Bharat Clinic ludhiana

Bharat Clinic ludhiana ( D.K Sharma)
B. A. M.

S🥇(GOLD MEDALIST)(Punjab)☎️7837100155
Ayurveda(since1965)gobindgarh near sahnewal, 2nd Branch samrala chowk Ludhiana(मर्म थैरेपी फ्री हर शनिवार)joint pain, pcod, चमड़ी रोग, लिकोरिया, गांठे, स्पर्म, sugar, infertility,फैटी लीवर आदि।

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31/12/2025

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07/12/2025

Bharat Clinic ludhiana

09/08/2025

Piliya(jaundice)

06/08/2025

आयुर्वेद में डायग्नोसिस (निदान) का तरीका आधुनिक चिकित्सा पद्धति से काफी अलग होता है। इसमें रोगी की सम्पूर्ण प्रकृति, जीव...
12/07/2025

आयुर्वेद में डायग्नोसिस (निदान) का तरीका आधुनिक चिकित्सा पद्धति से काफी अलग होता है। इसमें रोगी की सम्पूर्ण प्रकृति, जीवनशैली, मानसिक स्थिति, शरीर की बनावट और दोषों (वात, पित्त, कफ) के संतुलन या असंतुलन का अध्ययन करके निदान किया जाता है।

आयुर्वेद में निदान (Diagnosis) की प्रमुख विधियाँ:
1. त्रिविध परिक्षा (Trividha Pariksha) – तीन मुख्य परीक्षण:
दर्शन (Observation) – रोगी के शरीर को देखने से प्राप्त जानकारी जैसे रंग, चाल, त्वचा की स्थिति, आँखें आदि।

स्पर्शन (Palpation/Touch) – नाड़ी परीक्षण (Pulse Diagnosis), स्पर्श से गर्मी/ठंडक, दर्द का प्रकार इत्यादि।

प्रश्न (Interrogation) – रोगी से प्रश्न पूछकर जानकारी लेना, जैसे भूख, नींद, प्यास, मल-मूत्र की स्थिति, मानसिक स्थिति आदि।

2. अष्टविध परिक्षा (Ashtavidha Pariksha) – आठ प्रकार की जाँच:
नाड़ी परिक्षा (Pulse diagnosis)

मूत्र परिक्षा (Urine examination)

मल परिक्षा (Stool examination)

जिव्हा परिक्षा (Tongue examination)

शब्द परिक्षा (Voice/speech and breath sound)

स्पर्श परिक्षा (Touch – temperature, skin)

दृष्टि परिक्षा (Eyes and general appearance)

आकार परिक्षा (Body structure and behavior)

निदान बनाने के मुख्य चरण:
रोगी की प्रकृति का निर्धारण (Prakriti Pariksha)
– व्यक्ति की जन्मजात प्रकृति (वातज, पित्तज, कफज) जानना।

विकृति का विश्लेषण (Vikriti Pariksha)
– वर्तमान में कौन-से दोष असंतुलन में हैं, यह जानना।

सम्प्राप्ति (Pathogenesis)
– रोग कैसे उत्पन्न हुआ, कौन-कौन से दोष और धातुएँ प्रभावित हुईं।

रोग का नाम और प्रकार तय करना
– जैसे आमवात, अर्श, पाण्डु, श्वास रोग आदि।

रोग की स्थिति (Staging of Disease)
– रोग प्रारंभिक है, मध्यम है या गंभीर अवस्था में है।

उदाहरण के लिए निदान कैसे बनाएँ:
मान लीजिए रोगी को जोड़ों में दर्द है:

दर्शन: रोगी धीरे चलता है, सूजन है, त्वचा ठंडी है।

स्पर्शन: जोड़ स्पर्श करने पर दर्द करता है।

प्रश्न: दर्द सुबह ज्यादा होता है, भूख कम है, मल ठीक से नहीं आता।

➤ इससे यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह आमवात (Ama + Vata) हो सकता है।

मधुमेह (Diabetes)             जानकारी:-मधुमेह (डायबिटीज) रोग से पीड़ित रोगी के पेशाब के साथ् चीनी जैसा पदार्थ निकलने लगता...
12/07/2025

मधुमेह (Diabetes)
जानकारी:-
मधुमेह (डायबिटीज) रोग से पीड़ित रोगी के पेशाब के साथ् चीनी जैसा पदार्थ निकलने लगता है तथा रोगी के खून में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। यह रोग धीरे-धीरे होता है तथा इस रोग के लक्षण कई वर्षों में रोगी को पता चलते हैं। इस रोग को प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा ठीक किया जा सकता है।
मधुमेह रोग के लक्षण-

मधुमेह (डायबिटीज) रोग से पीड़ित रोगी के पेशाब तथा खून में अधिक शर्करा हो जाती है।
रोगी व्यक्ति का पेशाब गाढ़ा तथा चिपचिपा आता है और उसे पेशाब बार-बार आने लगता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी के पेशाब में चींटी लग जाती है।
मधुमेह रोग से पीड़ित रोगी को बहुत अधिक भूख तथा प्यास लगने लगती है।
रोगी व्यक्ति की त्वचा खुश्क हो जाती है, उसे बहुत अधिक थकान महसूस होने लगती है और उसका शरीर आलस्य भरा हो जाता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी के शरीर में खुजली होने लगती है, रोगी चिडचिड़ा हो जाता है तथा उसके सिर में दर्द होने लगता है।
मधुमेह रोग से पीड़ित रोगी को कई प्रकार के अन्य रोग होने की संभावनाएं होती है जैसे- उच्च रक्तचाप (हाई ब्लडप्रेशर), आंखों की रोशनी कम होना, हृदय रोग, गुर्दे के कई प्रकार के रोग तथा लकवा रोग आदि। इसलिए इस रोग से पीड़ित रोगी को रोग होने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए बल्कि जल्द से जल्द इस रोग का उपचार कराना चाहिए।

मधुमेह रोग होने का कारण-

मानसिक तनाव अधिक होने तथा शारीरिक क्रिया कम करने के कारण मधुमेह (डायबिटीज) का रोग हो सकता है।
मीठे तथा चिकने पदार्थों का अधिक सेवन करने के कारण मधुमेह रोग हो सकता है।
मधुमेह रोग आनुवांशिक कारणों से भी हो सकता है जैसे- माता-पिता को मधुमेह रोग है तो उनके बच्चों को भी यह रोग हो सकता है।
यह रोग अपच, कब्ज, अधिक उत्तेजना तथा अधिक चिंता करने के कारण भी हो सकता है।
शराब तथा धूम्रपान करने और अधिक औषधियों का सेवन करने के कारण भी यह रोग हो सकता है।

मधुमेह का प्राकृतिक उपचार-

आधुनिक चिकित्सक मधुमेह के इलाज के लिए इन्सुलिन का प्रयोग करते हैं जबकि इन्सुलिन मधुमेह को जड़ से खत्म नहीं कर पाती है बल्कि उसे बढ़ने से रोक देती है। ऐसी स्थिति में मधुमेह रोग के दुबारा होने की आशंका बनी रहती है।
मधुमेह रोग से बचने के लिए प्राकृतिक आहार का अधिक सेवन करना चाहिए जो इस प्रकार हैं- संतरा, सेब, नाशपाती, पपीता, तरबूज, खरबूजा, अमरूद, मौसमी, गाजर, मूली, खीरा, शलजम, ककड़ी, पालक, पोदीना, मेथी, धनिया, पत्तागोभी, फलियां, शिमला मिर्च आदि।
मधुमेह रोग को ठीक करने के फलों का रस, सब्जियों का रस, नारियल पानी तथा नींबू के रस को पानी में मिलाकर प्रतिदिन पीना चाहिए।
रोजाना ताजे आंवले के रस या सूखे आंवले के चूर्ण में हल्दी का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।
मधुमेह रोग को ठीक करने के लिए जामुन का अधिक सेवन करना चाहिए या फिर जामुन की गुठली को सूखाकर चूर्ण बनाकर आधा चम्मच की मात्रा में पानी के साथ सुबह तथा शाम सेवन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
15 मिलीलीटर करेले के रस को 100 मिलीलीटर पानी में मिलाकर प्रतिदिन 3 बार लगभग 3 महीने तक पीने से मधुमेह रोग ठीक हो जाता है।
प्रतिदिन 1 चम्मच भीगे हुए मेथी के दाने खाने से कुछ महीने में ही यह रोग ठीक हो जाता है। मेथी दाना को पानी में डालकर उसका काढ़ा बनाकर पीने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
मेथी दाने का चूर्ण बनाकर पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी को दूध का सेवन बहुत ही कम करना चाहिए बल्कि इसके स्थान पर छाछ का अधिक सेवन करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।
300 ग्राम भिंडी की 2 फांक करके रात के समय में पानी में फूलने के लिए रख दें तथा सुबह के समय में इसको पानी से निकालकर इस पानी को पी लें तथा भिंडी को फेंक दें। यह क्रिया 1 सप्ताह तक करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
प्रतिदिन सुबह के समय में कम से कम 10 बेल की पत्ती या सदाबहार की पत्ती या जामुन की पत्ती या नीम की पत्ती खाने से यह रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।
तुलसी की पत्ती प्रतिदिन सुबह के समय सेवन करने से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है और यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
प्रतिदिन सुबह के समय में 2 अंजीर खाकर इसके ऊपर से 2 गिलास पानी पीने से यह रोग ठीक हो जाता है।
गेहूं तथा जौ 50 ग्राम, मूंग, बाजरा, फाफर (कुट्टू), चना 20 ग्राम, सोयाबीन तथा मक्का 10 ग्राम इन सब को मिलाकर, इसे पीसकर इसकी रोटी बनाकर प्रतिदिन कुछ दिनों तक खाने से यह रोग ठीक हो जाता है।
मधुमेह रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सुबह के समय में खुले बदन धूप में अपने शरीर की सिंकाई करनी चाहिए तथा नांरगी बोतल में सूर्यतप्त से बनाये गय जल को भोजन करने के थोड़ी देर बाद लेने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन अपने पेट पर मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए तथा इसके बाद एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए और फिर कटिस्नान तथा मेहनस्नान करना चाहिए।
इस रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सुबह के समय में सैर के लिए जाना चाहिए और खुली हवा मे सांस लेनी चाहिए।

11/07/2025

08/07/2025

#ਕਬਜ

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Ludhiana
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