OSHO Meditation by jochhinda

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01/05/2026

#ओशो

01/05/2026
*विज्ञान भैरव तंत्र*पार्वती जी का शिवजी से सवाल*हे भोलेनाथ आपका स्वरूप क्या है और मुक्ति का मार्ग क्या है* शिवजी:- वर्तम...
02/04/2026

*विज्ञान भैरव तंत्र*
पार्वती जी का शिवजी से सवाल
*हे भोलेनाथ आपका स्वरूप क्या है और मुक्ति का मार्ग क्या है*
शिवजी:- वर्तमान में जीना ही मुक्ति के मार्ग की शुरुआत है
*पार्वती जी:- वर्तमान क्या है*
शिवजी:- शान्त स्थान पर बैठ कर अंदर आते और बाहर जाते स्वांस पर ध्यान केंद्रित करें और जब स्वांस अन्दर आने और बाहर निकलने के बीच में जो अंतराल है वो ही वर्तमान है! स्वांस बाहर निकलने और स्वांस ग्रहण करने से पहले जो ठहराव है वो भी वर्तमान है। अपने स्वांस पर ध्यान केंद्रित करना ही मुक्ति के मार्ग की शुरुआत है

*काम क्रोध लोभ मोह अहंकार* मेरी नाव में बहुत सारे छेद है और में निरंतर डूबने के करीब पहुंच रहा हूं मैं अपने काम पर काबू ...
26/03/2026

*काम क्रोध लोभ मोह अहंकार* मेरी नाव में बहुत सारे छेद है और में निरंतर डूबने के करीब पहुंच रहा हूं
मैं अपने काम पर काबू पाने की कोशिश करता हूं तो क्रोध सक्रिय हो जाता है अगर किसी तरीके से जैसे तैसे दोनों को दबा लेता हूं तो मेरा प्रबल अहंकार मुझे दबा लेता है और और मेरा परिवारिक मोह मुझे लोभी बनने की निरंतर प्रेरणा देता है और मेरी बेबसी है की मैं अपने दोनों हाथों से उन छेदों को बंद करने में व्यस्त हूं और मँझधार में फंसा हूं मुझे नहीं लगता कि मैं ऐसे ता उम्र कभी किनारे पर पहुंच पाऊंगा। *JOCHHINDA*

24/03/2026

*जंग waar युद्ध*
जब पहाड़ों से झरना निकलता है तब उसका जल बहुत निर्मल और पवित्र होता हैं और जैसे ही ज़मीन पर गिरता है उसमें धूल मिट्टी मिलती है और फिर उसमें इंसान की फलाई गई गन्दगी मिल जाती है और फिर जैसे जैसे धरातल पर झरने का पानी आगे बढ़ता है वो और ज्यादा गंदा होता जाता हैं और फिर आख़िर में वो खारे समुद्र में लीन होकर खारा हो जाता हैं फिर वो किसी की प्यास भी नहीं बुझा सकता। बिल्कुल ऐसे ही जब बच्चा पैदा होता है तब वो बहुत कोमल और निरबैर होता हैं या यूं कहे कि वो भगवान का रूप होता है जैसे जैसे वो बड़ा होता है अर्थात उसे इंसानी शिक्षा मिलती है वैसे वैसे उसमें घमंड उत्पन्न होने लग जाता हैं जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वैसे ही घमंड भी अपना प्रबल रूप धारण करता जाता है। शरीर चाहे उसका बुढ़ा हो जाता है लेकिन अपनी अहंकार की तृप्ति के लिए वो हर जगह अपनी सल्तनत कायम करने की कोशिश करने लग जाता हैं। बस ऐसे ही विश्व भर के चन्द अहंकारी बूढों की वजह से दुनिया के अहंकारी फ्रस्टेड बुढ़े शांति से अपना जीवन जी रहे लोगों पर आग बरसा बरसा कर उन्हें मार रहें हैं अरे अहंकार के गुलामों कभी 5 मिनट के लिए कभी अपना अहंकार एक कोने में रखकर सोचो तुम खुद तो सुरक्षित बैठे हो पर अपने अहंकार की संतुष्टि के लिए जिन्हें तुम मार रहे उनका गुनाह क्या है??? *JOCHHINDA*

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