Jai Maa Kali astrologer

Jai Maa Kali  astrologer MAA KI KIRPA
(1)

if you have any type of problem realted to your life or Black magic u can send me your birth-date-time-place.and pic OR you can also contact me MAY BE I CAN HELP YOU BY GRACE OF GOD jai mata di 7508866666

02/03/2026

क्रिस्टल ब्रेसलेट का सही उपयोग - और उनके प्रभाव (Perfect Use & Effects)
आजकल क्रिस्टल ब्रेसलेट केवल फैशन एक्सेसरी नहीं रहे, बल्कि बहुत लोग इन्हें ऊर्जा संतुलन और मानसिक शांति के लिए भी धारण करते हैं। नीचे जानिए इन्हें सही तरीके से पहनने और उनके संभावित प्रभावों के बारे में एक व्यवस्थित जानकारी।
🔮 1. क्रिस्टल ब्रेसलेट कैसे पहनें? (Perfect Use)
1. संकल्प लेकर पहनें
ब्रेसलेट पहनने से पहले मन में स्पष्ट संकल्प रखें – जैसे शांति, आत्मविश्वास, प्रेम या सफलता।
क्रिस्टल को अपनी ऊर्जा का माध्यम मानकर सकारात्मक विचार रखें।
2. किस हाथ में पहनें?
बायां हाथ (Left Hand): ऊर्जा ग्रहण करने के लिए (शांति, प्रेम, हीलिंग)।
दायां हाथ (Right Hand): ऊर्जा देने या व्यक्त करने के लिए (आत्मविश्वास, साहस, सफलता)।
3. रोज़ पहनें या विशेष समय पर?
रोज़ाना पहन सकते हैं।
ध्यान, योग, जप या महत्वपूर्ण मीटिंग/कार्य के समय विशेष रूप से पहनें।
4. शुद्धि और रिचार्ज
हल्की धूप या चांदनी में 1–2 घंटे रखें।
सेलेनाइट पत्थर पर रातभर रख सकते हैं।
नमक वाले पानी से कुछ क्रिस्टल साफ किए जा सकते हैं (पर पहले जानकारी ज़रूर लें)।
🌟 2. प्रमुख क्रिस्टल और उनके प्रभाव
💜 Amethyst (अमेथिस्ट)
मानसिक शांति
तनाव कम करना
ध्यान में एकाग्रता
💗 Rose Quartz (रोज़ क्वार्ट्ज)
प्रेम और रिश्तों में मधुरता
आत्म-प्रेम बढ़ाना
भावनात्मक हीलिंग
💛 Citrine (सिट्रीन)
आत्मविश्वास
धन और समृद्धि की ऊर्जा
सकारात्मक सोच
🖤 Black Tourmaline (ब्लैक टूरमलाइन)
नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
ग्राउंडिंग और स्थिरता
✨ 3. संभावित प्रभाव (Prabhav)
✔ मन में हल्कापन और सकारात्मकता
✔ भावनात्मक संतुलन
✔ आत्मविश्वास में वृद्धि
✔ ध्यान और फोकस बेहतर होना
ध्यान दें: क्रिस्टल के प्रभाव व्यक्ति की आस्था, मानसिक स्थिति और निरंतर उपयोग पर निर्भर करते हैं। यह कोई चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं हैं, बल्कि सहायक आध्यात्मिक साधन माने जाते हैं।
💎 4. महत्वपूर्ण सावधानियां
परफ्यूम, केमिकल और पानी से बचाएं (कुछ क्रिस्टल पानी में खराब हो सकते हैं)।
गिराने या तेज़ झटके से बचाएं।
समय-समय पर साफ और रिचार्ज करें।
निष्कर्ष:
क्रिस्टल ब्रेसलेट को सही संकल्प, नियमित उपयोग और शुद्धि के साथ धारण किया जाए तो यह आपके जीवन में सकारात्मकता और संतुलन का सुंदर माध्यम बन सकता है।
यह केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि आपकी ऊर्जा और भावना से जुड़ा एक व्यक्तिगत साथी है।
*नोट :- ऑरिजनल क्रिस्टल ब्रेसलेट लेने के लिए सम्पर्क करे*
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
https://www.facebook.com/Jai-Maa-Kali-astrologer-578550425537377/

MAA KI KIRPA

28/02/2026

*होलिका दहन: शत्रु बाधा और नजर दोष से मुक्ति के अचूक उपाय:*
जब प्रगति के मार्ग में अकारण शत्रु उत्पन्न होने लगें या बिना कारण कार्यों में रुकावट आने लगे, तो होलिका दहन का अवसर इन नकारात्मक शक्तियों को शांत करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

1. पीली सरसों और नमक का सुरक्षा कवच:
होलिका दहन के दिन थोड़ी पीली सरसों और सेंधा नमक को एक कागज में लपेटकर अपने ऊपर से 'एंटी-क्लॉकवाइज' (घड़ी की उल्टी दिशा में) ७ बार वार लें। इसे जलती हुई होलिका में डाल दें। यह पुराने से पुराने नजर दोष और शत्रु के कुप्रभाव को तत्काल भस्म कर देता है।

2. लौंग का अचूक प्रयोग:
शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए ७ साबुत लौंग (फूल वाली) लें। होलिका दहन के समय प्रत्येक लौंग को अग्नि में डालते हुए अपने शत्रु का नाम (यदि ज्ञात हो, अन्यथा 'गुप्त शत्रु' कहें) मन में लें और कहें कि उसकी शत्रुता शांत हो जाए। यह उपाय शत्रु के मन को शांत और उसके प्रभाव को शून्य करता है।

3. काले तिल और साबुत उड़द:
दहन की रात को एक मुट्ठी काले तिल और ७ साबुत काली उड़द के दाने लें। इन्हें अपने सिर के ऊपर से वार कर अग्नि में समर्पित करें। यह उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जिन्हें लगता है कि उन पर कोई तांत्रिक प्रभाव या 'बुरी नजर' है।

4. हनुमान चालीसा का 'संकल्प' पाठ:
होलिका दहन की लौ को देखते हुए वहीं खड़े होकर ३ बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। पाठ के अंत में हनुमान जी से शत्रुओं के दमन और आत्म-रक्षा की प्रार्थना करें। हनुमान जी की ऊर्जा किसी भी प्रकार के भय और शत्रु भय को दूर करने में सक्षम है।

5. फिटकरी का उपाय (नया और सात्विक):
दहन के दिन फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा अपने सिरहाने रखकर सोएं। अगले दिन (धुलेंडी की सुबह) उस टुकड़े को बिना किसी से बात किए घर के बाहर किसी चौराहे पर या निर्जन स्थान पर फेंक दें। यह आपके भीतर के डर और बाहरी मानसिक शत्रुओं को समाप्त करता है।

*जन्मकुंडली परामर्श व वास्तु समाधान हेतु सम्पर्क करें*
*ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद**

*एस्ट्रो रोहित चोपड़ा **7508866666

26/02/2026

कुछ साधारण उपयोगी वास्तु उपाय -

●झाड़ू - पोछा कभी भी खुले में नहीं रखना चाहिए। इन्हें हमेशा छुपा कर रखना चाहिए। और झाड़ू कभी भी रसोईं में नहीं रखनी चाहिए
● घर में टूटा हुआ शीशा कभी भी नहीं होना चाहिए।
●शौचालय का दरवाजा हमेशा बंद होना चाहिए।
●घर में सुख शांति के लिए कपूर को घी डूबा कर सुबह शाम जलानी चाहिए।
● दुर्घटना से बचने के लिए शाम को हनुमान चालीसा के बाद कपूर अवश्य जलाएं।
● घर में जिस जगह वास्तु दोष हो वहां कपूर की 2 टिकिया रखें। ख़त्म होने पर दुबारा रखें।
● जो कपूर 24 घंटे में अपने आप ख़त्म या वाष्पित हो जाये वही शुद्ध कपूर होता है।
● अच्छे भाग्य के लिए सुबह नहाते समय पानी में थोड़ा सा कपूर का तेल मिलाएं। शनिवार को चमेली का तेल भी मिला सकते हैं।
● लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए रोज रात को रसोई अच्छी तरह साफ़ करके, चांदी की कटोरी में कपूर और लौंग जलाएं। यह प्रक्रिया रोज करें।
● सूर्यास्त के बाद कभी भी किसी को दूध,दही या प्याज नहीं देना चाहिए। यह भाग्य में बाधक भी बन सकता है।
● घर के मुख्य द्वार पर कूड़ादान कभी नहीं रक्खें।
● घडी को कभी दक्षिण दिशा में तथा दरवाजे पर ऊपर नहीं टांगना चाहिए
● घडी को सही समय से आगे या पीछे मत करें।
● घर में हरी ,लाल या संतरी रंग की घड़ियाँ मत लगाएं। तथा दुकान में नीले या काली रंग की घडी न लगाएं।
● घडी गोल या चौकोर ही होनी चाहिए।
● घर के सोने वाले कमरे में पौधे नहीं लगाना चाहिए।
● घर में पोछा लगाते समय पानी में सेंधा नमक डालें। सादा नमक भी डाल सकते है।
● घर में सीढ़ी की संख्या odd या विषम होनी चाहिए।
● मेन गेट पर या इसके ऊपर बड़ा शीशा लगाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा उससे टकराकर वापस चली जायेगी।
● एक कपूर और फूल वाली लौंग को जलाएं। तथा उसकी राख को किसी साफ कागज़ की पुड़िया में इकठ्ठा कर लें तथा 5 दिन तक थोड़ा थोड़ा करके आपनी ज़ुबान पर लगाएं। इससे आपका दुर्भाग्य दूर हो जायेगा।
● जीवन में तरक्की पाने के लिए रोज पहली रोटी गाय को दें, पीपल को जल चढ़ाएं और चीटियों को शक्कर मिला आटा दें।
● तांबे के लोटे में जल व् लाल चंदन मिला कर रात को अपने सर के पास रख कर सोएं। सुबह उस जल को तुलसी को चढ़ा दें। ऐसा करने से आपकी परेशानियां धीरे धीरे दूर हो जाएंगी।
● नौकरी पाने के लिए कुँए में आधा किलो दूध ड़ालें।
● अग्नि कोण्ड में पानी की टंकी नहीं होनी चाहिए।
● रविवार को पान का पत्ता लेकर निकलें। रुके हुए काम भी पूरे हो जायेंगे।
● गिफ्ट या चोरी वाले जूते कभी न पहनें।
● भूरे रंग के जूते ऑफिस में न पहने।
*जन्मकुंडली परामर्श व वास्तु समाधान हेतु सम्पर्क करें**

*ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद**
*रोहित चोपड़ा 7508866666**

21/02/2026
Jai Maa Kali
17/02/2026

Jai Maa Kali

17/02/2026

*हनुमान की तस्वीरों से जुड़ी विशेष बातें*
*===============================*
भगवान हनुमान की तस्वीरों से जुड़ी बातें जिनके बारे में यकीनन हर कोई नहीं जानता है लेकिन अब आप अपनी मनोकामना के लिए उसके मुताबिक हनुमान जी की तस्वीर की पूजा करके उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं।

1👉 जिस तस्वीर में हनुमान जी श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की आराधना करते हुए दिखाई देते हैं. ऐसी तस्वीर की पूजा करने से हनुमान जी जल्दी ही भक्तों पर प्रसन्न होते हैं.

2👉 नौकरी में प्रमोशन और व्यवसाय में तरक्की पाने के लिए हनुमान जी की ऐसी तस्वीर की पूजा करें, जिसमें उनका स्वरुप सफेद रंग का हो.

3👉 इस बात का हमेशा ख्याल रखें कि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं इसलिए पति-पत्नी को उनकी तस्वीर बेडरुम में नहीं लगाना चाहिए. हनुमान जी की तस्वीर को हमेशा घर के मंदिर में स्थापित करनी चाहिए.

4👉 भगवान राम की भक्ति में लीन दिखाई देनेवाली हनुमान जी की तस्वीर की पूजा करने से एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक शक्ति का विकास होता है.

5👉 सेवक हनुमान- जिस तस्वीर में हनुमान जी श्रीराम की भक्ति में लीन दिखाई देते हैं, ऐसी तस्वीर की पूजा करने से सेवा और समर्पण की भावना जागृत होती है. घर और कार्यस्थल पर सम्मान मिलता है.

6👉 वीर हनुमान स्वरुप में साहस, आत्मबल, पराक्रम दिखाई देता है. हनुमान जी ने कई राक्षसो का वध करके श्रीराम के काज को संवारा था. ऐसी तस्वीर की पूजा से भक्तों को साहस आत्मबल की प्राप्ति होती है.

7👉 सूर्यदेव हनुमान जी के गुरू हैं. जिस तस्वीर में हनुमान जी सूर्यदेव की पूजा कर रहे हैं या सूर्य की ओर देख रहे हैं, उस स्वरुप की पूजा करने पर ज्ञान, गति और सम्मान मिलता है.

8👉 देवी देवताओं की दिशा उत्तर मानी गई है, हनुमान जी की जिस तस्वीर में हनुमान जी का मुख उत्तर दिशा की ओर है. वो हनुमान जी का उत्तरामुखी स्वरुप है. उस स्वरुप की पूजा करने से सभी देवी-देवताओं की कृपा मिलती है घर में शुभ वातावरण रहता है.

9👉 हनुमान जी की तस्वीर में हनुमान जी का मुख दक्षिण दिशा में हो, तो उसे दक्षिणामुखी स्वरुप कहते हैं. दक्षिण दिशा यमराज की दिशा मानी जाती है. इस तस्वीर की पूजा करने से मृत्यु भय और चिंताए समाप्त होती हैं.

10👉 जिस तस्वीर में हनुमान जी संजीवनी बूटी के पर्वत को उठाए हुए नज़र आते हैं ऐसी तस्वीर की पूजा करने से घरवालों की तरक्की की राह आसान होती है।
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा (गुरु जी)
📲7508866666

16/02/2026

जन्म तारीख 4, 13, 22 या 31:
क्या वर्ष 2026 में आपकी मेहनत 'अचानक' किसी बड़े अवसर में बदलने वाली है?
​नमस्ते दोस्तों! अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आपका स्वामी 'राहु' है। राहु का मतलब है—अचानक बदलाव, लीक से हटकर सोचना और वह सफलता जो दुनिया को हैरान कर दे।
​ग्रहों की नई गणना के अनुसार, वर्ष 2026 आपके लिए 'अचानक' आने वाले अवसरों और बड़े बदलावों का साल होने वाला है। आइए जानते हैं आपकी तारीख के हिसाब से इस साल का फल:
​📅 आपकी जन्म तारीख और वर्ष 2026 का फल:
​यदि आपकी जन्म तारीख 4 है: इस साल आपको अपनी मेहनत का 'अचानक' बड़ा परिणाम मिल सकता है। जो काम वर्षों से अटके थे, वे गति पकड़ेंगे। बस अपनी वाणी पर संयम रखें ताकि बना हुआ काम बिगड़े नहीं।
​यदि आपकी जन्म तारीख 13 है: आपके लिए 2026 थोड़ा संघर्षपूर्ण लेकिन अंत में बड़ी जीत दिलाने वाला साल है। पुराने कर्ज से मुक्ति के रास्ते खुलेंगे। शनिवार को किसी जरूरतमंद की मदद करना आपके भाग्य को बढ़ाएगा।
​यदि आपकी जन्म तारीख 22 है: यह एक 'मास्टर नंबर' है। 2026 में आपकी लीडरशिप क्वालिटी निखर कर आएगी। इस साल आपको कार्यस्थल या समाज में कोई बहुत बड़ा पद या जिम्मेदारी मिल सकती है।
​यदि आपकी जन्म तारीख 31 है: व्यापारिक दृष्टिकोण से 2026 आपके लिए मील का पत्थर साबित होगा। काम के विस्तार के लिए यह साल शानदार है, बस निवेश से पहले घर के बड़ों की सलाह जरूर लें।
​🌟 उल्लेखनीय व्यक्ति (दिग्गजों से समझें राहु की शक्ति)
​अटल बिहारी वाजपेयी (22 तारीख): राजनीति के शिखर पुरुष।
​बराक ओबामा (4 तारीख): दुनिया को प्रभावित करने वाली शक्ति।
​किशोर कुमार (4 तारीख): अद्भुत रचनात्मकता।
​प्रीति जिंटा (31 तारीख): ग्लैमर और बिजनेस का सटीक मेल।
​🚀 किस उम्र में मिलता है विशेष लाभ और सावधानी?
​लाभ के वर्ष: आपके जीवन का 22, 31, 40, 49 और 58वां वर्ष अक्सर आपके लिए करियर का 'जैकपॉट' लेकर आते हैं।
​सावधानी के वर्ष: 13, 26, 35 और 44वें साल में आपको निवेश और सेहत को लेकर बहुत सतर्क रहना चाहिए।
​🏠 आपके स्वभाव और घर की 'गुप्त' निशानियां
​अचानक फैसले: आप अपनी योजनाओं को पल भर में बदल देते हैं, जिससे लोग अक्सर हैरान रह जाते हैं।
​बिजली के सामान: क्या आपके घर में भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स अक्सर खराब होते हैं या आपको नए गैजेट्स का बहुत शौक है? यह राहु के प्रभाव की निशानी है।
​विचारों का भटकाव: एक काम पूरा होने से पहले ही दूसरे के बारे में सोचना आपकी शक्ति को कम कर सकता है। फोकस बनाए रखें।
​⚠️ वर्ष 2026 के लिए विशेष सावधानी
​लांछन का खतरा: वर्ष 2026 में किसी अजनबी पर आँख मूँदकर भरोसा न करें। बाहरी चकाचौंध और सौंदर्य के प्रति आकर्षण आप पर सामाजिक लांछन लगवा सकता है। अपनी छवि का विशेष ध्यान रखें।
​दिखावे का खर्च: दूसरों को प्रभावित करने के लिए फिजूलखर्ची आपकी बरकत रोक सकती है।
​🎯 क्या आप भी इस 'राहु की शक्ति' को महसूस करते हैं?
​क्या आपके घर में भी बिना पढ़ी किताबों का ढेर है या आप भी अचानक प्लान बदल देते हैं? 🤨
​👇 अपनी राय कमेंट में साझा करें और बताएं कि इनमें से कौन सी निशानी आपसे मैच हुई!

एस्ट्रो रोहित चोपड़ा (। गुरु जी)
👉📲7508866666

14/02/2026

*महाशिवरात्रि विशेष*

*रविवार, 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन की गई शिव पूजा से पिछले समय से चली आ रही परेशानियां खत्म हो सकती हैं और धन लाभ भी मिल सकता है। यहां जानिए शास्त्रों में बताए गए उपाए...*
👉🏻 *शिवरात्रि पर करें इन 8 में से कोई 1 उपाय, दूर हो सकती है परेशानी*

🔥 *महाशिवरात्रि पर रात में किसी शिव मंदिर में दीपक जलाएं । शिव पुराण के अनुसार कुबेर देव ने पूर्व जन्म में रात के समय शिवलिंग के पास रोशनी की थी इसी वजह से अगले जन्म में वे देवताओं के कोषाध्यक्ष बने।*

🙏🏻 *महाशिवरात्रि पर छोटा सा पारद (पारा) शिवलिंग लेकर आएं और घर के मंदिर में इसे स्थापित करें। शिवरात्रि से शुरू करके रोज इसकी पूजा करें । इस उपाय से घर की दरिद्रता दुर होती है और लक्ष्मी कृपा बनी रहती है।*

🙏🏻 *यदि आप चाहें तो शिवरात्रि पर स्फटिक के शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं। घर के मंदिर में जल, दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर से इस शिवलिंग को स्नान कराएं । मंत्र - ॐ नम: शिवाय । मंत्र जप कम से कम 108 बार करें।*

🙏🏻 *हनुमानजी भगवान शिव के ही अंशावतार माने गए हैं। शिवरात्रि पर हनुमान चालीसा का पाठ करने से हनुमानजी और शिवजी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। इनकी कृपा से भक्त की सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं।*

*किसी सुहागिन को सुहाग का सामान उपहार में दें । जो लोग यह उपाय करते है, उनके वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर हो सकती हैं। सुहाग का सामान जैसे - लाल साड़ी, लाल चूडियां, कुम -कुम आदि।*

💰 *महाशिवरात्रि पर किसी जरुरतमंद व्यक्ति को अनाज और धन का दान करें। शास्त्रों में बताया गया है कि गरिबों को दान करने से पुराने सभी पापों का असर खत्म हो सकता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।*

🍚 *जो लोग शिवरात्रि पर किसी बिल्व वृक्ष के नीचे खड़े होकर खीर और घी का दान करते हैं, उन्हें महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्ति होती है। ऐसे लोग जीवनभर सुख-सुविधाएं प्राप्ति करते हैं और कार्यों में सफल होते हैं।*

🙏🏻 *शिवरात्रि का व्रत, पूजन, जागरण और उपवास करनेवाले मनुष्य का पुनर्जन्म नहीं होता है। (स्कंद पुराण)*

🙏🏻 *शिवरात्रि के समान पाप और भय मिटानेवाला दूसरा व्रत नहीं है। इसको करनेमात्र से सब पापों का क्षय हो जाता है। (शिव पुराण)*


🌷 *शिवरात्रि के दिन करने योग्य विशेष बातें*
🙏🏻 *१. शिवरात्रि के दिन की शुरुआत ये श्लोक बोल के शुरू करें 😗
🌷 *देव देव महादेव नीलकंठ नमोस्तुते l*
*कर्तुम इच्छा म्याहम प्रोक्तं, शिवरात्रि व्रतं तव ll*
🙏🏻 *2. काल सर्प के लिए महाशिवरात्रि के दिन घर के मुख्य दरवाजे पर पिसी हल्दी से स्वस्तिक बना देना.... शिवलिंग पर दूध और बिल्व पत्र चढ़ाकर जप करना और रात को ईशान कोण में मुख करके जप करना l*
🙏🏻 *3. शिवरात्रि के दिन ईशान कोण में मुख करके जप करने की महिमा विशेष है, क्योंकि ईशान के स्वामी शिव जी हैं l रात को जप करें, ईशान को दिया जलाकर पूर्व के तरफ रखें , लेकिन हमारा मुख ईशान में हो तो विशेष लाभ होगा l जप करते समय झोका आये तो खड़े होकर जप करना l*
🙏🏻 *4. महाशिवरात्रि को कोई मंदिर में जाकर शिवजी पर दूध चढाते हैं तो ये ५ मंत्र बोलें 😗
🌷 *ॐ हरये नमः*
🌷 *ॐ महेश्वराए नमः*
🌷 *ॐ शूलपानायाय नमः*
🌷 *ॐ पिनाकपनाये नमः*
🌷 *ॐ पशुपतये नमः*
*हर हर महादेव*
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
https://www.facebook.com/Jai-Maa-Kali-astrologer-578550425537377/

MAA KI KIRPA

09/02/2026

*🌹पूजा सुपारी के 10 ऐसे उपाय, जो बदल देंगे आपके मुसीबत के दिन*
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
*जब सुपारी की विधिवत पूजा की जाती है तो वह चमत्कारी हो जाती है। अगर आप इस चमत्कारी सुपारी को हमेशा अपने पास रखते हैं तो जीवन में कभी भी पैसों की तंगी नहीं रहती है। आइए जानें सुपारी के 10 सटीक उपाय*
1. पूजा की सुपारी पर जनेऊ चढ़ाकर जब पूजा जाता है तो यह अखंडित सुपारी गौरी गणेश का रूप बन जाती है। इस सुपारी को तिजोरी में रखने पर घर में लक्ष्मी स्थायी रूप से निवास करने लगती हैं और इससे सौभाग्य आने लगता है।

2. पूजा में इस्तेमाल की गई सुपारी को तिजोरी में रखना भी लाभदायक होता है। सुपारी को धागे में लपेटें और अक्षत, कुमकुम लगाकर पूजा जरूर कर लें। पूजा करके तिजोरी में रखी गई सुपारी बहुत लाभदायक होती है।

3. व्यापार में तरक्की के लिए भी सुपारी बहुत सहायक होती है। माना जाता है कि शनिवार की रात पीपल के पेड़ की पूजा करके सुपारी और उसके साथ एक रुपये का सिक्का रखें। अगले दिन उस पेड़ का पत्ता तोड़कर लाएं उस पर सुपारी रखें और इसे अपनी तिजोरी में रखें इससे व्यापार में बढ़ोत्तरी होती है।

4. पान का पत्ता रखें उस पर सिन्दूर में घी मिलाकर स्वस्तिक बनाएं और उस पत्ते पर कलावे में लपेटी हुई सुपारी रख कर पूजा करनी चाहिए। यह उपाय घर में सफलता के लिए द्वार खोलता है।

5. अगर आपका कोई काम बनते बनते रह जाता है या आपको किसी कार्य में लगातार असफलता मिल रही है तो जब भी उस कार्य को करने जाए तो एक लौंग और सुपारी अपने पास रख लिया करें। काम के समय लौंग को अपने मुंह में रख लें और उसे चूसें। सुपारी घर आने के बाद वापस गणेशजी के फोटो के सामने रख दें। इससे रूका हुआ काम यकीनन पूरा होगा।

6. सुपारी को चांदी की डिबिया में अबीर लगाकर किसी भी पूर्णिमा के दिन पूजा घर में रखें तो घर में मंगल कार्य जल्दी होते हैं।
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
7. हल्दी, कुंकुम् और चावल लगाकर सुपारी पर मौली लपेटें और इसे किसी भी गुरुवार को विष्णु-लक्ष्मी मंदिर में छुपाकर आ जाएं। इससे अविवाहित कन्या की शादी के योग बनते हैं। जब रिश्ता पक्का हो जाए तो सुपारी को शादी तक घर में रखें। फिर जलाशय में विसर्जित कर दें।

8. अगर घर में कोई भी मांगलिक कार्य हो तो उसके निर्विघ्न संपन्न होने के लिए सुपारी को बोलकर लाल कपड़े में बांधकर छुपा दें। जब कार्य अच्छे से संपन्न हो जाए तो यह सुपारी किसी गणेश मंदिर में जाकर रख दें।

9. घर से जब कोई तीर्थ यात्रा पर जाए तो उसके सकुशल वापिस आने तक तुलसी के गमले में सुपारी गाड़ दें। आने पर उसे धोकर किसी भी मंदिर में चढ़ा दें।

10. सुपारी को 7 बार अपने ऊपर से उतार कर हवन कुंड में डालने से हर तरह की अला-बला दूर होती है।
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
https://www.facebook.com/Jai-Maa-Kali-astrologer-578550425537377/

MAA KI KIRPA

27/01/2026

जागरण को मज़ाक ना समझे
जागरण इक तपस्या हैं तमाशा नही
जागरण में रात्रि भोजन दाल फुल्का होना चाहिए.
घरेलू जागरण पर 400 लोग आए खाना खा के चले गए
जागरण पर उनमें से सिर्फ 19, 20 लोग बैठे सोचो जागरण किया के पार्टी ??

इस लिए बन्द होना चाहिए ये सब
सिर्फ और सिर्फ माँ का गुणगान करें

"और आप सब से हाथ जोड कर विनती है कि जागरण में माँ के, शिव जी के या अन्य कोई भी सरूप न बनवाये और न ही बनने दें।"

हमारे पूर्वज घर से, गाँव से,शहरो से क्षेत्र से भयंकर महामारी जैसे चेचक,भयंकर बुखार, टीबी, इतियादी को भगाने हेतू सूख शांति समृद्धि के लिए माँ भगवती का गुणगान सारी रात माँ की पवित्र ज्योत जगा माँ भगवती को प्रसन्न करते थे परंतु आज....

माँ भगवती के जागरण को ना समझते हुए जाने अनजाने में आज कल हम जागरण नही तमाशे कर रहे है और पाप के भागीदार बन रहे हैं। जागरण की प्रथा, विधि को जाने बिना हम नाच कर पैसे लूटा कर अपने ही ग्रहों को नचवा कर आधी रात को बुरी बुरी आवाज़े भूत प्रेतों को देवी देवताओं के साथ नचाकर उनका अपमान कर रहे है व पूण्य के बजाय पाप केभागीदार बन रहे है।

जागरण की प्रथा माँ भगवती का आव्हान माँ भगवती का गुणगान करना है जिससे माँ प्रसन्न हो हमे आशीर्वाद व सुख समृद्धि दे । इस सच्चाई को हर भाई भहन को बताना हमारा कर्तव्य है, जो कि कोई गलती ना करे, विधिवत माँ भगवती का जागरण माँ का सारी रात गुणगाण कर के करे।

जागरण में जब माँ ज्वाला स्वरूप ज्योति🔥प्रज्वलित हो उस ज्योति के सामने तमाशे ना करे उसे पीठ ना दिखाए सिर्फ तो सिर्फ भगवती गुणगाण करे।

माँ भगवती जागरण श्रद्धा, प्रेम भाव की साधना तपस्या पध्वति हैं लाखों की सजावटें करना दिखावटी भावो से माँ प्रसन्न नही होती वो तो प्रेम की भूखी हैं ।
कम से कम पैसों से प्रेम भाव से माँ की पवित्र जोत जगा मन मे और पुकारो दिल से गुणगाण करो माँ चली आएगी दौड़ी आएगी।

जय माता दी
माँ के चरणों के दास
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666

19/01/2026

*गुप्त नवरात्रि माघ विशेष 😗
माघ घटस्थापना सोमवार 19, जनवरी 2026
घटस्थापना मुहूर्त - 06:53 से 10:34 = अवधि - 03 घण्टे 41 मिनट्स
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त - 12:02 से 12:47 = अवधि - 00 घण्टे 44 मिनट्स
घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर है।
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ - 19, जनवरी 2026 को 01:21 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त - 20, जनवरी 2026 को 02:14 बजे
सोमवार माघ गुप्त नवरात्रि 19 से 28 जनवरी तक रहेगी |

****************************************

1. माघ गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्या पूजा
पहला दिन- मां काली - गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा के दौरान उत्तर दिशा की ओर मुंह करके काली हकीक माला से पूजा करनी है. इस दिन काली माता के साथ आप भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए. ऐसा करने से आपकी किस्मत चमक जाएगी. शनि के प्रकोप से भी छुटकारा मिल जाएगा. नवरात्रि में पहले दिन दिन मां काली को अर्पित होते हैं वहीं बीच के तीन दिन मां लक्ष्मी को अर्पित होते हैं और अंत के तीन दिन मां सरस्वति को अर्पित होते हैं.
मां काली की पूजा में मंत्रों का उच्चारण करना है।

मंत्र- क्रीं ह्रीं काली ह्रीं क्रीं स्वाहा।
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहा।

2. दूसरी महाविद्या मां तारा- दूसरे दिन मां तारा की पूजा की जाती है. इस पूजा को बुद्धि और संतान के लिये किया जाता है. इस दिन एमसथिस्ट व नीले रंग की माला का जप करने हैं।

मंत्र- ॐ ह्रीं स्त्रीं हूं फट।

3. तीसरी महाविद्या मां त्रिपुरसुंदरी और मां शोडषी पूजा- अच्छे व्यक्ति व निखरे हुए रूप के लिये इस दिन मां त्रिपुरसुंदरी की पूजा की जाती है. इस दिन बुध ग्रह के लिये पूजा की जाती है. इस दिन रूद्राक्ष की माला का जप करना चाहिए।

मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीये नम:।

04. चौथी महाविद्या मां भुवनेश्वरी पूजा- इस दिन मोक्ष और दान के लिए पूजा की जाती है. इस दिन विष्णु भगवान की पूजा करना काफी शुभ होगा. चंद्रमा ग्रह संबंधी परेशानी के लिये इस पूजा की जाती है।.
मंत्र- ह्रीं भुवनेश्वरीय ह्रीं नम:।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नम:।

5. पांचवी महाविद्या माँ छिन्नमस्ता- नवरात्रि के पांचवे दिन माँ छिन्नमस्ता की पूजा होती है. इस दिन पूजा करने से शत्रुओं और रोगों का नाश होता है. इस दिन रूद्राक्ष माला का जप करना चाहिए. अगर किसी का वशीकरण करना है तो उस दौरान इस पूजा करना होता है. राहू से संबंधी किसी भी परेशानी से छुटकारा मिलता है. इस दिन मां को पलाश के फूल चढ़ाएं।

मंत्र- श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैररोचनिए हूं हूं फट स्वाहा।

6. छठी महाविद्या मां त्रिपुर भैरवी पूजा- इस दिन नजर दोष व भूत प्रेत संबंधी परेशानी को दूर करने के लिए पूजा करनी होती है. मूंगे की माला से पूजा करें. मां के साथ बालभद्र की पूजा करना और भी शुभ होगा. इस दिन जन्मकुंडली में लगन में अगर कोई दोष है तो वो सभ दूर होता है।

मंत्र- ॐ ह्रीं भैरवी क्लौं ह्रीं स्वाहा।

7. सांतवी महाविद्या मां धूमावती पूजा- इस दिन पूजा करने से द्ररिता का नाश होता है. इस दिन हकीक की माला का पूजा करें।

मंत्र- धूं धूं धूमावती दैव्ये स्वाहा।

8. आंठवी महाविद्या - मां बगलामुखी- माँ बगलामुखी की पूजा करने से कोर्ट-कचहरी और नौकरी संबंधी परेशानी दूर हो जाती है. इस दिन पीले कपड़े पहन कर हल्दी माला का जप करना है. अगर आप की कुंडली में मंगल संबंधी कोई परेशानी है तो मा बगलामुखी की कृपा जल्द ठीक हो जाएगा।

मंत्र-ॐ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदृष्टानां मुखं, पदम् स्तम्भय जिव्हा कीलय, शत्रु बुद्धिं विनाशाय ह्रलीं ऊँ स्वाहा।

09. नौवीं महाविद्या - मां मतांगी- मां मतांगी की पूजा धरती की ओर और मां कमला की पूजा आकाश की ओर मुंह करके पूजा करनी चाहिए. इस दिन पूजा करने से प्रेम संबंधी परेशानी का नाश होता है. बुद्धि संबंधी के लिये भी मां मातंगी पूजा की जाती है।
मंत्र- क्रीं ह्रीं मातंगी ह्रीं क्रीं स्वाहा।
दसवी महाविद्या - मां कमला- मां कमला की पूजा आकाश की ओर मुख करके पूजा करनी चाहिए. दरअसल गुप्त नवरात्रि के नौंवे दिन दो देवियों की पूजा करनी होती है।

मंत्र- क्रीं ह्रीं कमला ह्रीं क्रीं स्वाहा

नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन पूर्णाहुति हवन एवं कन्याभोज कराकर किया जाना चाहिए। पूर्णाहुति हवन दुर्गा सप्तशती के मन्त्रों से किए जाने का विधान है किन्तु यदि यह संभव ना हो तो देवी के 'नवार्ण मंत्र', 'सिद्ध कुंजिका स्तोत्र' अथवा 'दुर्गाअष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र' से हवन संपन्न करना श्रेयस्कर रहता है।

10. गुप्त नवरात्रि की देवियां , मां काली, तारादेवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी माता, छिन्न माता, त्रिपुर भैरवी मां, धुमावती माता, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी।

11 .महत्व ... देवी भागवत पुराण के अनुसार जिस तरह वर्ष में 4 बार नवरात्रि आती है और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के 9 रूपों की पूजा होती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है।

12. गुप्त नवरात्रि विशेष कर तांत्रिक कियाएं, शक्ति साधनाएं, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है।

13 . इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग दुर्लभ शक्तियों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान कई साधक महाविद्या के लिए मां दुर्गा के सभी स्वरूपों का पूजन करते हैं।

14 . अष्टमी या नवमी के दिन कन्या-पूजन के साथ नवरात्रि व्रत का उद्यापन करने की मान्यता है। नवरात्रि उद्यापन में कुंआरी कन्याओं को भोजन कराकर यथाशक्ति दान, दक्षिणा, वस्त्र और आभूषण तथा श्रृंगार सामग्री भेंट करने से मां भगवती की अपार कृपा मिलती है।

15 . गुप्त नवरात्रि में भी नौ दिनों तक क्रमानुसार देवी के स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन दिनों में मां दुर्गा की आराधना गुप्त रूप से की जाएगी।

16 . तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करने के लिए ये महा अवसर है।

17 . इन नौ दिनों तक माता के 32 नाम के साथ उनके मंत्र का 108 बार जाप भी करें।

18 सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का 18 बार पाठ कीजिए

19. यदि संभव हो तो दुर्गासप्तशती का एक पाठ प्रातः और एक रात्रि में कीजिए।

20 . ब्रम्ह मुहूर्त में श्रीरामरक्षास्तोत्र का पाठ करने से दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का नाश होता है।

****************************************

कलश की स्थापना और उसके पूजन के समय पुजारी शास्त्रसम्मत कुछ मंत्रों का उच्चारण करते हैं।

कलशस्य मुखे विष्णु : कंठे रुद्र: समाश्रित। मूल तस्य, स्थिति ब्रह्मा मध्ये मातगण: समाश्रित:।।
कलश के मुख में श्री विष्णु विराजमान हैं।
भ्रात: कान्चलेपगोपितबहिस्ताम्राकृते सर्वतो।
मा भैषी: कलश: स्थिरो भव चिरं देवालयस्योपरि।।
ताम्रत्वं गतमेव कांचनमयी कीर्ति: स्थिरा ते धुना।
नान्स्तत्त्वविचारणप्रणयिनो लोका बहिबरुद्धय:।।

कलश भारतीय संस्कृति का अग्रगण्य प्रतीक है इसलिए तो महत्वपूर्ण सभी शुभ प्रसंगों में पुण्याहवाचन कलश की साक्षी में तथा सान्निध्य में होता है।

प्रत्येक शुभ प्रसंग या कार्य के आरंभ में जिस तरह विघ्नहर्ता गणोशजी की पूजा की जाती है उसी तरह कलश की भी पूजा होती है। देवपूजा के स्थान पर इस कलश को अग्रस्थान प्राप्त होता है। पहले इसका पूजन, फिर इसे नमस्कार और बाद में विघ्नहर्ता गणपति को नमस्कार! ऐसा प्राधान्यप्राप्त कलश और उसके पूजन के पीछे अति सुंदर भाव छिपा हुआ है।

स्वस्तिक चिह्न अंकित करते ही जिस तरह सूर्य आकर उस पर आसनस्थ होता है उसी तरह कलश को सजाते ही वरुणदेव उसमें विराजमान होते हैं। जो संबंध कमल-सूर्य का है वही संबंध कलश वरुण का है। वास्तव में कलश यानी लोटे में भरा हुआ या घड़े में भरा हुआ साधारण जल। परंतु कलश की स्थापना के बाद उसके पूजन के बाद वह जल सामान्य जल न रहकर दिव्य ओजस्वी बन जाता है।

तत्वायामि ब्रह्मणा वंदमानस्तदाशास्ते यजमानो हविर्भि:।
अहेळमानो वरुणोहबोध्यु रुशंसा मा न आयु: प्रमोषी:।।

हे वरुणदेव! तुम्हें नमस्कार करके मैं तुम्हारे पास आता हूं। यज्ञ में आहुति देने वाले की याचना करता हूं कि तुम हम पर नाराज मत होना। हमारी उम्र कम नहीं करना आदि वैदिक दिव्य मंत्रों से भगवान वरुण का आवाहन करके उनकी प्रस्थापना की जाती है और उस दिव्य जल का अंग पर अभिषेक करके रक्षा के लिए प्रार्थना की जाती है। कलश पूजन की प्रार्थना के श्लोक भी भावपूर्ण हैं। उसकी प्रार्थना के बाद वह कलश केवल कलश नहीं रहता, किंतु उसमें पिंड ब्रह्मांड की व्यापकता समाहित हो जाती इस

कलशस्य मुखे विष्णु: कंठे रुद्र: समाश्रित:।
मूले तत्र स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणा: स्मृता:।।

कुक्षौ तु सागरा: सर्वे सप्तद्वीपा वसुंधरा।
ऋग्वेदोअथ यजुर्वेद: सामवेदो ह्यथवर्ण:।।

अंगैच्श सहिता: सर्वे कलशं तु समाश्रिता:।
अत्र गायत्री सावित्री शांतिपृष्टिकरी तथा।

आयांतु मम शांत्यर्थ्य दुरितक्षयकारका:।।
सर्वे समुद्रा: सरितस्तीर्थानि जलदा नदा:।
आयांतु मम शांत्यर्थ्य दुरितक्षयकारका:।।

हमारे ऋषियों ने छोटे से पानी के लोटे में सभी देवता, वेद, समुद्र, नदियां, गायत्री, सावित्री आदि की स्थापना कर पापक्षय और शांति की भावना से सभी को एक ही प्रतीक में लाकर जीवन में समन्वय साधा है। बिंदु में सिंधु के दर्शन कराए हैं।
****************************************

कब होते हैं गुप्त नवरात्र ?

चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र के बारे में तो सभी जानते ही हैं जिन्हें वासंती और शारदीय नवरात्र भी कहा जाता है लेकिन गुप्त नवरात्र आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में मनाये जाते हैं।

गुप्त नवरात्र पौराणिक कथा -

गुप्त नवरात्र के महत्व को बताने वाली एक कथा भी पौराणिक ग्रंथों में मिलती है कथा के अनुसार एक समय की बात है कि ऋषि श्रंगी एक बार अपने भक्तों को प्रवचन दे रहे थे कि भीड़ में से एक स्त्री हाथ जोड़कर ऋषि से बोली कि गुरुवर मेरे पति दुर्व्यसनों से घिरे हैं जिसके कारण मैं किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्य व्रत उपवास अनुष्ठान आदि नहीं कर पाती।
मैं मां दुर्गा की शरण लेना चाहती हूं लेकिन मेरे पति के पापाचारों से मां की कृपा नहीं हो पा रही मेरा मार्गदर्शन करें।
तब ऋषि बोले वासंतिक और शारदीय नवरात्र में तो हर कोई पूजा करता है सभी इससे परिचित हैं।
लेकिन इनके अलावा वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्र भी आते हैं इनमें 9 देवियों की बजाय 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है।
यदि तुम विधिवत ऐसा कर सको तो मां दुर्गा की कृपा से तुम्हारा जीवन खुशियों से परिपूर्ण होगा। ऋषि के प्रवचनों को सुनकर स्त्री ने गुप्त नवरात्र में ऋषि के बताये अनुसार मां दुर्गा की कठोर साधना की स्त्री की श्रद्धा व भक्ति से मां प्रसन्न हुई और कुमार्ग पर चलने वाला उसका पति सुमार्ग की ओर अग्रसर हुआ उसका घर खुशियों से संपन्न हुआ ।

मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान अन्य नवरात्रों की तरह ही पूजा करनी चाहिए। नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा यानि पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

****************************************

मेष मेष राशि के जातक शक्ति उपासना के लिए द्वितीय महाविद्या तारा की साधना करें। ज्योतिष के अनुसार इस महाविद्या का स्वभाव मंगल की तरह उग्र है। मेष राशि वाले महाविद्या की साधना के लिए इस मंत्र का जप करें।
मंत्र ह्रीं स्त्रीं हूं फट् ।
वृषभ वृषभ राशि वाले धन और सिद्धि प्राप्त करने के लिए श्री विद्या यानि षोडषी देवी की साधना करें और इस मंत्र का जप करें।
मंत्र ऐं क्लीं सौ: ।
मिथुन अपना गृहस्थ जीवन सुखी बनाने के लिए मिथुन राशि वाले भुवनेश्वरी देवी की साधना करें। साधना मंत्र इस प्रकार है।
मंत्र ऐं ह्रीं ।
कर्क इस नवरात्रि पर कर्क राशि वाले कमला देवी का पूजन करें। इनकी पूजा से धन व सुख मिलता है। नीचे लिखे मंत्र का जप करें।
मंत्र ॐ श्रीं ।
सिंह ज्योतिष के अनुसार सिंह राशि वालों को मां बगलामुखी की आराधना करना चाहिए। जिससे शत्रुओं पर विजय मिलती है।
मंत्र ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिह्वाम कीलय-कीलय बुद्धिम विनाशाय ह्लीं ॐ नम: ।
कन्या आप चतुर्थ महाविद्या भुवनेश्वरी देवी की साधना करें आपको निश्चित ही सफलता मिलेगी।
मंत्र ऐं ह्रीं ऐं
तुला तुला राशि वालों को सुख व ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए षोडषी देवी की साधना करनी चाहिए।
मंत्र ऐं क्लीं सौ: ।
वृश्चिक वृश्चिक राशि वाले तारा देवी की साधना करें। इससे आपको शासकीय कार्यों में सफलता मिलेगी।
मंत्र श्रीं ह्रीं स्त्रीं हूं फट् ।
धनु धन और यश पाने के लिए धनु राशि वाले कमला देवी के इस मंत्र का जप करें।
मंत्र श्रीं ।
मकर मकर राशि के जातक अपनी राशि के अनुसार मां काली की उपासना करें।
मंत्र क्रीं कालीकाये नम: ।
कुंभ कुंभ राशि वाले भी काली की उपासना करें इससे उनके शत्रुओं का नाश होगा।
मंत्र क्रीं कालीकाये नम: ।
मीन इस राशि के जातक सुख समृद्धि के लिए कमला देवी की उपासना करें।
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
****************************************

गुप्त नवरात्रि माघ दिन 1 घटस्थापना 19 जनवरी 2026 सोमवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 2 द्वितीया 20 जनवरी 2026 मंगलवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 3 तृतीया 21 जनवरी 2026 बुधवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 4 चतुर्थी 22 जनवरी 2026 गुरुवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 5 पंचमी 23 जनवरी 2026 शुक्रवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 6 षष्ठी 24 जनवरी 2026 शनिवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 7 सप्तमी 25 जनवरी 2026 रविवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 8 अष्टमी 26 जनवरी 2026 सोमवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 9 नवमी 27 जनवरी 2026 मंगलवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 10 दशमी नवरात्रि पारणा 28 जनवरी 2026 बुधवार

****************************************

मां दुर्गा के नवरुपों की उपासना निम्न मंत्रों के द्वारा की जाती है. प्रथम दिन शैलपुत्री की एवं क्रमशः नवें दिन सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है -

1. शैलपुत्री
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् । वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ॥
****************************************
2. ब्रह्मचारिणी
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू ।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ॥
****************************************
3. चन्द्रघण्टा
पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता ।
प्रसादं तनुते मह्यां चन्द्रघण्टेति विश्रुता ॥
****************************************
4. कूष्माण्डा
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च ।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥
****************************************
5. स्कन्दमाता
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया ।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ॥
****************************************
6. कात्यायनी
चन्द्रहासोज्वलकरा शार्दूलवरवाहना ।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ॥
****************************************
7. कालरात्रि
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना
खरास्थिता ।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी ॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा ।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी ॥
****************************************
8. महागौरी
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः ।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ॥
****************************************
9. सिद्धिदात्री
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि ।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदाय
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666

Address

Chandigarh Road
Ludhiana
141010

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Jai Maa Kali astrologer posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Share on Facebook Share on Twitter Share on LinkedIn
Share on Pinterest Share on Reddit Share via Email
Share on WhatsApp Share on Instagram Share on Telegram