Jai Maa Kali astrologer

Jai Maa Kali  astrologer MAA KI KIRPA
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18/04/2026

*अक्षय तृतीया का क्या है महत्व?*
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*अक्षय तृतीया 2026: अक्षय तृतीया का पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इसे आखा तीज भी कहते हैं। अक्षय शब्द का अर्थ होता है जिसका कभी क्षय न हो या जिसका कभी नाश न हो। मान्यता के अनुसार कहते हैं कि यदि व्यक्ति दान-पुण्य, स्नान, यज्ञ, जप आदि जैसे शुभ कर्म करे तो इससे मिलने वाले शुभ फलों का कभी क्षय अर्थात नहीं होता है। आओ जानते हैं इस दिन का और क्या है महत्व।*

1. बताया जाता है कि वर्ष में साढ़े तीन अक्षय मुहूर्त है। जिसमें प्रथम व विशेष स्थान अक्षय तृतीया का है। यानी इस तिथि के दिन मुहूर्त देखे बगैर कार्य करते हैं क्योंकि पूरा दिन ही शुभ माना जाता है। इस दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है। अक्षय तृतीया (अखातीज) को अनंत-अक्षय-अक्षुण्ण फलदायक कहा जाता है। जो कभी क्षय नहीं होती उसे अक्षय कहते हैं।

2. इस दिन विवाह करना बहुत शुभ माना जाता है। इसलिए विवाह के लिए यह सबसे शुभ मुहूर्त होता है।

3. इस दिन सोना खरीदना भी बहुत शुभ होता है।

4. इस दिन भगवान नर-नारायण सहित परशुराम और हय ग्रीव का अवतार हुआ था। इसके अलावा, ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इसी दिन हुआ था। मां गंगा का अवतरण भी इसी दिन हुआ था।

5. बद्रीनारायण के कपाट भी इसी दिन खुलते हैं। त्रेतायुग का प्रांरभ भी इसी तिथि को हुआ था। इसी दिन सतयुग और त्रैतायुग का प्रारंभ हुआ था और द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ।

6. इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर के पूछने पर यह बताया था कि आज के दिन जो भी रचनात्मक या सांसारिक कार्य करोगे, उसका पुण्य मिलेगा।

7. अक्षय तृतीया के दिन ही वृंदावन के बांके बिहारी जी के मंदिर में श्री विग्रह के चरणों के दर्शन होते हैं। इसी दिन सुदामा भगवान कृष्ण से मिलने पहुंचे थे।

8. अक्षय तृतीया के दिन पंखा, जौ, गेहूँ, चने, सत्तू, दही, चावल, दूध से बने पदार्थ, नमक, घी, चीनी, सब्जी, फल, इमली और वस्त्र वगैरह का दान अच्छा माना जाता है।

9. इसी दिन पितृ श्राद्ध करने का भी विधान है। पितरों (पूर्वजों) के नाम से दान करके किसी ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए।

10. अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा विधि-विधान से करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

11. अक्षय तृतीया के दिन से ही वेद व्यास और भगवान गणेश ने महाभारत ग्रंथ लिखना शुरू किया था। इसी दिन महाभारत की लड़ाई खत्म हुई।

12. यह तिथि किसी भी नए काम की शुरुआत, खरीददारी, विवाह के लिए बहुत ही शुभ मानी जाती है। समस्त शुभ कार्यों के अलावा प्रमुख रूप से शादी, स्वर्ण खरीदने, नया सामान, गृह प्रवेश, पदभार ग्रहण, वाहन क्रय, भूमि पूजन तथा नया व्यापार प्रारंभ कर सकते है
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*रोहित चोपड़ा 7508866666**
*ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद***

14/04/2026

वास्तु उपाय -

दरवाजे पर चाँदी का टुकड़ा लगाएँ:
घर के मुख्य द्वार पर चौकोर चाँदी का टुकड़ा लगाना मंगल के बुरे प्रभावों को नियंत्रित करता है।

दान करें:
तांबा, गुड़, गेहूँ, चाँदी और दूध का दान मंगल के नकारात्मक प्रभावों को कम करता है।

गंगाजल से दाँत साफ करना (प्रतीकात्मक उपाय):
शुद्धता और आस्था के रूप में गंगाजल का प्रयोग मंगल दोष को शांत करने हेतु लाभकारी माना गया है।
(स्वास्थ्य की दृष्टि से स्वच्छता का ध्यान अवश्य रखें।)

लंबी बीमारी से बचाव:
घर के दरवाजे में लोहे की कील लगाना दीर्घ रोग से रक्षा हेतु शुभ माना गया है।

उदर संबंधी समस्या का उपाय:
बरगद के पेड़ की जड़ों में मीठा दूध अर्पित करें और वहाँ की मिट्टी से तिलक करें।

आग की घटनाओं से बचाव:
यदि घर में बार-बार अग्नि संबंधी समस्या हो तो छत पर चीनी या गुड़ की बोरी रखना लाभकारी माना गया है।
(व्यावहारिक रूप से अग्नि सुरक्षा के उपाय भी अवश्य करें।)

मंगलवार व्रत और हनुमान पूजा:
मंगलवार का व्रत रखें तथा हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करें।

बुजुर्गों और साधुओं का सम्मान:
बुजुर्गों एवं संतों की सेवा और सम्मान मंगल को शांत करता है।

🔴 उपाय
रेवड़ी जल में प्रवाहित करें:
लगभग 400 ग्राम रेवड़ी जल में प्रवाहित करने से मंगल का दुष्प्रभाव कम होता है।

मीठे का व्यापार न करें (विशेष योग में):
कुछ स्थितियों में मीठी वस्तुओं का व्यापार मंगल के प्रभाव को बढ़ा सकता है।

चावल का उपाय:
400 ग्राम चावल को दूध से धोकर लगातार सात मंगलवार जल में प्रवाहित करें।

चाँदी का कड़ा धारण करें:
चाँदी का कड़ा पहनने से मंगल के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
(“तेजाबी चाँदी” के स्थान पर शुद्ध चाँदी का प्रयोग करें।)

बंदर की प्रतिमा रखें:
घर में बंदर की प्रतिमा रखना मंगल ऊर्जा को नियंत्रित करने का प्रतीकात्मक उपाय है।

चीनी से भरा घड़ा दबाएँ:
एक घड़े में चीनी भरकर जमीन में दबाना मंगल को शांत करने का उपाय माना गया है।

सोना, चाँदी और तांबे की अंगूठी:
तीनों धातुओं की संयुक्त अंगूठी पहनने से तत्व संतुलन होता है।
(धारण से पहले ज्योतिषीय परामर्श उचित है।)

गंगा स्नान:
नियमित गंगा स्नान या गंगाजल का आचमन मंगल के दोषों को कम करने हेतु शुभ माना गया है।
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*रोहित चोपड़ा 7508866666**
*ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद***

12/04/2026

क्या दैवीय शक्तियां हमारी मदद करती हैं ?
दुनिया में बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें उनके जीवन में दैवीय सहायता मिलती है। किसी को ज्यादा तो किसी को कम। कुछ तो ऐसे हैं जिनके माध्यम से दैवीय शक्तियां अच्छा काम करवाती हैं। सवाल यह उठता है कि आम व्यक्ति कैसे पहचानें कि उसकी दैवीय शक्तियां मदद कर रही है या उसकी पूजा-पाठ-प्रार्थना का असर हो रहा है? इन 11 संकेतों से हम इसको महसूस कर सकते हैं-

1. अच्छा चरित्र
शास्त्र कहते हैं कि दैवीय शक्तियां सिर्फ उसकी ही मदद करती है, जो दूसरों के दुख को समझता है, जो बुराइयों से दूर रहता है, जो नकारात्मक विचारों से दूर रहता है, जो नियमित अपने इष्ट की आराधना करता है। यदि आप समझते हैं कि मैं ऐसा ही हूं तो निश्चित ही दैवीय शक्तियां आपकी मदद कर रही हैं।

2. ब्रह्म मुहूर्त
विद्वान लोग कहते हैं कि यदि आपकी आंखें प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में अर्थात् रात्रि 3 से 5 के बीच अचानक ही खुल जाती हैं तो आप समझ जाएं कि दैवीय शक्तियां आपके साथ हैं, क्योंकि यही वह समय होता है जबकि देवता लोग जाग्रत रहते हैं। यदि आप अपने बचपन से लेकर जवानी तक इस समय के बीच उठते रहे हैं तो समझ जाएं कि दैवीय शक्तियां आपके माध्यम से कुछ करवाना चाहती हैं !

3. सपने में देव दर्शन
यदि आपको बारंबार मंदिर या किसी देव स्थान के ही सपने आते रहते हैं। सपने में आप आसमान में ही उड़ते रहते हैं या सपने में आप देवी-देवताओं से वार्तालाप करते रहते हैं तो आप समझ जाइए कि दैवीय शक्तियां आप पर मेहरबान हैं।

4. पूर्वाभास
यदि आपको आने वाली घटनाओं का पहले से ही ज्ञान हो जाता है या आपको पूर्वाभास हो जाता है तो आप समझ जाइए कि दैवीय शक्तियों की आप पर कृपा है।

5. पारिवारिक प्रेम
आपकी पत्नी, बेटा, बेटी और आपके सभी परिजन आपकी आज्ञा का पालन कर रहे हैं, वे सभी आपसे प्यार करते हैं एवं आप भी उनसे प्यार कर रहे हैं तो आप समझ जाइए कि दैवीय शक्तियां आप से प्रसन्न हैं।

6. भाग्य से भी तेज
जीवन में आपको अचानक से लाभ प्राप्त हो जाता है। आपके किसी भी कार्य में किसी भी प्रकार की आपको बाधा उत्पन्न नहीं होती है और सभी कुछ आपको बहुत आसानी से मिल जाता है, तो आप समझ जाइए कि दैवीय शक्तियां आपकी मदद कर रही हैं।

7. सुगंधित वातावरण का अहसास
यदि कभी-कभी आपको यह महसूस होता है कि मेरे आसपास कोई है या आपको बिना किसी कारण ही अपने आसपास सुगंध का अहसास हो तो समझ जाइए कि अलौकिक शक्तियां आपके आसपास आपकी मदद के लिए हैं।
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
8. सुहानी हवा
आप पूजा कर रहे हैं और यदि आपको लगे कि अचानक सुहानी हवा का झोंका या प्रकाश पुंज आ गया और शरीर में सिहरन दौडऩे लगे। ऐसा तो पहले कभी हुआ नहीं तो समझिए कि देवी या देवता आप पर प्रसन्न हैं।

9. ठंडी हवा का घेरा
भूमि पर रहते हुए भी कभी-कभी आपको यह अहसास हो कि मेरे आसपास बादल या ठंडी हवा का एक पुंज है जिसने मुझे घेरा हुआ है तो आप समझ जाइए कि अलौकिक या दैवीय शक्ति ने आपको घेर रखा है। ऐसा अक्सर बहुत ज्यादा पूजा-पाठ करने वाले व्यक्ति के साथ होता है।

10. रोशनी का पुंज
अचानक ही आपको तेज रोशनी का पुंज दिखाई दे जिसकी कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते या आपको अचानक ही कानों में मधुर संगीत सुनाई दे और आप आश्चर्य करें कि यहां आसपास तो कोई संगीत बज ही नहीं रहा फिर भी वह कानों में सीटी बजने की तरह सुनाई दे, तो आप समझ जाइए कि आप दैवीय शक्ति के सान्निध्य में हैं। ऐसा अक्सर उन लोगों के साथ होता है, जो निरंतर ही अपने इष्टदेव का मंत्र जप कर रहे होते हैं।

11. किसी की आवाज सुनाई देना
आप रात्रि में गहरी नींद में सो रहे हैं और आपको लगता है कि किसी ने मुझे आवाज दी और आप अचानक ही उठ जाते हैं, लेकिन फिर आपको आभास होता है कि यहां तो कोई नहीं है। लेकिन आवाज तो स्पष्ट थी। ऐसा आपके साथ कई बार हो जाता है तो आप समझ जाइए कि आप पर किसी अलौकिक शक्ति की मेहरबानी है।
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 075088 66666

11/04/2026

*प्यार और शादी के बाद धोखा देने वाले जातक*
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आज के समय में कितनी ही शादियां सिर्फ इसीलिए टूट रही हैं क्योंकि पुरूषों का किसी और महिला के साथ अफेयर होता है। शादी के बाद एक्स्ट्रा मैरेटियल अफेयर होने का मतलब है कि पुरुष अपनी पत्नी से अब पहले जैसा आकर्षण और लगाव नहीं रखता है। ( शुक्र , मंगल , राहु , चन्द्रमा , केतु के प्रभाव के कारण ) लेकिन क्या आप जानते हैं शादी के बाद अफेयर करने के क्या कारण हो सकते हैं।

आईए आज कुंडली के उन्हीं कारणों को जानते हैं:

1. कूछ नया करने की चाह
( चन्द्रमा और शुक्र पर केतु का प्रभाव )

पुरूष हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करते है। पुरूष हमेशा अपनी दैनिक दिनचर्या वाले जीवन में कुछ नया चाहते है और एक रोमांचक चीजों के साथ सम्बंध जोड़ना चाहते है। वह बहुत जल्दी की अपनी रोजाना जिन्दगी से बोर हो जाते हैं। ऐसे में वे शादी के बाद लव अफेयर जैसा कदम उठाते हैं।
2) सेक्सुअल इच्छाओं के कारण
( मंगल और शुक्र पर राहु का प्रभाव और कमज़ोर चन्द्रमा )
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यह बात कई शोधों में भी साबित हो चुकी है कि लगभग 80 फीसदी पुरूष अपनी पत्नियों को सेक्सुअल इच्छाओं के कारण धोखा देते हैं। आमतौर पर सेक्सुअल इच्छा भी कई तरह की होती है। उनके भीतर सेक्सुअल एडिक्शन हो सकता है, जिसके चलते वे अपने मौजूदा रिश्ते से असंतुष्ट होकर नई जगह संबंध बनाने की कोशिश करते हैं।
3) अहंकार की भावना
( मंगल और राहु का शुक्र पर दुष प्रभाव )
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कुछ पुरूष अपने अहंकार के कारण भी अफेयर करते हैं। कई बार अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए वे दूसरी महिलाओं के प्रति आकर्षित हो जाते हैं। दरअसल वे अपने पार्टनर को दिखाना चाहते हैं कि वे महिलाओं को कितनी आसानी से अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं।

4) रिश्तों में बढ़ती बोरियत के कारण ( खराब बुध + चन्द्रमा + शुक्र पर राहु का प्रभाव )
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शादी के बाद पुरूषों के एक्स्ट्रा मैरिटयल रिलेशनशिप का एक महत्वपूर्ण कारण है रिश्ते में बोरियत आना। लाइफ उस समय और भी ज्यादा नीरस हो जाती है जब पत्नी घरेलू कामकाज और बच्चों में इतनी व्यस्त हो जाए कि पुरुष के लिए समय ही ना निकाल पाए। ऐसे में कुछ पुरूष इस बोरियत को दूर करने के लिए अलग-अलग महिलाओं से रिश्ता रखते हैं।
5. आत्मसम्मान की तलाश में
( राहु + सूर्य में खराब शुक्र )
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कुछ महिलाओं की आदत होती है ‌कि वे अपने पतियों में किसी ना किसी बात को लेकर मीन-मेख निकालती रहती हैं या हर बात पर उन्हें टोकती हैं। ऐसे में पति चाहे-अनचाहे अपनी पत्नी से दूर हो जाता है और दूसरी महिलाओं की ओर आकर्षित होने लगता है।
6) सोसाइटी में आया खुलापन
( मंगल+शुक्र / चन्द्र + शुक्र )
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यह सच है कि आज के समय में विवोहत्तर संबंध बहुत आम बात है। आज वर्कप्लेस पर महिलाएं और पुरूष दोनों कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। ऐसे में पुरूष महिलाओं के साथ उठते-बैठते अपनी भावनाएं शेयर करने लगता है, जिससे वह चाहे-अनचाहे नए रिश्तों में बंधता चला जाता है और अपनी पत्नी को धोखा देने लगता है।

7. काम के दौरान महिलाओं से मिलना
( शुक्र + केतु )
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आज के इस दौर में जहां पुरूष और महिला ऐक साथ काम करते हैं। दिन के नौ-दस घंटे वे एक साथ ऑफिस में गुजारते हैं। ऐसे में एक दूसरे की तरफ आकर्षित होने लगते हैं। एक दूसरे का साथ अच्छा लगने लगता है जिसके कारण यहीं से एक्स्ट्रा मैरेटियल अफेयर की शुरुआत होने लगती है।

8. तांकझांक करने वाली आदत
( नीच शुक्र + राहु )
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पुरूषों में अक्सर तांकझांक करने की आदत होती है। उन्हें दूसरी औरतें ज्यादा आकर्षित करती है, जो महिला उनकी बीबी होती है उसमें उन्हे ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती है।
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
9. दोस्तों का दबाव
( मंगल नीच + शुक्र खराब पर राहु का प्रभाव )
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कई बार दोस्तों के दबाव में आकर पुरूष शादी के बाद अफेयर चला लेता है और अपनी बीबी को धोखा देता है। पुरूष अक्सर अफेयर को मजा समझते है और खुद तो करते ही है और दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए कहते है। अगर वो दोस्त ऐसा न करे तो उसे बीबी का गुलाम कहकर उसका मजाक उड़ाते है।

10. बदले की भावना
( मंगल + राहु / बुध+राहु / नीच शुक्र )
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अगर पत्नी अपने पति को लेकर वफादार नहीं है तो पति भी खुन्नस में आकर अफेयर चलाने के बारे में सोचता है, ताकि वो उसके साथ अपने हिसाब को पूरा कर सके।

कुंडली में शुक्र का नीच होना
( छठे / आठवें / बारवें भाव में )
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राहु या केतु की शुक्र संग युति
मंगल+शुक्र पर राहु का प्रभाव
चन्द्र+शुक्र पर केतु का प्रभाव
बुध+मंगल+शुक्र पर राहु का प्रभाव
ऐसी कई जुगलबंधियां ही ये गुल खिलाती है की पुरुष भँवरा बन नई नई कलियों की तलाश में भटकता रहता है और ऐसे ही कई योग हैं जो स्त्री की कुंडली में भी हों तो वो भी तितली की तरह चक्कर काटती पाई जाती हैं।
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29/03/2026

👉अगर किसी को भी ज़रा सी भी लगे कि उनके जीवन में पैदा हो रही है समस्याओं का कारण कहीं उसकी कुंडली के ग्रह तो नहीं फौरन किसी ज्योतिष विद्वान के पास जाकर अपनी कुंडली दिखलवा लेनी चाहिए।

बिना रूपया पैसा खर्च किए यहां बताएं जा रहे उपाय को अपने घर पर ही कर लें, इससे जीवन में शुभ होना प्रारंभ हो जाता है और सारी समस्याएं एक-एक करके खत्म होने लगती है।

सूर्य- जिस किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य ग्रह का अशुभ योग बन रहा होता है तो उसके कारण जातक को ह्रदय रोग, नेत्र रोग, आर्थिक हानि, झूठे आरोप लगना, और मान-सम्मान में कमी आना आदि परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

उपाय- रविवार को सूर्योदय के समय सूर्य को जल चढ़ाने के बाद किसी गरीब व्यक्ति को दान अवश्य करें।

चन्द्र- चन्द्रमा के अशुभ होने पर उक्त जातक को मानसिक तनाव, बे वजह चिन्ता, फेफड़े संबंधी रोग और धन आय के स्रोतों में कमी आने लगती है।

उपाय- चांद को दूध, दही, चावल, सफ़ेद फूल, सफ़ेद चंदन और कपूर का दान करें।

मंगल- इस ग्रह के अशुभ होने से जातक को ह्रदय रोग, कर्ज़ से परेशान और ज़मीन जायदाद संबंधी विवाद आदि परेशानियां होने लगती हैं।

उपाय- देवी मां के मंदिर या किसी छोटी कन्या को लाल कपड़े का दान करें।

बुध- इसके असुभ होने से दांत संबंधी रोग होने के साथ घर परिवार के सदस्यों में लड़ाई झगड़ा की स्थिति बनने लगती है।

उपाय- हरी चीज़ों का दान करें, जैसे हरी चुनरी, हरे कपड़े, हरे फल या सब्जी आदि।

गुरु- इसके विपरीत प्रभाव से जातक को अपने ही पुत्र से कष्ट मिलने लगते हैं। शिक्षा में परेशानियां आने लगती हैं। साथ ही वैवाहिक जीवन में बाधाएं आती हैं।

उपाय- लक्ष्मीनाराण मंदिर के पुजारी को पीला वस्त्र और धार्मिक पुस्तक आदि का दान करें।

शुक्र- शुक्र के अशुभ होने से जातक के वैवाहिक सुख में कमी होने लगती है।

उपाय- माता के मंदिर जाकर लाल चुनरी चढ़ाएं।

शनि- इससे जातक को आगजनी, दुर्घटना, आंखों के रोग और पिता से मनमुटाव जैसी परेशानी होने लगती है।

उपाय- तेल, सरसों, काले तिल, काला वस्त्र, जूते आदि का दान करें।

राहु- राहु के अशुभ होने पर सिर पर चोट लगने लगती है, मानसिक पीड़ा के साथ हर कार्यो में अड़चने पैदा होने लगती हैं।

उपाय- राहु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए किसी कोढ़ी को कपड़े का दान करें।

केतु- केतु की अशुभता के कारण किसी के विश्वासघात का शिकार होना पड़ता है।

उपाय- नारियल और उड़द दाल आदि का दान करना चाहिए।
*👉नोट :- सभी प्रकार की समस्याओ का समाधान के लिए सम्पर्क करे*
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*रोहित चोपड़ा 7508866666**
*ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद***

26/03/2026

*गुरुवार के ये 5 उपाय, बेहद हैं अचूक🌹*
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*गुरुवार का दिन भगवान श्रीहरिविष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन कुछ आसान से उपायों को करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है। इसके साथ ही व्यक्ति को अकूत धन की प्राप्ति होती है।*
एस्ट्रो रोहित चोपड़ा 7508866666
*गुरुवार का दिन वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति देव और भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। यह दिन धन, समृद्धि और सुख की प्राप्ति के लिए विशेष रूप से शुभ है, क्योंकि बृहस्पति धन और ज्ञान के कारक हैं, और भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के पति हैं। शास्त्रों के अनुसार गुरुवार को किए गए कुछ विशेष उपाय माता लक्ष्मी को प्रसन्न करते हैं और धन-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। आइए जानते हैं कि गुरुवार के दिन किन उपायों को किया जा सकता है।*

*🪔लक्ष्मी-विष्णु पूजा*
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गुरुवार को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। सुबह स्नान के बाद स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें और पूजा स्थल पर लक्ष्मी-विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। तुलसी के पत्ते, कमल के फूल और चंदन अर्पित करें। *•‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’* और *•‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः’* मंत्र का *•108 बार जाप* करें। यह पूजा धन प्राप्ति और आर्थिक स्थिरता के लिए लाभकारी है।

*🪔पीले रंग का उपयोग*
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गुरुवार को पीले रंग का विशेष महत्व है, क्योंकि यह बृहस्पति का प्रिय रंग है। इस दिन पीले वस्त्र पहनें, पीले फूलों से पूजा करें और घर में पीले रंग की वस्तुएं जैसे हल्दी या केसर का उपयोग करें। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और माता लक्ष्मी को प्रसन्न करता है। घर के मुख्य द्वार पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं, यह धन आगमन का प्रतीक है।

*🪔केले के पेड़ की पूजा*
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ज्योतिष शास्त्र में केले का पेड़ बृहस्पति और लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। गुरुवार को सुबह केले के पेड़ की पूजा करें। पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और हल्दी-चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद पीले धागे से पेड़ को बांधें और माता लक्ष्मी से समृद्धि की प्रार्थना करें। यह उपाय आर्थिक तंगी को दूर करता है और धन लाभ के अवसर बढ़ाता है।

*🪔दान-पुण्य*
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गुरुवार को दान का विशेष महत्व है। इस दिन पीली वस्तुओं जैसे हल्दी, चने की दाल, पीले मिठाई या पीले कपड़े का दान करें। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, दान करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं या मंदिर में पीली मिठाई का भोग लगाएं। यह कार्य धन और सुख में वृद्धि करता है।

*🪔श्रीसूक्त का पाठ*
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श्रीसूक्त का पाठ माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय है। गुरुवार को सूर्यास्त के समय स्वच्छ स्थान पर बैठकर श्री सूक्त का 11 या 21 बार पाठ करें। पाठ के दौरान दीपक में घी और कपूर जलाएं। यह उपाय धन, वैभव और समृद्धि को आकर्षित करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नियमित रूप से श्री सूक्त का पाठ करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और स्थायी समृद्धि प्राप्त होती है।
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*रोहित चोपड़ा 7508866666**
*ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद***

20/03/2026
18/03/2026

*ज्योतिष शास्त्र में हीरा (Diamond) **
शुक्र ग्रह का मुख्य रत्न माना जाता है, जो भौतिक सुख-सुविधाओं, ऐश्वर्य, कला और प्रेम का प्रतीक है। यह रत्न शुक्र की शक्ति को बढ़ाकर जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, लेकिन गलत तरीके से या बिना सलाह के पहनने पर यह गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकता है।

हीरा रत्न धारण करने के प्रमुख लाभ और हानियां (Diamond Gemstone Benefits and Side Effects):
हीरा पहनने के लाभ (Benefits - Heera Ratan Ke Labh)
वैभव और ऐश्वर्य: यह जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और लग्जरी (विलासिता) लाता है।
प्रेम संबंध में मजबूती: शुक्र को प्रेम का कारक माना जाता है, इसलिए इसे पहनने से दांपत्य जीवन और प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आती है।
आकर्षण और रचनात्मकता: यह व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाता है और रचनात्मक कार्यों में सफलता प्रदान करता है।
गुप्त रोगों में राहत: कुंडली में शुक्र की कमजोरी से होने वाली शारीरिक परेशानियों और गुप्त रोगों में यह लाभकारी माना जाता है।
नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा: यह नकारात्मक शक्तियों और बुरे सपनों से बचाव करने में मदद करता है।
नेतृत्व क्षमता: राजनीति से जुड़े लोगों के लिए यह रत्न भाग्यवर्धक हो सकता है।

हीरा पहनने की हानियां और सावधानियां (Disadvantages/Side Effects)
गलत प्रभाव: यदि हीरा कुंडली में शुक्र की स्थिति के अनुकूल नहीं है, तो यह वैवाहिक जीवन में कलह, आर्थिक हानि और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
इन राशियों को सावधानी बरतनी चाहिए: मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को ज्योतिषीय सलाह के बिना हीरा पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि यह उनके लिए शारीरिक और मानसिक परेशानियां पैदा कर सकता है।
स्वास्थ्य समस्याएं: गलत हीरा पहनने से चर्म रोग या गुप्त रोगों में वृद्धि हो सकती है।
अचानक विध्वंस: बिना विशेषज्ञ की सलाह के धारण किया गया हीरा जीवन में उथल-पुथल मचा सकता है।

किन्हें हीरा पहनना चाहिए (Who Should Wear)
वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुम्भ लग्न के जातकों के लिए हीरा शुभ माना जाता है।
शुक्रवार के दिन, शुक्ल पक्ष में, चांदी या प्लैटिनम में, छोटी उंगली में धारण करना सबसे उत्तम माना जाता है।
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हम भाग्य के ज्ञाता है
भाग्य विधाता नही
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*रोहित चोपड़ा 7508866666**
*ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद***

15/03/2026

🔱 64 योगिनी कामाख्या कवच साधना – गृहस्थ साधकों के लिए शक्तिशाली अनुष्ठान 🔱
🙏 अनुष्ठान का महत्व
जय मां विंध्यवासिनी हर हर महादेव!
यदि प्रत्येक घर की स्त्री, कन्या, माता या बहन इस विशेष विधान को अपनाती है, तो भगवती की 64 योगिनियाँ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रकट होकर जीवन की आपदाओं और विपत्तियों का नाश करती हैं।
इस अनुष्ठान और भगवती के स्वरूपों में आस्था रखने वाले साधक के लिए यह अत्यंत लाभकारी है।
🌟 साधना के तीन मुख्य तत्व
साधना में तीन प्रमुख तत्व हैं – कामाख्या कवच, देवी सूक्तम्, और 64 योगिनी नामावली।
💠 कामाख्या कवच: हर अवस्था में किया जा सकता है। यह निरंतर सुरक्षा प्रदान करता है और जीवन में मंत्र शक्ति का अनुभव कराता है।
💠 देवी सूक्तम् / तंत्रोक्त रात्रिसूक्त: भगवती का प्रबोधन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए। प्राण प्रतिष्ठा और शक्तियों के आह्वान हेतु यह आवश्यक है।
💠 64 योगिनी नामावली: त्रिपुर सुंदरी माता की 64 योगिनियों के नामों का पाठ, साधक के चारों ओर देवी की सुरक्षा शक्ति को सक्रिय करता है और जीवन में आशीर्वाद लाता है।
🕉️ साधना की विधि
यह अनुष्ठान किसी भी नवरात्र में या कृष्ण/शुक्ल पक्ष की अष्टमी से चतुर्दशी तक किया जा सकता है। नवरात्रि के पूरे नौ दिन इसका पालन किया जा सकता है।
✅ आवश्यक सामग्री:
भगवती का चित्र, विग्रह या कलश
तीन रक्त पुष्प
एक दीपक
लाल आसन और वस्त्र
साधक उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। सर्वप्रथम गुरु, गणपति, भैरव और कुलदेवताओं का स्मरण करें। चौखट का पूजन करके दीप प्रज्वलित करें।
🌺 पाठ और अर्पण
देवी सूक्त का पाठ करें और पहला रक्त पुष्प देवी को अर्पित करें।
कामाख्या कवच का 11 बार पाठ करें और दूसरा रक्त पुष्प अर्पित करें।
64 योगिनी नामावली का 11 बार पाठ करें और तीसरा रक्त पुष्प अर्पित करें।
इस पूरी प्रक्रिया को दोबारा करने से साधना और अधिक प्रभावशाली होती है।
🌸 मासिक धर्म में साधना-
यदि साधिका मासिक धर्म में है, तो पूजन सामग्री को स्पर्श किए बिना केवल कामाख्या कवच का मानसिक जप अथवा धीरे धीरे बोलकर जप करना चाहिए। इससे साधना का प्रभाव बना रहता है।
सुक्त व चौंसठ योगिनी नामावली का पाठ नहीं करेंगे इस समय।
🔥 नवमी का हवन-
नवरात्रि की नवमी को हवन करें। घी में मिली काली किशमिश से प्रत्येक 64 योगिनियों के नाम से आहुति दें। यह साधना की शक्ति को और भी सशक्त बनाता है।
👧 कन्या पूजन और दैनिक अभ्यास
मुख्य अनुष्ठान के बाद नौ कन्याओं का पूजन करना अति शुभ है।
प्रतिदिन सुबह और शाम कामाख्या कवच, देवी सूक्त और 64 योगिनी नामावली का पाठ करें। पाँच लौंग कपूर जलाकर देवी को अर्पित करें। इससे शीघ्र देवी की कृपा, संरक्षण और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
✨ नियम, निष्ठा और अनुशासन-
इस साधना में नियम, निष्ठा और अनुशासन का पालन अत्यंत आवश्यक है। श्रद्धा और समर्पण के साथ साधना करने से भगवती कामाख्या और उनकी 64 योगिनियों की असीम कृपा, दिव्य संरक्षण और आध्यात्मिक शक्ति जीवन में प्राप्त होती है।
💫 इस विधान का लाभ उठाएँ और अपने जीवन तथा परिवार में सुख, समृद्धि और सुरक्षा सुनिश्चित करें।
जय माँ कामाख्या! हर हर महादेव!

भगवती त्रिपुर सुंदरी के दिव्य 64 योगिनी मातृकाओं की नामावली देवी प्रणव सहित निम्न दिया गया है। इस हर स्त्री पुरुष कर सकते हैं चाहे वो दीक्षित हो अथवा अदीक्षित।

•• श्री मां षोडशी त्रिपुरा की चौंसठ योगिनी नामावली जप/अर्चन/हवन हेतु••

श्री मां आदिशक्ति ललिताम्बायै नमः

1. ह्रीम् अक्षोभ्यायै नमः
2. ह्रीम् ऋक्षकर्ण्यै नमः
3. ह्रीम् क्षपणायै नमः
4. ह्रीम् राक्षस्यै नमः
5. ह्रीम् क्षयायै नमः
6. ह्रीम् पिङ्गाक्ष्यै नमः
7. ह्रीम् अक्षयायै नमः
8. ह्रीम् अक्षपायै नमः
9. ह्रीम् ईलायै नमः
10. ह्रीम् लीलावत्यै नमः
11. ह्रीम् लयायै नमः
12. ह्रीम् लीलायै नमः
13. ह्रीम् लंकायै नमः
14. ह्रीम् लंकेश्वर्यायै नमः
15. ह्रीम् लालसायै नमः
16. ह्रीम् विमलायै नमः
17. ह्रीम् हुताशायै नमः
18. ह्रीम् विशालाक्ष्यै नमः
19. ह्रीम् हुंकारायै नमः
20. ह्रीम् बडवामुख्यायै नमः
21. ह्रीम् हाहारवायै नमः
22. ह्रीम् महाक्रूरायै नमः
23. ह्रीम् क्रोधनायै नमः
24. ह्रीम् भयाननायै नमः
25. ह्रीम् सर्वज्ञायै नमः
26. ह्रीम् तरलायै नमः
27. ह्रीम् तारायै नमः
28. ह्रीम् ऋग्वेदायै नमः
29. ह्रीम् हयाननायै नमः
30. ह्रीम् सारायै नमः
31. ह्रीम् रससंग्राहायै नमः
32. ह्रीम् सरवायै नमः
33. ह्रीम् तालजङ्घ्यै नमः
34. ह्रीम् रक्ताक्ष्यै नमः
35. ह्रीम् करंकिन्यै नमः
36. ह्रीम् विद्विजिह्वायै नमः
37. ह्रीम् मेघनादायै नमः
38. ह्रीम् प्रचण्डोग्रायै नमः
39. ह्रीम् कालकर्ण्यै नमः
40. ह्रीम् वरप्रदायै नमः
41. ह्रीम् चन्द्रायै नमः
42. ह्रीम् चन्द्रबलायै नमः
43. ह्रीम् प्रपञ्चायै नमः
44. ह्रीम् प्रलयान्तिकायै नमः
45. ह्रीम् शिशुवक्त्रायै नमः
46. ह्रीम् पिशाच्यै नमः
47. ह्रीम् पिशिताशायै नमः
48. ह्रीम् लौलुपायै नमः
49. ह्रीम् वमनायै नमः
50. ह्रीम् तपन्यै नमः
51. ह्रीम् वामनायै नमः
52. ह्रीम् महिषमर्दिन्यै नमः
53. ह्रीम् वायुवेगायै नमः
54. ह्रीम् बृहत्कुक्ष्यै नमः
55. ह्रीम् विकृतायै नमः
56. ह्रीम् विश्वरूपायै नमः
57. ह्रीम् यमजिह्वायै नमः
58. ह्रीम् जयन्त्यै नमः
59. ह्रीम् दुर्जयायै नमः
60. ह्रीम् अवन्तिकायै नमः
61. ह्रीम् विडाल्यै नमः
62. ह्रीम् रेवत्यै नमः
63. ह्रीम् प्रेतनायै नमः
64. ह्रीम् विजयन्तिकायै नमः

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*रोहित चोपड़ा 7508866666**
*ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद***

15/03/2026

*सूर्य देव को अर्घ्य वैज्ञानिक एवं ज्योतिषीय लाभ*

सूर्य को जल देना पुरानी परम्परा है, परन्तु किसी ने यह जानने का प्रयास किया की क्यूँ दिया जाता है सूर्य को जल? और क्या प्रभाव होता है इससे मानव शरीर पर?

पूरी जानकारी के लिए कृपया अंत तक पढ़े, थोडा समय लग सकता है, परन्तु जानकारी महत्वपूर्ण है।

सूर्य देव अलग अलग रंग अलग अलग आवर्तियाँ उत्पन्न करते हैं, अंत में इसका उल्लेख करूँगा, मानव शरीर रासायनिक तत्वों का बना है, रंग एक रासायनिक मिश्रण है।

जिस अंग में जिस प्रकार के रंग की अधिकता होती है शरीर का रंग उसी तरह का होता है, जैसे त्वचा का रंग गेहुंआ, केश का रंग काला और नेत्रों के गोलक का रंग सफेद होता है।

शरीर में रंग विशेष के घटने-बढने से रोग के लक्षण प्रकट होते हैं, जैसे खून की कमी होना शरीर में लाल रंग की कमी का लक्षण है।

सूर्य स्वास्थ्य और जीवन शक्ति का भण्डार है| मनुष्य सूर्य के जितने अधिक सम्पर्क में रहेगा उतना ही अधिक स्वस्थ रहेगा।

जो लोग अपने घर को चारों तरफ से खिडकियों से बन्द करके रखते हैं और सूर्य के प्रकाश को घर में घुसने नहीं देते वे लोग सदा रोगी बने रहते हैं।

जहां सूर्य की किरणें पहुंचती हैं, वहां रोग के कीटाणु स्वत: मर जाते हैं और रोगों का जन्म ही नहीं हो पाता। सूर्य अपनी किरणों द्वारा अनेक प्रकार के आवश्यक तत्वों की वर्षा करता है और उन तत्वों को शरीर में ग्रहण करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं।

सूर्य पृथ्वी पर स्थित रोगाणुओं 'कृमियों' को नष्ट करके प्रतिदिन रश्मियों का सेवन करने वाले व्यक्ति को दीर्घायु भी प्रदान करता है।

सूर्य की रोग नाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद के एक मंत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है, विश्व में प्राण रूप है तथा अपनी रश्मियों द्वारा जीवों का स्वास्थ्य ठीक रखता है।

अथर्ववेद में कहा गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की लाल किरणों के प्रकाश में खुले शरीर बैठने से हृदय रोगों तथा पीलिया के रोग में लाभ होता है।प्राकृतिक चिकित्सा में आन्तरिक रोगों को ठीक करने के लिए भी नंगे बदन सूर्य स्नान कराया जाता है।

आजकल जो बच्चे पैदा होते ही पीलिया रोग के शिकार हो जाते हैं उन्हें सूर्योदय के समय सूर्य किरणों में लिटाया जाता है जिससे अल्ट्रा वायलेट किरणों के सम्पर्क में आने से उनके शरीर के पिगमेन्ट सेल्स पर रासायनिक प्रतिक्रिया प्रारम्भ हो जाती है।

और बीमारी में लाभ होता है, डाक्टर भी नर्सरी में कृत्रिम अल्ट्रावायलेट किरणों की व्यवस्था लैम्प आदि जला कर भी करते हैं।

सूर्य को कभी हल्दी या अन्य रंग डाल कर जल दिया जाता है, जल को हमेशा अपने सर के ऊपर से सूर्य और अपने हिर्दय के बीच से छोड़ना चाहिए।

ध्यान रहे की सुर्य चिकित्सा दिखता तो आसान है पर विशेषज्ञ से सलाह लिये बिना ना ही शुरू करें।

जैसा की हम जानते हैं कि सूर्य की रोशनी में सात रंग शामिल हैं .. और इन सब रंगो के अपने अपने गुण और लाभ है ...

1. लाल रंग:-- यह ज्वार, दमा, खाँसी, मलेरिया, सर्दी, ज़ुकाम, सिर दर्द और पेट के विकार आदि में लाभ कारक है।

2. हरा रंग:-- यह स्नायुरोग, नाडी संस्थान के रोग, लिवर के रोग, श्वास रोग आदि को दूर करने में सहायक है।

3. पीला रंग:-- चोट ,घाव रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, दिल के रोग, अतिसार आदि में फ़ायदा करता है
4. नील रंग:-- दाह, अपच, मधुमेह आदि में लाभकारी है।

5. बैंगनी रंग:-- श्वास रोग, सर्दी, खाँसी, मिर् गी ..दाँतो के रोग में सहायक है।

6. नारंगी रंग:-- वात रोग . अम्लपित्त, अनिद्रा, कान के रोग दूर करता है।

7. आसमानी रंग:-- स्नायु रोग, यौनरोग, सरदर्द, सर्दी- जुकाम आदि में सहायक है।

सुरज का प्रकाश रोगी के कपड़ो और कमरे के रंग के साथ मिलकर रोगी को प्रभावित करता है।अतः दैनिक जीवन मे हम अपने जरूरत के अनुसार अपने परिवेश एवम् कपड़ो के रंग इत्यादि मे फेरबदल करके बहुत सारे फायदे उठा सकते हैं।

सूर्य देव को अर्घ्य ज्योतिषीय दृष्टिकोण
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इस संसार में भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष देव कहा जाता है क्योंकि हर व्यक्ति इनके साक्षात दर्शन कर सकता है। रविवार भगवान सूर्य का दिन माना जाता है और सप्तमी तिथि के देवता भी भगवान सूर्य है। अगर सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़े तो उसका अति विशेष महत्व होता है इस दिन सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व है। रविवारीय सप्तमी भानु सप्तमी या सूर्य सप्तमी कहलाती है।

रविवार तथा सप्तमी तिथि को भगवान सूर्य को अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व है। भगवान सूर्य कि कृपा पाने के लिए तांबे के पात्र में लाल चन्दन,लाल पुष्प, अक्षत डालकर प्रसन्न मन से सूर्य मंत्र का जाप करते हुए उन्हें जल अर्पण करना चाहिए।

श्री सूर्यनारायण को तीन बार अर्घ्य देकर प्रणाम करना चाहिए। इस अर्घ्य से भगवान ‍सूर्य प्रसन्न होकर अपने भक्तों की हर संकटो से रक्षा करते हुए उन्हें आरोग्य, आयु, धन, धान्य, पुत्र, मित्र, तेज, यश, कान्ति, विद्या, वैभव और सौभाग्य को प्रदान करते हैं । भगवान सूर्य देव कि कृपा प्राप्त करने के लिए जातक को प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व ही शैया त्याग कर शुद्ध, पवित्र जल से स्नान के पश्चात उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देना चाहिए।

भगवान सूर्य सबसे तेजस्वी और कांतिमय माने गए हैं। अतएवं सूर्य आराधना से ही व्यक्ति को सुंदरता और तेज कि प्राप्ति भी होती है । ह्रदय रोगियों को भगवान सूर्य की उपासना करने से विशेष लाभ होता है। उन्हें आदित्य ह्रदय स्तोत्र का नित्य पाठ करना चाहिए। इससे सूर्य भगवान प्रसन्न होकर अपने भक्तों को निरोगी और दीर्घ आयु का वरदान देते है।

सूर्य भगवान की कृपा पाने के लिए जातक को प्रत्येक रविवार अथवा माह के किसी भी शुक्ल पक्ष के रविवार को गुड़ और चावल को नदी अथवा बहते पानी में प्रवाहित करना चाहिए । तांबे के सिक्के को भी नदी में प्रवाहित करने से भी सूर्य भगवान की कृपा बनी रहती है। रविवार के दिन स्वयं भी मीठा भोजन करें एवं घर के अन्य सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करें। हाँ भगवान सूर्यदेव को उस दिन गुड़ का भोग लगाना कतई न भूलें ।

ज्योतिषशास्त्र में सूर्य को राजपक्ष अर्थात सरकारी क्षेत्र एवं अधिकारियों का कारक ग्रह बताया गया है। व्यक्ति कि कुंडली में सूर्य बलवान होने से उसे सरकारी क्षेत्र में सफलता एवं अधिकारियों से सहयोग मिलता है। कैरियर एवं सामाजिक प्रतिष्ठा में उन्नति के लिए भी सूर्य की अनुकूलता अनिवार्य मानी गयी है।

यह ध्यान रहे कि सूर्य भगवान की आराधना का सर्वोत्तम समय सुबह सूर्योदय का ही होता है। आदित्य हृदय का नियमित पाठ करने एवं रविवार को तेल, नमक नहीं खाने तथा एक समय ही भोजन करने से भी सूर्य भगवान कि हमेशा कृपा बनी रहती है।

यदि किसी व्यक्ति के पास आपका पैसा फँसा हो तो आप नित्य उगते हुए सूर्य को ताम्बे के पात्र में गुड, अक्षत, लाल चन्दन लाल फूल और लाल मिर्च के 11 दाने डालकर अर्ध्य दें और सूर्यदेव से मन ही मन अपने फंसे हुए धन को प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करें, इस उपाय से तेज और यश की प्राप्ति होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और फँसा हुआ धन में अड़चने समाप्त होने लगती है।

मनोवांछित फल पाने के लिए निम्न मंत्र का उच्चारण करें।

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

भगवान सूर्य के किसी भी आसान और सिद्ध मंत्र का जाप श्रद्धापूर्वक अवश्य ही करें।

ॐ घृणि सूर्याय नम:।।

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:।।

ॐ ह्रीं घृणि सूर्य आदित्य श्रीं ओम्।

ॐ आदित्याय विद्महे मार्तण्डाय धीमहि तन्न सूर्य: प्रचोदयात्।

ऊं घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।

ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।

निम्न मंत्रो का किसी भी कृष्ण पक्ष के प्रथम रविवार से आरम्भ करे सूर्योदय काल इसके लिये सर्वोत्तम है लाल ऊनि आसान पर सूर्याभिमुख बैठ कर मानसिक जप करना सर्वोत्तम है इसके प्रभाव से व्यक्ति में सूर्य जैसे गुण आते है, चेहरे पर कांति आती है।आकर्षण बढ़ता है नेत्र रोगों में में लाभकारी है तथा कुंडली मे सूर्य के अशुभ फलों में कमी आती है।

🕉️🌹🙏 जन्म कुण्डली मिलाने व दिखाने और बनाने हस्त रेखा मस्तिष्क रेखा दिखाने के लिए सम्पर्क करें

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