24/02/2020
रूमेटाइड अर्थराइटिस के कारण, लक्षण और इलाज
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जैसे-जैस उम्र बढ़ती जाती है, हमारा शरीर बीमारियों की चपेट में आने लगता है। इसके पीछे एक बड़ा कारण रोग-प्रतिरोधक क्षमता का समय के साथ-साथ कमजोर होना है। इन बीमारियों की लिस्ट में एक नाम रूमेटाइड अर्थराइटिस का भी है । जो लोग इस रोग से पीड़ित हैं, वो बेहतर तरीके से इससे होने वाले दर्द को समझ सकते हैं। कभी-कभी तो यह दर्द इस कदर कष्दायक होता है कि उसे बर्दाश्त करना तक मुश्किल हो जाता है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में इसी बीमारी के बारे में बता रहे हैं। इस लेख में आपको यह भी बताया जाएगा कि रूमेटाइड अर्थराइटिस क्या है और रूमेटाइड अर्थराइटिस के कारण क्या-क्या हैं। साथ ही हम बताएंगे कि रूमेटाइड अर्थराइटिस का इलाज कैसे किया जा सकता है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस क्या है?
रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून और सूजन की बीमारी है। इसका मतलब है कि आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता आपके शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती है। इससे शरीर के जोड़ वाले हिस्सों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण इन हिस्सों में सूजन और तेज दर्द शुरू हो जाता है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस मुख्य रूप से शरीर के जोड़ों को नुकसान पहुंचाता है। कई बार यह एक ही समय में शरीर के कई जोड़ों को अपनी चपेट में ले लेता है। इस स्थिति में मुख्य रूप से कलाई, हाथों और घुटनों के जोड़ प्रभावित होते हैं। रूमेटाइड अर्थराइटिस पूरे शरीर के अन्य टिश्यू को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे फेफड़ों, हृदय और आंखों में भी समस्या उत्पन्न हो सकती है ।
रूमेटाइड अर्थराइटिस के लक्षण-
*शरीर के किसी एक हिस्से में दर्द।
*शरीर के एक से अधिक जोड़ों में दर्द।
*शरीर के एक से अधिक जोड़ों में अकड़न।
*एक से अधिक जोड़ों का मुलायम हो जाना और सूजन बनी रहना।
*दोनों हाथों या दोनों घुटनों पर एक समान लक्षण।
*वजन घटना।
*बुखार बने रहना।
*थकान
*कमजोरी
रूमेटाइड अर्थराइटिस के जोखिम कारक
*उम्र – आपको किसी भी उम्र में रूमेटाइड अर्थराइटिस हो सकता है, लेकिन व्यस्क होने पर इसका खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
*लिंग- पुरुषों की तुलना में महिलाओं को यह होना आम है।
*परिवार से – अगर परिवार के किसी भी सदस्य को रूमेटाइड अर्थराइटिस है, तो आपको भी यह रोग हो सकता है।
*धूम्रपान के कारण – जो लोग लंबे समय तक धूम्रपान करते हैं, उन्हें रूमेटाइड अर्थराइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है।
*मोटापा – अधिक वजन के लोग भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
मसूड़े की बीमारी।
रूमेटाइड अर्थराइटिस में परहेज-
*प्रोसेस्ड फूड (इनमें एडेड शुगर, सोडियम और ट्रांस फैट की मात्रा अधिक होती है)
*ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थ
*तेल
*चीनी
*जानवरों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ – जैसे मांस, दूध व अण्डा आदि
एक डॉक्टरी रिसर्च के अनुसार, हाई फैट, कोलेस्ट्रोल, उच्च प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ और फास्ट फूड का लगातार सेवन मोटापा, चयापचय सिंड्रोम और हृदय रोग को बढ़ावा देता है। इसके कारण ऑटोइम्यून से संबंधित रोग हो सकते हैं। वहीं, ऑटोइम्यून रोग की वजह से रूमेटाइड अर्थराइटिस होता है, जिससे इसका जोखिम और बढ़ सकता है । इसलिए, इन खाद्य पदार्थों का सेवन चिकित्सक की सलाह लेने के बाद ही करें।
रूमेटाइड अर्थराइटिस में क्या खाना चाहिए
अगर आप यह सोच रहें कि रूमेटाइड अर्थराइटिस के दौरान क्या खाना चाहिए, तो उसकी लिस्ट हम नीचे दे रहे हैं। इन खाद्य पदार्थों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो रूमेटाइड अर्थराइटिस के दौरान होने वाले दर्द को रोकने में लाभदायक असर दिखा सकते हैं ।
फल- सूखा आलूबुखारा, चकोतरा, अंगूर, ब्लूबेरी, अनार, आम (मौसमी फल), केला, आड़ू और सेब।
अनाज- साबुत दलिया, गेहूं की रोटी और साबुत पोहा।
फलियां- काले सोयाबीन और काले चने।
साबुत अनाज – गेहूं, चावल, ओट्स, मक्का, राई, जौ, बाजरा, सोरगम और कैनरी बीज।
मसाले – अदरक और हल्दी।
जड़ी बूटी – शल्लकी और अश्वगंधा।
तेल – जैतून का तेल, मछली का तेल और बोरेज सीड ऑयल (कम मात्रा में)।
अन्य सामाग्री – दही, ग्रीन टी और तुलसी से बनी चाय।