02/04/2026
ग्लूकोमा, जिसे हिंदी में 'काला मोतिया' भी कहा जाता है, आंखों की एक गंभीर स्थिति है। इसे अक्सर "मौन दृष्टि चोर" (Silent Thief of Sight) कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण शुरुआती चरणों में दिखाई नहीं देते और यह धीरे-धीरे इंसान की देखने की शक्ति को छीन लेता है।
नीचे ग्लूकोमा के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:
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1. ग्लूकोमा (काला मोतिया) क्या है?
हमारी आंखों के अंदर एक खास तरह का तरल पदार्थ (Aqueous Humor) लगातार बनता और बाहर निकलता रहता है। जब इस तरल के बाहर निकलने का रास्ता रुक जाता है, तो आंख के अंदर दबाव बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए दबाव को इंट्राऑकुलर प्रेशर (IOP) कहते हैं। यह दबाव आंख के पीछे स्थित ऑप्टिक नर्व (Optic Nerve) को नुकसान पहुँचाता है, जो हमारे मस्तिष्क तक दृश्य संदेश भेजती है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह पूर्ण अंधेपन का कारण बन सकता है।
2. मुख्य लक्षण
ग्लूकोमा की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में इसके कोई लक्षण नहीं होते।
• शुरुआती चरण: दृष्टि में कोई दर्द या बदलाव महसूस नहीं होता।
• मध्यम चरण: किनारों की दृष्टि (Peripheral Vision) धुंधली होने लगती है।
• गंभीर चरण: 'टनल विजन' (जैसे किसी पाइप से देख रहे हों) की समस्या और अंततः पूरी तरह दिखाई देना बंद हो जाना।
• एक्यूट ग्लूकोमा के लक्षण: अचानक आंखों में तेज दर्द, सिरदर्द, मतली (जी मिचलाना), और रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुषी घेरे दिखाई देना।
3. जोखिम कारक (किसे खतरा ज्यादा है?)
• उम्र: 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में।
• आनुवंशिकता: यदि परिवार में पहले किसी को ग्लूकोमा रहा हो।
• बीमारियां: मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप (High BP) या हृदय रोग।
• चश्मे का नंबर: जिन लोगों को बहुत अधिक प्लस या माइनस नंबर का चश्मा है।
• स्टेरॉयड का उपयोग: लंबे समय तक स्टेरॉयड आई ड्रॉप्स या दवाओं का सेवन।
4. निदान और जांच (Diagnosis)
चूंकि इसके लक्षण देरी से पता चलते हैं, इसलिए नियमित जांच ही एकमात्र बचाव है। एक नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) निम्नलिखित जांच करते हैं:
• टोनोमेट्री: आंख के अंदर के दबाव (IOP) को मापना।
• ऑप्थाल्मोस्कोपी: ऑप्टिक नर्व की जांच करना।
• विजुअल फील्ड टेस्ट: यह देखना कि आपकी साइड की दृष्टि कितनी सक्रिय है।
5. उपचार के विकल्प
ग्लूकोमा से जो दृष्टि एक बार खो जाती है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन उपलब्ध उपचारों से इसे और बिगड़ने से रोका जा सकता है:
• आई ड्रॉप्स: यह सबसे आम उपचार है जो आंख के दबाव को कम करने में मदद करता है।
• लेजर थेरेपी: तरल पदार्थ की निकासी को सुधारने के लिए लेजर का उपयोग।
• सर्जरी (Trabeculectomy): यदि दवाएं काम न करें, तो तरल निकासी के लिए एक नया रास्ता बनाने हेतु शल्य चिकित्सा की जाती है।
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महत्वपूर्ण सलाह: 40 वर्ष की आयु के बाद हर साल अपनी आंखों की जांच जरूर करवाएं। ग्लूकोमा का समय पर पता चलना ही आपकी दृष्टि को बचा सकता है।
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