Pandit Sanjay shastri ji

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13/08/2022

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गुप्त नवरात्र 8 जुलाई तक:देवी पार्वती ने किया था दस महाविद्याओं का प्रदर्शन इसलिए इन्हीं दिनों होती है देवी के दस रूपों ...
01/07/2022

गुप्त नवरात्र 8 जुलाई तक:देवी पार्वती ने किया था दस महाविद्याओं का प्रदर्शन इसलिए इन्हीं दिनों होती है देवी के दस रूपों की आराधनागुप्त नवरात्रि 30 जून से शुरू हो गई है। जो कि 8 जुलाई तक रहेगी। इस बार तिथियां कम नहीं होने से पूरे नौ दिनों के अखंड नवरात्र होंगे। जो कि शुभ रहेंगे। ग्रंथों में बताया गया है कि आषाढ़ मास के इन्हीं दिनों में देवी पार्वती ने शिवजी के सामने अपनी दस महाविद्याओं का प्रदर्शन भी किया था। इसलिए इन दिनों में देवी के दस रूपों की पूजा करने की परंपरा बनी है। कम ही लोगों को इसकी जानकारी होने के कारण इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। इनमें विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती हैं।

विशेष इच्छा पूर्ति और सिद्धि के लिए गुप्त नवरात्र
महाकाल संहिता और तमाम शाक्त ग्रंथों में इन चारों नवरात्रों का महत्व बताया गया है। इनमें विशेष तरह की इच्छा की पूर्ति तथा सिद्धि प्राप्त करने के लिए पूजा और अनुष्ठान किया जाता है। इस बार माघ महीने की गुप्त नवरात्रि 25 जनवरी से 3 फरवरी तक रहेगी। अश्विन और चैत्र माह में आने वाली नवरात्रि में जहां भगवती के नौ स्वरूपों की आराधना होती है, वहीं, गुप्त नवरात्र में देवी के दश महाविद्या स्वरूप की आराधना भी की जाती है।

गोपनीय रखा जाता है साधना को
गुप्त नवरात्र की आराधना का विशेष महत्व है और साधकों के लिए यह विशेष फलदायक है। सामान्य नवरात्रि में आमतौर पर सात्विक और तांत्रिक दोनों तरह की पूजा की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में ज्यादातर तांत्रिक पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्रि में आमतौर पर ज्यादा प्रचार प्रसार नहीं किया जाता, अपनी साधना को गोपनीय रखा जाता है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होगी, सफलता उतनी ही ज्यादा मिलेगी।

गुप्त नवरात्रि में मानसिक पूजा का महत्व
चैत्र और शारदीय नवरात्र की तुलना में गुप्त नवरात्र में देवी की साधाना ज्यादा कठिन होती है। इस दौरान मां दुर्गा की आराधना गुप्त रूप से की जाती है इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इन नवरात्र में मानसिक पूजा का महत्व है। वाचन भी गुप्त होता है यानी मंत्र भी मन में ही पढ़े जाते हैं, लेकिन इन दिनों में सतर्कता भी जरूरी है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि गुप्त नवरात्र केवल तांत्रिक विद्या के लिए ही होते हैं। इनको कोई भी कर सकता है लेकिन थोड़ा ध्यान रखना आवश्यक है।

देवी सती ने किया था 10 महाविद्याओं का प्रदर्शन
भगवान शंकर से सती ने जिद की कि वह अपने पिता दक्ष प्रजापति के यहां अवश्य जाएंगी। प्रजापति ने यज्ञ में न सती को बुलाया और न भगवान शंकर को। शंकर जी ने कहा कि बिना बुलाए कहीं नहीं जाते। लेकिन सती जिद पर अड़ गईं। सती ने उस समय अपनी दस महाविद्याओं का प्रदर्शन किया।

भगवान शिव ने सती से पूछा की ये कौन हैं तब सती ने बताया कि सती ने बताया,ये मेरे दस रूप हैं। सामने काली हैं। नीले रंग की देवी तारा हैं। पश्चिम में छिन्नमस्ता, बाएं भुवनेश्वरी, पीठ के पीछे बगलामुखी, पूर्व-दक्षिण में धूमावती, दक्षिण-पश्चिम में त्रिपुर सुंदरी, पश्चिम-उत्तर में मातंगी तथा उत्तर-पूर्व में षोड़शी हैं। मैं खुद भैरवी रूप में अभयदान देती हूं। इन्हीं दस महाविद्याओं ने चंड-मुंड और शुम्भ-निशुम्भ वध के समय देवी के साथ असुरों से युद्ध किया।

जुलाई का राशिफल:इस महीने मिथुन राशि वालों को नौकरी में मनचाही जिम्मेदारी और मकर, कुंभ राशि को रुका हुआ पैसा मिलने के योग...
01/07/2022

जुलाई का राशिफल:इस महीने मिथुन राशि वालों को नौकरी में मनचाही जिम्मेदारी और मकर, कुंभ राशि को रुका हुआ पैसा मिलने के योग हैंजुलाई में पांच ग्रहों की चाल बदलेगी। इनका असर सभी राशियों पर पड़ेगा। जिससे मेष राशि वाले लोग इस महीने निवेश करना चाहते हैं तो उनके लिए समय अच्छा रहेगा। मिथुन राशि वालों को नौकरी में मनचाही जिम्मेदारी और रुका हुआ पैसा मिलने के योग हैं। बिजनेस में नए फैसले लेने के लिए सिंह राशि वालों के लिए ये महीना अच्छा रहेगा।

वृश्चिक राशि वालों के लिए ये महीना अच्छा रहेगा। प्रॉपर्टी संबंधी कामों फायदा होने के योग हैं। धनु राशि वालों के रुके काम पूरे होंगे। आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। मकर और कुंभ राशि के लोगों को रुका हुआ पैसा मिलने के योग हैं। वहीं अन्य राशियों पर इस महीने सितारों का मिला-जुला असर दिखेगा।

डॉ. अजय भाम्बी के मुताबिक आपकी राशि के लिए कुछ ऐसा रहेगा ये महीना...

मेष - पॉजिटिव- प्रॉपर्टी संबंधित कोई रुका काम है, तो इस माह उसके बनने की पूरी संभावना है। रचनात्मक और सामाजिक कामों में आपका ज्यादा समय बीतेगा। मीडिया और संपर्क सूत्रों संबंधी गतिविधियों में अपना विशेष ध्यान रखें, आपको कोई महत्वपूर्ण सूचना मिल सकती हैं। भविष्य संबंधी योजनाओं पर भी विचार होगा।
नेगेटिव- अपने महत्वपूर्ण कार्य माह के पूर्वार्द्ध में ही पूरा करने का प्रयास करें। क्योंकि बाद में परिस्थितियां कुछ प्रतिकूल भी हो सकती हैं। मन को स्थिर रखने का प्रयत्न करें। स्वभाव में परिपक्वता लाना जरूरी है। जोखिम भरे कार्यों में बिल्कुल भी रुचि ना ले, अन्यथा नुकसान हो सकता है। व्यर्थ के वाद-विवाद की स्थिति से खुद को दूर ही रखें।
व्यवसाय- किसी के साथ पार्टनरशिप करने की योजना है, तो उस पर गंभीरता से विचार करें। समय अनुकूल है। इस समय मार्केटिंग और प्रमोशन पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है। किसी बिजनेस में इन्वेस्टमेंट के लिए भी समय अनुकूल है। नौकरी में जैसी स्थिति चल रही है, उसी में सामंजस्य बिठाना उचित रहेगा।
लव- पति-पत्नी का आपसी सामंजस्य मधुरता पूर्ण रहेगा। परिवार के साथ कोई मनोरंजक यात्रा संभव है। प्रेम संबंधों में एक दूसरे की भावनाओं तथा मर्यादा का ध्यान जरूर रखें।
स्वास्थ्य- स्वास्थ्य ठीक रहेगा। अपना इम्यून सिस्टम मजबूत रखने के लिए संयमित दिनचर्या रखें। खांसी, जुकाम जैसी हल्की-फुल्की दिक्कत रह सकती है।

वृष - पॉजिटिव- घर में नजदीकी संबंधियों के आगमन से चहल-पहल भरा माहौल रहेगा। साथ ही किसी पारिवारिक मुद्दे को लेकर चल रही गलतफहमियां दूर होंगी। घर में नवीनीकरण तथा परिवर्तन संबंधी कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं भी बनेगी। व्यस्तता के बावजूद कुछ समय अपनी रूचि पूर्ण कार्यों के लिए भी निकालें। इससे मानसिक सुकून मिलेगा।
नेगेटिव- खर्च करते समय बजट को नजरअंदाज ना करें, वरना बाद में पछताना पड़ सकता है। बातचीत करते समय अभद्र भाषा का प्रयोग ना करें। स्वयं पर भरोसा रखें, किसी की गलत सलाह आपके लिए नुकसानदायक रह सकती हैं। मित्रों तथा निकट संबंधियों के साथ संबंधों में खटास ना आने दें।
व्यवसाय- व्यक्तिगत व्यस्तता की वजह से व्यवसाय को नजरअंदाज ना करें। वर्तमान परिस्थितियों की वजह से धैर्य और संयम से काम लेना जरूरी है। कार्यक्षेत्र में कर्मचारियों के साथ उचित तालमेल बनाकर रखें। फोन द्वारा आपको महत्वपूर्ण आर्डर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोग अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाने से टारगेट आसानी से हासिल कर लेंगे।
लव- पारिवारिक वातावरण खुशनुमा रहेगा। पति पत्नी बीच संबंध सुखद और सहयोगात्मक रहेंगे। किसी पुराने मित्र के मिलने से बेहतरीन यादें भी ताजा होगी।
स्वास्थ्य- मौसम का प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। इस समय स्वास्थ्य की सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन गंभीरता से करना जरूरी है।

मिथुन - पॉजिटिव- यह माह काफी व्यस्तता पूर्ण व्यतीत होगा। अपने खास कार्यों को प्राथमिकता पर रखें। पिछले काफी समय से कोई रुकी हुई पेमेंट मिल सकती है। किसी भी मुश्किल कार्य को आप अपने परिश्रम द्वारा हल करने की क्षमता रखेंगे। बच्चों से संबंधित कोई शुभ समाचार मिलने से घर में उत्सव भरा माहौल रहेगा।
नेगेटिव- व्यक्तिगत कार्यों के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में भी हिस्सा लेना जरूरी है। गलत नियत के लोगों से दूरी बनाकर रखें। कुछ अनावश्यक खर्चे आपको परेशान कर सकते हैं। पड़ोसियों के साथ किसी भी बात को लेकर वाद-विवाद में ना पड़ें।
व्यवसाय- कार्यक्षेत्र में उचित व्यवस्था बनी रहेगी। साथ ही कर्मचारियों और सहयोगियों का भी उचित सहयोग मिलेगा। सिर्फ बेहतरीन रणनीति बनाकर काम करने की जरूरत है। किसी अनुभवी व्यक्ति का उचित मार्गदर्शन भी मिलेगा। नौकरी में मनोनुकूल कार्यभार मिलने से चल रहे तनाव से राहत मिलेगी।
लव- व्यस्तता की वजह से घर परिवार को अधिक समय नहीं दे पाएंगे। विवाहेत्तर संबंधों का नकारात्मक प्रभाव पारिवारिक जीवन पर पड़ सकता है। साथ ही आपका कैरियर भी प्रभावित हो सकता है।
स्वास्थ्य- गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं रहेंगी। तनाव और थकान का असर आपके स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा। योगा और मेडिटेशन इसका उचित इलाज है।

कर्क - पॉजिटिव- परिवार के साथ मौज-मस्ती भरे क्रियाकलापों में बेहतरीन समय व्यतीत होगा। समझदारी से लिए गए फैसले आपकी आर्थिक स्थिति को और अधिक बेहतर बनाएंगे भविष्य संबंधी योजनाओं में निवेश करने के लिए समय अनुकूल है। घर के जरूरत संबंधी वस्तुओं की खरीदारी भी बनी रहेगी।
नेगेटिव- अपरिचित लोगों से ज्यादा मेल मिलाप रखना नुकसान दे सकता है। बच्चों की गतिविधियों तथा संगति पर कड़ी नजर रखें। आलस की वजह से कुछ अधूरे काम छूट दे सकते हैं, इस समय अपनी उर्जा और कार्य क्षमता में कमी ना आने दे। समय के अनुसार अपने व्यवहार में भी परिवर्तन लाना जरूरी है। यात्राएं कम ही करें, तो बेहतर है।
व्यवसाय- इस समय कोई भी व्यवसायिक निर्णय खुद ही लेने का प्रयास करें। किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए समय अनुकूल नहीं है। कई व्यवसायिक मामलों में कोई नया निर्णय लेते समय दिक्कतें आएंगी। कमीशन संबंधी कार्यों में सफलता मिल सकती हैं। नौकरी अतिरिक्त कार्यभार बना रहेगा।
लव- प्रेम प्रसंगों में भावनात्मक नज़दीकियां बढ़ेगी। पति-पत्नी के संबंध भी सौहार्दपूर्ण और सुखद रहेंगे। तथा घर परिवार में सुकून भरा माहौल रहेगा।
स्वास्थ्य- गैस और कब्ज संबंधी समस्या से परेशान रहेंगे। उचित इलाज लंे, क्योंकि इसकी वजह से और भी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

सिंह - पॉजिटिव- सामाजिक व धार्मिक क्रियाकलापों में आपकी रूचि बढ़ेगी। इन गतिविधियों में समय व्यतीत करने से आपको मानसिक सुकून और शांति मिलेगी। प्रॉपर्टी के लेनदेन संबंधी कार्य में सफल रहेंगे। आपकी कोई विशेष प्रतिभा लोगों के सामने आएगी। जिससे आपका मनोबल और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
नेगेटिव- दूसरों के मामलों में बिना वजह हस्तक्षेप ना करें। अन्यथा आप मुसीबत में पड़ सकते हैं। व्यर्थ की गतिविधियों में खर्चा करने से बजट बिगड़ सकता है। भाइयों के साथ संबंधों में खटास ना आने दे। क्योंकि इसका असर पारिवारिक व्यवस्था पर भी पड़ेगा। बड़े बुजुर्गों की सलाह व मार्गदर्शन पर अवश्य अमल करें ।
व्यवसाय- व्यवसाय संबंधी कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए समय बेहतरीन है। अगर कोई नया काम शुरू करने की योजना बनाई है, तो तुरंत उस पर अमल करें। परंतु पेमेंट वगैरह अभी रुक सकती हैं, जिसकी वजह से मन परेशान रहेगा। कोई ऑफिशियल यात्रा भी संभव है। जो कि लाभदायक रहेगी।
लव- पारिवारिक वातावरण पर किसी अन्य व्यक्ति का हस्तक्षेप ना होने दे। घर के किसी अविवाहित सदस्य के विवाह हेतु उत्तम रिश्ता आ सकता है। किसी धार्मिक उत्सव में शामिल होने के निमंत्रण भी मिलेंगे।
स्वास्थ्य- अत्यधिक भागा दौड़ी की वजह से थकान और तनाव रहेगा। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। दिनचर्या में योगा मेडिटेशन जैसी गतिविधियों को भी शामिल करें। वाहन भी सावधानी पूर्वक चलाएं।

कन्या - पॉजिटिव- आपको कोई विशेष योग्यता अथवा काबिलियत को तराशने का मौका मिलेगा। आपके काम स्वतः ही बनते जाएंगे। इसलिए गंभीरता और मेहनत से अपने कार्यों पर ध्यान दें। अगर किसी भी तरह का कोई विवाद चल रहा है, तो उसे सुलझाने का उचित समय है। पारिवारिक देखरेख के लिए भी आप समय निकाल लेंगे।
नेगेटिव- अपने आसपास के नकारात्मक लोगों की गतिविधियों से अनभिज्ञ ना रहे। कभी-कभी आलस और लापरवाही की वजह से आप कुछ काम डालने का प्रयास कर सकते हैं। इस समय गाड़ी अथवा प्रॉपर्टी से संबंधित किसी भी कार्य को स्थगित रखना उचित रहेगा। कोई भी दिक्कत आने पर पारिवारिक सदस्यों की सलाह अवश्य लें।
व्यवसाय- कोई मन मुताबिक व्यवसायिक कॉन्ट्रैक्ट मिल सकता हैं। किसी नए कार्य को शुरू करने संबंधी योजनाएं भी बनेगी। पार्टनरशिप संबंधी व्यवसाय में ध्यान रखें कि पार्टनर के साथ संबंधों में मतभेद उत्पन्न ना हो। ऑफिस में फाइलें तथा दस्तावेज संबंधी कागजात बहुत ही संभाल कर रखने की जरूरत है। वरना आपको अपना टारगेट हासिल करने में विलंब हो सकता है।
लव- परिवार की जरूरतों पर भी ध्यान रखना आपका दायित्व है। हालांकि वैवाहिक संबंधों में मधुरता और सामंजस्य बना रहेगा। प्रेम संबंधों में किसी गलतफहमी की वजह से अलगाव भी उत्पन्न हो सकता है।
स्वास्थ्य- नसों में खिंचाव और दर्द जैसी समस्या बढ़ेगी। लापरवाही ना बरतें, व्यायाम तथा इलाज दोनों पर ध्यान दें। साथ ही वर्तमान वातावरण से भी अपना बचाव रखना जरूरी है।

तुला - पॉजिटिव- इस माह आप अपनी दिनचर्या और कार्यप्रणाली में कुछ परिवर्तन लाने की कोशिश करेंगे। और काम की अपेक्षा आप अपने व्यक्तिगत तथा रुचि संबंधी गतिविधियों पर अधिक समय व्यतीत करेंगे। इससे आपको मानसिक सुकून और खुशी मिलेगी। तथा अपने कार्यों को योजनाबद्ध और डिसिप्लिन तरीके से अंजाम भी दे पाएंगे।
नेगेटिव- कभी-कभी आलस्य या विघ्न बाधाएं आने से आपके कुछ खास कार्य रुक भी सकते हैं। किसी पारिवारिक सदस्य के विवाहित जीवन में समस्या आने से तनाव रहेगा। रूपए-पैसे के मामले में भी किसी पर आंख मूंदकर विश्वास ना करें। इस समय किसी भी यात्रा को टालना उचित रहेगा। विद्यार्थी वर्ग अपनी पढ़ाई पर और अधिक ध्यान दें।
व्यवसाय- व्यवसायिक दृष्टि से समय अनुकूल है। अपने संपर्क सूत्रों को और अधिक बढ़ाएं। क्योंकि कोई महत्वपूर्ण सूचना मिल सकती है। ध्यान रखें कि स्टाफ अथवा कर्मचारियों के बीच कुछ मतभेद हो सकते हैं। ऑफिस में काम की अधिकता की वजह से ओवरटाइम भी करना पड़ेगा।
लव- घर का वातावरण मधुर बना रहेगा। घर के सुख-सुविधा संबंधी वस्तुओं की खरीदारी रहेगी। किसी पारिवारिक सदस्य की विवाह संबंधी बातचीत भी चल सकती हैं।
स्वास्थ्य- पॉल्यूशन और वर्तमान वातावरण से अपना बचाव रखना जरूरी है। अपना इम्यून सिस्टम मजबूत रखें, तथा सुरक्षा संबंधी नियमों का भी पालन करें।

वृश्चिक - पॉजिटिव- समय अनुकूल है। इसलिए अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं। क्योंकि समय के साथ किए गए कार्यों के परिणाम भी बेहतर होते हैं। निकट संबंधियों के घर में आगमन से खुशनुमा वातावरण रहेगा, तथा किसी विशेष मुद्दे पर विचार विमर्श भी होगा। कोई भवन संबंधी निर्माण रुका हुआ है, तो उस के संदर्भ में योजना बनाने का उचित समय है।
नेगेटिव- अपने अहम और गुस्से पर नियंत्रण रखें। क्योंकि इस वजह से संबंधों में खटास भी आ सकती हैं। इस समय यात्रा संबंधी किसी भी गतिविधि को स्थगित रखना उचित रहेगा काम का अत्यधिक बोझ अपने ऊपर ना लें। व्यर्थ की गतिविधियों में समय नष्ट ना करके अपने महत्वपूर्ण कार्यों पर अधिक ध्यान दें।
व्यवसाय- इस महीने बिजनेस में नई कार्यप्रणाली या व्यवस्था हो सकती है। ऐसा करने से बेहतरीन परिणाम ही मिलेंगे। व्यवसाय में पब्लिक रिलेशन को और अधिक मजबूत करें। भूमि की खरीद-फरोख्त संबंधी कार्यों में महत्वपूर्ण डील हो सकती है। किसी अनुभवी व्यक्ति के साथ आपकी मुलाकात लाभदायक साबित होगी। सरकारी सेवारत लोग अनैतिक गतिविधियों में रुचि ना लें।
लव- पति-पत्नी आपसी सामंजस्य द्वारा घर की व्यवस्था को उचित बनाकर रखेंगे। तथा परिवारजनों के बीच भी सुखद संबंध रहेंगे। युवा वर्ग की दोस्ती प्रेम संबंधों में बदल सकती हैं।
स्वास्थ्य- खांसी, जुखाम तथा वायरल बुखार की समस्या रहेगी। लापरवाही ना करें और तुरंत इलाज लें। साथ ही आयुर्वेदिक चीजों का अधिक से अधिक सेवन करें।

धनु - पॉजिटिव- समय लाभप्रद है। समाज तथा परिवार में आपका मान-सम्मान बना रहेगा। कोई महत्वपूर्ण सूचना मिल सकती है। मीडिया तथा ऑनलाइन संबंधी गतिविधियों में अपना विशेष ध्यान केंद्रित रखें। भाइयों के साथ चल रही किसी पुरानी समस्या का समाधान मिलने से राहत महसूस करेंगे। कहीं फंसे हुए पैसे की वापसी भी संभव है।
नेगेटिव- अत्यधिक भावुकता नुकसानदायक रहेगी इसलिए कोई भी निर्णय प्रैक्टिकल होकर लें। अपनी योजनाओं को सार्वजनिक ना होने दें, अन्यथा आपके साथ धोखा होने की स्थिति बन सकती है। गुस्से और आवेश पर नियंत्रण रखना जरूरी है। अपने स्वभाव में परिपक्वता लाएं।
व्यवसाय- अपने व्यवसायिक संपर्क सूत्र विस्तृत करें। आर्थिक दृष्टि से समय बहुत अनुकूल है। अगर व्यवसाय में किसी प्रकार का इन्वेस्टमेंट करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो समय अनुकूल है। आप अपनी हिम्मत और आत्मविश्वास द्वारा कई रुके हुए कार्यों को पूरा करने में सक्षम होंगे। नौकरी पेशा लोग पब्लिक डीलिंग करते समय सावधानी बरतें।
लव- पारिवारिक तथा व्यवसायिक जीवन में बेहतर तालमेल और सामंजस्य बना रहेगा। जीवनसाथी की सलाह व सहयोग भी आप को सुकून देगा। प्रेम संबंधों में एक दूसरे के प्रति विश्वास की भावना रखना जरूरी है।
स्वास्थ्य- शरीर में सुस्ती और थकान हावी रहेगी। अपने खान-पान और दिनचर्या के प्रति लापरवाही करना आपके स्वास्थ्य को हानि पहुंचा सकता है।

मकर - पॉजिटिव- इस समय धनदायक परिस्थितियां बनी हुई है। निवेश संबंधी मामलों में ज्यादा ध्यान दें। जीवन को सकारात्मक नजरिए से समझने का प्रयास करें, आपको कोई बेहतरीन उपलब्धि मिलने वाली है। आत्म मनन तथा चिंतन करने से आपको बहुत अधिक मानसिक शांति अनुभव होगी। किसी मुश्किल कार्य को भी आप अपने दृढ़ संकल्प से पूरा करने की क्षमता रखेंगे।
नेगेटिव- घर के किसी वरिष्ठ सदस्य के स्वास्थ्य को लेकर चिंता रह सकती है। घर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन कर रहे हैं, तो वास्तु सम्मत नियमों का भी प्रयोग अवश्य करें। किसी के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करना संबंधों में कटुता ला सकता है। दूसरों की सलाह की अपेक्षा अपने निर्णय को ही प्राथमिकता दें। समय अनुसार थोड़ा स्वार्थी होना भी जरूरी है।
व्यवसाय- नए अनुबंध मिलेंगे जो कि आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद साबित होंगे। परंतु कोई भी डील अथवा लेनदेन करते समय अलर्ट लेना जरूरी है। कर्मचारियों का उचित सहयोग बना रहेगा। नौकरी पेशा व्यक्तियों का किसी टारगेट को पूरा करने से कंपनी को फायदा होगा। जिसकी वजह से तरक्की होने के भी योग बन रहे हैं।
लव- पारिवारिक वातावरण सुखद बना रहेगा। मित्रों के साथ कोई पारिवारिक गेट टुगेदर भी संभव है। घर के किसी विवाहित व्यक्ति का रिश्ता तय होने की भी संभावना है।
स्वास्थ्य- स्वास्थ्य की दृष्टि से समय ज्यादा अनुकूल नहीं है। स्त्री वर्ग अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। इस समय किसी तरह के इंफेक्शन होने की स्थिति बन रही है।

कुंभ - पॉजिटिव- इस समय फाइनेंस अथवा लेनदेन संबंधी कुछ ना कुछ गतिविधियां चलती रहेंगी। कहीं रुका हुआ पैसे की वापसी भी संभव है। घर के वरिष्ठ तथा बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद व सहयोग आपके लिए भाग्योदय दायक रहेगा। किसी धार्मिक स्थल पर से बहुत अधिक मानसिक सुकून मिलेगा। और आप अपने अंदर नई ऊर्जा का संचार महसूस करेंगे।
नेगेटिव- अपनी भावुकता और उदारता जैसे स्वभाव को संयमित रखें। क्योंकि आपकी इन कमजोरियों का कोई फायदा भी उठा सकता है। किसी नजदीकी संबंध को लेकर मन में भ्रम और हताशा जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती हैं। कुछ समय आत्म मनन और चिंतन में जरूर लगाएं। इससे आपको कई उलझे हुए सवालों के जवाब भी मिलेंगे।
व्यवसाय- व्यापार में अपनी योजनाओं और कार्यप्रणाली को सीक्रेट रखें। क्योंकि आपका ही कोई कर्मचारी आपकी सूचनाओं को लीक कर सकता है। अपने काम की क्वालिटी को और बेहतर बनाने की जरूरत है। इस समय कामकाज संबंधी कुछ चुनौतियां सामने आएंगी, हालांकि आप उनका सामना करने में भी सक्षम रहेंगे। ऑफिस में चल रही दिक्कतें दूर होंगी।
लव- घर का वातावरण सुखद और अनुशासन पूर्ण रहेगा। बच्चों की तरफ से भी कोई शुभ समाचार मिलने से मन प्रसन्न रहेगा। प्रेम संबंधों को विवाह में परिणित करने के लिए पारिवारिक स्वीकृति मिल सकती है।
स्वास्थ्य- अत्यधिक कामकाज की वजह से पैरों तथा कमर में दर्द की समस्या रहेगी। उचित आराम लें तथा फिजियोथेरेपी भी इसका उचित समाधान है। साथ ही वायु, वादी जैसी चीजों का सेवन करने से परहेज करें।

मीन - पॉजिटिव- यह माह कुछ मिले-जुले परिणाम देने वाला है। किसी मुश्किल से मुश्किल काम को भी आप अपने परिश्रम द्वारा हल करने की क्षमता रखेंगे, थकान के बावजूद आपकी ऊर्जा बनी रहेगी। किसी पारिवारिक वाद विवाद का समाधान मिलने से घर में सुकून और शांति पूर्ण वातावरण रहेगा। घर में कोई मांगलिक आयोजन संबंधी कार्य होगा।
नेगेटिव- अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें। तथा गुस्से व जल्दबाजी जैसे स्वभाव पर भी काबू रखना जरूरी है। पड़ोसियों के साथ किसी भी बात को लेकर बिल्कुल ना उलझे। कभी-कभी शक और वहम जैसा व्यवहार आपके लिए परेशानी उत्पन्न कर सकता है। क्षमता से अधिक उधार ना लें। इस समय संतान को भी उचित मार्गदर्शन की जरूरत है।
व्यवसाय- व्यवसायिक कार्य सुचारू रूप से चलते रहेंगे। आपने अपने व्यवसाय से संबंधित जो नीतियां और योजनाएं बनाई हैं, उन पर अमल करने का अनुकूल समय है। परंतु किसी कर्मचारी की वजह से दिक्कत भी आ सकती है। इसलिए उचित रणनीति बनाकर काम करना जरूरी है। नौकरी पेशा लोग अतिरिक्त कार्यभार की वजह से तनाव में रहेंगे।
लव- पति-पत्नी का आपसी तालमेल व सामान्य से बहुत अच्छा रहेगा। घर का वातावरण भी सुखद और सौहार्दपूर्ण बना रहेगा। परंतु विवाहेत्तर प्रेम संबंध घर की सुख शांति को भंग भी कर सकते हैं।
स्वास्थ्य- सिर दर्द और सर्वाइकल की समस्या बढ़ सकती हैं। तनाव और नकारात्मक विचारों को अपने ऊपर हावी ना होने दें। घर के किसी सदस्य के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी रहेगी।

गुप्त नवरात्र 30 जून से:सर्वार्थसिद्धि और केदार योग में शुरू होगी आषाढ़ मास की नवरात्रि, नौ दिन तक होगी दश महाविद्याओं की...
28/06/2022

गुप्त नवरात्र 30 जून से:सर्वार्थसिद्धि और केदार योग में शुरू होगी आषाढ़ मास की नवरात्रि, नौ दिन तक होगी दश महाविद्याओं की पूजासाल भर में चार नवरात्रि होती हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि होती है। इनमें आषाढ़ महीने की गुप्त नवरात्रि 30 जून से शुरू होकर 9 जुलाई तक रहेगी। इसमें काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धुम्रावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की पूजा की जाती है।

इस साल गुप्त नवरात्रि बेहद शुभ संयोग में शुरू हो रही है। प्रतिपदा तिथि पर ग्रह-नक्षत्रों से मिलकर चार शुभ योग बन रहे हैं। नवरात्रि का पुण्य देने वाला पर्व आदिशक्ति मां दुर्गा को समर्पित है। इसलिए इनके किसी भी रूप की आराधना इन नौ दिनों में कर सकते हैं।

ग्रह-नक्षत्रों का शुभ संयोग
30 जून को सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन बन रहा है। साथ ही इस दिन ध्रुव, केदार और हंस नाम का महापुरुष योग भी रहेगा। वहीं, मंगल, गुरु, शुक्र और शनि अपनी ही राशि में मौजूद रहेंगे। चार ग्रहों का स्वराशि होना अपने आप में शुभ संयोग हैं। ग्रह-नक्षत्रों की इस शुभ स्थिति में गुप्त नवरात्रि का शुरू होना शुभ फलदायी रहेगा। इसलिए इन दिनों में की गई साधना, आराधना से सिद्धि मिलेगी।

चार ऋतुओं की चार नवरात्रि
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि मां आदिशक्ति की आराधना की चर्चा ही दुर्गा सप्तशती ग्रंथ से ही शुरू होती है। इसमें कहा गया है कि कलयुग में आदिशक्ति और गणेश जी की आराधना से ही जीवन सुगम होगा। मां प्रकृति स्वरूपा हैं। प्राकृतिक बाधाओं का सामना करने के लिए मां की आराधना होती है। देवी दुर्गा को शक्ति कहा गया है। इसलिए हर मौसम के बदलाव के समय शारीरिक बीमारियों से लड़ने की ताकत के लिए नवरात्रि में शक्ति आराधना की परंपरा बनाई गई है। इसलिए चार बड़ी ऋतुओं के हिसाब से चार नवरात्रि की व्यवस्था की गई है।

घटस्थापना मुहूर्त
आषाढ़ महीने की गुप्त नवरात्रि की घटस्थापना 30 जून को होगी। प्रतिपदा तिथि 29 जून को सुबह 8.21 से 30 जून को सुबह 10.49 तक रहेगी। इसलिए गुरुवार को घटस्थापना मुहूर्त सुबह करीब 5.26 से शुरू होगा।

ऐसे करें देवी का पूजन
1. सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं। धुले हुए साफ कपड़े पहनें। पूजा सामग्री जुटाएं। देवी दुर्गा की प्रतिमा पर चुनरी या लाल कपड़े चढ़ाएं।
2. देवी को लाल फूल अर्पित करें। सरसों के तेल का दीपक जलाकर 'ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै' मंत्र का जाप करें।
3. अष्टमी या नवमी को पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें। आखिरी दिन पूजा के बाद घट विसर्जन करें।

हनुमान चालीस में हनुमान जी के बल और शौर्य के लिए उन्हें "अतुलित बलधामा" "महावीर"विक्रम बजरंगी"कह कर संबोधित किया गया है....
28/06/2022

हनुमान चालीस में हनुमान जी के बल और शौर्य के लिए उन्हें "अतुलित बलधामा" "महावीर"विक्रम बजरंगी"कह कर संबोधित किया गया है.इसका मापदंड क्या है?अतुलित बलधामा यानि जिनके बल की कोई तुलना ही नही कि जा सकती ऐसे अतुलित बल के धाम श्री हनुमानजी जी हैं. प्राचीन समय में बल की माप हाथियों की शक्ति से की जाती थी.आज लोगों में हाथी जितना बल तो है नहीं इसलिए आज घोड़े की शक्ति (HorsePower)अश्वशक्ति से बल की माप को दर्शाया जाता है.कहते हैं कि दुःशासन में दस हजार हाथियों का बल था फिर भी वह द्रौपदी की साड़ी खींचते खींचते थक गया था.
हनुमानजी के बल के विषय में आप ऐसे समझ सकते हैं --
10000 हाथी = एक दिग्गज
10000 दिग्गज = एक ऐरावत
10000 ऐरावत = एक इन्द्र
10000 इन्द्र =हनुमान जी की सबसे छोटी कनिष्ठा उंगली का बल.अब आप समझ सकते हैं कि हनुमानजी में कितना बल है.हनुमानजी की विशेषता देखिए इतने बलशाली होकर भी उनमें अभिमान नहीं है वे कहते हैं कि मुझमें कोई बल नहीं है.समुद्र लाँघने के समय सब वानरों ने अपने अपने बल का बखान किया. किसी ने पूछा कि हनुमानजी आप कैसे चुप हैं? आपने अपने बल के बारे में कुछ नहीं कहा- हनुमान जी बोले -मुझमें कोई बल ही नहीं है, जो मैं बखान करूँ.तब वानरों ने कहा कि आप तो अतुलितबलधामम् कहे जाते हैं.हनुमानजी बोले - हाँ ! सही है.धाम का अर्थ है.घर या मकान.तो मुझमें जो बल है वह मेरा नहीं है. क्योंकि मकान में जो होता है.बह मकान का नही होता मकान मालिक का होता है जो उस घर में रहता होता है उसी का होता है.वानरों ने फिर पूछा-तो आपके अंदर कौन रहता है? हनुमान जी बोले- हमारे हृदय में तो प्रभु श्रीराम जी रहते हैं.इसीलिए ये बल भी उन्हीं का है.किसी ने कहा-इसका प्रमाण क्या है?हनुमान जी बोले प्रमाण भी है.जब इन्द्र पुत्र जयंत कौआ बनकर सीता जी के चरणों कोे चोंच के द्वारा घायल कर गया था.तब राम जी ने सींक का बाण उसके पीछे लगा दिया था.वह पूरे ब्रह्माण्ड में शरण माँगता फिर.किसी ने शरण नहीं दी.कहते हैं न "काहूँ बैठन कहा न ओही।राखि को सकै राम कर द्रोही"जो भगवान राम से द्रोह करे,उसे कौन बचाबे.नारद जी को उस पर दया आ गयी.उन्होंने उसे तुरंत श्री राम जी के पास भेज दिया।उसने जाकर प्रार्थना की और चरण पकड़ लिए."आतुर सभय गहेसि पद जाई,त्राहि त्राहि दयाल रघुराई,अतुलित बल अतुलित प्रभुताई,मैं मतिमंद जानि नहिं पाई"अर्थात प्रभु !! मेरी रक्षा कीजिए,रक्षा कीजिए आपके अतुलित बल औरअतुलित प्रभुता (सामर्थ्य )को मैं मंदबुद्धि जान नहीं पाया था.तो अतुलित बल राम जी का है और राम जी ही मेरे हृदय में निवास करते हैं इसलिए बल तो उन्हीं का है.मैं तो केवल उनके बल का धाम हूँ.कितनी महानता?महावीर होकर भी कहते हैं कि यह तो मेरा नही भगवान का बल है.इसी लिए उनका नाम हनुमान है कोई मान अभिमान नहीं है.
🚩🚩 Jai Veer Hanuman Maharaj ki 🚩🚩

26 जून को खुलेंगे कामाख्या मंदिर के कपाट:51 शक्तिपीठों में से एक है कामाख्या मंदिर, यहां चल रहा है अंबूबाची मेला; तंत्र-...
27/06/2022

26 जून को खुलेंगे कामाख्या मंदिर के कपाट:51 शक्तिपीठों में से एक है कामाख्या मंदिर, यहां चल रहा है अंबूबाची मेला; तंत्र-मंत्र के लिए प्रसिद्ध ये तीर्थगुवाहाटी से करीब 10 किमी दूर नीलांचल पहाड़ी पर बना मां कामाख्या का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। अभी मंदिर में अंबुबाची मेला चल रहा है। ये मेला 22 जून से 26 जून तक रहेगा। हर साल इन दिनों में मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। 26 तारीख को मंदिर की साफ-सफाई और देवी मां की विशेष पूजा के बाद मंदिर भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा। ये मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी के पास स्थित है।

ये है कामाख्या शक्ति पीठ की पौराणिक कथा

शिव जी का विवाह प्रजापति दक्ष की पुत्री देवी सती से हो गया था। दक्ष शिव जी को पसंद नहीं करता था और बार-बार शिव जी का अपमान करने की कोशिश करते रहता था।

दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ में उसने सभी देवी-देवताओं, ऋषियों को आमंत्रण दिया, लेकिन शिव जी और सती को नहीं बुलाया। जब ये बात देवी सती को मालूम हुई तो वे पिता के यहां जाने के लिए तैयार हो गईं।

शिव जी ने सती को समझाने की कोशिश की कि हमें बिना बुलाए ऐसे किसी कार्यक्रम में नहीं जाना चाहिए, लेकिन देवी ने कहा कि पिता के यहां जाने के लिए किसी निमंत्रण की जरूरत नहीं होती है।

शिव जी ने सती को रोकना चाहा, लेकिन सती जिद करके पिता के यहां यज्ञ में चली गईं। यज्ञ स्थल पर दक्ष प्रजापति ने सती के सामने ही शिव जी के लिए अपमानजनक बातें कह दीं।

पति के लिए अपमानजनक बातें सुनकर देवी सती क्रोधित हो गईं और वहीं यज्ञ कुंड में कूदकर अपनी देह का अंत कर दिया। शिव जी को पूरी घटना की जानकारी मिली तो वे दक्ष पर क्रोधित हो गए और वीरभद्र को प्रकट करके दक्ष का अंत करने का आदेश दे दिया।

शिव जी ने देवी सती के जलते हुए शरीर को उठाया और देवी के वियोग में सृष्टि में भटकने लगे। उस समय भगवान विष्णु ने सोचा कि जब तक देवी का शरीर शिव जी के पास रहेगा तब तक वे देवी के मोह से दूर नहीं हो पाएंगे। इसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी के शरीर के टुकड़े करना शुरू कर दिए।

देवी के शरीर के ये टुकड़े जहां-जहां गिरे थे, वहां-वहां देवी के शक्तिपीठ स्थापित हो गए। कामाख्या मंदिर क्षेत्र में देवी मां को योनि भाग गिरा था। इस कारण यहां देवी के योनि भाग की पूजा की जाती है।

कामाख्या मंदिर में हर साल लगभग 22 जून से 26 जून तक अंबुबाची उत्सव मनाया जाता है। इस उत्सव के संबंध में मान्यता है कि इन दिनों में देवी मां का मासिक धर्म रहता है। इस कारण इन दिनों में मंदिर बंद कर दिया जाता है।

तंत्र-मंत्र की क्रियाओं के प्रसिद्ध है ये जगह

देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर में तंत्र-मंत्र की क्रियाएं काफी अधिक की जाती हैं। इन क्रियाओं की वजह से ये मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। यहां देवी त्रिपुरासुंदरी, मतांगी और कमला के साथ ही अन्य देवियों की मूर्तियां स्थापित हैं। यहां एक योनिकुंड भी स्थित है, जिसकी परिक्रमा की जाती है। यहां हर साल आषाढ़ महीने में अम्बुबाची मेला लगता है।

योगिनी एकादशी आज:सबसे पहले हेममाली यक्ष ने मार्कंडेय ऋषि की सलाह पर किया था ये व्रत, श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताई थी इ...
27/06/2022

योगिनी एकादशी आज:सबसे पहले हेममाली यक्ष ने मार्कंडेय ऋषि की सलाह पर किया था ये व्रत, श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताई थी इसकी कथाआषाढ़ मास का योगिनी एकादशी व्रत आज किया जा रहा है। पुराणों के मुताबिक इससे हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं और अच्छी सेहत के साथ ही सुख-समृद्धि भी बढ़ती है। इस व्रत को मार्कंडेय ऋषि की सलाह पर सबसे पहले हेममाली नाम के यक्ष ने किया था। क्योंकि वो कुबेर से मिले श्राप के कारण परेशान था। ये बात भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताई। इसके बाद से योगिनी एकादशी व्रत किया जाने लगा।

भगवान कृष्ण ने सुनाई थी कथा
इस व्रत के बारे में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को एक कथा सुनाई थी। जिसमें राजा कुबेर के श्राप से कोढ़ी होकर हेममाली नामक यक्ष मार्कण्डेय ऋषि केआश्रम में जा पहुंचा। ऋषि ने उन्हें योगिनी एकादशी व्रत करने की सलाह दी। यक्ष ने ऋषि की बात मान कर व्रत किया और दिव्य शरीर धारण कर स्वर्गलोक चला गया।

पौराणिक कथा
व्रत को लेकर पौराणिक कथा है कि अलकापुरी का राजा कुबेर शिव-भक्त था। हेममाली नामक एक यक्ष उनका सेवक था, जो कुबेर की शिव पूजा के लिए फूल लाता था। हेममाली एक बार पत्नी प्रेम में पूजा के लिए पुष्प लाने से चूक गया। इससे नाराज होकर कुबेर ने माली को श्राप दिया कि वह स्त्री के वियोग में तड़पे और मृत्युलोक में जाकर कोढ़ रोग का रोगी बने। कुबेर के श्राप से वह कोढ़ नामक त्वचा रोग से ग्रस्त हो गया और पत्नी भी उससे बिछड़ गई।

एक बार मार्कण्डेय ऋषि से उसकी भेंट हुई। ऋषि ने उसे आषाढ़ माह के कृष्णपक्ष की एकादशी के व्रत से उसके सभी कष्ट दूर होने की बात कही। महर्षि के वचन सुन हेममाली ने एकादशी का विधानपूर्वक व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से वह अपने पुराने स्वरूप में आ गया उसका रोग भी दूर हो गया और वह अपनी पत्नी के साथ पुन: सुखपूर्वक रहने लगा।

योगिनी एकादशी पर क्या करें
सुबह जल्दी उठकर नहाएं और गंगा जल से भगवान विष्णु का अभिषेक करें। वामन अवतार की पूजा करें। पीले फूल और तुलसी चढ़ाएं। दिनभर अन्न न खाएं। ऐसा न कर सके तो सिर्फ फलाहार करें। सुबह जल्दी पीपल को जल चढ़ाएं। तुलसी की पूजा सुबह-शाम करें। जरुरतमंद लोगों को आंवला दान करें। खाना खिलाएं। कपड़े, छाता और जूते-चप्पल भी दान कर सकते हैं।

मंगल का राशि परिवर्तन:10 अगस्त तक मेष राशि में रहेगा मंगल, तुला और मकर सहित आठ राशियों को संभलकर रहने की जरुरत हैमंगल का...
27/06/2022

मंगल का राशि परिवर्तन:10 अगस्त तक मेष राशि में रहेगा मंगल, तुला और मकर सहित आठ राशियों को संभलकर रहने की जरुरत हैमंगल का राशि परिवर्तन:10 अगस्त तक मेष राशि में रहेगा मंगल, तुला और मकर सहित आठ राशियों को संभलकर रहने की जरुरत है

मंगल का राशि परिवर्तन:1985 के बाद फिर मंगल-राहु की युति से बनेगा अंगारक योग, इससे देश में दंगे होने और प्राकृतिक आपदा की...
27/06/2022

मंगल का राशि परिवर्तन:1985 के बाद फिर मंगल-राहु की युति से बनेगा अंगारक योग, इससे देश में दंगे होने और प्राकृतिक आपदा की आशंकामंगल का राशि परिवर्तन:1985 के बाद फिर मंगल-राहु की युति से बनेगा अंगारक योग, इससे देश में दंगे होने और प्राकृतिक आपदा की आशंका

जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घुम रही थी, कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घ...
27/06/2022

जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घुम रही थी, कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी। उसे वो उपयुक्त स्थान लगा शिशु को जन्म देने के लिये।
वहां पहुँचते ही उसे प्रसव पीडा शुरू हो गयी।
उसी समय आसमान में घनघोर बादल वर्षा को आतुर हो उठे और बिजली कडकने लगी।
उसने दाये देखा, तो एक शिकारी तीर का निशाना, उस की तरफ साध रहा था। घबराकर वह दाहिने मुडी, तो वहां एक भूखा शेर, झपटने को तैयार बैठा था। सामने सूखी घास आग पकड चुकी थी और पीछे मुडी, तो नदी में जल बहुत था।
मादा हिरनी क्या करती ? वह प्रसव पीडा से व्याकुल थी। अब क्या होगा ? क्या हिरनी जीवित बचेगी ? क्या वो अपने शावक को जन्म दे पायेगी ? क्या शावक जीवित रहेगा ?
क्या जंगल की आग सब कुछ जला देगी ? क्या मादा हिरनी शिकारी के तीर से बच पायेगी ?क्या मादा हिरनी भूखे शेर का भोजन बनेगी ?
वो एक तरफ आग से घिरी है और पीछे नदी है। क्या करेगी वो ?
हिरनी अपने आप को शून्य में छोड, अपने बच्चे को जन्म देने में लग गयी। कुदरत का कारिष्मा देखिये। बिजली चमकी और तीर छोडते हुए, शिकारी की आँखे चौंधिया गयी। उसका तीर हिरनी के पास से गुजरते, शेर की आँख में जा लगा,शेर दहाडता हुआ इधर उधर भागने लगा।और शिकारी, शेर को घायल ज़ानकर भाग गया। घनघोर बारिश शुरू हो गयी और जंगल की आग बुझ गयी। हिरनी ने शावक को जन्म दिया।
हमारे जीवन में भी कभी कभी कुछ क्षण ऐसे आते है, जब हम चारो तरफ से समस्याओं से घिरे होते हैं और कोई निर्णय नहीं ले पाते। तब सब कुछ नियति के हाथों सौंपकर अपने उत्तरदायित्व व प्राथमिकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।अन्तत: यश, अपयश ,हार ,जीत, जीवन,मृत्यु का अन्तिम निर्णय ईश्वर करता है।हमें उस पर विश्वास कर उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए।

*व्रत-उपवास के दो दिन:* योगिनी एकादशी 24 को और आषाढ़ द्वादशी व्रत 25 जून को, दोनों दिन होती है भगवान विष्णु के वामन अवतार...
22/06/2022

*व्रत-उपवास के दो दिन:* योगिनी एकादशी 24 को और आषाढ़ द्वादशी व्रत 25 जून को, दोनों दिन होती है भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूज*व्रत-उपवास के दो दिन:* योगिनी एकादशी 24 को और आषाढ़ द्वादशी व्रत 25 जून को, दोनों दिन होती है भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा

🌹हनुमानजी को इन लोगों ने देखा था साक्षात🌹!!!!!!!!!बजरंगबली बजरंगबली को इन्द्र से इच्छामृत्यु का वरदान मिला। श्रीराम के व...
22/06/2022

🌹हनुमानजी को इन लोगों ने देखा था साक्षात🌹!!!!!!!!!

बजरंगबली बजरंगबली को इन्द्र से इच्छामृत्यु का वरदान मिला। श्रीराम के वरदान अनुसार कल्प का अंत होने पर उन्हें उनके सायुज्य की प्राप्ति होगी। सीता माता के वरदान के अनुसार वे चिरंजीवी रहेंगे। वे आज भी अपने भक्तों की हर परिस्थिति में मदद करते हैं। ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने रामभक्त हनुमानजी को साक्षात देखा है। उन्हीं में से कुछ लोगों के बारे में हम आपको बताते हैं।

🌹भीम ने देखा🌹!!!!!!!!

भीम अपने बड़े भ्राता की आज्ञा का पालन करते हुए ऋषि पुरुष मृगा को खोजने निकल पड़े। खोजते-खोजते वे घने जंगलों में पहुंच गए। जंगल में चलते वक्त भीम को मार्ग में लेटे हनुमानजी दिखाई दिए। भीम ने लेटे हुए हनुमानजी को बंदर समझकर उनसे अपनी पूंछ हटाने के लिए कहा। तब बंदर ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह उसकी पूंछ हटा सकता है तो हटा दे, लेकिन भीम उनकी पूंछ हिला भी नहीं पाए। तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि यह कोई साधारण बंदर नहीं है। यह बंदर और कोई नहीं, बल्कि हनुमानजी थे। भीम ने यह जानकर हनुमानजी से क्षमा मांगी।

🌹अर्जुन ने देखा🌹!!!!!!!

एक दिन अर्जुन रामेश्वरम चले गए। वहां उनकी मुलाकात हनुमानजी से हुई थी। रामसेतु देखकर अर्जुन ने कहा कि मैं होता तो यह सेतु बाणों से बना देता। यह सुनकर हनुमान ने कहा कि आपके बाणों से बना सेतु एक भी व्यक्ति का भार झेल नहीं सकता। तब अर्जुन ने कहा कि यदि मेरा बनाया सेतु आपके चलने से टूट जाएगा तो मैं अग्नि में प्रवेश कर जाऊंगा।

हनुमानजी ने कहा कि मुझे स्वीकार है। मेरे दो चरण ही इसने झेल लिए तो मैं हार स्वीकार कर लूंगा। बस फिर क्या था, अर्जुन ने बाणों का सेतु बनाया। हनुमानजी का पहला पग पड़ते ही सेतु डगमगाने लगा और टूट गया। यह देख अर्जुन अग्नि जलाकर खुद को जलाने लगे। तभी श्रीकृष्ण प्रकट हुए और अर्जुन से बोले कि श्रीराम का नाम लेकर सेतु बनाओ।

अर्जुन ने ऐसा ही किया। हनुमानजी से फिर पग रखा लेकिन इस बार सेतु नहीं टूटा। तब हनुमान ने अर्जुन से कहा कि वे युद्ध के अंत तक उनकी रक्षा करेंगे। इसीलिए कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन के रथ के ध्वज में हनुमान विराजमान हुए और अंत तक उनकी रक्षा की।

🌹माधवाचार्यजी ने देखा🌹!!!!!!!!

माधवाचार्यजी का जन्म 1238 ई में हुआ था। माधवाचार्यजी ने हनुमानजी को साक्षात देखा था। माधवाचार्यजी एक महान संत थे जिन्होंने ब्रह्मसूत्र और 10 उपनिषदों की व्याख्या की है। माधवाचार्यजी प्रभु श्रीराम के परम भक्त थे। यही कारण था कि एक दिन उनको हनुमानजी के साक्षात दर्शन हुए थे। संत माधवाचार्य ने हनुमानजी को अपने आश्रम में देखने की बात बताई थी। माधवाचार्यजी 79 वर्ष की अवस्था में सन् 1317 ई. में ब्रह्म तत्व में विलीन हो गए।

🌹तुलसीदासजी ने देखा🌹!!!!!!!

तुलसीदासजी के विषय में जो साक्ष्य मिलते हैं उसके अनुसार इनका जन्म 1554 ईस्वी में श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ था। तुलसीदासजी जब चित्रकूट में रहते थे तब जंगल में शौच करने जाते थे और शौच का जल जो शेष रह जाता था, उसे वे एक शमी वृक्ष के ऊपर डाल देते थे। जिस शमी वृक्ष के ऊपर वे जल डालते, उसके ऊपर एक प्रेत रहता था। प्रेत इस कार्य से प्रसन्न हो गया और एक दिन उसने तुलसीदास के समक्ष प्रकट होकर कहा कि आप मुझसे कुछ भी मांग लें।

तुलसीदासजी ने कहा कि प्रभु दर्शन के अलावा मेरी कोई इच्छा नहीं है। प्रेत ने कहा कि ऐसा तो मैं कर नहीं सकता लेकिन मैं एक रास्ता बता सकता हूं। वह यह कि जहां भी हरिकथा होती है, वहां हनुमानजी किसी न किसी रूप में आकर बैठ जाते हैं। मैं तुम्हें इशारे से बता दूंगा। वे ही तुम्हें प्रभु दर्शन करा सकते हैं।

बस यही हुआ और तुलसीदासजी ने हनुमानजी के पैर पकड़ लिए। अंत में हारकर कुष्ठी रूप में रामकथा सुन रहे हनुमानजी से भगवान के दर्शन करवाने का वचन दे दिया। फिर एक दिन मंदाकिनी के तट पर तुलसीदासजी चंदन घिस रहे थे। भगवान बालक रूप में आकर उनसे चंदन मांग-मांगकर लगा रहे थे, तब हनुमानजी ने तोता बनकर यह दोहा पढ़ा- 'चित्रकूट के घाट पै भई संतनि भीर। तुलसीदास चंदन घिसे, तिलक देत रघुवीर।'

🌹समर्थ रामदास ने देखा🌹!!!!!!!!

समर्थ स्वामी रामदास का जन्म रामनवमी 1608 में गोदा तट के निकट ग्राम जाम्ब (जि. जालना) में हुआ। वे हनुमानजी के परम भक्त और छत्रपति शिवाजी के गुरु थे। महाराष्ट्र में उन्होंने रामभक्ति के साथ हनुमान भक्ति का भी प्रचार किया। हनुमान मंदिरों के साथ उन्होंने अखाड़े बनाकर महाराष्ट्र के सैनिकीकरण की नींव रखी, जो राज्य स्थापना में बदली। कहते हैं कि उन्होंने भी अपने जीवनकाल में एक दिन हनुमानजी को देखा था।

🌹राघवेन्द्र स्वामी ने देखा🌹!!!!!!

1595 में जन्मे रामभक्त राघवेन्द्र स्वामी माधव समुदाय के एक गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनके जीवन से अनेक चमत्कारिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं। उनके बारे में भी कहा जाता है कि उन्होंने भी हनुमानजी के साक्षात दर्शन किए थे।

🌹नीम करोली बाबा ने देखा🌹!!!!!!

नीम करोली बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। उत्तरप्रदेश के अकबरपुर गांव में उनका जन्म 1900 के आसपास हुआ था। उन्होंने अपने शरीर का त्याग 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में किया था। बाबा नीम करोली हनुमानजी के परम भक्त थे और उन्होंने देशभर में हनुमानजी के कई मंदिर बनवाए थे। नीम करोली बाबा के कई चमत्कारिक किस्से हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि हनुमानजी उन्हें साक्षात दर्शन देते थे।

कहते हैं कि जो भी हनुमानजी का परम भक्त होता है, हनुमानजी उसे किसी न किसी रूप में दर्शन दे ही देते हैं या आसपास अपनी उपस्थिति को प्रकट कर देते हैं। ऐसे सैकड़ों हनुमान भक्त हैं जिन्होंने अपने अनुभव में बताया है कि हनुमानजी हमारी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हरसंभव मदद करते हैं। हनुमानजी की भक्ति ही हमारे जीवन का आधार है।

🌹श्री पवन पुत्र हनुमान जी की जय🌹🙏🙏

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