Jai Maa Kali astrologer

Jai Maa Kali  astrologer MAA KI KIRPA
(1)

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27/01/2026

जागरण को मज़ाक ना समझे
जागरण इक तपस्या हैं तमाशा नही
जागरण में रात्रि भोजन दाल फुल्का होना चाहिए.
घरेलू जागरण पर 400 लोग आए खाना खा के चले गए
जागरण पर उनमें से सिर्फ 19, 20 लोग बैठे सोचो जागरण किया के पार्टी ??

इस लिए बन्द होना चाहिए ये सब
सिर्फ और सिर्फ माँ का गुणगान करें

"और आप सब से हाथ जोड कर विनती है कि जागरण में माँ के, शिव जी के या अन्य कोई भी सरूप न बनवाये और न ही बनने दें।"

हमारे पूर्वज घर से, गाँव से,शहरो से क्षेत्र से भयंकर महामारी जैसे चेचक,भयंकर बुखार, टीबी, इतियादी को भगाने हेतू सूख शांति समृद्धि के लिए माँ भगवती का गुणगान सारी रात माँ की पवित्र ज्योत जगा माँ भगवती को प्रसन्न करते थे परंतु आज....

माँ भगवती के जागरण को ना समझते हुए जाने अनजाने में आज कल हम जागरण नही तमाशे कर रहे है और पाप के भागीदार बन रहे हैं। जागरण की प्रथा, विधि को जाने बिना हम नाच कर पैसे लूटा कर अपने ही ग्रहों को नचवा कर आधी रात को बुरी बुरी आवाज़े भूत प्रेतों को देवी देवताओं के साथ नचाकर उनका अपमान कर रहे है व पूण्य के बजाय पाप केभागीदार बन रहे है।

जागरण की प्रथा माँ भगवती का आव्हान माँ भगवती का गुणगान करना है जिससे माँ प्रसन्न हो हमे आशीर्वाद व सुख समृद्धि दे । इस सच्चाई को हर भाई भहन को बताना हमारा कर्तव्य है, जो कि कोई गलती ना करे, विधिवत माँ भगवती का जागरण माँ का सारी रात गुणगाण कर के करे।

जागरण में जब माँ ज्वाला स्वरूप ज्योति🔥प्रज्वलित हो उस ज्योति के सामने तमाशे ना करे उसे पीठ ना दिखाए सिर्फ तो सिर्फ भगवती गुणगाण करे।

माँ भगवती जागरण श्रद्धा, प्रेम भाव की साधना तपस्या पध्वति हैं लाखों की सजावटें करना दिखावटी भावो से माँ प्रसन्न नही होती वो तो प्रेम की भूखी हैं ।
कम से कम पैसों से प्रेम भाव से माँ की पवित्र जोत जगा मन मे और पुकारो दिल से गुणगाण करो माँ चली आएगी दौड़ी आएगी।

जय माता दी
माँ के चरणों के दास
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666

25/01/2026
19/01/2026

*गुप्त नवरात्रि माघ विशेष 😗
माघ घटस्थापना सोमवार 19, जनवरी 2026
घटस्थापना मुहूर्त - 06:53 से 10:34 = अवधि - 03 घण्टे 41 मिनट्स
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त - 12:02 से 12:47 = अवधि - 00 घण्टे 44 मिनट्स
घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर है।
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ - 19, जनवरी 2026 को 01:21 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त - 20, जनवरी 2026 को 02:14 बजे
सोमवार माघ गुप्त नवरात्रि 19 से 28 जनवरी तक रहेगी |

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1. माघ गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्या पूजा
पहला दिन- मां काली - गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा के दौरान उत्तर दिशा की ओर मुंह करके काली हकीक माला से पूजा करनी है. इस दिन काली माता के साथ आप भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए. ऐसा करने से आपकी किस्मत चमक जाएगी. शनि के प्रकोप से भी छुटकारा मिल जाएगा. नवरात्रि में पहले दिन दिन मां काली को अर्पित होते हैं वहीं बीच के तीन दिन मां लक्ष्मी को अर्पित होते हैं और अंत के तीन दिन मां सरस्वति को अर्पित होते हैं.
मां काली की पूजा में मंत्रों का उच्चारण करना है।

मंत्र- क्रीं ह्रीं काली ह्रीं क्रीं स्वाहा।
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहा।

2. दूसरी महाविद्या मां तारा- दूसरे दिन मां तारा की पूजा की जाती है. इस पूजा को बुद्धि और संतान के लिये किया जाता है. इस दिन एमसथिस्ट व नीले रंग की माला का जप करने हैं।

मंत्र- ॐ ह्रीं स्त्रीं हूं फट।

3. तीसरी महाविद्या मां त्रिपुरसुंदरी और मां शोडषी पूजा- अच्छे व्यक्ति व निखरे हुए रूप के लिये इस दिन मां त्रिपुरसुंदरी की पूजा की जाती है. इस दिन बुध ग्रह के लिये पूजा की जाती है. इस दिन रूद्राक्ष की माला का जप करना चाहिए।

मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीये नम:।

04. चौथी महाविद्या मां भुवनेश्वरी पूजा- इस दिन मोक्ष और दान के लिए पूजा की जाती है. इस दिन विष्णु भगवान की पूजा करना काफी शुभ होगा. चंद्रमा ग्रह संबंधी परेशानी के लिये इस पूजा की जाती है।.
मंत्र- ह्रीं भुवनेश्वरीय ह्रीं नम:।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नम:।

5. पांचवी महाविद्या माँ छिन्नमस्ता- नवरात्रि के पांचवे दिन माँ छिन्नमस्ता की पूजा होती है. इस दिन पूजा करने से शत्रुओं और रोगों का नाश होता है. इस दिन रूद्राक्ष माला का जप करना चाहिए. अगर किसी का वशीकरण करना है तो उस दौरान इस पूजा करना होता है. राहू से संबंधी किसी भी परेशानी से छुटकारा मिलता है. इस दिन मां को पलाश के फूल चढ़ाएं।

मंत्र- श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैररोचनिए हूं हूं फट स्वाहा।

6. छठी महाविद्या मां त्रिपुर भैरवी पूजा- इस दिन नजर दोष व भूत प्रेत संबंधी परेशानी को दूर करने के लिए पूजा करनी होती है. मूंगे की माला से पूजा करें. मां के साथ बालभद्र की पूजा करना और भी शुभ होगा. इस दिन जन्मकुंडली में लगन में अगर कोई दोष है तो वो सभ दूर होता है।

मंत्र- ॐ ह्रीं भैरवी क्लौं ह्रीं स्वाहा।

7. सांतवी महाविद्या मां धूमावती पूजा- इस दिन पूजा करने से द्ररिता का नाश होता है. इस दिन हकीक की माला का पूजा करें।

मंत्र- धूं धूं धूमावती दैव्ये स्वाहा।

8. आंठवी महाविद्या - मां बगलामुखी- माँ बगलामुखी की पूजा करने से कोर्ट-कचहरी और नौकरी संबंधी परेशानी दूर हो जाती है. इस दिन पीले कपड़े पहन कर हल्दी माला का जप करना है. अगर आप की कुंडली में मंगल संबंधी कोई परेशानी है तो मा बगलामुखी की कृपा जल्द ठीक हो जाएगा।

मंत्र-ॐ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदृष्टानां मुखं, पदम् स्तम्भय जिव्हा कीलय, शत्रु बुद्धिं विनाशाय ह्रलीं ऊँ स्वाहा।

09. नौवीं महाविद्या - मां मतांगी- मां मतांगी की पूजा धरती की ओर और मां कमला की पूजा आकाश की ओर मुंह करके पूजा करनी चाहिए. इस दिन पूजा करने से प्रेम संबंधी परेशानी का नाश होता है. बुद्धि संबंधी के लिये भी मां मातंगी पूजा की जाती है।
मंत्र- क्रीं ह्रीं मातंगी ह्रीं क्रीं स्वाहा।
दसवी महाविद्या - मां कमला- मां कमला की पूजा आकाश की ओर मुख करके पूजा करनी चाहिए. दरअसल गुप्त नवरात्रि के नौंवे दिन दो देवियों की पूजा करनी होती है।

मंत्र- क्रीं ह्रीं कमला ह्रीं क्रीं स्वाहा

नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन पूर्णाहुति हवन एवं कन्याभोज कराकर किया जाना चाहिए। पूर्णाहुति हवन दुर्गा सप्तशती के मन्त्रों से किए जाने का विधान है किन्तु यदि यह संभव ना हो तो देवी के 'नवार्ण मंत्र', 'सिद्ध कुंजिका स्तोत्र' अथवा 'दुर्गाअष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र' से हवन संपन्न करना श्रेयस्कर रहता है।

10. गुप्त नवरात्रि की देवियां , मां काली, तारादेवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी माता, छिन्न माता, त्रिपुर भैरवी मां, धुमावती माता, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी।

11 .महत्व ... देवी भागवत पुराण के अनुसार जिस तरह वर्ष में 4 बार नवरात्रि आती है और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के 9 रूपों की पूजा होती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है।

12. गुप्त नवरात्रि विशेष कर तांत्रिक कियाएं, शक्ति साधनाएं, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है।

13 . इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग दुर्लभ शक्तियों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान कई साधक महाविद्या के लिए मां दुर्गा के सभी स्वरूपों का पूजन करते हैं।

14 . अष्टमी या नवमी के दिन कन्या-पूजन के साथ नवरात्रि व्रत का उद्यापन करने की मान्यता है। नवरात्रि उद्यापन में कुंआरी कन्याओं को भोजन कराकर यथाशक्ति दान, दक्षिणा, वस्त्र और आभूषण तथा श्रृंगार सामग्री भेंट करने से मां भगवती की अपार कृपा मिलती है।

15 . गुप्त नवरात्रि में भी नौ दिनों तक क्रमानुसार देवी के स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन दिनों में मां दुर्गा की आराधना गुप्त रूप से की जाएगी।

16 . तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करने के लिए ये महा अवसर है।

17 . इन नौ दिनों तक माता के 32 नाम के साथ उनके मंत्र का 108 बार जाप भी करें।

18 सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का 18 बार पाठ कीजिए

19. यदि संभव हो तो दुर्गासप्तशती का एक पाठ प्रातः और एक रात्रि में कीजिए।

20 . ब्रम्ह मुहूर्त में श्रीरामरक्षास्तोत्र का पाठ करने से दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का नाश होता है।

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कलश की स्थापना और उसके पूजन के समय पुजारी शास्त्रसम्मत कुछ मंत्रों का उच्चारण करते हैं।

कलशस्य मुखे विष्णु : कंठे रुद्र: समाश्रित। मूल तस्य, स्थिति ब्रह्मा मध्ये मातगण: समाश्रित:।।
कलश के मुख में श्री विष्णु विराजमान हैं।
भ्रात: कान्चलेपगोपितबहिस्ताम्राकृते सर्वतो।
मा भैषी: कलश: स्थिरो भव चिरं देवालयस्योपरि।।
ताम्रत्वं गतमेव कांचनमयी कीर्ति: स्थिरा ते धुना।
नान्स्तत्त्वविचारणप्रणयिनो लोका बहिबरुद्धय:।।

कलश भारतीय संस्कृति का अग्रगण्य प्रतीक है इसलिए तो महत्वपूर्ण सभी शुभ प्रसंगों में पुण्याहवाचन कलश की साक्षी में तथा सान्निध्य में होता है।

प्रत्येक शुभ प्रसंग या कार्य के आरंभ में जिस तरह विघ्नहर्ता गणोशजी की पूजा की जाती है उसी तरह कलश की भी पूजा होती है। देवपूजा के स्थान पर इस कलश को अग्रस्थान प्राप्त होता है। पहले इसका पूजन, फिर इसे नमस्कार और बाद में विघ्नहर्ता गणपति को नमस्कार! ऐसा प्राधान्यप्राप्त कलश और उसके पूजन के पीछे अति सुंदर भाव छिपा हुआ है।

स्वस्तिक चिह्न अंकित करते ही जिस तरह सूर्य आकर उस पर आसनस्थ होता है उसी तरह कलश को सजाते ही वरुणदेव उसमें विराजमान होते हैं। जो संबंध कमल-सूर्य का है वही संबंध कलश वरुण का है। वास्तव में कलश यानी लोटे में भरा हुआ या घड़े में भरा हुआ साधारण जल। परंतु कलश की स्थापना के बाद उसके पूजन के बाद वह जल सामान्य जल न रहकर दिव्य ओजस्वी बन जाता है।

तत्वायामि ब्रह्मणा वंदमानस्तदाशास्ते यजमानो हविर्भि:।
अहेळमानो वरुणोहबोध्यु रुशंसा मा न आयु: प्रमोषी:।।

हे वरुणदेव! तुम्हें नमस्कार करके मैं तुम्हारे पास आता हूं। यज्ञ में आहुति देने वाले की याचना करता हूं कि तुम हम पर नाराज मत होना। हमारी उम्र कम नहीं करना आदि वैदिक दिव्य मंत्रों से भगवान वरुण का आवाहन करके उनकी प्रस्थापना की जाती है और उस दिव्य जल का अंग पर अभिषेक करके रक्षा के लिए प्रार्थना की जाती है। कलश पूजन की प्रार्थना के श्लोक भी भावपूर्ण हैं। उसकी प्रार्थना के बाद वह कलश केवल कलश नहीं रहता, किंतु उसमें पिंड ब्रह्मांड की व्यापकता समाहित हो जाती इस

कलशस्य मुखे विष्णु: कंठे रुद्र: समाश्रित:।
मूले तत्र स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणा: स्मृता:।।

कुक्षौ तु सागरा: सर्वे सप्तद्वीपा वसुंधरा।
ऋग्वेदोअथ यजुर्वेद: सामवेदो ह्यथवर्ण:।।

अंगैच्श सहिता: सर्वे कलशं तु समाश्रिता:।
अत्र गायत्री सावित्री शांतिपृष्टिकरी तथा।

आयांतु मम शांत्यर्थ्य दुरितक्षयकारका:।।
सर्वे समुद्रा: सरितस्तीर्थानि जलदा नदा:।
आयांतु मम शांत्यर्थ्य दुरितक्षयकारका:।।

हमारे ऋषियों ने छोटे से पानी के लोटे में सभी देवता, वेद, समुद्र, नदियां, गायत्री, सावित्री आदि की स्थापना कर पापक्षय और शांति की भावना से सभी को एक ही प्रतीक में लाकर जीवन में समन्वय साधा है। बिंदु में सिंधु के दर्शन कराए हैं।
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कब होते हैं गुप्त नवरात्र ?

चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र के बारे में तो सभी जानते ही हैं जिन्हें वासंती और शारदीय नवरात्र भी कहा जाता है लेकिन गुप्त नवरात्र आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में मनाये जाते हैं।

गुप्त नवरात्र पौराणिक कथा -

गुप्त नवरात्र के महत्व को बताने वाली एक कथा भी पौराणिक ग्रंथों में मिलती है कथा के अनुसार एक समय की बात है कि ऋषि श्रंगी एक बार अपने भक्तों को प्रवचन दे रहे थे कि भीड़ में से एक स्त्री हाथ जोड़कर ऋषि से बोली कि गुरुवर मेरे पति दुर्व्यसनों से घिरे हैं जिसके कारण मैं किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्य व्रत उपवास अनुष्ठान आदि नहीं कर पाती।
मैं मां दुर्गा की शरण लेना चाहती हूं लेकिन मेरे पति के पापाचारों से मां की कृपा नहीं हो पा रही मेरा मार्गदर्शन करें।
तब ऋषि बोले वासंतिक और शारदीय नवरात्र में तो हर कोई पूजा करता है सभी इससे परिचित हैं।
लेकिन इनके अलावा वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्र भी आते हैं इनमें 9 देवियों की बजाय 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है।
यदि तुम विधिवत ऐसा कर सको तो मां दुर्गा की कृपा से तुम्हारा जीवन खुशियों से परिपूर्ण होगा। ऋषि के प्रवचनों को सुनकर स्त्री ने गुप्त नवरात्र में ऋषि के बताये अनुसार मां दुर्गा की कठोर साधना की स्त्री की श्रद्धा व भक्ति से मां प्रसन्न हुई और कुमार्ग पर चलने वाला उसका पति सुमार्ग की ओर अग्रसर हुआ उसका घर खुशियों से संपन्न हुआ ।

मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान अन्य नवरात्रों की तरह ही पूजा करनी चाहिए। नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा यानि पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

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मेष मेष राशि के जातक शक्ति उपासना के लिए द्वितीय महाविद्या तारा की साधना करें। ज्योतिष के अनुसार इस महाविद्या का स्वभाव मंगल की तरह उग्र है। मेष राशि वाले महाविद्या की साधना के लिए इस मंत्र का जप करें।
मंत्र ह्रीं स्त्रीं हूं फट् ।
वृषभ वृषभ राशि वाले धन और सिद्धि प्राप्त करने के लिए श्री विद्या यानि षोडषी देवी की साधना करें और इस मंत्र का जप करें।
मंत्र ऐं क्लीं सौ: ।
मिथुन अपना गृहस्थ जीवन सुखी बनाने के लिए मिथुन राशि वाले भुवनेश्वरी देवी की साधना करें। साधना मंत्र इस प्रकार है।
मंत्र ऐं ह्रीं ।
कर्क इस नवरात्रि पर कर्क राशि वाले कमला देवी का पूजन करें। इनकी पूजा से धन व सुख मिलता है। नीचे लिखे मंत्र का जप करें।
मंत्र ॐ श्रीं ।
सिंह ज्योतिष के अनुसार सिंह राशि वालों को मां बगलामुखी की आराधना करना चाहिए। जिससे शत्रुओं पर विजय मिलती है।
मंत्र ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिह्वाम कीलय-कीलय बुद्धिम विनाशाय ह्लीं ॐ नम: ।
कन्या आप चतुर्थ महाविद्या भुवनेश्वरी देवी की साधना करें आपको निश्चित ही सफलता मिलेगी।
मंत्र ऐं ह्रीं ऐं
तुला तुला राशि वालों को सुख व ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए षोडषी देवी की साधना करनी चाहिए।
मंत्र ऐं क्लीं सौ: ।
वृश्चिक वृश्चिक राशि वाले तारा देवी की साधना करें। इससे आपको शासकीय कार्यों में सफलता मिलेगी।
मंत्र श्रीं ह्रीं स्त्रीं हूं फट् ।
धनु धन और यश पाने के लिए धनु राशि वाले कमला देवी के इस मंत्र का जप करें।
मंत्र श्रीं ।
मकर मकर राशि के जातक अपनी राशि के अनुसार मां काली की उपासना करें।
मंत्र क्रीं कालीकाये नम: ।
कुंभ कुंभ राशि वाले भी काली की उपासना करें इससे उनके शत्रुओं का नाश होगा।
मंत्र क्रीं कालीकाये नम: ।
मीन इस राशि के जातक सुख समृद्धि के लिए कमला देवी की उपासना करें।
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
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गुप्त नवरात्रि माघ दिन 1 घटस्थापना 19 जनवरी 2026 सोमवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 2 द्वितीया 20 जनवरी 2026 मंगलवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 3 तृतीया 21 जनवरी 2026 बुधवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 4 चतुर्थी 22 जनवरी 2026 गुरुवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 5 पंचमी 23 जनवरी 2026 शुक्रवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 6 षष्ठी 24 जनवरी 2026 शनिवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 7 सप्तमी 25 जनवरी 2026 रविवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 8 अष्टमी 26 जनवरी 2026 सोमवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 9 नवमी 27 जनवरी 2026 मंगलवार
गुप्त नवरात्रि माघ दिन 10 दशमी नवरात्रि पारणा 28 जनवरी 2026 बुधवार

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मां दुर्गा के नवरुपों की उपासना निम्न मंत्रों के द्वारा की जाती है. प्रथम दिन शैलपुत्री की एवं क्रमशः नवें दिन सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है -

1. शैलपुत्री
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् । वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ॥
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2. ब्रह्मचारिणी
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू ।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ॥
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3. चन्द्रघण्टा
पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता ।
प्रसादं तनुते मह्यां चन्द्रघण्टेति विश्रुता ॥
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4. कूष्माण्डा
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च ।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥
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5. स्कन्दमाता
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया ।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ॥
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6. कात्यायनी
चन्द्रहासोज्वलकरा शार्दूलवरवाहना ।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ॥
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7. कालरात्रि
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना
खरास्थिता ।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी ॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा ।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी ॥
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8. महागौरी
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः ।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ॥
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9. सिद्धिदात्री
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि ।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदाय
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666

14/01/2026

लक्षणों से ग्रहों की खराब स्थिति का पता करना ........

किसी मनुष्य के जीवन में कौन-सा ग्रह अशुभ प्रभाव डाल रहा है, इसका औसत निर्धारण उसके जीवन में घटने वाली घटनाओं के आधार पर भी ज्ञात किया जा सकता है। विभिन्न ग्रहों की अशुभ स्थिति पर निम्नलिखित लक्षण प्राप्त होते हैं-

1. सूर्य-तेज का अभाव, आलस्य, अकड़न, जड़ता, कान्तिहीनता, म्लान छवि, मुख (कण्ठ) में हमेशा थूक का आना। लाल गाय या वस्तुओं का खो जाना या नष्ट हो जाना, भूरी भैंस या इस रंग के सामान की क्षति। हृदय क्षेत्र में दुर्बलता का अनुभव।

2. चन्द्र-दुखी, भावुकता, निराशा, अपनी व्यथा बताकर रोना, अनुभूति क्षमता का ह्यास, पालतू पशुओं की मृत्यु, जल का अभाव (घर में), तरलता का अभाव (शरीर में), मानसिक विक्षिप्तता की स्थिति, मानसिक असन्तुलन या हताशा के कारण गुमसुम रहना, घर के क्षेत्र में कुआं या नल का सूखना, अपने प्रभाव क्षेत्र में तालाब का सूखना आदि।

3. मंगल-दृष्टि दुर्बलता, चक्षु (आंख) क्षय, शरीर के जोड़ों में पीड़ा और अकड़न,कमर एवं रीढ़ की हड्डी में दर्द तथा अकड़न, रक्त की कमी, त्वत्ता के रंग का पीलापन पीलिया होना, शारीरिक रूप से सबल होने पर भी सन्तानोत्पत्ति की क्षमता का होना की दुर्बलता, नपुंसकता (शिथिलता), बन्ध्यापन, पति पश्च की हानि स्वास्थ्य पर आदि)।

4. बुध- अस्थि दुर्बलता, दन्तक्षय, प्राणशक्ति का क्षय होना, हकलाहट, वाणी, हिचकी, अपनी बातें कहने में गड़बड़ा जाना, नाक से खून बहना, रति शक्ति का क्षय (स्त्री-पुरुष दोनों की), नपुंसकता (स्नायविक), स्नायुओं का कमजोर पड़ना, बन्ध्यापन (स्नायविक कंधों का दर्द, गर्दन की अकड़न, वैवाहिक सम्बन्ध में क्षुब्धता, व्यापार की भागीदारी में हानि रोजगार में अकड़न, शत्रु उपद्रव, परस्त्री लोलुपता या सम्बन्ध, परपुरुष लोलुपता या मम्बन्ध, अहंकार से हानि, पड़ोसी से अनबन रहना, कर्ज।

5. बृहस्पति-चोटी के बाल का उड़ना, धन या सोने का खो जाना या चोरी हो जाना या हानि हो जाना, शिक्षा में रुकावट, अपयश, व्यर्थ का कलंक, सांस का दोष, अर्थहानि, परतन्त्रता, खिन्नता, प्रेम में असफलता, प्रियतमा की हानि (मृत्यु या अनबन), प्रियमत की हानि (मृत्यु या अनबन), जुए में हानि, सन्तानहानि (नपुंसकता, बन्ध्यापन, अल्पजीवन), आत्मिक शक्ति का अभाव, बुरे स्वप्नों का आना आदि।

6. शुक्र-स्वप्नदोष, लिंगदोष, परस्त्री लोलुपता, परपुरुष लोलुपता, शुक्राणुहीनता या दुर्बलता, नाजायज सन्तान, त्वचा रोग, अंगूठे की हानि (हाथ), पड़ोसी से हानि, कर्ज की अधिकता, परिश्रम करने पर भी आर्थिक लाभ नहीं, भूमि हानि आदि।

7. शनि-व्यवसाय में हानि, अर्थहानि, रोजगार में हानि, अधिकार हानि, अपयश, मान-सम्मान की हानि, कृषि भूमि की हानि, बुरे कार्यों में प्रवृत्ति, मकान हानि, अधार्मिक प्रवृत्ति (नास्तिकता), रिश्वत लेते पकड़े जाना या रिश्वत में हंगामा और अपयश, रोग, आकस्मिक मृत्यु, ऊंचाई से गिरकर शरीर या प्राणहानि, अचानक धनहानि, दुर्घटना, निराशा, घोर अपमान, निन्दक प्रवृत्ति, राजदण्ड।

8. राहु-सन्तानहीनता, विद्याहानि, बुद्धिहानि, उज्जड़ता, अरुचि, पूर्ण नपुंसकता,बन्ध्यापन, अन्याय करने की प्रवृत्ति, क्रूरता, रोजगारहानि, भूमिहानि, आकस्मिक अर्थहानि, राजदण्ड, शत्रूपीड़ा, बदनामी, कारावास का दण्ड, घर से निकाला, चोरी हो जाना, चोर-डाकू से हानि, दुःस्वप्न, अनिद्रा, मानसिक असंयता। एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 075088 66666

9. केतु-रोग, ऋण की बढ़ोत्तरी, लड़ाई-झगड़े से हानि, भाई से दुश्मनी, घोर दुःख, नौकरों की कमी, अस्त्र से शारीरिक क्षति, सांप द्वारा काटना, आग से हानि, शत्रु से हानि, अन्याय की प्रवृत्ति, पाप-प्रवृत्ति, मांस खाने की प्रवृत्ति, राजदण्ड (कैद)।

विशेष - उपर्युक्त लक्षणों के अनुसार बिना कुण्डली देखे भी आप जान सकते हैं कि आपको किस ग्रह के अशुभ प्रभाव का उपचार करना चाहिए।
ज्ञान दर्पण
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666

14/01/2026

*मकर संक्रांति के 5 खास उपाय, हर संकट से निजात दिलाए*
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*मकर संक्रांति का दिन आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद शक्तिशाली माना जाता है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। शास्त्रों के अनुसार, यदि इस दिन कुछ विशेष उपाय किए जाएं, तो जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर हो सकते हैं। इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026, दिन बुधवार को मनाया जा रहा है।*
*5 खास उपाय दिए जा रहे हैं:-*

*⚜️उपाय 1. काले तिल का दान और प्रयोग:-*
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मकर संक्रांति को 'तिल संक्रांति' भी कहा जाता है। इस दिन पानी में काले तिल डालकर स्नान करना और तिल का दान करना शनि दोष से मुक्ति दिलाता है। तिल और गुड़ के लड्डू खाने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और पुराने रोगों से निजात मिलती है।

*⚜️उपाय 2. सूर्य देव को अर्घ्य देना:-*
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चूंकि यह सूर्य का उत्सव है, इसलिए सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत/ चावल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय *•'ॐ घृणि सूर्याय नमः'* का जाप करें। इससे मान-सम्मान में वृद्धि होती है और करियर की बाधाएं दूर होती हैं।

*⚜️उपाय 3. पितरों का तर्पण:-*
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मकर संक्रांति के दिन पितरों के निमित्त तर्पण या जल दान करने से पितृ दोष समाप्त होता है। माना जाता है कि इसी दिन गंगा जी स्वर्ग से उतरकर राजा भगीरथ के पूर्वजों का उद्धार करने समुद्र में मिली थीं। इसलिए इस दिन किया गया दान पूर्वजों को शांति प्रदान करता है।

*⚜️उपाय 4. 14 वस्तुओं का दान:-*
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उत्तर भारत में इस दिन 14 की संख्या का विशेष महत्व है। सौभाग्य और संकटों से मुक्ति के लिए सुहागिन महिलाएं या घर के बड़े बुजुर्ग 14 तरह की खाने की चीजें या उपयोग की वस्तुएं- जैसे कंबल, बर्तन, या फल जरूरतमंदों को दान करते हैं। इससे रुके हुए काम पूरे होते हैं।

*⚜️उपाय 5. खिचड़ी का दान और सेवन:-*
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इस दिन चावल और उड़द की दाल की खिचड़ी बनाना और दान करना अत्यंत शुभ है। उड़द की दाल का संबंध शनि से और चावल का चंद्रमा से है। खिचड़ी खाने और बांटने से ग्रह दोष शांत होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

शास्त्रों में मकर संक्रांति को महादान पर्व कहा गया है, क्योंकि इस दिन किए गए दान, जप, स्नान और पूजा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

*विशेष बात:-* `इस दिन भूलकर भी किसी भिखारी या जरूरतमंद को खाली हाथ न लौटाएं। अपनी क्षमता अनुसार कुछ न कुछ दान अवश्य करें।`
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
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MAA KI KIRPA

05/01/2026

*सकट चौथ 2026: सकट चौथ व्रत कब है? जानें पूजा विधि, व्रत नियम, पूजन सामग्री और सबकुछ*
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*सकट चौथ 2026: साल 2026 में सकट चौथ का व्रत 6 जनवरी को रखा जाएगा. यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें ‘विघ्नहर्ता’ कहा जाता है. सकट चौथ का व्रत संतान की लंबी उम्र, सुखी जीवन और संकटों से रक्षा के लिए रखा जाता है.*

*धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि सकट चौथ व्रत पूजा के साथ दान भी करना चाहिए, क्योंकि इस दिन दान का विशेष महत्व है. आइए जानते है सकट चौथ व्रत से जुड़ी पूरी जानकारी…*

*⚜️सकट चौथ व्रत कब है?*
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पंचांग के अनुसार, माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 जनवरी 2026 को सुबह 8 बजकर 01 मिनट से होगी, जो 7 जनवरी 2026 को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. ऐसे में *•सकट चौथ का व्रत 6 जनवरी 2026 दिन मंगलवार को रखा जाएगा.*

*🪔सकट चौथ व्रत पूजा विधि*
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* ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें.

* स्वच्छ वस्त्र पीले या लाल कलर के धारण करें.

* पूजा स्थल पर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

* गणेश जी को जल, अक्षत, सिंदूर, हल्दी, दूर्वा, फूल और तिल अर्पित करें.

* मोदक, लड्डू या तिल-गुड़ के लड्डू का भोग लगाएं.

* दिनभर व्रत रखें और भगवान गणेश का स्मरण करते रहें.

*⚜️सकट चौथ व्रत नियम*
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* माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखा जाता है.

* संतान की रक्षा, दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत का संकल्प लें.

* दिनभर सत्य, संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करें.

* क्रोध, निंदा और अपशब्दों से बचें, किसी का अपमान न करें.

* दिनभर अनाज, नमक, तामसिक भोजन से परहेज करें.

* व्रत के दौरान फल, दूध, साबूदाना, कंद-मूल ले सकते हैं.
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
*⚜️सकट चौथ व्रत पारण के नियम*
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* चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलें.

* पहले गणेश जी का प्रसाद ग्रहण करें.

* व्रत खोलते समय शांत और श्रद्धा भाव रखें.

*🌕चंद्र दर्शन का नियम*
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* रात्रि में चंद्रमा के दर्शन के बिना व्रत न खोलें.

* चंद्र देव को जल, दूध या तिल मिश्रित जल से अर्घ्य दें.

*🪔सकट चौथ व्रत पूजा की सामग्री*
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* भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र

* संकटा माता का चित्र

* दूर्वा घास

* काला तिल

* गुड़, लड्डू या मोदक

* लाल फूल

* दीपक, धूप, अगरबत्ती

* जल, अक्षत

*सकट चौथ व्रत संध्या काल की पूजा विधि*
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* सूर्यास्त के बाद ही सकट चौथ की पूजा करें.

* सूर्यास्त के बाद पूजा स्थान को स्वच्छ करें.

* चौकी पर भगवान गणेश व संकटा माता की स्थापना करें.

* गणेश जी को जल, अक्षत, फूल, दूर्वा अर्पित करें.

* गणेश जी को तिल-गुड़ या मोदक का भोग लगाएं.

* *•"ॐ गण गणपतये नमः"* मंत्र का जप करें.

* संकटा माता की पूजा करें और संतान की मंगल कामना करें.

* पूजा के बाद में सकट चौथ व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें.

*🌕चंद्र दर्शन और अर्घ्य*
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* रात में चंद्रमा के दर्शन करें.

* चंद्र देव से सुख-शांति की प्रार्थना करें.

*🪔सकट चौथ के दिन तिल और गुड़ का दान*
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सकट चौथ को तिलकुटा चौथ भी कहा जाता है, इस दिन तिल का दान करना सबसे शुभ माना जाता है. सकट चौथ के दिन तिल और गुड़ का दान जरूर करना चाहिए, ऐसा करने से शनि दोष से राहत मिलती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.

*🪔सकट चौथ के दिन गर्म कपड़ों का दान*
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सकट चौथ माघ महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ता है, जब ठंड बहुत होती है. माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को कंबल, गर्म कपड़े व जूते-चप्पल का दान करने से पितृ दोष दूर होता है और संतान पर आने वाली मुश्किलें टल जाती हैं.
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
*🪔सकट चौथ के दिन अन्न का दान*
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सकट चौथ के दिन अनाज का दान जरूर करना चाहिए. ऐसा करने से घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती है, इस दिन भूखे को भोजन कराने पर तरक्की के द्वार खुलते है और हमेशा के लिए आर्थिक तंगी राहत मिलती है.

*🪔सकट चौथ के दिन किए जाने वाले ज्योतिषीय उपाय*
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बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश को *•21 दूर्वा* की गांठें *•‘ऊँ गं गणपतये नमः’* मंत्र का जप करते हुए अर्पित करें. अगर आपके जीवन में बहुत अधिक संघर्ष है, तो गणेश जी को शमी के पत्ते चढ़ाएं.
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा
📲7508866666
*🚩ऊँ_श्रीगणेशाय_नम:🚩*
🙏🏼🙏🏼🙏🏼
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04/01/2026

जोड़ो के दर्द की समस्या और ज्योतिष -

वैसे तो हमारे स्वास्थ से जुडी कोई भी समस्या जीवन की गति को धीमा कर ही देती है पर जोड़ो के दर्द या जॉइंट्स पेन की समस्या हमारे जीवन में एक बोझ की तरह होती है जिससे जीवन ठहर सा जाता है घुटनो के दर्द की समस्या बहुत से लोगो के जीवन में एक बड़ी बाधा बनी रहती है तो बहुत से लोग कमर दर्द के कारण कितनी ही समस्याओं का सामना करते हैं तो आये देखते हैं कौनसे ग्रहयोग व्यक्ति को जोड़ो के दर्द की समस्या देते हैं -
"ज्योतिष की चिकित्सीय शाखा हमारे स्वास्थ और शारीरिक गतिविधियों को समझने तथा उनके निदान में अपनी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ज्योतिष में "शनि" को हड्डियों के जोड़ या जॉइंट्स का कारक माना गया है हमारे शरीर में हड्डियों का नियंत्रक ग्रह तो सूर्य है पर हड्डियों के जोड़ों की स्थिति को "शनि" नियंत्रित करता है अतः हमारे शरीर में हड्डियों के जोड़ या जॉइंट्स की मजबूत या कमजोर स्थिति हमारी कुंडली में स्थित 'शनि" के बल पर निर्भर करती है कुंडली में शनि पीड़ित स्थिति में होने पर व्यक्ति अक्सर जॉइंट्स पेन या जोड़ो के दर्द से परेशान रहता है और कुंडली में शनि पीड़ित होने पर ही घुटनो के दर्द, कमर दर्द, गर्दन के दर्द, रीढ़ की हड्डी की समस्या, कोहनी और कंधो के जॉइंट्स में दर्द के जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसके अतिरिक्त कुंडली का "दसवा भाव" घुटनो का प्रतिनिधित्व करता है छटा भाव कमर का प्रतिनिधित्व करता है तीसरा भाव कन्धों का प्रतिनिधित्व करता है और सूर्य को हड्डियों और केल्सियम का कारक माना गया है अतः इन सबकी भी यहाँ सहायक भूमिका है परंतु जोड़ो के दर्द की समस्या में मुख्य भूमिका "शनि" की ही होती है क्योंकि शनि को हड्डियों के जोड़ो का नैसर्गिक कारक माना गया है और शनि हमारे शरीर में उपस्थित हड्डियों के सभी जॉइंट्स का प्रतिनिधित्व करता है अतः कुंडली में शनि पीड़ित होने पर ही व्यक्ति को दीर्घकालीन या निरन्तर जॉइंट्स पेन की समस्या बनी रहती है"

1. यदि शनि कुंडली में छटे या आठवे भाव में हो तो ऐसे में व्यक्ति को घुटनो, कमर आदि के जोड़ो के दर्द की समस्याएं होती हैं।

2. शनि यदि नीच राशि (मेष) में हो तो भी व्यक्ति जोड़ो के दर्द से समस्याग्रस्त रहता है।

3. शनि का केतु और मंगल के योग से पीड़ित होना भी जॉइंट्स पेन की समस्या देता है। 7508866666

4. शनि यदि सूर्य से पूर्णअस्त हो तो भी जोड़ो के दर्द की समस्या रहती है।

5. शनि का अष्टमेश या षष्टेश के साथ होना भी जोड़ो में दर्द की समस्या देता है।

6. यदि कुंडली के दशम भाव में कोई पाप योग बन रहा हो या दशम भाव में कोई पाप ग्रह नीच राशि में हो तो भी घुटनो के दर्द की समस्या रहती है।

7. छटे भाव में पाप योग बनना कमर दर्द की समस्या देता है।

8. यदि कुंडली में शनि पीड़ित स्थिति में हो तो शनि की दशा में भी जॉइंट्स पेन की समस्या बनी रहती है।
वैसे तो प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में ग्रहस्थिति भिन्न होने के कारण व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपाय भी भिन्न होते हैं परंतु यहाँ हम जॉइंट्स पेन के लिए कुछ सामान्य ज्योतिषीय उपाय बता रहें हैं जिन्हें प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है -
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
शांत्यर्थ उपाय
🔹🔹🔸🔸
1. ॐ शं शनैश्चराय नमः का नियमित जाप करें।

2. शनिवार को मन्दिर में पीपल पर सरसो के तेल का दिया जलाएं।

3. शनिवार को संध्याकाल में सरसो के तेल का परांठा कुत्ते को खिलाएं।

4. किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श के बाद शनि का कोई रत्न भी धारण कर सकते हैं पर किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बिना शनि का कोई भी रत्न ना पहने।

5. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

6. शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार से आरंभ कर कम से कम तीन शनि सर से पैर तक काल धागा नापकर उसे जटा वाले नारियल पर लपेट सर से 11 बार मनोकामना बोलकर उतार बहते जल में प्रवाहित करें।

7. सप्त धान्य एवं काली वस्तुओ का दान करने से भी काफी फर्क पड़ता है।
*जय माँ काली ज्योतिष केंद्र **
*एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666*

29/12/2025

*सब को सुबह उठते हीं "राधे राधे" अवश्य बुलाए*
*फिर भले कोई "राधे राधे" लिख आपकी "राधे राधे" स्वीकार "करे या न करे"*
*जो करेगा "याद रखना" वो अवश्य "राधे राधे" लिख जवाब दे अपनी वाणी को पवित्र कर*
*अपना जीवन धन्य जरुर बनाएगा*
*यही है जीवन का सार*
*उस जीव के जीवन में हमेशा किशोरी जी की "कृपा दया रहमत की बरसती है बोछार*
👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666

27/12/2025

घर के मुख्य द्वार पर यह एक चीज लगाओ – धन की बरसात शुरू हो जाएगी -
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90% घरों में लक्ष्मी आती तो है,पर मुख्य द्वार से ही लौट जाती है।

कारण? द्वार पर “स्वागत” का चिह्न नहीं होता, केवल ताला-चाबी और नेमप्लेट।

तंत्र और वास्तु दोनों कहते हैं – जिस घर के मुख्य द्वार पर “यह एक चीज” नहीं है, वहाँ धन स्थायी रूप से कभी नहीं टिकता।

आज मैं आपको वही एक सिद्ध वस्तु और उसको लगाने की 100% काम करने वाली विधि बता रहा हूँ।

इसे लगाने के 11वें दिन से धन के नए-नए रास्ते अपने आप खुलने लगते हैं।
वह एक चीज है – “सिद्ध स्वास्तिक यंत्र” (ताँबे का बना हुआ)

➡️ नोट: मार्केट वाला लाल-पीला प्रिंटेड स्वास्तिक नहीं चलेगा। असली ताँबे का हाथ से लिखा हुआ सिद्ध यंत्र चाहिए।)

इसे कैसे बनवाएँ या तैयार करें।

सामग्री:
4×4 इंच शुद्ध ताँबे का चौकोर टुकड़ा (ज्वैलर से ₹150-200 में मिल जाएगा)

लाल चंदन + केसर + कुमकुम

लाल धागा

बनाने की विधि (किसी भी शुक्ल पक्ष के गुरुवार या शुक्रवार को)

सुबह स्नान करके लाल कपड़े पहनो

ताँबे के टुकड़े को गंगाजल से धो लो

लाल चंदन-केसर के घोल से स्वास्तिक बनाओ (दायें हाथ की तरफ घूमता हुआ)

बीच में “श्रीं” बीज लिखो

चारों कोनों में चार छोटे-छोटे स्वास्तिक और बना दो

21 बार यह लाल चंदन-केसर के घोल से स्वास्तिक बनाओ (दायें हाथ की तरफ घूमता हुआ)मंत्र पढ़ते हुए फूँक मारो।

मंत्र : ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं नमः स्वास्तिकाय धन-धान्य समृद्धिं कुरु कुरु स्वाहा

लाल धागे में लपेटकर तैयार।

लगाने की सही जगह और विधि

मुख्य द्वार के ठीक ऊपर (बाहर की तरफ) लगाना है
ऊँचाई ऐसी हो कि सबसे लंबा व्यक्ति भी हाथ न छू सके
लगाते समय मुँह पूर्व या उत्तर दिशा में हो
लगाने से पहले 11 बार मंत्र बोलो और यंत्र पर फूँक मारो
लगाने के बाद द्वार पर दोनों तरफ लाल कपड़े पर छोटा स्वास्तिक भी बना दो (गेरू से) और लगा दो।

चमत्कार कब तक दिखेगा?

3 दिन में घर में शांति और सकारात्मकता बढ़ेगी

11 वें दिन से रुके हुए पैसे आने शुरू

21 वें से 41वें दिन में कोई बड़ा धन लाभ (बोनस, ऑर्डर, प्रमोशन, लॉटरी, पुराना कर्ज़ वापसी)

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः ।
*जन्मकुंडली परामर्श व वास्तु समाधान हेतु सम्पर्क करें*

*रोहित चोपड़ा 7508866666**
*ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद***

18/12/2025

Remedies:-
शुक्र का उपाय : यदि आपका शुक्र कमजोर है या खराब असर दे रहा है, तो एक लौटा जल लेकर 2 बड़ी इलायची डालकर पानी के आधा होने तक उबालें। फिर इस पानी को अपने नहाने वाले पानी में मिला कर स्नान करें। स्नान करते वक्त पवित्रता का ध्यान रखें। वाहन से जुडे मामलों में भी यह उपाय लाभकारी है।

शीघ्र विवाह के लिए : यदि विवाह में विलंब हो रहा है तो यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को किया जा सकता है। इस प्रयोग में मंदिर में गुरुवार की शाम को दो हरी इलाइची के साथ पांच प्रकार की मिठाई और शुद्ध घी के दीपक के साथ जल अर्पित करना चाहिए। यदि स्त्री हैं तो पीले गुरुवार करें और पुरुष हैं तो शुक्रवार करें।

पति पत्नी में प्रेम स्थापित करने के लिए : अगर पति का पत्नी के प्रति प्यार कम हो गया हो तो श्रीकृष्ण का स्मरण कर शुक्रवार के दिन तीन इलायची अपने बदन से स्पर्श करके पल्लू या रुमाल में बांध कर अपने पास ही रखें। शनिवार की सुबह वह इलायची पीस कर किसी भी व्यंजन में मिलाकर पति को खिला दें। ऐसा तीन शुक्रवार को करना है तो लाभ मिलेगा। इसके अलवा यह उपाय रविवार को भी कर सकते हैं।

शिक्षा में सफलता के लिए : शुक्ल पक्ष के पहले बृहस्पतिवार को सूर्यास्त से ठीक आधा घंटा पहले बड़ के पत्ते पर पांच अलग-अलग प्रकार की मिठाइयां तथा दो छोटी इलायची पीपल के वृक्ष के नीचे श्रद्धा भाव से रखें और अपनी शिक्षा के प्रति कामना करें। घर आते समय पीछे मुड़कर न देखें। इस प्रकार बिना क्रम टूटे तीन बृहस्पतिवार करें।

दरिद्रता दूर करने हेतु : किसी दरिद्र, असहाय या हिजड़ों को एक सिक्का दान करें साथ ही उसे हरी इलायची खिलाएं। ऐसा जब भी मौका मिले करते रहें। यदि यह टोटका नहीं कर सकते हैं तो अगर आप धनवान बनना चाहते हैं तो आप अपने पर्स में हमेशा 5 इलायची जरूर रखें।

सुंदर बीबी पाने के लिए : यदि आप सुंदर बीवी चाहते हैं तो हर गुरुवार सुबह पांच इलायची, पीले वस्त्र के साथ किसी गरीब को दान दें। यह उपाय कम से कम पांच गुरुवार करें। इस उपाय से अवश्य लाभ होगा
*जन्मकुंडली परामर्श व वास्तु समाधान हेतु सम्पर्क करें*

*रोहित चोपड़ा 7508866666**
*ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद***

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Ludhiana
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