Dr Utkarsh verma-UV Hospital

Dr Utkarsh verma-UV Hospital Dr. Utkarsh Verma
MBBS (Kolkata), MS (Orthopaedics) – Gold Medalist (University Topper)
Fellowship in Arthroplasty & Arthroscopy.

Registration No.: BR 54947 (2022)

24/02/2026

(घुटना प्रत्यारोपण(Total Knee Replacement) के 100 केस पूरे)

आज हमारे अस्पताल में टीकेआर (घुटना प्रत्यारोपण) के 100 सफल केस पूरे हो गए।
इस उपलब्धि का 100वां केस श्री बिपिन प्रसाद गुप्ता, आयु 52 वर्ष, का रहा।

श्री गुप्ता जी लंबे समय से दोनों घुटनों के गंभीर दर्द से पीड़ित थे, जिसके कारण उन्हें दैनिक क्रियाकलाप करने में भी काफी कठिनाई हो रही थी। उन्होंने पहले 3–4 अन्य अस्पतालों में परामर्श लिया, जहाँ उन्हें घुटना प्रत्यारोपण की सलाह दी गई। लेकिन यह एक बड़ी सर्जरी होने के कारण वे दुविधा में थे कि सर्जरी कहाँ और किससे करवाई जाए।

इसी दौरान उन्हें हमारे अस्पताल के एक अन्य मरीज श्री प्लेट महतो के बारे में जानकारी मिली, जिनका हमारे यहाँ सफल घुटना प्रत्यारोपण हुआ था। उनसे मुलाकात और अनुभव जानने के बाद श्री गुप्ता जी ने अपने उपचार के लिए हमारे अस्पताल पर विश्वास किया।

उनके एक घुटने का प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया जा चुका है और दूसरे घुटने की सर्जरी एक महीने बाद की जाएगी।

संदेश:
आज हमारे अस्पताल में 100 घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी का पूरा होना हमारे मरीजों के विश्वास का प्रमाण है। इसी विश्वास के कारण अब हमारे अस्पताल में घुटना प्रत्यारोपण एवं हिप रिप्लेसमेंट के लिए बगहा, रामनगर, मोतिहारी, चकिया, बेतिया के साथ-साथ नेपाल से भी मरीज इलाज कराने आते हैं।

सर्जन परिचय:
डॉ. उत्कर्ष वर्मा
एमबीबीएस, एमएस (अस्थि रोग विशेषज्ञ)
स्वर्ण पदक प्राप्त (विश्वविद्यालय टॉपर)
अर्थ्रोप्लास्टी एवं अर्थ्रोस्कोपी में फेलोशिप
इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर से फेलोशिप

(दुर्घटना के बाद 4–5 टुकड़ों में टूटकर पैर से बाहर निकली हड्डी का सफल उपचार)नंदपुर ढाले के पास के निवासी दिनेश साहनी एक ...
02/02/2026

(दुर्घटना के बाद 4–5 टुकड़ों में टूटकर पैर से बाहर निकली हड्डी का सफल उपचार)

नंदपुर ढाले के पास के निवासी दिनेश साहनी एक गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद रात लगभग 11 बजे हमारे अस्पताल लाए गए।
दुर्घटना में उनके पैर की हड्डी 4–5 टुकड़ों में टूटकर बाहर निकल आई थी। साथ ही सिर में भी गंभीर चोट थी।
मरीज की स्थिति अत्यंत नाजुक थी — BP 80/40 और SpO₂ 72%।
तुरंत प्राथमिक उपचार, तरल पदार्थ और आवश्यक दवाओं के बाद मरीज की स्थिति को स्थिर किया गया।
परिजनों द्वारा हड्डी के सभी टूटे हुए टुकड़े साथ लाए गए, जिससे उपचार में सहायता मिली।
इसके बाद External Fixator (Ex-Fix) की मदद से सभी हड्डियों के टुकड़ों को सही स्थिति में लाकर स्थिर किया गया।
समय पर इलाज और सही सर्जिकल तकनीक से संक्रमण का खतरा कम हुआ और अंग को बचाया जा सका।
महत्वपूर्ण संदेश
👉 चाहे हड्डी कितने भी टुकड़ों में क्यों न टूटे, सभी हड्डियों के टुकड़ों को साथ लेकर आएँ।
👉 दुर्घटना और उपचार के बीच का समय जितना कम होगा, संक्रमण का खतरा उतना ही कम रहेगा।
डॉ. उत्कर्ष वर्मा
MBBS, MS (Orthopaedics)
Gold Medalist (University Topper)
Fellowship in Arthroplasty & Arthroscopy
Ex-Consultant: Indian Spinal Injury Center, New Delhi
Reg. No. BR 54947

31/01/2026
यू.वी. हॉस्पिटल में उपलब्ध सर्जरी सेवाएँ• सभी प्रकार की हड्डी व जोड़ की सर्जरी• दुर्घटना एवं फ्रैक्चर की सर्जरी• जटिल एव...
31/01/2026

यू.वी. हॉस्पिटल में उपलब्ध सर्जरी सेवाएँ
• सभी प्रकार की हड्डी व जोड़ की सर्जरी
• दुर्घटना एवं फ्रैक्चर की सर्जरी
• जटिल एवं पुराने फ्रैक्चर की सर्जरी
• घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण सर्जरी (Knee / Hip Replacement)
• आर्थ्रोस्कोपी द्वारा घुटने की सर्जरी
• नस दबने व नस की चोट (Nerve Injury) की सर्जरी
• रीढ़ की हड्डी से संबंधित सर्जरी
• बच्चों व बुजुर्गों की हड्डी संबंधी सर्जरी
• आपातकालीन ऑर्थोपेडिक सर्जरी 24×7

31/01/2026

मरीज का नाम: मंटू तालुकदार
पता: ब्रिंची 3 नंबर
मरीज को बाइक एक्सीडेंट में घुटने की हड्डी (Knee fracture) में गंभीर चोट लगी थी।
हड्डी टूटने के लगभग 15 दिन बाद मरीज हमारे पास आया।
इन पूरे 15 दिनों तक मरीज का ऑपरेशन नहीं हो पाया, केवल दो मुख्य कारणों से:
हार्ट की ECHO रिपोर्ट abnormal होना
आर्थिक समस्या (पैसों की दिक्कत)
इन दोनों कारणों से मरीज बहुत ज्यादा परेशानी में था।
इसी दौरान मरीज को हमारे अस्पताल के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद वह हमारे पास आया।
इसके बाद हमने इस जटिल केस को स्वीकार किया।
पूरी pre-operative तैयारी, cardiac clearance, और सावधानीपूर्वक planning के बाद मरीज का सफल ऑपरेशन किया गया।
ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और मरीज अब धीरे-धीरे रिकवरी की ओर बढ़ रहा है।
फिलहाल मरीज की स्थिति स्थिर (stable) है और rehabilitation जारी है।
यह केस इस बात का उदाहरण है कि
सही समय पर सही अस्पताल और सही इलाज मिलने से मरीज को नया जीवन मिल सकता है।

नेपाल से आए मरीज में AVN Hip के लिए सफल THR (दोनों कूल्हों का प्रत्यारोपण)हमारे यहाँ 35 वर्षीय एक मरीज आए, जिनके दोनों क...
31/01/2026

नेपाल से आए मरीज में AVN Hip के लिए सफल THR (दोनों कूल्हों का प्रत्यारोपण)

हमारे यहाँ 35 वर्षीय एक मरीज आए, जिनके दोनों कूल्हों (Hip) में AVN (Avascular Necrosis) की गंभीर समस्या थी। बीमारी इस स्तर तक बढ़ चुकी थी कि उन्हें चलने, बैठने और पालथी मारकर बैठने में भी काफी कठिनाई हो रही थी और उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो चुका था।
जांच एवं आवश्यक परीक्षणों के बाद मरीज को THR (Total Hip Replacement) ऑपरेशन की सलाह दी गई। हमारे अस्पताल की जानकारी मिलने पर मरीज नेपाल से यहाँ आए और दोनों कूल्हों का ऑपरेशन करवाने का निर्णय लिया।
THR ऑपरेशन में खराब हो चुकी कूल्हे की हड्डी को पूरी तरह निकालकर उसकी जगह नई कृत्रिम हड्डी (Implant) लगाई जाती है, ठीक उसी प्रकार जैसे घुटने के प्रत्यारोपण (Knee Replacement) में किया जाता है। यह एक बड़ी और जटिल सर्जरी मानी जाती है, जिसमें अनुभव और सही तकनीक का विशेष महत्व होता है।
हमारे अस्पताल में यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया है और मरीज अब तेजी से रिकवरी की ओर बढ़ रहा है।
हमारे यहाँ लगातार अच्छे परिणाम मिलने के कारण अब बड़ी संख्या में मरीज घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण (Knee & Hip Replacement) के लिए हमारे अस्पताल आ रहे हैं।
डॉ. उत्कर्ष वर्मा
MBBS, MS (Orthopaedics)
Gold Medalist (University Topper)
Fellowship in Arthroplasty & Arthroscopy
Ex-Consultant: Indian Spinal Injury Center (New Delhi)
Medical Registration No.: BR 54947

(दबी हुई नस के साथ हड्डी का फ्रैक्चर – सफल सर्जिकल उपचार)45 वर्षीय एक पुरुष मरीज हमारे पास आए, जिनके बाएँ हाथ की हड्डी म...
31/01/2026

(दबी हुई नस के साथ हड्डी का फ्रैक्चर – सफल सर्जिकल उपचार)

45 वर्षीय एक पुरुष मरीज हमारे पास आए, जिनके बाएँ हाथ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया था। फ्रैक्चर के साथ-साथ मरीज में हाथ की नस दबने (Nerve Palsy) की समस्या भी पाई गई।

इस स्थिति में मरीज को

1)कलाई उठाने में कठिनाई
2)उंगलियाँ सीधी न हो पाना
3)हाथ में कमजोरी
जैसी शिकायतें थीं।

मरीज की पूरी जांच, आवश्यक X-ray एवं अन्य परीक्षणों के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया।
सर्जरी के दौरान दबी हुई नस को स्पष्ट रूप से पहचाना गया, सावधानीपूर्वक सुरक्षित किया गया तथा उसी की वास्तविक (Intra-operative) फोटो भी ली गई, जिससे नस की स्थिति स्पष्ट होती है।
हड्डी के फ्रैक्चर को सही एलाइनमेंट में फिक्स किया गया और नस पर पड़े दबाव को सफलतापूर्वक हटाया गया।
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ तथा नस की रिकवरी के अच्छे संकेत मिलने लगे।

यह केस दर्शाता है कि समय पर सही सर्जिकल तकनीक एवं नस की पहचान व सुरक्षा से हड्डी के फ्रैक्चर के साथ नस की समस्या का सफल इलाज संभव है।

डॉ. उत्कर्ष वर्मा
MBBS, MS (Orthopaedics)
Gold Medalist (University Topper)
Fellowship in Arthroplasty & Arthroscopy
Ex-Consultant: Indian Spinal Injury Center, New Delhi
Reg. No. BR 54947

31/01/2026

(स्पाइनल इंजरी के बाद पूर्ण लकवे से सुधार की ओर – एक सफल उपचार)

मरीज धुरेंद्र कुमार, निवासी ग्राम मसाही, नरकटियागंज, को गंभीर स्पाइनल इंजरी के बाद पूर्ण लकवा (Complete Paralysis) हो गया था।
चोट के बाद मरीज चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गए थे, मोबाइल पकड़ने में भी अक्षम थे और बिस्तर से उठ नहीं पाते थे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि मरीज पूरी तरह बेड साइड हो चुके थे।
इसी अवस्था में मरीज हमारे पास इलाज के लिए आए।
**** इलाज शुरू होने के मात्र 1 माह के भीतर मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
दोनों पैरों में ताकत आने लगी
शरीर के घाव भरने लगे
मरीज अब अपने पैरों पर खड़े हो पा रहे हैं
सहारे से चल भी रहे हैं
जो मरीज कभी पूरी तरह लकवाग्रस्त थे, आज वे फिर से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
हमें पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में मरीज और बेहतर होंगे तथा अपने वृद्ध पिता की हिम्मत और परिवार का सहारा बनेंगे।
डॉ. उत्कर्ष वर्मा
MBBS, MS (ऑर्थोपेडिक्स)
Gold Medalist (University Topper)
Fellowship in Arthroplasty & Arthroscopy
Ex-Consultant: Indian Spinal Injury Center, New Delhi
Ex-Consultant: Fatima Hospital, Gorakhpur
Ex-Consultant: Rachit Hospital, Gorakhpur
Registration No.: BR 54947 (2022)

19/01/2026

मरीज़ का नाम: सुधर्शन कुमार
उम्र: 25 वर्ष
बाइक दुर्घटना में मरीज़ के घुटने के पास की हड्डी गंभीर रूप से टूट गई थी तथा हाथ में भी फ्रैक्चर था। यह एक मेजर सर्जरी थी, इसके बावजूद ऑपरेशन के बाद मात्र 8 घंटे के भीतर मरीज़ चलने लगा।
यदि ऑपरेशन सही तकनीक, सटीक योजना और आधुनिक सर्जिकल पद्धति से किया जाए, तो मरीज़ ऑपरेशन के बाद अपेक्षाकृत बहुत जल्दी सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है।
डॉ. उत्कर्ष वर्मा
MBBS (कोलकाता), MS (ऑर्थोपेडिक्स), गोल्ड मेडलिस्ट,
Senior Resident – GMCH Bettiah,
Fellowship in Arthroscopy & Arthroplasty – KIMS–Sunshine Hospital, Hyderabad,
Fellowship – Indian Spinal Injury Center, New Delhi
Registration No.: BR 54947
Ex-Consultant – Fatima Hospital, Gorakhpur | Ex-Consultant – Rachit Hospital, Gorakhpur

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Krishi Market Near Nandpur Dhala
Narkatiaganj
845455

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