20/05/2025
कर्जा ऋण योग के मुख्य कारण:
1. छठा भाव (ऋण भाव) से संबंधित योग:
छठा भाव ऋण, रोग और शत्रु का कारक होता है। यदि यह भाव पीड़ित हो या इसके स्वामी पर पाप ग्रहों (शनि, राहु, केतु, मंगल) का प्रभाव हो, तो व्यक्ति को कर्ज़ लेने की नौबत आती है।
छठे भाव में राहु, शनि या मंगल का स्थित होना कर्ज़ के कारण संघर्ष और परेशानी देता है।
2. छठे भाव का स्वामी:
यदि छठे भाव का स्वामी अष्टम या द्वादश भाव में हो, तो भी यह ऋण, हानि और मानसिक तनाव देता है।
3. राहु-शनि का प्रभाव:
राहु या शनि का लग्न, चंद्र या भाग्य स्थान पर प्रभाव भी व्यक्ति को कर्ज़ के जाल में फँसाने का संकेत देता है।
4. बृहस्पति की दुर्बलता:
बृहस्पति वित्त, सद्बुद्धि और सलाह का कारक है। यदि यह नीच का हो या पाप ग्रहों से ग्रसित हो, तो व्यक्ति गलत निर्णय लेकर कर्ज़ ले सकता है।
5. दशा-अंतर्दशा का प्रभाव:
यदि किसी व्यक्ति की दशा में ऋणभाव के स्वामी या राहु-शनि की दशा चल रही हो, और उनकी स्थिति कुंडली में पीड़ित हो, तो उस समय कर्ज़ लेने या बढ़ने की संभावना होती है।
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