Gau Seva and Gau raksha

Gau Seva and Gau raksha गौमाता को बचाने के लिए को संरक्षण और स?

मैं आप लोगों से ही निवेदन करना चाहता हूं कि गौ माता के संरक्षण संवर्धन के लिए आगे आये और ज्यादा से ज्यादा गौशाला खोलें और गोमूत्र और जैविक खाद बनाकर लोगों को बेचे.गोमूत्र से कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों का निदान होता है. अतः आप इस मुहीम मे मेरी भागीदारी करें और मेरे चैनल से जुड़े धन्यवाद

मै एक प्रशिक्षित योग शिक्षक हूं और मैं योगा क्लास से चलाता हूं अतः अगर आपको योगा क्लास से चाहिए तो मेरे यूट्यूब चैनल से जुड़े हैं और हेल्प टिप्स चाहिए तो इसके लिए आप मेरे व्हाट्सएप चैनल से जुड़े हैं और मैं आपको 2 क्लासेज फ्री दूंगा अगर आपको मेरी क्लास अच्छा लगते हैं तो आगे आप कंटिन्यू कर सकते हैं धन्यवाद
प्रदीप जायसवाल
व्हाट्सप्प नंबर.8882525302

05/03/2024

पतंजलि का अपना अलग ही जलवा है।

जो रेट बाजार में, वही रेट एयरपोर्ट पर।।

बाकी कंपनिया तो 5-8 गुना वसूलती हैं।

स्वामी जी और पतंजलि परिवार की जय हो।

05/03/2024

जनपद मीरजापुर के किसान भाईयों को सहर्ष अवगत कराना है कि आपके अपने कृषि विज्ञान केन्द्र, बरकछा-मीरजापुर राजीव गाँधी दक्षिणी परिसर मे वसंतकालीन/जायद मे बुवाई के लिए मूंग और उर्द का बीज उपलब्ध है।इच्छुक किसान भाई अपनी आवश्यकतानुसार आधार कार्ड और उध्दरण खतौनी के साथ केन्द्र से नकद मूल्य पर बीज ले सकते हैं। बीज की मात्रा सीमित है।इसलिए पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा ।
Mob.8882525302

19/02/2024
05/02/2024

चना:
1. चने की फसल में झुलसा रोग की रोकथाम के सलए ब्जंक मैग्नीस काबोनेट 2 ककलोग्राम
अथवा जीरम 90 प्रनतशत 2 ककलोग्राम प्रनत हेक्टेर्र की दर से नछडकाव करें।
2. चने की फसल को फली छेदक कीट से बचाव के सलए फली बनना शुरू होते ही बैससलस
थ ररनब्जएब्न्सस (बी.टी.) 1.0 ककग्रा अथवा फे नवैलरेट 20 प्रनतशत ई.सी. 1.0 लीटर अथवा
क्र् नालफास 25 प्रनतशत ई.सी. 2.0 लीटर प्रनत हेक्टेर्र 500-600 लीटर पानी में घोलकर
नछडकाव करें।
मटर:
1. मटर में बुकनी रोग (पाउडरी समल््र् ) रोग की रोकथाम के सलए प्रनत हेक्टेर्र 2.0 ककग्रा
घुलनशील सल्फर र्ा काबेन्डाब्जम 500 ग्राम र्ा ट्राइडोमाफय 80 ई.सी. 500 समलीलीटर की
दर से 12-14 हदन के अन्तराल पर दो नछडकाव करें।
राई:
1. माह कीट की रोकथाम के सलए प्रनत हेक्टेर्र समथाइल-ओ- डडमेटान 25 ई.सी. 1.00 लीटर
र्ा मैलाधथर्ान 50 ई.सी. 1.50 लीटर का प्रर्ोग करना चाहहए।
मक्का:
1. रबी मक्का में तीसरी सस ंचाई, बोआई के 75-80 हदन पर तथा चौथी सस ंचाई 105-110 हदन
बाद कर दें।
2. बसन्तकालीन मक्का की बोआई प रे माह की जा सकती है।
3. मक्का की बोआई के सलए संकर प्रजानतर्ों 20 ककलोग्राम प्रनत हेक्टेर्र व संकुल प्रजानतर्ों के
सलए 20 से 25 ककलोग्राम प्रनत हेक्टेर्र बीज की आवश्र्कता होती है।
4. मक्का में प्रनत हेक्टेर्र 120 ककलोग्राम नाइट्रोजन, 60 ककलोग्राम फास्फे ट र्ा फास्फोरस तथा
40 ककलोग्राम पोटास में से नाइट्रोजन की नतहाई मात्रा व फास्फे ट एवं पोटाश की प री मात्रा
बुवाई के समर् प्रर्ोग करना चाहहए।
गन्ना:
1. बसन्तकालीन गन्ने की बोआई देर से काटे गर्े धान वाले खेत में और तोररर्ां/मटर /आल
की फसल से खाली हुए खेत में की जा सकती हैं।
2. गन्ने की मध्र्म एवं देर से पकने वाली प्रमुख ककस्में हैं – को.शा. 767, को.शा. 802,
को.शा. 7918 एवं को.शा. 8118 जल्दी तैर्ार होने वाली ककस्में हैं- को. पन्त 211, को.शा.
687 व को.शा. 8436 । जल-ननकास की समस्र्ा वाले क्षेत्रों के सलए बी.ओ. 54 व बी.ओ.
91 अच्छी ककस्में हैं।
3. गन्ना का बीज ब्जस खेत से लेना हो तो 2 सप्ताह पव य उसकी सस ंचाई कर दें।
4. उपचाररत बीज की बवु ाई 75 से 90 सेंटीमीटर की दर ी पर, कतारों में 10 सेंटीमीटर की

05/02/2024

फसलोत्पादन:
गेह ूँ
:
1. बोआई के समर् के हहसाब से गेह ूँमें दस री सस ंचाई बोआई के 40-45 हदन बाद तथा तीसरी
सस ंचाई 60-65 हदन की अवस्था में कर दें। चौथी सस ंचाई बोआई के 80-85 हदन बाद बाली
ननकलने के समर् करें।
2. गेह ूँ के खेत में च हों का प्रकोप होने पर ब्जंक फास्फाइड से बने चारे अथवा एल्र् समननर्म
फास्फाइड की हटककर्ा का प्रर्ोग करें। च हों की रोकथाम के सलए साम हहक प्रर्ास अधधक
सफल होगा।
3. खेत में र्हद कण्डुवा रोग से ग्रस्त बाली हदखाई दे तो उसे ननकाल कर जला दें।
जौ:
1. जो मैंतीन सस ंचाई उपलजध हो तो दस री सस ंचाई बुवाई के 55-60 हदन बाद गांठ बनने की
अवस्था में और तीसरी सस ंचाई दध धर्ा अवस्था में बुवाई के 95-100 हदन बाद करें।
2. जौ की फसल में ननराई-गुडाई का अच्छा प्रभाव होता है।
3. जौ की खेत में र्हद कण्डुवा रोग से ग्रस्त बाली हदखाई दे तो उसे ननकाल कर जला दें।

03/02/2024

-AmitBhobhia Punganur cow farming|Punganur Cow ghar me kese pale | how to keep Punganur cow at home|how to purchase Punganur cow | Punganur cow pric...

अपने मिट्टी को रोग मुक्त करने के लिए और अपने शरीर को भी रोगों से बचाने के लिए जैविक खाद्यपदार्थ का उत्पादन करिए और जैविक...
15/08/2023

अपने मिट्टी को रोग मुक्त करने के लिए और अपने शरीर को भी रोगों से बचाने के लिए जैविक खाद्यपदार्थ का उत्पादन करिए और जैविक प्रोडक्ट ही खाइए.
मैं आपसे यही विनम्र निवेदन करूंगा कि आने वाले समय में अपने खेतों में जैविक खाद का उपयोग करे और ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्शन पाए .यह आपके प्रोडक्शन को दोगुना बढ़ा देगा और आपकी खेत को ज्यादा से ज्यादा अधिक उपजाऊ कर देगा.

धन्यवाद
प्रदीप जायसवाल
जायसवाल वर्मी कंपोस्ट मिर्जापुर उत्तर प्रदेश
Yoga with pradeep jaiswal
jaiswal vermi compost
Manisha Pradeep Jaiswal
Bjp Sonbhadra
Kashi Banaras - काशी बनारस
Satguru Varmicompost जैविक/केंचुआ खाद


Prashant Mishra
Pradeep Jaiswal

अपने मिट्टी को रोग मुक्त करने के लिए और अपने शरीर को भी रोगों से बचाने के लिए जैविक खाद्यपदार्थ का उत्पादन करिए और जैविक...
12/08/2023

अपने मिट्टी को रोग मुक्त करने के लिए और अपने शरीर को भी रोगों से बचाने के लिए जैविक खाद्यपदार्थ का उत्पादन करिए और जैविक प्रोडक्ट ही खाइए.
मैं आपसे यही विनम्र निवेदन करूंगा कि आने वाले समय में अपने खेतों में जैविक खाद का उपयोग करे और ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्शन पाए .यह आपके प्रोडक्शन को दोगुना बढ़ा देगा और आपकी खेत को ज्यादा से ज्यादा अधिक उपजाऊ कर देगा.

धन्यवाद
प्रदीप जायसवाल
जायसवाल वर्मी कंपोस्ट मिर्जापुर उत्तर प्रदेश
Yoga with pradeep jaiswal
jaiswal vermi compost
Manisha Pradeep Jaiswal
Bjp Sonbhadra
Kashi Banaras - काशी बनारस
Satguru Varmicompost जैविक/केंचुआ खाद


Prashant Mishra
Vandana Jaiswal Vandana Jaiswal
Manne Lal Jaiswal
Subhash Jaiswal Bjp
Rajiv Jaiswal
Dhananjay
jaiswal vermi compost

02/08/2023
08/05/2023

धान की खेती

मेडागास्कर पद्धति धान की पैदावार बढ़ाने की नई पद्धति है जिसमें कम पानी, कम बीज और बिना रासायनिक खाद के दोगुना से ज्यादा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इस नई पद्धति में धान के खेत में पानी भरकर रखने की जरूरत नहीं है। क्योंकि खेत में पानी भरे रखने से पौधे का सम्पूर्ण विकास नहीं होता। अगर खेत में पानी भरा हो तो पौधे की अधिकांश जड़े बालियाँ निकलने से पहले ही सड़ जाती है और उसकी बढ़वार कमजोर होती है। इसलिये उत्पादन भी कम होता है।

दूसरी तरफ मेडागास्कर पद्धति में खेत में पानी भरकर नहीं रखने से पौधे की जड़ों का समुचित विकास होता है। मिट्टी में पौधे की जड़े फैलती है। गोबर व कम्पोस्ट खाद से मिट्टी में समाहित जीवांश को जीवाणुओं द्वारा पचाकर पौधों को पोषण उपलब्ध कराते हैं। इससे ज्यादा कंसा आते हैं और ज्यादा उत्पादन होता है।

बीज का चुनाव

1. इस पद्धति में सिर्फ एक एकड़ में 2 किलो ही बीज चाहिए।

2. आप अपने क्षेत्र और मिट्टी के हिसाब से उपलब्ध देशी बीज का चुनाव कर सकते हैं।
3. अगर बारिश के पानी के भरोसे खेती करना है तो जल्दी पकने वाली (हरूना) धान लगाएँ यानी 100 से 125 दिन की अवधि वाली किस्म लगाएँ।
4. अगर सिंचाई की सुविधा है तो देर से पकने वाली (मई धान 130-150 दिन) किस्म लगा सकते हैं।
बीज का उपचार

1. बीज को नमक पानी में उपचारित कर हल्का बीज हटा दें।
2. उपचारित बीज को दिन भर ताजा पानी में भिगो दें।
3. भीगे हुए बीज को बोरी में बाँधकर एक-दो दिन तक अंकुरण के लिये रखे।
4. अंकुर फूटते ही नर्सरी में बोएँ।

नर्सरी तैयार करने का तरीका

1. समतल जगह में गोबर खाद आदि डालकर अच्छे से तैयार कर लें।
2. ढाई फीट चौड़ी और 10 फीट लम्बी क्यारियाँ बना लें।
3. क्यारी जमीन से 3-4 इंच ऊँची होनी चाहिए।
4. क्यारियों के बीच में पानी निकासी के लिये नाली होनी चाहिए।
5. क्यारियों को समतल कर अंकुरित बीज को बोएँ।
6. बीज ज्यादा घना न डालें, दूर-दूर रहें (एक डिस्मिल में 2 किलो बीज)
7. गोबर खाद की हल्की परत से ढक दें।
8. नमी कम होने पर हाथ से पानी सींचें।

रोपाई

1. रोपाई के लिये 10-12 दिन का ही थरहा होना चाहिए।
2. पहले गोबर खाद डालकर खेत को तैयार कर लें।
3. रोपाई के दो रोज पहले मताई करें और समतल करें।
4. एक या दो दिन बाद ही निशान लगाने के लिये पानी निकाले।
5. दतारी जैसे औजार से निशान खींचें।
6. रोपाई के निशान 10-10 इंच के अन्तर से डालें।
7. 8-10 कतार के बाद पानी निकासी के लिये नाली छोड़ दें।
8. थरहा से पौधों को सावधानी से मिट्टी के साथ निकालें और खेत में ले जाएँ।
9. लगाते समय एक-एक पौधे को अलग-अलग करें।
10. पौधा अलग करते समय जड़ों के साथ बीज और मिट्टी भी लगी रहे।
11. दतारी से बने चौकोर निशान पर एक-एक पौधा रोपें।

खाद की व्यवस्था

1. इसमें गोबर खाद, कम्पोस्ट खाद, हरी खाद आदि का ही प्रयोग करें।
2. रासायनिक खाद 30% डालने की जरूरत है।
3. प्रति एकड़ me 150 kg गोबर खाद डाल सकते हैं।(30% Uria and 70% vermi compost)
4. हरी खाद के रूप में सनई या कुलथी (हिरवा) बोकर एक-डेढ़ माह बाद रोपाई के पहले सड़ा सकते हैं।

पानी का नियोजन

1. खेत में पानी भर जाने पर निकासी करें।
2. सिर्फ औजार से निराई के समय ही 2-3 दिन के लिये पानी में खेत में भरकर रखें।
3. बाली निकलने से दाना भरने तक खेत में अंगुल भर पानी भरकर रख सकते हैं।
4.. पानी निकासी के लिये नाली बनाना जरूरी है।
5. पानी निकालकर बाजू के खेत या डबरी में रख सकते हैं जिससे जरूरत पड़ने पर सिंचाई की जा सके।

खरपतवार नियंत्रण

1. खेत में पानी भराव न होने से खरपतवार जल्द उग आते हैं
2. रोपाई के बाद 10-11 दिन में कतार के बीच में वीडर (औजार) चलाएँ।
3. रोपाई के 25-30 रोज के बीच में दूसरी बार वीडर चलाएँ।
4. वीडर चलाने के लिये खेत में पानी का भराव जरूरी है इसलिये दो रोज पहले से पानी रोकें।
5. वीडर चलाने के बाद एक-दो दिन में पानी निकासी करें।
6. पौधे की बढ़वार कम होने पर तीसरी बार वीडर चलाएँ।
7. आखिरी बार बचे हुए खरपतवार की हाथ से निराई करें।

सीधा बीज बोकर भी मेडागास्कर पद्धति से धान की खेती कर सकते हैं

1. वर्षा आधारित और कम उपजाऊ खेत में सीधा बीज बोना ज्यादा उचित रहेगा।
2. अच्छी बारिश होने पर 2-3 बार गोबर जोतकर खाद मिट्टी में मिला लें।
3. मिट्टी को भुरभुरी कर समतल बना लें।
4. 10-10 इंच दूरी में खाद डालकर निशान बना लें।
5. उपचारित बीज भिगोकर 2-2 बीज निशान में बोएँ।
6. बीज आधा इंच गहराई पर बोएँ।
7. 8-10 कतार के बाद पानी निकासी के लिये नाली की जगह छोड़े।
8. 10-15 दिन में बीज उगने के साथ-साथ खरपतनार खुरपी से निकाल दें।
9. बारिश की कमी है तो दोबारा इसी तरह निराई करें।
10. पानी भरा होने पर वीडर चलाकर निराई-गुड़ाई करें।
11. दो-तीन दिन से ज्यादा पानी भरा रहने पर निकासी करें।
12. कम अवधि और सूखारोधी किस्मों का ही प्रयोग करें

Thanks
Pradeep jaiswal
Contact:8882525302

Address

Village Bhatauli Post Bhatauli
Mirzapur
231001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Gau Seva and Gau raksha posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Share on Facebook Share on Twitter Share on LinkedIn
Share on Pinterest Share on Reddit Share via Email
Share on WhatsApp Share on Instagram Share on Telegram