Tap Seva Sumiran Samarpan's Manas Yog Sadhana Parivaar

Tap Seva Sumiran Samarpan's Manas Yog Sadhana Parivaar Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Tap Seva Sumiran Samarpan's Manas Yog Sadhana Parivaar, Alternative & holistic health service, Mumbai/Surat, Mumbai.

बिना दवा के स्वस्थ जीवन की ओर...
भारतीय जीवनशैली से करें शरीर, मन व आत्मा का संतुलन...
तप-सेवा-सुमिरन-समर्पण की मानस योग साधना परिवार के साथ जुड़िए और करें
स्वस्थ, शांत व संतुलित जीवन की शुरुआत
🙏 मस्कार सभी को,
मेरा नाम डॉ. भरत सोलंकी है। मैं पिछले 10 वर्षों से होलिस्टिक हेल्थ और वेलनेस के क्षेत्र में कार्य कर रहा हूँ।

मेरी विशेषता यह है कि मैं लोगों को बिना दवा के स्वास्थ्य, खुशी और सफलता की ओर मार्गदर्शन करता हूँ। मेरा विश्वास है कि सही लाइफ़स्टाइल, अनुशासित आदतें और सकारात्मक सोच ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य की असली कुंजी हैं।

व्यक्तिगत रूप से मैं शाकाहारी जीवनशैली अपनाता हूँ और सीज़नल, रीजनल और नैचुरल भोजन पर ज़ोर देता हूँ।

मेरा मिशन है—
“मेरा स्वास्थ्य, मेरी ज़िम्मेदारी।”

मैं आप सभी से सीखने, जुड़ने और सहयोग करने के लिए उत्सुक हूँ।

धन्यवाद।

गुस्सा केवल एक भाव नहीं है, यह शरीर में उठने वाला रासायनिक तूफ़ान है। जब हम अधिक क्रोधित होते हैं, तो शरीर तुरंत “संकट” ...
15/02/2026

गुस्सा केवल एक भाव नहीं है, यह शरीर में उठने वाला रासायनिक तूफ़ान है। जब हम अधिक क्रोधित होते हैं, तो शरीर तुरंत “संकट” की अवस्था में चला जाता है। एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं। हृदय की धड़कन तेज हो जाती है, रक्त्तचाप ऊपर चढ़ता है और दिमाग की नसों पर अतिरिक्त्त दबाव पड़ता है।

बार-बार या अत्यधिक गुस्सा करने से नसों में सिकुड़न (vasoconstriction) और रक्त्त प्रवाह में असंतुलन पैदा हो सकता है। यही स्थिति लंबे समय में सिरदर्द, माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर, और गंभीर मामलों में ब्रेन हेमरेज जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। लगातार तनाव की स्थिति शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी कमजोर कर देती है, जिससे संक्रमण और अन्य रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

क्रोध के समय मांसपेशियाँ अकड़ जाती हैं, इसलिए गर्दन, कंधे और शरीर में दर्द महसूस होता है। यदि यह आदत बन जाए तो मानसिक शांति और निर्णय क्षमता भी प्रभावित होती है।

इसलिए गुस्से को दबाना नहीं, समझना और साधना आवश्यक है। गहरी श्वास, थोड़ी देर मौन, ध्यान, और क्षमा का अभ्यास—ये सब दिमाग की नसों को शांति देते हैं। याद रखिए, क्षणिक क्रोध के कारण स्थायी स्वास्थ्य न खो दें। शांति ही सबसे बड़ी औषधि है।
भरत सोलंकी 098217 55832
मानस आरोग्य | तप-सेवा-सुमिरन-समर्पण

मेरा स्वास्थ्य, मेरी पहली प्राथमिकता (भाग-4)​विषय: कितना खाना? पेट का माप और संयम का विज्ञान​1️⃣ मुख्य बिंदु (The Insigh...
15/02/2026

मेरा स्वास्थ्य, मेरी पहली प्राथमिकता (भाग-4)

​विषय: कितना खाना? पेट का माप और संयम का विज्ञान

​1️⃣ मुख्य बिंदु (The Insight)

कल तक हमने समझा कि 'क्या' और 'कब' खाना चाहिए। लेकिन आज का विषय सबसे महत्वपूर्ण है—कितना खाना?
हमारे बाप-दादा कहते थे कि "आधा पेट भोजन, चौथाई पानी और चौथाई हवा के लिए खाली छोड़ना चाहिए।" लेकिन आज हमारी थाली में विविधता इतनी बढ़ गई है कि हम 'पेट' भरने के लिए नहीं, बल्कि 'मन' भरने के लिए खाने लगे हैं।

​2️⃣ पशु-पक्षियों से सीख (The Natural Law)

जंगल के जीवों को देखिए, उनके सामने भले ही भोजन का ढेर लगा हो, लेकिन जैसे ही उनकी शारीरिक ज़रूरत पूरी होती है, वे तुरंत वहां से हट जाते हैं। उन्हें कोई 'लालच' नहीं होता कि "थोड़ा और खा लेता हूँ, कल मिले न मिले।" कुदरत ने उन्हें एक 'सेंसर' दिया है जो उन्हें रुकने का संकेत देता है। इसी अनुशासन के कारण वे कभी मोटापे या अपच का शिकार नहीं होते।

​3️⃣ हमारी भूल (The Human Mistake)

हमारा दिन शुरू होता है चाय-नाश्ते की भारी वैरायटी से— गाठिया, फाफड़ा, खमण, परांठे। इसके बाद लंच, फिर स्नैक्स, फिर डिनर और फिर देर रात का खाना। खासकर शादियों और पार्टियों में तो हम अपनी सीमाएं ही भूल जाते हैं।
हम तब तक नहीं रुकते जब तक पेट भारी न हो जाए।

​सत्य: जरूरत से ज्यादा खाया गया भोजन शरीर के लिए 'शक्त्ति नहीं, बल्कि 'बोझ' बन जाता है। जो भोजन पच नहीं पाता, वह शरीर में सड़ता है और बीमारियों को जन्म देता है।

​4️⃣ समाधान (The Solution)

​थोड़ी भूख बचाकर रखें: हमेशा भूख से थोड़ा कम खाएं। इससे आपके अंगों ( जठर, पेट) को भोजन पचाने के लिए जगह मिलती है।

​भोजन को चबाएं: जब आप धीरे-धीरे चालीस बार चबा चबाकर खाते हैं, तो दिमाग को 'पेट भर गया' का संकेत समय पर मिल जाता है।

​मौके की तलाश छोड़ें: स्वाद के लिए नहीं, बल्कि जीवित रहने और स्वस्थ रहने के लिए खाएं।

​5️⃣ निष्कर्ष (Conclusion)

साधक मित्रों, यदि हम इन ३ मूल मंत्रों—क्या, कब और कितना—को अपने जीवन में उतार लें, तो हम कभी बीमार नहीं पड़ेंगे। कुदरत का यह सरल सा विज्ञान ही निरोगी काया की असली कुंजी है।

अब ​अगला कदम आपका:
अपनी राय साझा करें (Share Your Thoughts):
"मित्रों, क्या आप भी स्वाद के चक्कर में अक्सर जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं? कमेंट में 'हां' लिखें और बताएं कि क्या आपने कभी महसूस किया है कि कम खाने से शरीर में ज्यादा स्फूर्ति रहती है?"

एक छोटा संकल्प (Take a Challenge):

"आज से एक नियम बनाएं— 'जब पेट भरे, तब हाथ रुके'।
क्या आप आज अपनी भूख से सिर्फ 2 निवाला कम खाने का संकल्प लेंगे?
अपनी सहमति के लिए 'मैं तैयार हूँ' कमेंट करें।"

​अपनों की चिंता (Tag & Share):

"इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने उन मित्रों और परिवार के सदस्यों के साथ Share करें जो अक्सर पेट की समस्याओं से परेशान रहते हैं। आपका एक शेयर किसी के स्वास्थ्य की दिशा बदल सकता है!"

अब तक हमने भोजन के नियमों को समझा। लेकिन "रोग क्या है और क्यों होता है?" यह एक बहुत बड़ा रहस्य है। इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे अगली पोस्ट में।

​• पहला सुख निरोगी काया
• मेरा स्वास्थ्य मेरी ज़िम्मेदारी
• स्वस्थ शरीर, स्वस्थ परिवार, स्वस्थ गांव, स्वस्थ शहर, स्वस्थ राष्ट्र
​डॉ. भरत सोलंकी: 9821755832
डॉ. हेमांगी सोलंकी: 9870392277
मानस आरोग्य | तप-सेवा-सुमिरन-समर्पण


#स्वस्थ_भारत #प्राकृतिक_चिकित्सा #मानस_योग #तपसेवासुमिरनसमर्पण ेवा_सुमिरन #मितहार

ऐसा मनुष्य बनो — जिसकी जेब में पैसा हो, ताकि वह स्वयं सम्मानपूर्वक जी सके और आवश्यकता पड़ने पर दूसरों की मदद कर सके। धन ...
14/02/2026

ऐसा मनुष्य बनो —
जिसकी जेब में पैसा हो, ताकि वह स्वयं सम्मानपूर्वक जी सके और आवश्यकता पड़ने पर दूसरों की मदद कर सके। धन बुरा नहीं है; धन का दुरुपयोग बुरा है। जब पैसा साधन बनता है, तब समाज में सेवा का मार्ग खुलता है।

मन में ज्ञान हो —
क्योंकि बिना ज्ञान के धन भी दिशा नहीं देता। ज्ञान हमें विवेक देता है, सही-गलत का बोध कराता है और जीवन को संतुलित बनाता है। ज्ञान ही वह दीपक है जो अंधकार में मार्ग दिखाता है।

दिल में दया हो —
क्योंकि कठोर हृदय वाला व्यक्त्ति कभी शांति नहीं पा सकता। दया ही मानवता का सबसे सुंदर आभूषण है। जब हृदय में करुणा होती है, तब हमारा व्यवहार मधुर और प्रभावशाली बनता है।

चेहरे पर आत्मविश्वास हो —
आत्मविश्वास वह शक्त्ति है जो असंभव को संभव बना देती है। यह भीतर की साधना और आत्म-विश्वास से जन्म लेता है। जो स्वयं पर विश्वास करता है, वही दुनिया में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

और आत्मा में जिम्मेदारी हो —
क्योंकि जिम्मेदारी ही जीवन को सार्थक बनाती है। अपने स्वास्थ्य, अपने परिवार, अपने समाज और अपनी आत्मिक उन्नति की जिम्मेदारी स्वयं लेना ही सच्ची साधना है।

यही है मानस योग साधना का मार्ग —
तप, सेवा, सुमिरन और समर्पण के माध्यम से सम्पूर्ण विकास।

आइए, हम केवल सफल नहीं, बल्कि सार्थक मनुष्य बनें।

डॉ. भरत सोलंकी – 9821755832
डॉ. हेमांगी सोलंकी – 9870392277
मानस आरोग्य परिवार 🌼

दौलत कमाने की दौड़ गलत नहीं है।पर अंधी दौड़ खतरनाक है।इतना भी मत भागो कि मंज़िल तक पहुँचने से पहले शरीर ही जवाब दे दे।सच...
07/02/2026

दौलत कमाने की दौड़ गलत नहीं है।
पर अंधी दौड़ खतरनाक है।

इतना भी मत भागो कि मंज़िल तक पहुँचने से पहले शरीर ही जवाब दे दे।
सच यह है कि कई लोग 50 साल मेहनत से कमाते हैं, और वही कमाई 50 दिनों की बीमारी में खर्च हो जाती है।

बीमारी जब घर में आती है, तो सिर्फ एक व्यक्ति नहीं बीमार होता — पूरा परिवार उसकी चिंता में घिर जाता है।
एक तरफ दर्द होता है, दूसरी तरफ इलाज का खर्च।
दवा अपनी जगह काम करती है, लेकिन कई बार हालात संभालने के लिए दवा से ज्यादा हिम्मत की ज़रूरत पड़ती है।

हम अक्सर भविष्य के लिए पैसा जोड़ते हैं,
पर वर्तमान में अपने स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
देर रात तक काम, अनियमित भोजन, तनाव, कम नींद —
धीरे-धीरे यही आदतें शरीर को कमजोर कर देती हैं।

स्वास्थ्य कोई लक्ज़री नहीं है।
यह हमारी पहली ज़िम्मेदारी है।

अगर हम सच में अपने परिवार से प्यार करते हैं,
तो हमें अपनी दिनचर्या सुधारनी होगी।
संतुलित भोजन, नियमित विश्राम, मानसिक शांति और अनुशासन —
यही असली सुरक्षा कवच हैं।

मेरी एक सरल प्रार्थना है —
हर ज़रूरतमंद तक तप, सेवा, सुमिरन और समर्पण पर आधारित मानस योग साधना पहुँचे।
ऐसी जीवनशैली बने जिसमें लोग पैसों की वजह से अपनों को तकलीफ़ में न देखें।

याद रखिए —
मेरा स्वास्थ्य मेरी ज़िम्मेदारी है।
स्वस्थ व्यक्ति से ही स्वस्थ परिवार बनता है।
स्वस्थ परिवार से स्वस्थ गांव।
स्वस्थ गांव से स्वस्थ शहर।
और स्वस्थ शहर से ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होता है।

आज थोड़ा रुकिए।
अपने शरीर से पूछिए —
क्या मैं तुम्हारा ख्याल रख रहा हूँ?

इसलिए एक बात दिल से समझ लीजिए —
मेरा स्वास्थ्य मेरी ज़िम्मेदारी है।
अगर मैं स्वस्थ हूँ तो मेरा परिवार सुरक्षित है।
स्वस्थ परिवार से ही स्वस्थ समाज बनता है, और वहीं से स्वस्थ राष्ट्र की नींव रखी जाती है।
तप, सेवा, सुमिरन और समर्पण पर आधारित जीवनशैली केवल आध्यात्मिक मार्ग नहीं, बल्कि संतुलित जीवन का आधार है।
ऐसी साधना जो शरीर, मन और परिवार — तीनों को साथ लेकर चलती है।
यह संदेश सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं है।
थोड़ा ठहरिए और खुद से पूछिए — क्या मैं अपने स्वास्थ्य के साथ न्याय कर रहा हूँ?
अगर यह बात आपको छू गई हो, तो कमेंट में लिखिए — “मेरा स्वास्थ्य मेरी ज़िम्मेदारी।”
इसे शेयर कीजिए ताकि किसी अपने को समय रहते समझ आ जाए।
और उस व्यक्ति को टैग कीजिए जिसे आप स्वस्थ और सुरक्षित देखना चाहते हैं।
क्योंकि बदलाव की शुरुआत यहीं से होती है — आपसे।
-भरत सोलंकी 9821755832
मानस आरोग्य
तप-सेवा-सुमिरन-समर्पण

जीवन में सबसे बड़ी ताकत तेज़ बोलना नहीं, बल्कि सही समय पर शांत रहना है। जो व्यक्त्ति हमें गुस्सा दिला देता है, वह दरअसल ...
31/01/2026

जीवन में सबसे बड़ी ताकत तेज़ बोलना नहीं, बल्कि सही समय पर शांत रहना है। जो व्यक्त्ति हमें गुस्सा दिला देता है, वह दरअसल कुछ पलों के लिए हमारे मन का रिमोट अपने हाथ में ले लेता है। उस समय हमारे शब्द, निर्णय और व्यवहार हमारे नहीं रहते — वे केवल प्रतिक्रिया बन जाते हैं, समझदारी नहीं।

उकसावे का मकसद ही यही होता है कि आप संतुलन खो दें। लेकिन जो भीतर से स्थिर है, उसे कोई बाहर वाला हिला नहीं सकता। जैसे गहरे समुद्र की तह पर शांति रहती है, चाहे ऊपर कितनी भी लहरें क्यों न उठें।

शांत रहना कमजोरी नहीं, यह आत्म-नियंत्रण की पराकाष्ठा है।
यह बताता है कि आप परिस्थिति के गुलाम नहीं,
अपने मन के स्वामी हैं।
जब आप प्रतिक्रिया देने से पहले ठहरना सीख जाते हैं,
तब आप जीवन को प्रतिक्रिया से नहीं,
सजगता से जीते हैं।

इसलिए अगली बार कोई आपको उकसाए —
तब आप मुस्कुराइए,
श्वास गहरी लीजिए,
और याद रखिए…
आपकी शांति ही आपकी असली शक्त्ति है।
भरत सोलंकी 098217 55832
#मानसआरोग्य, #तपसेवासुमिरनसमर्पण, #मानसयोग, #आंतरिकचिकित्सा, #भावनात्मकशुद्धि, #आध्यात्मिकस्वास्थ्य, #होलिस्टिकहीलिंग, #डिटॉक्सहीलिंग, #सुमिरनशक्ति, #सेवाभाव, #मनशरीरआत्मा, #प्राकृतिकआरोग्य, #हीलिंगयात्रा, , , , , Manas Arogya

क्या सेहत वाकई एक 'जंग' है?अक्सर हम स्वास्थ्य को एक लड़ाई मान लेते हैं—मन के खिलाफ, स्वाद के खिलाफ और भूख के खिलाफ। हम स...
24/01/2026

क्या सेहत वाकई एक 'जंग' है?

अक्सर हम स्वास्थ्य को एक लड़ाई मान लेते हैं—मन के खिलाफ, स्वाद के खिलाफ और भूख के खिलाफ। हम सोचते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए हमें खुद को "रोकना" पड़ेगा।

पर एक सच यह भी है: संघर्ष भोजन में नहीं, हमारे चुनाव में है।
जब हम ऐसा खाना खाते हैं जिसे हमारा शरीर पचाने के लिए नहीं बना (जैसे प्रोसेस्ड फूड या हैवी एनिमल प्रोडक्ट्स), तो शरीर उसे बाहर निकालने या संभालने में अपनी सारी ऊर्जा लगा देता है। इसीलिए हमें थकान होती है, भारीपन महसूस होता है और तब हमें 'पोर्शन कंट्रोल' की ज़रूरत पड़ती है।

स्वभाव की ओर लौटें:
जब आप सीज़नल (मौसमी), रीजनल (क्षेत्रीय) और ऑरिजनल (प्राकृतिक) भोजन करते हैं, तो शरीर को डैमेज कंट्रोल नहीं करना पड़ता। वह पोषण लेना शुरू कर देता है।

* यह भोजन आपको हाइड्रेट रखता है।

* यह पचने में इतना हल्का है कि खाने के बाद सुस्ती नहीं, ऊर्जा आती है।

* इसे "नाप-तोल" कर खाने की ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि शरीर खुद बता देता है कि उसे कितना चाहिए।

जैसे ही आप वो चीज़ें हटा देते हैं जो शरीर को बोझ लगती हैं, सेहत एक संघर्ष नहीं बल्कि आपका स्वभाव बन जाती है।

सीखें, समझें और बदलें...

मानव शरीर की वास्तविक डाइट और प्राकृतिक जीवनशैली को समझने के लिए आप मुझसे बात कर सकते हैं।

मैरा स्वास्थ्य मेरी जिम्मेदारी

भरत सोलंकी: 9821755832
मानस आरोग्य | तप-सेवा-सुमिरन-समर्पण

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Suresh Hadole, Madhuri T**e, Narayandas Sahu, Sudhakar Ja...
24/01/2026

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Suresh Hadole, Madhuri T**e, Narayandas Sahu, Sudhakar Jadhav, Mahendra Mali, विलास खेर्डे

22/01/2026

सच कड़वा है, पर सुन लो।
तुम थके हुए नहीं हो—

तुम गलत तरीके से जी रहे हो।
दिन भर स्क्रीन,
रात भर जागना,
जंक खाना,
और ऊपर से कहना—
“सब नॉर्मल है।”
❌ नहीं।
ये नॉर्मल नहीं,
ये धीमी आत्म-हत्या है।
शरीर चिल्ला रहा है—
गैस, एसिडिटी,
एंग्ज़ायटी,
फोकस ज़ीरो,
मूड स्विंग्स।
और तुम कहते हो—
“एज का इश्यू है।”
नहीं दोस्त,
ये लाइफस्टाइल की सज़ा है।
👉 आँत बिगड़ी तो दिमाग गुलाम बनता है।
👉 दिमाग गुलाम बना तो फैसले भी गुलाम होते हैं।
और फिर
तुम मोटिवेशन वीडियो देखते हो
लेकिन लाइफ नहीं बदलती।
क्योंकि
समस्या आलस नहीं है—
समस्या है जिम्मेदारी से भागना।
तप चाहिए—
डिसिप्लिन का।
सेवा चाहिए—
अपने शरीर की।
सुमिरन चाहिए—
इस बिखरे दिमाग को समेटने का।
और समर्पण चाहिए—
इस झूठ को छोड़ने का कि
“मैं यंग हूँ, मुझे कुछ नहीं होगा।”
यही है
रीयल स्ट्रॉन्ग बनना।
यही है
मानस आरोग्य।
अब सवाल सीधा है—
क्या तुम सिर्फ दिखना चाहते हो स्ट्रॉन्ग?
या सच में
अंदर से मजबूत बनना चाहते हो?
👉 अपनी स्वास्थ्य-यात्रा शुरू करने के लिए संपर्क करें
📞 भरत सोलंकी – 9821755832
👇 नीचे लिखो—
🔥 मैं तैयार हूँ
😡 मुझे चुभा
😴 बाद में देखेंगे
क्योंकि
जो आज नहीं जागा,
वह कल मजबूर होगा।
#हैशटैग्स (कॉमा के साथ):
#मानसआरोग्य, #युवा_जागो, #रीयलस्ट्रॉन्ग, #आँतऔरदिमाग, #तपसेवासुमिरनसमर्पण, #नो_एक्सक्यूज़, #डिसिप्लिनलाइफ, #फेक_फिटनेस, ीं_तो_कभी_नहीं, #यूथअवेकनिंग

20/01/2026
19/01/2026

सेवा भाव, साझा करने की शक्ति, 100 से 1000 की यात्रा, एक छोटी पहल बड़ा बदलाव, मिलकर आगे बढ़ते हुए, जागरूकता का विस्तार, सकारात्मक सोच, आत्मिक स्वास्थ्य, सही दिशा की ओर कदम ज़रूर उठाइए 🙏
---

🙏 अब आप सभी साथियों से एक छोटी-सी सेवा की आशा 🙏

यदि यह मंच आपको उपयोगी लगता है,
यदि यहाँ की बातें आपको भीतर से छूती हैं—
तो आज मुझसे नहीं,
इस विचार से जुड़ने का आग्रह है।

👉 आप में से हर व्यक्ति
सिर्फ 10 ऐसे लोगों को इस ग्रुप से जोड़ दे,
जिन्हें
स्वास्थ्य, संतुलन और सही दिशा की ज़रूरत है।

कोई दबाव नहीं,
कोई प्रचार नहीं—
बस सेवा भाव से साझा करना।

शायद आपकी एक छोटी-सी पहल
किसी के जीवन में
बड़ा बदलाव ले आए। 🌱

आपका सहयोग ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।
दिल से धन्यवाद 🙏
-भरत सोलंकी 098217 55832

🙏 आप सभी फिर से एक बार हृदय से धन्यवाद।
सेवा, विश्वास और साथ—इसी से यह यात्रा आगे बढ़ती है।
आपका सहयोग यूँ ही बना रहे 🌱

मन और शरीर का मिलन (भाग 2) : तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को शांत करने और प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को फिर स...
16/01/2026

मन और शरीर का मिलन (भाग 2) :

तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को शांत करने और प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को फिर से सक्रिय करने के लिए यहाँ कुछ बहुत ही प्रभावी और सरल तकनीकें दी गई हैं। इन्हें आप घर पर कहीं भी कर सकते हैं:

​1. योग क्रियाएं (Yoga Practices) :
​अनुलोम-विलोम प्राणायाम (Alternate Nostril Breathing): यह तंत्रिका तंत्र के दोनों हिस्सों (Sympathetic और Parasympathetic) को संतुलित करने का सबसे शक्त्तिशाली तरीका है। यह मस्तिष्क के दाएं और बाएं हिस्से में समन्वय बिठाता है, जिससे तनाव तुरंत कम होता है।
​भ्रामरी प्राणायाम (Bee Breath): नाक से सांस छोड़ते समय 'ॐ' की गूँज या मधुमक्खी जैसी आवाज़ निकालें। इसकी थिरकन (Vibration) सीधे आपके वेगस नर्व (Vagus Nerve) को सक्रिय करती है, जो शरीर को 'Relax' मोड में ले जाती है।
​बालासन (Child’s Pose): यह मुद्रा रीढ़ की हड्डी को आराम देती है और मस्तिष्क को शांत करने का संकेत देती है। यह शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करने में मदद करती है।

​2. ध्यान की तकनीकें (Meditation Techniques)
​7-4-8 श्वास तकनीक:

​7 सेकंड तक नाक से धीरे-धीरे सांस लें।
​4 सेकंड तक सांस को रोककर रखें (कुम्भक)।
​8 सेकंड तक मुंह से धीरे-धीरे सांस बाहर निकालें।

​फायदा: जब आप सांस छोड़ने का समय (Exhalation) लंबा करते हैं, तो आपका शरीर समझ जाता है कि अब कोई खतरा नहीं है और वह सुरक्षित है।
​बॉडी स्कैन मेडिटेशन (Body Scan):
अपनी आँखें बंद करें और अपना ध्यान पैर के अंगूठे से शुरू करके सिर की चोटी तक ले जाएं। हर अंग को मानसिक रूप से "ढीला छोड़ने" का निर्देश दें। यह 'आवृत्ति असंतुलन' को ठीक करने का एक प्रभावी तरीका है।

​3. वेगस नर्व को सक्रिय करने के त्वरित उपाय :

​चूँकि तंत्रिका तंत्र और प्रतिरक्षा प्रणाली का सीधा संबंध वेगस नर्व से है, आप इसे इन छोटी क्रियाओं से भी ठीक कर सकते हैं:
​ठंडे पानी के छपाके: सुबह उठकर चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मारने से तंत्रिका तंत्र को 'रीसेट' होने में मदद मिलती है।
​गार्गल (Gargling): सादे पानी से गरारे करने से गले के पीछे की नसें उत्तेजित होती हैं, जो सीधे मस्तिष्क को शांति का संदेश भेजती हैं।

​अभ्यास के लिए सुझाव:
​इन क्रियाओं को प्रतिदिन केवल 10 से 15 मिनट दें। याद रखें, आपका शरीर आपकी भावनाओं को सुनता है। अभ्यास के दौरान मन में यह दोहराएं: "मेरा तंत्रिका तंत्र शांत है, और मेरी प्रतिरक्षा प्रणाली सशक्त है।"

मन और शरीर का मिलन: (भाग 1)जब आपका तंत्रिका तंत्र आपकी रक्षा प्रणाली से बात करता है...क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम बहु...
15/01/2026

मन और शरीर का मिलन: (भाग 1)

जब आपका तंत्रिका तंत्र आपकी रक्षा प्रणाली से बात करता है...

क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम बहुत अधिक तनाव में होते हैं, तो हम जल्दी बीमार क्यों पड़ जाते हैं?
इसका उत्तर आपके तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) के बीच होने वाले निरंतर संवाद में छिपा है।

1. शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र
हमारा तंत्रिका तंत्र शरीर के "कमांड सेंटर" की तरह है। जब इस केंद्र में 'गड़बड़ी' या तनाव होता है, तो शरीर में गलत सिग्नल जाने लगते हैं। इसे आप एक ऐसे सेनापति की तरह समझ सकते हैं जो भ्रमित है; जब सेनापति ही डरा हुआ या भ्रमित होगा, तो उसकी सेना (प्रतिरक्षा प्रणाली) यह तय नहीं कर पाएगी कि असली दुश्मन कौन है।

2. भ्रम और स्व-हमला (Autoimmune Issue)
जब तंत्रिका तंत्र असंतुलित होता है, तो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली "स्वयं" और "बाहरी तत्व" के बीच का अंतर भूल जाती है। परिणामस्वरुप, वह हमारे अपने स्वस्थ अंगों पर ही हमला करने लगती है, जिसे विज्ञान की भाषा में Autoimmune Disease कहा जाता है। यह केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं, बल्कि शरीर के भीतर पैदा हुआ एक 'संचार संकट' (Communication Breakdown) है।

3. आवृत्ति (Frequency) का खेल
हर जीवित कोशिका की अपनी एक ऊर्जा और आवृत्ति होती है। नकारात्मक विचार, गहरा तनाव और अनियंत्रित जीवनशैली इस आवृत्ति को बिगाड़ देते हैं। जिसे हम 'बीमारी' कहते हैं, वह वास्तव में इसी आवृत्ति का असंतुलन (Frequency Imbalance) है। जब आप अपने तंत्रिका तंत्र को शांत और नियंत्रित करते हैं, तो आप शरीर की स्वाभाविक लय को वापस लाते हैं।

4. समाधान: पुनः संतुलन की ओर
अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को फिर से "स्मार्ट" बनाने के लिए आपको अपने तंत्रिका तंत्र पर काम करना होगा। इसके लिए कुछ सरल कदम उठाए जा सकते हैं:
* गहरी सांस लेना और ध्यान: यह सीधे तौर पर आपके 'वेगस नर्व' को शांत करता है।
* प्रकृति से जुड़ाव: मिट्टी और धूप के संपर्क में आने से शरीर की 'इलेक्ट्रिकल ट्यूनिंग' बेहतर होती है।
* सकारात्मक सोच: विचार ही वे तरंगें हैं जो तंत्रिका तंत्र को निर्देश देती हैं।
> निष्कर्ष: आपका शरीर युद्ध का मैदान नहीं, बल्कि एक सुंदर सामंजस्य है। जब आप अपने भीतर की शांति (तंत्रिका तंत्र) को खोज लेते हैं, तो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली स्वतः ही आपकी सुरक्षा के लिए ढाल बनकर खड़ी हो जाती है। स्वस्थ मन ही स्वस्थ तन की पहली शर्त है।
>
इस विषय पर आधारित कुछ विशिष्ट योग क्रियाएं या ध्यान की तकनीकें कल की पोस्ट में साझा करूंगा... (भाग -2)
जो तंत्रिका तंत्र को तुरंत शांत करने में मदद करती हैं?
-भरत सोलंकी 098217 55832
मानस आरोग्य
तप-सेवा-सुमिरन-समर्पण

Address

Mumbai/Surat
Mumbai
400057

Website

https://linktr.ee/DrBharatSolanki

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Tap Seva Sumiran Samarpan's Manas Yog Sadhana Parivaar posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Share on Facebook Share on Twitter Share on LinkedIn
Share on Pinterest Share on Reddit Share via Email
Share on WhatsApp Share on Instagram Share on Telegram