सेफ फ़ूड अभियान

सेफ फ़ूड अभियान "सेफ फ़ूड का उद्देश्य है सभी स्वस्थ रहे? "सेफ फ़ूड का उद्देश्य है सभी स्वस्थ रहें सुखी रहे"!

दैनिक जीवन की भागदौड़ में हम भोजन को सबसे कम वरीयता देते हैं, पसंद नापसंद तो जरूर याद रहती है पर जो हमारे भोजन का अंग है वो खाने योग्य शुद्ध और बिना मिलावट का है इस बात पर ध्यान नहीं देते हैं !
इसी क्रम में सेफ फ़ूड अभियान एक पहल है जो हमारे रहन सहन ,और स्वस्थ्य से जुडी अधिकमतम विषयो पे हमारा ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रेरित करती है !

20/11/2020

बढ़ती उम्र को थामने के साथ ग्लोइंग त्वचा की है चाहत, तो इस तरह से करें एलोवेरा का यूज

एलोवेरा एक मेडिसिनल प्लांट है। जिसका इस्तेमाल आप सेहत से लेकर चेहरे और बालों तक हर किसी के लिए कर सकते हैं। इसमें एंजाइम्स, एमिनो एसिड, मिनरल और विटामिन्स पाए जाते हैं। जो हैं हर तरीके से फायदेमंद। तो कैसे और किस परेशानी में कर सकते हैं इसका इस्तेमाल, जानेंगे आज।

दमकती त्वचा के लिए

बिना मेकअप के चमकती त्वचा की चाहत किसे नहीं होती लेकिन इसके लिए क्या इस्तेमाल करें और कैसे करें इसकी जानकारी हर किसी को नहीं होती। तो आपको इसके लिए बहुत ज्यादा कुछ नहीं करना है बस एलोवेरा जेल से चेहरे की अच्छी तरह से मसाज करनी है। पॉसिबल हो तो रात को सोने से पहले करें। कुछ ही दिनों के इस्तेमाल के बाद आपको इसका असर नजर आने लगेगा।

बढ़ती उम्र के असर को करता है कम

अनहेल्दी लाइफस्टाइल और वातावरण की वजह से आजकल हर कोई कम उम्र में ही बड़ी उम्र का दिखने लगा है। जाहिर है किसी को अपनी उम्र से ज्यादा दिखना पसंद नहीं होता खासतौर से महिलाओं को। ऐसे में एलोवेरा की मदद से आप बढती उम्र के असर को कम कर सकते हैं। खाली जेल लगाने के अलावा आप इसमें शहद मिलाकर भी चेहरे पर अप्लाई कर सकती हैं।

ऑयली स्किन से राहत पाने के लिेए

ऑयली स्किन कील-मुहांसे के साथ ही और भी कई दूसरी स्किन प्रॉब्लम की वजह होती है, तो अगर आप इससे छुटकारा पाना चाहती हैं तो एलोवेरा का इस्तेमाल शुरू करें। एलोवेरा में टी ट्री ऑयल मिलाकर लगाएं। इससे कील-मुंहासे तो दूर होते ही है साथ ही स्किन के पोर्स भी खुलते हैं। यहां तक कि डेड स्किन सेल्स को भी रिमूव करने में फायदेमंद है एलोवेरा।

17/09/2017

बीमारियों से छुटकारा दिलाते हैं ये ‘आहार’.......................................................
‘अनन्नास’ हड्डियों के लिए बेहतर : अनन्नास में मैंगनीज प्रचुर मात्रा में होता है जो हड्डियों तथा संयोजी ऊतकों के निर्माण के लिए आवश्यक है। एक कप अनन्नास आपकी दैनिक मैंगनीज की आवश्यकता की लगभग 73 फीसद मात्रा को पूरा करता है।

‘करौंदा’ मूत्रमार्ग का संक्रमण दूर करे : मूत्रमार्ग में संक्रमण ‘ई-कोली’ बैक्टीरिया के कारण होता है। करौंदा इस बैक्टीरिया को मूत्रमार्ग की दीवारों से जुड़ने से रोकता है। अधिक लाभ पाने के लिए ताजे करौदे खाएं या इसका रस पीएं।

‘तुलसी’ मुँह के छालों को दूर करे : मुँह के छालों के लिए तुलसी की पत्तियां सबसे अच्छा उपचार हैं। तुलसी की 4-5 पत्तियां चबाएं, इससे न सिर्फ आपके छाले कम होंगे बल्कि मुंह से आने वाली बदबू में भी आराम मिलेगा।

‘प्याज’ अस्थमा के लिए : प्याज का ‘क्वेरसेटिन’ एलर्जिक रिएक्शंस से बचाता है तथा अस्थमा से बचाव करता है। यह हृदय की बीमारी, कैंसर और मूत्राशय के संक्रमण से भी हमारी रक्षा करता है।

‘लहसुन’ बढ़ाए इम्यूनिटी : लहसुन अपने एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों के लिए जाना जाता है। लहसुन को सूप, सब्जी में डाल कर या कच्चा भी खाया जा सकता है। यह कई प्रकार से हमारी रक्षा करता है।

‘हल्दी’ आर्थराइटिस से आराम दिलाए : हल्दी में सक्रिय यौगिक सूजन जोड़ों पर आने वाली सूजन को कम करने में सहायक हैं जिसके कारण दर्द कम होने में सहायता मिलती है।

‘पत्तागोभी’ कैंसर से लड़े : इसमें अनेक प्रकार के कैंसरों को रोकने के गुण होते हैं, क्योंकि इसमें जबर्दस्त एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं।

‘ग्रीन टी’ हृदयाघात से करे बचाव : इसमें सक्रिय फ्लेवोनाइड्स दिल की बीमारी से बचाने में सहायक हैं। ग्रीन टी के 4 कप पीने से हृदयाघात की संभावना कम हो जाती है।

‘लालमिर्च’ सिरदर्द करे दूर : सदियों से तीखी लालमिर्च का उपयोग दर्द, सूजन, गले की खराश, पाचन सम्बंधी समस्याओं और सिरदर्द के इलाज में किया जाता रहा है। तीखी लालमिर्च रक्त के प्रवाह को तुरंत बढ़ाती है।

‘सेब’ त्वचा समस्या से छुटकारा दिलाए : सेब अपने एंटीसेप्टिक, एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुणों के लिए जाना जाता है। यह त्वचा की खुजली से आराम दिलाता है विशेष रूप से रूखी त्वचा से। यह जलन और सूजन को कम
करता है।

‘ऐवकाडो’ ब्लड में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करे : ऐवकाडों’ में असंतृप्त वसा अम्ल बहुत अधिक होता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने तथा अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में सहायक होता है। इसमें धमनियों को स्वच्छ करने का गुण होता है अतः प्रतिदिन 1 ऐवकाडो खाना चाहिए।
-‘सेफ फूड अभियान’

20/08/2016

जितेंद्र अग्रवाल जी के वॉल से साभार।

20-8-16
‘विश्व मच्छर दिवस’ पर विशेष
मच्छर जनित बीमारियों का स्थायी इलाज ‘‘मेंढकों की फार्मिंग’’
अपने जन-प्रतिनिधियों पर दवाब बनायें कि वे इलाज के नाम नाम पर हर साल खर्च किये जाने वाले अरबों रु. के साथ मेंढकों की फार्मिंग पर कुछ करोड़ खर्च कर मलेरिया, डेंगू से स्थायी निजात दिलवाएं।
सुबह के अखबारों से पता चला आज ‘विश्व मच्छर दिवस’ है, सोचा, चलो मच्छरों के बारे में भी बात कर ली जाए। बरसात का मौसम है, मच्छरों की खूब खेती हो रही है। हर साल की तरह मलेरिया के मरीजों की संख्या में बेतहाशा इजाफा हो गया है। डेंगू, पेल्सीफेरम, इंसेफिलाइटिस, मेनेंजाइटिस, व चिकनगुनिया ने दस्तक दे दी है। ‘जीका’ का खतरा भी सर पर मंडरा रहा है। मच्छर जनित बीमारियों के इजाज की समुचित सुविधाएं हों, का फिर से खूब शोर मचेगा। कुछ सैंकड़ा मौतों की बलि लेकर यह शोर अगले साल के लिए थम जाएगा।
हर बार बीमारी के इलाज की तो बात होती है, मगर बीमारी की जड़ ‘मच्छर’ के बारे में बात कम ही होती हैं,
हद से हद हमें समझाया जाता है कि अपने आसपास मच्छरों को पैदा न होने दें। कोई बताये कि क्या घर में पैदा होने वाला मच्छर ही हमें काटता है? क्या आसपास नाली-नालों, पानी भरे गडढ़ों, खेत, तालाब में पैदा होने वाले मच्छरों से हम सुरक्षित हैं? क्या आप जानते हैं कि सृष्टि में सबसे अधिक खूंख्वार, जानलेवा प्राणी कौन है? वह शेर नहीं, मगरमच्छ नहीं, सर्प नहीं, ‘मच्छर’ है। जी हां, दुनिया में हर साल सबसे अधिक मौतें मच्छरों के काटने से होती हैं। सरकारी तंत्र मच्छर नियंत्रण के नाम पर हमारा मन रखने के लिए कभी-कभी दवा का छिड़काव करा देता है, मगर इन सब बीमारियों की जड़ ‘मच्छर’ के खात्मे की कोई स्थायी योजना लागू नहीं होती।
इन मच्छरों के खात्मे की स्थायी योजना है-‘‘मच्छरों के यमराज ‘मेंढक’ की फार्मिंग।’’ क्या आप यह भी जानते हैं कि एक मेंढक अपने जीवनकाल में 10 लाख मच्छरों का काल बनता है। मच्छरों का लार्वा मेंढक का प्रिय भोजन है। मच्छर जनित बीमारियों का स्थायी इलाज है कि मेंढकों की सरकारी स्तर पर फार्मिंग कर उन्हें ठहरे पानी के स्रोतों यथा- नाली-नालों, खेत, तालाब, गडढ़ों में छोड़ा जाए ताकि वे मच्छरों का सफाया कर सकें। क्या सरकारी तंत्र इस सस्ते, सहज, कारगर, स्थायी इलाज को अपनायेगा? इस विधि में हर साल बीमारियों के इलाज में होने वाली सरकारी अमले की काली कमाई की गुंजाइश कम जो है। -सेफ फूड अभियान

10/08/2016

साभार श्री जितेन्द्र अग्रवाल जी के वॉल से !
तनाव घटाने को ‘खूब सोयें’
गहरी नींद के लिए रात को सोते समय और सुबह नहाने के बाद नाक में देसी गाय का देसी तरीके (दही जमा कर) से निकला घी लगायें
अच्छी नींद में सोना भला किसे अच्छा नहीं लगता। खास बात यह है कि दिनभर तरोताजा रखने वाली यह नींद न केवल कई बीमारियों को दूर भगाती है, बल्कि वजन को भी नियंत्रित रखने में मददगार साबित होती है। शहरी जीवन-शैली में तनाव बढ़ने का एक प्रमुख कारण पर्याप्त नींद न ले पाना है। रात की अच्छी नींद, तनाव बढ़ाने वाले हाॅर्मोनों का स्तर कम करती है, जिससे आप स्वयं को शांत महसूस करते हैं। अगर आप बहुत ज्यादा तनाव में हैं, तो सिर्फ आधे घंटे की नींद भी आपको राहत पहुंचा सकती है। यही नहीं, अच्छी नींद उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा करती है।
चिकित्सकों के मुताबिक दिनभर तरोताजा रहने और शरीर के सभी अंगों को सुचारू तौर पर संचालित करने के लिए 7 से 8 घंटे की नींद जरूरी है। नींद पूरी न होने से पाचन और तंत्रिका तंत्र सुचारू तौर पर काम नहीं करते, शरीर बाहरी तौर पर फूलता हुआ सा दिखता है। नींद, भूख को प्रभावित करने व नियंत्रित करने वाले हाॅर्मोंस का भी नियमन करती है। जब आप सही तरीके से नहीं सोते, तब हाॅर्मोंस का स्तर गड़बड़ा जाता है और आपकी भूख बढ़ जाती है, जो सीधे तौर पर वजन बढ़ने से जुड़ा है। -सेफ फूड अभियान

29/07/2016
06/04/2016

कलौंजी लगाएं, सर पर लहलहाते बाल वापस पाएं...

महिलाएं ही क्या पुरुष भी आम तौर पर अपने बालों को लेकर काफी चिंतित रहते हैं, आज की आधुनिक शैली और आधुनिक प्रोडक्ट्स ने हमारे शरीर को फायदा पहुंचाने के बजाय नुक्सान ही पहुंचाया है. बहुत कम लोग जानते हैं कि हमारे आसपास ऐसी बहुत सारी चीजें हैं, जिन्हें सही तरीके से खाकर सुन्दर त्वचा, बालों से लेकर अच्छी सेहत का फायदा उठाया जा सकता है.

इन्हीं में शामिल है कलौंजी जिसमें बहुत सारे मिनरल्स और न्यूट्रिएंट्स होते हैं. आयरन, सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर कलौंजी कई प्रकार के रोगों का घर बैठे इलाज है. लगभग 15 एमीनो एसिड वाला कलौंजी शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन की कमी भी पूरी करता है.

बालों को लाभ

कलौंजी के लाभ में से सबसे बड़ा लाभ बालों को होता है. अनहेल्दी लाइफस्टाइल, स्ट्रेस जैसी कई समस्याओं से महिला हो या पुरुष, दोनों के ही साथ बालों के गिरने की समस्या आम हो चुकी है. इसके लिए तमाम तरह के ट्रीटमेंट कराने पर भी फायदा नहीं होता. लेकिन घर में मौजूद कलौंजी इस समस्या के निपटारे में बहुत ही कारगर उपाय है. सिर पर 20 मिनट तक नींबू के रस से मसाज करें और फिर अच्छे से धो लें. इसके बाद कलौंजी का तेल बालों में लगाकर उसे अच्छे से सूखने दें. लगातार 15 दिनों तक इसका इस्तेमाल बालों के गिरने की समस्या को दूर करता है.

कलौंजी ऑयल, ऑलिव ऑयल और मेहंदी पाउडर को मिलाकर हल्का गर्म करें. ठंडा होने दें और हफ्ते में एक बार इसका इस्तेमाल करें. इससे गंजेपन की समस्या भी दूर होती है.

कलौंजी की राख को तेल में मिलाकर गंजे अपने सर पर मालिश करें कुछ दिनों में नए बाल पैदा होने लगेंगे. इस प्रयोग में धैर्य महत्वपूर्ण है.

कलौंजी के अन्य लाभ

डायबिटीज से बचाता है, पिंपल की समस्या दूर, मेमोरी पावर बढ़ाता है, सिरदर्द करे दूर, अस्थमा का इलाज, जोड़ों के दर्द में आराम, आंखों की रोशनी, कैंसर से बचाव, ब्लड प्रेशर करे कंट्रोल.

कलौंजी एक बेहद उपयोगी मसाला है. इसका प्रयोग विभिन्न व्यंजनों जैसे दालों, सब्जियों, नान, ब्रेड, केक और आचार आदि में किया जाता है.
कलौंजी की सब्जी भी बनाई जाती है.
कलौंजी में एंटी-आक्सीडेंट भी मौजूद होता है जो कैंसर जैसी बीमारी से बचाता है.
कलौंजी का तेल कफ को नष्ट करने वाला और रक्तवाहिनी नाड़ियों को साफ़ करने वाला होता है. इसके अलावा यह खून में मौजूद दूषित व
अनावश्यक द्रव्य को भी दूर रखता है. कलौंजी का तेल सुबह ख़ाली पेट और रात को सोते समय लेने से बहुत से रोग समाप्त होते हैं. गर्भावस्था के समय स्त्री को कलौंजी के तेल का उपयोग नहीं कराना चाहिए इससे गर्भपात होने की सम्भावना रहती है.

कलौंजी का तेल बनाने के लिए 50 ग्राम कलौंजी पीसकर ढाई किलो पानी में उबालें. उबलते-उबलते जब यह केवल एक किलो पानी रह जाए तो इसे
ठंडा होने दें. कलौंजी को पानी में गर्म करने पर इसका तेल निकलकर पानी के ऊपर तैरने लगता है. इस तेल पर हाथ फेरकर तब तक कटोरी में पोछें जब तक पानी के ऊपर तैरता हुआ तेल खत्म न हो जाए. फिर इस तेल को छानकर शीशी में भर लें और इसका प्रयोग औषधि के रूप में करें.

आयुर्वेद कहता है कि इसके बीजों की ताकत सात साल तक नष्ट नहीं होती. दमा, खांसी, एलर्जीः एक कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद तथा आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह निराहार (भोजन से पूर्व) पी लेना चाहिए, फिर रात में भोजन के बाद उसी प्रकार आधा चम्मच कलौंजी और एक चम्मच शहद गर्म पानी में मिलाकर इस मिश्रण का सेवन कर लेना चाहिए. इस प्रकार 40 दिनों तक प्रतिदिन दो बार पिया जाए. सर्दी के ठंडे पदार्थ वर्जित हैं.

मधुमेहः एक कप काली चाय में आधा चाय का चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह नाश्ते से पहले पी लेना चाहिए. फिर रात को भोजन के पश्चात सोने से पहले एक कप चाय में एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पी लेना चाहिए. चिकनाई वाले पदार्थों के उपयोग से बचें. इस इलाज के साथ अंगे्रजी दवा का उपयोग होता है तो उसे जारी रखें और बीस दिनों के पश्चात शर्करा की जांच करा लें. यदि शक्कर नार्मल हो गई हो तो अंग्रेजी दवा बंद कर दें, किंतु कलौंजी का सेवन करते रहें.

हृदय रोगः एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन दो बार प्रयोग करें. इस तरह दस दिनों तक उपचार चलता रहे. चिकनाई वाले पदार्थों का सेवन न करें.

नेत्र रोगों की चिकित्साः नेत्रों की लाली, मोतियाबिंद, आंखों से पानी का जाना, आंखों की तकलीफ और आंखों की नसों का कमजोर होना आदि में एक कप गाजर के जूस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार सुबह (निराहार) और रात में सोते समय लेना चाहिए. इस प्रकार 40 दिनों तक इलाज जारी रखें. नेत्रों को धूप की गर्मी से बचाएं.

अपच या पेट दर्द में आप कलौंजी का काढा बनाइये फिर उसमे काला नमक मिलाकर सुबह शाम पीजिये. दो दिन में ही आराम देखिये.
कैंसर के उपचार में कलौजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक ग्लास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें.

हृदय रोग, ब्लड प्रेशर और हृदय की धमनियों का अवरोध के लिए जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक छोटी चम्मच तेल मिला कर लें.

सफेद दाग और लेप्रोसीः 15 दिन तक रोज पहले सेब का सिरका मलें, फिर कलौंजी का तेल मलें.

एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर लेने से मन शांत हो जाता है और तनाव के सारे लक्षण ठीक हो जाते हैं.

कलौंजी के तेल को हल्का गर्म करके जहां दर्द हो वहां मालिश करें और एक बड़ी चम्मच तेल दिन में तीन बार लें. 15 दिन में बहुत आराम मिलेगा.

एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच शहद के साथ रोज सुबह लें, आप तंदुरूस्त रहेंगे और कभी बीमार नहीं होंगे; स्वस्थ और निरोग रहेंगे .

याददाश्त बढाने के लिए और मानसिक चेतना के लिए एक छोटी चम्मच कलौंजी का तेल 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ सेवन करें.

पथरी हो तो कलौंजी को पीस कर पानी में मिलाइए फिर उसमे शहद मिलाकर पीजिये, १०-११ दिन प्रयोग करके टेस्ट करा लीजिये.कम न हुई हो तो फिर १०-११ दिन पीजिये.

अगर गर्भवती के पेट में बच्चा मर गया है तो उसे कलौंजी उबाल कर पिला दीजिये, बच्चा निकल जायेगा.और गर्भाशय भी साफ़ हो जाएगा.

किसी को बार-बार हिचकी आ रही हो तो कलौंजी के चुटकी भर पावडर को ज़रा से शहद में मिलकर चटा दीजिये.

अगर किसी को पागल कुत्ते ने काट लिया हो तो आधा चम्मच से थोडा कम करीब तीन ग्राम कलौंजी को पानी में पीस कर पिला दीजिये, एक दिन
में एक ही बार ३-४ दिन करे.

जुकाम परेशान कर रहा हो तो इसके बीजों को गरम कीजिए ,मलमल के कपडे में बांधिए और सूंघते रहिये.

दो दिन में ही जुकाम और सर दर्द दोनों गायब . कलौंजी की राख को पानी से निगलने से बवासीर में बहुत लाभ होता है.

कलौंजी का उपयोग चर्म रोग की दवा बनाने में भी होता है. कलौंजी को पीस कर सिरके में मिलकर पेस्ट बनाए और मस्सों पर लगा लीजिये. मस्से कट जायेंगे. मुंहासे दूर करने के लिए कलौंजी और सिरके का पेस्ट रात में मुंह पर लगा कर सो जाएँ.

जब सर्दी के मौसम में सर दर्द सताए तो कलौंजी और जीरे की चटनी पीसिये और मस्तक पर लेप कर लीजिये.

घर में कुछ ज्यादा ही कीड़े-मकोड़े निकल रहे हों तो कलौंजी के बीजों का धुँआ कर दीजिये.

गैस/पेट फूलने की समस्या --50 ग्राम जीरा, 25 ग्राम अजवायन, 15 ग्राम कलौंजी अलग-अलग भून कर पीस लें और उन्हें एक साथ मिला दें. अब 1 से 2 चम्मच मीठा सोडा, 1 चम्मच सेंधा नमक तथा 2 ग्राम हींग शुद्ध घी में पका कर पीस लें. सबका मिश्रण तैयार कर लें. गुनगुने पानी की सहायता से 1 या आधा चम्मच खाएं.

महिलाओं को अपने यूट्रस (बच्चेदानी) को सेहतमंद बनाने के लिए डिलीवरी के बाद कलौंजी का काढा ४ दिनों तक जरूर पी लेना चाहिए. काढ़ा बनाने के लिए दस ग्राम कलौंजी के दाने एक गिलास पानी में भिगायें, फिर २४ घंटे बाद उसे धीमी आंच पर उबाल कर आधा कर लीजिये. फिर उसको ठंडा करके पी जाइये, साथ ही नाश्ते में पचीस ग्राम मक्खन जरूर खा लीजियेगा. जितने दिन ये काढ़ा पीना है उतने दिन मक्खन जरूर खाना है.

आपको अगर बार बार बुखार आ रहा है अर्थात दवा खाने से उतर जा रहा है फिर चढ़ जा रहा है तो कलौंजी को पीस कर चूर्ण बना लीजिये फिर उसमे गुड मिला कर सामान्य लड्डू के आकार के लड्डू बना लीजिये. रोज एक लड्डू खाना है ५ दिनों तक , बुखार तो पहले दिन के बाद
दुबारा चढ़ने का नाम नहीं लेगा पर आप ५ दिन तक लड्डू खाते रहिएगा, यही काम मलेरिया बुखार में भी कर सकते हैं.

ऊनी कपड़ों को रखते समय उसमें कुछ दाने कलौंजी के डाल दीजिये,कीड़े नहीं लगेंगे.

भैषज्य रत्नावली कहती है कि अगर कलौंजी को जैतून के तेल के साथ सुबह सवेरे खाएं तो रंग एकदम लाल सुर्ख हो जाता है. चेहरे को सुन्दर व आकर्षक बनाने के लिए कलौंजी के तेल में थोड़ा सा जैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर बाद चेहरा धो लें. इससे चेहरे के दाग़-धब्बे दूर होते हैं.

नोट : यूं तो ये सारे उपाय आयुर्वेद की किताब से लिए गए हैं और नुक्सान होने की आशंका नगण्य है फिर भी कोई भी उपचार अपनाने से पहले घर के बुजुर्गों की सलाह अवश्य लें, क्योंकि हर शरीर की तासीर अलग होती है, जिससे शरीर कोई विपरीत प्रतिक्रया भी दे सकता है.

31/03/2016

Now Safe food Abhiyan is available on caption website, for more infomation and update please do visit our website.

http://safefoodabhiyan.com/

20/10/2015

बालों के लिए ।।
आज के समय में बालों की समस्या एक बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है. चाहे वो महिला हो या पुरुष हर कोई बालों के झड़ने और बेजान हो जाने की समस्या से परेशान है.
इन समस्याओं के समाधान के लिए हम तरह-तरह की दवाइयों और केमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन इनसे फायदा होगा, इस बात की गारंटी कोई नहीं दे सकता. साथ ही इन चीजों के इस्तेमाल कई तरह के साइड-इफेक्ट का भी खतरा बना रहता है.
अगर आपको भी ऐसी ही कोई समस्या है तो काली कलौंजी आपकी इन समस्याओं का रामबाण इलाज है. कलौंजी में कई आवश्यक लवण और पोषक तत्व होते हैं. आयरन, सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर कलौंजी कई प्रकार की बीमारियों को दूर करने में बहुत फायदेमंद है. इसमें कई तरह के अमीनो एसिड और प्रोटीन भी होते हैं.
बालों के लिए कलौजी का इस्तेमाल:
1. सिर पर 20 मिनट तक नींबू के रस से मसाज करने के बाद बालों को अच्छी तरह साफ कर लें. इसके बाद कलौंजी के तेल से बालों में अच्छी तरह मसाज करें. 15 मिनट तक बालों को इसी तरह छोड़ दें. इस प्रक्रिया को नियमित करने से बालों के गिरने की समस्या दूर हो जाती है.
2. कलौंजी का तेल में ऑलिव ऑयल और मेंहदी पाउडर को मिलाकर हल्का गर्म करें. जब यह मिश्रण ठंडा हो जाए तो इसे किसी शीशी में बंद करके रख दीजिए. इस तेल से सप्ताह में दो बार मसाज करने से गंजेपन की समस्या में राहत मिलती है.
3. कलौंजी की राख को ऑलिव ऑयल में मिलाकर मसाज करने से नए बाल आना शुरू हो जाएंगे.
कलौंजी के और भी कई फायदे हैं:
1. कलौंजी डायबिटीज से सुरक्षा देता है. साथ ही ये कील-मुंहासों की समस्याओं में भी राहत पहुंचाता है. कलौंजी का इस्तेमाल दिमागी क्षमता बढ़ाने के लिए भी किया जाता है. इसके अलावा कलौंजी अस्थमा

11/07/2015

बालो को झड़ने से रोकने के लिए 100 ML नारियल के तेल में 20 करी पत्तो को 15 मिनट तक उबालिये फिर उस तेल को छानकर रख लीजिये। इस तेल से रोज़ बालो में धीरे धीरे मालिश कीजिये। बाल झड़ना बंद हो जायेंगे।

11/07/2015

Skin Care :
It's easy to overlook our gut as the source of skin troubles. But if the well-being of our internal organs and energy levels are determined by what we put in our mouths, why shouldn't the same be true for our skin?

Here's what an unhealthy gut do to your skin:

It disrupts the flora in the skin as it creates inflammation, affecting the integrity and protective function of the skin. This can lead to a drop in the microbial power of the skin to fight infection and inflammation. Research shows that small intestine bacterial overgrowth (SIBO), a condition involving inappropriate growth of bacteria in the small intestine, is ten times more prevalent in people with acne rosacea, and that a correction of gut flora led to marked clinical improvement in their skin conditions.
Altered gut flora can activate the release of substance P — a neuropeptide produced in the gut, brain and skin that plays a major role in inflammatory skin conditions like eczema.
An unhealthy gut can result in maldigestion and the malabsorption of proteins, fats, carbs and vitamins. SIBO can lead to nutritional deficiencies including vitamin B12, as well as vitamins A, D, E and K (fat-soluble vitamins) which are all critical for optimal skin health and overall good health.
An imbalance of stomach acid can result in the overgrowth of "bad" bacteria in the colon, which can lead to acne. (This was discovered over a century ago!)
14% of patients with ulcerative colitis and 24% of patients with Crohn’s disease (both diseases that affects the lining of the digestive tract) have skin manifestations.
Correcting your gut flora and establishing a healthy glow — inside and out — doesn't need to be complicated. Here are five easy steps you can take to start the healing process:
1. Stop feeding the bad guys.

The bad flora in your gut has a field day with sugar, dairy and processed grains. Starve the little critters by reducing your intake of these foods — your skin will thank you.

2. Start taking a probiotic.

Oral probiotics have been shown to improve skin conditions by reducing inflammation and oxidative stress, as well as strengthening the intestinal barrier. In one study, 80% of participants who received a probiotic experienced improvement in their acne. Here are 10 probiotic foods to add to your diet.

3. Eat prebiotic- and fiber-rich foods.

Prebiotics provide food for probiotics and can be just as important as probiotics in maintaining healthy skin and gut. Asparagus, beetroot, pumpkin, flaxseeds and garlic are wonderfully rich prebiotic foods. Fiber helps the process by sweeping away toxins and excess hormones which can wreak havoc on the skin.

4. Eat fermented foods.

Fermented foods can be a wonderful way of introducing good gut flora in a natural way. They also assist with improving digestion and stopping persistent sugar cravings.

5. Up your digestive ability.

Promoting the body’s hydrochloric acid production is critical to improving its ability to break down and absorb food. Splash apple cider vinegar onto your salads and increasing your consumption of bitter foods such as rocket, dandelion, lemon and radicchio will increase your digestive power.

Remember that what you put on and in your body are both important! Get your gut in order and your skin will follow.

20/06/2015

॥ अन्तर्राष्ट्रीय योगदिवस पर हार्दिक अभिनन्दन ॥
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महत्वपूर्ण सामयिक योग समाचार 👌👌👌👌👌👌👌
मित्रो, हमने मैडीकल कालेज मेरठ में लगातार पिछले दश वर्ष में रोगियों पर अनुसन्धान करके अनेक जटिल और गंभीर
रोगों की चिकित्सा में योग को अत्यन्त लाभकारी पाया है।
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१. पेट के रोग:
नान अल्सर डिस्पैप्सिया रोग बहुत लोगों को होता है।खट्टी डकार पेट में जलन बदहजमी उल्टी इसके प्रमुख लक्षण हैं। पेट का एक और आम रोग है इर्रीटेबल बावेला सिण्ड्रोम । इस रोग में दिन में कई कई बार पाखाना आता है। प्रायः खाना खाने के बाद दुबारा पाखाना जाना पड़ता है।
इन दोनों रोगों में योग बहुत कारगर पाया गया है।
पेट में बार बार उठने वाला दर्द कम हुआ। जलन डकार बन्द हो गयीं। भारीपन और बार बार पाखाना आना भी बहुत कम हो गया।
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२. हृदयरोग:
हृदयरोगियों का छाती का दर्द कम हो गया, घूमने फिरने की क्षमता बढ़ गयी और उनका साँस फूलना भी कम हो गया।
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३. ब्लडप्रैशर:
हल्का ब्लडप्रैशर बिना दवा के ही ठीक हो गया। उनकी परिश्रम करने की क्षमता बढ़ गयी। मध्यम और तेज ब्लडप्रैशर के रोगियों की दवाएँ कम हो गयीं।
😃😀😄😃😀😄😃
४. क्रोनिक ब्रोंकाइटिस एवं श्वाश रोग:
पुरानी खाँसी और अस्थमा के रोगियों को आशातीत लाभ हुआ। उनकी कार्यक्षमता बढ़ी और बहुत से रोगी वापस अपनी ड्यूटी पर भी जा सके।
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५. एच.आई.वी. / एड्स: लगभग चार सौ रोगियों पर किये शोध में
हमें बहुत उत्साहवर्धक परिणाम मिले। हमने पाया कि योग करने वाले रोगियों के मानसिक सन्तुलन में सुधार हुआ। उनमें आत्मबल एक महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा कि एच.आई.वी. की दवा नहीं ले रहे रोग की प्रारम्भिक अवस्था वाले रोगियों में सी.डी.-४ कोशिकाओं की संख्या कम होने की गति धीमी हो गयी। इसका अर्थ यह हुआ कि योग करने वाले इन रोगियों को अपेक्षाकृत लम्बे समय तक एच.आई.वी. की दवाएँ शुरू करने की आवश्कता नहीं पड़ेगी। अर्थात् मँहगी दवाओं का खर्च घटेगा।💐🌸🌷🍀🌹🌷🌻🌺

६. मधुमेह:
हल्की डायबिटीज के रोगियों के योग करने से उनका ब्लडशुगर लेवल नार्मल आ गया। उनका कोलेस्ट्राल लेवल कण्ट्रोल हो गया।
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७.मेटाबोलिक सिण्ड्रोम:
यदि किसी व्यक्ति को मोटापा, हाई ब्लडप्रैशर,डायबिटीज के साथ साथ उसका कोलेस्ट्राल भी बढ़ा हुआ हो तो उसे यह
मेटाबोलिक सिण्ड्रोम का रोग होता है। यह बड़ाखतरनाक रोग होता है। आमतौर पर इससे पीड़ित रोगी की आयु १० से १५ वर्ष घट जाती है। हमने इस रोग से ग्रस्त रोगियों पर भी शोधकार्य किया । संक्षेप में हमने पाया कि योग करने से इन रो
गियों का मोटापा, शुगर, ब्लडप्रैशर और कोलेस्ट्राल चारों कण्ट्रोल हुए।
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८.गुर्दारोग:
क्रानिक किडनी डिजीज या क्रमिक रीनल फेलियर गुर्दों के रोग की अन्तिम अवस्था है जिसमें प्रायः सप्ताह में दो-तीन बार हीमोडायलिसिस (मशीन द्वारा खून की सफाई) करानी पड़ती है। हमने इन रोगियों को योग कराया। उनकी भूख में सुधार हुआ। उल्टियाँ कम हुईं। शरीर की सूजन कम हुई और सबसे महत्वपूर्ण यह कि प्रतिमाह उन्हें कम बार डायलिसिस की जरूरत पड़ी । अर्थात् धन की बचत हुई।
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९. क्रोनिक हिपैटाइटिस:
क्रोनिक हिपैटाइटिस रोग में भी योग द्वारा रोगियों को अत्यन्त लाभ मिला है। उनके बढ़े हुए लिवर एन्जाइम घट गये। भूख लगने लगी। हरारत कमजोरी दूर हो गयी।
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१०. ऐञ्जाइटी न्यूरोसिस घबराहट मानसिक अवसाद:
इस रोग की प्रारम्भिक अवस्था के रोगियों पर किये गये अनुसन्धान में भी हमें उत्साहजनक परिणाम मिले हैं।

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विभिन्न रोगों की चिकित्सा में योग पर हमारा शोधकार्य अभी जारी है। परमात्मा की कृपा और आप सबकी शुभकामनाओं और आशीर्वाद से हम योग चिकित्सा के वैज्ञानिक आधार को और दृढ़ करने में सफल होंगे ऐसा विश्वास है।

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आपकी प्रतिक्रियाएं और सुझाव हमारे लिए बहुमूल्य हैं।
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धन्यवाद सहित ।
इति ओ३म् शम्॥
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डा. तुंगवीर सिंह आर्य प्रोफेसर मैडीसिन लाला लाजपतराय स्मारक मैडीकल कालेज मेरठ उत्तरप्रदेश भारतवर्ष
ईमेल: drtvsingh@gmail.com
मोबाइल: +919412200311

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