Yugrishi Ayurved

Yugrishi Ayurved Yugrishi : His holiness Shri Sudhanshuji Maharaj inaugurated the Yugrishi Arogya Dham on 3rd june,201

13/10/2019

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रिफाईन्ड तेल का पूरा सत्य ~~~~~~~~~~~~~~~~~🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏एक बार जरूर पढ़ें बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी है....मित्रो... क...
22/01/2018

रिफाईन्ड तेल का पूरा सत्य
~~~~~~~~~~~~~~~~~
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏एक बार जरूर पढ़ें बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी है....

मित्रो...
क्या आपने कभी विचार किया कि आखिर
- जिस Refined तेल से आप अपनी और अपने छोटे बच्चों की मालिश नहीं कर सकते,
- जिस Refined को आप बालों मे नहीं लगा सकते,
उस हानिकारक Refined तेल को कैसे खा लेते हैं ??🤔😳😰

आज से 50 साल पहले तो कोई रिफाइन तेल के बारे में जानता नहीं था, ये पिछले 20 -25 वर्षों से हमारे देश में आया है | कुछ विदेशी कंपनियों और भारतीय कंपनियाँ इस धंधे में लगी हुई हैं.

तेल को साफ़ करने के लिए जितने केमिकल इस्तेमाल किये जाते हैं सब Inorganic हैं और Inorganic केमिकल ही दुनिया में जहर बनाते हैं और उनका combination जहर के तरफ ही ले जाता है |
इसलिए-
रिफाइन्ड तेल, और विशेषकर डबल रिफाइन्ड तेल गलती से भी न खाएं |

फिर आप कहेंगे कि-
" क्या खाएँ...?
तो आप शुद्ध तेल खाइए,
-सरसों का,
-मूंगफली का,
-तीसी का, या
-नारियल का |

अब आप कहेंगे कि शुद्ध तेल में बास बहुत आती है और दूसरा कि शुद्ध तेल बहुत चिपचिपा होता है | हम लोगों ने जब शुद्ध तेल पर काम किया (या एक तरह से कहें कि रिसर्च किया) तो हमें पता चला कि तेल का चिपचिपापन उसका सबसे महत्वपूर्ण घटक है |
तेल में से जैसे ही चिपचिपापन निकाला जाता है तो पता चला कि ये तो तेल ही नहीं रहा, फिर हमने देखा कि तेल में जो बास आ रही है वो उसका प्रोटीन कंटेंट है, शुद्ध तेल में प्रोटीन बहुत है, दालों में ईश्वर का दिया हुआ प्रोटीन सबसे ज्यादा है, दालों के बाद जो सबसे ज्यादा प्रोटीन है वो तेलों में ही है, तो तेलों में जो बास आप पाते हैं वो उसका Organic content है प्रोटीन के लिए |

4 -5 तरह के प्रोटीन हैं सभी तेलों में, आप जैसे ही तेल की बास निकालेंगे उसका प्रोटीन वाला घटक गायब हो जाता है और चिपचिपापन निकाल दिया तो उसका Fatty Acid गायब |
अब ये दोनों ही चीजें निकल गयी तो वो तेल नहीं पानी है, जहर मिला हुआ पानी |
और-
ऐसे रिफाइन्ड तेल के खाने से कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं...
-घुटने दुखना,
-कमर दुखना,
-हड्डियों में दर्द, ये तो छोटी बीमारियाँ हैं, सबसे खतरनाक बीमारी है,
-हृदयघात (Heart Attack), पैरालिसिस,
-ब्रेन का डैमेज हो जाना, आदि, आदि |

जिन-जिन घरों में पूरे मनोयोग से रिफाइन तेल खाया जाता है उन्ही घरों में ये समस्या आप पाएंगे, अभी तो मैंने देखा है कि जिनके यहाँ रिफाइन तेल इस्तेमाल हो रहा है उन्हीं के यहाँ Heart Blockage और Heart Attack की समस्याएं हो रही है |

जब हमने सफोला का तेल लेबोरेटरी में टेस्ट किया, सूरजमुखी का तेल, अलग-अलग ब्रांड का टेस्ट किया तो AIIMS के भी कई डोक्टरों की रूचि इसमें पैदा हुई तो उन्होंने भी इस पर काम किया और उन डोक्टरों ने जो कुछ भी बताया उसको मैं एक लाइन में बताता हूँ क्योंकि वो रिपोर्ट काफी मोटी है और सब का जिक्र करना मुश्किल है।
निचोड़ में उन्होंने कहा-
“तेल में से जैसे ही आप चिपचिपापन निकालेंगे, बास को निकालेंगे तो वो तेल ही नहीं रहता, तेल के सारे महत्वपूर्ण घटक निकल जाते हैं और डबल रिफाइन में कुछ भी नहीं रहता, वो छूँछ बच जाता है, और उसी को हम खा रहे हैं तो तेल के माध्यम से जो कुछ पौष्टिकता हमें मिलनी चाहिए वो मिल नहीं रहा है |”

आप बोलेंगे कि तेल के माध्यम से हमें क्या मिल रहा ?
मैं बता दूँ कि हमको शुद्ध तेल से मिलता है HDL (High Density Lipoprotein), ये तेलों से ही आता है हमारे शरीर में, वैसे तो ये लीवर में बनता है लेकिन शुद्ध तेल खाएं तब।
तो-
आप शुद्ध तेल खाएं तो आपका HDL अच्छा रहेगा और जीवन भर ह्रदय रोगों की सम्भावना से आप दूर रहेंगे |


अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा विदेशी तेल बिक रहा है | मलेशिया नामक एक छोटा सा देश है हमारे पड़ोस में, वहां का एक तेल है जिसे पामोलिन तेल कहा जाता है, हम उसे पाम तेल के नाम से जानते हैं, वो अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहा है, एक-दो टन नहीं, लाखो-करोड़ों टन भारत आ रहा है और अन्य तेलों में मिलावट कर के भारत के बाजार में बेचा जा रहा है |

7 -8 वर्ष पहले भारत में ऐसा कानून था कि पाम तेल किसी दूसरे तेल में मिला के नहीं बेचा जा सकता था लेकिन GATT समझौता और WTO के दबाव में अब कानून ऐसा है कि पाम तेल किसी भी तेल में मिला के बेचा जा सकता है |

भारत के बाजार से आप किसी भी नाम का डब्बा बंद तेल ले आइये, रिफाइन तेल और डबल रिफाइन तेल के नाम से जो भी तेल बाजार में मिल रहा है वो पामोलिन तेल है | और-
जो पाम तेल खायेगा, मैं स्टाम्प पेपर पर लिख कर देने को तैयार हूँ कि वो ह्रदय सम्बन्धी बिमारियों से मरेगा..
क्योंकि-
पाम तेल के बारे में सारी दुनिया के रिसर्च बताते हैं कि पाम तेल में सबसे ज्यादा ट्रांस-फैट है...
और -
ट्रांस-फैट वो फैट हैं जो शरीर में कभी dissolve नहीं होते हैं, किसी भी तापमान पर dissolve नहीं होते।
ट्रांस फैट जब शरीर में dissolve नहीं होता है तो वो बढ़ता जाता है और तभी हृदयघात होता है, ब्रेन हैमरेज होता है और आदमी पैरालिसिस का शिकार होता है, डाईबिटिज होता है, ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है |🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

07/01/2018

सुधांशु जी महाराज ने युगऋषि परिवार को सौंपा एक करोड़ घरों तक युगऋषि उत्पाद पहचाने का लक्ष्य:
नई दिल्ली/ विकास सिंह बघेल। नई दिली के आनंद धाम में दो दिवसीय युगऋषि आयुर्वेद अधिवेशन का आज विधिवत समापन हुआ। इस अधिवेशन मेंआनंद धाम के संस्थापक आचार्य सुधांशु जी महाराज ने वहां मौजूद लोगों से हिमालयी जड़ी-बूटियों का पूरा लाभ लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक करोड़ घरों तक युगऋषि उत्पाद पहुंचाए जाएं। साथ ही कहा कि एक वर्ष में 60 उत्पाद तैयार हुए, जो देश भर में फैल रहे हैं। इन उत्पादों को जब विदेशों के परिजन अपने यहां ले गये, तब लोगों ने इनकी मांग अपने देश में की। हालाकि इस बाबत विदेश मंत्रालय व अन्य सम्बन्धित केन्द्रीय मंत्रालयों से इस हेतु संवाद चल पड़ा है।

आप को बता दें कि इसके सभी उत्पाद ऋषिवेदा हरबल कम्पनी उत्तराखण्ड की धर्मनगरी हरिद्वार के ‘सिडकुल’ में बनाती है । वहाँ से CMD श्री राजीव बंसल भी पधारे। इनमें सारे मिनरल्स एवं विटामिन्स की एकमुश्त पूर्ति करने वाली ‘नवरस संजीवनी’ सहित कई रस हैं, पेय हैं, तेल हैं, पेस्ट हैं, क्रीम हैं, जेल हैं, टैबलेट हैं। युगऋषि आयुर्वेद ने आरम्भ से अब तक उत्पादों की शुचिता और गुणवत्ता पर समुचित ज़ोर दिया है।

राष्ट्र के वरिष्ठ विद्वान आयुष विशेषज्ञों एवं सुधांशु जी महाराज ने कहा कि समग्र स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद को आत्मसात् करें। वहीं देशभर से आए डीलर बन्धु-भगिनियों ने इन्हें जन-जन तक पहुँचाने में म.प्र. के चि.संकल्प सिंह सोलंकी द्वारा प्रस्तुत सोशल मीडिया उपायों का भी लाभ उठाने का संकल्प लिया।

मिशन के महामन्त्री देवराज कटारिया ने अतिथि-अभिनंदन किया। फ़ाउण्डेशन के CEO श्री के.के.जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया। मुख्य संयोजन एवं मंच समन्वयन मिशन के निदेशक राम महेश मिश्र ने किया।
https://l.facebook.com/l.php?u=http%3A%2F%2Fdharmyatra.in%2Fsudhanshuji-yugrishi-

Yugrishi : His holiness Shri Sudhanshuji Maharaj inaugurated the Yugrishi Arogya Dham on 3rd june,201

शिक्षक समाज में सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि वो गुरु हैं , वे ज्ञान का संचार करते हैं। शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !...
05/09/2017

शिक्षक समाज में सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि वो गुरु हैं , वे ज्ञान का संचार करते हैं।
शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !!!!
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नारियल के औषधीय गूण : संस्कृत में इसको नालिकेरः कहते हैं। "नल्यते केन वायुना ईर्यते इति नालिकेर:"। वर्णभ्रंश के कारण, सा...
13/04/2017

नारियल के औषधीय गूण : संस्कृत में इसको नालिकेरः कहते हैं। "नल्यते केन वायुना ईर्यते इति नालिकेर:"। वर्णभ्रंश के कारण, सामान्य भाषण में यह नारिकेल बन गया। इससे बंगला शब्द नारिकेल तथा हिन्दी शब्द नारियल निकले हैं |
नारियल (Cocos nucifera, कोकोस् नूकीफ़ेरा) एक बहुवर्षी एवं एकबीजपत्री पौधा है। इसका तना लम्बा तथा शाखा रहित होता है। मुख्य तने के ऊपरी सिरे पर लम्बी पत्तियों का मुकुट होता है। ये वृक्ष समुद्र के किनारे या नमकीन जगह पर पाये जाते हैं। इसके फल हिन्दुओं के धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होता है। बांग्ला में इसे नारिकेल कहते हैं। नारियल के वृक्ष भारत में प्रमुख रूप से केरल, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में खूब उगते हैं। महाराष्ट्र में मुंबई तथा तटीय क्षेत्रों व गोआ में भी इसकी उपज होती है। नारियल एक बेहद उपयोगी फल है। नारियल देर से पचने वाला, मूत्राशय शोधक, ग्राही, पुष्टिकारक, बलवर्धक, रक्तविकार नाशक, दाहशामक तथा वात-पित्त नाशक है।
नारियल की तासीर ठंडी होती है। नारियल का पानी हल्का, प्यास बुझाने वाला, अग्निप्रदीपक, वीर्यवर्धक तथा मूत्र संस्थान के लिए बहुत उपयोगी होता है।
सूखे नारियल से तेल निकाला जाता है। इस तेल की मालिश त्वचा तथा बालों के लिए बहुत अच्छी होती है। नारियल तेल की मालिश से मस्तिष्क भी ठंडा रहता है। गर्मी में लगने वाले दस्तों में एक कप नारियल पानी में पिसा जीरा मिलाकर पिलाने से दस्तों में तुरंत आराम मिलता है।
बुखार के कारण बार-बार लगने वाली प्यास के इलाज के लिए नारियल की जटा को जलाकर गर्म पानी में डालकर रख दें। जब यह पानी ठंडा हो जाए तो छानकर इसे रोगी को पीने दें। इससे प्यास मिटती है।
आँतों में कृमि की समस्या से निपटने के लिए हरा नारियल पीसकर उसकी एक-एक चम्मच मात्रा का सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। नारियल के पानी की दो-दो बूँद सुबह-शाम कुछ दिनों तक नाक में टपकाने से आधा सीसी के दर्द में बहुत आराम मिलता है।
सभी प्रकार की चोट-मोच की पीड़ा तथा सूजन दूर करने के लिए नारियल का बुरादा बनाकर उसमें हल्दी मिलाकर प्रभावित स्थान पर पट्टी बाँधें और सेंकें। विभिन्न त्वचा रोगों जैसे खाज-खुजली में नारियल के तेल में नीबू का रस और कपूर मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।
पित्तजन्य विकारों के निदान में नारियल विशेष रूप से लाभकारी है। इसके लिए कच्चे नारियल की गिरी, रस तथा सफेद चंदन का बुरादा मिला लें। इस मिश्रण की 10 ग्राम मात्रा को रात को पानी में भिगो दें। सुबह छानकर इसे खाली पेट पिएँ।
स्वस्थ सुंदर संतान प्राप्ति के लिए गर्भवती महिला को 3-4 टुकड़े नारियल प्रतिदिन चबा-चबाकर खाने चाहिए। इसके साथ एक चम्मच मक्खन, मिसरी तथा थोड़ी सी पिसी कालीमिर्च मिलाकर चाटें। बाद में थोड़ी सी सौंफ चबाएँ। इसके आधे घंटे बाद तक कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। पुराने सूजाक और मूत्रकृच्छ में भी इससे आश्चर्यजनक लाभ होता है।
नारियल क्रोहन्स डिजीज के इलाज के लिए एक रामबाण औषधि है। इस बीमारी में रोगी की आँतों में जलन, डायरिया, मल में रक्त आना, वजन कम होना आदि लक्षण होते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार क्रोहन्स डिजीज के उपचार में प्रयोग किए जाने वाले कॉर्टिकोस्टेराइड्स के समकक्ष नारियल में फाइटोस्टेराल्स नामक समूह तत्व होता है जो क्रोहन्स डिजीज में मुकाबला करता है।
नारियल हमें मोटापे से भी बचाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क के भोजन में प्रतिदिन 15 मिग्रा जिंक होना जरूरी है जिससे मोटापे से बचा जा सके। ताजा नारियल में जिंक भरपूर मात्रा में होता है।
हैजे में यदि उल्टियाँ बंद न हो पा रही हों तो रोगी को तुरंत नारियल पानी पिलाना चाहिए। इससे उल्टियाँ बंद हो जाती हैं
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05/04/2017

दोस्तों ,मई का महीना आ गया है और सूरज अपनी प्रखर किरणों की तीव्रता से संसार के जलियांश (स्नेह )को सुखा कर वायु में रूखापन और ताप बढ़ा कर मनुष्यों के शरीर के ताप की भी वृद्धि कर रहा है!
गर्मी में होने वाले आम रोग –गर्मी में लापरवाही के कारण सरीर में निर्जलीकरण (dehydration),लू लगना, चक्कर आना ,घबराहट होना ,नकसीर आना, उलटी-दस्त, sun-burn,घमोरिया जैसी कई diseases हो जाती हैं.
इन बीमारियों के होने में प्रमुख कारण-
गर्मी के मोसम में खुले शरीर ,नंगे सर ,नंगे पाँव धुप में चलना ,
तेज गर्मी में घर से खाली पेट या प्यासा बाहर जाना,
कूलर या AC से निकल कर तुरंत धुप में जाना ,
बाहर धुप से आकर तुरंत ठंडा पानी पीना ,सीधे कूलर या AC में बेठना ,
तेज मिर्च-मसाले,बहुत गर्म खाना ,चाय ,शराब इत्यादि का सेवन ज्यादा करना ,
सूती और ढीले कपड़ो की जगह सिंथेटिक और कसे हुए कपडे पहनना
इत्यादि कारण गर्मी से होने वाले रोगों को पैदा कर सकते हैं
हम कुछ छोटी-छोटी किन्तु महत्त्वपूर्ण बातो का ध्यान रख कर ,इन सबसे बचे रह कर ,गर्मी का आनंद ले सकते हैं!
उपचार से बचाव बेहतर होता है,है ना?
तो चलिए हम कुछ वचाव के तरीके जानते हैं –
गर्मी में सूरज अपनी प्रखर किरणों से जगत के स्नेह को पीता रहता है,इसलिए गर्मी में मधुर(मीठा) ,शीतल(ठंडा) ,द्रव (liquid)तथा इस्निग्धा खान-पान हितकर होता है!
गर्मी में जब भी घर से निकले ,कुछ खा कर और पानी पी कर ही निकले ,खाली पेट नहीं
गर्मी में ज्यादा भारी (garistha),बासा भोजन नहीं करे,क्योंकि गर्मी में सरीर की जठराग्नि मंद रहती है ,इसलिए वह भारी खाना पूरी तरह पचा नहीं पाती और जरुरत से ज्यादा खाने या भारी खाना खाने से उलटी-दस्त की शिकायत हो सकती है
गर्मी में सूती और हलके रंग के कपडे पहनने चाहिये
चेहरा और सर रुमाल या साफी से ढक कर निकलना चाहिये
प्याज का सेवन तथा जेब में प्याज रखना चाहिये
बाजारू ठंडी चीजे नहीं बल्कि घर की बनी ठंडी चीजो का सेवन करना चाहिये
ठंडा मतलब आम(केरी) का पना, खस,चन्दन गुलाब फालसा संतरा का सरबत ,ठंडाई सत्तू, दही की लस्सी,मट्ठा,गुलकंद का सेवन करना चाहिये
इनके अलावा लोकी ,ककड़ी ,खीरा, तोरे,पालक,पुदीना ,नीबू ,तरबूज आदि का सेवन अधिक करना चाहिये
शीतल पानी का सेवन ,2 से 3 लीटर रोजाना
अगर आप योग के जानकार हैं ,तो सीत्कारी ,शीतली तथा चन्द्र भेदन प्राणायाम एवं शवासन का अभ्यास कीजिये ये शारीर में शीतलता का संचार करते हैं
तो दोस्तों इन कुछ छोटी छोटी बातो का ध्यान रख कर गर्मी की गर्मी से हम स्वयं को बचा सकते हैं!
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सामान्य रूप से आम गर्मी के मौसम में फलता और पकता है, परन्तु मुंबई और दक्षिण भारत के आसपास के क्षेत्रों में सर्दी के मौसम...
01/03/2017

सामान्य रूप से आम गर्मी के मौसम में फलता और पकता है, परन्तु मुंबई और दक्षिण भारत के आसपास के क्षेत्रों में सर्दी के मौसम में भी आम फलता है. अप्रैल के मध्य में आम के फूल झड़ने लगते है और प्रायः अप्रैल के अंत तक आम के वृक्षों से फूल समाप्त हो जाते है. आम के वृक्षों पर, फुल को झाड़ते ही छोटे दाने जैसे फल आने लगते है. आम के बड़े और कच्चे फलों को अमिया कहते है. आम की विभिन्न प्रकार के प्रजातियाँ होने के कारण इसके आकार, रंग, स्वाद आदि में काफी विविधता होती है.
मुख्य रूप से आम दो प्रकार के होते है - गुदे वाले और रस वाले . गुदे वाले आम में दशहरी, चौसा, लंगड़ा आदि आम आते है. व्यावसायिक उपयोग के लिए आम को प्रायः पुआल के निचे आम को बंद कमरों के भीतर रख कर पकाते है , इस प्रक्रिया में करीब ७ दिन लग जाता है.
कहीं-कहीं आम को पकाने के लिए रासायनिक पदार्थों का भी उपयोग किया जाता है .इस प्रकार पकाए गए आम स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते है तथा अनेक प्रकार के रोगों को फैलाते है. अतः आमों को ख़राब होने से बचने के लिए तथा इनका भण्डारकरण करने के लिए शीतगृह सर्वाधिक उपयोगी है.
आम के वृक्ष का औषधीय गुण :- इसके तने और शाखाओं की छाल से अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियां तैयार की जाती है.
1. आम की छाल - वृक्ष के ताजे छाल का रस पेचिश में लाभदायक होता है. छाल के काढ़े से धोने पर पुराने से पुराना घाव भरने लगता है. यह घाव के दर्द को भी कम करता है.
2. आम के पत्ते - आम के हरे व ताजे पत्ते को चबाने से मशुढ़े मजबूत होते है और दाँत के बहुत सारे रोग को जड़ से समाप्त कर देते है. आम की ताज़ी पत्तियों को तोड़कर उन्हें साफ़ करके छाया में सुखा कर, इन्हें कूट-पीसकर बारीक़ चूर्ण बना ले. यह चूर्ण २-३ ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से मधुमेह के रोगियों के लिए रामबाण औषधि जैसे निश्चित रूप से लाभ होता है.
3. आम के छिलके - आम के छिलके को ताजे पानी में पीसकर पिलाने से हैजे के रोगी को विशेष लाभ होता है .कच्चे आम के छिलकों को साफ़ करके सुखा कर फिर कूट-पीसकर महीन चूर्ण बना ले. इस चूर्ण को शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से खुनी पेचिस ठीक हो जाती है.
4. पका आम - पका हुआ आम का फल ह्रदय रोग के लिए विशेष लाभ दायक होता है . इसका सेवन शरीर स्वास्थ्य,बलशाली,पाचनशक्ति बढाने और शुक्राणु सम्बंधित दोषों को दूर करने की क्षमता होती है .गर्मियों के मौसम में पका हुआ फल का सेवन से प्यास और थकान का अनुभव नहीं होता है . आम को लम्बी आयु प्रदान करने वाला फल कहा गया है.
आम के पके हुए फल में ग्लूकोज, कार्बोहाईड्रेट, सुक्रोस, फ़्रकट्रोस, माल्टोस,विटामिन A , लंगड़ा में विटामिन C आदि प्रचुर मात्रा में होते है.
5. आम रस - आम का रस निचुड़ा हुआ- बलकारी, वायुनाशक,हृदय को तृप्त करने वाला और कफवर्धक है। सूर्य किरणों से सुखाकर तैयार किया हुआ रस हल्का होता है। यह पित्तनाशक होता है. गर्मी के दिनों में कच्चे आम को उबालकर उसमें शकर-नमक डालकर तैयार किया जाता है जिसे आम का पन्ना कहते है जिसे पीने से शरीर को ठंडक पहुंचती हैं और लू लगने का खतरा नहीं रहता है.
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नींबू के औषधीय गुण : नींबू का प्रयोग सलाद में या फिर सब्जियों का टेस्ट बढ़ाने के लिए किया जाता है लेकिन क्या आप जानते है...
18/02/2017

नींबू के औषधीय गुण : नींबू का प्रयोग सलाद में या फिर सब्जियों का टेस्ट बढ़ाने के लिए किया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं। नींबू बेहद फायदेमंद और गुणकारी हैं। नींबू के प्रयोग से आप न‍ सिर्फ अपना सौंदर्य निखार सकते हैं, बल्कि यह आपको फिट और स्‍वस्‍थ रखने के लिए भी लाभकारी है। यानी नींबू एक, लाभ अनेक। आइए जानें नींबू से होने वाले लाभों के बारे में।
नीबू के जूस से शरीर की रोग-प्रतिरोधी क्षमता मजबूत होती है लेकिन इससे मोटापा नहीं बढ़ता है। इसके सेवन से आप बिना कमजोरी के वजन घटा लेंगे। यह न सिर्फ पतला करने बल्कि मोटापा बढ़ाने में भी लाभकारी है। वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो रोज नीबू में एक चम्मच शक्कर मिलाकर उसका जूस पीयें।
नींबू बालों के लिए भी काफी अच्छा होता है, बालों में लगाने पर बालों पर ऱूसी का असर नहीं होता है।
नींबू में साइट्रिक एसिड होता है, और इसमें में विटामिन सी पाया जाता है, जो हडि़डयों को मजबूती देने के लिए किफायती है।
सौंदर्य निखारने यानी चेहरे पर कच्चे दूध में नीबू का रस मिला कर लगाने से चेहरे के सारे दाग मिट जाते हैं।
कोहनी पर नींबू के छिलके से सफ़ाई करने से वो काले नहीं होते।
अगर आपके चेहरे पर किसी प्रकार के दाग धब्बे हैं, तो आप फ़े स पैक मे नींबू का रस मिलाकर प्रयोग कर सकते हैं।
गुनगुने पानी मे नींबू का रस डालकर उससे एडियाँ साफ़ करे,एडियाँ साफ़ हो जायेंगी।
पेट की परेशानी को दूर करने के लिए शहद में नींबू का रस नियमित रूप से सुबह लें है। इससे कब्ज संबंधी समस्या को भी दूर किया जा सकाता है।
आपको बहुत देर से हिचकी आ रही है, तो नींबू के रस में 2 छोटे चम्मच काला नमक ,शहद का 1 छोटा चम्मच मिलाकर पीयें।
अगर आपकी त्वचा तैलीय है, तो नींबू के रस मे बराबर मात्रा मे पानी मिलाकर चेहरा साफ़ करें।
मसूड़े फूलने पर नींबू को पानी में निचोड़ कर कुल्ला करने से अत्यधिक लाभ होगा। इतना ही नहीं नींबू से दांतों के दर्द को भी दूर किया जा सकता है।
नींबू में फिटकरी का चूर्ण भरकर खुजली वाले स्थान पर रगड़ने से खुजली दूर हो जाती है।
जोड़ो के दर्द में नींबू के रस को दर्द वाले स्थान पर मलने से दर्द व सूजन कम हो जाती है।
यदि गर्भधारण के चौथे माह से प्रसवकाल तक स्त्री एक नींबू की शिकंजी नित्य पीए तो प्रसव बिना कष्ट संभव हो सकता है।
इसके अलावा हैजे को दूर करना, पानी की कमी को दूर करना,ब्लड प्रेशर सामान्य करना, मिर्गी के दौरों को रोकना में भी नींबू उपयोगी है।
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प्याज के औषधीय गुण : आपने सुना ही होगा कि प्याज के छिलके निकालने से क्या फायदा परंतु शायद कम ही लोग जानते हैं कि प्याज क...
07/02/2017

प्याज के औषधीय गुण : आपने सुना ही होगा कि प्याज के छिलके निकालने से क्या फायदा परंतु शायद कम ही लोग जानते हैं कि प्याज के इन्हीं छिलकों में स्वास्थ्य और स्वाद का खजाना छिपा हुआ है। दिखने में साधारण-सा प्याज एक बेहतरीन सब्जी भी है और एक बेजोड़ औषधि भी, प्याज को दूसरों शब्दों में हम एक जमीनी कली भी कह सकते हैं।
गरुडपुराण में प्लांडूगुटिका का एक पुरा पाठ है, जो यह दर्शाता है कि किसी समय प्याज एक पूज्य वनस्पती भी थी। आयुर्वेद में प्याज को कफनिस्सारक (cough reliver), वृष्य अर्थात वाजीकारक (Aphrodisiac), अग्निवर्धक (Appetite excitant), वातहर (gas reliver), दूषित पित्तहर (Blood purifier) एवं कृमिहर (anti-bacterial) इत्यादि बताया गया है।
प्याज में केलिसिन और रायबोफ्लेविन (विटामिन बी) पर्याप्त मात्रा में होता है। इसमें 11 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है और इसकी गंध एन-प्रोपाइल-डाय सल्फाइड के कारण आती है। यह पदार्थ पानी में घुलनशील अमीनों अम्लों पर एन्जाइम की क्रिया के कारण बनता है। यही कारण है कि प्याज को काटने पर ही आँसू आते हैं। हम प्याज का सलाद एवं सब्जी के रूप में तो उपयोग करते ही हैं, यह एक बेहतरीन औषधि भी है।
1.) लू लगने पर:- गर्मियों में लू लग जाना एक आम बात है लेकिन, अगर आप कच्ची प्याज खाती हैं तो आपको लू नहीं लगेगी. लू लगने पर प्याज का रस पीने से फायदा होता है। आपने बड़े-बुजुर्गों को ये कहते भी सुना होगा कि प्याज का टुकड़ा साथ रखने से लू नहीं लगती है।
2.) गठिया के इलाज में:- अगर आपके घर में किसी को गठिया या जोड़ो का दर्द है तो प्याज के रस की मालिश करने से आराम मिलेगा. प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करने से आराम मिलता है।
3.) प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर दो महीनों तक लगातार जोड़ो पर मालिश करने से जोड़ो के दर्द और आमवात में आराम मिलता है।
4.) प्याज के रस में मिश्री मिलाकर चाटने से कफ की समस्या से जल्द ही निजात मिलता है।
5.) गर्मियों में सर में दर्द होने पर प्याज के सफेद कंद को तोड़कर सूंघने से जल्द ही आराम मिलता है। मसूड़ो में सूजन और दांत मैं दर्द होने की दशा में प्याज के रस और नमक का मिश्रण लगाने से दर्द में राहत मिलती है ।
6.) बालों के लिए –बाल गिरने की समस्या से निजात पाने के लिए प्याज बहुत ही असरकारी है। गिरते हुए बालों के स्थान पर प्याज का रस रगडने से बाल गिरना बंद हो जाएंगे। इसके अलावा बालों का लेप लगाने पर काले बाल उगने शुरू हो जाते हैं।
7.) पथरी के लिए –अगर आपको पथरी की शिकायत है तो प्याज आपके लिए बहुत उपयोगी है। प्याज के रस को चीनी में मिलाकर शरबत बनाकर पीने से पथरी की से निजात मिलता है। प्याज का रस सुबह खाली पेट पीने से पथरी अपने-आप कटकर प्यास के रास्ते से बाहर निकल जाती है।
8.) पायरिया की समस्या है तो प्याज के टुकड़ों को गर्म करके दांतों के नीचे दबाकर मुंह बंद कर लें। ऐसा करने से आपके मुंह में लार एकत्रित हो जाएगी। उसे कुछ देर मुंह में रखने के बाद बाहर निकाल दें। ऐसा दिन में 4-5 बार करने से पायरिया की समस्या समाप्त हो जाती है।
9.) डायबिटीज रोगियों को भोजन के साथ कच्चा प्याज खाना चाहिए। प्याज खाने से शरीर में इंसुलिन का स्तर सामान्य हो जाता है।
10.) प्याज कैंसर सेल को बढ़ने से रोकता है। इसमें सल्फर तत्व अधिक मात्रा में होते हैं। यह सल्फर पेट, कोलोन, ब्रेस्ट, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर से बचाता है।
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काकड़ी के औषधीय गुण: गर्मी के मौसम तो ककड़ी की मांग बढ़ जाती है। यह अनेक लवणों तथा जलतत्व से पूर्ण होती है। इसमें कैल्शिय...
23/01/2017

काकड़ी के औषधीय गुण: गर्मी के मौसम तो ककड़ी की मांग बढ़ जाती है। यह अनेक लवणों तथा जलतत्व से पूर्ण होती है। इसमें कैल्शियम फास्फोरस, सोडियम तथा मैग्नीशियम पाया जाता है। इसका सेवन डिहाइड्रेशन से बचाता है, साथ ही यह सलाद के रूप में पेट के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसके सेवन से गर्मी भी कम लगती है। आइए इस आर्टिकल के माध्‍यम से बात करते हैं ककड़ी का सेवन किस तरह आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
पाचनशक्ति बढ़ती है
गर्मियों में ककड़ी का सेवन पेट संबंधी रोगों से छुटकारा दिलाने के साथ ही पाचन शक्ति भी बढ़ाता है। यह पित्त से उत्पन्न होने वाले दोषों को भी दूर करती है। यह कब्‍ज, एसिडिटी, सीने में जलन या गैस्‍ट्रिक की समस्‍या को भी ठीक करती है।
पानी की कमी दूर करने में सहायक
ककड़ी में खीरे की अपेक्षा जल की मात्रा ज्यादा होती है। इसके सेवन से तेज गर्मी में भी शरीर तर रहता है। यह शरीर से गंदगी को बाहर निकालती है। इस मौसम में खीरे, खरबूजे और तरबूज के सेवन से भी पानी की कमी दूर होती है।
मोटापा घटाने में मददगार
यदि आपको ज्‍यादा भूख लगती है और आपका वजन दिन पर दिन बढ़ रहा है तो ककड़ी आपके लिए फायदेमंद साबित होगी। भूख लगने पर ककड़ी का सेवन कीजिए। इसमें पर्याप्‍त मात्रा में पानी और फाइबर पाया जाता है, जबकि कैलोरी की मात्रा इसमें नहीं होती। इसके सेवन से वजन नियंत्रित रहेगा।
डायबिटीज और कोलेस्‍ट्रॉल करें कंट्रोल
ककड़ी के सेवन से डायबिटीज और कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा सामान्‍य रहती हैं। ककड़ी का सेवन इन्‍सुलिन के लेवल को कंट्रोल करता है। साथ ही ककड़ी में स्‍टीरॉल भी पाया जाता है जो कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को भी कम करता है।
बालों के लिए लाभकारी
ककड़ी का नियमित रूप से सेवन करने से छोटे बाल बड़े हो जाते हैं। इसमें सिलिकॉन और सल्फर की मात्रा होती है। सिलिकॉन और सल्फर बालों की लंबाई बढ़ाने में सहायक हैं। ककड़ी, गाजर और पालक का जूस मिलाकर पीने से बालों की लंबाई बढ़ेगी। ककड़ी के रस से बाल धोना भी लाभकारी होगा।
त्‍वचा के लिए फायदेमंद
चेहरे की त्वचा चिकनी हो तो चेहरे पर ककड़ी रगड़ कर पानी से धोयें। इससे चेहरे की चिकनाई दूर हो जाएगी। ककड़ी का रस चेहरे पर लगाने से दाग धब्बे साफ हो जाते हैं। इसका रस लगाने से मुंह, हाथ व पैर कम फटते हैं और आप खूबसूरत लगते हैं।
मस्तिष्क की गर्मी दूर भगाएं
ककड़ी के बीज भी बहुत फायदेमंद होते हैं। इसके बीज मस्तिष्क की गर्मी को दूर करने में मददगार होते हैं। इसके सेवन से बौखलाहट, चिड़चिड़ापन और उन्माद आदि मानसिक विकार दूर होते हैं। मस्तिष्क की गर्मी मिटाने और इसे ठंडक पहुंचाने के लिए ककड़ी के बीज को ठंडाई के रूप में भी इस्तेमाल करते है।
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गोभी का फूल महज एक सब्जी ही नहीं है, बल्कि इसमें आपकी सेहत अछा रखने के कई गुण मौजूद होते हैं। गोभी को अपने आहार में शामि...
17/01/2017

गोभी का फूल महज एक सब्जी ही नहीं है, बल्कि इसमें आपकी सेहत अछा रखने के कई गुण मौजूद होते हैं। गोभी को अपने आहार में शामिल कर आप कई बीमारियों से बच सकते हैं। साथ ही कई रोग होने पर आप गोभी के जरिये उनका उपचार भी कर सकते हैं।
गोभी भारतीय भोजन का प्रमुख हिस्सा है। आसानी से उपलब्ध होने वाली गोभी में कई औषधीय गुण भी हैं। पत्ता गोभी में दूध के बराबर कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत करता है। गोभी का बीच उत्तेमजक, पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला और पेट के कीड़ों को नष्टै करने वाला है। गोभी का रस मीठा होता है। आइए हम आपको गोभी से होने वाले फायदों के बारे में जानकारी देते हैं।
गोभी के घरेलू उपचार
1. पेट दर्द होने पर गोभी की जड़, पत्तीस, तना फल और फूल को चावल के पानी में पकाकर सुबह-शाम लेने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है।
2.गोभी खाने से खून साफ होता है। गोभी का रस पीने से खून की खराबी दूर होती है और खून साफ होता है।
3.हड्डियों का दर्द दूर करने के लिए गोभी के रस को गाजर के रस में बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से हड्डियों का दर्द दूर होता है।
4.पीलिया के लिए भी गोभी का रस बहुत फायदेमंद है। गाजर और गोभी का रस मिलाकर पीने से पीलिया ठीक होता है।
5.बवासीर होने पर जंगली गोभी का रस निकालकर, उसमें काली मिर्च और मिश्री मिलाकर पीने से मस्सों से खून निकलना बंद हो जाता है।
6.खून की उल्टीस होने पर गोभी का सेवन करने से फायदा होता है। गोभी की सब्जी या कच्चीस गोभी खाने से खून की उल्टियां होना बंद हो जाती हैं।
7.बुखार होने पर गोभी की जड़ को चावल में पकाकर सुबह-शाम सेवन करने से फायदा होता है।
8.पेशाब में जलन होने पर गोभी का काढ़ा बनाकर रोगी को पिलाइए। इससे तुरंत आराम मिलता है।
9.गले में सूजन होने पर गोभी के पत्तों का रस निकालकर दो चम्मरच पानी मिलाकर खाने से फायदा होता है।
10.दिल के लिए बहुत फायेदमंद होती है। यह दिल और कार्डियोवस्कु लर प्रणाली को सही प्रकार से काम करने में मदद करती है।
11.गोभी गोभी फाइबर का उच्च स्रोत होती है। फाइबर हमारी पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है और साथ कोलेस्ट्रॉ ल के स्तरच को भी कम करता है।
12.गोभी में एंटी ऑक्सीसडेंट्स होते हैं। एंटी ऑक्सीपडेंट्स के काफी लाभ होते हैं। ये हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं।
13.गर्भावस्था में भी गोभी काफी फायदेमंद होती है। इसमें फोलेट काफी उच्च मात्रा में होते हैं। इसके साथ ही यह विटामिन ए और विटामिन बी से भी भरपूर होती है। यह कोशिकाओं को बढ़ने में मदद करती है। इससे गर्भ में पल रहे भ्रूण को काफी लाभ होता है। गोभी विटामिन सी का भी उत्त म स्रोत है। यह भी गर्भावस्थाक के दौरान काफी फायदेमंद होता है। इसलिए हर गर्भवती महिला को रोजाना कम से कम एक कप गोभी जरूर खानी चाहिए।
14.गोभी में कैल्शियम की मात्रा भी काफी होती है। जो हमारे नर्वस सि‍स्टकम को मजबूत बनाता है। कैल्शियम हमारे दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसके साथ ही यह शरीर की कई अन्यि प्रणालियों को भी सही प्रकार से काम करने में मदद करता है।
15.गोभी में जिंक, मैग्नीोशियम, मैन्गिनीज, फास्फोारस और सेलेनियम तथा सोडियम जैसे लाभकारी तत्व होते हैं।
16.गोभी कैंसर के खतरे को भी कम करने में मदद करती है। फेफड़े का कैंसर, स्तिन कैंसर, ब्लै.डर कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा गोभी के नियमित सेवन से कम हो जाता है। गोभी के जैविक परिवार में शामिल अन्यं सब्जियां जैसे- ब्रोकली, कैल आदि भी कैंसर को दूर रखने में मदद करतीं हैं।
17.वजन कम करने में गोभी काफी फायदेमंद होती है। गोभी में मौजूद विटामिन सी अतिरिक्तव वसा को कम करने में काफी महत्व पूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही इसमें फोलेट की मौजूदगी भी मोटापे से निजात दिलाने में मददगार होता है। एक कप गोभी में लगभग 30 कैलोरी होती है। इसमें स्टाेर्च नहीं होता इसलिए आप इसका जितना चाहें उतना सेवन कर सकते हैं।
18.गोभी लिवर में मौजूद एंजाइम्स को एक्टिवेट करने में मदद करती है। इससे लिवर बेहतर काम करता है और शरीर से विषैले पदार्थ अधिक मात्रा में बाहर निकलते हैं। इससे शरीर के कई अंगों को होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।
19.अपने शरीर में विटामिन के की मात्रा बढ़ाने के लिए अपने आहार में गोभी शामिल करें। विटामिन के अस्थि कोशिकाओं के निर्माण में महती भूमिका निभाता है। इतना ही नहीं, अगर आपके शरीर में विटामिन के की पर्याप्त मात्रा न हो, तो चोट अथवा जख्मश लगने की स्थिति में आपके शरीर से अधिक मात्रा में रक्तू बहेगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंथकि विटामिन के रक्ता के थक्केम जमाने में काफी मदद करता है।
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तुलसी के औषधीय गुण : भारतीय संस्कृति और धर्म में तुलसी को उसके महान गुणों के कारण ही सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है। भारत...
13/01/2017

तुलसी के औषधीय गुण : भारतीय संस्कृति और धर्म में तुलसी को उसके महान गुणों के कारण ही सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है। भारतीय संस्कृति में यह पूज्य है। आयुर्वेद में तुलसी तथा उसके विभिन्न औषधीय गुणों का एक विशेष स्थान है। तुलसी को संजीवनी बूटी के समान भी माना जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में तुलसी के पौधे के हर भाग को स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद बताया गया है। तुलसी की जड़, उसकी शाखाएं, पत्ती और बीज सभी का अपना-अपना अलग महत्व है। आमतौर पर घरों में दो तरह की तुलसी देखने को मिलती है, एक जिसकी पत्त‍ियों का रंग थोड़ा गहरा होता है और दूसरा, जिसकी पत्तियों का रंग हल्का होता है। तुलसी शरीर का शोधन करने के साथ-साथ वातावरण का भी शोधन करती है तथा पर्यावरण संतुलित करने में भी मदद करती है।
१)हिन्दू धर्म संस्कृति के चिर पुरातन ग्रंथ वेदों में भी तुलसी के गुणों एवं उसकी उपयोगिता का वर्णन मिलता है। अथर्ववेद (1-24) में वर्णन मिलता है - सरुपकृत त्वयोषधेसा सरुपमिद कृधि, श्यामा सरुप करणी पृथिव्यां अत्यदभुता। इदम् सुप्रसाधय पुना रुपाणि कल्पय॥ अर्थात् - श्यामा तुलसी मानव के स्वरूप को बनाती है, शरीर के ऊपर के सफेद धब्बे अथवा अन्य प्रकार के त्वचा संबंधी रोगों को नष्ट करने वाली अत्युत्तम महौषधि है।
२)महर्षि चरक तुलसी के गुणों का वर्णन करते हुए लिखते हैं - हिक्काकासविषश्वास पार्श्वशूलविनाशनः । पित्तकृत् कफवातघ्न्रः सुरसः पूतिगन्धहाः॥ तुलसी हिचकी, खाँसी, विष, श्वांस रोग और पार्श्व शूल को नष्ट करती है। यह पित्त कारक, कफ-वातनाशक तथा शरीर एवं भोज्य पदार्थों की दुर्गन्ध को दूर करती है।
३)सूत्र स्थान में वे लिखते हैं - गौरवे शिरसः शूलेपीनसे ह्यहिफेनके । क्रिमिव्याधवपस्मारे घ्राणनाशे प्रेमहेके॥ (2/5) सिर का भारी होना, पीनस, माथे का दर्द, आधा शीशी, मिरगी, नासिका रोग, कृमि रोग तुलसी से दूर होते हैं।
४)सुश्रुत महर्षि का मत भी इससे अलग नहीं है। वे लिखते हैं - कफानिलविषश्वासकास दौर्गन्धनाशनः । पित्तकृतकफवातघ्नः सुरसः समुदाहृतः॥ (सूत्र-46) तुलसी, कफ, वात, विष विकार, श्वांस-खाँसी और दुर्गन्ध नाशक है। पित्त को उत्पन्न करती है तथा कफ और वायु को विशेष रूप से नष्ट करती है।
५)भाव प्रकाश में उद्धरण है - तुलसी पित्तकृद वात कृमिर्दोर्गन्धनाशिनी। पार्श्वशूलारतिस्वास-कास हिक्काविकारजित॥ तुलसी पित्तनाशक, वात-कृमि तथा दुर्गन्ध नाशक है। पसली का दर्द, अरुचि, खाँसी, श्वांस, हिचकी आदि विकारों को जीतने वाली है। आगे वे लिखते हैं - यह हृदय के लिए हितकर, उष्ण तथा अग्निदीपक है एवं कुष्ट-मूत्र विकार, रक्त विकार, पार्श्वशूल को नष्ट करने वाली है। श्वेत तथा कृष्णा तुलसी दोनों ही गुणों में समान हैं।
होम्योपैथिक मत
भारतीय व यूरोपीय दोनों ही होम्योपैथ सिद्धान्त तुलसी को अमृतोपम मानते हैं। बंगाल के डॉ. विश्वास कहते हैं कि तुलसी अनेकानेक लक्षणों में लाभकारी औषधि है। सिर में दर्द, स्मरण शक्ति में कमी, बच्चों का चिड़चिड़ापन, आँखों की लाली, एलर्जी के कारण छीकें आना, नाक बहना, मुँह में छाले, गले में दर्द, पेशाब में जलन, दमा तथा जीर्ण ज्वर जैसे बहुत प्रकार के लक्षणों में तुलसी को होम्योपैथी में स्थान दिया गया है। इसकी 2, 3, 6, 30 तथा 200 वीं पोटेन्सी में प्रयोग कर इन सभी रोगों में लाभ पाए हैं। ब्राजील में तुलसी की ऑसीमम कैनन नामक जाति पायी जाती है। डॉ. भरे व बोरिक यह मानते हैं कि यह प्रजनन तथा मूत्रवाही संस्थान रोगों की श्रेष्ठ औषधि है।
यूनानी मत
इसके अनुसार तुलसी हृदयोत्तेजक, बलवर्धक तथा यकृत आमाशय बलदायक है। यह हृदय को बल देने वाली होने के कारण अनेक प्रकार के शोथ-विकारजन्य रोगों में आराम देती है। यह शिरःशूल की श्रेष्ठ औषधि है। पत्ते सूँघने से मूर्छा दूर होती है तथा चबाने से दुर्गन्ध। रस कान में टपकाने से कर्णशूल शान्त होता है।

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