26/10/2025
चलो पूजा पाठ करते हैं ओए भगवान सुन तेरे से बहुत दिन से कह रहा हूं कि मेरे कुछ जीवन नाटक के काम पड़े हैं तू करता क्यों नहीं है कई बार तुझसे कहा है मंत्र पढ़ा तंत्र पढ़ा, यंत्र बनाया, कई रूपये की प्रसाद रिश्वत दी, और यहां तक कि तेरे मानव निर्मित मूर्ति फोटो पर माथा भी रगड़ा --- बहुतों कि समर्पण ,सहयोग ,सेवा दी पर मेरे जीवन के आतंकी मेरे जीवन के विरोधी, मेरे जीवन के छुपे छीनाल शत्रु अवरोध क्यों नहीं अंत कर सका
बता न मेरे --- *पाप* --- बोल न मुझे कि तू पत्थर नहीं मूर्ति में भी बैठा है --- ओए बोल ---- ?बता न? अरे तू है ---? या ---? मेरा तो तू ही विश्वास रहा है मेरे पूर्वजों ने बताया था कि तू पवित्र पुण्य के साथ है -- तो समर्पित को कभी कष्ट नहीं देता ---? क्या मेरे पूर्वज झूठे थे ---? नहीं - न ----- ही ये मेरे पूर्वज गलत नहीं हो सकते -- सच तुझे सुनना ही होगा और राक्षसों का भयानक अंत करना ही पड़ेगा ---- समझा निराकार ---? समझा स्वयंभू सर्वव्यापी -----? अरे कर दे मेरी प्रार्थना को साकार -- कान खोल मेरे विश्वास तू कान खोल और उठा त्रिशूल --- कर अंत -- गले सढ़े निकृष्ट नीचुओ का स्वयंभू अनंत सर्वव्यापी -- सुन मेरी चीख सुन -- अब सहा नहीं जाता रे --- इतना तटस्थ मत रह जाग तंद्रा से -- खोल तीसरा चक्षु -- और मिटा दे मेरे अश्रुओं की धारा -- हे ,अबे, मेरे हृदयीय प्राण प्रदाता -- कोटि कोटि -- तुझे समर्पण -- *मनोज मलंग का मन*