Divyabhavishyavani

Divyabhavishyavani धार्मिक सामाजिक खबरें एवं आप की बात, भविष्य की घटनाये
Pandit Puran Mishra Ji is a well-known Indian astrologer, philosopher, and life coach.

He is renowned for his expertise in Vedic astrology, spirituality, and the ancient Indian scriptures, the Vedas. दिव्य संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा,
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10/05/2026

जच्चा बच्चा स्वस्थ रहे,कामकाजी माताओ को सम्मान दो
माँ को मातृत्व अवकाश मिले, यही है सरकारी मातृ दिवस

10/05/2026

जैसा कि आप सबको पता मेरा पुरनेश्वर ज्योतिष परामर्श केंद्र है, यहाँ से हम कुंडली निर्माण, रत्न परामर्श, हस्तरेखा, प्रश्न कुंडली, प्रश्न कुंडली के द्वारा ग्रहो की स्थिति, विवाह मेलापक महादशा का फल,करियर, विवाह बाधा आदि आपके कष्ट निवारण हेतु नवग्रह शांति, कालसर्प योग शांति,मंगल पूजा, रुद्राभिषेक, महामृत्युजय जाप, समस्त मांगलिक पूजा विधि विधान से सम्पन्न करवाई जाती है। सैंकड़ो संतुष्ट लोग हमसे जुड़कर उन्नति खुशहाल आध्यात्मिक ऊर्जा से पूर्ण जीवन यापन कर रहे है आप भीं अब ऑनलाइन, वाट्स अप पर समय लेकर घर बैठें पं. पूरन मिश्र जी द्वारा परामर्श प्राप्त करिये, निःसंकोच बिना भय के आपको पूर्ण संतोष जनक परामर्श प्राप्त करें.....
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03/05/2026

लखनऊ: ‘बड़े मंगल’ पर भंडारा आयोजकों के लिए नगर निगम की नई गाइडलाइन

➤ लखनऊ की 'बड़े मंगल' परंपरा के लिए नगर निगम ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। भंडारा आयोजकों को आयोजन से 24 घंटे पहले कंट्रोल रूम नंबर 1533 या 'लखनऊ वन' ऐप पर 'जीरो वेस्ट भंडारा' के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य है। जो आयोजक रजिस्टर करेंगे, उन्हें जलकल विभाग की ओर से स्थल पर निःशुल्क पेयजल की सुविधा प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जाएगी।

➤ पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक और थर्माकोल का उपयोग पूरी तरह वर्जित है; आयोजकों से पत्तलों और मिट्टी के कुल्हड़ों का ही उपयोग करने की अपील की गई है। आयोजकों को सफाई सुनिश्चित करने के लिए गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग डस्टबिन रखने होंगे और लाउडस्पीकर का उपयोग केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप ही करना होगा।

➤ स्वच्छता या अन्य किसी समस्या के लिए नागरिक हेल्पलाइन नंबर 1533, मोबाइल नंबर 9219902911 या संबंधित जोन के स्वच्छता नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।



30/04/2026

एक सरकारी कर्मचारी ने बीस वर्ष सरकारी कार्यालय में सेवा दी,
फिर एक दिन स्वेच्छा से नौकरी को त्याग पत्र अधिकारी को दिया... अधिकारी ने समझाया बड़ी मुश्किल से नौकरी मिलती है सारी जरूरतें पूरी हो रही है, फिर काहे छोड़ रहे हो...
तो उस कर्मचारी ने कहा इस जगह चार कुर्सी खाली पड़ी है परन्तु आप दो घंटे से... हमें खड़ा करके जो ज्ञान की बात समझा रहे हो.... इसलिए???

17/04/2026

भविष्य की महिला प्रधानमंत्री की छवि दिखी प्रियंका गाँधी में...
कल की प्रियंका गाँधी की छवि एक परिपक्व नेता की दिखी, जिसमे राजनितिक समझ विरोधियो की चाल समझने की कूटनीति समझने वाली दिखी... दूसरी बात देखने वाली ये थी पुरजोर विरोध किया लेकिन शालीनता से,, सभी पक्ष विपक्ष सुन रहा था..... आज प्रियंका गाँधी ने बता दिया जो पेड़ बो रहे हो उसका फल हमें ही मिलेगा भविष्य की महिला प्रधानमंत्री बन सकती है प्रियंका बस घरेलू राजनीति की शिकार न बने।

प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का भाषण कुछ हड़बड़ाहट वाला जल्द बाजी में थे, वही सभी नेता पुरानी परिपाटी निभाते आये मोदी का गारंटी कार्ड पढ़ते हुए,, वही अमित शाह जी चौक गए आज विपक्ष की दूरदर्शी नेता के भाषण से... जब कहा की आज चाणक्य को फेल कर दिया कूटनीति की घेरे बंधी में, हम विरोध करें तो जाएँ सहयोग करें तो जायेंगे ही,,, बड़ी बढ़िया चर्चा हुई शाम चार बजे तक संदन में।

16/04/2026

कहानी एक दुविधा में फसे घर वालों की...

घर का एक छोटा लड़का था,वो बाबा की नजर में कमजोर लगता था, उसको जल्दी बढ़ा करने के लिए सभी घरवालों से अधिक दूध दही घी अन्न शारीरिक वृद्धि हेतु फिर मानसिक पुष्टि के उसको रोकने टोकने वाले को दंड मिलता था,, फिर भी अगर वो आ जाए तो बैठें लोगो में उठकर उसको कुर्सी देनी होती थी।ऐसा पूरा माहौल बना दिया गया घर..... एक दिन वो लड़का राजा का खास बन गया, अब उसे घर वालों वाली पूरी सुविधाएं राजा से भी मिलने लगी,
अब ऐसे माहौल में बढ़ा वो छोटा लड़का,,, फिर राजा से अधिकार प्राप्त। अब वो हर सुविधा को अधिकार समझने लगा था। रोकने टोकने वालों दुश्मन समझने लगा,, यहाँतक अब उसकी सोच बन गयी कि ये घरवाले ही न रहे तो छोटा बेटा होने का बिल्ला भी हट जाए.... अब उसे बड़ो की हर अच्छी बात एवं छोटा बेटा कहलाना भी गाली लगने लगी....... इसी तरह हर घर में छोटे लडके खूब फलने फूलने लगे,, लगातार इनकी संख्या बड़ी, अब ये पूर्ण बलिष्ट, प्रभावशाली हो गए... अब ये तन मन धन से बड़े बन गए अब इन्होने अपनी आगे की सुविधा न बंद हो... आगे कोई न रोके टोके इसलिए इन्होने शक्ति प्रदर्शन आरम्भ कर दिया, अब इन्होने कहना आरम्भ कर दिया हम छोटे भाई है इसलिए बहुत सहन कर लिया अब हम बल बुद्धि विद्या ताकत में है अब हमारा राज्य होगा, अधिकार होगा, लेकिन वो सुविधाएं बड़ो को उसी तरह देनी होंगी,, इसमें कमी होने पर हम घर में तांडव कर देंगे, वैसे भी मेरा नहीं है तो सब घरका सामान तोड़ देंगे, घर वालों का आस्तित्व मिटा देंगे...... तो घर के बड़े लोगो ने लगभग सभी ने कहा ठीक है जब तक हमारे आस्तित्व की रक्षा रहेगी हम सुरक्षित रहेंगे तब तक सहयोग देते रहेंगे.....आगे सहनशक्ति पर निर्भर है.....मतलब ये घर की शांति तबतक है, क्लेश शांत तब तक है,,, जब छोटा भाई सुखी मानेगा स्वयं को,, जिस दिन घर घर वालों ने हाथ खींचे उसी दिन छोटा भाई हाथ उठाकर छीन लेगा वो घर वो सुख साधन वो आस्तित्व इसको बड़े अपनी पूर्वजी की थाती समझते है इसने दो राय नहीं है।।

14/04/2026

भारत की महान विभूतिया एक पुस्तक पढ़ाई जाती थी, जिसके माध्यम से बच्चे महान लोगो की जीवनी पढ़ते थे, उससे प्रेणना लेकर अपना आदर्श चुनाव करने की सीख मिलती थी,, आज की शिक्षा भी आदर्शो की प्रेरक होनी चाहिए थी,, परन्तु जीवन में आर्थिक दिक्क़तो को दूर करने में सक्षम नहीं तो जीवन कैसे सुधरेगा... आज का स्नातक ठगा सा अनुभव करता हैं 15वर्ष शिक्षा पाने के बाद उसे जीविका के लिए अलग शिक्षा प्रशिक्षण लेना होता हैं..... अगर यही जरूरी हैं तो कक्षा पांच से ही उसकी रूचि के अनुसार विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि स्नातक कोर्स उसी विषय से संबंधित हो जिससे उसे जीविका मिले शिक्षा भी योग्यता अनुसार हो।

सबको सबकुछ पढ़ा लिखा कर कंफ्यूज करके बीस साल बाद कमाने वालों की भीड़ में छोड़ दिया जाता हैं.... अब को जल प्रेमी सूखे में -कोई सूखा में रहने वाला अचानक नदियों की धार में हाथ पैर मारता दिखता हैं फिर जीने हेतु उस क्षेत्र में पांच दस वर्ष लगा देता हैं तब तक वो 30 वर्ष का होता हैं,,फिर अन्य कार्य हेतु प्राप्त जीवन का महान युवा समय केवल धन पाने की शिक्षा में गंवा दिया फिर घर विवाह बच्चे उनको पालन में बीस साल पचास साल में एक जीवन आरम्भ हो पाता हैं तब तक सुगर बीपी गठिया दमा सांस फूलना आरम्भ अब क्या सुखी रहेगा उसका जीवन अब बच्चों पर टार्चर होता हैं अपना सपना उसपे थोपना, उसका भी जीवन चक्र इसी तरह होता हैं.
शिक्षा का स्तर तरीका विधि का सुधार होना चाहिए..
1 से पांच तक भाषा अंग्रेजी गणित हिंदी कला धर्म।
फिर पांच से व्याकरण सूत्र इतिहास जोड़ दो..... फिर आठ में चेक करो कि बालक हिंदी गणित अंग्रेजी का व्याकरण सीख पाया कि नहीं, इतिहास का कितना ज्ञान हैं अगर पास हो जाए तो आगे उसकी रूचि अनुसार विषय दो यही से कोर्स बनाओ इंजिनियर डाक्टर अधिकारी वकील, वाहन घर डिजायन, घरेलु उपक्रम आदि कोर्स जो आठ से 12 तक फिर विशेष डिग्री इनसे संबंधित उच्च शिक्षा जिसे इसका स्नातक पत्र मिले...
इससे वे स्वारोजगार या नौकरी या अन्य क्षेत्र में योग्य व्यक्ति होंगे।।

13/04/2026

ट्रम्प ने ईरान देश का हुक्का पानी बंद कर दिया, ईरान ने अपना कुआँ खुदवा लिया, अब चाहे पानी मिलेगा अपना ही या उसमे गिरकर चोट।

13/04/2026

पहले टीवी मिडिया में आपको सीढ़ी दर सीढ़ी योग्यता के अनुसार आपको टीवी पर सार्वजनिक बोलने का अधिकार मिलता था,, जो समाज के हित में निष्पक्ष सत्य बात कहेँगे जैसा उन्होंने अपनी आँखों देखा हो या सुना हो या ऐसा ही प्रमाणित सत्य ही रिपोर्ट बनती थी उसी को खबर कहते थे.....
एक स्थानीय पत्र एकत्र कर्ता था उसे उस विभाग से उत्तर लेता था फिर इस रिपोर्ट को खबर बनाता था... उसको सूची करके उस खबर के उत्तरदायी अधिकारी को सूचित किया जाता था एजेंसी के द्वारा उसे सीधे वक्ता एंकर उसी भावना से सुनाता था... जैसा खबर में कहा गया हैं... इसमें वक्ता का एक भी अपना भाव न होता था.... नाम मात्र भी उस खबर से उसका कोई उत्तर दायित्व न था वो एक दूत था जो पत्रकार की बात को बता रहा हैं जो उसकी एजेंसी द्वारा पुष्ट हैं समस्त जिम्मेदारी उस एजेंसी की होती थी...... तो एजेंसी एक सच्चा पत्रकार रखती थी, निष्पक्ष विचारक लेखक शोधकर्ता एजेंसी उन्ही वरिष्ठ पत्रकारों में से चुनती थी जिन्हे अनुभूति अनुभव संस्कृत होते थे, कर्मयोगी निरलोभी होते था.... फिर इन्ही गुणों से पूर्ण वाणी शब्द देने वाला अनुभवी वक्ता प्रेस रिपोटर बनता था जो आमने सामने बैठ के प्रश्न पूछ सकता हैं, उसका जबाब तलब कर सकता हो।

अब जो खबर एजेंसी बिना पत्रकारों के, बिना प्रमाणित, बिना रिपोर्ट के प्राप्त सूचनाओं को खबर का देके में सुंदर वक्ता चतुरवाणी भाषा ज्ञानी से उनको कहलवा देती हैं।
उनको केवल दर्शक विज्ञापन धन वैभव चाहिए जन सेवा नहीं रही, ये लोक तंत्र का चौथा स्तम्भ धन की गद्दीयी पर टीका हैं....अब इसे गरीब असहाय निर्बल पीड़ित दर्द नहीं दिखता, उन सच्चे समाजसेवी नेताओं की बात देशप्रेमी जनता तक नहीं पहुँचती, किसी समाज सेवी का चरित्र नहीं बताती जिससे लोगो को भी मनोबल मिले।
सरकारों की वाणी नहीं, सरकारों की कमियाँ, अधिकारियो की कमियाँ खोजना काम था, खुबिया बताई नहीं जाती वो तो स्वयं दिख जाती हैं...
जब आप प्रकाश करोगे तो अंधकार स्वयं भाग जायेगा, अंधकार में प्रकाश का विज्ञापन नहीं लगवाया जाता था।

11/04/2026

वृन्दावन केशी घाट में यमुना में डूबने से दस की मृत्युअन्य घायल.... जिम्मेदारी किसी की नहीं....
मथुरा वृन्दावन की घटना दुःखद हैं सभी मृतक जनो को सदगति मिले, यही प्रार्थना है हैं।
कल से वहाँ के लोकल न्यूज़ चैनल वाले खबरें दे रहे... प्रशासन लापरवाह हैं सही बात हैं, पहले भी कई यूट्यूबर न्यूज़ ने कमियों को दिखाया था,, लेकिन वहाँ ये सब आम खबरें हैं ऐसा मान कर प्रशासन मौन रहता हैं।
सबकी नजर केवल पार्किंग फीस, लाइन से पैसा,,खाने वालों से रिक्सा वालों पर टिकी रहती हैं कोई स्थायी निदान नहीं करता....
हसीं आती हैं उन बुद्धिमानो पे जो कहते हैं कि बैठने वालों को देखना चाहिए था,, मतलब किसी तीर्थ में जाओ या भ्रमण करने वहाँ खाना ख़राब बिक रहा हो तो स्वयं चेक करें, रिक्सा वालों का स्वयं डी अल चेक करें, शराब पिया हैं कि नहीं चेक करें,, नाव वालों कि नाव चेक करें कितनी पुरानी हैं या वो प्राधिकरण द्वारा अधिकृत हैं या नहीं वो।जब स्वयं ही सब करना हैं तो प्रशाशन केवल दर्शक बनकर बैठा हैं।
कोई सामान गायब तो पुलिस कहेगी भाई भीड़ में अपने सामान को स्वयं देखो यहाँ चोर तो डोलते रहते हैं, अब बताओ पता सब कुछ करते कुछ नहीं....
स्वयं करोगे फिर लड़ाई करोगे तो पुलिस समझा देती हैं एक दिन के लिए आये हो काहे बवाल मचाये हो समझूंगा आगे।

कल की घटना में नाव वाला जिम्मेदार हैं उसने स्पीड लोड, लाइफ जैकेट का ध्यान नहीं दिया, उतना ही प्रसाशन उसने वहाँ लाइफ गार्ड नहीं रखें हैं, जहाँ भी टिकट लगता हैं पर्ची कटती हैं वो प्रशासन की मानी जाती हैं तो दुर्घटना का जिम्मेदार कौन होगा???

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