16/04/2026
कहानी एक दुविधा में फसे घर वालों की...
घर का एक छोटा लड़का था,वो बाबा की नजर में कमजोर लगता था, उसको जल्दी बढ़ा करने के लिए सभी घरवालों से अधिक दूध दही घी अन्न शारीरिक वृद्धि हेतु फिर मानसिक पुष्टि के उसको रोकने टोकने वाले को दंड मिलता था,, फिर भी अगर वो आ जाए तो बैठें लोगो में उठकर उसको कुर्सी देनी होती थी।ऐसा पूरा माहौल बना दिया गया घर..... एक दिन वो लड़का राजा का खास बन गया, अब उसे घर वालों वाली पूरी सुविधाएं राजा से भी मिलने लगी,
अब ऐसे माहौल में बढ़ा वो छोटा लड़का,,, फिर राजा से अधिकार प्राप्त। अब वो हर सुविधा को अधिकार समझने लगा था। रोकने टोकने वालों दुश्मन समझने लगा,, यहाँतक अब उसकी सोच बन गयी कि ये घरवाले ही न रहे तो छोटा बेटा होने का बिल्ला भी हट जाए.... अब उसे बड़ो की हर अच्छी बात एवं छोटा बेटा कहलाना भी गाली लगने लगी....... इसी तरह हर घर में छोटे लडके खूब फलने फूलने लगे,, लगातार इनकी संख्या बड़ी, अब ये पूर्ण बलिष्ट, प्रभावशाली हो गए... अब ये तन मन धन से बड़े बन गए अब इन्होने अपनी आगे की सुविधा न बंद हो... आगे कोई न रोके टोके इसलिए इन्होने शक्ति प्रदर्शन आरम्भ कर दिया, अब इन्होने कहना आरम्भ कर दिया हम छोटे भाई है इसलिए बहुत सहन कर लिया अब हम बल बुद्धि विद्या ताकत में है अब हमारा राज्य होगा, अधिकार होगा, लेकिन वो सुविधाएं बड़ो को उसी तरह देनी होंगी,, इसमें कमी होने पर हम घर में तांडव कर देंगे, वैसे भी मेरा नहीं है तो सब घरका सामान तोड़ देंगे, घर वालों का आस्तित्व मिटा देंगे...... तो घर के बड़े लोगो ने लगभग सभी ने कहा ठीक है जब तक हमारे आस्तित्व की रक्षा रहेगी हम सुरक्षित रहेंगे तब तक सहयोग देते रहेंगे.....आगे सहनशक्ति पर निर्भर है.....मतलब ये घर की शांति तबतक है, क्लेश शांत तब तक है,,, जब छोटा भाई सुखी मानेगा स्वयं को,, जिस दिन घर घर वालों ने हाथ खींचे उसी दिन छोटा भाई हाथ उठाकर छीन लेगा वो घर वो सुख साधन वो आस्तित्व इसको बड़े अपनी पूर्वजी की थाती समझते है इसने दो राय नहीं है।।