Go Vigyan Anusandhan Kendra

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डॉ राजपालसिंह जी कश्यपनिदेशक (अनुसंधान), CIIMSक्षयरोग (TB) आज भी एक वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है. जो दवा प्रतिरोध...
14/01/2026

डॉ राजपालसिंह जी कश्यप

निदेशक (अनुसंधान), CIIMS

क्षयरोग (TB) आज भी एक वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है. जो दवा प्रतिरोध (ड्रग रेज़िस्टेंस) तथा वर्तमान उपचारों जैसे आइसोनियाज़िड और रिफैम्पिसिन की सीमाओं के कारण और अधिक जटिल हो गया है। इन उपचारों में विषाक्तता, लंबे समय तक चलने वाली चिकित्सा अवधि तथा रोगियों द्वारा उपचार का समुचित पालन न कर पाना जैसी समस्याएँ जुड़ी रहती हैं। आयुर्वेदिक औषधि के रूप में प्रयुक्त गोमूत्र अर्क (Cow Urine Distillate -CUD) ने विभिन्न अध्ययनों में दवाओं के अवशोषण और उपचारात्मक प्रभाव को बढ़ाने वाले जैव-वर्धक (बायो-एन्हांसर) गुण प्रदर्शित किए हैं।

CIIMS Central india institute of Medical Sciences, Nagpur एवं गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र के सहयोग से, क्षयरोग (टीबी) की औषधियों के लिए गोमूत्र अर्क (Cow Urine Distillate) को जैव-वर्धक के रूप में विकसित करने हेतु AYUSHआयुष मंत्रालय-वित्तपोषित एक परियोजना का क्रियान्वयन कर रहा है। यह अध्ययन आइसोनियाज़िड और रिफैम्पिसिन के साथ CUD के जैव-वर्धक प्रभावों का मूल्यांकन करने का उ‌द्देश्य रखता है। इस अध्ययन में इन संयोजनों की सुरक्षा एवं प्रभावकारिता का मूल्यांकन इन विट्रोतथा इन विवोप्रयोगों के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें दवा की जैवउपलब्धता, जीवाणु उन्मूलन तथा विषाक्तता में कमी जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। न्यूनतम अवरोधक सांद्रता (MIC) स्थापित करने के लिए क्रमिक पतलीकरण तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। MTB या M. bovis BCG संस्कृतियों का प्रयोग करते हुए दवाओं की जैवउपलब्धता तथा अंतः कोशिकीय गतिविधि पर CUD के प्रभाव का परीक्षण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त भी अनेक आकलन एवं परीक्षण किए जाएंगे एवं सांख्यिकीय विश्लेषण द्वारा प्राप्त परिणामों की प्रामाणिकता स्थापित की जाएगी।

Tuberculosis

यह अपेक्षित है कि आइसोनियाज़िड और रिफैम्पिसिन के साथ CUD का संयोजन जीवाणुरोधी गतिविधि को बढ़ाएगा, MIC मानों को कम करेगा तथा दवाओं की जैवउपलब्धता में सुधार करेगा। साथ ही, यह संयोजन कम विषाक्तता प्रदर्शित करेगा, जिससे टीबी का उपचार अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बन सकता है। यह अध्ययन एंटी-टीबी दवाओं के लिए CUD को एक जैव-वर्धक के रूप में वैज्ञानिक मान्यता प्रदान करने का प्रयास करता है, जिससे सहायक (एडजंक्ट) उपचारों के नए मार्ग खुलेंगे, टीबी उपचार की प्रभावशीलता और सुलभता बढ़ेगी तथा दवा-प्रतिरोधी उपभेदों से निपटने में सहायता मिलेगी।

CIIMS के डॉ राजपालसिंह कश्यप, निदेशक (अनुसंधान) के नेतृत्व में कार्यरत 7 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम को लगभग दो वर्षों के सतत कार्य के उपरांत उत्साहवर्धक परिणाम प्राप्त हुए हैं. साथ ही कुछ ऐसे वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक (ट्रांसलेशनल) पक्ष भी सामने आए हैं, जिन पर विशेषज्ञ स्तर पर विमर्श किया जाना आवश्यक है। इस कार्य को अगले स्तर तक ले जाने तथा इसके सामाजिक प्रभाव को और अधिक व्यापक बनाने के उद्देश्य से फरवरी मार्च 2026 में, गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र देवलापार के श्याम सभागार में, एक विचार-मंथन सत्र आयोजित कर रहे हैं। गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र के अध्यक्ष पदमेश जी गुप्ता ने इस अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं सम्पूर्ण देश ही नहीं विश्व हेतु उपयोगी अनुसंधान कार्य की अनुसंधान टीम में वैद्य नंदिनी भोजराज एवं अनुसंधान समन्वयक के दायित्व में डॉ मनोज तत्त्वादी नामित किए हैं.

14/01/2026

गो विज्ञान हृदय से RBU यूनिवर्सिटी के प्रणेता पूज्य बाबूजी बनवारीलाल जी पुरोहित, चेयरमैन सत्यनारायण जी नुवाल, राजेन्द्र जी पुरोहित सहित RBU के सभी पदाधिकारियों एवं सम्पूर्ण RBU परिवार का आभारी है।

वृषभ — जो धर्म, बल और नंदी का प्रतीक है — आज केवल कसाईखानों तक सीमित कर दिया गया है। यह हमारे समाज के लिए एक गंभीर आत्मचिंतन का विषय है।
हम सभी का नैतिक कर्तव्य है कि वृषभ को एक सम्मानजनक, संरक्षित और उपयोगी जीवन प्रदान किया जाए।

इस दिशा में RBU द्वारा की गई यह पहल निश्चित रूप से क्रांतिकारी और राष्ट्र-हितकारी सिद्ध होगी।

धन्यवाद। 🙏

गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र गौवंश रक्षण एवं संवर्धन हेतु विज्ञान-निष्ठ उपायों की सतत खोज में सक्रिय है। गौ तीर्थ  में रामद...
14/01/2026

गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र गौवंश रक्षण एवं संवर्धन हेतु विज्ञान-निष्ठ उपायों की सतत खोज में सक्रिय है।

गौ तीर्थ में रामदेव बाबा विश्वविद्यालय (RBU), नागपुर में बैल-चालित टर्बाइन द्वारा विद्युत उत्पादन एवं संग्रहण प्रकल्प पर चौथी समन्वय बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक में गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र (GVAK), RBU के तकनीकी विशेषज्ञों, ऊर्जा एवं यांत्रिकी क्षेत्र के अनुसंधानकर्ताओं तथा ग्रामीण विकास से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभाग लिया।

देश में स्वच्छ ऊर्जा एवं गोवंश रक्षण के क्षेत्र में यह प्रकल्प एक क्रांतिकारी कदम साबित होने वाला है. कृषि क्षेत्र में ट्रेक्टर आने से निरुपयोगी होने के कारण कत्लखाने में सर्वाधिक बैलों को ही भेजा जाता है. देश भर के नंदी को इस अवस्था से मुक्त करने का एक सकारात्मक उपाय खोजा गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र के अध्यक्ष श्री पदमेश गुप्ता जी ने जो इस महत्त्वपूर्ण प्रकल्प के वैचारिक जनक हैं। कार्यकारी अध्यक्ष डॉ हेमंत जांभेकर जी एवं डॉ मनोज तत्वादी प्रकल्प के तकनीकी संयोजन कर रहे हैं.
प्रकल्प को रामदेव बाबा यूनिवर्सिटी की ओर से कुलगुरु डॉ राजेश पांडे जी के तकनीकी मार्गदर्शन में प्रा उदय मुजूमदार , प्रा डॉ यशवंत सोनखासकर एवं विशेषज्ञ प्राध्यापक टीम कार्यरत है.

गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र में बैल चलीत कृषि उपकरण विभाग का विशेष दौरा किया गया. विभाग के कार्यों की संक्षिप्त जानकारी श्री अंकित काळे ने प्रदान की.
मा. कार्यकारी अध्यक्ष डॉ हेमंत जांभेकर जी ने RBU के विशेषज्ञ सदस्यों का स्वागत किया.
बैठक में अब तक किए गए प्रयोगात्मक कार्यों की समीक्षा करते हुए टर्बाइन की संरचना, बैल की कार्यक्षमता के अनुरूप ऊर्जा उत्पादन, विद्युत संग्रहण प्रणाली, सुरक्षा मानकों तथा दीर्घकालिक उपयोगिता पर चर्चा की गई। इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया गया कि यह प्रकल्प पूर्णतः पशु-अनुकूल, पर्यावरण–स्नेही एवं कम लागत वाला होगा।
शीघ्र ही इस सन्दर्भ में प्रस्तावित संयंत्र के मेकॅनिकल डिझाईन एवं मॉडल की प्रस्तुति हो सकेगी.

सूर्य की उत्तरायण यात्रा, संस्कृति का उत्सव और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का यह पावन पर्व गोमाता की सेवा, प्राकृतिक संतुल...
14/01/2026

सूर्य की उत्तरायण यात्रा, संस्कृति का उत्सव और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का यह पावन पर्व गोमाता की सेवा, प्राकृतिक संतुलन और भारतीय परंपराओं के संरक्षण का संदेश देता है।
आइए, इस शुभ अवसर पर सेवा, सद्भाव और सतत जीवन मूल्यों के संकल्प के साथ उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर हों।
गो-विज्ञान अनुसंधान केंद्र की ओर से मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ।

गो विज्ञान अनुसंधान के निर्माण प्रमुख, सुप्रसिद्ध सिविल इंजीनियर एवं Jaquar के महाराष्ट्र के प्रमुख डीलर-डिस्ट्रिब्यूटर ...
13/01/2026

गो विज्ञान अनुसंधान के निर्माण प्रमुख, सुप्रसिद्ध सिविल इंजीनियर एवं Jaquar के महाराष्ट्र के प्रमुख डीलर-डिस्ट्रिब्यूटर श्रीमान पंकज जी रुघवानी, जिनके कुशल नेतृत्व में गो विज्ञान निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है, उनके जन्मदिवस के पावन अवसर पर उन्होंने गो-माता की अनुपम सेवा करते हुए गो विज्ञान के शुद्ध देसी घी के डिब्बों का भेंट स्वरूप वितरण किया।

इस प्रेरणादायी कार्य के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध किया कि सच्ची गो-सेवा केवल भावना नहीं बल्कि कर्म से होती है। सभी गो-भक्तों को उनसे प्रेरणा लेकर ऐसे ही सेवाभावी कार्य करने चाहिए।

गो विज्ञान परिवार अपने युवा निर्माण प्रमुख को कोटि-कोटि बधाई देता है तथा कामना करता है कि गो-माता की कृपा से पंकज जी एवं उनका समस्त परिवार सदैव स्वस्थ, समृद्ध और मंगलमय रहे। 🙏

गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र गौवंश रक्षण एवं संवर्धन हेतु विज्ञान-निष्ठ उपायों की सतत खोज में सक्रिय है। संस्था के इन प्रया...
10/01/2026

गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र गौवंश रक्षण एवं संवर्धन हेतु विज्ञान-निष्ठ उपायों की सतत खोज में सक्रिय है। संस्था के इन प्रयासों को देश के मूर्धन्य, दूरदर्शी महानुभावों से निरंतर मार्गदर्शन एवं प्रेरणा प्राप्त होती रही है। इस शृंखला में पंजाब के पूर्व महामहिम राज्यपाल श्री बनवारीलाल पुरोहित जी तथा महाराष्ट्र–गुजरात के महामहिम राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी का योगदान विशेष उल्लेखनीय है। उनके मार्गदर्शन ने गोविज्ञान को केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, आर्थिक और सामाजिक समाधान के रूप में स्थापित करने की दिशा प्रदान की है।

आज रामदेव बाबा विश्वविद्यालय (RBU), नागपुर में बैल-चालित टर्बाइन द्वारा विद्युत उत्पादन एवं संग्रहण प्रकल्प पर तीसरी समन्वय बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक में गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र (GVAK), RBU के तकनीकी विशेषज्ञों, ऊर्जा एवं यांत्रिकी क्षेत्र के अनुसंधानकर्ताओं तथा ग्रामीण विकास से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभाग लिया।

देश में स्वच्छ ऊर्जा एवं गोवंश रक्षण के क्षेत्र में यह प्रकल्प एक क्रांतिकारी कदम साबित होने वाला है. भगवान शिव के वाहन नंदी की वर्तमान में अत्यंत दयनीय अवस्था है. कृषि में ट्रेक्टर आने से निरुपयोगी होने के कारण कत्लखाने में सर्वाधिक इन्हें ही भेजा जाता है. देश भर के नंदी को इस अवस्था से मुक्त करने का एक सकारात्मक उपाय खोजा गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र के अध्यक्ष श्री पदमेश गुप्ता जी ने जो इस महत्त्वपूर्ण प्रकल्प के वैचारिक जनक हैं। कार्यकारी अध्यक्ष डॉ हेमंत जांभेकर जी एवं डॉ मनोज तत्वादी प्रकल्प के तकनीकी संयोजन कर रहे हैं.
प्रकल्प को रामदेव बाबा यूनिवर्सिटी की ओर से कुलगुरु डॉ राजेश पांडे जी के तकनीकी मार्गदर्शन में प्रा उदय मुजूमदार एवं त्रि सदस्यीय विशेषज्ञ प्राध्यापक टीम कार्यरत है.

बैठक में अब तक किए गए प्रयोगात्मक कार्यों की समीक्षा करते हुए टर्बाइन की संरचना, बैल की कार्यक्षमता के अनुरूप ऊर्जा उत्पादन, विद्युत संग्रहण प्रणाली, सुरक्षा मानकों तथा दीर्घकालिक उपयोगिता पर चर्चा की गई। इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया गया कि यह प्रकल्प पूर्णतः पशु-अनुकूल, पर्यावरण–स्नेही एवं कम लागत वाला होगा।

10/01/2026

अवध नगरी में आयोजित राष्ट्रकथा महोत्सव के मंच से
परमपूज्य सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी ने समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करने वाला जागरणकारी संदेश दिया।
गुरुदेव ने कहा कि जब भारत की कृषि व्यवस्था गौ-आधारित थी, तब समाज में न तो रोगों का प्रकोप था और न ही दरिद्रता का विस्तार। किंतु उत्पादन की अंधी दौड़ में जब धरती में रासायनिक विष घोला गया, तभी कैंसर जैसी भयावह बीमारियाँ जन्म लेने लगीं। यह मार्ग भारत की आत्मा के अनुकूल नहीं है।
भारत की सनातन चेतना तो “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया” का संदेश देती है जहाँ व्यक्ति स्वयं भी स्वस्थ रहे और संपूर्ण विश्व को भी स्वास्थ्य, संतुलन और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाए।
#राष्ट्रकथा #अवधनगरी #सद्गुरुश्रीऋतेश्वरजी #गौआधारितकृषि #स्वस्थभारत #सनातनविचार #प्राकृतिककृषि #भारतकीआत्मा #सर्वेभवन्तुसुखिनः #निरामयभारत #स्वदेशीचेतना #वसुधैवकुटुम्बकम्

🙏गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र में गौदान का पुण्य आयोजन...गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र में गौ-संरक्षण, गौ-संवर्धन एवं जनजागरण...
09/01/2026

🙏
गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र में गौदान का पुण्य आयोजन...

गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र में गौ-संरक्षण, गौ-संवर्धन एवं जनजागरण से जुड़े अनेक उपक्रम निरंतर संचालित किए जाते हैं। इन्हीं उपक्रमों में से एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक उपक्रम है—इच्छुक गौ-प्रेमियों के हाथों विधिवत गौदान संपन्न कराना। इस उपक्रम का उद्देश्य न केवल गौवंश के प्रति समाज की संवेदनशीलता को सुदृढ़ करना है, बल्कि सनातन परंपरा में निहित गौदान के आध्यात्मिक, सामाजिक और मानवीय महत्व को जनमानस तक पहुँचाना भी है।

आज गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र के परिसर में यह पुण्य कार्य अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ संपन्न हुआ।
श्री प्रभुदत्त जी गुप्ता, श्रीमती शशि गुप्ता, नागपूर
और श्रीमती मीरा अशोक जी गुप्ता, कटंगी [ मध्य प्रदेश] इन दो श्रद्धालु परिवारों ने स्वेच्छा से आगे आकर गौदान का संकल्प लिया और विधिपूर्वक इस पुण्य कर्म को पूर्ण किया। कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गौपूजन, संकल्प तथा गौदान की विधि संपन्न कराई गई, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

इस अवसर पर गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र की ओर से गौदान हेतु आवश्यक सभी व्यवस्थाएँ सुव्यवस्थित रूप से की गई थीं। पूजन सामग्री, विधि-विधान, मार्गदर्शन तथा पश्चात देखरेख की संपूर्ण जिम्मेदारी केंद्र द्वारा निभाई गई। उपस्थित परिवारजनों ने इस सुचारु व्यवस्था एवं आत्मीय मार्गदर्शन के लिए केंद्र के कार्यकर्ताओं के प्रति संतोष और कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम के अंत में गौदान के महत्व पर पंडित जी द्वारा संक्षिप्त उद्बोधन दिया गया, जिसमें बताया गया कि गौदान न केवल एक धार्मिक कर्म है, बल्कि यह करुणा, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का जीवंत प्रतीक भी है।

गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से अधिकाधिक लोगों को गौसेवा और गौसंरक्षण से जोड़ने हेतु प्रतिबद्ध है।

08/01/2026

गोमूत्र को हमारे समाज में लंबे समय तक केवल मज़ाक या अंधश्रद्धा की दृष्टि से देखा जाता रहा है। लेकिन वास्तविकता इससे कहीं आगे है। आयुर्वेद और आधुनिक शोध दोनों ही यह प्रमाणित कर चुके हैं कि गोमूत्र में अनेक औषधीय गुण निहित हैं। प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति में इसे शोधन, पाचन, प्रतिरक्षा बढ़ाने और कई रोगों के उपचार में उपयोगी माना गया है। आज वैज्ञानिक अनुसंधानों के माध्यम से भी इसके जीवाणुनाशक, रोगप्रतिरोधक और औषधीय गुण सिद्ध हो चुके हैं। इसलिए गोमूत्र को केवल विश्वास या परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि प्रमाणित उपयोग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है।
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गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र की ओर से गोभक्तों एवं प्रकृति-प्रेमियों को सादर आमंत्रण। रविवार, 4 जनवरी 2026 को गोतीर्थ–देवला...
03/01/2026

गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र की ओर से गोभक्तों एवं प्रकृति-प्रेमियों को सादर आमंत्रण। रविवार, 4 जनवरी 2026 को गोतीर्थ–देवलापार में आयोजित वनभोजन कार्यक्रम के माध्यम से गोमाताओं एवं गोभक्तों के संग सेवा, संस्कार और संवेदनाओं से भरे एक दिव्य दिन का अनुभव करने का अवसर प्राप्त होगा। इस पावन आयोजन में गो शोभायात्रा, गो ग्रास एवं गो पूजन, प्रकल्प भ्रमण और वनभोजन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से गोसंस्कृति, प्राकृतिक कृषि और भारतीय परंपराओं से जुड़ने का सौभाग्य मिलेगा। आइए, परिवार सहित पधारें और गोमाता के सान्निध्य में प्रकृति, सेवा और सामूहिक आत्मीयता से भरे इस विशेष दिन के साक्षी बनें।

*खोरीपाडाच्या सम्राट राऊत यांच्या शेतात* *राज्यपालांनी तिफनवर केली ज्वारीची पेरणी**नाशिक, दि. २ (जिमाका वृत्तसेवा)* : दि...
02/01/2026

*खोरीपाडाच्या सम्राट राऊत यांच्या शेतात*

*राज्यपालांनी तिफनवर केली ज्वारीची पेरणी*

*नाशिक, दि. २ (जिमाका वृत्तसेवा)* : दिंडोरी तालुक्यातील खोरीपाडा येथील आदर्श शेतकरी सम्राट राऊत यांच्यासाठी आज आनंदाचा दिवस होता. राज्यपाल आचार्य देवव्रत यांनी आज सकाळी त्यांच्या शेताला भेट देऊन त्यांना सुखद धक्का दिला. एवढेच नव्हे तर तिफनवर ज्वारीची पेरणी करून आपण शेती आणि शेतकरी यांच्याविषयी असलेल्या आत्मीयतेचे दर्शन घडविले.

इतरही शेतकऱ्यांशी शेतीविषयी चर्चा करतांना त्यांना नैसर्गिक शेतीकडे वळण्याचे आवाहन केले. राज्यपालांच्या भेटीने शेतकऱ्यांना झालेला आनंद त्यांच्या चेहऱ्यावर दिसत होता. नाशिक जिल्हा दौऱ्यात ग्रामस्थांकडून मिळालेल्या प्रेमाने व आदरातिथ्याने भारावून गेल्याची भावना श्री. देवव्रत यांनी व्यक्त केली.

आपण स्वतः शेतकरी असून अनेक देशी गायी असल्याने संपूर्णपणे नैसर्गिक शेती करतो आणि ती लाभदायी असल्याने शेतकऱ्यांनी नैसर्गिक शेतीकडे वळावे, असे आवाहन त्यांनी केले. यावेळी राऊत कुटुंबानेदेखील नैसर्गिक शेतीत पिकविलेल्या वस्तूंची अनोखी भेट देऊन राज्यपाल श्री. देवव्रत यांचा सत्कार केला. राज्यपालांची ही भेट स्मरणीय करण्यासाठी पावरी हे आदिवासी बांधवांचे पारंपरिक वाद्य त्यांना भेट देण्यात आले.

यावेळी अन्न व औषध प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाळ, खासदार भास्कर भगरे, विभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम, राज्यपालांचे सचिव प्रशांत नारनवरे, जिल्हाधिकारी आयुष प्रसाद, जिल्हा परिषदेचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमकार पवार, जिल्हा अधीक्षक कृषी अधिकारी रवींद्र माने आदी उपस्थित होते.

*राऊत कुटुंबियांचे खास आदरातिथ्य*
राऊत कुटुंबाने खास ग्रामीण चवीची नागलीची पेज, तांदळाचे धिरडे तयार करून राज्यपाल महोदयांचे आदरातिथ्य केले. श्री. देवव्रत यांनी या पदार्थांचा आनंदाने आस्वाद घेत ते आवडल्याची पावतीही दिली. कौटुंबिक स्नेहाचा परिचय देत त्यांनी कुटुंबातील सदस्यांची प्रेमाने विचारपूस केली. त्यांनी जनावरांच्या गोठ्याची पाहणी आणि शेताच्या बांधावर वृक्षारोपणही केले. तसेच पशुसंवर्धन विभागाने लावलेल्या स्टॉलला भेट दिली. पारंपारिक आदिवासी संस्कृतीनुसार राज्यपाल महोदयांचे करण्यात आलेले औक्षण आणि स्वागताचा श्री. देवव्रत यांनी मोकळेपणाने केलेला स्वीकार उपस्थित शेतकऱ्यांसाठी आनंदाचा अनुभव होता.

राज्यपाल महोदयांनी श्री. राऊत यांनी राबविलेल्या विविध उपक्रमांचे केलेले कौतुकही कुटुंबातील सदस्यांना सुखावून गेले.

यावेळी परिसरातील शेतकरी, ग्रामस्थ मोठ्या संख्येने उपस्थित होते.

नाशिक जिल्ह्यातील दिंडोरी तालुक्यातील पिंपरखेड गावात महाराष्ट्राचे राज्यपाल मा. आचार्य देवव्रत जी यांचे आगमन हे केवळ एक ...
02/01/2026

नाशिक जिल्ह्यातील दिंडोरी तालुक्यातील पिंपरखेड गावात महाराष्ट्राचे राज्यपाल मा. आचार्य देवव्रत जी यांचे आगमन हे केवळ एक अधिकृत दौरा नव्हता, तर गोसंवर्धन, नैसर्गिक शेती आणि भारतीय संस्कृतीप्रती असलेल्या त्यांच्या दृढ निष्ठेचे दर्शन घडवणारे क्षण होते.

बैलगाडीतून काढलेली पारंपरिक मिरवणूक, आदिवासी नृत्य, लहान मुलांचे लेझीम नृत्य, टाळ–मृदुंगाचा निनाद आणि गावकऱ्यांचा उत्स्फूर्त आनंद पाहून राज्यपाल महोदय भारावून गेले.

रासायनिक खतांमुळे होणाऱ्या शेतीच्या हानीवर त्यांनी चिंता व्यक्त करत नैसर्गिक शेतीचा आग्रह धरला. आपल्या शेतात ८ प्रजातींच्या ४५० गायी असून त्यातील ६ प्रजाती भारतीय असल्याचा उल्लेख करत त्यांनी गोसंवर्धनाचे महत्त्व अधोरेखित केले.
Acharya Devvrat

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Nagpur
440032

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