22/04/2026
Just for today, अप्रैल~22
खुले रास्ते पर यात्रा करना (Travelling the open road)
“यही आध्यत्मिक उन्नति का पथ है। हममे रोज़ बदलाव होते हैं।”
Basic Text, p. 35
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जब हम अपनी पहली नारकोटिक्स एनोनिमस की मीटिंग में पहुंचे तो हममे से कई लोगों को अपना रास्ता खत्म होता दिखाई दिया। हम और अधिक नशा करने लायक नहीं रहे थे। हम आध्यत्मिक रूप से लुट चुके थे। हममे से ज्यादातर लोग बिल्कुल अकेले थे और सोचते थे की हमारे पास कुछ भी जीने के लिए नहीं बचा था। हम यह नहीं समझ पाए की जैसे की हमने अपने सुधार का कार्यक्रम शुरू किया तभी हम एक असीमित संभावनाओं वाले रास्ते पर कदम रख रहे थे।
शुरू में सिर्फ नशा नही करना ही बहुत कठिन था। फिर भी, जैसे-जैसे हमने दुसरे एडिक्टों को कदमों पर काम करते और उन सिद्धांतों को अपनी जिंदगी में लागू करते देखा, तो हमें दिखने लगा की सुधार सिर्फ नशा न करने के इलावा बहुत कुछ है। हमारे एन.ए के दोस्तों की ज़िन्दगी बदल गयी थी। उनका अपनी समझ के ईश्वर से संबंध था। वे फ़ेलोशिप आज समाज के ज़िम्मेदार सदस्य थे। उनके पास जीने की वजह थी। हमें यह विश्वास होना शुरू हुआ की वे चीज़ें हमारे लिए भी संभव हैं।
जैसे-जैसे हम अपने सुधार की यात्रा ज़ारी रखते हैं तो वैसे-वैसे हम आत्म-संतोष, असहनशीलता, या बेईमानी की वजह से अपने रास्ते से भटक सकते हैं। जब हम ऐसे भटक जाते हैं तो हमें ज़ल्दी सें लक्षणों को पह्चाहने की और वापिस अपने रास्ते पर आ जाने की जरूरत है, जो की आजादी और विकास का खुला रास्ता है।
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सिर्फ आज के दिन : मै अपने कार्यक्रम के सिद्धांतों को अपना कर, अपनी आध्यत्मिक, समाजिक और साधारण जीने की कला को विकसित करना ज़ारी रख रहा हूँ। मैं सुधार के खुले रास्ते पर जितना चाहूँ उतना ही दूर जा सकता हूँ।