Multiplier Organic Future Farming

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नवाचार और समृद्धि का नाम — “मल्टीप्लायर जैविक खाद”, जो किसानों की मेहनत को दे दोगुना फल।

“मल्टीप्लायर” फसलों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है, जिससे कीट व रोगों का असर कम होता है।

मिट्टी का मोह और बदलाव का शंखनाद: गाँव की समृद्धि का नया मार्गकिसी भी गाँव की असली धड़कन उसकी ज़मीन, कलकल बहता पानी और प...
07/05/2026

मिट्टी का मोह और बदलाव का शंखनाद: गाँव की समृद्धि का नया मार्ग
किसी भी गाँव की असली धड़कन उसकी ज़मीन, कलकल बहता पानी और पसीने से मिट्टी सींचने वाला किसान होता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दशकों से वही मेहनत करने के बाद भी हमारे खलिहानों की रौनक कम क्यों होती जा रही है?

बदलाव किसी सरकारी फ़ाइल से नहीं, बल्कि उस *"नवाचारी किसान"* की सोच से आता है जो लीक से हटकर चलने का साहस करता है।
वह किसान, जो केवल फसल नहीं उगाता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नया रास्ता बनाता है।

नवाचारी किसान कोई प्रयोगशाला में बैठा वैज्ञानिक नहीं है, वह आप और हम जैसा ही एक मिट्टी का लाल है।
फर्क सिर्फ इतना है कि उसने *"जो चल रहा है, वही चलता रहेगा"* वाली बेड़ियाँ तोड़ दी हैं।
वह सवाल पूछता है, वह प्रयोग करता है।

वह गिरता है, हारता है, लेकिन उस हार से सीखकर जब खड़ा होता है, तो वह पूरे गाँव के लिए एक मशाल बन जाता है।
*"हार खेती का अंत नहीं, बल्कि सबसे बड़ी गुरु है। जो समय के साथ नहीं बदला, वक्त उसे पीछे छोड़ देगा।"*

एक चिंगारी जो पूरे गाँव को रोशन कर दे….
गाँव में बदलाव हमेशा सामूहिक नहीं होता, वह *व्यक्तिगत साहस* से शुरू होता है।
जब एक किसान पारंपरिक खेती से हटकर जब अपने खेत के छोटे से हिस्से में गेंदा, सब्जियां, दलहन उगाता है या औषधीय पौधों की हिम्मत करता है, तो वह सिर्फ नई फसल का प्रयोग नही कर रहा होता, वह पूरे क्षेत्र का भाग्य बो रहा होता है।
*उदाहरण:* जहाँ कभी सिर्फ गन्ना था, आज वहां फूलों की महक है, तरह-तरह की सब्ज़ियों के रंग हैं।
*परिणाम:* जहाँ सिर्फ पारंपरिक खेती थी, आज वहां की मंडियां पूरे भारत में मिसाल हैं।
यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि किसी एक भाई ने 'रिस्क' लेने की हिम्मत दिखाई।
उसकी एक छोटी सी अलग करने की सोच ने उससे हुई जीत ने पूरे गाँव के आत्मविश्वास को हिमालय जैसा ऊँचा कर दिया।

खेती का भविष्य: 'मल्टीप्लायर ऑर्गेनिक तकनीक' के साथ नवाचार
आज खेती के सामने तीन दानव खड़े हैं: *बढ़ती लागत, ज़हरीली होती मिट्टी और घटता उत्पादन।*

नवीनीकरण का अर्थ सिर्फ नया बीज नहीं है, बल्कि ऐसी तकनीक को अपनाना है जो प्रकृति और जेब दोनों का ख्याल रखे। यहीं पर *"मल्टीप्लायर ऑर्गेनिक तकनीक"* एक वरदान बनकर उभरी है।

नवाचारी सोच और “मल्टीप्लायर” का संगम
एक सोच बदलने वाला किसान अब पुराने ढर्रे के रसायनों पर निर्भर नहीं रहता।
वह समझ चुका है कि असली ताकत मिट्टी के 'सूक्ष्मजीवों' में है।
*मल्टीप्लायर तकनीक* केवल एक खाद नहीं, बल्कि मिट्टी के कायाकल्प का अभियान है:
*मिट्टी का पुनर्जन्म:* यह तकनीक मिट्टी को वापस जंगल जैसी उपजाऊ और भुरभुरी बनाती है।
*लागत में भारी कमी:* जैसे-जैसे मिट्टी प्राकृतिक रूप से समृद्ध होती है, रसायनों का खर्च शून्य की ओर बढ़ने लगता है।
*उत्पादन में निरंतर वृद्धि:* यह पौधों के भोजन ग्रहण करने की क्षमता (Photosynthesis) को कई गुना बढ़ा देती है, जिससे फसल लहलहाती है।

जब एक नवाचारी किसान “मल्टीप्लायर ऑर्गेनिक तकनीक” अपनाता है, तो उसका खेत पूरे गाँव के लिए *"मॉडल फार्म"* बन जाता है।
लोग देखते हैं कि कम खर्चे में भी बेहतर और विष-मुक्त फसल ली जा सकती है।

आज नहीं तो कब?
आप नहीं तो कौन?
गाँव का विकास शहरों से आने वाली खैरात पर निर्भर नहीं है।
विकास तब होता है जब गाँव का पैसा गाँव में रहे और शहर का पैसा गाँव की ओर आए।
यह तभी संभव है जब हमारी उपज में गुणवत्ता हो और हमारी लागत कम हो।
*किसान भाइयों, खुद से ये सवाल पूछिए:*
* क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ी को एक बंजर और ज़हरीली ज़मीन देकर जाना चाहते हैं?
* क्या हम हमेशा सरकारी सब्सिडी के भरोसे रहेंगे या खुद अपने भाग्य विधाता बनेंगे?
*बदलाव की शुरुआत के छोटे कदम:*
1. *छोटा आरंभ😗 पूरे खेत में नहीं, सिर्फ एक छोटे हिस्से में नया प्रयोग और 'मल्टीप्लायर' का उपयोग करें।
2. *समूह की शक्ति:* 4-5 प्रगतिशील किसान मिलकर चर्चा करें और अनुभव साझा करें।
3. *सीखने की ललक:* जो सफल है, उससे पूछने में शर्म न करें।

आप केवल एक किसान नहीं हैं, आप अपने गाँव की समृद्धि के *"ध्वजवाहक"* हैं।
आपकी एक छोटी सी 'हाँ' और नवाचार की ओर बढ़ाया गया एक कदम आपके परिवार और गाँव की तस्वीर बदल सकता है।
याद रखिये, मिट्टी पुकार रही है... उसे फिर से जीवित करने का, फिर से समृद्ध होने का समय आ गया है।
*उठिए, बदलिए और नेतृत्व कीजिये!*

संपर्क करें….
*अमित जगनेश त्यागी (डायरेक्टर)*
"फार्मर आंत्रप्रेन्योरशिप डेवलेपमेंट प्रोग्राम" (FEDP)
संपर्क: 7533919931

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06/05/2026

#किसान_ज्ञान #नाइट्रोजन_प्रबंधन #मिट्टी_की_सेहत #उर्वरक_जानकारी #कृषि_सलाह #स्मार्ट_फार्मिंग ्पादन #जैविक_खेती #कृषि_विज्ञान #ट्रॉली #जीवाणुओं #भुरभुरी #एकड़ #गड्ढे #केंचुए #मजदूर #उपजाऊ #सड़ी #मिट्टी #मल्टीप्लायर #किसानभाई #किसानपुत्र #किसानआंदोलन #किसानजीवन #किसानी #जैविक #खाद #खाद्यान्न #ऑर्गेनिक #किसान #किसानों #किसान_एकता

26/04/2026

"गर्मी की तपिश सिर्फ़ आपकी फ़सलों पर ही असर नहीं डालती..."

“यह आपकी मिट्टी में छिपे लाखों फ़ायदेमंद सूक्ष्मजीवों को जगा देती है। लेकिन सही पोषण के बिना, ये सूक्ष्मजीव अपना काम ठीक से नहीं कर पाते।"

“मल्टीप्लायर जैविक खाद” आपकी मिट्टी के जैविक तंत्र को पोषण देता है, ताकि वह ठीक उसी समय पोषक तत्व उपलब्ध कराए, जब आपकी फ़सलों को उनकी ज़रूरत हो।"

"मल्टीप्लायर जैविक खाद इन्हीं सूक्ष्म जीवाणुओं का सबसे प्रिय भोजन है। इस गर्मी में, सिर्फ़ अपनी फ़सलों को खाद ही न दें; बल्कि अपनी मिट्टी में मौजूद केंचुओं और सूक्ष्मजीवों को भी सक्रिय करें।"

"आज ही अपनाएँ मल्टीप्लायर और अपनी खेती को खुशहाल बनाएँ!"

13/04/2026

“किसान भाईयों…
एक सवाल… आप खुद से पूछिए…

क्या वजह है कि…
हम हर साल एक #एकड़ खेत में 12–13 #ट्रॉली गोबर खाद डालते हैं…
फिर भी… मिट्टी पहले जैसी ताकतवर नहीं बन पा रही…?

और एक बात… #दिल पर हाथ रखकर बताइए…
क्या हम सच में #गड्ढे में #सड़ी- #गली, पूरी तरह तैयार #खाद डाल रहे हैं…
या सिर्फ #सूखा हुआ #गोबर खेत में फैला रहे हैं…?

क्या यही वजह तो नहीं…
कि हमारी #खेती का #खर्च बढ़ता जा रहा है…
और जमीन की सेहत… लगातार गिरती जा रही है…?



सच्चाई ये है भाईयों…
हम मिट्टी को ‘खाद’ तो दे रहे हैं…
लेकिन… वो खाद जिंदा नहीं है…

हम सूखा गोबर डाल रहे हैं…
ना कि पूरी तरह सड़ी-गली… #जीवाणुओं से भरपूर… असली जैविक खाद…

और इसलिए…
हम मिट्टी के अंदर की असली ताकत… जगा नहीं पा रहे।

और यही काम करता है…
#मल्टीप्लायर जैविक खाद।

ये कोई साधारण खाद नहीं है…
ये मिट्टी में पहले से मौजूद #ताकत को…
कई गुना बढ़ाने की तकनीक है।

जैसे…
अगर आपके घर में #मजदूर बैठे हों…
(यानी… सूक्ष्म जीवाणु और #केंचुए)

लेकिन… उन्हें दिशा देने वाला कोई ना हो…
तो काम रुक जाएगा…

लेकिन जैसे ही एक सही #मैनेजर आता है…
(यानी… मल्टीप्लायर जैविक खाद)

वही मजदूर…
दोगुनी… तीन गुनी मेहनत करने लगते हैं…

मल्टीप्लायर…
मिट्टी के सूक्ष्म जीवाणुओं और केंचुओं के लिए
ऊर्जा और #भोजन का स्रोत बनता है…

जिससे उनकी #संख्या तेजी से बढ़ती है…
और वही जीवाणु…
मिट्टी को #भुरभुरी… #उपजाऊ… और जिंदा बनाते हैं…

#गन्ने की फसल में…
जहाँ 12–13 ट्रॉली गोबर की जरूरत पड़ती है…
वहीं सिर्फ 10 किलो मल्टीप्लायर…
मिट्टी को उतना ही काम करने लायक बना देता है…

#गेहूं और #धान में…
सिर्फ 4 किलो मल्टीप्लायर…
पूरी जमीन की जैविक ताकत को जगा देता है…

भाईयों…
हम खाद नहीं बढ़ा रहे…
हम… अपनी मिट्टी की ताकत बढ़ा रहे हैं…

क्योंकि अब… हमारे पास है…
मल्टीप्लायर जैविक तकनीक।

समय आ गया है…
खर्च बढ़ाने का नहीं…
समझ बढ़ाने का… और खर्च घटाने का।

मिट्टी को जिंदा कीजिए…
और खेती को फिर से फायदे का सौदा बनाइए…

मल्टीप्लायर जैविक तकनीक के साथ…

“जागो किसान भाइयों …
मिट्टी… तुम्हें बुला रही है…” 🌱
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🌾 अब आपकी फसल देगी दोगुना मुनाफा! 💸क्या आप भी अपनी फसल की पैदावार बढ़ाना चाहते हैं और मिट्टी को फिर से उपजाऊ बनाना चाहते ...
31/03/2026

🌾 अब आपकी फसल देगी दोगुना मुनाफा! 💸

क्या आप भी अपनी फसल की पैदावार बढ़ाना चाहते हैं और मिट्टी को फिर से उपजाऊ बनाना चाहते हैं?

प्रस्तुत है "मल्टीप्लायर (Multiplier)" जैविक खाद - जो आपकी खेती में जान फूंक दे! 🛡️🌱

मल्टीप्लायर खाद के फायदे:
* ✅ मिट्टी को बनाए बलवान: यह बंजर होती मिट्टी को भी उपजाऊ बनाता है।
* ✅ शानदार पैदावार: फसल की ग्रोथ बढ़ाता है और दानों में चमक लाता है।
* ✅ लागत में कमी: रासायनिक खादों पर होने वाले फालतू खर्च को कम करता है।
* ✅ सभी फसलों के लिए: गेहूं, धान, सब्जी या फल—हर फसल के लिए वरदान।

💰 विशेष गारंटी
"बेहतर पैदावार पाओ, जिसके फलस्वरूप आपके पैसे निश्चित रूप से वापस होंगे!"
क्योंकि हमें “मल्टीप्लायर” उत्पाद पर पूरा भरोसा है, इसीलिए हम देते हैं 100% Money Back Guarantee. 🤝
आज ही आर्डर करें और अपनी खेती को लाभ का सौदा बनाएं!

📞 संपर्क करें: प्रियंका सैनी [95576 93103]

📍 पता: [ग्राम :- मकरमतपुर सिखैडा, मोदीनगर, ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश 201204]

“फार्मर एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम” (FEDP)

मिट्टी को बनाये बलवान, किसान को धनवान! 🚜🌾

“आपके अनुसार गेहूं कटाई के बाद सबसे ज्यादा फायदा किस फसल में है?1️⃣ मूंग2️⃣ मूंगफली3️⃣ तरबूज / खरबूज4️⃣____________कृपया...
28/03/2026

“आपके अनुसार गेहूं कटाई के बाद सबसे ज्यादा फायदा किस फसल में है?

1️⃣ मूंग

2️⃣ मूंगफली

3️⃣ तरबूज / खरबूज

4️⃣____________

कृपया कमेंट करके बताएं और अपने जिले का नाम भी जरूर लिखें 👇”

किसान "बेचारा" नहीं, "बाहुबली" है! 🚜🌾क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग हमेशा किसान को 'लाचार', 'असहाय' और 'दयनीय' ही क्यो...
25/03/2026

किसान "बेचारा" नहीं, "बाहुबली" है! 🚜🌾

क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग हमेशा किसान को 'लाचार', 'असहाय' और 'दयनीय' ही क्यों दिखाना चाहते हैं?
क्या यह सहानुभूति है या किसान के आत्मसम्मान और उसके पुरुषार्थ का अपमान?

आज का किसान आसमान की ओर टकटकी लगाने वाला "बेचारा" नहीं, बल्कि तकनीक और नवाचार से लैस 'एग्री-प्रेन्योर' बनने की राह पर है।

इस लेख में पढ़िए:

✅ क्यों राजनीति करने वाले सफल किसानों का उदाहरण देने से कतराते हैं?

✅ क्या 'कर्ज माफी' असली समाधान है या आत्मनिर्भरता?

✅ कैसे मल्टीप्लायर ऑर्गेनिक तकनीक, FPOs और नाबार्ड जैसी संस्थाएं किसान की तकदीर बदल रही हैं।

वक्त आ गया है "बेचारे किसान" के नैरेटिव को बदलकर "समर्थ किसान" के विचार को स्थापित करने का। पूरा लेख नीचे पढ़ें और अपनी राय साझा करें। 👇

किसान: लाचारी का विज्ञापन या आत्मनिर्भरता का पर्याय?
अक्सर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर एक रटा-रटाया विलाप सुनाई देता है— "किसान बेचारा है, मौसम की मार है, मजदूर महंगा है, किसान असहाय है।"
सुनने में यह बातें बड़ी संवेदनशील लगती हैं, लेकिन गहराई से सोचें तो क्या यह वास्तव में संवेदनशीलता है या किसान के पुरुषार्थ का अपमान?

बेचारगी का चश्मा उतारकर देखिए
आज का किसान वह नहीं है जो केवल आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा रहे।
तकनीक, सूचना और सरकारी योजनाओं के इस दौर में किसान अब एक 'एग्री-प्रेन्योर' (कृषि-उद्यमी) बनने की राह पर है।

जो लोग आज भी किसान को 'दयनीय' दिखाकर अपनी राजनीति चमका रहे हैं, वे उन सफल किसानों की कहानियों को क्यों दबा देते हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से बंजर जमीन से सोना उगाया है?

मुफ्तखोरी की राजनीति बनाम नवाचार
यह कड़वा सच है कि एक बड़ा वर्ग आज भी इसी इंतज़ार में रहता है कि कब कर्ज माफी होगी या कब बिना कुछ किए सब्सिडी जेब में आएगी।

लेकिन क्या कर्ज माफी कभी स्थायी समाधान रही है?

असली समाधान उन हज़ारों FPOs (किसान उत्पादक संगठन) में है, जो सरकार की मदद से आज सीधे बाज़ार से जुड़ रहे हैं।
सवाल यह है कि कोई भी किसान प्रतिनिधि या जनप्रतिनिधि किसानों को सफल किसानों का उदाहरण क्यों नहीं देते?

वे क्यों नहीं ज़ोर देते कि भाई, ऐसे सफल किसानों के साथ मिलकर कुछ सीखिए और आगे बढ़िए?

आखिर कब तक बेचारगी की इस परिस्थिति में रहेंगे?

शायद डर यह है कि अगर किसान सशक्त और जागरूक हो गया, तो इन नेताओं की 'लाचारी वाली राजनीति' कैसे चलेगी?
सफलता के मार्ग पर अग्रसर किसान
जो प्रतिनिधि प्रगतिशील किसानों का उदाहरण देने से कतराते हैं, उन्हें अपने से जुड़े किसानों को समझाना चाहिए कि आज ऐसे हज़ारों किसान हैं जो:
* पारंपरिक खेती छोड़कर ऑर्गेनिक और केमिकल-फ्री खेती कर रहे हैं।
* बिचौलियों के आगे हाथ फैलाने के बजाय अपना खुद का ब्रांड बनाकर सीधे ग्राहकों को उत्पाद बेच रहे हैं।
* खेती को एक घाटे का सौदा नहीं, बल्कि एक लाभकारी बिज़नेस मॉडल की तरह चला रहे हैं।
परिवर्तन की लहर और हमारी जिम्मेदारी
आज सॉयल हेल्थ कार्ड से लेकर नीम कोटेड यूरिया, “मल्टीप्लायर ऑर्गेनिक तकनीक”, जैविक खेती और आधुनिक सिंचाई तकनीक तक, सब उपलब्ध हैं।

कमी योजनाओं की नहीं, बल्कि मानसिकता की है।

जो जनप्रतिनिधि केवल 'जय किसान' का नारा लगाकर उसे लाचार बताते हैं, वे दरअसल उसे कभी सशक्त होते देखना ही नहीं चाहते, क्योंकि सशक्त किसान किसी की दया का पात्र नहीं बनता।

निष्कर्ष: समाधान की राह
किसान देश का अन्नदाता है, वह 'बेचारा' नहीं है।

उसे सहानुभूति की नहीं, सही दिशा और तकनीक की जरूरत है।
जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वे ऐसी गोष्ठियाँ करवाएं जिनमें:
* सफल किसानों के संघर्ष और सफलता के उदाहरण पेश किए जाएं।
* कृषि वैज्ञानिकों को बुलाकर विभिन्न फसलों और आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।
* नाबार्ड (NABARD) जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को बुलाया जाए, जो किसानों को समझाएं कि किन-किन योजनाओं के तहत उन्हें किस प्रकार के आर्थिक लाभ मिल सकते हैं।
वक्त आ गया है कि हम "किसान बेचारा है" के नैरेटिव को बदलकर "किसान समर्थ है" के विचार को स्थापित करें।
जो किसान खुद को बदलने का साहस रखता है, उसके लिए आसमान भी छोटा है।

जय जवान, समर्थ किसान!


11/01/2025
ऐसे लोग, जो जबरदस्त रूप से सक्रिय रहने के बावजूद भी, एक पल के लिए चिंता, गुस्सा, या हताशा महसूस नहीं करते - यही वो लोग ह...
13/05/2023

ऐसे लोग, जो जबरदस्त रूप से सक्रिय रहने के बावजूद भी, एक पल के लिए चिंता, गुस्सा, या हताशा महसूस नहीं करते - यही वो लोग हैं, जिनकी दुनिया को जरूरत है।
"FEDP" डायरेक्टर अमित त्यागी जी, भारतवर्ष के एकमात्र सबसे शुद्ध उत्पाद, #संपूर्ण_न्यूट्रिशन के माध्यम से एक ऐसी ही दुनिया बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
क्योंकि, "संपूर्णम न्यूट्रिशन" है तो संभव है।
8006983100

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Modinagar
201201

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