20/04/2026
सूरज को देखो दुपहरिया
कितनी गर्मी है,
लेकिन सुबहो शाम में देखो
कितनी नरमी है।
वक्त का पहिया घूमता है तो
सूरज भी परिवर्तन लाता,
फिर तू मूरख अपने में न
क्यों सूरज सा दर्शन लाता।
समय से बड़ा न कोई होता,
चाहे कोई हो इंसान,
सीख नहीं जो समय से लेता,
उससे बड़ा नहीं नादान।
रे मानव तू कुछ भी नहीं है,
मत कर तू खुद पर अभिमान,
वक्त से बड़ा नहीं कोई है,
वक्त से बड़ा न कोई महान।
स्वरचित डॉ विजय कुमार पाठक
ग्राम+पोस्ट रैनी,ढोली मुजफ्फरपुर।
मोबाइल 8228041752