18/03/2026
जंग का शौक है, तो अपने बेटों को बॉर्डर पर भेजो! स्पेनिश सांसद आइरीन मोंटेरो ने डोनाल्ड ट्रंप को सरेआम ललकारा; AC कमरों में बैठकर दूसरों की औलादों का सौदा करना आसान है, जिस दिन खुद के बच्चे फ्रंट लाइन पर होंगे, उस दिन ये दुनिया जंग भूल जाएगी।
AC कमरों में बैठकर 'युद्ध' का फैसला करना दुनिया का सबसे आसान काम है, क्योंकि वहां जान किसी और के बेटे की जाती है।
यूरोपीय संसद में स्पेनिश सांसद आइरीन मोंटेरो ने जो आग उगली है, वह आज हर उस आम इंसान की चीख है जो शांति चाहता है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर उन्होंने सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घेरे में लेते हुए कहा कि अगर ट्रंप को जंग का इतना ही शौक है, तो वे खुद मैदान में उतरें और अपने बेटों को फ्रंट लाइन पर भेजें। यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि उन हुक्मरानों के मुँह पर करारा तमाचा है जो नक्शे पर लकीरें खींचने के लिए मासूमों के खून की परवाह नहीं करते।
हकीकत तो ये है कि इतिहास में जितने भी युद्ध हुए हैं, उनमें मरने वाले अक्सर गरीब के बेटे ही होते हैं। सत्ता के नशे में चूर लोग जब 'राष्ट्रहित' का नारा देते हैं, तो वह हित अक्सर उनकी तिजोरियों तक सीमित होता है। आइरीन की यह ललकार हमें याद दिलाती है कि जिस दिन दुनिया के हर नेता की औलाद सीमा पर बंदूक थामकर खड़ी होगी, उस दिन दुनिया के सारे विवाद बातचीत की मेज़ पर सुलझ जाएंगे। दूसरों के बच्चों को मौत के मुँह में धकेलना मर्दानगी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी कायरता है।
सच्ची बात तो यही है कि जो हाथ जंग की फाइल पर दस्तखत करते हैं, उनके खुद के हाथ कभी खून से नहीं सनते। अगर हर लीडर को अपने घर से एक सिपाही देना पड़े, तो ये धरती शायद हमेशा के लिए बारूद के ढेर से आज़ाद हो जाए।
"क्या आप भी आइरीन मोंटेरो की इस बात से सहमत हैं कि युद्ध का फैसला करने वालों को सबसे पहले अपने बच्चों को मैदान में भेजना चाहिए? अपनी राय कमेंट्स में पूरी बेबाकी से लिखें।"