30/01/2026
बिना पानी और बिना साँस लिए जीकर दिखाओ, फिर पता चलेगा कि प्रकृति क्या है.
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हम अक्सर सोचते हैं कि
मनुष्य सबसे शक्तिशाली है,
विज्ञान से सब सम्भव है,
टेक्नोलॉजी से हर सीमा टूट सकती है,
लेकिन यह बात हमें अचानक ज़मीन पर उतार देती है,
बिना पानी — जीवन सम्भव नहीं,
बिना साँस — एक पल भी नहीं,
यानि जीवन की सबसे बुनियादी ज़रूरतें
हमारे बस में नहीं हैं
हम पैसा बना सकते हैं,
मकान बना सकते हैं,
शहर बसा सकते हैं
पर एक साँस नहीं बना सकते,
हम कहते हैं
मैंने ये कर लिया, मैंने वो बना लिया
लेकिन सच यह है कि
जब तक प्रकृति साथ है,
तब तक ही हमारा सामर्थ्य है,
गीता की दृष्टि से देखें तो
यह बात सीधे पराधीनता और अहंकार को तोड़ती है,
श्रीकृष्ण कहते हैं
मनुष्य कर्ता होने का भ्रम पालता है,
पर वास्तव में सब कर्म
प्रकृति के गुणों से ही होते हैं,
हम स्वतंत्र नहीं हैं, जितना हम समझते हैं,
हम मालिक नहीं हैं, जितना हम मान लेते हैं,
हम प्रकृति से ऊपर नहीं, उसी के भीतर हैं,
अगर सच में अपने आपको
सबसे बड़ा समझते हो,
तो पहले प्रकृति की एक छोटी-सी शर्त पूरी करके दिखाओ,
बिना पानी
और बिना साँस लिए
जीकर दिखाओ.
🙏
Patel
Jignesh Patel