Dr kidney

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10/09/2019

डॉ•किडनी 🎄🎄..... मेडिकल की दुनिया का एक बड़ा सच और खुलेआम मची लूटपाट.... Dr. Vivek bindra की बातो से आप कितना सहमत है..... और इसमे किस हद तक सच्चाई है... प्लीज़ कमेंट बॉक्स मे ज़रूर बताये.... और आप हमारे पेज Dr किडनी से जुड़े रहिये.. शेयर, लाइक और कमेंट भी करते रहिये.. आगे भी आपको मेडिकल से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारीया मिलती रहेगी... धन्यवाद !

01/09/2019

Apollo hospital......

1st July Dr Day 🎉🎉🎉🎉💐💐💐🎊🎊🎁
01/07/2019

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28/06/2019

Dr Kidney
सावधान!!कहीं आपका भी परिवार इसका शिकार तो नहीं,,,,,,, खुद भी देखें और इस वीडियो को दूसरों तक भी पहुंचाए .... हेल्थ से जुड़ी जानकारी हमारे पेज से पाएं🙏 डॉक्टर किडनी💐💐🎉plzz like and Share

हमारे शरीर का मुख्य अंग है हार्ट। यह बिना रूके 24 घंटे लगातार काम करता रहा है। जैसे ही यह काम करना बंद करता है इंसान की ...
24/06/2019

हमारे शरीर का मुख्य अंग है हार्ट। यह बिना रूके 24 घंटे लगातार काम करता रहा है। जैसे ही यह काम करना बंद करता है इंसान की मौत हो जाती है। ऐसे में हमें अपने दिल का खास ख्याल रखना चाहिए। हम अपने खानपान के जरिए दिल और सेहत का ख्याल रख सकते हैं। जानकारों के मुताबिक खाने में सरसों के तेल के इस्तेमाल से हम दिल की बिमारी से दूर रह सकते हैं।
- सरसों के तेल में भरपूर मात्रा में मोनोअनसैचुरेटिड फैट और पॉलीअनसैचुरेटिड फैट पाया जाता है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाने में मदद करते हैं और अच्छे एचडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं, ताकि कोलेस्ट्रॉल का बैलेंस बना रहे। इससे दिल हेल्‍दी बना रहता है और सही तरीके से काम करता है।
- सरसों का तेल एक जीवाणुरोधी, वायरसरोधी और फंफूद रोधी एजेंट के रूप में भी अच्छी तरह काम करता है और पाचन तंत्र में बैक्टीरिया के संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
- इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 वसा अम्ल के सर्वोत्तम अनुपात और संतृप्त वसा की कम मात्रा के कारण अन्य तेलों से यह बेहतर है। इसमें करीब 60 फीसदी मोनोसैचुरेटिड वसा (एमयूएफए), साथ ही पॉलीअनसैचुरेटिड वसा और संतृप्त वसा होती है। ये वसा अम्ल 'उपयुक्त वसा' माने जाते हैं।
- इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 वसा के साथ-साथ एमयूएफए और पीयूएफए के अम्ल होते हैं। ये उपयुक्त वसा हृदय रोगों के विकास के जोखिम को कम करते हैं और यह एक बेहद शक्तिशाली प्राकृतिक उत्तेजक है, जो पाचन में सुधार करता है और पाचन रसों को तैयार करने में मदद कर भूख बढ़ाता है।
- इसमें कैंसर से लड़ने वाले तत्व काफी अधिक होते हैं और इसमें भारी मात्रा में लिनोलिनिक एसिड होता है, जो ओमेगा-3 वसा अम्ल में परिवर्तित हो जाता है और कैंसर को रोकने में मदद करता है।

Dr⚕️Kidney plzz like and Shareपिता को 10 लोग लीवर देने के लिए तैयार थे, लेकिन बेटी भावी ने खुद डोनेट कियाबेटी का पिता के...
17/06/2019

Dr⚕️Kidney plzz like and Share
पिता को 10 लोग लीवर देने के लिए तैयार थे, लेकिन बेटी भावी ने खुद डोनेट किया
बेटी का पिता के प्रति प्रेम और जज्बा देखकर तेजस हुए प्रभावित
सूरत::गुजरात के सूरत में एक बेटी ने अपने पिता के जन्मदिन पर उन्हें लीवर देकर नई जिंदगी दी, तो कनाड़ा से सूरत आया एक युवक इतना प्रभावित हुआ कि उसी से ही शादी करने का फैसला किया। आखिरकार, दोनों पक्षों को राजी हुए। 3 साल पहले की ये कहानी आज भी जीवन में पिता की महत्ता बताती है। फादर्स डे पर भास्कर ने एक डायमंड कंपनी में मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हुए विश्वजीत मेहता, उनकी बेटी भावी और तेजस से बातचीत की।
अडाजण निवासी विश्वजीत मेहता को 2014 में लीवर की समस्या हुई। 2016 में डॉक्टर ने लीवर ट्रांसप्लांट करवाने को कहा। विश्वजीत की बेटी भावी को इसकी जानकारी हुई तो उसने उन्हें लीवर देने का फैसला किया। 12 मई 2016 को पिता के जन्मदिन पर भावी ने उन्हें लीवर दे दिया। भावी से प्रभावित होकर तेजस उनसे शादी करने कनाडा से आ गए थे।
तेजस: मैंने तय किया था कि शादी तो भावी से ही करूंगा कनाडा में रहने वाले तेजस त्रिवेदी बताते हैं कि तीन साल पहले वे शादी के सिलसिले में सूरत आए थे। यहां परिजनों ने रिश्ते के लिए कुछ जगहों पर बात कर रखी थी। सभी परिवार सकारात्मक थे। उसी दौरान मुझे पता चला कि हमारे समाज की एक लड़की ने अपने पिता को लीवर डोनेट किया है। मैंने लड़की से मिलने का फैसला किया। परिवार के सदस्यों ने मुझे बताया कि भावी ने लीवर डोनेट किया है। लेकिन, मैंने किसी की परवाह किए बिना शादी करने की जिद की। आज हम दोनों कनाडा में रह रहे हैं। 11 महीने का एक बच्चा भी है।
विश्वजीत मेहता: बेटी जिद पर अड़ गई, कहा- वह मुझे जिंदगी का सबसे बड़ा गिफ्ट देना चाहती है लीवर प्रत्यारोपण के बाद पिता विश्वजीत मेहता कहते हैं- 'दुनिया में मेरी दो मां हैं। एक जन्म देने वाली है। और दूसरी मेरी मां बेटी, जिसने मुझे लीवर देकर नया जन्म दिया है। वह बताते हैं- 2014 में मुझे लीवर की समस्या का पता चला। मैं रिस्क लेकर परिवार के साथ सिंगापुर गया। वापस आने पर ऑपरेशन करवाना था। 10 लोग लीवर देने के लिए तैयार थे, लेकिन बेटी भावी ने जिद पकड़ ली कि वही लीवर देगी। उसने कहा कि ऑपरेशन वाले दिन आपका बर्थ डे है और मैं लीवर देकर आपको जिंदगी का सबसे यादगार गिफ्ट देना चाहती हूं। यह सुनकर मित्रों ने कहा कि अपनी बेटी की जिंदगी क्यों खराब करना चाहते हो? इसके बावजूद मेरी बेटी ने ही मुझे लीवर दिया।
भावी: पिता का ऋण चुकाने का मौका मैं खोना नहीं चाहती थी पापा के ऑपरेशन के एक दिन पहले मैं बहुत ही नर्वस थी। उसी ही दिन एक लड़की भी अपने पिता को लीवर डोनेट करने जा रही थी। मैं उससे मिलने गई। उसने मुझसे कहा कि तुम लकी हो, क्योंकि तुम्हें पिता का ऋण चुकाने का मौका मिला है। सभी इतने भाग्यशाली नहीं होते हैं। तुम चिंता छोड़ो और पिता के साथ खड़ी रहो। सबकुछ अच्छा होगा। यह सुनकर मैं बहुत मोटिवेट हुई थी। उसके बाद मेरा डर गायब हो गया। उस समय मेरी जिंदगी में मेरे माता-पिता और संबंधियों को सिवाय कोई नहीं था। हम भविष्य में आने वाले व्यक्ति की चिंता करते हैं, लेकिन जन्म देने वाले की चिंता ज्यादा करनी चाहिए। लीवर देकर भावी ने अपने पिता से कहा- मैं आपको जीवन का सबसे यादगार उपहार देना चाहती थी।
क्या है लीवर ट्रांसप्लांट डोनर स्वस्थ्य लीवर में से कुछ हिस्से को डोनेट कर सकता है। लेकिन, डोनर की जिंदगी को खतरा रहता है। चूंकि, कुछ माह चुनौती भरे रहते हैं। हालांकि बाद में लीवर सामान्य अवस्था में आ जाता है। लीवर ट्रांसप्लांट के लिए अतिरिक्त लीवर की आवश्यकता नहीं होती है।
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14/06/2019

Jaan Hai to, Jahaan h.... Dheyaan do sehat ko, laat maaro aafat ko... 👌👌👌👍👍👍🙏💐🌼Like & Share,,,, Dr Kidney

💐💐Dr Kidney 🙏plz like and Share 🌺🌺🌺New Delhi : बेटिया हमेशा ही कुछ अलग ही कर समाज में एक संदेश छोड़ जाती है और बेटियो ने ...
01/06/2019

💐💐Dr Kidney 🙏plz like and Share 🌺🌺🌺
New Delhi : बेटिया हमेशा ही कुछ अलग ही कर समाज में एक संदेश छोड़ जाती है और बेटियो ने हमेशा ही साबित किया है जब अपनों पर संकट आता है तो यह बेटियां ही अपनी जान की परवाह न कर के हमेशा अपनों के लिए खड़ी रहती है।
मिर्ज़ापुर की ऐसी ही एक बेटी ने सभी का सीना गर्व से ऊंचा कर दिया, खुद की जान की परवाह न करके कुछ समय पहले एक बेटी ने अपना लीवर अपने पिता को दे कर जान बचाई। बेटी की शादी हो चुकी है उसके भी दो छोटे-छोटे बच्चे है मगर एक बेटी ने साबित किया आखिर क्यों एक पिता और बेटी का रिश्ता भगवान का सबसे अनमोल धरोहर है ।
एक बेटी का अपने पिता को जीवनदान देने की कहानी रोचक है। मिर्ज़ापुर के जमालपुर थाना क्षेत्र के बहुआर गांव के रहने वाले रवि प्रकाश त्रिपाठी की हालत पिछले कुछ महीनों से ज्यादा ख़राब हो गयी तो घर वालो ने रवि प्रकाश त्रिपाठी को वाराणसी में स्थित हेरिटेज अस्पताल में भर्ती कराया कई दिन दवा चलने के बाद जब कोई राहत नहीं मिली तो डॉक्टरों ने लीवर का परिक्षण किया तो लीवर में रिसाव था जिसे देखते हुए डॉक्टर ने लीवर के ट्रांसप्लांट के लिए परिजनों को मेदांता गुड़गांव या फिर एम्स में ले जाने की सलाह दी ।
परिजन रवि प्रकाश त्रिपाठी को लेकर मेदांता अस्पताल पहुचे तो डॉक्टरों ने लीवर ट्रांसप्लांट के लिए कहा इसके लिए किसी डोनर की जरुरत थी जो लीवर ट्रांसप्लांट कर सके। असली समस्या यही से शुरू हो गई रवि प्रकाश त्रिपाठी के कुल 6 बच्चे थे दो लड़के अरूण और वरुण साथ ही चार बेटियां वीणा, ब्यूटी, बुलबुल और बानो। लीवर डोनेट को लेकर कोई सामने नहीं आ रहा था, लिहाजा डॉक्टरों ने गंभीर रूप से बीमार मरीज को घर ले जाने की सलाह दी।
लीवर ट्रांसप्लांट की अवस्था में रवि प्रकाश त्रिपाठी का बचना मुश्किल था। जैसे ही वीणा को पता चला पिता की जान बचनी मुश्किल है तो बेटी अपने ससुराल कंचनपुर से अपने ससुर श्री निति उपाध्याय के साथ मेदांता अस्पताल गुड़गांव पहुंच गई। पिता की जान बचाने के लिए खुद अपना लीवर ट्रांसप्लांट करवाने का फैसला लिया । हालांकि इस फैसले में वीणा के पति मनीष उपाध्याय और ससुर निति उपाध्याय का भी समर्थन था ।

Dr Kidney (KHAS JANKARI) अगर आप देर रात तक जागते हैं या नाइट शिफ्ट में काम करते हैं, तो आपमें कई बीमारियों का खतरा बढ़ ज...
16/04/2019

Dr Kidney (KHAS JANKARI)
अगर आप देर रात तक जागते हैं या नाइट शिफ्ट में काम करते हैं, तो आपमें कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। देर रात तक जागना हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक है। अक्सर देर रात तक जागने वाले लोग समझते हैं कि सुबह देर तक सो जाने से उनकी नींद पूरी हो जाती है इसलिए उनका स्वास्थ्य प्रभावित नहीं होगा। मगर आपको बता दें कि हम सबके शरीर में एक 'जैविक घड़ी या बायलॉजिक क्लॉक' होती है, जिसे सरकेडियन रिदम कहते हैं। इस घड़ी के द्वारा ही हमारा शरीर सोने और जागने के नियम तय करता है। जब आप देर रात तक जागते हैं, तो शरीर का बायलॉजिकल नियम टूटता है और आपका स्वास्थ्य प्रभावित होता है। आइए आपको बताते हैं कि देर रात तक जागने से आपमें किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
ब्लड प्रेशर की समस्या
देर रात तक जागने के कारण आपका ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होने लगता है, जिसके कारण बहुत सारे लोगों में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या शुरू हो जाती है। ब्लड प्रेशर की समस्या स्वयं भी कई बीमारियों को जन्म देती है, जैसे डायबिटीज, दिल की बीमारियां, किडनी फेल्योर, स्ट्रोक आदि। इसीलिए समय से सोएं और पूरी नींद लें। युवावस्था में ये परेशानियां आपको कम महसूस होती हैं मगर 30-35 की उम्र तक समस्या घातक रूप ले सकती है।

वैकल्पिक चिकित्सा
Health
स्वास्थ्य⁄ हेल्थ डिसीज़⁄ विविध
देर रात तक जागने वालों में बढ़ रही हैं ये 5 बीमारियां, जानें खतरे और बचाव
देर रात तक जागने वालों में बढ़ रही हैं ये 5 बीमारियां, जानें खतरे और बचाव
QUICK BITES
देर रात तक जागने के कारण आपका ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होने लगता है।
हम सबके शरीर में एक 'जैविक घड़ी होती है, जिसे सरकेडियन रिदम कहते हैं।
ऐसी कई बीमारियां हैं, जो देर रात तक जागने वालों को ज्यादा प्रभावित करती हैं।

अगर आप देर रात तक जागते हैं या नाइट शिफ्ट में काम करते हैं, तो आपमें कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। देर रात तक जागना हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक है। अक्सर देर रात तक जागने वाले लोग समझते हैं कि सुबह देर तक सो जाने से उनकी नींद पूरी हो जाती है इसलिए उनका स्वास्थ्य प्रभावित नहीं होगा। मगर आपको बता दें कि हम सबके शरीर में एक 'जैविक घड़ी या बायलॉजिक क्लॉक' होती है, जिसे सरकेडियन रिदम कहते हैं। इस घड़ी के द्वारा ही हमारा शरीर सोने और जागने के नियम तय करता है। जब आप देर रात तक जागते हैं, तो शरीर का बायलॉजिकल नियम टूटता है और आपका स्वास्थ्य प्रभावित होता है। आइए आपको बताते हैं कि देर रात तक जागने से आपमें किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

(1) ब्लड प्रेशर की समस्या
देर रात तक जागने के कारण आपका ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होने लगता है, जिसके कारण बहुत सारे लोगों में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या शुरू हो जाती है। ब्लड प्रेशर की समस्या स्वयं भी कई बीमारियों को जन्म देती है, जैसे डायबिटीज, दिल की बीमारियां, किडनी फेल्योर, स्ट्रोक आदि। इसीलिए समय से सोएं और पूरी नींद लें। युवावस्था में ये परेशानियां आपको कम महसूस होती हैं मगर 30-35 की उम्र तक समस्या घातक रूप ले सकती है।
(2) तनाव बढ़ता है
देर रात तक जागने के कारण आपके मस्तिष्क को पूरी तरह आराम नहीं मिलता है, इसलिए देर रात तक जागने वालों में मानसिक तनाव और कई बार अवसाद के भी खतरे बढ़ जाते हैं। गलत समय पर खाना, शारीरिक गतिविधियां कम करना, अच्छे से न सोना, पर्याप्त व्यायाम न करना आदि के चलते लोगों को मानसिक तनाव हो सकता है।

(3) प्रभावित होती है सेक्शुअल लाइफ

जो पुरूष देर रात तक जागते रहते हैं या काफी देर से सोते हैं उनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्‍या कम होती है और शुक्राणु जल्‍दी नष्‍ट हो जाते हैं। ज्‍यादा देर से सोने और सही तरह आराम नहीं करने से शरीर में एंटीस्पर्म एंटीबॉडी का लेवल बढ़ता है, यह एक प्रोटीन है जो इम्यून सिस्टम में बनता है और स्वस्थ शूकाणुओं को खत्म करता है।
(4) डायबिटीज का खतरा
देर रात तक जागने के कारण शरीर में हॉर्मोन्स का स्तर बिगड़ जाता है। इसलिए हार्मोन्स की गड़बड़ी से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें डायबिटीज सबसे प्रमुख है। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, दिल से संबंधित रोग एवं मोटापा जैसी कई बीमारियां तेजी से बढ़ती हैं। दिनचर्या के नियमित नहीं हो पाने के कारण लोगों में नींद से संबंधित बीमारी ‘स्लीप ऐपनिया’ काफी बढ़ रही है। जिसमें नींद के दौरान सांस में रुकावट पैदा होती है और कई बार यह घातक भी हो सकती है।
(5) इम्यूनिटी होती है कमजोर
देर रात तक जागने वालों की इम्यूनिटी पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता के प्रभावित होने से व्यक्ति वायरस, बैक्टीरिया और रोगों की चपेट में आसानी से आ जाता है। ऐसे व्यक्ति में धीरे-धीरे कई बीमारियां घर कर जाती हैं। इसलिए सही समय पर सोना और जागना जरूरी है।plz like and Share 🎉🎉🎉💐💐

💐💐Dr⚕️Kidney 💐💐🙏Plz like and Share नई दिल्ली, जेएनएन। देश की राजधानी के एक निजी होम्योपैथिक अस्पताल के डॉक्टरों ने अपने ...
05/04/2019

💐💐Dr⚕️Kidney 💐💐🙏Plz like and Share
नई दिल्ली, जेएनएन। देश की राजधानी के एक निजी होम्योपैथिक अस्पताल के डॉक्टरों ने अपने दो अलग-अलग शोध में यह दावा किया है कि होम्योपैथी किडनी रोग व हाइपोथायरॉयडिज्म के इलाज में असरदार है। किडनी खराबी की बीमारी यदि शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए तो होम्योपैथी से 50 फीसद मरीजों की किडनी ठीक हो सकती है।
वहीं होम्योपैथिक दवाएं हाइपोथायरॉयडिज्म से पीड़ित करीब एक तिहाई मरीजों पर भी असरदार हैं। डॉ. कल्याण बनर्जी क्लीनिक के डॉ. कौशल बनर्जी ने कहा कि हाइपोथायरॉयडिज्म से पीड़ित 2083 मरीजों व क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) से पीड़ित 61 मरीजों पर यह शोध किए गए। हाइपोथायरॉयडिज्म से पीड़ित मरीजों को इलाज के दौरान चार माह से 24 माह तक फालोअप किया गया।
इस दौरान यह पाया गया कि 35 फीसद मरीजों को इलाज से फायदा हुआ। यदि ये मरीज जीवनशैली व खानपान संतुलित रखें तो उन्हें दोबारा दवा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सीकेडी से पीड़ित ज्यादातर मरीजों की किडनी 60 फीसद तक खराबी हो चुकी थी। चौथी बार क्लीनिक आने के बाद उनमें से करीब 50 मरीजों के क्रिएटिनिन स्तर में सुधार हुआ। इन मरीजों को तीन से छह माह तक फालोअप किया गया। अब इन दोनों शोधों को जल्द ही मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।
यहां पर बता दें कि किडनी शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। किडनी रक्त में मौजूद पानी और व्यर्थ पदार्थों को अलग करने का काम करती है। इसके अलावा शरीर में रासायनिक पदार्थों का संतुलन, हॉर्मोन्स छोड़ना, रक्तचाप नियंत्रित करने में भी सहायता प्रदान करती है। बदलती लाइफस्टाइल व काम के बढ़ते दबाव के कारण लोग जंकफूड व फास्ट फूड का सेवन ज्यादा करने लगे हैं। इसी वजह से लोगों की खाने की प्लेट से स्वस्थ व पौष्टिक आहार गायब होते जा रहें हैं। किडनी के रोगों को दूर करने के लिए कुछ प्राकृतिक उपायों की मदद लेना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसे ही कुछ खास उपाय लेकर आए हैं हम आपके लिए।
# #किडनी की बीमारी के कारण # #
हर साल किडनी की बीमारी के चलते लाखों लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। लेकिन सबसे खतरनाक बात यह है कि अधिकतर लोगों को इसकी जानकारी तब होती है जब बहुत देर हो चुकी होती है। दरअसल किडनी की बीमारी के लक्षण उस वक्त उभरकर सामने आते हैं, जब किडनी 60 से 65 प्रतिशत डैमेज हो चुकी होती है। इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। इसलिए समय रहते इसके लक्षणों की पहचान किया जाना बहुत जरूरी होता है।
किडनी शरीर का एक ऐसा अंग होता है जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को छानकर यूरीन के माध्‍यम से शरीर से बाहर निकालता है। लेकिन डायबिटीज जैसी बीमारियों, खराब जीवनशैली और कुछ दवाओं के कारण किडनी के ऊपर बुरा प्रभाव पड़ता है।
डायबिटीज और ब्लड प्रेशर किडनी फेल होने के सबसे बड़े कारण हैं। डायबिटीज के 30 से 40 प्रतिशत मरीजों की किडनी खराब होती है। इनमें से 50 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें बहुत देर से इस बीमारी का पता चलता है और फिर उन्हें डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट करवाना पड़ता है।
कम पानी पीना
पानी हमारे शरीर की जरुरत है। पानी कम पीने से किडनी पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। किडनी खून साफ करती है और खराब चीजों को शरीर से अलग करती है जिसमें पानी की बड़ी भूमिका है। अगर आप पानी कम पियेंगे तो टॉकिन्स छनने के बजाय आपके शरीर में इकट्ठा होने शुरू हो जाएंगे।
अधिक नमक का सेवन
कुछ लोग जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन करते हैं। शायद वो नहीं जानते कि उनकी ये आदत उनकी किडनी की सेहत पर कितनी भारी पड़ सकती है। अधिक नमक लेने से शरीर में सोडियम बढ़ता है जिससे ब्लड प्रेशर प्रभावित होता है। इससे किडनी पर बल पड़ता है। इसलिए दिन में 5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन न करें।
यूरीन को रोकना
कुछ लोगों की आदत होती है कि वो यूरीन या पेशाब को रोक कर रखते हैं। यूरीन या पेशाब के प्रैशर को रोकना भी किडनी से संबंधित समस्याओं को बढ़ा देता है। इस गलत आदत से किडनी में पत्थरी या किडनी फेल होने जैसी दिक्कत भी हो जाती है।
कम नींद लेना
जरूरत से कम नींद लेने से भी किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। नींद के दौरान किडनी की कोशिकाओं में पहुंचने वाली क्षति की भरपाई होती है। नींद न लेने से मेटाबॉलिज्म भी प्रभावित होता है और किडनी फिट नहीं रहती। इसलिए कोशिश करें कि भरपूर नींद लें।

🤔🙄Dr Kidney 🙄🤔🙏🙏अगर आप अपनी अंदरूनी सेहत के बारे में जानना चाहते हैं, तो साल में कम से कम एक बार ये 5 ब्लड टेस्ट जरूर कर...
28/03/2019

🤔🙄Dr Kidney 🙄🤔🙏🙏
अगर आप अपनी अंदरूनी सेहत के बारे में जानना चाहते हैं, तो साल में कम से कम एक बार ये 5 ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं। इन टेस्ट्स के द्वारा बीमारियों का सही समय पर पता लग जाने पर इलाज और रोकथाम बहुत आसान हो जाती है। जानिए वे कौन-से टेस्ट है जो आपकी सेहत का अंदाजा लगा सकते हैं।
(1)लिपिड प्रोफाइल🤔
लिपिड प्रोफाइल से आप शरीर में कोलेस्ट्रॉल की जांच करवा सकते हैं। आमतौर पर लिपिड प्रोफाइल में 4 तरह के टेस्ट शामिल होते हैं- टोटल कोलेस्ट्रॉल, हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन (HDL या गुड कोलेस्ट्रॉल), लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL या बैड कोलेस्ट्रॉल) और ट्राईग्लिसराइड्स। इन सब जांचो के द्वारा आप जान पाएंगे कि आपका दिल कितना हेल्दी है। इस टेस्ट में एडीएल के साइज और उनके पार्टिकल्स के बारे में पता लगाया जाता है। एचडीएल को हाई डेंसिटी लीपोप्रोटीन कहते हैं। इसकी कमी से दिल की बीमारी होने का खतरा रहता है।
(2) थायराइड पैनल🤔
थायराइड एक साइलेंट किलर है और ये बीमारी महिला और पुरुष दोनों को हो सकती है। इसलिए थायराइड टेस्ट जरूरी है। थायराइड हमारे शरीर में महत्वपूर्ण हार्मोन्स के स्राव में मदद करता है। आपको हर साल थायराइड टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। अगर आपको थायराइड से जुड़ी बीमारी नहीं भी है, तो भी इस टेस्ट से आपको अपनी सेहत के बारे में जरूरी बातें पता लगेंगी।
(3)किडनी फंक्शन टेस्ट🤔
किडनी फंक्शन टेस्ट इसलिए किया जाता है, ताकि ये पता लगाया सके कि आपकी किडनी सही काम कर रही हैं या नहीं। किडनी फंक्शन टेस्ट में दो प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं, जिन्हें ACR (एल्बुमिन टू क्रिएटिनिन रेशियो) और GFR (ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट) कहते हैं। ACR टेस्ट में आपके यूरिन की जांच की जाती है जबकि GFR टेस्ट में आपके खून में क्रिएटिनिन नाम के तत्व की जांच की जाती है। GFR टेस्ट में मिले क्रिएटिनिन की मात्रा के आधार पर ही ये पता लगाया जाता है कि आपकी किडनियां कितनी ठीक तरह काम कर रही हैं।
(4)हीमोग्लोबिन A1C टेस्ट🤔
A1C द्वारा आपके शरीर में ग्लूकोज के पिछले 3 महीने के स्तर का पता लगाया जा सकता है। अगर आप इस टेस्ट को हर साल करवाते हैं, तो आप डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी से बच सकते हैं।
(5)सीबीसी टेस्ट🤔
सीबीसी यानी कम्प्लीट ब्लड काउंट टेस्ट द्वारा आपको लिवर, हार्ट और किडनी के बारे में पता चलता है। इस जांच में व्‍यक्ति के खून में मौजूद सेल्स की जांच की जाती है। अगर किसी व्‍यक्ति के खून में रक्‍त कण कम या ज्यादा हैं तो उसे स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी समस्‍या हो सकती है।🙏🙏🙏Plz like and Share..... Dr Kidney's page and post... 🙏🙏🙏

🤔🤔Dr Kidney 🙄🙄गुर्दे की बीमारी (Kidney Disease) के कई शारीरिक लक्षण हैं, लेकिन कभी-कभी लोग उन्हें अन्य स्थितियों के लिए ...
27/03/2019

🤔🤔Dr Kidney 🙄🙄
गुर्दे की बीमारी (Kidney Disease) के कई शारीरिक लक्षण हैं, लेकिन कभी-कभी लोग उन्हें अन्य स्थितियों के लिए जिम्मेदार मानते हैं। इसके अलावा, गुर्दे की बीमारी वाले लोग कई चरणों के बाद लक्षणों का अनुभव करते हैं। जब गुर्दे खराब होने लगते हैं या मूत्र में बड़ी मात्रा में प्रोटीन बनने लगते हैं तो यह क्रोनिक किडनी रोग का कारण महज कुछ ही लोगों को पता चल पाता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपको गुर्दे की बीमारी है या नहीं, यह जानने का एकमात्र तरीका है। यहां 7 संभावित संकेत बताए गए हैं, जो किडनी रोग की ओर इशारा करती है। यदि आपको उच्च रक्तचाप, मधुमेह, किडनी की विफलता का पारिवारिक इतिहास रहा है या 60 वर्ष से अधिक आयु के कारण गुर्दे की बीमारी का खतरा है, तो किडनी की बीमारी को जानने के लिए हर साल परीक्षण कराना महत्वपूर्ण है।
किडनी फेल होने के संकेत हैं झागदार पेशाब होना, जानें इसकी वजह
किडनी फेल होने के संकेत हैं झागदार पेशाब होना, जानें इसकी वजह
QUICK BITES
किडनी की बीमारी को जानने के लिए हर साल परीक्षण कराना महत्वपूर्ण है।
गुर्दे की बीमारी वाले लोग कई चरणों के बाद लक्षणों का अनुभव करते हैं।
जब गुर्दे खराब होने लगते हैं या मूत्र में बड़ी मात्रा में प्रोटीन बनने लगते हैं!

गुर्दे की बीमारी (Kidney Disease) के कई शारीरिक लक्षण हैं, लेकिन कभी-कभी लोग उन्हें अन्य स्थितियों के लिए जिम्मेदार मानते हैं। इसके अलावा, गुर्दे की बीमारी वाले लोग कई चरणों के बाद लक्षणों का अनुभव करते हैं। जब गुर्दे खराब होने लगते हैं या मूत्र में बड़ी मात्रा में प्रोटीन बनने लगते हैं तो यह क्रोनिक किडनी रोग का कारण महज कुछ ही लोगों को पता चल पाता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपको गुर्दे की बीमारी है या नहीं, यह जानने का एकमात्र तरीका है। यहां 7 संभावित संकेत बताए गए हैं, जो किडनी रोग की ओर इशारा करती है। यदि आपको उच्च रक्तचाप, मधुमेह, किडनी की विफलता का पारिवारिक इतिहास रहा है या 60 वर्ष से अधिक आयु के कारण गुर्दे की बीमारी का खतरा है, तो किडनी की बीमारी को जानने के लिए हर साल परीक्षण कराना महत्वपूर्ण है।

Kidney-diseases

थकान
गुर्दे के कार्य में कमी से रक्त में विषाक्त पदार्थों और अशुद्धियों का निर्माण हो सकता है। यह लोगों को थका हुआ, कमजोर महसूस करने का कारण बन सकता है। इससे ध्यान केंद्रित करना कठिन हो सकता है। गुर्दे की बीमारी की एक और जटिलता एनीमिया है, जो कमजोरी और थकान का कारण बन सकती है।

नींद की समस्‍या
जब गुर्दे ठीक से फ़िल्टर नहीं होते हैं, तो टॉक्सिन मूत्र के माध्यम से शरीर को छोड़ने के बजाय रक्त में रह जाते हैं। इससे नींद आना मुश्किल हो सकता है। मोटापा और क्रोनिक किडनी रोग के बीच एक कड़ी भी है, और क्रोनिक किडनी रोग वाले लोगों में स्लीप एपनिया सामान्य जनसंख्या के साथ तुलना में अधिक आम है।

शुष्‍क त्‍वचा और खुजली
स्वस्थ गुर्दे कई महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। वे आपके शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालते हैं, लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने में मदद करते हैं, हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं और आपके रक्त में खनिजों की सही मात्रा को बनाए रखने के लिए काम करते हैं। शुष्‍क और खुजली वाली त्वचा हड्डी की बीमारी का संकेत हो सकती है जो अक्सर गुर्दे की बीमारी के साथ होती है।

अधिक बार पेशाब करने की आवश्यकता महसूस होना
यदि आपको अधिक बार पेशाब करने की आवश्यकता महसूस होती है, खासकर रात में, तो यह गुर्दे की बीमारी का संकेत हो सकता है। जब गुर्दे के फिल्टर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो यह पेशाब करने की इच्छा में वृद्धि का कारण बन सकता है। कभी-कभी यह पुरुषों में एक मूत्र संक्रमण या बढ़े हुए प्रोस्टेट का संकेत भी हो सकता है।

आप अपने मूत्र में रक्त देखते हैं।
स्वस्थ गुर्दे आमतौर पर रक्त को छानते हैं तो रक्‍त कोशिकाओं को शरीर में ही रखते हैं, लेकिन जब गुर्दे के फ़िल्टर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो ये रक्त कोशिकाएं मूत्र में "रिसाव" करना शुरू कर सकती हैं। गुर्दे की बीमारी का संकेत देने के अलावा, मूत्र में रक्त ट्यूमर, गुर्दे की पथरी या संक्रमण का संकेत हो सकता है।
मूत्र झागदार हो
मूत्र में अत्यधिक बुलबुले- विशेष रूप जब आप दूर खड़े होकर पेशाब करते हैं तो कई बार फ्लश करने की आवश्यकता होती है- यह मूत्र में प्रोटीन को इंगित करते हैं। यह झाग आपको दिखने वाले झाग की तरह लग सकता है जैसे कि अपब आप अंडे को फोड़ते हैं।
एडियों और पैरों में सूजन
गुर्दे की कमी के कारण सोडियम रिटेंशन हो सकता है, जिससे आपके पैरों और टखनों में सूजन हो सकती है। निचले छोरों में सूजन दिल की बीमारी, यकृत की बीमारी और पुरानी पैर की नसों की समस्याओं का संकेत भी हो सकता है।

अगर आपको भी शरीर में उपरोक्‍त लक्षण दिखाई दें तो डॉक्‍टर की सलाह लें। 🙏🙏Plz like and Share 🙏🙏Dr Kidney's page and post plz 💐💐💐👍Thank you so much....

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