Dr. Jamshed Ahmad , Mau Neuropsychiatric centre

Dr. Jamshed Ahmad , Mau Neuropsychiatric centre Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Dr. Jamshed Ahmad , Mau Neuropsychiatric centre, Doctor, 48, Mirzahadipura, Maunath Bhanjan.

06/01/2023
06/01/2023
Attending 23rd ANCIAPP in BHU Varanasi
26/11/2022

Attending 23rd ANCIAPP in BHU Varanasi

Attending 23rd ANCIAPP in Varanasi
25/11/2022

Attending 23rd ANCIAPP in Varanasi

05/06/2021
16/06/2020

Common statements in our community:

1. मै पागल नहीं हूं जो psychiatrist को दिखाऊं।
2. सब तो ठीक चल रहा फिर काहे का depression।
3. इतना कमज़ोर नहीं जो दवाई लेना पड़े।
4. ये सब willpower से ठीक हो जाता है मजबूत बनो।
5. सब दिमाग में होता है डिप्रेशन वेप्रेशन कुछ नहीं होता।
6. ज़्यादा मत सोचो
7. दवा की आदत लग जाएगी
8. लोग कहते है कि बहुत स्ट्रॉन्ग दवा होती है ये सब
9. सुबह जल्दी उठा करो तो डिप्रेशन कभी नहीं होग
.many moredefenses

" Denial" & " rationalization".

Its important to understand that you do not take it to your ego when you need treatment. Depression can occur to the strongest of minds and can occur even to a psychiatrist. Needless to say all these above statements are false. Take help whenever necessary.
Talk to someone. Express and seek help.

16/06/2020

ात_करें
"डिप्रेशन जैसे मुद्दे पर बात करने से डिप्रेशन नहीं होता, ठीक वैसे ही जैसे हार्ट अटैक के बारे में बात करने से हार्ट फेल नहीं होता।
अगर बात करने से डिप्रेशन होता तो अब तक सारे साइकियाट्रिस्ट डिप्रेशन के शिकार हो गए होते।
हम लोग रोज बात करतें हैं ऐसे लोगों से, यकीन मानिए बहुत अच्छा लगता है मरीज के दुख को बांटकर, उसके चेहरे पर एक हंसी देखकर, और उसे अच्छा होता देखकर। उसके घर वालों की खुशी देखकर। जो बातें वो घर वालों या समाज को नहीं बता पाते वो हम सुनते हैं, उन्हें दिलासा देते हैं, उन्हें उस समस्या से निकलने में साथ देते हैं, बहुत अच्छा लगता है , ये एक फीलिंग है जिसे हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं बयां नहीं।
जब एक मानसिक रोग से ग्रस्त मरीज सही होता है तो सिर्फ एक मरीज ही नहीं सही होता!
सही हो जाती हैं उसकी उम्मीदें,
फिर से जाग उठते हैं उसके सपने, जिन्हें उसे पूरा करना था!
सही हो जाते हैं उसके परिवार वाले उसके बीबी उसके बच्चे! सही हो जाती है उसकी बूढ़ी मां...
जोश और हौसला वापस आ जाता है उसके बूढ़े बाप का जिसके झुके कंधे अब थोड़े स्थिर हो जाते हैं.. और क्यों ना हो उनका बेटा जो सही हो गया उन्हें संभालने को उसकी उम्मीदों का दीपक फिर से जलने लगा है।
किसी की मां सही हो कर वापस आ गई है,अब उस गोदी में उसका लाडला खेल पाएगा जो तरस गया था उसके प्यार को। उसे क्या पता था मां क्यों बदल गई थी क्यों उसे प्यार नहीं कर रही थी कुछ दिनों से।
खैर वो तो बच्चा है, हम आप कितना समझ पाएं हैं इसे।
अरे वो पागल है, अरे वो मेंटल है, ये साइको है,अरे वो खिसक गई है ये सब अलंकार दिए हैं हमारे समाज ने इन लोगों को। यही वजह है लोग आगे आकर बात करने से कतराते हैं, उनको अंदर ही अंदर घुटना ज्यादा सही लगता है। क्युकी उन्हें पता है ये लोग तैयार बैठें हैं उनके स्वागत में।
तो बताना ये था कि इन मुद्दों पर बात करने से अगर कुछ आती है,तो वो है समझ मानसिक स्वास्थ्य को और करीब से जानने की और समझने की, जिससे जब हमारा कोई अपना डिप्रेशन या किसी और मानसिक बीमारी में हो तो हम उसकी टाइम पर पहचान कर पाएं, उसे समझ पाएं, उससे बात कर पाएं, उसकी हेल्प कर पाएं। उसे अपने से अचानक दूर जाने से बचा पाएं।
आखिर हम कब तक ऐसे मुद्दों पर बात करने से कतराते रहेंगे क्यों स्वीकार नहीं कर रहें हैं हम? असल में हम सब स्वीकार ही नहीं करना चाहते। हम अगर कुछ जानते हैं तो वो इन लोगों का मजाक बनाना।
बनाइए मजाक लेकिन वो मजाक आपका भी बन सकता है जब किसी दिन आपका कोई अपना या आप खुद जब इसके शिकार होंगे। क्युकी ये बीमारियां जाति,धर्म, अमीर या गरीब, सफल या असफल नहीं देखती किसी को भी हो सकती है, कहीं कम तो कहीं ज्यादा, इसका दायरा बहुत बड़ा है।
और हां मौत का कोई बंटवार नहीं होता है, चाहे सेप्सिस से मरे, चाहे डायबिटीज से चाहे रोड एक्सिडेंट या फिर डिप्रेशन की वजह से सुसाइड करे.... इंसान मरा ही माना जायेगा, वापस नहीं आएगा.....
सुशांत सिंह राजपूत ने सुसाइड किया था, अब उनके डिप्रेशन की वजह वंशवाद, भाई भतीजावाद, चोटी पर पहुंचने की महत्वाकांक्षा या चाहे जो भी हो लेकिन जो भी था, उस स्ट्रेस ने डिप्रेशन को जन्म दिया और डिप्रेशन ने सुसाइड को.... अब वो वापस तो नहीं आएंगे लेकिन एक बात तो है कि उस बन्दे ने हम सबको मेंटल हेल्थ पर एक लम्बी बहस के लिए छोड़ दिया है, समय है इसकी गंभीरता को समझने का.......~क्रमशः 🙏
Dr. Jamshed Ahmad, MD ✍️ (Neuropsychiatrist)

13/06/2020

🛑 ( )🛑
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✅ओसीडी ब्रेन में सेरोटोनिन नामक न्‍यूरोट्रांसमीटर की कमी से या फिर हमारे मस्तिष्क के कुछ न्यूरॉन्स में गड़बड़ी, ब्रेन में न्यूरॉन्स के सर्किट ( जिसे CSTC लूप बोलते हैं) में अनियमितता के कारण होता है। इसमें अलावा भी कई कारण हो सकते हैं जैसे आनुवंशिक, इंफेक्शन, या फिर कोई स्ट्रेस।
ज्यादातर ये बीमारी यंग एज में स्टार्ट होता है और अगर इलाज ना किया गया तो बहुत लंबे समय तक चलता रहता है।
✅ इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के दिमाग में एक ही बात बार बार आती है और ये उसके ना चाहते हुए भी आती रहती है।
✅ अगर वो इन विचारों को रोकने की कोशिश करेगा तो उलझन होगी।
✅ इस उलझन को कम करने के लिए व्यक्ति वो काम बार बार करता है जिसके बारे में विचार आते हैं।
✅इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को किसी एक काम को करने की सनक सी सवार हो जाती है। वह बार-बार एक ही चीज करता है और उसे करने के बाद भी डाउट बना रहता है कि उसने ये किया है कि नहीं किया। और फिर अपने डाउट को दूर करने के लिए उसे बार बार करता है।
✅✅✅अब आपके मन में ये सवाल आएगा कि हम में से किसी को भी डाउट हो जाता है लेकिन एक सामान्य व्यक्ति अपने डाउट को एक या दो बार में क्लियर कर लेता है। लेकिन ओसीडी से ग्रस्त व्यक्ति इसे बार बार और कई बार करता है। कभी कभी तो इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति इन कामों को दोहराने में घंटों लगा देता है।

🛑 ीमारी_से_पीड़ित_रोगी_के_कुछ_प्रमुख_लक्षण

1️⃣ #साफ_सफाई_या_गंदगी_से_संबंधित_OCD (washers)
इस प्रकार के OCD में रोगी को आसपास ही नहीं खुद में भी गंदगी दिखती रहती है। अगर कोई गंदी चीज छू जाए तो रोगी तब तक हाथ धोते रहते हैं जब तक उनका दिमाग उन्हें न कहें।
▶️इस बीमारी में खासकर रोगी को सफाई की धुन सवार हो जाती है।
▶️बार बार हाथ धोना,
▶️अत्यधिक साफ सफाई करना
▶️घर के अन्य लोगों को भी सफाई के लिए बोलना।
▶️अपने सामान को किसी को छूने ना देना,
▶️अगर कोई उनके बेड या बिस्तर पर बैठ जाए तो बिस्तर को साफ कर देना या धुल देना।
▶️पूरे दिन इसी काम में लगे रहना, या इसके पीछे घंटों टाइम बरबाद करना।
▶️ बाथरूम में घंटों तक पड़े रहना

2️⃣ #डाउट_संबंधित_OCD (checkers)
▶️इस बीमारी से जूझ रहे लोगों को घर से निकते वक्त दरवाजा ठीक से बंद किया या नहीं?,
लाइट और पंखे के स्विच बंद किए या नहीं?
कहीं गैस का स्विच खुला तो नहीं है?
बाथरूम के टैब खुले तो नहीं हैं? जैसे संशय बने रहते हैं। जिसको बार बार चेक करना जैसे गैस बंद है कि नहीं, स्विच बंद है कि नहीं।और इसमें बहुत सारा टाइम बरबाद कर देना।
3️⃣ ाइप_का_OCD
▶️ इस प्रकार के OCD में रोगी के दिमाग में देवी देवताओं के बारे में बुरे या गंदे विचार आना, उनके लिए गाली आना, व्यक्ति परेशान हो जाता है क्युकी ये विचार उसकी मर्जी से नहीं आते बल्कि बीमारी की वजह से आते हैं। लेकिन इस की जानकारी ना होने की वजह से वो अपने आपको ही जिममेदार मानने लगता है।
4️⃣ ंबंधित_OCD
▶️ इस प्रकार के OCD में व्यक्ति अपने सामानों, कपड़ों या चीज़ों को एक निश्चित तरीके से ही रखने की कोशिश करता है, अगर उससे भिन्न तरीके से रखा जाए तो उलझन होने लगती है।
♂️ ये कुछ मुख्य प्रकार के OCD है। लेकिन इसके अलावा बहुत से प्रकार की OCD होती है। इसे ऐसे समझें कि वो कोई भी काम जो बार बार करना पड़े और जिसमे आपका बहुत सा समय बर्बाद हो रहा हो वो ओसीडी हो सकता है।
वो कोई भी विचार जो आपके ना चाहने पर भी बार बार दिमाग में आए, जिससे आप बहुत ज्यादा परेशान हो जाएं वो OCD वो ओसीडी हो सकता है।
🛑 ै_इलाज_की_जरूरत
अगर ऐसे लक्षणों के वजह से आपके व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक, व्यावसायिक जीवन पर प्रभाव पड़ रहा है और आप अपने काम सही से नहीं कर पा रहे हैं तो आपको इलाज की जरूरत है।

🛑 #कैसे_कराएं_इलाज
✅ किसी भी मानसिक रोग चिकित्सक (साइकियाट्रिस्ट) से संपर्क करें।
✅ऐसी दवाइयां मौजूद हैं जो दिमाग की कोशिकाओं में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ाती हैं। डॉक्टर कई बार इलाज के लिए इन दवाओं को लेने की सलाह देते हैं, जिन्हें लंबे समय तक लेना पड़ सकता है।
✅ इसके अलावा सीबीटी (cognitive behavioural therapy) जिसे आप काउंसलिंग कह सकते हैं, से भी इसका इलाज किया जाता है।
~Dr Jamshed Ahmad MD✍️ Neuropsychiatrist

Address

48, Mirzahadipura
Maunath Bhanjan
275101

Opening Hours

Monday 9am - 8pm
Tuesday 9am - 8pm
Wednesday 9am - 8pm
Thursday 9am - 8pm
Friday 9am - 8pm
Saturday 9am - 8pm

Telephone

+918299480310

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