15/02/2026
गुस्सा केवल एक भाव नहीं है, यह शरीर में उठने वाला रासायनिक तूफ़ान है। जब हम अधिक क्रोधित होते हैं, तो शरीर तुरंत “संकट” की अवस्था में चला जाता है। एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं। हृदय की धड़कन तेज हो जाती है, रक्त्तचाप ऊपर चढ़ता है और दिमाग की नसों पर अतिरिक्त्त दबाव पड़ता है।
बार-बार या अत्यधिक गुस्सा करने से नसों में सिकुड़न (vasoconstriction) और रक्त्त प्रवाह में असंतुलन पैदा हो सकता है। यही स्थिति लंबे समय में सिरदर्द, माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर, और गंभीर मामलों में ब्रेन हेमरेज जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। लगातार तनाव की स्थिति शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी कमजोर कर देती है, जिससे संक्रमण और अन्य रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
क्रोध के समय मांसपेशियाँ अकड़ जाती हैं, इसलिए गर्दन, कंधे और शरीर में दर्द महसूस होता है। यदि यह आदत बन जाए तो मानसिक शांति और निर्णय क्षमता भी प्रभावित होती है।
इसलिए गुस्से को दबाना नहीं, समझना और साधना आवश्यक है। गहरी श्वास, थोड़ी देर मौन, ध्यान, और क्षमा का अभ्यास—ये सब दिमाग की नसों को शांति देते हैं। याद रखिए, क्षणिक क्रोध के कारण स्थायी स्वास्थ्य न खो दें। शांति ही सबसे बड़ी औषधि है।
भरत सोलंकी 098217 55832
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