05/01/2026
सुखासन (Sukhasana) में बैठकर भोजन करना केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह लंबी उम्र और बेहतरीन स्वास्थ्य का एक अचूक मंत्र है। जब हम जमीन पर पालथी मारकर बैठते हैं, तो यह हमारे शरीर और मन पर कई सकारात्मक प्रभाव डालता है।
सुखासन में बैठकर खाने के स्वास्थ्य लाभ:
1. हृदय स्वास्थ्य और दीर्घायु: जब हम जमीन पर बैठते हैं, तो हमारे हृदय को शरीर के निचले हिस्से में रक्त पंप करने के लिए कम मेहनत करनी पड़ती है। इससे दिल पर दबाव कम होता है और वह लंबे समय तक स्वस्थ रहता है। साथ ही, बिना किसी सहारे के जमीन पर बैठने और उठने की क्षमता को वैज्ञानिक रूप से लंबी उम्र का संकेत (Longevity Indicator) माना गया है।
2. पाचन में सुधार (जठराग्नि): सुखासन में बैठने से पेट के क्षेत्र में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे पाचन तंत्र के अंग सक्रिय हो जाते हैं। भोजन के लिए आगे झुकने और फिर सीधा होने की क्रिया से पेट की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं, जिससे 'जठराग्नि' प्रज्वलित होती है और भोजन आसानी से पच जाता है।
3. वजन नियंत्रण और मोटापा: बैठकर खाने से 'वेगस नर्व' मस्तिष्क को सही समय पर तृप्ति का संकेत भेजती है। इससे आप जरूरत से ज्यादा खाने (Overeating) से बच जाते हैं। सही पाचन और नियंत्रित आहार सीधे तौर पर वजन कम रखने और मेटाबॉलिज्म को सुधारने में मदद करते हैं।
4. जोड़ों का लचीलापन और रीढ़ की हड्डी: सुखासन में बैठने से घुटनों, कूल्हों और टखनों का व्यायाम होता है। यह रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने में मदद करता है, जिससे शरीर का पोस्चर (Posture) सुधरता है और बुढ़ापे में होने वाली जोड़ों की समस्याओं का खतरा कम हो जाता है।
5. मानसिक शांति: यह आसन मन को शांत और एकाग्र करता है। शांत मन से किया गया भोजन शरीर को अधिक पोषण देता है और तनाव संबंधी बीमारियों को दूर रखता है।
निष्कर्ष: सुखासन में बैठकर भोजन करना एक संपूर्ण स्वास्थ्य पैकेज है। यह न केवल हमारे शरीर को बीमारियों से बचाता है, बल्कि हमें एक अनुशासित और लंबी जीवनशैली की ओर ले जाता है।
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क्या आप जानना चाहेंगे कि सुखासन में बैठने का सही तरीका क्या है जिससे घुटनों पर दबाव न पड़े?