25/10/2025
गीता सार के कुछ अनमोल वचन हैं:
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन: कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
जो हुआ, वह अच्छे के लिए हुआ; जो हो रहा है, वह अच्छे के लिए हो रहा है; जो होगा, वह भी अच्छे के लिए होगा।
आत्मा अजर, अमर और अविनाशी है।: इसे न तो कोई मार सकता है और न ही छू सकता है।
क्रोध से भ्रम उत्पन्न होता है और भ्रम से बुद्धि का नाश होता है।
वासना, गुस्सा और लालच ये तीनों नरक के द्वार हैं।: सुखी रहने के लिए इनसे दूर रहें।
जो मन को वश में कर लेता है, उसके लिए मन मित्र है।
सफलता और असफलता, लाभ और हानि, सुख और दुख में समान रहना चाहिए।
ईमानदारी और सत्य के मार्ग पर चलें, क्योंकि भय से मुक्त होकर ही हम सत्य को जान सकते हैं।
जो व्यक्ति ज्ञान की दृष्टि से देखता है, वह हर जीव में एक ही आत्मा को देखता है।
सच्चा योगी वह है, जो मन की शांति में स्थिर रहता है।