्शन्स बेहतर होते हैं, जिससे शरीर के अतिरिक्त टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

इसलिए, यदि आप कम यूरिन आउटपुट या हाइड्रेशन की कमी के कारण यूटीआई (UTI) को कॉन्ट्रैक्ट करते हैं, तो डेली डाइट में ताजा नारियल पानी शामिल करने से मदद मिल सकती है।

*तनाव को नियंत्रित करें(Regulate Stress)*

हालांकि काफी दूर-दूर तक का संबंध है, नारियल पानी लोगों में थकान और तनाव को कम करने में लाभकारी सिद्ध हुआ है।नारियल पानी में हाई नुट्रिएंट्स और रिफ्रेशिंग प्रॉपर्टीज होती हैं, जो शरीर को शांत करती हैं और व्यक्ति को आराम करने की अनुमति देते हैं। नारियल पानी में मौजूद शुगर्स और मिनरल्स एनर्जी लेवल्स को भी बढ़ा सकते हैं।

*स्वस्थ त्वचा में योगदान(Contributes to Healthier Skin)*

जैसा कि हमने पहले बताया, नारियल पानी कोलेजन प्रोडक्शन को बढ़ावा देता है। साथ ही, इसमें त्वचा की सुरक्षा करने वाले गुण होते हैं। हाइड्रेशन, एंटीऑक्सीडेंट गुणों के साथ, लंबे समय में स्किन की अपीयरेंस(skin’s appearance) में सुधार करता है।

यहां तक कि एक अध्ययन में भी मुँहासे को कम करने में नारियल पानी में प्रोमिसिंग बेनिफिट्स (promising benefits) पाए गए। नारियल पानी का सेवन शरीर में फ्री रेडिकल डैमेज को कम करता है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

*पाचन को बढ़ावा देता है(Promotes Digestion)*

नारियल पानी में मैंगनीज (manganese) का लेवल पाचन क्रिया को बढ़ावा देता है और शरीर में बोवल मूवमेंट्स (bowel movements)को नियंत्रित करता है।

इसके अलावा, नारियल पानी में ऑप्टीमल हाइड्रेशन के साथ ट्रेस डाइटरी फाइबर होते हैं जो बिना पचे हुए खाने को पचाने में मदद करते हैं । यह एसिड रिफ्लक्स वाले रोगियों के लिए अच्छा है और सूजन और पेट की परेशानी के रिस्क को कम करता है।

*हाइड्रेशन का प्रबल स्रोत( Potent Source of Hydration)*

पानी के अलावा, नारियल पानी हाइड्रेशन का एक बहुत ही आशाजनक स्रोत है। यदि आप सादे पानी के बिग फैन नहीं हैं, तो नारियल पानी का थोड़ा मीठा और नट्टी(nutty) फ्लेवर एक रिफ्रेशिंग चेंज हो सकता है।

नारियल पानी में हाई लेवल के नुट्रिएंट्स भी होते हैं, जो आर्टिफीसियल फ्लेवरिंग एजेंट्स (जो आपको स्टोर से खरीदे गए जूस में मिलते हैं) की तुलना में बहुत अधिक हेल्थी होता है। पैकेज्ड या बोतलबंद नारियल पानी के बजाय नेचुरल नारियल पानी को शैल से बाहर निकालने का प्रयास करें।

*शरीर को डिटॉक्स कर सकता है(Might Detox the Body)*

नारियल पानी में ऑप्टीमल एंटीऑक्सीडेंट लेवल्स शरीर में किडनी और लिवर फंक्शन्स को नियंत्रित करता है, जिससे शरीर में टॉक्सिन्स को समाप्त किया जाता है।

विटामिन सी, अन्य एंटीऑक्सिडेंट और नारियल पानी के हाइड्रेटिंग फॉर्मूला का कॉम्बिनेशन नेचुरल बॉडी फंक्शन्स में सुधार करता है और स्किन की अपीयरेंस (appearance) में सुधार करता है।

नारियल पानी शरीर में कोलेजन सिंथेसिस में भी सुधार करता है, जिससे स्किन पर महीन रेखाओं और झुर्रियों(wrinkles) का दिखना कम होता है।

यूरिनरी ट्रैक्ट के इन्फेक्शन के रिस्क को कम करता है(Reduces risks of Urinary Tract Infection)
यूरिनरी ट्रैक्ट में संचित(Accumulated) यूरिन या टॉक्सिन्स बैक्टीरिया के विकास की ओर ले जाते हैं, जिससे संक्रमण का रिस्क बड जाता है। नारियल पानी एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक (diuretic) है, जो यूरिन उत्पादन को काफी हद तक बढ़ाता है।ऐसा करने से यूरिन और किडनी के ओवरआल फंक्शन्स बेहतर होते हैं, जिससे शरीर के अतिरिक्त टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

इसलिए, यदि आप कम यूरिन आउटपुट या हाइड्रेशन की कमी के कारण यूटीआई (UTI) को कॉन्ट्रैक्ट करते हैं, तो डेली डाइट में ताजा नारियल पानी शामिल करने से मदद मिल सकती है।

*तनाव को नियंत्रित करें(Regulate Stress)*

हालांकि काफी दूर-दूर तक का संबंध है, नारियल पानी लोगों में थकान और तनाव को कम करने में लाभकारी सिद्ध हुआ है।नारियल पानी में हाई नुट्रिएंट्स और रिफ्रेशिंग प्रॉपर्टीज होती हैं, जो शरीर को शांत करती हैं और व्यक्ति को आराम करने की अनुमति देते हैं। नारियल पानी में मौजूद शुगर्स और मिनरल्स एनर्जी लेवल्स को भी बढ़ा सकते हैं।

*स्वस्थ त्वचा में योगदान(Contributes to Healthier Skin)*

जैसा कि हमने पहले बताया, नारियल पानी कोलेजन प्रोडक्शन को बढ़ावा देता है। साथ ही, इसमें त्वचा की सुरक्षा करने वाले गुण होते हैं। हाइड्रेशन, एंटीऑक्सीडेंट गुणों के साथ, लंबे समय में स्किन की अपीयरेंस(skin’s appearance) में सुधार करता है।

यहां तक कि एक अध्ययन में भी मुँहासे को कम करने में नारियल पानी में प्रोमिसिंग बेनिफिट्स (promising benefits) पाए गए। नारियल पानी का सेवन शरीर में फ्री रेडिकल डैमेज को कम करता है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

हीमोग्लोबिन आपकी लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद एक प्रकार का प्रोटीन है जो आपके द्वारा साँस ली जाने वाली ऑक्सीजन को आपके पू...
04/12/2025

हीमोग्लोबिन आपकी लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद एक प्रकार का प्रोटीन है जो आपके द्वारा साँस ली जाने वाली ऑक्सीजन को आपके पूरे शरीर की मांसपेशियों और ऊतकों तक पहुँचाता है। ऑक्सीजन के बिना, आपकी मांसपेशियों को सामान्य रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक ऊर्जा नहीं मिल पाएगी।

हीमोग्लोबिन कार्बन डाइऑक्साइड को भी ग्रहण करता है और उसे आपके फेफड़ों में वापस भेजता है ताकि आप उसे बाहर निकाल सकें। यह आवश्यक प्रक्रिया कार्बन डाइऑक्साइड के विषाक्त स्तर को रोकने में मदद करती है।

हीमोग्लोबिन के स्तर में गिरावट के कई संभावित कारण हो सकते हैं। कुछ सबसे आम कारण ये हैं:

आहार: आयरन, फोलेट या विटामिन B12 की कमी वाला आहार आपके शरीर की हीमोग्लोबिन उत्पादन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
रक्त की हानि: अत्यधिक रक्तस्राव हीमोग्लोबिन के स्तर को कम कर सकता है, लेकिन पेट के अल्सर, गर्भाशय फाइब्रॉएड या भारी मासिक धर्म के कारण लंबे समय तक रक्त की हानि भी इसमें योगदान दे सकती है।
गर्भावस्था: गर्भावस्था के दौरान, आपके रक्त की मात्रा में काफी वृद्धि होती है, जिससे आपके हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो सकता है।

आनुवंशिक स्थितियाँ: G6PD की कमी, सिकल सेल एनीमिया, स्फेरोसाइटोसिस और थैलेसीमिया जैसी वंशानुगत स्वास्थ्य स्थितियाँ लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर सकती हैं।
कैंसर: ल्यूकेमिया और लिम्फोमा सहित कुछ प्रकार के कैंसर आपके लाल रक्त कोशिकाओं के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं।
क्रोनिक किडनी रोग: गुर्दे की कार्यक्षमता में कमी का मतलब हो सकता है कि आपका शरीर पर्याप्त एरिथ्रोपोइटिन नहीं बना पा रहा है, जो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के लिए आवश्यक हार्मोन है।
दवा: एंटीरेट्रोवाइरल दवाएं और कीमोथेरेपी दवाएं आपकी अस्थि मज्जा को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन कम हो सकता है।

हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए, आयरन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे पत्तेदार सब्ज़ियाँ, रेड मीट और दालें खाएँ, और अवशोषण में सुधार के लिए इन्हें विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों जैसे संतरे और टमाटर के साथ मिलाएँ। आपको अंडे, डेयरी उत्पाद और बीन्स जैसे फोलेट और विटामिन बी12 के स्रोतों को भी शामिल करना चाहिए, और भोजन के साथ कॉफ़ी या चाय से बचना चाहिए, क्योंकि ये आयरन के अवशोषण में बाधा डाल सकते हैं। नियमित व्यायाम, हाइड्रेटेड रहना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आयरन सप्लीमेंट लेना भी मददगार हो सकता है।
आहार में बदलाव
• आयरन युक्त खाद्य पदार्थ खाएँ:
हीम (पशु-आधारित) और गैर-हीम (पौधे-आधारित) दोनों आयरन स्रोतों को शामिल करें।
• हीम आयरन: रेड मीट, चिकन, मछली और अंडे।
• गैर-हीम आयरन: पालक, केल, दाल, छोले, बीन्स, टोफू और फोर्टिफाइड अनाज।
• विटामिन सी का सेवन बढ़ाएँ:
आयरन के अवशोषण को बढ़ाने के लिए आयरन युक्त भोजन के साथ विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
• उदाहरण: खट्टे फल, स्ट्रॉबेरी, कीवी, शिमला मिर्च, टमाटर और अमरूद।
• पर्याप्त मात्रा में फोलेट और विटामिन बी12 सुनिश्चित करें:
ये लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के लिए ज़रूरी हैं।
• स्रोत: पत्तेदार सब्ज़ियाँ, दालें, बीन्स, अंडे, डेयरी उत्पाद और फोर्टिफाइड अनाज।
• कच्चे लोहे के बर्तनों में पकाएँ:
पारंपरिक लोहे के बर्तनों का उपयोग करने से आपके भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ सकती है।
जीवनशैली में बदलाव
• आयरन अवरोधकों से बचें: भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफ़ी का सेवन न करें, क्योंकि ये आयरन के अवशोषण को बाधित कर सकते हैं। साथ ही, भोजन के समय उच्च कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थों या सप्लीमेंट्स से बचें।
• हाइड्रेटेड रहें: रक्त की मात्रा और ऑक्सीजन के प्रवाह के लिए पर्याप्त पानी पीना ज़रूरी है।
• नियमित व्यायाम करें: पैदल चलना, योग और शक्ति प्रशिक्षण जैसी गतिविधियाँ लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ावा दे सकती हैं।
• पर्याप्त आराम करें: रक्त निर्माण और समग्र स्वास्थ्य के लिए उचित नींद ज़रूरी है।

एसिडिटी ACIDITYएसिडिटी (Acidity) होने पर शरीर के अंदर क्या-क्या होता है, इसे आसान भाषा में समझिए*एसिडिटी होने पर शरीर मे...
03/12/2025

एसिडिटी ACIDITY

एसिडिटी (Acidity) होने पर शरीर के अंदर क्या-क्या होता है, इसे आसान भाषा में समझिए

*एसिडिटी होने पर शरीर में क्या होता है?*

1 पेट में एसिड ज़्यादा बनता है

पेट में HCl (Hydrochloric Acid) बनता है जो पाचन में जरूरी है।
लेकिन जब यह ज़रूरत से ज्यादा बन जाए, तो एसिडिटी होती है।

2 पेट की दीवार (Mucosa) में जलन

अधिक एसिड पेट की भीतरी परत को चिढ़ाता है, जिससे
जलन
दर्द
भारीपन
(इन सबका कारण यही होता है)

3 एसिड ऊपर की ओर लौटता है (Acid Reflux)

जब एसिड भोजन नली (esophagus) में ऊपर जाता है तो

छाती में जलन (Heartburn)
खट्टा पानी मुंह में आना
गले में जलन
होती है।

4 LES (Lower Esophageal Sphincter) कमजोर पड़ जाता है

LES एक वाल्व है जो पेट का एसिड ऊपर जाने से रोकता है।
एसिडिटी में यह ढीला हो जाता है, जिससे एसिड ऊपर जाता रहता है।

5 गैस और पेट फूलना

अधिक एसिड से खाना सही से नहीं पचता, जिससे पेट में गैस बनने लगती है।
पेट फूलना
डकारें आना
इन सबका कारण यही है।

6 सूजन (Inflammation) हो सकती है

लगातार एसिडिटी रहने से
Gastritis
Esophagitis
Ulcer
जैसी समस्या भी हो सकती है।

*♦️एसिडिटी के आम लक्षण♦️*

सीने में जलन
खट्टा-डकार
गला जलना
पेट भारी रहना
खाना पचने में दिक्कत
भूख कम लगना
सुबह कड़वाहट महसूस होना

*♦️ एसिडिटी क्यों होती है?♦️*

देर रात खाना
बहुत मसालेदार भोजन
खाना खाने के तुरंत बाद लेट जाना
अधिक कॉफी/चाय
खाली पेट रहना
तनाव
अधिक तेल वाली चीजें
धूम्रपान/शराब

*♦️जल्दी राहत कैसे मिले?♦️*

1 गिलास ठंडा दूध

1 चम्मच सौंफ

1 गिलास नारियल पानी

2–3 तुलसी के पत्ते

गुनगुना पानी

हल्का खाना।

*♦️आयुर्वेदिक फॉर्मूला ♦️*

काली मिर्च = 2 ग्राम पावडर

एक गिलास गुनगुना पानी में एक नींबू निचोड़ लें

इस काली मिर्च के पावडर को इस पानी से सुबह खाली पेट निगल लीजिए।।

15 दिन तक उपाय करना है मात्र।।

*♦️तुरंत राहत के लिए ♦️*

*दो ग्राम सौंफ पाउडर*

*एक ग्राम जीरा पाउडर*

मिसरी आधा चम्मच अलग से मिक्स कर सकते है।। जरूरी नहीं ना भी मिलाए तो चलेगा।।

ताजे पानी से इस पावडर का आधा चम्मच ले खाने के बाद।।

बवासीर जैसी कई समस्या लोगों के लिए बड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन इसका आयुर्वेदिक इलाज बिना किसी सर्जरी या ऑपरेशन के भी ...
23/11/2025

बवासीर जैसी कई समस्या लोगों के लिए बड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन इसका आयुर्वेदिक इलाज बिना किसी सर्जरी या ऑपरेशन के भी किया जा सकता है।

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*साइटिका पेन*सबसे आम समस्या जो लोगो में डॉक्टर्स को देखने को मिलती है वो है सियाटिकासाइटिका (sciatica) नाडी, जिसका उपरी ...
02/11/2025

*साइटिका पेन*

सबसे आम समस्या जो लोगो में डॉक्टर्स को देखने को मिलती है वो है सियाटिका

साइटिका (sciatica) नाडी, जिसका उपरी सिरा लगभग 1 इंच मोटा होता है, प्रत्येक नितंब के नीचे से शुरू होकर टाँग के पिछले भाग से गुजरती हुई पाँव की एडी पेर ख़त्म होती है| इस नाडी का नाम इंग्लीश में साइटिका नर्व है| इसी नाडी में जब सूजन ओर दर्द के कारण पीड़ा होती है तो इसे वात शूल अथवा साइटिका का दर्द कहते है...

इस रोग का आरंभ अचानक ओर तेज दर्द के साथ होता है| 30 से 40 साल की उम्र के लोगो में ये समस्या आम होती है |साइटिका का दर्द एक समय मे सिर्फ़ एक ही टाँग मे होता है| सर्दियों के दिनो में ये दर्द और भी बढ़ जाता है |रोगी को चलने मे कठिनाई होती है| रोगी जब सोता या बैठता है तो टाँग की पूरी नस खींच जाती है ओर बहुत तकलीफ़ होती है|

*♦️इसके कई कारण हो सकते है*

जैसे सर्दी लगने(कोल्ड स्ट्रोक), अधिक चलने से, मलावरोध (शोच न होना),स्त्रियॉं में गर्भ की अवस्था,या गर्भाशय का अर्बुद (Tumour),तथा मेरुदंड (spine) की विकृतियाँ, आदि से, किसी तंत्रिका या तंत्रिका मूलों (नर्व रूट) पर पड़ने वाले दबाव से उत्पन्न होता है। कभी-कभी यह नसों की सूजन (तंत्रिकाशोथ Neuritis) से भी होता है।

*♦️सियाटिका का इलाज..*

How to cure sciatica?

*♦️सामग्री..*

4 लहसुन की कलियाँ 200 ml दूध

*♦️तैयार करने की विधि ♦️*

लहसुन को काट कर दूध में डाल दें | दूध को कुछ मिनट तक उबालें | उबालने के बाद इसे मीठा करने के लिए थोडा शहद मिला लें | इस दूध का रोजाना सेवन करें जब तक दर्द खत्म न हो जाये.....

♦️♦️♦️♦️♦️

*साइटिका का दर्द गृध्रसी दर्द Sciatica*

साइटिका का दर्द, यह दर्द कूल्हे से एड़ी तक खींचता हुआ लगता है।

घी, मैदा लकड़ी, आमा हल्दी, मिश्री सब चीजें 10 ग्राम। ये पंसारी के मिलती है। इनको पीसकर दूध और पानी (दोनों चीजें ढाई सौ ग्राम) में उबालें। पानी जल जाने पर छानकर गरम-गरम पीए और कुछ ओढ़ कर लेट जाए। पसीना आने पर अंदर ही अंदर पोछतें रहे, हवा बिल्कुल ना लगने दे। यह उपाय दिन में तीन बार करें और खाए कुछ भी नहीं। 4 दिन में साइटिका में आराम आ जाएगा।

साइटिका का दर्द होने पर एरण्ड के बीज की 5 मिंगी, दूध में पीस कर पीने से लाभ होता है। यह उपाय कमर दर्द में भी उपयोगी है।

15 ग्राम और एक चम्मच नमक ले और दोनों को 1 किलो पानी में तेज उबाले। इसमें एक कपड़ा भिगोकर दर्द वाले स्थान पर सेक करें। इस प्रकार रोज दो बार करें। लगभग 15 दिन में साइटिका का दर्द ठीक हो जाएगा।

साइटिका के दर्द में एक चम्मच अदरक के रस में आधा चम्मच घी मिलाकर पीना चाहिए। यह उपाय वात और कमर व जाँघ के दर्द में भी लाभप्रद है।

*♦️त्रिकटु + त्रिफला मिश्रण ♦️*रोगों का सर्वनाशक अमृत योग आयुर्वेद में त्रिकटु (सौंठ, पिपली, मरीच) और त्रिफला (हरड़, बहे...
30/10/2025

*♦️त्रिकटु + त्रिफला मिश्रण ♦️*

रोगों का सर्वनाशक अमृत योग

आयुर्वेद में त्रिकटु (सौंठ, पिपली, मरीच) और त्रिफला (हरड़, बहेड़ा, आंवला) दोनों ही अत्यंत प्रसिद्ध औषधियाँ हैं।
जब इन्हें मिलाकर सेवन किया जाता है, तो यह शरीर के अंदर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है,

पाचन को मजबूत करता है, चर्बी गलाता है, और रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है।

इसी कारण इसे आयुर्वेद में “सर्वरोगनिवारक चूर्ण” कहा गया है।

*♦️संक्षिप्त परिचय♦️*

त्रिकटु = सौंठ + पिपली + काली मिर्च

त्रिफला = हरड़ + बहेड़ा + आंवला

दोनों का संयोजन शरीर के आम (toxins) को जलाता है और त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करता है।

*♦️ मुख्य लाभ ♦️*

1 पाचन और गैस की समस्या में अमृत समान

यह भोजन को जल्दी पचाता है, गैस, अपच, डकार और पेट दर्द को मिटाता है।

2 शरीर की चर्बी और मोटापा घटाता है

यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और अतिरिक्त चर्बी गलाने में मदद करता है।

3 रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है

आंवला और पिपली के संयोजन से शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

4 रक्त शुद्ध करता है और त्वचा को निखारता है

त्रिफला का रक्तशोधक गुण त्वचा की चमक और दाग-धब्बे दूर करता है।

5 कब्ज और एसिडिटी में लाभकारी

हरड़ और सौंठ मिलकर पेट को साफ रखते हैं और पित्त दोष को संतुलित करते हैं।

6 सर्दी-खांसी और कफ रोगों में उपयोगी

त्रिकटु कफ को गलाकर सांस की नलियों को साफ करता है।

7 लीवर और आँतों की सफाई करता है

यह यकृत (liver) को सक्रिय रखता है और शरीर में जमा विषैले पदार्थ बाहर निकालता है।

*♦️ बनाने की विधि ♦️*

*♦️सामग्री (Ingredients)♦️*

1 सौंठ (सूखी अदरक) – 50 ग्राम

2 काली मिर्च – 50 ग्राम

3 पिपली – 50 ग्राम

4 हरड़ – 50 ग्राम

5 बहेड़ा – 50 ग्राम

6 आंवला – 50 ग्राम

*♦️विधि (Preparation)♦️*

1 सभी औषधियों को अलग-अलग धोकर सुखा लें।

2 बारीक पीसकर बारीक छलनी से छान लें।

3 अब त्रिकटु चूर्ण (पहले तीन घटक) और त्रिफला चूर्ण (अगले तीन घटक) बराबर मात्रा में मिलाएँ।

4 इसे एयरटाइट शीशी में भरकर छायादार स्थान पर रखें।

*♦️ सेवन विधि ♦️*

मात्रा

1 चम्मच (लगभग 3–5 ग्राम)

समय

सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले

*♦️सहायक द्रव्य♦️*

गर्म पानी (पाचन या मोटापा के लिए)

शहद (खांसी, बलगम या इम्यूनिटी के लिए)

*♦️सावधानियाँ♦️*

अत्यधिक मात्रा में सेवन से जलन या पित्त बढ़ सकता है।

गर्भवती महिलाएँ और बहुत अधिक कमजोर लोग वैद्य की सलाह से ही लें।

गर्मी के मौसम में ठंडे प्रभाव वाले आहार (दूध, घी, फल) साथ में लें।

*♦️निष्कर्ष ♦️*

त्रिकटु + त्रिफला मिश्रण एक ऐसा संयोजन है जो शरीर को भीतर से शुद्ध कर देता है।
यह न केवल रोगों को दूर करता है, बल्कि शरीर को हल्का, ऊर्जावान और रोगमुक्त बनाए रखता है।
नियमित सेवन से आप पाएँगे

“पाचन ठीक, त्वचा साफ, मन प्रसन्न और शरीर मजबूत।”

*♦️हार्ट अटैक ♦️*रात का वक़्त... जब शरीर आराम चाहता है, मन शांति में डूबा होता है, तभी अचानक कुछ लोगों का दिल “अचानक रुक...
29/10/2025

*♦️हार्ट अटैक ♦️*

रात का वक़्त... जब शरीर आराम चाहता है, मन शांति में डूबा होता है, तभी अचानक कुछ लोगों का दिल “अचानक रुक” जाता है।

सवाल उठता है — हार्ट अटैक अक्सर रात या सुबह-सुबह ही क्यों आता है?

क्या यह सिर्फ़ तनाव का नतीजा है या हमारे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी (biological clock) से जुड़ा कोई गहरा रहस्य?

आइए जानते हैं वो सच्चे लेकिन कम जाने हुए तथ्य और घरेलू बचाव उपाय, जिनसे आप अपने हृदय की सुरक्षा कर सकते हैं।

*♦️रात में हार्ट अटैक क्यों होता है?♦️*

सर्केडियन रिद्म (Circadian Rhythm) का प्रभाव

हमारे शरीर की एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है जो दिन-रात के हिसाब से अंगों का काम नियंत्रित करती है।
रात 2 से 5 बजे के बीच रक्तचाप (Blood Pressure) और हृदय की धड़कनें सबसे धीमी होती हैं।

यदि हृदय पहले से कमजोर है, तो इस दौरान रक्त प्रवाह में हल्की कमी भी दिल पर दबाव डाल सकती है — परिणामस्वरूप अटैक।

*♦️कोलेस्ट्रॉल और प्लेटलेट्स की भूमिका♦️*

सुबह-सुबह शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे रक्त गाढ़ा हो जाता है और प्लेटलेट्स चिपकने लगते हैं।

इससे ब्लड क्लॉट (थक्का) बनने का खतरा बढ़ता है

जो अचानक हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।

*♦️नींद के दौरान श्वास रुकना♦️ (Sleep Apnea)*

कई लोग खर्राटे लेते हुए थोड़ी देर के लिए सांस लेना बंद कर देते हैं।

इस दौरान ऑक्सीजन की कमी से दिल को झटका (cardiac stress) लगता है — जो रात के अटैक को जन्म देता है।

*♦️रात में भोजन की आदतें♦️*

भारी, तला या मसालेदार खाना खाने के बाद तुरंत लेटने से एसिड रिफ्लक्स और गैस हृदय क्षेत्र में दबाव डालती है।
कई बार यही दबाव माइल्ड कार्डियक अरेस्ट जैसा महसूस होता है।

*♦️तनाव और चिंता का जमा असर♦️*

दिन भर का मानसिक तनाव रात में शरीर को पूरी तरह नहीं छोड़ता।

तनावग्रस्त लोग अक्सर रात में उच्च रक्तचाप और अनियमित धड़कनों के शिकार होते हैं।

*हार्ट अटैक के संकेत जो रात में नज़रअंदाज न करें*

♦️सीने में भारीपन या जलन

♦️बाईं बांह, गर्दन या जबड़े में दर्द

♦️ठंडा पसीना

♦️अचानक सांस फूलना

♦️बेचैनी, घबराहट, हल्का सिर चकराना

अगर ये लक्षण आधे घंटे से ज़्यादा रहें — तुरंत चिकित्सा लें।

रात में हृदय को सुरक्षित रखने के आयुर्वेदिक उपाय

*♦️त्रिफला या गुनगुना पानी♦️*

रात को सोने से पहले गुनगुना पानी पीने से पाचन सुधरता है और हृदय पर दबाव घटता है।

*♦️अर्जुन की छाल♦️ (Terminalia arjuna)*

हृदय के लिए सबसे प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि।

1 चम्मच अर्जुन छाल का काढ़ा या चूर्ण दूध में उबालकर रोज़ पिएँ।

यह हृदय की मांसपेशियों को मज़बूत करता है और ब्लड फ्लो संतुलित रखता है।

*♦️लहसुन (Garlic)♦️*

रात में सोने से पहले 1 कच्ची लहसुन की कली पानी के साथ खाएँ।

कोलेस्ट्रॉल कम करता है और धमनियों को साफ रखता है।

*♦️तुलसी और शहद♦️*

5 तुलसी पत्ते और 1 चम्मच शहद रोज़ सुबह लें।

यह रक्त में ऑक्सीजन स्तर सुधारता है और हृदय की थकान घटाता है।

*♦️ध्यान और श्वास अभ्यास♦️*

रात में 10 मिनट

“अनुलोम-विलोम” या “भ्रामरी” करने से हृदय गति स्थिर रहती है।

मानसिक शांति और नींद दोनों में सुधार होता है।

त्वरित राहत के घरेलू नुस्खे (Emergency Support):

अचानक सीने में भारीपन हो तो गुनगुना पानी या 1 चुटकी अजवाइन और काला नमक लें।

यदि घबराहट हो गहरी साँसें लें, शरीर को सीधा रखें और तुरंत किसी को सूचना दें।

अगर BP लो लगे शहद और नींबू पानी मदद कर सकता है (अस्थायी राहत)।

(ये उपाय प्राथमिक राहत हैं — चिकित्सा सहायता ज़रूरी है।)

*❤️ हृदय को स्वस्थ रखने के रोज़मर्रा नियम*

रात को हल्का और जल्दी भोजन करें।

रोज़ाना 30 मिनट की सैर या योग करें।

धूम्रपान, शराब और अत्यधिक नमक से दूरी रखें।

पर्याप्त नींद और तनाव-मुक्त जीवन हृदय के लिए सर्वोत्तम औषधि है।

*♦️ निष्कर्ष♦️*

रात में हार्ट अटैक आना शरीर की कमजोरी नहीं, बल्कि जीवनशैली की चेतावनी है।
यदि आप अपने दिल की सुनेंगे, तो यह जीवनभर धड़कता रहेगा प्यार और ऊर्जा के साथ।

*मानव शरीर का हर अंग अपने आप में एक रहस्य और महत्व समेटे हुए है। इन्हीं में से एक है मूत्राशय (Urinary Bladder)*, जो हमा...
28/10/2025

*मानव शरीर का हर अंग अपने आप में एक रहस्य और महत्व समेटे हुए है। इन्हीं में से एक है मूत्राशय (Urinary Bladder)*, जो हमारे शरीर की शुद्धि और संतुलन में बेहद अहम भूमिका निभाता है। आयुर्वेद में मूत्राशय को "मूत्राशय धातु" का हिस्सा माना गया है, जो त्रिदोष संतुलन बनाए रखने और शरीर को विषाक्त पदार्थों से मुक्त रखने का प्रमुख केंद्र है।

आइए विस्तार से जानते हैं मूत्राशय से जुड़े अद्भुत तथ्य, इसके रोग और घरेलू उपाय।

*मूत्राशय के रोचक तथ्य*

मूत्राशय पेट के निचले हिस्से (Pelvic Cavity) में स्थित होता है और यह गुर्दों द्वारा बनाए गए मूत्र को अस्थायी रूप से संग्रहित करता है।

इसका आकार नाशपाती जैसा होता है और यह 400–600 ml तक मूत्र संग्रहित कर सकता है।

मूत्राशय की दीवारें मांसपेशियों से बनी होती हैं, जो मूत्र त्याग के समय सिकुड़कर मूत्र को बाहर निकालती हैं।

स्वस्थ मूत्राशय 6–8 घंटे तक मूत्र रोक सकता है।

महिलाओं का मूत्राशय पुरुषों की तुलना में छोटा होता है, इसलिए उन्हें बार-बार पेशाब लग सकती है।

*मूत्राशय से जुड़ी प्रमुख बीमारियाँ*

सिस्टाइटिस (Cystitis)

मूत्राशय की परत में सूजन, अक्सर बैक्टीरियल संक्रमण के कारण।

लक्षण – बार-बार पेशाब आना, जलन, हल्का दर्द।

ब्लैडर स्टोन (Bladder Stone) – मूत्र में मौजूद मिनरल्स के क्रिस्टल बनकर पत्थरी हो जाना।

*लक्षण* – पेट दर्द, बार-बार पेशाब, मूत्र में खून।

ओवरएक्टिव ब्लैडर
(Overactive Bladder)

बार-बार और अचानक पेशाब लगना, नींद में भी व्यवधान।

मूत्राशय कैंसर (Bladder Cancer)

दुर्लभ लेकिन गंभीर रोग, जिसमें मूत्र में खून आ सकता है।

यूटीआई (Urinary Tract Infection)

यह महिलाओं में अधिक होता है और मूत्राशय तक फैलकर दर्द व जलन का कारण बनता है।

*घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय*

*धनिया पानी*

एक चम्मच धनिया को पानी में उबालकर पीने से मूत्र संक्रमण और जलन में राहत मिलती है।

*गोक्षुरा (Tribulus terrestris)*

आयुर्वेद में मूत्रविकारों की सर्वश्रेष्ठ औषधि मानी जाती है। यह मूत्र साफ करती है और संक्रमण कम करती है।

*क्रैनबेरी जूस*

प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुणों वाला, यह यूटीआई में बेहद फायदेमंद है।

*गुनगुना पानी*

दिनभर पर्याप्त गुनगुना पानी पीना मूत्राशय को डिटॉक्स करता है।

*हल्दी दूध*

हल्दी के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मूत्राशय की सूजन को कम करते हैं।

*आंवला रस*

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और संक्रमण से बचाता है।

*नारियल पानी*

मूत्र को क्षारीय बनाता है और पेशाब की जलन को तुरंत कम करता है।

*पलाश के फूल*

आयुर्वेद में पलाश के फूल का काढ़ा मूत्र रोगों के लिए कारगर बताया गया है।

*अदरक और शहद*

अदरक का रस शहद के साथ लेने से मूत्राशय की सूजन और दर्द में राहत मिलती है।

*जीवनशैली*

मसालेदार और तैलीय भोजन से बचें, स्वच्छता का ध्यान रखें और मूत्र को लंबे समय तक न रोकें।

*आयुर्वेदिक महत्व*

आयुर्वेद के अनुसार मूत्राशय अपान वायु का नियंत्रण केंद्र है। यदि अपान वायु असंतुलित होता है तो पेशाब में रुकावट, जलन, बार-बार पेशाब आना और पत्थरी जैसी समस्याएँ होती हैं। गोक्षुरादि गुग्गुलु, वरणादि क्वाथ और पुनर्नवा चूर्ण जैसे आयुर्वेदिक संयोजन मूत्राशय को स्वस्थ रखने में उपयोगी माने जाते हैं।

*निष्कर्ष*

मूत्राशय भले ही शरीर का एक छोटा हिस्सा है, लेकिन यह हमारी सेहत और संतुलन बनाए रखने में अत्यंत अहम भूमिका निभाता है। सही जीवनशैली, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ और घरेलू उपाय अपनाकर हम मूत्राशय की बीमारियों से बच सकते हैं और इसे जीवनभर स्वस्थ रख सकते हैं।

♦️लीवर LIVER ♦लिवर (जिगर) को खराब होने से कैसे बचाएँआप लोगे के लिए 10 जरूरी बातेंहम सब अपने दिल (Heart) की बहुत चिंता कर...
27/10/2025

♦️लीवर LIVER ♦

लिवर (जिगर) को खराब होने से कैसे बचाएँ

आप लोगे के लिए 10 जरूरी बातें

हम सब अपने दिल (Heart) की बहुत चिंता करते हैं, लेकिन शरीर का एक और बहुत ज़रूरी अंग है - हमारा 'लिवर' (जिगर या कलेजा)।

लिवर, हमारे शरीर का 'फ़िल्टर' या 'फैक्ट्री' है। यह खून को साफ़ करता है, खाने को पचाने में मदद करता है, शरीर से ज़हरीली चीजों को बाहर निकालता है और ताकत जमा करके रखता है।

पहले लिवर की बीमारी (जैसे फैटी लिवर, पीलिया) को सिर्फ बहुत ज़्यादा शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता था। लेकिन आजकल गलत खान-पान, तेल-मसाले और बढ़ते वज़न के कारण यह समस्या हमारे गाँवों में भी आम हो गई है।

अगर हमारा 'फ़िल्टर' ही जाम हो जाएगा, तो शरीर की पूरी मशीनरी ठप पड़ सकती है। अच्छी बात यह है कि हम अपनी आदतों में कुछ साधारण बदलाव करके अपने लिवर को तगड़ा रख सकते हैं।

यहाँ 10 ज़रूरी बातें दी गई हैं, जिन पर अमल करके लिवर खराब होने के ख़तरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है

*♦️ शराब (दारू)♦️*

लिवर की सबसे बड़ी दुश्मन
लिवर के लिए शराब ज़हर के समान है। यह सीधे लिवर की कोशिकाओं (Cells) को मारती है, जिससे लिवर पहले सूज (फैटी लिवर) जाता है और फिर सिकुड़ने (सिरोसिस) लगता है। चाहे देसी हो या अंग्रेजी, अगर लिवर को बचाना है, तो शराब से पूरी तरह तौबा कर लें।

*♦️चिकनाई और तेल-घी का इस्तेमाल कम करें♦️*

हम जो भी ज़्यादा तला-भुना (पूरी, कचौड़ी, समोसा, परांठा) खाते हैं, उसकी फालतू चरबी (Fat) लिवर पर जमा होने लगती है। इसे ही 'फैटी लिवर' कहते हैं। यह लिवर की ख़राबी की पहली सीढ़ी है। खाने में तेल-घी का प्रयोग कम से कम करें।

*♦️मीठे (चीनी) से भी परहेज़ करें♦️*

सिर्फ तेल ही नहीं, ज़रूरत से ज़्यादा चीनी भी लिवर को नुकसान पहुँचाती है। ज़्यादा मीठी चाय, कोल्ड ड्रिंक, बाज़ार की मिठाई और पैकेट वाले जूस, लिवर में जाकर चरबी में बदल जाते हैं।

*♦️घर का सादा भोजन और साफ़-सफाई रखें♦️*

घर का बना ताज़ा खाना (दाल, रोटी, हरी सब्ज़ियाँ, छाछ, दही) लिवर के लिए सबसे अच्छा है। हमेशा साफ़ और ढका हुआ खाना खाएं और पीने के लिए साफ़ पानी (जैसे हैंडपंप या फ़िल्टर) का इस्तेमाल करें। गंदे खाने और गंदे पानी से 'पीलिया' (Hepatitis) होने का ख़तरा रहता है।

*♦️वज़न को काबू में रखें♦️*

मोटापा सिर्फ दिल के लिए ही नहीं, लिवर के लिए भी ख़तरनाक है। शरीर पर चढ़ी फालतू चरबी लिवर पर भी दबाव डालती है।

*♦️शरीर को चलाते रहें (मेहनत करें)♦️*

अगर आपका काम ज़्यादा बैठने का है, तो भी रोज़ 30-40 मिनट तेज़ पैदल ज़रूर चलें। जो लोग खेत-मज़दूरी या शारीरिक मेहनत करते हैं, उनका लिवर मज़बूत रहता है। कसरत करने से लिवर पर जमा फैट कम होता है।

*♦️अंधाधुंध दवाइयाँ न खाएं♦️*

यह बहुत ज़रूरी बात है। कई लोग हर छोटे-मोटे दर्द के लिए तुरंत गोली (Painkiller) खा लेते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के खाई गई दवाइयाँ और एंटीबायोटिक सीधे लिवर पर हमला करती हैं।

*♦️'शुगर' (Diabetes) को हल्के में न लें♦*

जिन लोगों को शुगर की बीमारी है, उन्हें 'फैटी लिवर' होने का ख़तरा कई गुना ज़्यादा होता है। अपनी शुगर को हमेशा काबू में रखें और डॉक्टर की सलाह मानते रहें।

*एक सुई (Needle) का दोबारा इस्तेमाल न करें*

गंभीर पीलिया (Hepatitis B और C) एक ही सुई को कई लोगों पर इस्तेमाल करने, या गंदे औज़ारों से टैटू बनवाने से फैलता है। हमेशा नई (Disposal) सुई का ही इस्तेमाल करें।

'पीलिया' या पेट दर्द को नज़रअंदाज़ न करें
लिवर की बीमारी के कुछ लक्षण हैं, जिन्हें लोग 'गैस' या 'कमजोरी' समझकर टाल देते हैं:

*♦️लक्षण♦️*

अगर आँखें या नाखून पीले पड़ें (पीलिया), भूख लगनी बंद हो जाए, पेट के ऊपरी हिस्से (दाईं तरफ) में लगातार दर्द रहे, या पेट फूलने लगे (पानी भरे)।

ऐसे में झाड़-फूँक या घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद न करें। तुरंत नज़दीकी सरकारी अस्पताल जाकर डॉक्टर को दिखाएँ।

हमारा लिवर शरीर का सबसे मेहनती अंग है। इन आसान बातों को अपनी आदत में शामिल करके आप अपने 'शरीर के फ़िल्टर' को लंबे समय तक सेहतमंद रख सकते हैं।

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Lucknow
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