15/11/2025
'Walking Saint' के नाम से पहचाने जाने वाले विनोबा भावे ने अकेले ही 1.5 मिलियन एकड़ से ज़्यादा कृषि योग्य भूमि हासिल कर, गरीबों में बांट दी थी ।
उन्होंने बाद में लिखा था, "मैंने शांतिपूर्वक ज़मीन की मांग रखी, जैसा कि एक बेटा अपने पिता के साथ करता है।"
आंदोलन में उनका बहुत बड़ा योगदान था, लेकिन यह बात कम ही लोग जानते हैं कि उन्होंने चंबल के 17 खूंखार डकैतों को हिंसा छोड़ने के लिए राज़ी किया था।
उन्होंने वहां कहा था- "यह वह ज़मीन है जिसपर बहादुर डकैतों का जन्म हुआ है। उनको बाक़ी लोगों की तरह नहीं देखा जाता क्योंकि बस उनके तरीक़े अलग हैं। मुझे लगता है कि ये दिल्ली में बैठे डाकुओं से तो बेहतर हैं।"
शहरी लोगों ने अपने दिल और दिमाग को कठोर बना लिया है, वे सिर्फ़ अपने स्वार्थ के बारे में ही सोचते हैं, और वे कभी नहीं बदल सकते। लेकिन ये लोग खुद को बदल सकते हैं।
मैं चाहता हूं कि वे मेरी बातों को समझकर आत्मसमर्पण करें। समाधान समर्पण में है, हिंसा में नहीं। केवल अहिंसा ही डकैती की समस्या को समाज से ख़त्म कर सकती है।"
1958 में विनोबा भावे को 'भारत में एक नई तरह की सामाजिक क्रांति के प्रचार' के लिए पहले रेमन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
1983 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, Ratna से नवाज़ा गया।
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