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☘️ *_किस रोग में कौनसा आसन करना श्रेष्ठ है, जानिए किस बीमारी में कौन सा आसन लाभप्रद हैं......*_विशेष सहेजने योग्य पोस्ट_...
07/05/2022

☘️ *_किस रोग में कौनसा आसन करना श्रेष्ठ है, जानिए किस बीमारी में कौन सा आसन लाभप्रद हैं......

*_विशेष सहेजने योग्य पोस्ट_*
जैसा की हम सबको विदित है की विभिन्न बीमारियों में योगासन रोगों को ठीक करने या रोगों से होने वाले कष्टों से आराम दिलाने में सहायक होते हैं।
लेकिन यह भी सच है की हर बीमारी में हर एक योगासन नहीं किया जा सकता और योगासन में हमें विभिन्न सावधानियों एवं नियमों का अनुसरण करना होता है।
इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से विभिन्न बीमारियों में किये जाने वाले योगासनों के नामों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे। हालांकि एक स्वस्थ्य मनुष्य हर कोई आसन एवं प्राणायाम कर सकता है लेकिन एक बीमार व्यक्ति को सिर्फ वही आसन करने चाहिए जो उस विशेष बीमारी में किये जा सकते हैं।
बीमारियों में योगासन से न सिर्फ रोग जल्दी ठीक होने की संभावना होती है अपितु व्यक्ति में उस बीमारी से लड़ने के लिए एक नई उर्जा एवं ताकत का भी संचार होता है।

*कमर दर्द एवं सर्वाइकल पेन के लिए योगासन:*
कमर दर्द, सर्वाइकल पेन, स्लिप डिस्क, साइटिका, स्पाँन्डिलाइटिस इत्यादि के लिए खड़े रहने की क्रिया के और पीछे झुकने वाले आसन जैसे – भुजंगासन, शलभासन, धनुरासन, उत्तानपादासन, वज्रासन, सुप्त वज्रासन, गौमुखासन, ताडासन, उत्कटासन, मकरासन इत्यादि किये जा सकते हैं |

*दमा (अस्थमा), श्वास संबंधी बीमारियों में योगासन:*
शीर्षासन समूह, सर्वांगासन, भुजंगासन, शलभासन, धनुरासन, वीरासन, उष्ट्रासन, पर्यंकासन, पश्चिमोत्तानासन, सुप्त वीरासन, नाडी-शोधन प्राणायाम, सूर्यभेदन प्राणायाम, उड्डियान बंध, योग निद्रा।

*हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप):*
हाई ब्लड प्रेशर या उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों में योगासन की बात करें तो इनमें पद्मासन, पश्चिमोत्तानासन, सिद्धासन, पवनमुक्तासन, नाड़ी-शोधन प्राणायाम (कुंभक को छोड़कर), सीतकारी, सीतली, चन्द्रभेदन प्राणायाम, उज्जायी, योग निद्रा इत्यादि किये जा सकते हैं । इसके अलावा शांत भाव से बैठकर ईश्वर का ध्यान करें, एवं हमेशा बगैर तेल-मसाले के शाकाहारी भोजन ग्रहण करें।

*लो ब्लड प्रेशर (निम्न रक्तचाप):*
निम्न रक्तचाप जैसी बीमारी से ग्रसित व्यक्ति शशांकासन, नाडी-शोधन प्राणायाम, भस्त्रिका, कपाल-भाति, सूर्य भेदन प्राणायाम,सालंब शीर्षाशन, सर्वागासन, हलासन, कर्ण पीड़ासन, वीरासन सूर्य नमस्कार एवं शवासन जैसे योगासन किये जा सकते हैं |

*डायबिटीज़ मधुमेह के लिए योगासन:*
डायबिटीज जैसी बीमारी में शीर्षासन एवं उसके समूह, सूर्य नमस्कार, सर्वागासन, महामुद्रा, मंडूकासन मत्यस्येन्द्रासन, शवासन, नाडी-शोधन प्राणायाम इत्यादि किये जा सकते हैं |

*सिरदर्द जैसी बीमारियों में योगासन:*
सिरदर्द में मार्जारी आसन, नाड़ी-शोधन प्राणायाम/अनुलोमविलोम प्राणायाम, योग निद्रा, पद्मासन, शीर्षासन, हलासन, सर्वांगसन, पवनमुक्तासन, पश्चिमोत्तासन, वज्रासन इत्यादि किये जा सकते हैं ।

*माइग्रेन के लिए योगासन:*
माइग्रेन अर्थात आधाशीशी जैसी बीमारियों में योगासन के तौर पर शीर्षासन, सर्वागासन, पश्चिमोत्तानासन, पद्मासन, सिद्धासन, वीरासन, शवासन, बिना कुंभक के नाड़ी-शोधन प्राणायाम, उद्गीथ प्राणायाम, योग निद्रा इत्यादि आसनों में ध्यान लगाया जा सकता है ।

*सीने या छाती रोग के लिए योगासन:*
सीने या छाती रोग के लिए पश्चिमोत्तानासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, बकासन, बछद्रकोणासन, चक्रासन, कपोतासन, नटराजासन, पीछे झुककर किए जाने वाले आसन, उज्जायी तथा नाड़ी-शोधन प्राणायाम, योग निद्रा, सूर्य नमस्कार, शीर्षासन, सर्वांगसन, भुजंगासन, धनुरासन, पदमासन, आकर्ण धनुरासन इत्यादि किये जा सकते हैं।

*कमर दर्द के लिए योगासन:*
कमर दर्द नामक इस रोग में वे सभी आसन जिनकी क्रिया खड़े होकर पीछे की तरफ़ की जाती है किये जा सकते हैं इनके अलावा सुप्त वज्रासन, धनुरासन, भुजंगासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन पर्वतासन, सर्वागासन, शीर्षासन, चक्रासन, नाड़ी-शोधन प्राणायाम, कपाल-भाति इत्यादि किये जा सकते हैं ।

*यादाश्त बढ़ाने के लिए योगासन:*
स्मरण शक्ति के विकास अर्थात यादाश्त बढ़ाने के लिए शीर्षासन एवं उसका समूह, सर्वागासन, पश्चिमोत्तानासन, उत्तानासन, योग– मुद्रासन, पादहस्तासन, पद्मासन में ध्यान या सिद्धासन में ध्यान, सामान्य त्राटक, शवासन, नाड़ी-शोधन प्राणायाम, सूर्य भेदन एवं भस्त्रिका प्राणायाम, योगनिद्रा इत्यादि किये जा सकते हैं।

*पेट के दर्द या पेट के लिए योगासन:*
स्टोमक अर्थात पेट दर्द जैसी बीमारियों में योगासन के रूप में शीर्षासन, सर्वांगसन, हलासन, उत्तानासन, वीरासन, सुप्त वीरासन वज्रासन एवं नौकासन किये जा सकते हैं इसके अलावा सरकी नाभि को ठीक करने वाले आसन भी किये जा सकते हैं |

*किडनी अर्थात गुर्दा रोग के लिए योगासन:*
इस रोग में सूर्य नमस्कार, सर्वागासन, शीर्षासन एवं उसका समूह, हलासन, पश्चिमोत्तानासन, हनुमानासन, कपोतासन, उष्ट्रासन, शलभासन, धनुरासन, अर्ध नौकासन, मत्स्येन्द्रासन, भुजंगासन इत्यादि किये जा सकते हैं ।

*नपुंसकता दूर करने वाले आसन:*
योगासन के तौर पर शीर्षासन एवं उसके समूह, सर्वांगासन, उत्तानासन, पश्मिोत्तानासन,महामुद्रासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, हनुमानासन, कपाल–भाति, अनुलोम-विलोम, नाड़ी-शोधन प्राणायाम अंतकुंभक के साथ, उड़ियान बंध, वज्रोली मुद्रा एवं विपरीतकरणी मुद्रा इत्यादि किये जा सकते हैं |

*आलस्य को भागने वाले योगासन:*
शीर्षासन, सर्वागासन, पश्चिमोत्तानासन, उत्तानासन, बिना कुंभक के नाड़ी-शोधन प्राणायामबी इत्यादि ऐसे आसन एवं प्राणायाम हैं जो आलस्य को दूर करने में सहायक हैं।

*दस्त अर्थात पेचिश के लिए योगासन:*
दस्त एवं पेचिश जैसी बीमारियों में योगासन के तौर शीर्षासन और उसके समूह, सवाँगासन, जानुशीर्षासन, बिना कुंभक के नाड़ी-शोधन प्राणायाम इत्यादि किये जा सकते हैं ।

*आँत के अल्सर के लिए योगासन:*
आंत के अल्सर में शीर्षासन एवं उससे सम्बंधित समूह, सर्वागासन, पश्चिमोत्तानासन, योग निद्रा, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, उज्जायी एवं नाड़ी-शोधन प्राणायाम, अंतकुंभक के साथ उड़ियान बंध इत्यादि योगासन किये जा सकते हैं।

*पेट के अल्सर के लिए योगासन:*
पेट के अल्सर के लिए वज्रासन, मयूरासन, नौकासन, पादहस्तासन, उत्तानासन, पादांगुष्ठासन, शलभासन इत्यादि आसन किये जा सकते हैं।

*हार्निया के लिए योगासन:*
हर्निया नामक बीमारी को ठीक करने में शीर्षासन एवं उसका समूह, सवाँगासन, आकर्ण धनुरासन इत्यादि योगासन सहायक होते हैं ।

*अण्डकोष वृद्धि के लिए योगासन:*
इसमें शीर्षासन एवं उनका समूह, सर्वागासन, हनुमानासन, समकोणासन, वज्रासन, गरुड़ासन, पश्चिमोत्तासन, बढ़ कोणासन, योग मुद्रासन, ब्रह्मचर्यासन, वात्यनासन इत्यादि किये जा सकते हैं ।

*हृदय के दर्द के लिए योगासन:*
ह्रदय दर्द एवं ह्रदय विकार जैसी बीमारियों में योगासन के तौर पर शवासन, उज्जायी प्राणायाम बिना कुंभक के, योग निद्रा, सुखासन में ध्यान या शवासन में ध्यान, एवं नाड़ी-शोधन प्राणायाम इत्यादि किये जा सकते हैं।

*कब्ज, गैस, अजीर्ण इत्यादि के लिए योगासन:*
कब्ज, गैस बनना, अजीर्ण, मल निष्कासन में परेशानी, अम्लता एवं वात रोग, दुर्गधित श्वास इत्यादि बीमारियों में योगासन के रूप में शीर्षासन व उसका समूह, सर्वागासन, नौकासन, पश्चिमोत्तानासन, मत्स्येन्द्रासन,धनुरासन, भुजंगासन, मयूरासन, योग मुद्रासन, उन्न्तासन, पदमासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन व इससे संबंधित आसन, त्रिकोणासन, महामुद्रा, शलभासन, मत्स्यासन, अर्ध चंद्रासन, शशांकासन, पादांगुष्ठासन एवं शंखप्रक्षालन वाले आसन एवं खड़े रहकर होने वाले सभी आसन किये जा सकते हैं।

*जोड़ो के दर्द, गठिया के लिए योगासन:*
जोड़ो के दर्द, गठिया, संधिवात इत्यादि जैसी बीमारियों में योगासन के तौर पर शीर्षासन तथा उसका समूह, सर्वागासन, पद्मासन, सिद्धासन, वीरासन, पर्यकासन, गौमुखासन, उत्तानासन एवं पश्चिमोत्तानासन, पवनमुक्तासन समूह की क्रियाएँ की जा सकती हैं।

*पायरिया एवं चेहरे की ताजगी के लिए योगासन:*
दाँत, मसूढ़े, पायरिया, गंजापन, चेहरे की ताज़गी, झुर्रिया व सामान्य आँख की बीमारियों के लिए शीर्षासन एवं उसका समूह, सवाँगासन, हलासन, विपरीतकरणी मुद्रा, पश्चिमोत्तानासन, शलभासन, वज्रासन, भुजंगासन, सूर्य नमस्कार, सिंहासन, दृष्टि वर्धक यौगिक अभ्यासावली एवं सिर के बल किए जाने वाले सभी आसन किये जा सकते हैं।

*मोटापा दूर करने के लिए योगासन:*
मोटापा कम करने या दूर करने के लिए विशेष तौर पर उर्जादायक खास आसन एवं क्रियाएँ, सूर्य नमस्कार, शीर्षासन तथा उसका समूह, सर्वागासन, हलासन, पवनमुक्तासन समूह की क्रियाएँ विपरीतकरणी मुद्रा एवं वे सभी आसन जो पेट सम्बंधित रोग व अजीर्णता के लिए हैं किये जा सकते हैं | मोटापा कम करने के लिए आहार का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।

*फेफड़े के लिए योगासन:*
फेफड़े के लिए शीर्षासन तथा उसका समूह, सर्वागासन, पद्मासन, सूर्य नमस्कार, लोलासन, वीरासन, खड़े होकर किए जाने वाले आसन, चक्रासन, धनुरासन, अंतकुंभक के साथ सभी प्राणायाम किये जा सकते हैं।

*हाइट अर्थात लम्बाई बढ़ाने के लिए योगासन:*
शरीर की लंबाई बढ़ाने के लिए ताड़ासन, सूर्य नमस्कार, धनुरासन, हलासन, सर्वागासन एवं पश्चिमोत्तानासन जैसे योगासन किये जा सकते हैं।

*लकवा एवं पोलियो बीमारियों में योगासन:*
यद्यपि लकवा एवं पोलियो जैसी बीमारियों में बेहतर यही होता है की रोगी की स्थिति का पता लगाकर किसी डॉक्टर से सलाह लेकर किसी प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में योग क्रियाएं करवाई जाएँ क्योंकि पोलियों नामक यह बीमारी सामान्य तौर पर जन्म से ही होती है जबकि लकवा कभी हो हो सकता है बाल्यावस्था या उसके बाद इसलिए बीमारी कितनी पुराणी है उस आधार पर आयुर्वेदिक दवाओं के साथ योग क्रियाएं करना इन बीमारियों में फायदेमंद हो सकता है | इन बीमारियों में शलभासन, धनुरासन, मकरासन, भुजंगासन, पदमासन, सिधासन, कन्धरासन, हलासन, सर्वागासन, शवासन, उज्जायी तथा नाडी-शोधन प्राणायाम लाभकारी हो सकते हैं ।

*खून की कमी के लिए योगासन:*
खून की कमी या रक्त अल्पता में शीर्षासन एवं उसका समूह, सर्वागासन, पश्चिमोत्तानासन, सूर्य नमस्कार, उज्जायी प्राणायाम, नाडीशोधन प्राणायाम, कपालभाति प्राणायाम इत्यादि फायदेमंद हो सकते हैं ।

*गुदा सम्बन्धी रोगों के लिए योगासन*
गुदा से सम्बन्धित रोग जैसे बवासीर, भगन्दर, फिशर इत्यादि बीमारियों में योगासन के तौर पर शीर्षासन एवं उसका समूह, सर्वांगसन, हलासन, विपरितिकरण मुद्रा, मत्स्यासन, सिंहासन, शलभासन, धनुरासन, बिना कुंभक के उज्जायी, तथा नाड़ी-शोधन प्राणायाम इत्यादि किये जा सकते हैं ।

*खाँसी के लिए योगासन:*
खांसी के लिए शीर्षासन एवं उसका समूह, सवांगासन, उत्तानासन, पश्चिमोत्तानासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन इत्यादि किये जा सकते हैं और यदि खांसी जुकाम के साथ है तो सूर्यनमस्कार भी किया जा सकता है।

*अनिद्रा, चिंता, निराशा, दूर करने के लिए योगासन:*
अनिद्रा, चिंता,उन्माद, निराशा एवं मानसिक दुर्बलता को दूर करने सहायक आसन सूर्य नमस्कार एवं उसका समूह, सर्वांगसन, कुर्मासन, पश्चिमोत्तासन,शशांकासन, योगमुद्रा, उत्तानासन बिना कुंभक के भस्त्रिका, नाड़ी-शोधन तथा सूर्य भेदन प्राणायाम साथ में भ्रामरी, मूच्छां, शीतली एवं सीतकारी प्राणायाम एवं योगनिद्रा किये जा सकते हैं |

*मासिक धर्म में अनियमितता के लिए योगासन:*
मासिक धरम में अनियमितता एवं अंडाशय से सम्बंधित बीमारियों में योगासन के तौर पर सर्वागासन, भुजंगासन, वीरासन, वज्रासन, शशांकासन, मार्जरी आसन, योग– निद्रा, नाड़ी-शोधन प्राणायाम, मूलबंध, उड्डीयान बंध,विपरीतकरणी, वज्रोली मुद्रा, योनिमुद्रा एवं योग मुद्रासन किये जा सकते हैं । यदि मासिक स्राव अधिक हो रहा हो तो उसके लिए बद्ध कोणासन, जानुशीर्षासन, पश्चिमोत्तानासन, उन्न्तासन एवं पवनमुक्तासन समूह की क्रियाएँ की जा सकती हैं |

*मूत्र सम्बन्धी रोगों के लिए योगासन:*
पौरुष ग्रन्थि, पेशाब-विकृति जैसी बीमारियों में योगासन के तौर पर शीर्षासन तथा उसका समूह, सर्वागासन, हलासन, शलभासन, धनुरासन, उत्तानासन, नौकासन, सुप्तवज्रासन, बद्ध कोणासन, उड़ियान, नाड़ी-शोधन इत्यादि किये जा सकते हैं ।

*स्वप्नदोष के लिए योगासन:*
स्वप्नदोष के लिए शीर्षासन से सम्बंधित आसन समूह, सवाँगासन, पश्चिमोत्तानासन, बद्ध कोणासन, मूलबंध, वज्रोली मुद्रा, योनि मुद्रा, नाडी-शोधन प्राणायाम किये जा सकते हैं | इसके अलावा स्वप्नदोष से ग्रसित व्यक्ति को अच्छी सोच बनाये रखना नितांत आवश्यक है और रात्रि को शीतल जल से हाथ पैर धोकर सोया जा सकता है ।

*गर्भावस्था में किये जाने वाले योगासन:*
गर्भावस्था के दौरान बेहद हलके व्यायाम पवनमुक्तासन सम्बन्धी आसन एवं बिना कुम्भक के प्राणायाम, उचित प्रशिक्षक की देखरेख में किये जा सकते हैं |

*बाँझपन के लिए योग:*
बांझपन में सर्वागासन, हलासन, पश्चिमोत्तानासन, पद्मासन या सिद्धासन, चक्रासन, गरुड़ासन, वातायनासन, सभी मुद्राएँ जैसे वज़ोली मुद्रा, योनि मुद्रा, नाड़ी-शोधन प्राणायाम, कपालभाति प्राणायाम इत्यादि लाभकारी होते हैं ।

*गले की तकलीफ के लिए योगासन :*
मत्स्यासन, सिंहासन, सुप्त वज्रासन और सर्वांगासन।

*पथरी के लिए योग:*
मत्स्येंद्रासन, मत्स्यासन, तोलांगुलासन और वज्रासन।

*मिर्गी के लिए योगासन:*
मिर्गी की बीमारी में हलासन, महामुद्रा, पश्चिमोत्तानासन, शशांकासन, भुजंगासन और बिना कुंभक के नाडी-शोधन प्राणायाम, अंतकुंभक के साथ उज्जायी प्राणायाम, शीतली प्राणायाम, योग निद्रा इत्यादि किये जा सकते हैं इनके अलावा बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को शाकाहारी भोजन एवं ध्यान करना चाहिए।

भारत माता की जय 🇮🇳
🙏सर्वे भवन्तु सुखिनः🙏

𝑫𝒓 𝒃𝒌 𝒌𝒐𝒎𝒂𝒍
पोस्ट अच्छी लगे तो लाईक कमेंट अँड शेअर किजीये 🙏🏻🌹

The a**s is at the end of the re**um, and muscle surrounds it. Depending on the cause of the swelling, people may have a...
16/04/2022

The a**s is at the end of the re**um, and muscle surrounds it. Depending on the cause of the swelling, people may have additional symptoms, such as pain, itching, burning, or bleeding around the a**s.fissures, hemorrhoids,cancer is most common problems. There r some type virus and bacteria play a very important role in this problems they r aerobic type.

Pada-Hastha Asana or Hand to Feet Pose.Level - Easy Type - Forward BendingDuration- 15-30seconds• Steps to perform Pada ...
16/04/2022

Pada-Hastha Asana or Hand to Feet Pose.

Level - Easy
Type - Forward Bending
Duration- 15-30seconds

• Steps to perform Pada Hastha Asana -
➡️ Come to standing position, with your hands by the side of your body.
➡️ With inhalation, raise your hands above your head.
➡️ Give a slight backwards stretch to your body.
➡️ With exhalation, bend forward from your lower back.
➡️ Try to hold you le toes or place your hands beside your toes.
➡️ Touch your forehead to the knees.
➡️ The knee joint should be straight completely.
➡️ Feel the stretch in the muscles of your legs and back. Do not over stretch as it may cause strain to you calf and thigh muscles, knees and ankle; and may result in sprain.
➡️ Maintain the posture for 15-30 seconds Without straining the body.
➡️ Slowly with inhalation release the posture by giving a slight backwards stretch to the lower back.

➡️ This asana has a great effect on the Swadhisthan Chakra.

• Contraindications Of Pada Hastha Asana -
➡️ Severe back pain
➡️ High blood pressure
➡️ Heart problems
➡️ Knee problems
➡️ Sciatica
➡️ Abdominal hernia

19/11/2021

🌻🌹थायराइड🌹🌻

थर्मामीटर से घर कर पर ही कर सकते हैं थायरॉइड का टेस्ट ..

थायरॉइड जैसी गंभीर बीमारी का टेस्ट आप घर पर ही आसानी से कर सकते हैं !
इसके लिए आपको बस एक थर्मामीटर की जरूरत होगी !
आज करोड़ों लोग थायरॉइड से पीड़ित हैं !
मोटापा - इनफर्टिलिटी जोड़ों में दर्द - उनींदापन - डिप्रेशन - बालों का झड़ना आदि समस्याएं इसके कारण होती हैं !
आम तौर पर थायरॉइड के लिए किया जाने वाला टेस्ट TSH को विश्व के कई चिकित्सक भरोसेमंद नहीं मानते और दूसरा T4 टेस्ट तो तभी काम आता है जब थाइरॉइड ग्लैंड फैलियर की स्थिति में हो।

इसके बारे में अमेरिका के प्रसिद्ध चिकित्सक और बेस्ट सेलर किताबों के लेखक डॉ जैकब टाईटेलबम ने बताया है। उन्होंने इस टेस्ट को बेहद भरोसेमंद और लैब से भी ज्यादा विश्वसनीय बताया है।
कई बार इस टेस्ट के लिए मरीजों को 1000 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं।
इस टेस्ट को आर्मपिट टेस्ट कहते हैं !

इसके लिए मरीज जिसे ऐसा लग रहा है कि उसे थायरॉइड हो सकता है उसे एक अच्छी क्वालिटी का थर्मामीटर लेना है और 7 दिन तक रोज सुबह उठते ही अपनी आर्म पिट यानी बगल का टेम्प्रेचर नोट करना है !
थर्मामीटर को बगल में लाकर 10 मिनट के लिए लेट जाएं।
* ध्यान रखें टेस्ट करते वक्त AC बंद हो ।

अगर टेम्प्रेचर दो बार से ज्यादा बार 97.4 °F से कम आए तो समझ लीजिए कि आपको निश्चित तौर से थाइरॉइड की समस्या है चाहे ब्लड टेस्ट कुछ भी कह रहा हो।
आप ट्रीटमेंट लेना प्रारंभ कर

घर पर थायराइड टेस्ट कैसे करे, तरीका – Thyroid test
– इसे करने के लिए सबसे पहले आप थर्मोमीटर को झटक कर पारा 35डिग्रीC या 95F से नीचे गिराकर रात को सोने से पहले अपने सिरहाने रख लेl

– सुबह जागने पर सबसे पहले बिस्तर से निकले बिना, अपना ऊपरी कपड़ा निकालकर थर्मोमीटर को अपनी कांख (armpit) में लगाकर 10 मिनट लगे रहने दें, फिर निकालकर इसकी रीडिंग लें.
👇👇👇👇👇👇
Thyroid Test
थाइरोइड समस्या के लिए घरेलू टेस्ट
1) यदि टेंपरेचर 36.5C (97.7F) और 36.8C (98.2F) के बीच है तो थायराइड ग्लैंड ठीक से काम कर रही है.

2) अगर टेंपरेचर 36.5C (97.7F) से कम है तो थायराइड सामान्य से धीमे काम कर रही है.

इस दशा में डिप्रेशन, थकान, इन्फेक्शंस, लंबी अवधि से सरदर्द, ध्यान भटकना, मेमोरी लॉस, और बाल झड़ने की शिकायतें प्रकट हो सकती हैं. यानि की हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है.

3) अगर टेंपरेचर 36.8C (98.2F) से अधिक हो तो थायराइड तेजी से काम कर रही है या शरीर में किसी तरह का इन्फेक्शन है. इसका मतलब हाइपरथायरायडिज्म की समस्या हो सकती

थाइरोइड क्या है – What is Thyroid
थायराइड मानव शरीर में पाए जाने वाले एंडोक्राइन ग्लैंड में से एक है. थायरायड ग्रंथि गले में सांस की नली के ऊपर होती है, इसका आकार तितली जैसा होता है. यह ग्रंथि थाइराक्सिन नाम का हार्मोन बनाती है, जो शरीर की एनर्जी, प्रोटीन का बनना और अन्य हार्मोन्स के प्रति होने वाली संवेदनशीलता को कंट्रोल में रखता है.

थायराइड की बीमारी होने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, जिससे शरीर में कई तरह की प्रॉबल्म नजर आने लगती है। आजकल बहुत से लोगों को थायराइड से जुड़ी प्रॉब्लम हो रही हैं लेकिन पुरुषों के मुकाबले यह बीमारी औरतों में ज्यादा होती है.

थाइरोइड की बीमारी 2 तरह की होती है –

हाइपरथायरायडिज्म (जब थाइरोइड ग्रन्थि में थाइराक्सिन हार्मोन ज्यादा बनने लगता है)
हाइपोथायरायडिज्म (जब थाइरोइड ग्रंथि में थाइराक्सिन कम बनने लगता है)
क्या थाइरोइड टेस्ट खाली पेट होता है ?


जी नहीं, ब्लड सैम्पल खाली पेट नहीं लिया जाता है।

थायराइड टेस्ट क्या होता है या Thyroid Function test कैसे होता है ?
थायराइड ग्लैन्ड द्वारा बनाए जाने वाले हार्मोन T3, T4 और पिट्यूटरी ग्लैन्ड द्वारा बनाए जाने वाले TSH हार्मोन
का सही लेवल जानने के लिए खून का सैम्पल लेकर यह टेस्ट किया जाता है। थायराइड फ़ंक्शन टेस्ट की रिपोर्ट में TSH, T3, T4 हार्मोन का लेवल नंबर में दिया गया होता है।

नार्मल थायराइड कितना होता है ? [Thyroid test normal range]
टेस्ट रिपोर्ट में TSH का नॉर्मल लेवल 0.4-5.0 mIU/dL (Mili-international unites per liter) होता है लेकिन अगर आपका थाइरॉइड रोग का इलाज चल रहा है तो आपके TSH की नॉर्मल रेंज 0.5-3.0 mIU/dL होगी।
T3 का नॉर्मल स्तर 100-200 ng/dL (Nanograms per deciliter) और T4 का नॉर्मल लेवल 4.5-11.2 mcg/dL (Micrograms per deciliter) होता है।

थायराइड टेस्ट की रिपोर्ट कितने दिन में आती है ?
1-2 दिन में आ जाती है।

थाइरोइड रोग के लक्षण – Symptoms of thyroid
कई लोगों में थायराइड की बीमारी भीतर-ही-भीतर पनपता रहता है लेकिन या तो इसके लक्षण जल्दी पता नहीं चलते या वे इसके लक्षणों को सामान्य मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं.

हाइपरथायरायडिज्म होने के लक्षण (थायराइड बढ़ना)

वजन घटना
गर्मी न झेल पाना
ठीक से नींद न आना
प्यास लगना
खूब पसीना आना
हाथ कांपना
दिल तेजी से धड़कना
कमजोरी
चिंता और अनिद्रा (नींद न आना)
हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण (थायराइड धीमा होना)

वज़न बढ़ना
थकान, सुस्ती
ठंडेपन का अहसास
धीमी हृदय गति
कब्ज
डिप्रेशन
चाल-ढाल व सोच-विचार में सुस्ती आना
मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी
ड्राइ स्किन
बाल व नाखून का झड़ना या चटखना
कामेच्छा की कमी
उंगलियों में झनझनाहट
मासिक चक्र की गड़बड़ी, इन्फर्टिलिटी के लक्षण आदि.
बहुत रेयर कंडीशन्स में जीवन को खतरे में डालनेवाला दिल का दौरा या कोमा भी हो सकता है.


हमारे शरीर को ठीक से काम करते रहने के लिए निश्चित मात्रा में थायराइड हार्मोन की ज़रूरत होती है. इसलिए पिट्यूटरी ग्रंथि थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम हो जाने पर थायराइड ग्रंथि को स्टीमुलेट करनेवाला हार्मोन बनाने लगती हैं.

इससे शरीर में कई प्रकार की गड़बड़ियां होने लगती हैं. अगर उपचार नहीं किया जाए तो हाइपोथायराइडिज्म के लक्षण उभर के सामने आने लगते

डॉ बी.के.कोमल

9 Healthy ways to lose weight at home 👇⭕ Drink Lemon and Honey Water Every Morning 🍋🍯This potion cleanses the colon, and...
22/11/2020

9 Healthy ways to lose weight at home 👇

⭕ Drink Lemon and Honey Water Every Morning 🍋🍯
This potion cleanses the colon, and flushes out undigested food and other toxins from the body, improving overall digestion, which further helps in weight loss.
⭕Eating more protein 🧀
A high-protein diet can also make you feel more full and reduce your appetite.
⭕Staying hydrated 💦
Drinking water helps boost your metabolism, cleanse your body of waste, and acts as an appetite suppressant.
⭕Brushing teeth between meals or earlier in the evening 🦷
If you brush or use mouthwash after eating, you are less tempted to grab an unnecessary snack.
⭕Keeping healthful snacks at home and in the office. 🍎
Keeping healthy snacks at home and work can help a person meet their nutritional needs and avoid excess sugar and salt.
⭕Heavy in the Morning, Light Meal in the Evening 🍽️
Eating a big breakfast than a large dinner keeps the body fit and healthy as the routine may help in burning calories. This will further prevent obesity and high blood sugar.
⭕Eat Fruit, Not Drink It 🍏🍐
Fruit juices are often considered healthy because it’s natural but it’s important to note that it’s not a low-calorie beverage.
⭕Use Smaller Plates 🍽️
Using smaller plates reduces how much food you eat while giving you the perception of having eaten more
⭕Eat Slowly 😋
Chewing more slowly may help you eat fewer calories and increase the production of hormones that are linked to weight loss.

The healthiest way to lose weight is to adopt good habits and be

06/11/2020

Nature’s Finest Medicine : Wheat Grass - Health Booster

Rich in Iron, Calcium, Enzymes, Magnesium, Phytonutrients, 17 amino acids, Vitamins A, C, E, K, and B complex, Chlorophyll, Proteins etc.

• Wheatgrass has antioxidant, antibacterial, and anti-inflammatory properties.
• It can help eliminating impurities and stored toxins from the body
• It can boost metabolism and help in digestion , also help relieving constipation, irritable bowel syndrome, and other digestive issues.(gas, bloating etc..)
• It enhaces the function of Immune system
• It can lower the cholesterol level
• It can help in maintaining the blodd pressure
• It may improve overall mental function and relieve anxiety
• Anti inflammatory properties may help in the symptoms of arthiritis like stiffness, pain and swelling
• Can help in improve the blood sugar levels in people with diabetes
• It restores fertility and balances the hormones.
• It improves eyesight.
• It can prevent tooth decay.

https://chat.whatsapp.com/E3rSfcZjbggIfjndMcXiaP*आयुर्वेद केरलीय  पंचकर्म चिकित्सा कोर्स*  *कोर्स स्टार्ट - 27 ,10,2020*...
21/10/2020

https://chat.whatsapp.com/E3rSfcZjbggIfjndMcXiaP

*आयुर्वेद केरलीय पंचकर्म चिकित्सा कोर्स*

*कोर्स स्टार्ट - 27 ,10,2020*

*कोर्स फ़ीस - 1200 रु*

*कोर्स समय 10 दिन*

☀️ *पंचकर्म कोर्स के फायदे* ☀️
1️⃣ पंचकर्म आयुर्वेद की एक सबसे लोकप्रिय चिकित्सा पद्धति है।
पंचकर्म चिकित्सा से अनेक रोग को ठीक किया जाता है।
2️⃣ पंचकर्म चिकित्सा कोईभी सिख सकता है। और घर बैठे इस ट्रीटमेंट को खुद कर सकता है।
3️⃣ सभी हिलर्स,अक्युपंक्चरिष्ट, नॅच्युरोपॅथी प्रैक्टीशनर, थेरापिष्ट के लिए यह एक बेहतरीन चिकित्सा पद्धत हो सकती है। जिसके चलते हजारो रूपए कमा सकते है। और पेशंट को एक अच्छी सेवा प्रदान कर सकता है।
4️⃣ सभी मानसिक रोग, ब्रेन संबंधी रोग, सिरदर्द, मायग्रेन, सभी जॉइंट्स के दर्द जैसे कमर दर्द,सायटिका दर्द,घुटने का दर्द,गर्दन का दर्द,हार्ट और लंग्ज के रोग, बालो की समस्या, नाक की समस्या,सायनस, बॉडी मसल्स, स्किन की समस्या, डायजेशन की समस्या आदि रोग को में मन चाहे रिझल्ट पा सकते है।
5️⃣ यह कोर्स प्रैक्टिकल और थेरोटिकल वीडियो के माध्यमसे होने वाला है जिससे व्यक्ति खुद के समय के अनुसार सिख सकता है और उन सभी वीडियो को लाइफटाइम कभी देख कर लाभ ले सकता है।

☀️ *कोर्स कंटेंट* ☀️
👉 *डे 1 to 3*
1 अभ्यंग
2 धारा और प्रकार

रोग और प्रकार के अनुसार

👉 *डे 4*
नस्य
रोगों के अनुसार
शिरो लेप

👉 *डे 5*
वमन
विरेचन

👉 *डे 6 to 9*
स्नेहबस्ती
शिरोबस्ती
जानू
ग्रीवा
हृदय
कटी

👉 *डे 10*
स्नेहन
स्वेदन

👉 *कोर्स* - ऑनलाइन *(🪀 वाट्सऍप पे थेरी और प्रैक्टिकल वीडियो द्वारा होगा।

👉 *कोर्स कंन्टेंट* हर दिन ppt नोट्स, एक ऑडियो , एक वीडियो मिलेगी और यह कोर्स हिंदी भाषा में होगा।

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21/06/2020

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